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पिथौरागढ़ में दर्दनाक सड़क हादसा, नदी में गिरी मैक्स जीप, 8 की मौत, 3 घायल

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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा थल-पिथौरागढ़ मुख्य मार्ग पर मुवानी क्षेत्र में हुआ, जब सवारियों से भरी एक मैक्स जीप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरते हुए नदी में समा गई।

दुर्घटनाग्रस्त वाहन मुवानी से बोकटा गांव की ओर जा रहा था। अचानक नियंत्रण खोने से वाहन सीधे खाई में जा गिरा। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व विभाग, आपदा प्रबंधन टीम और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। घायलों को खाई से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और मातम का माहौल है। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया जारी है। जिला प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से की मुलाकात, राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने पर हुई चर्चा

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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से शिष्टाचार भेंट की और उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव एवं अनुरोध रखे। मुख्यमंत्री ने राज्य में एम्स ऋषिकेश द्वारा संचालित एयर एम्बुलेंस सेवा के विस्तार के साथ ही पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एक अतिरिक्त हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में त्वरित चिकित्सा सहायता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

मुख्यमंत्री धामी ने आयुष्मान भारत योजना के तहत एसईसीसी परिवारों के लिए केंद्र सरकार के योगदान को वर्तमान ₹1,052 से बढ़ाकर ₹1,500 करने की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने चारधाम यात्रा में एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों के योगदान और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों की रेजिडेंसी में यात्रा ड्यूटी को शामिल करने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।

राज्य में बन रहे दो नए मेडिकल कॉलेजों जगजीवन राम मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़ और पं. राम सुमेर शुक्ल मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर के निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई शुरू करने के लिए जल्द ही नेशनल मेडिकल कमीशन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने इन कॉलेजों के संचालन के लिए आवश्यक मंजूरी शीघ्र दिए जाने की अपील की। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने टिहरी में टीएचडीसी के सहयोग से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के लिए भी सभी आवश्यक स्वीकृतियों के शीघ्र अनुमोदन की मांग की।

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की स्थापना को अत्यंत आवश्यक बताते हुए मुख्यमंत्री धामी ने इसके संचालन के लिए भारत सरकार से तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल स्थानीय जनसंख्या के लिए, बल्कि चारधाम यात्रा मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी एक जीवन रक्षक कदम साबित होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री को राज्य की जरूरतों और प्रस्तावों पर हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

उत्तराखंड में मौसम विभाग का अलर्ट, कई जिलों में ऑरेंज व येलो अलर्ट जारी

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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और प्रदेशभर में लगातार मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। बारिश जहां लोगों को राहत दे रही है, वहीं, कई क्षेत्रों में यह आफत का रूप भी लेती जा रही है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जनपदों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं, देहरादून और बागेश्वर जनपदों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश गरज और चमक के साथ हो सकती है। इन जिलों के लिए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

इसके अलावा रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और नैनीताल के कई क्षेत्रों में भी भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इन क्षेत्रों में तेज झोंकेदार हवाएं (30-40 किमी/घंटा) चलने की संभावना है, जिसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

राजधानी देहरादून की बात करें तो यहां दिनभर आंशिक रूप से बादल छाए रहने के आसार हैं। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

इधर, प्रदेश के पर्वतीय अंचलों में भारी बारिश से भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई संपर्क मार्ग बाधित हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है और जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, नदियों और पहाड़ी ढलानों के आसपास सतर्कता बरतें और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

नहाते वक्त नदी में बहे पांच किशोर, दो की दर्दनाक मौत

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चमोली : चमोली जिले के पनाई गांव स्थित लोदियागाड़ गदेरे में नहाने गए पांच किशोरों में से दो की तेज बहाव में बहने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान दिव्यांशु (14) और गौरव (15) के रूप में हुई है। हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस, प्रशासन, SDRF और DDRF की टीमें पहुंचीं और कुछ ही दूरी पर दोनों किशोरों के शव बरामद किए गए।

थानाध्यक्ष राकेश चंद्र भट्ट ने बताया कि सोमवार शाम नगर क्षेत्र के पांच किशोर नहाने के लिए लोदियागाड़ पहुंचे थे। गदेरे में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और सभी पांचों किशोर बहने लगे। गनीमत रही कि तीन किशोर किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहे, लेकिन दिव्यांशु और गौरव पानी में बह गए।

सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल ने अभियान शुरू किया, जिसमें दोनों किशोरों के शव घटनास्थल से कुछ दूरी पर मिले। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

 

प्रधानमंत्री से मिले मुख्यमंत्री धामी, विकास के मुद्दों पर मांगा मार्गदर्शन, नंदा राजजात व महाकुंभ आयोजन के लिए मांगा विशेष पैकेज

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नई दिल्ली : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य के चहुंमुखी विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की और प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड, प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के संकल्प में अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाने को पूर्णतः तत्पर है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को कार्तिक स्वामी मंदिर का प्रतिरूप, आदि कैलाश यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक और उत्तराखण्ड के विशिष्ट उत्पादों, कनार का घी, पुरोला का लाल चावल, बासमती चावल, काला जीरा, गंधरैणी, जम्बू और स्थानीय शहद भेंट किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को विश्व के 27 देशों से प्राप्त नागरिक सम्मानों के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह हर भारतवासी के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार व ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, और चम्पावत के शारदा कॉरिडोर जैसे धार्मिक स्थलों के समग्र अवस्थापना विकास हेतु सीएसआर फंडिंग से सहयोग के लिए केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देशित करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्र ऊधमसिंह नगर के नेपा फार्म को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करने, दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर को हरिद्वार तक विस्तारित करने तथा टनकपुर-बागेश्वर व ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजनाओं को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से मार्गदर्शन व सहयोग की मांग की।

राजजात व महाकुंभ आयोजन के लिए विशेष वित्तीय सहायता की मांग

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली नंदा राजजात यात्रा के लिए पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु ₹400 करोड़ की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को इस पर्वीय महाकुंभ में सम्मिलित होने का आमंत्रण भी दिया।

उन्होंने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले की तैयारियों के लिए ₹3,500 करोड़ की मांग करते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा इसके लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ कर दी गई हैं जिनमें पुल मरम्मत, विद्युत लाइन भूमिगत करना, पार्किंग, शौचालय, परिवहन और श्रद्धालुओं के लिए पैदल मार्ग जैसे कार्य शामिल हैं।

विद्युत, पर्यटन और जल संसाधन परियोजनाएं रहीं चर्चा में

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश और हरिद्वार की विद्युत लाइनों को भूमिगत करने और प्रणाली को ऑटोमेट करने हेतु भेजी गई ₹1,015 करोड़ की डीपीआर को आरडीएसएस योजना में स्वीकृति दिलाने का आग्रह किया। उन्होंने चौरासी कुटिया (द बीटल्स आश्रम) के पुनरुद्धार प्रयासों को समर्थन देने हेतु राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमोदन दिलवाने की भी मांग की।

पेयजल संकट के समाधान हेतु पिण्डर-कोसी लिंक परियोजना के पहले चरण का प्रस्ताव रखते हुए उन्होंने बताया कि इस परियोजना से बागेश्वर, अल्मोड़ा और नैनीताल के 625 गांवों और कस्बों को पेयजल और सिंचाई का लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे भारत सरकार की विशेष योजना में शामिल करने का आग्रह किया।

जल विद्युत परियोजनाओं को मिली प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की संस्तुतियों के आधार पर कुल 596 मेगावाट की पांच जल विद्युत परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही आर्थिक विकास को गति मिल सके।

प्रधानमंत्री मोदी ने चारधाम, आदि कैलाश व नंदा राजजात यात्राओं के अलावा हरिद्वार कुंभ और जल जीवन मिशन से जुड़ी जानकारी लेकर उत्तराखण्ड सरकार को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया।

देवप्रयाग में नृसिंहगाचल पर्वत से भूस्खलन, मकान क्षतिग्रस्त, वाहन दबे, एक घायल

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देवप्रयाग। देवप्रयाग नगर के बहा बाजार क्षेत्र में अचानक नृसिंहगाचल पर्वत का एक हिस्सा दरक गया। देखते ही देखते कई टन वजनी चट्टानें तेजी से लुढ़कती हुई नीचे बाजार में आ गिरीं, जिससे भारी तबाही मच गई। इस भूस्खलन में एक व्यक्ति घायल हो गया जबकि तीन मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत यह रही कि घटना के समय अधिकांश लोग अपने घरों से बाहर थे, जिससे एक बड़ा जानमाल का नुकसान टल गया।

स्थानीय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नृसिंहगाचल पर्वत का हिस्सा टूटकर बाजार की ओर गिरा। चट्टानों की चपेट में आकर विपिन चंद्र मिश्रा, भगवती प्रसाद मिश्रा और पनीलाल के मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में पनीलाल गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें मौके पर पहुंचे बचाव दल ने तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया।

भूस्खलन से बाजार क्षेत्र में खड़ी दो मोटरसाइकिलें और एक पिकअप वाहन भी चट्टानों के नीचे दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा, कई विद्युत खंभे टूट जाने से इलाके की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।

प्रशासन मौके पर जुटा

हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों की सहायता से बोल्डरों को हटाने और मलबा साफ करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही, खतरे की आशंका को देखते हुए आसपास के इलाकों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों में डर का माहौल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नृसिंहगाचल पर्वत क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील है, लेकिन बार-बार की जा रही खुदाई और भारी वर्षा के कारण यह भूस्खलन और भी खतरनाक हो गया है।

निर्वाचन प्रतीक आवंटन पर हाईकोर्ट की मुहर, आयोग ने जारी किया संशोधित शेड्यूल

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देहरादून। राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तराखंड ने पंचायत चुनावों से संबंधित निर्वाचन प्रतीक आवंटन प्रक्रिया को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। यह निर्णय नैनीताल उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका संख्या 503 (एम.बी.)/2025 – शक्ति सिंह बर्थवाल बनाम राज्य निर्वाचन आयोग एवं अन्य में पारित आदेश के अनुपालन में लिया गया है।

आयोग के अनुसार, पहले 14 जुलाई को प्रतीक आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित थी, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश की स्पष्टता प्राप्त न होने तक इसे 14 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया था।

अब उच्च न्यायालय द्वारा 14 जुलाई 2025 को अंतिम सुनवाई के बाद आयोग को आवश्यक स्पष्टता प्राप्त हो गई है, जिसके बाद आयोग ने अधिसूचना (संशोधित) संख्या 1303/रा.नि.आ.अनु.-2/4324/2025, दिनांक 28 जून 2025 के तहत नई समय-सारणी जारी की है।

क्या है नया कार्यक्रम?

14 जुलाई 2025: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रतीक आवंटन की प्रक्रिया सम्पन्न की जाएगी।

15 जुलाई 2025: प्रतीक आवंटन की शेष प्रक्रिया सुबह 8:00 बजे से कार्य समाप्ति तक जारी रहेगी।

राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार के हस्ताक्षरित आदेश में यह भी कहा गया है कि बाकी की सभी चुनावी प्रक्रियाएं पूर्व निर्धारित तिथियों के अनुसार ही सम्पन्न होंगी।

उत्तराखंड हाई कोर्ट से बड़ी खबर, दो जगह नाम वाले प्रत्याशियों और वोटरों की कम नहीं हुई मुश्किल, जारी रहेगा चुनाव

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में दोहरी मतदाता सूची (शहरी और ग्रामीण) वाले मतदाताओं के मतदान और चुनाव लड़ने से संबंधित विवाद में स्पष्ट आदेश देने से इनकार कर दिया है. चुनाव आयोग द्वारा दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने मौखिक रूप से यह स्पष्ट किया कि उसने चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है, बल्कि केवल चुनाव आयोग द्वारा 6 जुलाई को जारी सर्कुलर पर रोक लगाई है.

मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने कहा कि 11 जुलाई को जारी आदेश उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार है और आयोग स्वयं पंचायत राज अधिनियम के पालन के लिए जिम्मेदार है.

चुनाव आयोग ने मांगा था ‘मॉडिफिकेशन’

उत्तराखंड निर्वाचन आयोग ने रविवार को हाईकोर्ट के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर 11 जुलाई के आदेश से चुनाव प्रक्रिया बाधित होने की बात कही थी और आदेश को ‘मॉडिफाई’ करने की मांग की थी. आयोग ने तर्क दिया था कि चुनाव प्रक्रिया में अब तक काफी संसाधन व्यय हो चुके हैं. इस प्रार्थना पत्र के आधार पर, आयोग ने सोमवार, 14 जुलाई को अपराह्न 2 बजे तक चुनाव चिन्हों के आवंटन पर रोक लगा दी थी.

सर्कुलर पर रोक का कारण

दरअसल, 11 जुलाई को हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारियों को 6 जुलाई को जारी किए गए सर्कुलर पर रोक लगाई थी. इस सर्कुलर में आयोग ने कहा था कि जिन लोगों के नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में हैं, उन्हें मतदान करने या चुनाव लड़ने से न रोका जाए, भले ही उनके नाम अन्य मतदाता सूचियों (जैसे कि शहरी क्षेत्र) में भी हों.

हाईकोर्ट ने पाया कि यह सर्कुलर उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम की धारा 9 के उपनियम 6 व 7 का उल्लंघन करता है. अधिनियम के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक मतदाता सूची (शहरी व ग्रामीण क्षेत्र) में हैं, वे मतदान करने या चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग के सर्कुलर पर रोक लगा दी थी.

भ्रम की स्थिति बरकरार

हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है. कई पंचायतों में शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाता सूचियों में नाम वाले लोग चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि, वे पंचायत राज अधिनियम की धारा 9(6) और हाईकोर्ट के 11 जुलाई के आदेश के अनुसार चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं, जिससे चुनाव कराने या न कराने को लेकर भ्रम बना हुआ है. आयोग को सोमवार से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित करने थे, जिस पर आयोग ने अस्थाई रोक लगा दी थी.

उत्तराखंड बोर्ड ने घोषित किया परीक्षाफल सुधार परीक्षा कार्यक्रम, 19 हज़ार से अधिक छात्रों को पास होने का सुनहरा मौका

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रामनगर : उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने 10वीं और 12वीं कक्षा के उन छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है जो एक या दो विषयों में असफल हुए हैं। अब उन्हें परीक्षाफल सुधार परीक्षा (Improvement Exam) के ज़रिए उत्तीर्ण होने का एक और अवसर मिलेगा।

परिषद के सचिव वीपी सिमल्टी के अनुसार, हाईस्कूल (कक्षा 10) में दो और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) में एक विषय में फेल हुए विद्यार्थियों को यह मौका दिया जा रहा है। ये परीक्षाएं 4 अगस्त से 11 अगस्त के बीच आयोजित की जाएंगी। इसके लिए पूरे प्रदेश में कुल 97 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।

बोर्ड कार्यालय रामनगर से मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष परीक्षा में हाईस्कूल के 8400 और इंटरमीडिएट के 10,706 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे।

जिलावार आंकड़ों में हरिद्वार सबसे आगे है, जहां से 4,658 विद्यार्थी परीक्षा में बैठेंगे, जबकि सबसे कम संख्या चंपावत जिले की है, जहां से केवल 316 छात्र-छात्राएं परीक्षा देंगे।

परीक्षा का समय प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित किया गया है। छात्र संख्या को देखते हुए हरिद्वार (बहादराबाद) और ऊधमसिंहनगर (रुद्रपुर) में दो-दो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

आज से सावन शुरू, मंदिरों लगा श्रद्धालुओं का तांता, बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रही देवभूमि

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ऊदेवभूमि उत्तराखंड आज भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रही है। आज सावन महीने का पहला सोमवार है। यह दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद शुभ है। सुबह से शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

मान्यता है कि सावन सोमवार पर शिव पूजन करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा जीवन में सदैव सुख-समृद्धि वास करती हैं। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि और महत्व को विस्तार से जानते हैं।

श्रद्धा, आराधना और आस्था का केंद्र है प्राचीन कमलेश्वर महादेव मंदिर

श्रीनगर गढ़वाल मंडल का प्राचीन सिद्धपीठ कमलेश्वर महादेव मंदिर सावन माह में विशेष श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बन गया है। यह मंदिर न केवल उत्तराखंड के शिवभक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसे पांच महेश्वर पीठों में से एक माना जाता है, जहां सिद्धियां प्राप्त होने के कारण इसे सिद्धपीठ कहा जाता है।

विशेष महाआरती का आयोजन है किया जाता

सावन के दौरान मंदिर में रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान, गंगाजल व दूध से अभिषेक तथा बेलपत्र अर्पण जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ शिवलिंग की पूजा की जाती है। सुबह से ही भक्त मंदिर परिसर में जुटने लगते हैं। मंदिर के महंत 108 आशुतोष पुरी के अनुसार, जो भी भक्त निष्काम भाव से फल रस, पंचामृत और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान कमलेश्वर का अभिषेक करता है, उसे सभी कार्यों में शिव कृपा से सिद्धि प्राप्त होती है।

सावन के सोमवार को विशेष महाआरती का आयोजन किया जाता है। सावन का पवित्र महीना कमलेश्वर महादेव मंदिर में केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष की ओर बढ़ने का एक सशक्त माध्यम बन जाता है। यहां का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है, जो जीवन को एक नई दिशा देने में सहायक होता है।

पौराणिक मान्यता और ऐतिहासिक महत्व

पौराणिक मान्यता है कि कमलेश्वर महादेव मंदिर वही स्थल है, जहां श्रीराम ने 108 कमल पुष्प चढ़ाकर ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति के लिए रुद्राभिषेक किया था। यह स्थल पंचकेदार परंपरा से भी जुड़ा है।

यहां भगवान विष्णु ने सहस्त्र कमल अर्पित कर सुदर्शन चक्र प्राप्त किया और श्रीकृष्ण ने संतान कामना से खड दीपक पूजा की। आज भी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को निसंतान दंपति यही पूजा करते हैं।सावन माह में श्रद्धालु सवा लाख बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। यह माह समुद्र मंथन के दौरान शिव द्वारा हलाहल विषपान की स्मृति में शिव को समर्पित माना जाता है।