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उत्तराखंड में कोविड-19 को लेकर सरकार ने जारी की एडवाइजरी, निगरानी तंत्र और संसाधनों को सक्रिय रखने के निर्देश

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देशभर में कोविड-19 की स्थिति जहां इस समय नियंत्रण में है, वहीं उत्तराखंड में भी संक्रमण को लेकर हालात पूरी तरह सामान्य हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार किसी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। संभावित जोखिमों से बचाव और सतर्कता के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशानुसार यह विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। इसके तहत सभी जिलों में निगरानी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने, अस्पतालों में आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने तथा संक्रमण से बचाव के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि “राज्य में फिलहाल कोविड को लेकर स्थिति पूरी तरह सामान्य है, लेकिन किसी भी संभावित जोखिम के लिए हमें पूरी तरह तैयार रहना होगा।” इसी क्रम में प्रदेशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं, उपकरणों और मानव संसाधनों को सक्रिय मोड में रखा गया है। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार द्वारा कोविड-19 को लेकर किसी खतरे की स्थिति घोषित नहीं की गई है। न ही कोई नया वेरिएंट सक्रिय रूप से फैल रहा है। संक्रमितों में भी केवल मामूली लक्षण पाए जा रहे हैं और वे सामान्य इलाज से घर पर ही ठीक हो रहे हैं। फिर भी संभावित खतरों से निपटने के लिए राज्य पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

जिलों को दिए गए विशेष निर्देश
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि, ऑक्सीजन, दवा और उपकरण पूरी तरह चालू रखने को कहा स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को यह निर्देशित किया गया है कि अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ऑक्सीजन सप्लाई, जरूरी दवाएं और उपकरण जैसे वेंटिलेटर, BiPAP मशीनें, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और PSA ऑक्सीजन संयंत्र पूरी तरह कार्यशील स्थिति में रहें।

निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाने पर ज़ोर
सचिव ने निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण (ILI), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) और कोविड के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग की जाए। सभी सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थाएं और लैब्स प्रतिदिन IHIP पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करें। ICMR के कोविड-19 परीक्षण दिशा-निर्देशों के अनुसार जांच कराई जाए। SARI और ILI मामलों की संख्या बढ़ाई जाए और सभी SARI मामलों की जांच अनिवार्य रूप से हो।

नए वेरिएंट की समय रहते पहचान
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि कोविड पॉजिटिव सभी सैंपल को WGS (Whole Genome Sequencing) हेतु भेजा जाए ताकि संभावित नए वेरिएंट की समय रहते पहचान हो सके। कोविड प्रबंधन में लगे स्टाफ के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग कराई जाए और राज्य को प्रतिदिन स्थिति की रिपोर्ट भेजी जाए।

सतर्कता और जन सहयोग
स्वास्थ्य सचिव ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें, जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। सतर्कता और सहयोग से ही हम भविष्य में भी कोविड जैसी बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं।

मीडिया समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 से जुड़ी सभी मीडिया समन्वय गतिविधियों के लिए राज्य स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। डाॅ. पंकज कुमार सिंह, सहायक निदेशक (आईडीएसपी-राज्य सर्विलांस अधिकारी) को कोविड-19 मीडिया समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उनकी सहायता के लिए डाॅ. सौरभ सिंह, सहायक निदेशक (आईडीएसपी, एनएचएम), को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस कार्य के लिए दोनों अधिकारियों को किसी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता देय नहीं होगा। विभागीय स्तर पर निर्देशित किया गया है कि उक्त आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

क्या करें और क्या न करें
स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 को लेकर जन-सामान्य में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाने को कहा है। इसके तहत लोगों को ‘Do’s and Don’ts’ यानी क्या करें और क्या न करें के बारे में जानकारी दी जाएगी।

क्या करें (Do’s):
छींकते या खांसते समय रूमाल/टिशू से नाक-मुंह ढकें।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह धोते रहें।
पर्याप्त मात्रा में पानी और पौष्टिक आहार लें।
खांसी-बुखार जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से परामर्श लें।
लक्षण होने पर मास्क पहनें और दूसरों से दूरी रखें।
बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।

क्या न करें (Don’ts):
इस्तेमाल किए गए टिशू या रूमाल का दोबारा उपयोग न करें।
हाथ मिलाने से बचें।
लक्षण वाले लोगों के संपर्क से दूरी रखें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
आंख, नाक और मुंह बार-बार न छुएं।
सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें।

कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसले: पर्यावरण मित्रों को मिलेगी मृतक आश्रित की सुविधा, हाइब्रिड वाहनों को टैक्स में छूट, बद्रीनाथ में बनेगी ‘लोटस वॉल’

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में कुल 12 अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई और कई बड़े निर्णय लिए गए। यह बैठक राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और नागरिकों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से की गई, जिसमें विभिन्न विभागों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

2013 के पर्यावरण मित्रों को मिलेगा मृतक आश्रित का लाभ

कैबिनेट ने 2013 में कार्यरत 853 पर्यावरण मित्रों को मृतक आश्रित की सुविधा से अच्छादित करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के तहत अब यदि इन कर्मचारियों की मृत्यु होती है, तो उनके परिजनों को सरकारी नियमों के तहत नौकरी या मुआवजे का लाभ मिल सकेगा।

CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नीति में संशोधन

परिवहन विभाग के अंतर्गत अब डीजल और पेट्रोल चालित सार्वजनिक वाहनों को सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक (EV) में परिवर्तित करने की योजना को बढ़ावा मिलेगा। पहले इन वाहनों को स्क्रैप किया जाना था, लेकिन अब SMA अकाउंट के तहत वाहन मालिकों को सहायता राशि दी जाएगी, ताकि वे अपने पुराने वाहनों को ग्रीन एनर्जी वाहनों में परिवर्तित कर सकें।

हाइब्रिड वाहनों को भी टैक्स में छूट

अब तक केवल शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में 100% छूट मिल रही थी। लेकिन कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि अब हाइब्रिड वाहनों को भी राज्य में टैक्स फ्री किया जाएगा। इस निर्णय से राज्य में हाइब्रिड वाहनों के पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जो पहले अन्य राज्यों में हो रहा था लेकिन उत्तराखंड में कम था।

सिपाही और उप निरीक्षक की परीक्षा अब एकसाथ

राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सिपाही और उप निरीक्षक (SI) के पदों के लिए परीक्षा एकसाथ कराई जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर विभाग आवंटित किया जाएगा।

कार्मिक विभाग के तहत नई नियुक्तियां और स्वीकृतियां

  • UKSSSC (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) में 15 नए पद सृजित किए गए हैं।

  • मानवाधिकार आयोग में 12 नए पदों की स्वीकृति दी गई है।

  • विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अब विभागाध्यक्ष के रूप में हेड की नियुक्ति की जाएगी।

पर्यटन विभाग की योजनाओं को मिली मंजूरी

पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी कई योजनाएं मंजूर की गई हैं:

  • बद्रीनाथ धाम में CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के माध्यम से लोटस वॉल (शेष नेत्र दीवार) बनाई जाएगी।

  • सुदर्शन चौक पर विशेष आर्ट वर्क और कला कृतियों की स्थापना की जाएगी।

  • बद्री नारायण चौक में “ट्री ऐंड रिवर स्कल्पचर” लगाया जाएगा, जिससे पर्यटक अनुभव और भी समृद्ध होगा।

पुरानी सेवाओं के तहत ग्रेच्युटी का लाभ अब न्यू पेंशन स्कीम में भी

न्यू पेंशन स्कीम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी अब पुरानी सेवाओं के आधार पर ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्होंने सेवा की शुरुआत पुरानी पेंशन योजना के दौरान की थी, लेकिन बाद में वे NPS में शामिल हो गए।

दर्दनाक हादसा: यमुना में डूबने से एक ही परिवार की तीन बहनों समेत छह किशोरियों की मौत, शादी की खुशियां मातम में बदलीं

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आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में मंगलवार को एक बेहद हृदयविदारक हादसे में यमुना नदी में नहाते समय छह किशोरियों की डूबकर मौत हो गई। इनमें से चार की मौत मौके पर ही हो गई, जबकि दो लड़कियों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मरने वाली लड़कियों में तीन सगी बहनें थीं, जिससे एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस हादसे से पूरे गांव में मातम छा गया है।

इन किशोरियों में मुस्कान नाम की लड़की की शादी नवंबर में देवोत्थान पर्व पर तय थी। शादी की तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन अब उसी घर में बारात आने के बजाय छह अर्थियां पहुंच गईं। जिस आंगन में उत्सव की तैयारियां हो रही थीं, वहां अब चीख-पुकार और मातम पसरा है।

मुस्कान की शादी की तैयारियां चल रही थीं
मृतकों में शामिल 18 वर्षीय मुस्कान की हाल ही में सिकंदरा के गांव महल में सगाई हुई थी और एक नवंबर को शादी तय थी। मुस्कान के दादा विजय सिंह ने बताया कि बेटियां अपने पिता के साथ मिलकर ऑनलाइन कपड़े देखती थीं। लेकिन मंगलवार को मुस्कान समेत पांच अन्य किशोरियों की डूबने से मौत हो गई। इस हादसे ने परिवार के सभी सपनों को तोड़कर रख दिया।

हादसे से एक दिन पहले बनाई थी यमुना किनारे रील
परिवार के सदस्य दीपेश ने बताया कि सोमवार को मुस्कान ने अपनी मौसी और मौसेरी बहन के साथ यमुना किनारे रील और सेल्फी बनाई थी। हादसे के कुछ समय पहले तक लड़कियां मोबाइल साथ लेकर गई थीं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि घटना के दिन भी कोई वीडियो बनाया गया था या नहीं।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन सतर्क
जैसे ही इस हादसे की जानकारी लखनऊ तक पहुंची, मुख्यमंत्री सचिवालय से अधिकारियों को निर्देश मिले। मौके पर डीएम, नगरायुक्त, अपर पुलिस आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। स्थानीय पुलिस ने रेस्क्यू कर किशोरियों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।

पोस्टमार्टम के लिए मनाना पड़ा परिजनों को
शोकाकुल परिजन पहले पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं थे। नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने उन्हें समझाया कि बिना पोस्टमार्टम मुआवजा नहीं मिल पाएगा। उन्होंने परिवार को यह भी कहा कि अन्य बच्चों की परवरिश की चिंता करनी होगी। इसके बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए सहमत हुए।

कैसे हुआ हादसा
घटना थाना सिकंदरा क्षेत्र के नगला नाथू गांव की है। यहां रहने वाली मुस्कान (18), दिव्या (15), संध्या उर्फ कंचन (12), चचेरी बहन नैना (14), शिवानी (17, मौसी) और सोनम (12, रिश्ते में मौसेरी बहन) मंगलवार सुबह यमुना में नहाने गई थीं। इसी दौरान मुस्कान और शिवानी गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। उन्हें बचाने की कोशिश में बाकी लड़कियां भी पानी में समा गईं। दीपेश नामक किशोर किसी तरह बाहर निकला और शोर मचाया, जिसके बाद खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़कर आए।

करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला गया। चार किशोरियों को पुलिस की जीप से एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। शिवानी और सोनम को दूसरे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दो घंटे बाद उनकी भी मौत हो गई।

मुख्यमंत्री योगी ने जताया शोक, किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का भरोसा भी दिलाया गया है। यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गहरा सदमा बन गया है, जिसने बेटियों के सपनों और एक होने वाले विवाह को चंद पलों में खामोश कर दिया।

CJI चुनने में अतीत में सरकार ने की थी मनमानी, मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई बोले- जजों का स्वतंत्र रहना जरूरी

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नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अतीत में भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में सरकार ने वरिष्ठतम न्यायाधीशों को दो बार नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि 1993 तक न्यायाधीशों की नियुक्ति में अंतिम निर्णय कार्यपालिका का होता था, और इसी दौरान न्यायिक परंपराओं का उल्लंघन हुआ।

ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में ‘न्यायिक वैधता और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखना’ विषय पर बोलते हुए CJI गवई ने कहा कि भारत में न्यायिक नियुक्तियों को लेकर विवाद का मुख्य कारण यही रहा है कि निर्णय लेने का अधिकार किसके पास हो – न्यायपालिका या कार्यपालिका। उन्होंने बताया कि जस्टिस सैयद जाफर इमाम और जस्टिस हंसराज खन्ना दो ऐसे वरिष्ठतम न्यायाधीश थे जिन्हें उनके न्यायिक कद के बावजूद मुख्य न्यायाधीश नहीं बनाया गया।

CJI गवई ने उदाहरण देते हुए कहा कि जस्टिस इमाम को 1964 में स्वास्थ्य कारणों के चलते CJI पद से वंचित किया गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू की सरकार ने जस्टिस पी. बी. गजेंद्रगडकर को यह पद सौंपा। वहीं, जस्टिस हंसराज खन्ना को 1977 में इंदिरा गांधी सरकार की नापसंदगी का सामना करना पड़ा, जिससे वे शीर्ष पद तक नहीं पहुंच सके।

गवई ने 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम का भी ज़िक्र किया और कहा कि इस कानून से न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना हो सकती है, लेकिन कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति और बाद की नियुक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कोई भी जज यदि रिटायरमेंट के तुरंत बाद सरकारी पद ग्रहण करता है या इस्तीफा देकर चुनाव लड़ता है, तो यह न केवल नैतिक संकट पैदा करता है, बल्कि लोगों के बीच यह धारणा भी बनती है कि न्यायपालिका सरकार से लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जिससे संस्थागत स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वास पर असर पड़ता है।

पंजाब से एक और यूट्यूबर जासूसी के आरोप में गिरफ्तार

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पंजाब : पंजाब पुलिस ने बीते 24 घंटे में दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहाली से पाकिस्तानी जासूस जसबीर सिंह को गिरफ्तार किया है। जसबीर सिंह रूपनगर के गांव महालन का निवासी है और यू-ट्यूब पर ‘जान महल’ नाम से चैनल चलाता है। पंजाब डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि आरोपी का संबंध आतंक समर्थित जासूसी नेटवर्क से है और उसका संपर्क हरियाणा से गिरफ्तार यू-ट्यूबर ज्योति मल्होत्रा तथा पाक उच्चायोग के निष्कासित अधिकारी एहसान उर रहीम उर्फ दानिश से भी था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि जसबीर ने हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा से कई बार संपर्क साधा था, जिसके बाद वह पाकिस्तानी अधिकारी दानिश के संपर्क में आया। आरोपी के मोबाइल से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लोगों के नंबर और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो भी मिले हैं। जसबीर तीन बार (2020, 2021, 2024) पाकिस्तान भी जा चुका है और वहां उसने पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों और व्लॉगर्स से मुलाकात की थी।

जसबीर सिंह को आज मोहाली जिला अदालत में पेश किया जाएगा, जहां से उसकी रिमांड मिलने के बाद पुलिस उससे पूछताछ करेगी। जांच में पुलिस को संदेह है कि जसबीर के साथ और भी लोग जुड़े हो सकते हैं। मामले की गहन जांच के लिए फोरेंसिक टीमें भी काम कर रही हैं। आरोपी के बारे में खुफिया विभाग को भी जानकारी दे दी गई है।

RCB बनी चैंपियन, पंजाब को हराकर जीता पहला आईपीएल खिताब, 17 सालों का सूखा खत्म कर ट्रॉफी की अपने नाम

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अहमदाबाद: आईपीएल 2025 के फाइनल मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने पंजाब किंग्स को रोमांचक मुकाबले में 6 रन से हराकर पहली बार खिताब पर कब्जा जमाया। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद आरसीबी ने अपनी पहली आईपीएल ट्रॉफी जीती। यह आरसीबी का चौथा फाइनल था—इससे पहले वह 2009, 2011 और 2016 में उपविजेता रही थी।

फाइनल मुकाबला: आरसीबी ने रखा 191 रनों का लक्ष्य

टॉस जीतकर पंजाब किंग्स ने पहले गेंदबाजी चुनी। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 20 ओवर में 5 विकेट गंवाकर 190 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब की टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 184 रन ही बना सकी और 6 रन से मैच हार गई। इस हार के साथ पंजाब का पहला खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया।

पंजाब की पारी: शशांक की पारी नहीं ला सकी जीत

पंजाब की ओर से प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्य ने पारी की शुरुआत की और पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े। प्रियांश (24 रन) को जोश हेजलवुड ने आउट किया, वहीं प्रभसिमरन (26 रन) क्रुणाल पांड्या की गेंद पर कैच आउट हुए।
कप्तान श्रेयस अय्यर केवल 1 रन बनाकर रोमारियो शेफर्ड का शिकार बने। इसके बाद जोश इंग्लिस ने 23 गेंदों पर 39 रन की तेज पारी खेली, लेकिन वह भी आउट हो गए। नेहाल वढेरा (15), स्टोइनिस (6) और उमरजई (1) भी बड़ी पारी नहीं खेल सके।

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अंत में शशांक सिंह ने 30 गेंदों में 3 चौकों और 6 छक्कों की मदद से नाबाद 60 रन बनाए, लेकिन वह टीम को जीत नहीं दिला सके। आरसीबी के लिए क्रुणाल पांड्या और भुवनेश्वर कुमार ने 2-2 विकेट लिए, जबकि हेजलवुड, यश दयाल और शेफर्ड को 1-1 सफलता मिली।

आरसीबी की पारी: कोहली की कप्तानी पारी

पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी की शुरुआत फिल साल्ट (16 रन) और विराट कोहली ने की। मयंक अग्रवाल (24) और रजत पाटीदार (26) ने भी उपयोगी योगदान दिया। विराट कोहली ने 35 गेंदों में 3 चौकों की मदद से सर्वाधिक 43 रन बनाए।
जितेश शर्मा ने 10 गेंदों पर 24 रन बनाए, जबकि लिविंगस्टोन ने 15 गेंदों में 25 रन की अहम पारी खेली।

पंजाब की गेंदबाजी: अर्शदीप की अंतिम ओवर में तबाही

पंजाब के लिए काइल जैमीसन ने 4 ओवर में 48 रन देकर 3 विकेट झटके। अर्शदीप सिंह ने अंतिम ओवर में शानदार गेंदबाजी करते हुए एक ही ओवर में शेफर्ड (17), क्रुणाल (4) और भुवनेश्वर (1) को आउट किया।
इसके अलावा उमरजई, युजवेंद्र चहल और विजयकुमार वैश्यक ने एक-एक विकेट लिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने न केवल आईपीएल का खिताबी सूखा खत्म किया बल्कि अपने करोड़ों फैंस को भी जश्न मनाने का मौका दिया।

राहुल गांधी का तीखा वार: “RSS-BJP का चरित्र आत्मसमर्पण का रहा है, ट्रंप ने इशारा किया और मोदी झुक गए

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर एक ऐसा आरोप लगाया है, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मैंने देश से वादा किया था कि जाति जनगणना संसद में पारित की जाएगी। अब मैं RSS-BJP को अच्छी तरह समझ गया हूं।

अगर उन पर थोड़ा दबाव डाला जाए तो वे डरकर भाग जाते हैं। इसी तरह जब ट्रंप ने मोदी जी को इशारा किया तो उन्होंने ट्रंप के आदेश का पालन किया। यही उनका चरित्र है,  स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही उन्हें आत्मसमर्पण पत्र लिखने की आदत है। बता दें कि सीजफायर को लेकर ट्रंप की मध्यस्थता से जुड़ी बयानों के जरिए कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर निशाना साध रही है।

सीजफायर के आदेश से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई। वहीं, ट्रंप ने कई बार इस बात का भी जिक्र किया उन्होंने फोन कर दोनों देशों से सीजफायर की अपील की थी। इसके लिए उन्होंने व्यापार को मुद्दा बनाया।

बड़ा फैसला: पूर्व अग्निवीरों को पुलिस और PAC भर्ती में मिलेगा 20% आरक्षण, उम्र में भी मिलेगी छूट

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लखनऊ। देश सेवा कर चुके अग्निवीरों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य पुलिस, पीएसी, घुड़सवार पुलिस और फायरमैन की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही इन अभ्यर्थियों को आयु सीमा में भी विशेष छूट प्रदान की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने लोकभवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि गृह विभाग द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव कैबिनेट में सर्वसम्मति से पारित हुआ। यह निर्णय उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है, जिन्होंने अग्निपथ योजना के तहत चार साल तक देश की सेवा की है।

2022 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सेना, वायुसेना और नौसेना में युवाओं को चार साल के लिए ‘अग्निवीर’ के रूप में भर्ती किया जाता है। इस अवधि में छह महीने का प्रशिक्षण और साढ़े तीन साल की सेवा शामिल होती है। सेवा पूरी होने पर 25% को परमानेंट नियुक्ति मिलती है, जबकि बाकी 75% युवाओं को नागरिक क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए छोड़ा जाता है।

2026-27 तक पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल समाप्त होगा। अनुमान है कि करीब 1 लाख अग्निवीरों में से 25 हजार को सेना में स्थायी नौकरी मिलेगी और बाकी 75 हजार को नए करियर विकल्पों की तलाश करनी होगी। यूपी सरकार का यह फैसला इन्हीं युवाओं के लिए एक नई दिशा खोलता है।

अग्निपथ योजना की घोषणा के समय ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया था कि सेवा के बाद लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य पुलिस और पीएसी में प्राथमिकता दी जाएगी। अब इस वादे को धरातल पर उतारते हुए सरकार ने 20% आरक्षण की नीति लागू कर दी है। यह कदम न केवल युवाओं को स्थायी करियर का अवसर देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस को अनुशासित, प्रशिक्षित और राष्ट्रसेवा में निपुण कर्मियों से सशक्त करेगा

उत्तराखंड : BJP युवा नेता की गोली मारकर हत्या, जांच में जुटी पुलिस

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देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जहां बाइक सवार दो हमलावरों ने भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रोहित नेगी (उम्र 22) पर गोली चला दी। घटना पीपल चौक माण्डुवाला इलाके में हुई, जब रोहित अपने दोस्तों के साथ कार में मौजूद था। गोली रोहित की गर्दन में लगी, जिसके बाद उसे आनन-फानन में ग्राफिक ऐरा अस्पताल, झाझरा ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक के दोस्त अभिषेक बर्तवाल (निवासी तिल्वाड़ी, थाना सेलाकुई) की तहरीर पर प्रेमनगर थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि बाइक पर सवार दो युवक घटनास्थल पर पहुंचे और कार के सामने से गोली चलाई, जो सीधी रोहित की गर्दन में लगी।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह मामला निजी रंजिश का हो सकता है। मृतक रोहित के एक दोस्त की महिला मित्र के साथ आरोपी की पहले से जान-पहचान थी। घटना से कुछ घंटे पहले रोहित अपने दोस्तों के साथ नयागांव में एक दोस्त के घर पर मौजूद था, जहां उस महिला के पास आरोपी का कॉल आया और दोनों के बीच बहस हो गई।

संभावना जताई जा रही है कि उसी बहस के बाद आरोपी ने गुस्से में आकर यह वारदात की। पुलिस सभी संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

रोहित नेगी की हत्या से भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है। पार्टी नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं स्थानीय लोग भी इस निर्मम हत्या से स्तब्ध हैं और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जता रहे हैं।

हरिद्वार जमीन घोटाले में धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई ! 2 IAS और 1 PCS अफसर समेत 12 अधिकारी सस्पेंड

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  • डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त पर भी गिरी गाज, अब विजिलेन्स करेंगे जमीन घोटाले की जांच.

  • 54 करोड़ के जमीन घोटाले में सख्त सीएम धामी, 2 IAS और 1 PCS अफसर सस्पेंड, अब होगी विभागीय जांच.

  • मुख्यमंत्री धामी का भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार — धामी की जीरो टॉलरेंस नीति का चला चाबुक.

  • ‘न कोई बच पाएगा, न कोई छिप पाएगा’ — हरिद्वार घोटाले पर सीएम धामी का ऐतिहासिक एक्शन.

  • 15 करोड़ की ज़मीन 54 करोड़ में ! घोटाले की जांच पूरी, धामी सरकार ने मारी सीधी चोट.

हरिद्वार: उत्तराखंड में पहली बार ऐसा हुआ है कि सत्ता में बैठी सरकार ने अपने ही सिस्टम में बैठे शीर्ष अधिकारियों पर सीधा और कड़ा प्रहार किया है। हरिद्वार ज़मीन घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिए गए निर्णय केवल एक घोटाले के पर्दाफाश की कार्रवाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक संस्कृति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत हैं।

हरिद्वार नगर निगम द्वारा कूड़े के ढेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती कृषि भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने के मामले ने राज्यभर में हलचल मचा दी थी। न तो भूमि की वास्तविक आवश्यकता थी, न ही पारदर्शी बोली प्रक्रिया अपनाई गई। शासन के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर एक ऐसा सौदा किया गया जो हर स्तर पर संदेहास्पद था।

लेकिन इस बार मामला रफा-दफा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई और रिपोर्ट मिलते ही तीन बड़े अफसरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की।
जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई, वे हैं:

कर्मेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी (डीएम), हरिद्वार: भूमि क्रय की अनुमति देने और प्रशासनिक स्वीकृति देने में उनकी भूमिका संदेहास्पद पाई गई।

वरुण चौधरी, पूर्व नगर आयुक्त, हरिद्वार: उन्होंने बिना उचित प्रक्रिया के भूमि क्रय प्रस्ताव पारित किया और वित्तीय अनियमितताओं में प्रमुख भूमिका निभाई।

अजयवीर सिंह, एसडीएम: जमीन के निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती गई, जिससे गलत रिपोर्ट शासन तक पहुंची।

इन तीनों अधिकारियों को वर्तमान पद से हटाया गया है और शासन स्तर पर आगे की विभागीय और दंडात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री की शून्य सहनशीलता की नीति का स्पष्ट प्रमाण है। इसके साथ ही निकिता बिष्ट (वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार), विक्की (वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक), राजेश कुमार (रजिस्ट्रार कानूनगों), कमलदास (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार को भी जमीन घोटाले में संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत प्रभाव से निलंबित किया है।

अब तक ये हो चुकी कार्रवाई

जांच अधिकारी नामित करने के बाद इस घोटाले में नगर निगम के प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट व अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया था। संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार भी समाप्त कर दिया गया था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था। उनके खिलाफ सिविल सर्विसेज रेगुलेशन के अनुच्छेद 351(ए) के प्रावधानों के तहत अनुशासनिक कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए थे।

अब इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंपी गई है धामी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब उत्तराखंड में ‘पद’ नहीं, ‘कर्तव्य’ और ‘जवाबदेही’ महत्वपूर्ण हैं। चाहे व्यक्ति कितना भी वरिष्ठ हो, अगर वह जनहित और नियमों की अवहेलना करेगा, तो कार्रवाई निश्चित है। इस ऐतिहासिक निर्णय से उत्तराखंड की जनता को यह संदेश मिला है कि अब भ्रष्टाचारियों की कोई जगह नहीं। सरकार की प्राथमिकता सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि व्यवस्था की शुद्धि है। इस प्रकार की सख्त कार्रवाई राज्य के अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि अब लापरवाही और मिलीभगत का युग समाप्त हो चुका है।