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नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर: 10 बार सीएम, अब राज्यसभा का रास्ता, BJP को मिलेगी बिहार की कमान?

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पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य की सत्ता से दिल्ली की ओर रुख करने के लिए राजी कर लिया है। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बावजूद अब वह राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर रहे हैं। 2005 से 2025 तक विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में नीतीश ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या भाजपा कोई चौंकाने वाला चेहरा सामने लाएगी या परंपरागत नामों पर दांव खेलेगी?

नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने पहली बार 2000 में सिर्फ सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला था। उसके बाद से वह बिहार की राजनीति के केंद्र में बने रहे, गठबंधनों को तोड़ते-जोड़ते हुए। अब राज्यसभा जाने के फैसले से बिहार में नई सत्ता समीकरण बनने की संभावना है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, नीतीश के जाने से पार्टी को पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिलेगा, जो 2014 के बाद से उसके चौंकाने वाले फैसलों की कड़ी में शामिल होगा।

नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का सफर

नीतीश कुमार बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उनके कार्यकाल में विकास, सुशासन और गठबंधन राजनीति की मिसालें देखने को मिलीं। यहां उनके मुख्यमंत्री पद की शपथों का क्रमवार विवरण:

  • 2000: पहली बार 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न जुटा पाने के कारण 10 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा। यह सिर्फ सात दिनों का कार्यकाल था।
  • 2005: विधानसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन से नीतीश दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। यह एनडीए गठबंधन की शुरुआत थी, जिसने बिहार को ‘जंगल राज’ से बाहर निकालने का दावा किया।
  • 2010: एक बार फिर विधानसभा चुनाव में जीत के बाद तीसरी बार शपथ ली। इस कार्यकाल में सुशासन बाबू की छवि मजबूत हुई।
  • 2014: लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। जीतन राम मांझी को सीएम बनाया, लेकिन 2015 में अंदरूनी कलह के बाद मांझी को हटाकर चौथी बार खुद शपथ ली।
  • 2015: महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस) की जीत के बाद पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने। यह गठबंधन एनडीए के खिलाफ था।
  • 2017: तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद महागठबंधन छोड़कर एनडीए में लौटे। जुलाई 2017 में छठी बार शपथ ली।
  • 2020: विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बावजूद जदयू की सीटें कम होने पर भी सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। भाजपा में असंतोष की खबरें आईं।
  • 2022: एनडीए से अलग होकर महागठबंधन में लौटे और आठवीं बार शपथ ली।
  • 2024: जनवरी में महागठबंधन छोड़कर फिर एनडीए में शामिल हुए, नौवीं बार मुख्यमंत्री बने। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
  • 2025: नवंबर के चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद दसवीं बार शपथ ली। अब यह उनका आखिरी कार्यकाल साबित हो रहा है, क्योंकि वह राज्यसभा जा रहे हैं।

नीतीश कुमार ने 37 साल की राजनीति में वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी सरकारों में केंद्रीय मंत्री भी रहे। अब मोदी सरकार में उनकी भूमिका क्या होगी, यह देखना बाकी है।

अगला मुख्यमंत्री कौन? 

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। भाजपा 2014 से चौंकाने वाले फैसले लेती रही है—जैसे नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना। संभावित नामों में शामिल हैं:

  • नित्यानंद राय: केंद्रीय राज्यमंत्री, 2020 चुनाव से पहले चर्चा में थे।
  • सम्राट चौधरी: उपमुख्यमंत्री, 2025 चुनाव से पहले नाम उभरा।
  • नितिन नवीन: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष, लेकिन राज्यसभा नामांकन के बाद सीएम की दौड़ से बाहर माने जा रहे हैं।
  • श्रेयसी सिंह: भाजपा कोटे की मंत्री, महिला चेहरे के रूप में चर्चा।

कुछ सूत्रों का कहना है कि भाजपा कोई नया चेहरा ला सकती है, जो ओबीसी या ईबीसी समुदाय से हो। नीतीश कुमार कब इस्तीफा देंगे—खरमास से पहले या बाद—यह भी सवाल है। एनडीए विधायकों के बयानों से लगता है कि फैसला जल्द होगा।

नीतीश कुमार के इस फैसले को ‘महा-त्याग’ कहा जा रहा है। पटना में जदयू दफ्तर में हंगामा हुआ, जहां अमित शाह नीतीश से मिले। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा की साजिश बताया। बिहार में राजनीतिक हलचल तेज है, और सभी की नजरें नए सीएम पर टिकी हैं।

उत्तराखंड में इस दिन से पहाड़ों पर हल्की बारिश-बर्फबारी की संभावना, मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी

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देहरादून : मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने उत्तराखंड के लिए अगले कुछ दिनों का जनपद-स्तरीय पूर्वानुमान जारी किया है। राज्य में फिलहाल शुष्क और साफ मौसम बना हुआ है, लेकिन 8 मार्च से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बदलाव शुरू हो सकता है।

8 मार्च को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली चमकने और 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है, जबकि अन्य सभी जिलों में मौसम शुष्क रहेगा।

9 से 11 मार्च के बीच उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी कहीं-कहीं इसी तरह की बहुत हल्की बारिश, गरज-चमक और 3800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी हो सकती है, बाकी जिलों में शुष्क मौसम जारी रहेगा।

मौसम विभाग के अनुसार अगले 3-4 दिनों में मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान धीरे-धीरे 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे क्षेत्रों में गर्मी का एहसास तेज हो जाएगा। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए यात्रा करने वालों को सतर्क रहने और मौसम अपडेट चेक करने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड :भीषण हुई जंगल की आग, 20 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलकर राख, गौशालाओं और गांवों पर खतरा

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थराली : उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज के जंगलों में बुधवार से भीषण आग लगी हुई है, जो अब तक काबू में नहीं आई है। चेपड़ों और सौगांव गांवों के जंगल से शुरू हुई यह आग तेजी से फैलकर खाड़ीबगड़, सौगांव जूनिधार और गोठिंडा के वन क्षेत्रों तक पहुंच गई है। आग ने अब तक 20 हेक्टेयर से अधिक जंगल क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसमें मुख्य रूप से घने चीड़ के जंगल जलकर खाक हो गए हैं।

आग की लपटें चेपड़ों गांव की गौशालाओं तक पहुंच गई हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ऊपर की ओर लपटें जूनिधार गांव तक फैल चुकी हैं, जिससे ग्रामीण आबादी और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। जलते पेड़ और चट्टानें स्टेट हाईवे थराली-देवाल मोटर मार्ग पर गिर रही हैं, जिससे राहगीरों और वाहनों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो गया है।

वन विभाग की टीम और अग्निशमन कर्मचारी आग बुझाने में जुटे हैं, लेकिन खड़ी चट्टानों, घने जंगलों और रात होने के कारण ऑपरेशन में भारी चुनौतियां आ रही हैं। मध्य पिंडर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी ने बताया कि टीम लगातार प्रयासरत है, लेकिन लगातार पत्थर और पेड़ गिरने से आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आग लगाने वाले शरारती तत्वों की तलाश तेज कर दी गई है और जांच चल रही है।

आग से बहुमूल्य वनस्पति और छोटे-बड़े पेड़ जल चुके हैं, जिससे लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। पूरे क्षेत्र में घना धुआं छा गया है, जिससे आंखों में जलन, श्वास संबंधी समस्याएं और प्रदूषण बढ़ गया है। वन्यजीवों के लिए भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि कई प्रजातियां आग की चपेट में आ सकती हैं।

वन विभाग के अनुसार, लंबे समय से बारिश न होने और सूखे मौसम के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी आग बुझाने में सहयोग किया है, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और हाईवे पर अनावश्यक यात्रा टालने की अपील की है।

बिहार में सियासी हलचल: नीतीश कुमारजा सकते हैं राज्यसभा, कौन बनेगे CM, अटकलें शुरू?

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पटना: बिहार की राजनीति में बुधवार से शुरू हुई अटकलों ने गुरुवार को और तेजी पकड़ ली है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार में दो दशकों से अधिक समय से सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का संकेत माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार आज (5 मार्च) सुबह विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रह सकते हैं। जदयू की ओर से नीतीश कुमार के साथ रामनाथ ठाकुर का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा ने पहले ही अपने दो उम्मीदवारों—राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य—के नाम घोषित कर दिए हैं, जबकि राजग सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा को दूसरी बार राज्यसभा भेजने की पुष्टि हो चुकी है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद भाजपा बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। NDA में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी (89 विधायक) होने के कारण यह संभव माना जा रहा है। संभावित उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, नित्यानंद राय या अन्य भाजपा नेता शामिल हो सकते हैं।

इस बीच, नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार (करीब 40 वर्ष) की राजनीति में एंट्री की खबरें भी जोर पकड़ रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि समझौते के तहत निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से एक या दो डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “आज होली है। ऐसे मजाक होली पर आम होते हैं। नीतीश कुमार जी ही मुख्यमंत्री हैं।

जदयू के विधान परिषद सदस्य संजय कुमार ने भी आश्चर्य जताते हुए कहा, “पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों के बारे में हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। रामनाथ ठाकुर अपनी सीट बरकरार रख सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री खुद लेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं। नामांकन की अंतिम तिथि आज है, स्क्रूटनी कल होगी। NDA के पास विधानसभा में बहुमत होने से सभी पांच सीटें जीतने की संभावना मजबूत है।

होली के बाद मौसम ने ली करवट, उत्तर भारत में गर्मी बढ़ी, पहाड़ों पर बारिश की संभावना

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देहरादून/नई दिल्ली: होली (4 मार्च) के ठीक बाद मौसम ने तेजी से मिजाज बदला है। रंगों के त्योहार के दौरान मैदानी इलाकों में चुभन भरी गर्मी रही, जबकि अब भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में तापमान और बढ़ेगा, वहीं पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

IMD की ताजा प्रेस रिलीज और अपडेट्स के मुताबिक:

  • उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से 3-6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में अगले 4-5 दिनों में तापमान में 2-4 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।
  • दिल्ली-NCR में आज (5 मार्च) अधिकतम तापमान 33-35 डिग्री के आसपास रह सकता है, जो सामान्य से 3-5 डिग्री अधिक है। अगले सप्ताह तक यह 35-36 डिग्री तक पहुंच सकता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव: एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ 4 मार्च से प्रभावी है, जिससे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 4-9 मार्च तक हल्की बारिश/बर्फबारी संभव है। 6-7 मार्च से नया विक्षोभ सक्रिय होने की उम्मीद है, जिसका असर हिमाचल प्रदेश (7-10 मार्च) और उत्तराखंड (8-10 मार्च) में हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी के रूप में दिखेगा।
  • पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मेघालय में 3-4 मार्च को हल्की-मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें देखी गईं/देखी जा सकती हैं। सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी कुछ इलाकों में हल्की बारिश संभव।
  • तेज सतही हवाएं (20-30 किमी/घंटा) हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और असम-मेघालय में चल सकती हैं, जिससे प्रदूषण में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन गर्मी का एहसास बढ़ेगा।
  • दक्षिण भारत और पश्चिमी तट पर मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन कुछ इलाकों में गर्म और आर्द्र हालात बने रहेंगे।

IMD ने सलाह दी है कि मैदानी इलाकों में बढ़ती गर्मी से सावधानी बरतें—हाइड्रेटेड रहें, दोपहर में बाहर निकलने से बचें। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, यात्रा करते समय सतर्क रहें।

कांग्रेस ने की राज्यसभा चुनावों के लिए छह उम्मीदवारों की घोषणा

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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों के लिए छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। तेलंगाना से वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी को दोबारा नामित किया गया है, जबकि दूसरी सीट पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के करीबी सलाहकार वेम नरेंद्र रेड्डी को मैदान में उतारा गया है।

एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी आधिकारिक संचार में यह जानकारी दी गई है। सिंघवी वर्तमान में तेलंगाना से राज्यसभा सदस्य हैं और यह उनका संभावित पांचवां कार्यकाल होगा। वहीं, वेम नरेंद्र रेड्डी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और पहले तेलुगु देशम पार्टी से जुड़े रहे थे, लेकिन 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए।

अन्य उम्मीदवारों में शामिल हैं:

  • छत्तीसगढ़ से आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम (वर्तमान सदस्य, पुनर्नामांकन)।
  • हरियाणा से करमवीर सिंह बौद्ध।
  • हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा।
  • तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक।

राज्यसभा की कुल 37 सीटें 10 राज्यों (महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना) से अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं। इन चुनावों के लिए मतदान 16 मार्च 2026 को होगा और मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे होगी।

नॉमिनेशन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज (5 मार्च) है, स्क्रूटनी कल (6 मार्च) को होगी और उम्मीदवार 9 मार्च तक नाम वापस ले सकते हैं। तेलंगाना में कांग्रेस के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या है, जिससे एक सीट पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए अन्य दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।

नाम घोषित होने के बाद वेम नरेंद्र रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

MDDA एचआईजी कॉलोनी में रंगारंग होली कार्यक्रम, खूब उड़ा अबीर-गुलाल

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देहरादून। एमडीडीए एचआईजी कॉलोनी में होली के पावन अवसर पर एक रंगारंग और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलोनी के निवासियों ने जमकर भाग लिया। यह उत्सव रंगों, संगीत, नृत्य और आपसी भाईचारे की मिसाल बन गया।

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उत्सव में उमड़ा रंगों का मेला

एचआईजी कॉलोनी के निवासियों ने होली को पारंपरिक तरीके से मनाया। सुबह से ही लोग एकत्र हुए और एक-दूसरे पर अबीर-गुलाल, रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कॉलोनी के निवासियों ने बताया कि इस साल का होली मिलन विशेष था, क्योंकि इसमें सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हुए। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए, जबकि पुरुषों ने ठंडाई और गुजिया का लुत्फ उठाया।

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सामुदायिक एकता का प्रतीक

एमडीडीए एचआईजी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यह कार्यक्रम सिर्फ होली मनाने का नहीं, बल्कि पड़ोसियों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का भी माध्यम बना। यहां हर साल की तरह इस बार भी सभी परिवारों ने मिल-जुलकर उत्सव मनाया, जिससे आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ा। कॉलोनीवासियों ने बताया कि कार्यक्रम सुबह 10 बजे से दोपहर तक चला, जिसमें स्वच्छता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। ऑर्गेनिक कलर्स का इस्तेमाल किया।

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होली की शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर होली की बधाई दी। कॉलोनी के बच्चे और युवा विशेष रूप से उत्साहित दिखे, जो रंगों से लिपटे हुए फोटो खिंचवाते नजर आए। एमडीडीए एचआईजी कॉलोनी का यह रंगारंग होली कार्यक्रम देहरादून के अन्य इलाकों के लिए भी एक उदाहरण बन गया, जहां सामुदायिक स्तर पर त्योहारों को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा सकता है।

अस्पताल का दर्जा बढ़ा, सुविधाएं नहीं: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी की बदहाल एंबुलेंस

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मोरी (उत्तरकाशी)। उत्तरकाशी जिले के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदहाल है। मोरी का सरकारी अस्पताल, जिसे हाल ही में उपजिला चिकित्सालय का दर्जा दिया गया है, आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का दर्जा तो बढ़ा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

उपजिला अस्पताल बना, लेकिन हालात पुराने

मोरी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और फिर उपजिला चिकित्सालय के रूप में अपग्रेड किया गया। सरकार की ओर से विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत किए गए और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे भी किए गए। लेकिन वह केवल हवाई साबित हुए।

लेकिन, स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में अभी भी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है। कई बार मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए भी इंतजार करना पड़ता है।

यह होनी चाहिए सुविधाएं 

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया है। अस्पताल के संचालन के लिए 37 पदों (25 अस्थायी व 12 आउटसोर्स) की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृत पदों में चिकित्सा अधीक्षक, पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट, जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, दंत शल्यक, नर्सिंग अधिकारी, लैब टेक्नीशियन आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।

एंबुलेंस सेवा सबसे बड़ी चिंता

अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। एक मात्र उपलब्ध एंबुलेंस पुरानी और खराब हालत में है। ऐसे में अगर किसी गंभीर मरीज को जिला अस्पताल उत्तरकाशी या एम्स ऋषिकेश रेफर करना पड़े, तो समय पर परिवहन की व्यवस्था नहीं हो पाती। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। आलम यह है कि एंबुलेंस की खिड़की पर शीशा तक नहीं है। यह भरोसा नहीं है कि अगर एंबुलेंस लेकर जाएंगे तो वह गंतव्य तक पहुंच भी पाएगी या नहीं?

चुनावी वादों पर उठे सवाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय नेता क्षेत्र में आकर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद वे वादे सिर्फ कागजों और सोशल मीडिया तक ही सीमित रह जाते हैं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यहां मरीज को इलाज से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है। अगर कोई इमरजेंसी हो जाए तो हालात और भी खराब हो जाते हैं। उनका कहना है कि सिर्फ अस्पताल का नाम बदल देने से काम नहीं चलेगा, सुविधाएं भी बढ़ानी होंगी।

जनता की मांग: मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था

मोरी क्षेत्र के लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में—

  • पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती
  • आधुनिक चिकित्सा उपकरण और दवाइयों की उपलब्धता।
  • बेहतर एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं।
  • नियमित निरीक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी जैसे कदम उठाए जाने जरूरी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जल्द ही मोरी उपजिला अस्पताल की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जाएंंगे राज्यसभा, जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) का है, जिन्हें बिहार से उच्च सदन भेजा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल से पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है। कुल 9 उम्मीदवारों की इस सूची में विभिन्न राज्यों से मजबूत चेहरों को जगह दी गई है, जो पार्टी की रणनीतिक तैयारी को दर्शाती है।

जारी उम्मीदवारों की सूची 

बिहार: नितिन नवीन (राष्ट्रीय अध्यक्ष) और शिवेश कुमार

असम: तेराश गोवाला और जोगेन मोहन

छत्तीसगढ़: लक्ष्मी वर्मा

हरियाणा: संजय भाटिया

ओडिशा: मनमोहन सामल और सुजीत कुमार

पश्चिम बंगाल: राहुल सिन्हा

यह घोषणा आगामी विधानसभा चुनावों (जैसे पश्चिम बंगाल, असम आदि) और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा की दूरगामी तैयारियों का संकेत देती है। नितिन नवीन की उम्मीदवारी से बिहार में पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, जहां हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया था।

वहीं, राहुल सिन्हा का समृद्ध अनुभव और संगठनात्मक कौशल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ भाजपा की लड़ाई को और मजबूती प्रदान करेगा। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च 2026 को होने हैं, और नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित है।

खामेनेई की मौत पर कश्मीर में उबाल, कर्फ्यू जैसे हालात, स्कूल-कॉलेज बंद

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श्रीनगर: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में तनाव चरम पर पहुंच गया है। घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिसके चलते प्रशासन ने सख्त सुरक्षा उपाय अपनाए हैं। श्रीनगर सहित कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में निषेधाज्ञा और पाबंदियां लागू कर दी गई हैं, जबकि राजौरी और पुंछ जिलों में भी बंद का आह्वान किया गया है।

अमेरिका-इजरायल की संयुक्त हवाई कार्रवाई में खामेनेई की मौत की खबर के बाद रविवार से कश्मीर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। सोमवार को यह दूसरा दिन रहा, जिसमें श्रीनगर के लाल चौक को पूरी तरह सील कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने “डेथ टू अमेरिका, डेथ टू इजरायल” के नारे लगाए और कई जगहों पर पथराव हुआ, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं धीमी कर दी गई हैं और प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस और पैरामिलिट्री बल तैनात हैं।

शैक्षणिक संस्थान बंद, परीक्षाएं टलीं

प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कश्मीर घाटी में सभी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को दो दिनों (2 और 3 मार्च) के लिए बंद कर दिया है। कश्मीर विश्वविद्यालय (KU) ने अपनी चल रही परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। क्लस्टर यूनिवर्सिटी श्रीनगर (CUS) सहित अन्य विश्वविद्यालयों ने भी परीक्षाएं टाल दी हैं। नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी। यह फैसला घाटी में सर्दियों की छुट्टियों के बाद कक्षाएं फिर से शुरू होने वाले समय पर आया है, जिससे छात्रों को असुविधा हो रही है।

राजौरी-पुंछ में बंद का आह्वान

राजौरी और पुंछ जिलों में भी मुस्लिम समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। कई मुस्लिम संगठनों ने मंगलवार को राजौरी में बंद का ऐलान किया है। मंडी और अन्य इलाकों में भी बंद का असर देखा गया। इन जिलों में शिया आबादी काफी है, जहां खामेनेई की मौत पर शोक सभाएं और प्रदर्शन हुए।