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ऊर्जा मंत्री की जनसभा में बिजली गुल, अधिकारियों पर गिरी गाज

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मऊ में ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा की जनसभा के दौरान बिजली गुल होने का खामियाजा बिजली विभाग के अधिकारियों को भुगतना पड़ा। घटना के तुरंत बाद मऊ के उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता को निलंबित कर दिया गया, जबकि अधिशासी अभियंता को आरोप पत्र जारी हुआ और अधीक्षण अभियंता से जवाब मांगा गया है।

बुधवार शाम छह बजे मंत्री शर्मा हनुमान घाट मोहल्ले के हरिकेशपुरा टीसीआई मोड़ पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे, तभी अचानक बिजली चली गई। इस पर मंत्री ने वहीं मौजूद मुख्य अभियंता विद्युत वितरण मंडल से सख्त नाराजगी जताई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य अभियंता ने तत्काल कार्रवाई की। उपखंड अधिकारी प्रकाश सिंह और अवर अभियंता ओपी कुशवाहा को निलंबित कर दिया गया। अधिशासी अभियंता भुवनराज सिंह को आरोप पत्र सौंपा गया, जबकि अधीक्षण अभियंता संजीव विश्वास से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मुख्य अभियंता के अनुसार, बिजली आपूर्ति ट्रिपिंग के कारण बाधित हुई थी।

लोकसभा अध्यक्ष ने दी गरिमा बनाए रखने की हिदायत, राहुल गांधी बोले- मैंने तो कुछ बोला ही नहीं!

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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सख्त हिदायत दी, जिसमें उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने और नियमों का पालन करने की बात कही। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि अध्यक्ष ने यह टिप्पणी किस संदर्भ में की। इस पर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने तो कुछ भी नहीं बोला, मैं तो चुपचाप बैठा था। विपक्ष को बोलने ही नहीं दिया जाता।”

लोकसभा अध्यक्ष ने क्यों दी नसीहत?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में कहा,

“सांसदों से अपेक्षा की जाती है कि वे उच्च मानकों और गरिमा को बनाए रखें। मेरे संज्ञान में कई मामले आए हैं, जहां सदस्यों का आचरण सदन के मानकों के अनुरूप नहीं रहा।”

उन्होंने विपक्ष के नेता को नियम 349 का हवाला देते हुए कहा कि पिता-पुत्री, माता-पुत्र, पति-पत्नी इस सदन के सदस्य रहे हैं, इसलिए विपक्ष के नेता को सदन के नियमों का पालन करना चाहिए और आचरण में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। इसके बाद बाहर आए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा,

“एक परंपरा है कि विपक्ष के नेता को बोलने दिया जाता है। लेकिन मैं जब भी खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता। मुझे नहीं पता कि सदन किस तरह चल रहा है। हम जो कहना चाहते हैं, उसे कहने नहीं दिया जाता।”

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कुंभ मेले के बारे में बात की थी, जिसमें वे अपनी बात जोड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। वे बेरोजगारी पर भी बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया।

राहुल गांधी का आरोप – ‘लोकसभा अलोकतांत्रिक तरीके से चल रही है’

राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है और लोकसभा को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि

“लोकसभा अध्यक्ष ने मेरे बारे में टिप्पणी की, लेकिन मुझे जवाब देने का मौका दिए बिना सदन स्थगित कर दिया। पिछले सप्ताह भी मुझे बोलने नहीं दिया गया था।”

सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात

कांग्रेस के करीब 70 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान गौरव गोगोई, केसी वेणुगोपाल और मणिकम टैगोर सहित कई नेताओं ने राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलने का मुद्दा उठाया।

भड़की करणी सेना, बुलडोजर लेकर सपा सांसद के घर पर किया हमला

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आगरा। राज्यसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा राणा सांगा पर दिए गए बयान से आक्रोशित करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने बुधवार दोपहर जमकर बवाल किया। बुलडोजर लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने सांसद के आवास पर जबरन घुसकर तोड़फोड़ की। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ उग्र हो गई और आवास के पास खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए, कुर्सियां फेंक दीं और घर के अंदर भी तोड़फोड़ की।

बुलडोजर लेकर निकले कार्यकर्ता

करणी सेना के सदस्य बुलडोजर पर सवार होकर एत्मादपुर के कुबेरपुर से रामजीलाल सुमन के आवास की ओर निकले। जैसे ही वे आगरा-दिल्ली हाईवे पर पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी बेरोकटोक आगे बढ़ते रहे। पुलिसकर्मियों की संख्या कम होने के कारण उन्हें रोकने में असफलता मिली।

स्थिति को संभालने के लिए कई स्थानों पर बैरियर लगाए गए, लेकिन गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, लेकिन तब तक करणी सेना के कार्यकर्ता आवास में घुसकर तोड़फोड़ कर चुके थे।

कई दिनों से हो रहा था विरोध

रामजीलाल सुमन ने हाल ही में राज्यसभा में राणा सांगा पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद करणी सेना ने विरोध शुरू कर दिया था। बुधवार को आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सीधे सांसद के घर पर हमला बोल दिया। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और हालात को काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। फिलहाल पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

ब्रेस्ट पकड़ना रेप नहीं…सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 11 साल की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की कोशिश के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि “नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है।” सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को असंवेदनशील करार देते हुए इसे गलत कानूनी व्याख्या बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे, ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। जजों ने कहा,
“हमें यह देखकर दुख हो रहा है कि इस तरह के गंभीर मामलों में फैसला देने वाले जजों में संवेदनशीलता की कमी है। यह सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से भी जुड़ा विषय है।”

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए खुद ही हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि,
“कुछ फैसले ऐसे होते हैं जिन पर तुरंत रोक लगाना जरूरी होता है। इस फैसले के कई पैराग्राफ में जिस तरह की बातें लिखी गई हैं, उनसे समाज में गलत संदेश गया है।”

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह के मामलों की सुनवाई में असंवेदनशील दृष्टिकोण रखने वाले जजों को शामिल न किया जाए।

चार महीने बाद आया था फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि यह फैसला तुरंत नहीं लिया गया था, बल्कि इसे सुरक्षित रखने के चार महीने बाद सुनाया गया। जजों ने कहा कि इसका मतलब है कि हाई कोर्ट ने सोच-समझकर यह निष्कर्ष निकाला था, जो कि पूरी तरह गलत कानूनी व्याख्या पर आधारित था।

क्या कहा था हाई कोर्ट ने?

17 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि
“पीड़िता को खींचकर पुलिया के नीचे ले जाना, उसके ब्रेस्ट को पकड़ना और पायजामे की डोरी तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है। यह महिला की गरिमा पर आघात का मामला तो हो सकता है, लेकिन इसे रेप या रेप की कोशिश नहीं कहा जा सकता।”

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 11 साल की नाबालिग लड़की से जुड़ा हुआ है, जिसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की गई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसे खींचकर पुलिया के नीचे ले जाकर उसके कपड़े फाड़ने और उसे जबरन पकड़ने की कोशिश की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए मामले की आगे की सुनवाई के लिए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पेड़ों की हत्या से भी बदतर है अवैध कटाई, सुप्रीम कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

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पेड़ सिर्फ लकड़ी के टुकड़े नहीं होते, वे सांस लेते हैं, हमें जिंदगी देते हैं और हमारी धरती को जिंदा रखते हैं। उनकी शाखाओं में चिड़ियों का बसेरा होता है, उनकी छांव में नदियों की शीतलता होती है, और उनकी जड़ों में धरती की आत्मा बसती है। लेकिन जब कोई लालच के नाम पर इन्हें काट डालता है, तो यह सिर्फ पर्यावरण का नुकसान नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के खिलाफ एक अपराध होता है।

अब एक ऐसे ही मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रूप से 454 पेड़ों की कटाई करने वाले व्यक्ति पर प्रति पेड़ 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना इंसान की हत्या से भी बदतर है।”

100 साल में भी नहीं होगा भरपाई

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने इस केस में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इन 454 पेड़ों से बने हरे-भरे क्षेत्र को दोबारा उसी रूप में तैयार करने में कम से कम 100 साल लगेंगे। यानी, यह सिर्फ कुछ पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि एक सदी के पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ने वाला कृत्य है।

सीईसी की सिफारिश और अदालत का सख्त फैसला

यह मामला मथुरा-वृंदावन स्थित डालमिया फार्म से जुड़ा है, जहां शिव शंकर अग्रवाल नामक व्यक्ति ने बिना अनुमति के 454 पेड़ों की कटाई कर दी थी। इस पर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने सुप्रीम कोर्ट को सिफारिश की थी कि प्रति पेड़ 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अग्रवाल की ओर से दलील दी कि उन्होंने अपनी गलती मान ली है और जुर्माना कम किया जाए। मगर अदालत ने इसे ठुकरा दिया और कहा कि पर्यावरण मामलों में कोई दया नहीं होनी चाहिए।

पेड़ लगाना होगा, तभी मिलेगी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अग्रवाल को आसपास के क्षेत्र में पौधारोपण करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनके खिलाफ दायर अवमानना याचिका का निपटारा तब तक नहीं होगा, जब तक वे इस आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करते।

2019 का फैसला लिया वापस

इस मामले में एक और अहम फैसला हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में पारित अपने आदेश को वापस ले लिया, जिसमें ताज ट्रेपेजियम जोन के भीतर गैर-वन और निजी भूमि पर पेड़ काटने के लिए पूर्व अनुमति लेने की बाध्यता हटा दी गई थी। अब फिर से किसी भी पेड़ को काटने के लिए पहले अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।

सबक जो हम सबको सीखना चाहिए

पेड़ों की कटाई केवल कागजों पर दर्ज एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है। जो छांव हमें शांति देती है, जो हवा हमारी सांसों में जीवन भरती है, उसे लालच के नाम पर नष्ट नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक कड़ा संदेश है— “पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा!”

1 मई 2025 से महंगा होगा एटीएम से कैश निकालना, बढ़ सकते हैं ट्रांजेक्शन चार्ज

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नई दिल्ली : एटीएम से कैश निकालने की आदत रखने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। 1 मई 2025 से एटीएम से पैसे निकालने पर लगने वाला शुल्क बढ़ सकता है। मौजूदा समय में ग्राहकों को एक तय लिमिट तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कैश निकालने की सुविधा मिलती है, लेकिन इस लिमिट के बाद बैंक प्रति ट्रांजेक्शन शुल्क वसूलते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब यह शुल्क बढ़ाया जा सकता है, जिससे एटीएम से कैश निकालना और महंगा हो जाएगा।

क्यों बढ़ रहे हैं एटीएम चार्ज?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मिलकर लिया है। शुल्क बढ़ाने का मुख्य कारण एटीएम ऑपरेशन कॉस्ट में आई बढ़ोतरी बताई जा रही है।

कितना बढ़ेगा एटीएम से कैश निकालने पर शुल्क?

फिलहाल, जब ग्राहक अपनी फ्री लिमिट पार कर लेते हैं, तो उन्हें प्रति ट्रांजेक्शन 17 रुपये का शुल्क देना पड़ता है। 1 मई 2025 से इसे बढ़ाकर 19 रुपये किया जा सकता है।
इसके अलावा, गैर-वित्तीय ट्रांजेक्शन जैसे मिनी स्टेटमेंट देखने, बैलेंस चेक करने आदि पर अभी 6 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का शुल्क लगता है, जिसे बढ़ाकर 7 रुपये किया जा सकता है।

कितनी बार कर सकते हैं फ्री ट्रांजेक्शन?

RBI के नियमों के अनुसार, ग्राहक एक तय सीमा तक ही मुफ्त एटीएम ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।

  • मेट्रो शहरों (मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु) में हर महीने 3 फ्री ट्रांजेक्शन की अनुमति होती है।

  • गैर-मेट्रो शहरों में ग्राहक 5 फ्री ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।

ATM इंटरचेंज फीस क्या होती है?

एटीएम इंटरचेंज फीस वह शुल्क होता है जो एक बैंक, दूसरे बैंक को उसके ग्राहक द्वारा एटीएम इस्तेमाल करने पर देता है। जब ग्राहक अपनी फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट पार कर लेते हैं, तो बैंक यह इंटरचेंज फीस ग्राहकों से शुल्क के रूप में वसूलते हैं।

बढ़ते शुल्क से ग्राहकों पर असर

इस नए बदलाव के लागू होने के बाद एटीएम से बार-बार कैश निकालना महंगा पड़ेगा। ऐसे में ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट और यूपीआई जैसे विकल्पों का ज्यादा उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, अभी इस बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावना है कि मई 2025 से नए शुल्क लागू हो जाएंगे।

छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के घर CBI की छापेमारी, इन मामलों की हो रही जांच

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के रायपुर और भिलाई स्थित आवासों पर बुधवार सुबह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने छापेमारी की। सीबीआई की यह कार्रवाई शराब घोटाले और महादेव सट्टा मामले से जुड़ी बताई जा रही है। जांच के दौरान उनके घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

ईडी के बाद अब सीबीआई की जांच

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी भूपेश बघेल के घर पर छापा मारा था। 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ जांच जारी है। ईडी की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था, और आज भी संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

महादेव सट्टा मामले में दबिश, कई अधिकारियों के घर भी छापे

सीबीआई ने सिर्फ भूपेश बघेल ही नहीं, बल्कि कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की है। भिलाई के पदुम नगर और सेक्टर-9 स्थित आवासों पर पुलिस अधिकारी डॉ. आनंद छाबड़ा, दुर्ग के पूर्व एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव, और पूर्व एएसपी संजय ध्रुव के घरों पर भी दबिश दी गई है।

क्या हैं आरोप?

सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों के महादेव सट्टा मामले से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। इसमें भारी मात्रा में कैश लेनदेन की बात सामने आई थी। आरोप है कि दुर्ग के पूर्व एसपी अभिषेक पल्लव को प्रतिमाह 10 लाख रुपये और एक अन्य एसपी को हर महीने 75 लाख रुपये दिए जाते थे।

जांच जारी, सियासी हलचल तेज

सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि भाजपा ने जांच को भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम करार दिया है। फिलहाल, सीबीआई की टीम पूरे मामले की छानबीन कर रही है और आगे की कार्रवाई तय करेगी।

भिड़े भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री, हाथापाई का वीडियो वायरल

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आगरा। लोकतंत्र सेनानी चिरंजीलाल की अंतिम यात्रा के दौरान मंगलवार को एक अप्रत्याशित घटना देखने को मिली। भाजपा विधायक डॉ. जीएस धर्मेश और पूर्व राज्य मंत्री डॉ. रामबाबू हरित के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मंगलवार सुबह अर्जुन नगर से चिरंजीलाल की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी। इसी दौरान, विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने पूर्व मंत्री डॉ. रामबाबू हरित से रास्ते से हटने को कहा। यह बात पूर्व मंत्री को नागवार गुजरी और दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई होने लगी।

गनर और अन्य लोगों ने किया बीच-बचाव
स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद गनर और अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया और दोनों को अलग किया। इसके बाद विधायक के समर्थक शाहगंज थाने पहुंच गए। हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा के दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक स्थान पर हुए इस टकराव ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर कर दिया है।

दिल्ली बजट 2025: पहली बार 1 लाख करोड़ का बजट, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

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दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा में अपनी सरकार का पहला बजट पेश किया। इस ऐतिहासिक बजट में महिला समृद्धि योजना से लेकर आयुष्मान योजना तक कई अहम योजनाओं के लिए धन आवंटित किया गया। बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री ने यमुना को नमन किया और सदन में “मोदी-मोदी” के नारे गूंज उठे। उन्होंने अपने भाषण में दावा किया कि पिछली सरकारों ने दिल्ली को विकास के हर पैमाने पर पीछे धकेल दिया था, लेकिन अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि असली काम होगा।

1 लाख करोड़ का बजट: दिल्ली को मिलेगी नई दिशा

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि उनकी सरकार पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश कर रही है, जिसे पूरा देश देखना चाहता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की लापरवाह नीतियों के कारण दिल्ली का बजट 2023-24 में 77,800 करोड़ रुपये था, लेकिन 2024-25 में यह 2,800 करोड़ रुपये घटकर 76,000 करोड़ रह गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब दिल्ली की पहचान सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस विकास कार्यों से होगी।

1000 करोड़ रुपये से बदलेगी दिल्ली की सूरत

दिल्ली के ढांचागत विकास को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने 1000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं शहरी विकास मंत्रालय के सहयोग से दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जाएगा।

दिल्ली में बनेंगे एक्सप्रेसवे

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा, “दिल्ली के मालिक बीच-बीच में आकर कुछ बोलकर गायब हो जाते हैं।” उन्होंने ऐलान किया कि दिल्ली अब ट्रैफिक जाम से मुक्त होगी। सरकार नई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के साथ स्मार्ट निगरानी सिस्टम लागू करेगी, जिससे ट्रैफिक नियंत्रण आसान होगा।

महिला समृद्धि योजना के लिए 5100 करोड़ रुपये आवंटित

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार ने महिला समृद्धि योजना के तहत 5100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा, मातृत्व योजना के लिए भी 210 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

आयुष्मान योजना को मिला 2000 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों से केंद्र की योजनाओं को रोका नहीं होता, तो दिल्ली में विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होती। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि “आयुष्मान योजना को सिर्फ इसलिए रोका गया, क्योंकि वह उसमें अपना नाम जोड़ना चाहते थे।” अब इस योजना के लिए 2000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अब बातें नहीं, सिर्फ काम होगा – सीएम रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट कहा, “दिल्ली के ढांचागत विकास पर अब सिर्फ बातें नहीं होंगी, बल्कि काम होगा। यही अब दिल्ली की पहचान होगी।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विजन को धन्यवाद देते हुए कहा कि दिल्ली अब पिछड़ेपन से बाहर निकलेगी और “दिल्ली के लोग अब बदलाव महसूस करेंगे।” इस बजट के साथ, रेखा गुप्ता सरकार ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में विकास कार्य अब प्राथमिकता पर होंगे और वादों से ज्यादा हकीकत पर जोर दिया जाएगा।

धामी मंत्रिमंडल का विस्तार नवरात्र में संभव, दिल्ली दौरे से अटकलें तेज

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देहरादून। उत्तराखंड में धामी मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि नवरात्र के शुभ अवसर पर मंत्रिमंडल में नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंगलवार को दिल्ली प्रवास को भी इसी से जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में मंत्रिमंडल के पांच पद खाली हैं, जिन्हें भरा जाना जरूरी माना जा रहा है। इसके साथ ही, मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।

दिल्ली दौरे से सियासी हलचल तेज

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी अपने दिल्ली दौरे के दौरान भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दे सकते हैं। मंगलवार को वह ओडिशा की यात्रा के बाद दोपहर में दिल्ली लौटेंगे और रात्रि विश्राम उत्तराखंड सदन में करेंगे। उनके दिल्ली प्रवास को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में संभावित फेरबदल की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार क्यों जरूरी?

कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में रिक्त पदों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत केवल सात मंत्री कार्यभार संभाल रहे हैं, जिससे कामकाज का दबाव भी बढ़ गया है।

पिछले दौर की चर्चाएं और भाजपा नेतृत्व की भूमिका

हाल ही में मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम समेत कई केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की थी। इस बीच, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी संकेत दिए थे कि मंत्रिमंडल विस्तार तय है और इसके लिए उपयुक्त समय आ चुका है।

नवरात्र में हो सकता है विस्तार?

इससे पहले, होली के मद्देनजर मंत्रिमंडल विस्तार टल गया था, लेकिन अब दोबारा यह मुद्दा चर्चा में है। दिल्ली में मौजूद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इशारा किया है कि नवरात्र में यह विस्तार संभव हो सकता है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि धामी अपने दिल्ली दौरे से किन नामों पर मुहर लगाकर लौटते हैं।