Home Blog Page 211

धामी कैबिनेट बैठक आज: पंचायत चुनाव समेत कई अहम फैसलों पर लग सकती है मुहर

0

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज सचिवालय में कैबिनेट बैठक होने जा रही है, जो त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के मद्देनज़र महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में पंचायत चुनाव कार्यक्रमों को लेकर कोई बड़ा और निर्णायक फैसला लिया जा सकता है।

पंचायत चुनावों पर टिकी निगाहें
शासन पहले ही पंचायतों में तैनात प्रशासकों के कार्यकाल को 31 जुलाई तक बढ़ा चुका है और आरक्षण से जुड़ा नोटिफिकेशन पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया जा चुका है। 19 जून को विभाग राज्य निर्वाचन आयोग और शासन को आरक्षण प्रस्ताव सौंपेगा। ऐसे में धामी सरकार इस बैठक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर नीतिगत फैसला ले सकती है।

कैबिनेट उप-समिति की रिपोर्ट पर होगी चर्चा
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की रिपोर्ट भी आज की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी, जिस पर मंत्रिमंडल चर्चा करेगा। यह रिपोर्ट पंचायत चुनावों को लेकर अहम् है।

इन प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर 

  • आयुष्मान भारत योजना: आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया को और सरल बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। अब परिवार रजिस्टर नकल के माध्यम से भी कार्ड बनवाया जा सकेगा।

  • रोगी कल्याण समिति: प्रदेश के ब्लॉक स्तर पर रोगी कल्याण समितियां गठित करने का प्रस्ताव भी मंज़ूरी के लिए तैयार है।

  • शिक्षा विभाग में ट्रांसफर प्रक्रिया: शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का प्रस्ताव भी बैठक में पेश किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

कुछ और अहम संभावित प्रस्ताव

  • रायपुर (देहरादून) क्षेत्र में फ्रीज की गई भूमि को मुक्त करने का प्रस्ताव.

  • 23 खेल अकादमियों के निर्माण को लेकर लेगेसी प्लान ड्राफ्ट पर मुहर.

  • नंदा गौरा योजना में बदलाव: स्किल बेस्ड कोर्स करने वाली बालिकाओं को अतिरिक्त सहायता राशि देने का प्रस्ताव.

  • उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट नीति बनाए जाने का प्रस्ताव.

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए लगा ऋण मेला, साकार होगा ‘लखपति दीदी’ बनने का सपना

0

चकराता : चकराता ब्लॉक परिसर में आज स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के लिए उद्यमिता सृजन हेतु ऋण मेले का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था।

कार्यक्रम में डीसीबी बैंक, स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूजीबी बैंक समेत विभिन्न वित्तीय संस्थानों ने भाग लिया। बैंकों की ओर से महिलाओं को सरकारी योजनाओं, लाभ-प्रक्रिया, ऋण प्रक्रिया, सब्सिडी दरें और लाभार्थी बनने के लिए जरूरी पात्रता की विस्तृत जानकारी दी गई।

मुख्य अतिथि विकास अधिकारी राकेश बिष्ट ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाएं न केवल घर की आर्थिक रीढ़ बनें, बल्कि छोटे उद्यमों की मालिक बनकर समाज को दिशा दें।

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित जनपद स्तरीय आरएफसी अजय तिवारी ने वित्तीय साक्षरता और समावेशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे महिलाएं बैंकिंग सेवाओं का सही उपयोग कर आर्थिक मजबूती हासिल कर सकती हैं।

ब्लॉक मिशन प्रबंधक डॉ. पूजा गौड़ ने ‘लखपति दीदी’ योजना की जानकारी देते हुए कहा कि हर महिला के पास अपने हुनर से लाखों कमाने की ताकत है, ज़रूरत है सही मार्गदर्शन और संसाधनों की। हमारा मिशन है हर समूह की दीदी को एक सफल उद्यमी बनाना।

इस ऋण मेले में लगभग 114 महिलाओं ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आवेदन पत्र भरे, जो आने वाले समय में उन्हें खुद का उद्यम स्थापित करने की दिशा में सहायता प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम में ब्लॉक स्तरीय एनआरएलएम स्टाफ, रूरल इन्क्यूबेशन पार्टनर (RIP) तथा समस्त तकनीकी एवं मार्गदर्शक स्टाफ उपस्थित रहे। यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक शुरुआत है, जिसमें महिलाएं सिर्फ कर्ज नहीं ले रही, बल्कि एक नया सपना, एक नई पहचान और एक स्वावलंबी भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

उत्तराखंड कांग्रेस में नई जिम्मेदारी: सी.पी. सिंह बने एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के प्रदेश समन्वयक

0

देहरादून : उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने पार्टी में सामाजिक समन्वय को मज़बूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ नेता सी.पी. सिंह को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) व अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए प्रदेश समन्वयक नियुक्त किया है।

इस नियुक्ति की जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष (संगठन एवं प्रशासन) सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि सी.पी. सिंह लंबे समय से पार्टी के प्रति समर्पित हैं और उनके संगठनात्मक अनुभव, निष्ठा और सक्रिय भूमिका को देखते हुए यह अहम जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।

धस्माना ने कहा कि पार्टी की मंशा है कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के बीच कांग्रेस की पकड़ और संवाद को और मज़बूत किया जाए। इसी क्रम में सी.पी. सिंह को यह जिम्मा सौंपा गया है कि वे इन वर्गों को अधिक से अधिक संख्या में कांग्रेस से जोड़ें और पार्टी की नीतियों को उन तक पहुंचाएं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने उम्मीद जताई कि सी.पी. सिंह पार्टी की गौरवशाली परंपराओं और नेतृत्व की भावना, जिसमें श्रीमती सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गाधी की सोच निहित है के अनुरूप काम करते हुए संगठन को नई ताक़त देंगे। साथ ही, उन्होंने अपेक्षा जताई कि सी.पी. सिंह अपने सभी कार्यक्रमों और अभियानों की जानकारी समय-समय पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को देते रहेंगे।

 

सहकारी बैंकों में शीघ्र होगी बंपर भर्ती, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

0
  • सहकारी बैंकों में शीघ्र होगी बंपर भर्ती, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवस.

  • सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दी भर्ती प्रस्ताव को मंजूरी.

  • आईबीपीएस के माध्यम से 177 पदों पर होगी पारदर्शी भर्ती.

देहरादून : उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश के सहकारी बैंकों में जल्द ही 177 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस भर्ती को भारत सरकार के उपक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (आईबीपीएस) के माध्यम से पारदर्शी और प्रभावी ढंग से आयोजित किया जाएगा। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस भर्ती प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और विभागीय अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने तथा शीघ्र विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए हैं।

177 पदों पर होगी भर्ती
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि सहकारिता विभाग के अंतर्गत जिला सहकारी बैंकों और राज्य सहकारी बैंकों में वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 के कुल 177 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें वर्ग-1 के तहत वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के 8 पद, वर्ग-2 में कनिष्ठ शाखा प्रबंधक के 65 पद और वर्ग-3 के अंतर्गत लिपिक/कैशियर के 104 पद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस भर्ती का उद्देश्य सहकारी बैंकों में रिक्त पदों को भरकर उनकी कार्यक्षमता को और अधिक मजबूत करना है।

आईबीपीएस के माध्यम से पारदर्शी भर्ती
डॉ. रावत ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आईबीपीएस को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईबीपीएस भारत सरकार का एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो राष्ट्रीयकृत बैंकों में कार्मिकों की भर्ती करता है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने सहकारी बैंकों में भर्ती के लिए इस संस्थान को चुना है, ताकि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को निष्पक्ष अवसर प्रदान किया जा सके। सहकारिता विभाग में पहले भी दो बार आईबीपीएस के माध्यम से सफलतापूर्वक भर्ती की जा चुकी है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र शुरू किया जाए और आईबीपीएस के माध्यम से जल्द से जल्द भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि इस भर्ती से न केवल बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली में भी सुधार होगा।

सहकारी बैंकों का बेहतर प्रदर्शन
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड में सहकारी बैंकों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। अधिकांश सहकारी बैंक लाभ की स्थिति में हैं और उनका गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) स्तर भी काफी कम हुआ है। सहकारी बैंकों में वित्तीय लेन-देन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों की तर्ज पर सहकारी बैंकों में भी आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उपभोक्ताओं के लिए नई सुविधाएं
सहकारी बैंकों ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कई कदम उठाए हैं। जगह-जगह नए एटीएम स्थापित किए गए हैं, चारधाम यात्रा मार्ग, पर्यटक स्थलों और दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल एटीएम वैन के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अलावा, नेट बैंकिंग, आसान दरों पर ऋण सुविधा और विभिन्न सहकारी योजनाओं का लाभ भी उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। इन प्रयासों से सहकारी बैंकों के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
यह भर्ती प्रक्रिया न केवल सहकारी बैंकों को मजबूत करेगी, बल्कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगी। सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि योग्य और मेहनती युवाओं को उनकी प्रतिभा के आधार पर उचित अवसर मिले। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस भर्ती के लिए तैयार रहें और आईबीपीएस द्वारा आयोजित परीक्षा में हिस्सा लें।

सहकारिता विभाग और सरकार के इस कदम से न केवल सहकारी बैंकों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं को भी अपने करियर को नई दिशा देने का अवसर प्राप्त होगा।

घिंडवाड़ा में सूर्यकांत धस्माना का भव्य अभिनंदन, डांडा का नागराजा मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

0

पौड़ी : उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के कोट विकास खंड में स्थित प्रसिद्ध डांडा का नागराजा मंदिर में वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना का क्षेत्र की जनता और मंदिर समिति ने भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। यह सम्मान उनके द्वारा क्षेत्र की पेयजल समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान के लिए किया गया।

मंदिर समिति के संरक्षक सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 2004 में सूर्यकांत धस्माना मंदिर के वार्षिक उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या, पेयजल संकट, को दूर करने का संकल्प लिया था। इसके बाद, उन्होंने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से मुलाकात कर डांडा का नागराजा (घिंडवाड़ा) पंपिंग पेयजल योजना स्वीकृत करवाई। इस योजना ने क्षेत्र में पेयजल की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया, जिसके लिए जनता ने उनका आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर जनता को संबोधित करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस सिद्ध पीठ और अपने ससुराल क्षेत्र की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, “मनुष्य केवल निमित्त मात्र है, असली कार्यकर्ता परम पिता परमेश्वर ही है। भगवान डांडा का नागराजा ने मुझे इस पेयजल योजना के लिए प्रेरित किया और इसे पूर्ण करने का साधन बनाया।” उन्होंने वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी को रेखांकित करते हुए पलायन की समस्या पर चिंता जताई और कहा कि पहाड़ के गांव खाली हो रहे हैं।

IMG 20250610 WA0001

धस्माना ने मंदिर समिति के कार्यों की सराहना की और कहा कि समिति के प्रयासों से घिंडवाड़ा क्षेत्र की तस्वीर बदल गई है। मंदिर तक सड़क निर्माण का कार्य भी तेजी से हो रहा है। उन्होंने कथाव्यास स्वामी रसिक जी महाराज की उपस्थिति को कार्यक्रम की भव्यता बढ़ाने वाला बताया।

कार्यक्रम में मंदिर समिति ने सूर्यकांत धस्माना, उनकी धर्मपत्नी डॉ. पिंकी धस्माना, विजय लक्ष्मी धस्माना, भावना धस्माना, उषा उनियाल, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, किशोर सिंह नेगी और नगर पालिका पौड़ी की अध्यक्ष हिमानी नेगी को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष कमलेश चमोली, सचिव राजेंद्र प्रसाद बिजलवान, कोषाध्यक्ष मुकेश बिष्ट, संयोजक वीरेंद्र प्रसाद भट्ट और हेमलता दुश्याल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इन राज्यों में आसमान से बरसेगी आग, मौसम विभाग का अलर्ट

0

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले 4-5 दिनों तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का अनुमान है।

वहीं, दक्षिण भारत में मानसून सक्रिय रहेगा। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, लक्षद्वीप और पुदुचेरी में 12-15 जून के बीच भारी बारिश की संभावना है। विशेष रूप से कर्नाटक में 12-15 जून तक भारी वर्षा और कोंकण व गोवा में 13-15 जून के दौरान अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है।

पिछले 24 घंटों का मौसम
पश्चिमी राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर लू की स्थिति रही। मराठवाड़ा और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज की गई। मिजोरम, गोवा, तमिलनाडु, केरल, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में भारी बारिश हुई। तमिलनाडु, पुदुचेरी, कराईकल, मराठवाड़ा, जम्मू-कश्मीर, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मध्य महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं।

मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियां

केरल, माहे, कर्नाटक और लक्षद्वीप में अगले 2-3 दिनों तक हल्की बारिश का अनुमान है। तेलंगाना, तमिलनाडु, पुदुचेरी, कराईकल और रायलसीमा में 10-12 जून तक सामान्य बारिश की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 10-12 जून के दौरान बारिश के साथ आंधी की उम्मीद है।

पश्चिम भारत
मराठवाड़ा में अगले 2-3 दिनों तक छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश, बिजली और 40-50 किमी/घंटा की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 10-14 जून तक बारिश और वज्रपात की संभावना है।

पूर्वी और मध्य भारत
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले 2-3 दिनों तक मध्यम बारिश का अनुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बारिश, गरज और आंधी की संभावना है। मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 10-13 जून तक बारिश के आसार हैं। बिहार में 11-13 जून और झारखंड में 10-13 जून के दौरान बारिश की संभावना है। विदर्भ में 11 जून को गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत
हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में 13-15 जून के दौरान बारिश की संभावना है। उत्तराखंड में 11-15 जून तक सामान्य से भारी बारिश, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 जून और पंजाब में 15 जून को बारिश का अनुमान है।

पूर्वोत्तर भारत
अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले 2-3 दिनों तक हल्की बारिश की संभावना है।

अधिकतम तापमान
उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 5 दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, इसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की कमी आएगी।

हीटवेव चेतावनी
पश्चिमी राजस्थान में 10-12 जून तक कुछ स्थानों पर हीटवेव की स्थिति रहेगी। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश में भी गर्मी का प्रकोप रहेगा। गंगा के तटीय पश्चिम बंगाल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में आर्द्र मौसम की संभावना है।

 

ICC Hall of Fame : MS धोनी को बड़ा सम्मान, ICC हॉल ऑफ फेम में हुए शामिल

0

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। वह इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाले 11वें भारतीय खिलाड़ी हैं। आईसीसी ने 9 जून 2025 को इसकी घोषणा की। धोनी के साथ दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज हाशिम अमला, ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ, न्यूजीलैंड के पूर्व स्पिनर डेनियल विटोरी, पाकिस्तान की महिला क्रिकेटर सना मीर और इंग्लैंड की महिला क्रिकेटर सारा टेलर को भी इस सम्मान से नवाजा गया है। धोनी ने 15 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2019 वनडे विश्व कप का सेमीफाइनल था, जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला।

तीन ICC खिताबों के साथ भारत के सबसे सफल कप्तान
‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धोनी भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं। उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाया। वह एकमात्र भारतीय कप्तान हैं, जिनके नेतृत्व में टीम ने तीन आईसीसी खिताब जीते। इसके अलावा, धोनी की कप्तानी में भारत ने 2010 और 2016 में एशिया कप भी जीता। धोनी ने 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में डेब्यू किया था।

ICC हॉल ऑफ फेम में अन्य भारतीय
धोनी से पहले भारत के सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, विनोद मांकड़, डियान एडुल्जी, वीरेंद्र सहवाग और नीतू डेविड को आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया जा चुका है। गावस्कर और बेदी को 2009 में यह सम्मान मिला था।

IPL में धोनी की उपलब्धियां
धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को आईपीएल में 2010, 2011, 2018, 2021 और 2023 में पांच खिताब जिताए। साथ ही, उनकी कप्तानी में सीएसके ने 2010 और 2014 में चैंपियंस लीग टी20 का खिताब भी जीता। 2016-17 में सीएसके के निलंबन के दौरान धोनी ने राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स के लिए खेला। आईपीएल 2025 में उन्होंने अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में हिस्सा लिया और ऋतुराज गायकवाड़ की अनुपस्थिति में सीएसके की कप्तानी भी की।

BCCI ने दी बधाई
BCCI ने धोनी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। बीसीसीआई ने एक्स पर लिखा, “भारतीय टीम के दिग्गज पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने पर हार्दिक बधाई। वह 11वें भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला है।”

धोनी का अंतरराष्ट्रीय करियर
धोनी ने भारत के लिए 350 वनडे में 10,773 रन बनाए, जिसमें 10 शतक और 73 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 183 रन रहा। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 90 मैचों में 38.09 की औसत से 4,876 रन बनाए, जिसमें छह शतक और 33 अर्धशतक शामिल हैं। टी20 में उन्होंने 98 मैचों में 1,617 रन बनाए। टेस्ट में उनकी कप्तानी में भारत ने 60 में से 27 मैच जीते और 2009 में पहली बार आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

 

गोवा मेडिकल कॉलेज में बढ़ा विवाद : डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री की माफी ठुकराई, हड़ताल की चेतावनी

0

पणजी। गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) में स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे और डॉक्टरों के बीच विवाद और भी गहराता जा रहा है। मंत्री राणे द्वारा सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को डॉक्टरों ने सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि माफी वहीं मांगी जानी चाहिए जहां अपमान हुआ, कैजुअल्टी विभाग में। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

यह विवाद 7 जून को उस वक्त शुरू हुआ जब किसी व्यक्ति के परिजन विटामिन बी12 का इंजेक्शन लगवाने इमरजेंसी विभाग पहुंचे। CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) डॉ. रुद्रेश कुट्टीकर के अनुसार, चूंकि विटामिन बी12 कोई इमरजेंसी दवा नहीं है, इसलिए उन्हें OPD में जाने की सलाह दी गई।

इसी बात से असंतुष्ट होकर स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे खुद अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में पहुंच गए और कथित तौर पर CMO के साथ तीखी बहस की। इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें मंत्री ने CMO को सस्पेंड करने की बात भी कही।

विवाद के तूल पकड़ने पर मंत्री राणे ने टीवी चैनल पर आकर माफी मांगी। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये “स्टूडियो माफी” मंजूर नहीं है। गोवा एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (GARD) ने स्पष्ट कहा है कि माफी उसी जगह पर मांगी जाए जहां अपमान हुआ—कैजुअल्टी विभाग में। ऐसा न होने पर स्ट्राइक तय है।

गोवा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसएम बांदेकर ने स्पष्ट किया है कि CMO को सस्पेंड करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है और न ही उनके खिलाफ कोई जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि “हम डॉक्टरों को भरोसा दिलाते हैं कि किसी को सस्पेंड नहीं किया जाएगा।”

डीन ने यह भी जानकारी दी कि विवादित वीडियो की जांच की जा रही है और अस्पताल परिसर में अब वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगा दी गई है। वीडियो बनाने वाले की पहचान कर FIR दर्ज करवाई जाएगी।

यह विवाद अब सिर्फ एक प्रशासनिक बहस नहीं, बल्कि डॉक्टरों के सम्मान और गरिमा से जुड़ गया है। डॉक्टरों की मांग है कि एक जनप्रतिनिधि अगर सार्वजनिक रूप से अपमान करता है, तो माफी भी उसी सार्वजनिक स्थल पर होनी चाहिए। सरकार की अगली कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

सरकार की नई पहल, स्कूलों में अब लोक भाषाओं में हर सप्ताह होगी भाषण और निबंध प्रतियोगिता

0

उत्तराखंड की पर्वतीय घाटियों में जब हवा लोकगीतों की तरह बहती है, तो लगता है जैसे कोई बूढ़ी दादी कहानी सुना रही हो। लेकिन, वक्त की मार, पलायन की पीड़ा और नई पीढ़ी की अनभिज्ञता ने इन बोली-भाषाओं को हाशिये पर ला खड़ा कर दिया है। अब इसी खोती विरासत को नया जीवन देने के लिए सरकार ने कुछ ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रत्येक सप्ताह स्कूलों में स्थानीय लोक भाषा में निबंध और भाषण प्रतियोगिता करने के निर्देश दिए हैं।

स्कूलों में अब बोले जाएंगी स्थानीय बोलियां

स्कूलों में अब हर हफ्ते स्थानीय भाषा में भाषण और निबंध प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। गढ़वाली में बालक बोलेगा “म्यर गौं, म्यर माटी”, तो कुमाऊंनी में बालिका लिखेगी “हमर लोक संस्कृती”। रवांल्टी में कहेगा आमरी संस्कृति, आमारी पछाण, यह पहल न केवल भाषा को जीवित रखेगी, बल्कि बच्चों के भीतर अपनी जड़ों से जुड़ाव भी बढ़ाएगी।

साहित्य भूषण पुरस्कार की राशि में बढ़ोतरी

उत्तराखंड साहित्य भूषण पुरस्कार की राशि अब 5 लाख से बढ़ाकर 5,51,000 रुपये कर दी गई है। यह सिर्फ राशि में इज़ाफा नहीं, बल्कि सम्मान में गहराई है। इसके साथ ही, दीर्घकालीन साहित्य सेवा करने वालों को अलग से दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान भी प्रदान किया जाएगा। यह उस साधना का मूल्यांकन है, जो दशकों से चुपचाप लोक साहित्य के दीप जलाए हुए थी।

ई-लाइब्रेरी और डिजिटल अभिलेखागार

अब लोककथाएं, लोकगीत, पहाड़ी किस्से और दादी-नानी के वे अनुभव डिजिटल रूप में संरक्षित होंगे। एक ष्ई-लाइब्रेरीष् की स्थापना की जा रही है जिसमें उत्तराखंड की 13 प्रमुख भाषाओंकृगढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, बंगाणी, थराली, रंवाई, जौनपुरी, गंगोली, मारछी, रजि, जाध, रंवाल्टी और पछाईकृकी समृद्ध विरासत को संग्रहित किया जाएगा। ऑडियो-विजुअल फॉर्मेट में इनका दस्तावेजीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए खजाना बनेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर होगा उत्तराखंड साहित्य का उत्सव

एक बड़ा और प्रभावशाली कदम यह भी है कि अब साहित्य महोत्सव आयोजित किए जाएंगे, जिसमें देशभर के साहित्यकार आमंत्रित होंगे। उत्तराखंड के लोक साहित्य और भाषाई समृद्धि को देश के कोने-कोने तक पहुँचाने का यह प्रयास, भाषाई पर्यटन की राह भी खोल सकता है।

13 भाषाओं का होगा ‘भाषाई मानचित्र’ तैयार

उत्तराखंड की भाषाओं और बोलियों के भौगोलिक और सांस्कृतिक विस्तार को दिखाने के लिए एक ‘भाषाई मानचित्र’ तैयार किया जाएगा। यह न सिर्फ अकादमिक शोध के लिए उपयोगी होगा, बल्कि इससे हर व्यक्ति समझ सकेगा कि कहां कौन-सी बोली सांस लेती है, किस घाटी में कौन-सी जुबान गूंजती है।

बुजुर्गों की जुबान तक सिमटी

उत्तराखंड में तेजी से हो रहे पलायन और भाषाई उपेक्षा के कारण आज कई बोलियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं। ये बोलियां आज केवल बुजुर्गों की जुबान पर हैं। यदि अब भी प्रयास न हुए, तो ये भाषाएं इतिहास की किताबों में दफन हो जाएंगी।

जन-जागरूकता जरूरी

सरकार के प्रयास केवल नीति के स्तर पर सफल होंगे यदि जनमानस में चेतना जगे। स्थानीय मीडिया, स्कूल, पंचायतें और गांव के बुजुर्ग मिलकर यदि इस अभियान को अपनाएँ, तो हमारी बोली-बानी फिर से जनजीवन का हिस्सा बन सकती है।

भाषा सिर्फ संवाद नहीं, पहचान है

उत्तराखंड की भाषाएं केवल शब्दों का संग्रह नहीं हैं, ये पूरी सभ्यता का आईना हैं। इनका संरक्षण केवल भाषाई उत्तरजीविता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण है। अब समय आ गया है कि हम सब अपने गांव, अपनी बोली, अपने लोक को गर्व से अपनाएं और नई पीढ़ी को भी इसके रंग में रंगें।

उत्तराखंड की 13 भाषाएं 

उत्तराखंड की 13 भाषाओं में गढ़वाली, कुमांउनी, जौनसारी, जौनपुरी, जोहारी, रवांल्टी, बंगाड़ी, मार्च्छा, राजी, जाड़, रंग ल्वू, बुक्साणी और थारू शामिल हैं. यह सभी जानते है कि उत्तराखंड में दो मंडल हैं. एक गढ़वाल और दूसरा कुमांऊ इन दोनों की अपनी अलग-अलग भाषाएं हैं.

गढ़वाली
गढ़वाल मंडल के सातों​ जिले पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, देहरादून और हरिद्वार गढ़वाली भाषी लोगों के मुख्य क्षेत्र हैं. गढ़वाली का अपना शब्द भंडार है जो काफी विकसित है.

कुमांउनी
कुमांऊ मंडल के छह जिलों नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और उधमसिंह नगर में कुमांउनी बोली जाती है. वैसे इनमें से लगभग हर जिले में कुमांउनी का स्वरूप थोड़ा बदल जाता है. लोग गढ़वाली और कुमांऊनी दोनों ही भाषा को बोल और समझ लेते हैं. कुमाउं में कुछ दस उप भाषाएं बोली जाती है.

जौनसारी
गढ़वाल मंडल के देहरादून जिले के पश्चिमी पर्वतीय क्षेत्र को जौनसार भाबर कहा जाता है. यहां पर जौनसारी भाषा बोली जाती है. यह भाषा मुख्य रूप से तीन तहसील चकराता, कालसी और त्यूनी में बोली जाती है.

जौनपुरी
टिहरी जिले के जौनपुर विकासखंड में इस भाषा का प्रयोग किया जाता है. टिहरी रियासत के दौरान काफी पिछड़ा क्षेत्र रहा है. लेकिन इससे यहां की अलग संस्कृति और भाषा भी विकसित हुई है.

रवांल्टी
उत्तरकाशी जिले के पश्चिमी क्षेत्र को रवांई कहा जाता है. यह यमुना और टौंस नदियों की घाटियों तक फैला हुआ है. जहां से गढ़वाल के 52 गढ़ों में से एक राईगढ़ स्थित था, जिसके कारण इसका नाम रवांई पड़ा है. इस क्षेत्र में गढ़वाली भाषा बोली जाती है और अन्य क्षेत्रों में भिन्न भाषा बोली जाती है.

जाड़
उत्तरकाशी जिले के जाड़ गंगा घाटी में रहने वाले लोग जाड़ जनजाति के है और जाड़ भाषा ही बोली जाती है. यहां पर उत्तरकाशी के जादोंग, निलांग, हर्षिल, धराली, भटवाणी, डुंडा, बगोरी आदि में इस भाषा के लोग मिल जाएंगे. ये सभी जाड़ भोटिया जनजाति का ही एक अंग है.

बंगाणी
उत्तरकाशी जिले के मोरी तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले क्षेत्र को बंगाण कहा गया है. इसमें मासमोर, पिंगल तथा कोठीगाड़ सामिल है. जिनमें बंगाणी बोली जाती है.

मार्च्छा
गढ़वाल मंडल के चमोली जिले की नीति और माणा घाटियों में रहने वाली भोटिया जनजाति मार्च्छा और तोल्छा भाषा बोलती है. इतना ही नहीं इस भाषा के तिब्बती में कई शब्द मिलते हैं.

जोहारी
यह भी भोटिया जनजाति की एक भाषा है ​जो पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र में बोली जाती है.

थारू
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के तराई क्षेत्रों, नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ क्षेत्राों में ​थारू जनजाति के लोग रहते हैं. कुमांऊ मंडल में यह जनजाति मुख्य रूप से उधमसिंह नगर के खटीमा और सितारगंज विकास खंडो में रहती है. यहां पर मौजूद सभी लोग थारू भाषा बोलते है.

बुक्साणी
कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक तराई की पट्टी में रहने वाले लोग बुक्साणी भाषा को बोलते है. इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रामनगर, डोईवाला, सहसपुर, बहादराबाद, दुगड्डा, कोटद्वार आदि शामिल हैं.

रंग ल्वू
कुमांऊ में मुख्य रूप से पिथौरागढ़ की धारचुला तहसील के दारमा, व्यास और चौंदास पट्टियों में रंग ल्वू भाषा बोली जाती है. इसे तिब्बती बर्मी भाषा का अंग माना जाता है.

राजी
राजी कुमांऊ के जंगलों में रहने वाली जनजाति थी. यह नेपाल की सीमा से सटे उत्तराखंड़ के पिथौरागढ़ के लोगो की भाषा राजी होती है, लेकिन यह भाषा अब वहां से खत्म होती जा रही है. क्योंकि वहां पर इस भाषा को लोग बहुत कम इस्तेमाल करते है.

उत्तराखंड में पंचायतों में फिर बढ़ा प्रशासकों का कार्यकाल, चुनाव कराने में सरकार फेल

0

उत्तराखण्ड की त्रिस्तरीय पंचायतों ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत का कार्यकाल मई और जून 2025 के दौरान समाप्त हो गया है। वर्ष 2019 में गठित इन पंचायतों के कार्यकाल की समाप्ति के बावजूद राज्य में अभी तक नए चुनाव नहीं हो पाए हैं। उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम-2016 की धारा 130(6) के तहत यह व्यवस्था की गई है कि चुनाव से पहले प्रशासक नियुक्त कर पंचायतों का कार्य संचालन कराया जा सकता है।

पहले प्रशासकों का कार्यकाल भी समाप्त

 

पूर्व में शासन ने अधिसूचना जारी कर जिलाधिकारियों, उपजिलाधिकारियों और सहायक विकास अधिकारियों को अस्थायी रूप से पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया था। इन प्रशासकों का कार्यकाल ग्राम पंचायतों में 27 मई, क्षेत्र पंचायतों में 29 मई और जिला पंचायतों में 1 जून 2025 को समाप्त हो गया। लेकिन समय रहते चुनाव संपन्न न हो पाने के कारण अब शासन को एक बार फिर अंतरिम प्रशासक नियुक्त करने पड़े हैं।

 

जुलाई तक के लिए नई प्रशासकीय व्यवस्था लागू

 

शासन द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, जुलाई 2025 में संभावित पंचायत चुनाव तक या 31 जुलाई 2025 (जो पहले हो) तक प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों में निम्न अधिकारियों को प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपी गई है।

-जिला पंचायतों में: संबंधित जिलाधिकारी / जिला मजिस्ट्रेट।

-क्षेत्र पंचायतों में: संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम)।

-ग्राम पंचायतों में: संबंधित विकासखण्ड के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत)।