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अहमदाबाद में प्लेन क्रैश, कई लोगों सवार होने की आशंका!

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गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार, 12 जून की दोपहर को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। मेघानीनगर इलाके में आसमान से ऐसी आफ़त गिरी कि चंद मिनटों में सब कुछ धुएं और आग की लपटों में तब्दील हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले एक ज़ोरदार धमाका हुआ और फिर आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार उठता दिखा। वहीं ज़मीन पर, आग की भयंकर लपटें ऊँचाई तक भड़क उठीं।

शुरुआती जानकारी बता रही है कि ये दुर्घटना सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बिलकुल बगल में हुई। आशंका जताई जा रही है कि यह कोई यात्री विमान था जिसमें कई लोग सवार हो सकते थे, हालांकि इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।

अभी तक किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वो दिल को दहला देने वाले हैं। मलबे में तब्दील हुए विमान के परखचे चारों ओर बिखरे पड़े हैं।

अगले पांच दिन भारी बारिश और तूफान की चेतावनी, अलर्ट मोड पर आपदा प्रबंधन विभाग

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  • 12 से 15 जून 2025 तक का मौसम बुलेटिन.

  • उत्तराखंड के पर्वतीय और तराई क्षेत्रों के लिए चेतावनी.

उत्तराखंड में आगामी दिनों में भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा, गर्जना के साथ आकाशीय बिजली, और तेज झोंकों वाली हवाओं (40-50 किमी/घंटा) की चेतावनी जारी की है। ये स्थितियाँ विशेष रूप से पर्वतीय जिलों में देखी जा सकती हैं, जिससे भूस्खलन, नदियों में जलस्तर वृद्धि, और सड़क अवरोध की संभावनाएँ भी बढ़ गई हैं।

12 जून 2025

  • भारी बारिश: बागेश्वर, चम्पावत, चमोली और पिथौरागढ़

  • तूफानी हवाएँ और बिजली: उत्तरकाशी, चमोली, देहरादून, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़

  • तूफान का असर: टिहरी, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर

13 जून 2025

  • भारी वर्षा संभावित: नैनीताल, चम्पावत, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़

  • तेज हवाएँ और आकाशीय बिजली: सभी पर्वतीय ज़िले

  • तराई और शेष जिलों में भी: तीव्र वर्षा और बिजली गिरने की संभावना

14 जून 2025

  • भारी बारिश: नैनीताल, चम्पावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़

  • तूफानी असर: पूरे कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्र के पर्वतीय ज़िलों में

  • तराई क्षेत्रों में भी बिजली और झोंकों की आशंका

15 जून 2025

  • बारिश का दबाव बना रहेगा: नैनीताल, चम्पावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़

  • आकाशीय बिजली और झोंकेदार हवाएँ: पूरे राज्य में असर की संभावना

  1. भूस्खलन संभावित इलाकों में यात्रा से बचें।

  2. खुले क्षेत्रों में बिजली गिरने से बचाव रखें।

  3. नदियों, नालों के पास न जाएं – जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।

  4. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की चेतावनियों का पालन करें।

BJP का झंडा लगी स्कॉर्पियो ने तीन पुलिसकर्मियों को रौंदा, महिला सिपाही की मौत

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पटना। बुधवार देर रात अटल पथ पर पुनाईचक के पास वाहन जांच कर रही पुलिस टीम को दीघा की ओर से तेज रफ्तार में आ रही स्कॉर्पियो ने टक्कर मार दी। इस हादसे में एक महिला पुलिसकर्मी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एसके पुरी थाने के दो अन्य पुलिसकर्मी, एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई), घायल हो गए।

हादसे में स्कॉर्पियो ने उस वाहन को भी टक्कर मारी, जिसकी पुलिस जांच कर रही थी। इस टक्कर में दोनों वाहनों में सवार तीन लोग भी चोटिल हुए। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां गंभीर रूप से घायल महिला पुलिसकर्मी ने दम तोड़ दिया।

टक्कर मारने वाली स्कॉर्पियो में भाजपा का झंडा लगा था और उसमें से एक हूटर भी बरामद हुआ। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया और दो सवारों को हिरासत में लिया है, जबकि चालक मौके से फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी अवकाश कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि रात करीब 10 बजे एसके पुरी थाने की पुलिस अटल पथ के सर्विस लेन पर वाहन जांच कर रही थी। एक वाहन को रोककर जांच की जा रही थी, तभी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने पुलिस टीम और रुके हुए वाहन को टक्कर मार दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि महिला पुलिसकर्मी उछलकर डिवाइडर पर जा गिरी, while एसआई दीपक कुमार और एएसआई अवधेश कुमार सड़क किनारे गिर पड़े। पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार चालक की तलाश जारी है।

LBS राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में अधिकारियों को संबोधित करेंगे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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देहरादून। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आज मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों को संबोधित करेंगे। वह सुबह 9:45 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगे और 11:30 बजे मसूरी पहुंचकर प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा लेंगे।

अकादमी में चल रहे 127वें इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम में 19 राज्यों से आए 97 अधिकारी भाग ले रहे हैं, जिनमें 73 पुरुष और 24 महिला अधिकारी शामिल हैं। यह कार्यक्रम राज्य सिविल सेवाओं से आईएएस में पदोन्नत अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है, जो ‘विकसित भारत @2047’ और ‘मिशन कर्मयोगी’ के लक्ष्यों से प्रेरित है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को राज्य-स्तरीय प्रशासन से राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार करना है।

प्रशिक्षण सात प्रमुख क्षेत्रों सुशासन, व्यक्तित्व विकास, सहयोगात्मक अधिगम, प्रौद्योगिकी, नेतृत्व, उद्यमिता और क्षेत्रीय अवगाहनपर केंद्रित है। यह नीति निर्माण, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और नैतिक नेतृत्व के लिए सक्षम सिविल सेवकों को तैयार करने का एक मंच प्रदान करता है।

अनामिका कांड पर चुप क्यों? महिला आयोगों और मोर्चा की अध्यक्षों की चुप्पी पर सूर्यकांत धस्माना के तीखे सवाल

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  • अनामिका शर्मा की बेटी अकेली क्यों? महिला आयोगों की चुप्पी पर कांग्रेस का सीधा सवाल।

  • अनामिका कांड पर चुप क्यों हैं महिला मोर्चा और आयोग? कांग्रेस ने घेरा।

देहरादून : उत्तराखंड में महिला अपराधों का ग्राफ जिस रफ्तार से बढ़ा है, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। मगर, इससे ज़्यादा झकझोरने वाली बात यह है कि जिन संस्थाओं को महिलाओं और बच्चियों के अधिकारों की लड़ाई लड़नी चाहिए, वही आज मौन साधे बैठी हैं।

यह आरोप उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने लगाते हुए सीधे तीनों संस्थाओं राज्य महिला आयोग, बाल आयोग, और भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्षों से तीखे सवाल दागे। धस्माना ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा की हरिद्वार जिला अध्यक्ष रही अनामिका शर्मा पर अपनी 13 साल की बेटी के साथ दुराचार करवाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, मगर एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद न महिला आयोग, न बाल आयोग, और न ही भाजपा महिला मोर्चा की कोई भी नेत्री इस बच्ची से मिलने पहुंची है और न ही इस मुद्दे पर एक शब्द बोला गया है।

धस्माना का आरोप है कि ये तीनों संगठन जब स्कूलों में ड्रेस या त्योहारों के नाम पर “धार्मिक रंग” देखने लगते हैं, तब तुरंत कूद पड़ते हैं, लेकिन, जब एक मासूम बच्ची का जीवन तहस-नहस हो रहा हो, तब इनकी ज़ुबान सिल जाती है।

उन्होंने याद दिलाया कि जब अंकिता भंडारी हत्याकांड हुआ था, तब भी यही संस्थाएं चुप रहीं। अब जब खुद सत्तारूढ़ पार्टी की महिला पदाधिकारी ही आरोपों के घेरे में है, तो क्या इन संगठनों की निष्ठा पार्टी के प्रति ज़्यादा है या महिलाओं की अस्मिता के प्रति?

धस्माना ने एलान किया कि कांग्रेस महिला अपराधों, बलात्कारों और हत्याओं के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाएगी। उनका कहना है कि यह “चुप्पी की साज़िश” नहीं चलेगी और जिन संस्थाओं का गठन महिलाओं की रक्षा के लिए हुआ है, उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाएगा।

राजा रघुवंशी हत्याकांड : सोनम का भाई बोला-अगर बहन दोषी है, तो फांसी पर लटका दो!, उसके खिलाफ मैं लडूंगा केस

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इंदौर : राजा रघुवंशी हत्याकांड में चौंकाने वाला मोड़! मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी का सगा भाई गोविंद रघुवंशी अब राजा रघुवंशी के परिवार के समर्थन में खुलकर सामने आ गया है। गोविंद सीधे राजा के घर पहुँचा, उनकी मां उमा देवी को सिर झुकाकर प्रणाम किया और साफ कहा कि अगर मेरी बहन दोषी है, तो उसे फांसी पर लटका देना चाहिए! राजा रघुवंशी का परिवार जिस सदमे से गुजर रहा है, उसे समझते हुए गोविंद ने कहा कि इस परिवार ने अपना बेटा खोया है, मैंने माफी मांगी है। अगर सोनम ने हत्या की योजना बनाई, तो मैं खुद उसके खिलाफ केस लडूंगा।

सोनम और राजा के रिश्ते को लेकर गोविंद ने साफ किया कि राज कुशवाहा तो हमारे यहाँ बस एक कर्मचारी था और सोनम उसे राखी बाँधती थी। उनके बीच अफेयर की बात झूठ है। गोविंद ने यह भी साफ किया कि जितेंद्र रघुवंशी हवाला कारोबारी नहीं, बल्कि उनका मौसी का बेटा है, जो उनके गोदाम में काम करता है। हम ही उसका बैंक अकाउंट संभालते हैं। परिवार को इस मामले से जोड़ना गलत है।

गोविंद ने कहा क अब सोनम से कोई संपर्क नहीं है। हमने उससे हर रिश्ता खत्म कर लिया है। अब हम राजा के लिए लड़ेंगे।” हम राजा रघुवंशी के परिवार के साथ खड़े हैं… सोनम ने अभी तक खुद को दोषी नहीं माना, लेकिन सबूतों से लगता है कि साजिश उसी ने रची।

उत्तराखंड : कोरोना के तीन नए मामले, बढ़कर 38 हुई मरीजों की संख्या

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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कोरोना वायरस के तीन नए मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है। इन मामलों के साथ जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या अब 38 हो गई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

गर्भवती महिला समेत तीन नए मरीज
विकासनगर की 20 वर्षीय गर्भवती महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। देहरादून के कोविड नोडल अधिकारी डॉ. चंदन सिंह ने बताया कि महिला रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल गई थी, जहां उनकी कोविड जांच की गई। जांच में वह पॉजिटिव पाई गईं। उनकी हालत स्थिर है और उन्हें सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दूसरा मामला सहसपुर मेन बाजार का है, जहां 45 वर्षीय एक व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि हुई। डॉ. सीएस रावत के अनुसार, व्यक्ति को खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षण दिखने पर जांच कराई गई, जिसमें वह पॉजिटिव पाए गए। तीसरा मामला जलवायु विहार टावर का है, जहां 41 वर्षीय एक महिला में कोरोना संक्रमण पाया गया। यह महिला हल्के लक्षणों के साथ होम आइसोलेशन में है।

स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता
डॉ. चंदन सिंह ने बताया कि जिले में कोविड जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। सभी अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों के लिए अलग से फ्लू ओपीडी संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि ओमिक्रॉन वेरिएंट उतना घातक नहीं है, लेकिन लोगों को मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखने और सैनिटाइजेशन जैसे नियमों का पालन करना जरूरी है।

लोगों से सावधानी की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे लापरवाही न बरतें और कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। खासकर चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। देहरादून में मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2025 को हल्की बारिश और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) की संभावना है, जिसके चलते स्वास्थ्य सावधानियां और भी जरूरी हो जाती हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जनता का सहयोग इस महामारी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लोगों से अनुरोध है कि वे नियमित जांच कराएं और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

उत्तराखंड : केदारनाथ जा रही यात्रियों से भरी बस दुर्घटनाग्रस्त, तीन गंभीर घायल, 15 को आईं मामूली चोटें

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नई टिहरी: टिहरी जिले में एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। नई टिहरी-घनसाली मोटर मार्ग पर टिपरी से करीब 1.5 किमी आगे डबा खाले नामक स्थान पर एक यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे के वक्त बस में करीब 35 यात्री सवार थे।

हादसे में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, इनमें एक पुरुष, एक महिला और एक बच्चा शामिल है। सभी घायलों को 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नंदगांव पहुंचाया गया। इसके अलावा करीब 15 यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं।

बताया जा रहा है कि यह बस उत्तरकाशी से केदारनाथ के लिए रवाना हुई थी और यात्रियों का दल गुजरात से आया हुआ था। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद प्रशासन और राहत टीम मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार मुहैया कराया जा रहा है, और अन्य यात्रियों की स्थिति भी जांची जा रही है।

उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में 6 बड़े फैसलों पर मुहर

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देहरादून :मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में छह अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। इन निर्णयों में प्रदेश के कृषि, खनन, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा, और महिला एवं बाल विकास जैसे क्षेत्रों से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।

कैबिनेट ने जैव प्रौद्योगिकी परिषद से जुड़े एक बड़े प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। प्रदेश में पहले से मौजूद दो जैव प्रौद्योगिकी केंद्रों में कार्य संचालन के लिए 46 पदों की नियमावली को मंजूरी दे दी गई है। इससे इन केंद्रों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक स्थिरता को बल मिलेगा।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में, खनन विभाग में 18 नए पदों का सृजन किया गया है। इससे विभाग की कार्यक्षमता और निगरानी क्षमता को मजबूती मिलेगी।

कैबिनेट ने पर्यावरणीय दृष्टिकोण से बड़ा फैसला लेते हुए आसन बैराज क्षेत्र को ‘वेटलैंड ज़ोन’ घोषित कर दिया है। आसन नदी का यह खंड लगभग 53 किलोमीटर लंबा है। पूर्व में इस फैसले पर आपत्तियां मंगाई गई थीं, जिन्हें दूर करने के बाद यह निर्णय लिया गया।

देहरादून की रिस्पना और बिंदाल नदियों के फ्लड जोन क्षेत्र में अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), मोबाइल टावर, रोपवे टावर, और एलीवेटेड रोड जैसे परियोजनाओं को बनाने की अनुमति मिल गई है। इससे शहर की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड : जमीन बंटवारा विवाद बना भयावह, युवक ने तहसील में खुद को लगाई आग, हालत गंभीर

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उधम सिंह नगर: उत्तराखंड के खटीमा में मंगलवार की शाम एक ऐसी घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया, जो न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक गहरी चेतावनी बन गई। खटीमा तहसील परिसर में दियूरी गांव के नारायण सिंह ने पारिवारिक जमीन विवाद के चलते आवेश में आकर अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर खुद को आग के हवाले कर दिया। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी थी, बल्कि पारिवारिक विवादों के गहरे जख्मों और मानसिक दबाव की भयावह तस्वीर को भी उजागर करती है।

मंगलवार शाम करीब 6 बजे, जब तहसील परिसर में दिन की भागदौड़ थम रही थी, अचानक एक चीख ने वहां मौजूद लोगों के कानों को चीर दिया। नारायण सिंह, जो अपने पिता की 46 बीघा जमीन के बंटवारे को लेकर तहसील आए थे, ने एकाएक अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ उड़ेल लिया और आग लगा ली। लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते उनका शरीर आग की चपेट में आ गया। वहां मौजूद स्टांप वेंडर राशिद अंसारी और अजीम ने बिना वक्त गंवाए कंबल और मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। उनकी बहादुरी ने आग को तो नियंत्रित कर लिया, लेकिन नारायण 60 प्रतिशत तक जल चुके थे।

घटना की सूचना मिलते ही खटीमा कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। 108 एंबुलेंस की मदद से नारायण को खटीमा नागरिक चिकित्सालय ले जाया गया। अस्पताल में डॉ. मनी पुनियानी ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन नारायण की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनके शरीर का 60 प्रतिशत हिस्सा जल चुका है, और उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। तहसील परिसर में इस घटना के बाद सन्नाटा पसर गया, और भारी भीड़ जमा हो गई। लोग इस त्रासदी पर चर्चा करते हुए भावुक नजर आए।

जांच में सामने आया कि नारायण सिंह अपने पिता की खरीदी 46 बीघा जमीन के बंटवारे को लेकर तहसील आए थे। बताया जाता है कि पिता द्वारा जमीन का बंटवारा न किए जाने से वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। यह तनाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने तहसील परिसर में ही यह आत्मघाती कदम उठा लिया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन असंख्य परिवारों की पीड़ा को दर्शाती है, जहां संपत्ति के बंटवारे जैसे मुद्दे रिश्तों को तार-तार कर देते हैं। नारायण का यह कदम उनके भीतर की हताशा और समाज में बढ़ते मानसिक दबाव का एक दुखद उदाहरण है।

खटीमा कोतवाली पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर नारायण को इस हद तक जाने के लिए क्या मजबूर किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि नारायण एक मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, लेकिन पारिवारिक विवाद ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने अपनी जिंदगी को ही दांव पर लगा दिया। इस घटना ने न केवल खटीमा, बल्कि पूरे उत्तराखंड में एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या संपत्ति का लालच और पारिवारिक कलह इतना बड़ा रूप ले सकता है?

यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि हमें समय रहते एक-दूसरे के दर्द को समझना होगा। खटीमा के इस दुखद हादसे ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि संपत्ति और रिश्तों में से क्या ज्यादा कीमती है। नारायण सिंह की जिंदगी अब डॉक्टरों के भरोसे है।