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उत्तराखंड पंचायत चुनाव: हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग की किरकिरी, कांग्रेस ने की आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग

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देहरादून: उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगा है। नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने उन प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित करने पर रोक लगा दी है, जिनके नाम दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयोग को आड़े हाथों लिया है और अब राज्य निर्वाचन आयुक्त को तत्काल पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करने की तैयारी में है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर रुका चुनाव चिह्न आवंटन

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि नैनीताल हाईकोर्ट ने उन प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित न करने का निर्देश दिया था, जो दो जगहों पर मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होने के कारण पंचायती राज अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं।

इस आदेश के आलोक में, राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्णय लिया है कि हाईकोर्ट की सुनवाई पूरी होने और अंतिम आदेश जारी होने तक ऐसे प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किए जाएंगे। आयोग ने कल दोपहर तक इस प्रक्रिया को स्थगित रखने का आदेश जारी किया है।

कांग्रेस का आरोप: नियमों का मजाक बना रहा आयोग

कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को राज्य निर्वाचन आयोग की ‘धींगामुशती’ (मनमानी) करार दिया है। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को सत्ताधारी भाजपा के अनुकूल बनाने के लिए सारे नियमों और कायदों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि आयोग ने प्रदेश में चल रहे चुनावों को मजाक बना दिया है।

धस्माना ने बताया कि कांग्रेस ने 23 जून को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्य निर्वाचन आयुक्त से मुलाकात की थी। उस दौरान, कांग्रेस ने यह आशंका जताई थी कि भाजपा ऐसे लोगों को चुनाव में उतारने की तैयारी कर रही है जिनके नाम निकाय चुनावों और पंचायत चुनावों दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं, या जिनके नाम दो-दो जिलों में दर्ज हैं।

आयोग पर भाजपा को फायदा पहुँचाने का आरोप

कांग्रेस ने आयोग से स्पष्ट रूप से पीठासीन अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी कि ऐसे प्रत्याशियों को पंचायती राज अधिनियम के तहत अयोग्य घोषित किया जाए। हालांकि, धस्माना के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके ठीक विपरीत यह आदेश जारी किया कि दो जगह नाम दर्ज होने के आधार पर प्रत्याशियों के नामांकन रद्द न किए जाएं।

धस्माना ने कहा कि यह आयोग द्वारा कानून और नियम विरुद्ध किया गया कार्य है, जिसके चलते माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगनादेश दिया और यह वर्तमान स्थिति उत्पन्न हुई।

कांग्रेस ने घोषणा की है कि राज्य निर्वाचन आयोग के इस “कानून और नियम विरुद्ध” कार्य के आधार पर, उनका प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही राज्यपाल से मुलाकात करेगा और राज्य निर्वाचन आयुक्त को तत्काल उनके पद से बर्खास्त करने की मांग करेगा।

राज्य निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला: प्रतीक्षा में सिंबल आवंटन, हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

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देहरादून : पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर राज्य में असमंजस की स्थिति एक बार फिर गहरा गई है। रविवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए सोमवार दोपहर 2:00 बजे तक के लिए सिंबल आवंटन की प्रक्रिया स्थगित कर दी है। आयोग की यह कार्रवाई हाईकोर्ट में सोमवार को होने वाली अहम सुनवाई के मद्देनज़र की गई है।

सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने उन उम्मीदवारों पर रोक लगा दी है जिनका नाम नगर निकाय और पंचायत दोनों वोटर लिस्ट में है। ऐसे में अब यह साफ नहीं है कि ऐसे दावेदार चुनाव लड़ सकेंगे या नहीं। इस निर्णय से कई प्रत्याशियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस विषय में हाईकोर्ट में एक याचिका (एप्लीकेशन) दाखिल की है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। आयोग का पक्ष है कि तकनीकी कारणों से कई बार मतदाता नाम दो सूचियों में दर्ज हो जाते हैं, और ऐसे लोगों को चुनाव से वंचित करना अनुचित होगा।

सोमवार को हाईकोर्ट की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। आयोग के अधिवक्ता अदालत के समक्ष आयोग का पक्ष रखेंगे और स्थिति को स्पष्ट करने का आग्रह करेंगे। तब तक सिंबल आवंटन की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम से चुनावी प्रक्रिया में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब सभी की नजरें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि दोहरी वोटर लिस्ट वाले प्रत्याशियों का भविष्य क्या होगा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड’ के संकल्प को दोहराया, बल्लीवाला में हुआ सम्मान समारोह

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बल्लीवाला स्थित एक कार्यक्रम में “भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड” अभियान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर आधारित धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में प्रतिभाग किया। इस मौके पर उन्होंने उपस्थित लोगों को भ्रष्टाचार से मुक्त उत्तराखंड की शपथ दिलाई और कहा कि यह अभियान केवल शासन का नहीं, बल्कि जनआंदोलन बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान समारोह सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के मूल्यों से राज्य को आगे बढ़ाने वाले प्रत्येक नागरिक का अभिनंदन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और युवाओं की उम्मीदों की जीत है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को अपनाते हुए पारदर्शिता लाने के लिए तकनीकी माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया है। इसमें ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली की निगरानी, सीएम हेल्पलाइन 1905 और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1064 जैसी सुविधाएं शामिल हैं। बीते तीन वर्षों में भ्रष्टाचार में संलिप्त 200 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पिछले चार वर्षों में 24 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता का लागू होना, सख्त नकल विरोधी कानून, लैंड जिहाद और लव जिहाद पर कार्रवाई, धर्मांतरण एवं दंगारोधी कानूनों के ज़रिए शासन को मज़बूती दी गई है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने “ऑपरेशन कालनेमि” का भी उल्लेख किया, जिसके तहत अब तक 200 से अधिक छद्म वेशधारी संदिग्धों को पकड़ा गया है, जिनमें कुछ बांग्लादेशी घुसपैठिए भी शामिल हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसे किसी भी संदिग्ध की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” के संकल्प को राज्य सरकार पूरी निष्ठा से निभा रही है और उत्तराखंड को पारदर्शी, जनहितकारी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस अवसर पर विधायक खजान दास, स्वामी चिदानंद सरस्वती, किशन गिरी महाराज, राकेश ऑबेरॉय, पंकज गुप्ता समेत कई धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बाबाओं के वेश में ठगी करने वालों पर पुलिस का शिकंजा, नकली ताबीज व ठगी का सामान बरामद

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उत्तराखंड में ठगी और पाखंड के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘ऑपरेशन कालनेमि’ शुरू किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुक्रवार से शुरू हुए इस विशेष अभियान में अब तक कुल 134 फर्जी साधु-संतों और तांत्रिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये आरोपी आमजन, खासकर श्रद्धालुओं को झांसा देकर ताबीज, झाड़-फूंक और भविष्य बताने के नाम पर ठगी कर रहे थे।

हरिद्वार में सर्वाधिक गिरफ्तारियां
शनिवार को अभियान के दूसरे दिन पुलिस ने हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में छापेमारी की। हरिद्वार से 45, देहरादून से 23 और ऊधमसिंह नगर से 66 ढोंगी गिरफ्तार किए गए। इससे पहले शुक्रवार को अभियान के पहले दिन 25 आरोपियों को पकड़ा गया था, जिनमें एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल था।

पुलिस एक्ट और शांति भंग करने की धाराओं में कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के खिलाफ शांति भंग करने और उत्तराखंड पुलिस एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस इन सभी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

एसएसपी देहरादून का बयान
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने बताया कि ऑपरेशन कालनेमि के तहत सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय ऐसे लोगों को चिह्नित करें जो साधु-संत या फकीर के वेश में आम नागरिकों को ठग रहे हैं। शनिवार को देहरादून के विभिन्न थाना क्षेत्रों से 23 ऐसे ढोंगियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 10 अन्य राज्यों के निवासी हैं।

नकली ताबीज और झाड़-फूंक का सामान बरामद
पुलिस को आरोपियों के पास से नकली ताबीज, झाड़-फूंक के उपकरण, और अन्य भ्रम फैलाने वाला सामान मिला है। माना जा रहा है कि ये लोग धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर लंबे समय से ठगी का काम कर रहे थे।

मुख्यमंत्री की चेतावनी
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा है कि उत्तराखंड की धरती पर धर्म के नाम पर पाखंड और ठगी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करेगी।

अभियान जारी रहेगा
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और राज्य में जहां भी ऐसे ढोंगी और फर्जी बाबा-संत सक्रिय होंगे, उन्हें चिह्नित कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

उत्तराखंड में भारी बारिश का येलो अलर्ट, 17 जुलाई तक कई जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी

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उत्तराखंड में मानसून सक्रिय हो चुका है और अगले पांच दिनों तक प्रदेश में मौसम का मिजाज बिगड़ा रहेगा। मौसम विभाग ने 14 से 17 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।

देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी जैसे जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। इसके अलावा शेष जिलों में भी तेज से अति तीव्र बारिश के दौर रह सकते हैं। कुछ इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की भी संभावना है।

14 जुलाई को नैनीताल, चमोली और बागेश्वर जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी है, जबकि 15 और 16 जुलाई को चमोली, उत्तरकाशी और बागेश्वर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। 17 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर जिलों में फिर से भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

लगातार हो रही बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मार्ग बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। कई नदियों और नालों के उफान पर आने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

मसूरी माल रोड पर दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का सामान जलकर राख

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मसूरी। मसूरी के प्रमुख पर्यटन स्थल माल रोड पर रविवार सुबह एक दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दुकान में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। घटना सुबह करीब 9 बजे की बताई जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुकान से अचानक धुआं निकलता देखा गया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि पास की तीन अन्य दुकानों में भी धुआं भर गया, जिससे व्यापारी और स्थानीय लोग दहशत में आ गए। घटना की सूचना तुरंत फायर ब्रिगेड को दी गई। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंच गई और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू कर दिया।

फायर ब्रिगेड कर्मियों द्वारा तेजी से राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। स्थानीय पुलिस भी मौके पर मौजूद है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का आदेश बना उलझन, निर्वाचन आयोग अब सोमवार को स्थिति साफ करने का करेगा अनुरोध

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देहरादून। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति लगातार बनी हुई है। हाईकोर्ट द्वारा 11 जुलाई को दिए गए आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाया है। सबसे बड़ी उलझन उन वोटरों को लेकर है जिनके नाम दो स्थानों पर दर्ज हैं।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि कोर्ट के आदेश में कई पहलुओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, खासकर स्क्रूटनी और दोहरी मतदाता सूची के मामलों में। इसी कारण अब आयोग ने निर्णय लिया है कि वह आगामी सोमवार को पुनः हाईकोर्ट का रुख करेगा।

सोमवार को आयोग हाईकोर्ट से 11 जुलाई के आदेश की व्याख्या और स्पष्टीकरण मांगेगा, जिससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति का समाधान हो सके।

सूत्रों के अनुसार, आयोग इस बात पर भी स्पष्टता चाहता है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज है तो उसके मतदान का अधिकार कैसे तय किया जाए और स्क्रूटनी के दौरान किस प्रक्रिया का पालन हो।

अब सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है, जब हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान अंतिम स्थिति सामने आने की उम्मीद है। इसी के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

मुख्य बातें 

  • हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोहरे वोटर मामलों पर असमंजस।
  • निर्वाचन आयोग सोमवार को कोर्ट में मांगेगा स्पष्टीकरण।
  • स्क्रूटनी प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं।
  • सोमवार को हो सकता है स्थिति का अंतिम निर्णय।

स्कूल से लौट रहे दो छात्र पेड़ के नीचे दबे, दोनों की दर्दनाक मौत

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टिहरी : भिलंगना ब्लॉक के नैल गांव में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज बारिश और तूफान के दौरान उखड़े चीड़ के पेड़ के नीचे दबकर दो स्कूली छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

घटना करीब 2:30 बजे की है, जब राजकीय इंटर कॉलेज घुमेटीधार में छुट्टी होने के बाद छात्र-छात्राएं पैदल घर लौट रहे थे। इसी दौरान नैल गांव से करीब 200 मीटर पहले अचानक तेज तूफान और बारिश शुरू हो गई। तभी एक विशाल चीड़ का पेड़ झुकते हुए भरभराकर गिर पड़ा और कक्षा 10 के छात्र आरव बिष्ट (16) और कक्षा 9 की छात्रा मानसी (14) उसकी चपेट में आ गए।

पेड़ की चपेट में आने से दोनों छात्रों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। साथ चल रहे अन्य छात्र किसी तरह भागकर बचे और गांव पहुंचकर हादसे की सूचना परिजनों को दी।

घटना की खबर मिलते ही ग्रामीण घटनास्थल पर दौड़े और पेड़ के नीचे दबे शवों को निकालने का प्रयास शुरू किया। एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीम भी तुरंत मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद दोनों शव निकाले जा सके। शवों की हालत इतनी खराब थी कि ग्रामीणों की मांग पर मौके पर ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई।

थानाध्यक्ष संजीव थपलियाल ने बताया कि मृतक आरव के पिता देहरादून के एक होटल में काम करते हैं, जबकि मानसी के पिता गुजरात में नौकरी करते हैं। परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। इस घटना ने पूरे नैल गांव को शोक में डुबो दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर आंख नम है और स्कूल के साथी छात्रों में भी गहरा दुख है।

कांवड़ यात्रा के दौरान दो कांवड़ियों की संदिग्ध मौत, एक की शिनाख्त नहीं

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रुड़की/मंगलौर। श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा के बीच दुखद खबर सामने आई है। रुड़की कांवड़ पटरी पर दो अलग-अलग स्थानों पर दो कांवड़ियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। एक कांवड़िये की पहचान नहीं हो सकी है, जबकि दूसरे की पहचान दिल्ली निवासी बुजुर्ग यात्री के रूप में हुई है।

पहला मामला रुड़की के सोलानी नदी पार्क के पास का है, जहां कांवड़ पटरी पर एक कांवड़ यात्री का शव संदिग्ध हालत में मिला। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। चिकित्सकों की मानें तो प्रथम दृष्टया यह मामला हार्ट अटैक का हो सकता है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। शव की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।

दूसरी घटना मंगलौर से नारसन की ओर जाने वाली कांवड़ पटरी की है। शुक्रवार देर शाम एक बुजुर्ग कांवड़ यात्री को बेहोशी की हालत में मंगलौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से उसे गंभीर हालत में रुड़की सिविल अस्पताल रेफर किया गया। रात में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान विजय कुमार निवासी गोविंदपुरी कॉलोनी, नई दिल्ली के रूप में की गई है।

दोनों घटनाओं से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। यात्रियों को गर्मी और थकान से बचने के लिए सावधानी बरतने की अपील की गई है। साथ ही हरिद्वार और आसपास के कांवड़ मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त करने की तैयारी की जा रही है।

खूंखार कुत्तों पर नकेल कसने की तैयारी, इस राज्य बनने वाला है सख्त कानून 

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गोवा : देश में पालतू कुत्तों के हमलों के बढ़ते मामलों के बीच अब राज्य सरकारें सतर्क हो गई हैं। गोवा सरकार ने पिटबुल और रॉटवीलर जैसी खतरनाक नस्लों पर सख्त रुख अपनाते हुए इन्हें प्रतिबंधित करने वाला विधेयक लाने का निर्णय लिया है। यह विधेयक आगामी 21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में गोवा विधानसभा में पेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने घोषणा की है कि कैबिनेट ने इस कानून को मंजूरी दे दी है, जिसमें इन खूंखार नस्लों की खरीद, बिक्री और प्रजनन पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रावधान है। कानून के उल्लंघन पर तीन महीने की जेल, ₹50,000 तक का जुर्माना और सामुदायिक सेवा की सजा भी प्रस्तावित है।

लोगों की मांग पर सरकार सक्रिय

फरवरी में राज्य में हुए कुत्तों के हमलों के मामलों के बाद आम जनता की ओर से इन नस्लों को बैन करने की मांग उठी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘पशु प्रजनन और घरेलू विनियमन एवं क्षतिपूर्ति अधिनियम 2024’ में संशोधन कर यह फैसला लिया है।

सरकार अब ऐसी नस्लों को ‘खतरनाक’ घोषित करने से पहले 15 दिनों का सार्वजनिक नोटिस देगी, जिसमें जनता से सुझाव और आपत्तियाँ ली जाएंगी। इसके बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

उत्तराखंड में भी उठी मांग

इधर, उत्तराखंड में भी हाल के महीनों में पालतू और आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। देहरादून, हल्द्वानी और रुद्रपुर जैसे शहरों में पिटबुल और रॉटवीलर नस्लों के कुत्तों द्वारा हमले की शिकायतें मिली हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से इन खतरनाक नस्लों पर कानून लाने की मांग की है।

हाल ही में राजपुर क्षेत्र में एक पिटबुल द्वारा एक बुजुर्ग महिला को गंभीर रूप से घायल कर देने की घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया। नैनीताल में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। नगर निगम और पशुपालन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं कि क्या इन नस्लों का पंजीकरण और निगरानी सही से हो रही है?

क्या उत्तराखंड भी गोवा की राह चलेगा?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड सरकार गोवा की तरह कदम उठाती है या नहीं। जानकारों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों और छोटे कस्बों में ऐसे हमलों का रिस्क और ज़्यादा है क्योंकि वहां न तो ट्रेन्ड वेटरनरी सिस्टम है, न ही इन नस्लों को नियंत्रित करने की तैयारी।