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ऋषिकेश में बड़ा रेल हादसा टला, उज्जैन एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतरे

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ऋषिकेश। योग नगरी रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार रात उज्जैन एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। खांड गांव क्षेत्र में ट्रेन के तीन डिब्बे अचानक पटरी से उतर गए। हादसा रात करीब 9:30 बजे हुआ। राहत की बात यह रही कि उस समय ट्रेन में कोई यात्री सवार नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार ट्रेन में मेंटेनेंस कार्य के दौरान ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि ट्रेन की मूवमेंट और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं।

हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जीआरपी जवानों ने मोर्चा संभाला और लोगों को ट्रैक से हटाया।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हादसे के करीब ढाई घंटे बाद तक रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इसे लेकर लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

रेलवे विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

हरिद्वार को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार

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हरिद्वार। हरिद्वार को बम से उड़ाने की धमकी देकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने डायल 112 पर कॉल कर हरकी पैड़ी समेत कई प्रमुख स्थानों को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान Sohan Singh Rawat के रूप में हुई है, जो पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर थाना क्षेत्र के ग्राम पाटा का रहने वाला है। आरोपी ने 17 मई की रात डायल 112 पर फोन कर अगले चार दिनों के भीतर हरिद्वार में बम विस्फोट करने की धमकी दी थी।

एसएसपी Navneet Singh Bhullar ने बताया कि आरोपी लगातार फोन कर हरकी पैड़ी और अन्य स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दे रहा था। इतना ही नहीं, उसने फोन रिसीव करने वाली महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की और कई वरिष्ठ नेताओं एवं पदाधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।

धमकी भरे फोन कॉल के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल हरकी पैड़ी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच की जिम्मेदारी एसएसआई गोपाल दत्त भट्ट को सौंपी गई।

पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए धमकी देने वाले मोबाइल नंबर को ट्रेस किया और आरोपी को रोडीबेलवाला क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने शराब के नशे में डायल 112 पर झूठी सूचना दी थी।

पुलिस के मुताबिक आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है, लेकिन वह नशे का आदी बताया जा रहा है। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।

महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

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देहरादून: उत्तराखंड महिला कांग्रेस ने महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्रलवजप त्ंनजमसं समेत चार नर्सिंग अभ्यर्थियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस की गढ़वाल मंडल की नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष ।ेीं डंदवतंउं क्वइंतपलंस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

देहरादून स्थित पार्टी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में आशा मनोरमा डोबरियाल ने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला कांग्रेस जरूरत पड़ने पर एसएसपी कार्यालय का घेराव भी करेगी।

इस दौरान उन्होंने संगठन विस्तार को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि महिला कांग्रेस जल्द ही गढ़वाल मंडल के सभी विधानसभा क्षेत्रों में अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। इसके लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है और जल्द ही राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत किया जाएगा।

पत्रकार वार्ता में आशा डोबरियाल ने राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लोग बाघ, भालू, बंदर और जंगली सूअरों के हमलों से परेशान हैं, जिससे किसानों की फसलें और खेती-बाड़ी प्रभावित हो रही है।

उन्होंने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि पर्यटन सीजन के दौरान कई स्थानों पर भारी जाम की स्थिति बनी हुई है और सरकार यात्रा संचालन को सुचारू बनाने में विफल साबित हुई है। महंगाई के मुद्दे पर भी महिला कांग्रेस ने सरकार को घेरा। आशा डोबरियाल ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं और जनता महंगाई से त्रस्त है।

उमर खालिद फैसला : UAPA मामलों में भी जमानत नियम, जेल अपवाद-सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) से जुड़े मामलों में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जमानत को नियम और जेल को अपवाद माना जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को केवल इसलिए लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता क्योंकि उसके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज है।

जस्टिस B. V. Nagarathna और जस्टिस Ujjal Bhuyan की पीठ ने यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देते हुए की। अंद्राबी जून 2020 से नार्को-आतंकवाद से जुड़े एक मामले में जेल में बंद था, जिसकी जांच National Investigation Agency (NIA) कर रही है।

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी आरोपी के त्वरित सुनवाई के अधिकार को केवल यूएपीए जैसे कठोर कानून का हवाला देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामलों से जुड़े ‘गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य’ मामले के फैसले पर भी असहमति जताई। इसी मामले में कार्यकर्ता Umar Khalid और Sharjeel Imam को जमानत देने से इनकार किया गया था, जबकि अन्य कई आरोपियों को राहत मिली थी।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि ‘नजीब मामले’ की व्याख्या बेहद सीमित तरीके से करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि मुकदमे में अत्यधिक देरी हो रही हो और आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हो, तो उसे अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

पीठ ने कहा कि यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी रोक को भी संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। अदालत ने साफ किया कि परिस्थितियों के अनुसार जमानत से इनकार किया जा सकता है, लेकिन सामान्य सिद्धांत यही रहेगा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद।

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई, RCC क्लासेस के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर गिरफ्तार

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महाराष्ट्र । नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC) के संस्थापक Shivraj Raghunath Motegaonkar को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया जा सकता है और जल्द ही दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से पूछताछ के दौरान मोटेगांवकर का नाम सामने आया था। इसके बाद सीबीआई की 28 सदस्यीय टीम जांच के लिए लातूर पहुंची और उनसे कई घंटों तक पूछताछ की। बाद में पुणे में भी उनसे लंबी पूछताछ की गई।

जांच एजेंसियों को मिले शुरुआती इनपुट के अनुसार, आरसीसी क्लासेस के मॉक टेस्ट में पूछे गए कई सवाल NEET-UG की अंतिम परीक्षा में हूबहू मिलने के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि परीक्षा के बाद छात्रों के इंटरव्यू में यह दावा किया गया कि करीब 42 सवाल सीधे मॉक टेस्ट से मैच कर रहे थे। इसी के बाद मामला चर्चा में आया और जांच तेज कर दी गई।

सूत्रों के अनुसार, एक अभिभावक द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद सीबीआई ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। जांच के दौरान मनीषा वाघमारे से पूछताछ में भी मोटेगांवकर का नाम सामने आया। इसके बाद सीबीआई ने आरसीसी क्लासेस के कार्यालय से दस्तावेज, कंप्यूटर और डिजिटल डेटा जब्त कर उनकी जांच शुरू की।

इस बीच पुणे में भी सीबीआई की जांच तेज हो गई है। कई डॉक्टरों और छात्रों को पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय बुलाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीती रात से लगातार कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि मोटेगांवकर से करीब 11 घंटे तक पूछताछ की गई।

सीबीआई अब मामले में जुड़े अन्य लोगों और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि आगे की जांच में पेपर लीक रैकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

केरल में कांग्रेस की सत्ता में वापसी, वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता V. D. Satheesan ने सोमवार को केरल के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राजधानी Thiruvananthapuram के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने उन्हें और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इसके साथ ही Communist Party of India (Marxist) के वरिष्ठ नेता Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली सरकार का दस साल पुराना शासन समाप्त हो गया। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले United Democratic Front (यूडीएफ) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए सत्ता में वापसी की है।

शपथ ग्रहण समारोह में Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और Mallikarjun Kharge समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के नेता भी समारोह में शामिल हुए।

समारोह के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी देखने को मिली। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने राज्य के विकास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर पारदर्शी और जनहितकारी शासन देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

केरल में यूडीएफ की वापसी को कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। पार्टी नेताओं ने इसे जनता के विश्वास और बदलाव की चाह का परिणाम बताया है।

चारधाम यात्रा : 29 दिनों में 55 यात्रियों की मौत से बढ़ी चिंता

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देहरादून : उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद अब तक 15 लाख 63 हजार 672 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले यह संख्या 25 लाख के करीब पहुंच सकती है। हालांकि, यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की मौतों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को Kedarnath Temple और 23 अप्रैल को Badrinath Temple के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। यात्रा शुरू होने के बाद से खासकर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। खराब मौसम, बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बावजूद यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 17 मई तक चारधाम यात्रा मार्गों पर 55 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश मौतें हृदय गति रुकने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण हुई हैं। सबसे अधिक 30 श्रद्धालुओं की मौत केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हुई है। इसके अलावा बदरीनाथ मार्ग पर 10, यमुनोत्री मार्ग पर आठ और गंगोत्री मार्ग पर सात श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। बीते दिन भी केदारनाथ यात्रा मार्ग पर दो श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई।

चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही मौतों की घटनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। इस संबंध में उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री Subodh Uniyal ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले विभिन्न भाषाओं में हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई थी।

स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोग यात्रा पर निकलने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और कठिन यात्रा मार्ग बुजुर्ग तथा बीमार यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं।

गौरतलब है कि चारधाम यात्रा को शुरू हुए अभी केवल एक महीना ही हुआ है, जबकि यात्रा में अभी करीब पांच महीने का समय बाकी है। आने वाले मानसून सीजन में यात्रा मार्ग और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।

चौंदकोट वेलफेयर सोसाइटी की बैठक में गांवों के विकास और संगठन विस्तार पर जोर

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देहरादून। चौंदकोट वेलफेयर सोसाइटी की बैठक शनिवार को स्काई गार्डन, रिंग रोड देहरादून में समिति के अध्यक्ष श्री उम्मेद सिंह गुसाईं की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक का संचालन समिति के महामंत्री कविंद्र इष्टवाल ने किया।

बैठक को संबोधित करते हुए महामंत्री श्री इष्टवाल ने कहा कि समिति को मजबूत और सक्रिय बनाने के लिए बैठकों का आयोजन गांवों में भी किया जाना आवश्यक है। इससे ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे समझने और उनके समाधान की दिशा में कार्य करने में सहायता मिलेगी।

पूरण सिंह गुसाईं ने चौंदकोट गढ़ी के विकास तथा क्षेत्र में ट्रैक निर्माण के प्रयासों पर बल दिया। वहीं सुशील कुमार ने गांवों में नियमित कार्यक्रम आयोजित करने और युवाओं के लिए खेल सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने क्षेत्र में मिनी स्टेडियम निर्माण के लिए प्रयास करने की बात कही।

बीरेन्द्र रावत ने भी चौंदकोट क्षेत्र में स्टेडियम की आवश्यकता पर जोर देते हुए गांवों को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि समिति को राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।

विनोद धस्माना ने क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने तथा उद्यान विभाग के सहयोग से गांवों में फलदार वृक्षारोपण अभियान चलाने का सुझाव दिया। नरेंद्र रावत ने कहा कि समिति के कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देहरादून में रहने वाले कई लोग भी समिति की गतिविधियों से अनभिज्ञ हैं, इसलिए संगठन को सक्रिय रूप से कार्य करना होगा।

विमल रावत ने सदस्यता अभियान चलाकर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। महावीर प्रसाद रावत ने प्रत्येक माह एक नियमित बैठक तथा हर तीन माह में एक बड़ी बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया। बचन सिंह रावत ने अधिक से अधिक लोगों को समिति से जोड़ने की अपील की।

नवीन नैथानी ने पूर्व की भांति चौंदकोट परिवार सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर समिति अध्यक्ष उम्मेद सिंह गुसाईं ने जून माह के प्रथम सप्ताह में चौदकोट परिवार सम्मेलन आयोजित करने का सुझाव दिया। सम्मेलन संचालन समिति की जिम्मेदारी श्री पूरण सिंह गुसाईं को सौंपी गई, जिस पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई।

सम्मेलन की रूपरेखा, स्थान और समय निर्धारण के लिए अगली बैठक 20 मई 2026 को अपराह्न 5 बजे स्काई गार्डन में आयोजित की जाएगी। अध्यक्ष ने सभी पदाधिकारियों और सदस्यों से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्तावित अधिवेशन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने की रूपरेखा तैयार की जा सके।

सिडकुल उद्योगों में श्रमिकों का शोषण : हरक सिंह रावत

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देहरादून: प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजपुर रोड में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने राज्य के सिडकुल क्षेत्रों में श्रमिकों के उत्पीड़न और श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेलाकुई, देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के मौलिक अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

डॉ. रावत ने कहा कि श्रमिक कई बार अपनी मांगों को लेकर सरकार और उद्योग प्रबंधन से वार्ता कर चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों की आवाज सुनने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग कर आंदोलनों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बेगुनाह श्रमिकों पर लाठीचार्ज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाता है।

उन्होंने उद्योगों में महिला श्रमिकों की स्थिति पर भी चिंता जताई। डॉ. रावत ने कहा कि महिला कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और कई फैक्ट्रियों में उनके लिए मूलभूत सुविधाएं, जैसे शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा वेतन में भी महिला श्रमिकों के साथ असमानता बरती जा रही है, जिससे सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खुल रही है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उद्योगों में श्रमिकों से आठ घंटे से अधिक कार्य कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार भुगतान नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए अकुशल श्रमिकों को कम से कम 20 हजार रुपये, अर्धकुशल कर्मचारियों को 23 हजार रुपये, कुशल कर्मचारियों को 25 हजार रुपये और अति कुशल श्रमिकों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाना चाहिए।

डॉ. रावत ने कहा कि बड़ी संख्या में श्रमिकों को बिना कारण बताए नौकरी से निकाला जा रहा है और उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका श्रमिकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है और उन्हें नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, बोनस, महंगाई भत्ता और पेंशन जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग तत्काल उच्च स्तरीय समिति बनाकर फैक्ट्रियों का विशेष निरीक्षण कराए और यह सुनिश्चित करे कि उद्योगों में श्रम कानूनों का पूरी तरह पालन हो। साथ ही श्रमिक संगठनों की मौजूदगी में शिविर लगाकर मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जाए।

डॉ. हरक सिंह रावत ने चेतावनी दी कि यदि उद्योगों में श्रमिकों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो कांग्रेस और इंटक श्रमिकों के समर्थन में बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा और इंटक गढ़वाल मंडल अध्यक्ष राकेश कुमार राजपूत भी मौजूद रहे।

पंच केदार और पशुपतिनाथ: आस्था, तप और मोक्ष की अद्भुत कथा

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महाभारत काल से जुड़ी पंच केदार और पशुपतिनाथ मंदिर की कथा आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, महाभारत का भीषण युद्ध समाप्त होने के बाद पांडव अपने ही कुल, गुरुओं और संबंधियों के वध के कारण गहरे पश्चाताप में थे।

युद्ध जीतने के बावजूद उनके मन को शांति नहीं मिल रही थी। पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडव भगवान श्रीकृष्ण की शरण में पहुंचे। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी।

इसके बाद पांचों पांडव भगवान शिव की खोज में निकल पड़े। कहा जाता है कि भगवान शिव पांडवों से रुष्ट थे और उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे काशी छोड़कर हिमालय की ओर चले गए। पांडव भी कठिन पहाड़ों, बर्फीले रास्तों और घने जंगलों को पार करते हुए केदारखंड पहुंच गए।

यहां भगवान शिव ने स्वयं को छिपाने के लिए बैल का रूप धारण कर पशुओं के झुंड में स्वयं को मिला लिया। लेकिन भीम को आभास हो गया कि यह कोई साधारण बैल नहीं है। भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाड़ों पर पैर फैला दिए ताकि कोई पशु वहां से निकल न सके।

सभी पशु उनके पैरों के नीचे से गुजर गए, लेकिन एक दिव्य बैल वहीं रुक गया। तभी भीम समझ गए कि यही भगवान शिव हैं। जैसे ही उन्होंने बैल को पकड़ने का प्रयास किया, वह धरती में समाने लगा। भीम ने उसकी कूबड़ को मजबूती से पकड़ लिया।

उसी क्षण भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और पांडवों की कठोर तपस्या, श्रद्धा और पश्चाताप से प्रसन्न होकर उन्हें पापों से मुक्ति का आशीर्वाद दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाए तो उनके शरीर के विभिन्न अंग पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें आज पंच केदार के नाम से जाना जाता है।

केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव की कूबड़, तुंगनाथ मंदिर में भुजाएं, रुद्रनाथ मंदिर में मुख, मध्यमहेश्वर मंदिर में मध्य भाग और कल्पेश्वर मंदिर में भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। वहीं मान्यता है कि बैल का सिर नेपाल के काठमांडू में प्रकट हुआ, जहां आज विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि पांडवों ने ही इन सभी मंदिरों की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी।

आज भी हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय यात्रा कर पंच केदार और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से पंच केदार की यात्रा करने वाले भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।