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उत्तराखंड मौसम अपडेट, इन जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

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देहरादून: उत्तराखंड में आने वाले दिनों में मानसून का ज़ोर बढ़ने वाला है, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए चेतावनी जारी की है, जिसमें गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर की भी आशंका जताई गई है।

4 अगस्त 2025 का पूर्वानुमान

  • नैनीताल, देहरादून और बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर और चम्पावत जनपदों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • राज्य के सभी जनपदों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने / वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर होने की संभावना है।

5 अगस्त 2025 का पूर्वानुमान

  • नैनीताल, चम्पावत और बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • राज्य के शेष सभी जनपदों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • राज्य के सभी जनपदों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने / वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर होने की संभावना है।

6 अगस्त 2025 का पूर्वानुमान

  • नैनीताल, चम्पावत, उधम सिंह नगर, बागेश्वर, पौड़ी और देहरादून जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • राज्य के शेष सभी जनपदों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • राज्य के सभी जनपदों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने / वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर होने की संभावना है।

7 अगस्त 2025 का पूर्वानुमान

  • राज्य के देहरादून तथा पौड़ी जनपदों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • राज्य के सभी जनपदों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने / वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर होने की संभावना है।

सावधान रहने की अपील

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इन दिनों में सतर्क रहें। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें और अनावश्यक यात्रा से बचें। प्रशासन को भी अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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कुलगाम मुठभेड़: तीसरे दिन भी जारी, एक और आतंकी ढेर, अब तक तीन मारे गए

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जम्मू-कश्मीर: कुलगाम जिले के अखल देवसर इलाके में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच तीसरे दिन भी मुठभेड़ जारी है। रविवार को सुरक्षाबलों ने एक और आतंकवादी को मार गिराया, जिससे इस ऑपरेशन में ढेर हुए आतंकियों की कुल संख्या तीन हो गई है। शनिवार को दो आतंकी मारे गए थे।

लश्कर का आतंकी हारिस नजीर ढेर

जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों ने कुलगाम जिले में शनिवार को लश्कर-ए-ताइबा के हारिस नजीर सहित दो आतंकियों को मार गिराया था। ये अखल के जंगल में छिपे थे। मुठभेड़ में एक सैन्य अधिकारी के घायल होने की भी सूचना है, जिन्हें श्रीनगर स्थित सेना के 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को दो आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि करते हुए बताया था कि ड्रोन से दोनों के शव जंगल में पड़े देखे गए। हारिस को सुबह ढेर किया गया था, जबकि दूसरे आतंकी को दोपहर में मार गिराया गया। रविवार को तीसरे आतंकी को भी मार गिराया गया है।

कौन था हारिस नजीर?

मारा गया आतंकी हारिस पुलवामा के कच्चीपोरा का रहने वाला था। वह लश्कर का ‘सी’ श्रेणी का आतंकी था और 24 जून 2023 को आतंकी संगठन में शामिल हुआ था। बायसरन आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी 14 आतंकियों की सूची में हारिस का भी नाम शामिल था। दूसरे आतंकी की पहचान देर रात तक नहीं हो पाई थी।

कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?

सैन्य ऑपरेशन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार रात करीब आठ बजे देवसर के अखल जंगल में चार से पांच आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सेना की 9 राष्ट्रीय राइफल्स ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), कुलगाम पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के साथ मिलकर तलाशी अभियान शुरू किया।

इसी दौरान आतंकियों से मुठभेड़ हो गई, लेकिन आतंकी गोलीबारी करते हुए अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल के भीतरी क्षेत्र में भाग निकले। जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर जोन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंधेरा होने के चलते इलाके की सख्त घेराबंदी की गई और रात भर रुक-रुककर फायरिंग होती रही। शनिवार सुबह होते ही जवानों ने कार्रवाई और तेज की, जिसके बाद मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराया गया।

बरामद हथियार और लगातार गोलीबारी

मारे गए आतंकियों से एक एके राइफल, दो मैगजीन, कुछ हथगोले और अन्य गोला-बारूद बरामद हुआ है। शनिवार रात में भी गोलीबारी जारी रही और रविवार को एक और आतंकी को मार गिराया गया।

एक सप्ताह में तीसरी मुठभेड़

जम्मू-कश्मीर में यह इस सप्ताह की तीसरी बड़ी मुठभेड़ है। इससे पहले, 28 जुलाई को सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन महादेव के तहत लिडवास के जंगलों में तीन आतंकियों को ढेर किया था, जो बायसरन आतंकी हमले में शामिल थे। इसके बाद 31 जुलाई को पुंछ में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास घुसपैठ के दौरान दो आतंकी मारे गए थे।

क्षेत्र में और आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका के चलते सैन्य ऑपरेशन अभी भी जारी है।

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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव संभव: स्वास्थ्य आयुक्त और डिप्टी डायरेक्टर की तैनाती पर मंथन

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  • सीएम धामी के निर्देश पर स्वास्थ्य तंत्र में सुधार की कवायद तेज, मेडिकल कॉलेजों में एम्स मॉडल लागू करने पर विचार.

देहरादून। प्रदेश में हालिया स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में आमूल-चूल परिवर्तन की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आर.के. सुधांशु ने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक की और कई सुधारात्मक दिशा-निर्देश जारी किए।

मुख्य बिंदु यह रहा कि राज्य में “स्वास्थ्य आयुक्त” के पद सृजन की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को एक विस्तृत, सुसंगत और सुस्पष्ट प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

मेडिकल कॉलेजों में एम्स जैसा मॉडल

प्रदेश सरकार अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एम्स की तर्ज पर डिप्टी डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन की नियुक्ति पर भी मंथन कर रही है। इसका उद्देश्य अस्पताल प्रबंधन में पेशेवर दक्षता लाना और व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाना है। प्रमुख सचिव ने एम्स मॉडल का परीक्षण कर, उसके अनुसार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

हेल्प डेस्क और पीआरओ की तैनाती अनिवार्य

बैठक में सभी जिला चिकित्सालयों और प्रमुख सरकारी अस्पतालों में हेल्प डेस्क स्थापित करने का निर्देश दिया गया। इन हेल्प डेस्क पर अनिवार्य रूप से एक जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) की तैनाती की जाएगी, जो मरीजों और तीमारदारों की समस्याएं सुनकर तत्काल समाधान सुनिश्चित करेंगे।

जिला प्रशासनिक अधिकारी भी होंगे तैनात

प्रमुख सचिव ने कहा कि सभी जिला व उप-जिला चिकित्सालयों में जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। ये नियुक्ति रोस्टर प्रणाली के तहत जिला प्रशासन के माध्यम से की जाएगी, जिससे प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

आयुष्मान मित्र प्रणाली होगी मजबूत

राज्य में आयुष्मान योजना के तहत कार्यरत आयुष्मान हेल्प डेस्क (मित्र) की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सके।

OPD की ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग सुविधा

भीड़ नियंत्रण और मरीजों की सुविधा के लिए प्रदेश के अस्पतालों में ओपीडी की ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके लिए एक समर्पित तकनीकी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे अनावश्यक भीड़ से निजात मिले और सेवाएं व्यवस्थित ढंग से दी जा सकें।

दीपक बिजल्वाण : इतिहास लिखेंगे या इतिहास के पुराने पन्नों में दर्ज हो जाएंगे?

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उत्तरकाशी की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है – दीपक बिजल्वाण। छात्रसंघ की राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले दीपक, अब केवल उत्तरकाशी ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के बड़े राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। उनके राजनीतिक सफर को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या वे इतिहास रचेंगे या खुद इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे?

छात्र राजनीति से जिला पंचायत तक

दीपक बिजल्वाण ने छात्रसंघ के बाद क्षेत्र पंचायत और फिर लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है। अपने दूसरे कार्यकाल में ही उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्ज़ा कर लिया था, जिससे वे सबसे कम उम्र के जिला पंचायत अध्यक्षों में से एक बन गए। दीपक ने अपने करियर में कई बड़े विवादों और आरोपों का सामना किया है, लेकिन हर बार वे इनसे बाहर निकलने में कामयाब रहे। यह साबित करता है कि वे राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं, जो अकेले दम पर चुनौतियों का सामना करने का साहस रखते हैं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे एक बार जिसके लिए खड़े हो जाते हैं, उसे पीछे हटाना मुश्किल हो जाता है, और उनकी टीम भी हर मुश्किल वक्त में चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहती है।

“मनहूस कुर्सी” का मिथक और दीपक की चुनौती

उत्तरकाशी में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को “मनहूस कुर्सी” भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी इस कुर्सी पर बैठा, उसका राजनीतिक करियर यहीं तक सिमट गया। इतिहास के पन्नों में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं, लेकिन दीपक बिजल्वाण इन्हीं मिथकों को बदलने और एक नया इतिहास रचने का दावा कर रहे हैं। वे जिस बात को ठान लेते हैं, उसे पूरा करने के लिए पूरी ताकत झोंक देते हैं। जोखिम लेने से उन्हें डर नहीं लगता और वे यह भी बखूबी जानते हैं कि कब, कहां और कितना जोखिम लेना है।

शतरंज की चालें चलने वाला गेमलर

दीपक की दूरदर्शिता इस बात से साबित होती है कि उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर फिर से काबिज होने की योजना तब ही बना ली थी, जब चुनाव दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रहे थे। उन्होंने उस रणनीति पर पहले ही काम शुरू कर दिया था, जिस पर वे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के बाद काम कर रहे हैं। यह उनकी चतुराई और शतरंज की चालों को चालाकी से चलने वाले एक माहिर राजनितिक खिलाड़ी होने का प्रमाण है।

भविष्य का फैसला और नई चुनौती

अगस्त 2025 का महीना तय करेगा कि दीपक बिजल्वाण फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनकर नया इतिहास लिखते हैं या फिर वे भी पुराने लोगों की तरह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएंगे। इस बार के चुनाव में उन्हें चुनौती देने के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं, जो जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का ख्वाब संजो रहे हैं।

असली परीक्षा यहीं होती है

इस चुनाव में पैसा भले ही मायने रखता हो, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा राजनीतिक हुनर काम आता है। दावेदारों की असली परीक्षा यहीं होती है। कुछ के पास पैसा तो होता है, पर उसे खर्च करने का तरीका और साहस नहीं होता, जबकि कुछ लोग भले ही आर्थिक रूप से उतने मज़बूत न हों, लेकिन उनका कुशल प्रबंधन और कौशल उन्हें सफलता दिलाता है।

अंतिम आरक्षण का इन्तजार 

फिलहाल, मामला आरक्षण पर अटका हुआ है। उत्तरकाशी में इसे लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि सीट को महिला आरक्षित कराने के लिए कुछ दावेदार पूरा ज़ोर लगा रहे हैं। हालांकि, होगा वही, जो नियमों के अनुसार उचित होगा। सभी की निगाहें एक बार फिर उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों पर टिकी हैं। क्या दीपक बिजल्वाण अपनी अनूठी शैली और रणनीतिक चालों से इस बार भी बाज़ी मारेंगे, या कोई नया चेहरा सामने आएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

पीएम मोदी का ट्रंप को जवाब, बोले- जो भारत के हित में होगा, वही सरकार करेगी

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वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने काशी दौरे पर वाराणसी को 565.35 करोड़ रुपये की कुल 14 परियोजनाओं की सौगात दी। इनमें कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन शामिल है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त भी जारी की।

काशी की धरती से, पीएम मोदी ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत के हितों को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से टैरिफ के मसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को भी जवाब देते हुए दो टूक कहा कि भारत वही करेगा जो उसके हित में होगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत का रुख

लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब विश्व अर्थव्यवस्था संकट से गुजर रही है, तो भारत को भी अपने आर्थिक हितों के प्रति सतर्क रहना होगा। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि सभी देश अपने-अपने हितों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, और इसीलिए भारत को अपने आर्थिक हितों के प्रति सजग रहना होगा।

‘स्वदेशी उत्पादों के प्रति लें संकल्प’

प्रधानमंत्री ने देश के सर्वोत्तम हित में सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि जो लोग देश का भला चाहते हैं और भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखना चाहते हैं, उन्हें अपने मतभेद भुलाकर स्वदेशी उत्पादों के प्रति संकल्प लेना चाहिए।

‘लोकल के लिए वोकल बनने की जरूरत’

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ‘लोकल’ उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हम केवल वही चीजें खरीदेंगे जो भारतीयों द्वारा बनाई गई हैं। हमें लोकल के लिए वोकल बनने की जरूरत है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार वही काम करेगी, जो भारत के हित में होगा।

कुलगाम में आतंकी ढेर, पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम

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श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की मुहिम लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर कुलगाम में चल रहे ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने एक आतंकी को मार गिराया, वहीं पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी गई। घाटी में एक के बाद एक ऑपरेशन के ज़रिए सुरक्षाबल आतंकियों के मंसूबों को कुचलने में जुटे हैं।

रात भर चली मुठभेड़

भारतीय सेना की चिनार कोर ने शनिवार को बताया कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल इलाके में चल रही मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया गया है। यह ऑपरेशन सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की संयुक्त कार्रवाई में चलाया जा रहा है।

चिनार कोर ने एक्स पर जारी बयान में कहा, “कुलगाम के अखल इलाके में रातभर रुक-रुक कर गोलीबारी जारी रही। सैनिकों ने सतर्कता और संतुलन के साथ जवाबी फायरिंग की और संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी को मजबूत करते हुए आतंकियों से संपर्क बनाए रखा।” मारे गए आतंकी की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है।

पुंछ में सीमा पर संदिग्धों की हलचल

सेना की व्हाइट नाइट कोर के मुताबिक, 30 जुलाई को पुंछ सेक्टर के जनरल एरिया देगावर में नियंत्रण रेखा के पास संदिग्ध गतिविधि देखी गई। बाड़ के पास दो संदिग्धों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। जवानों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में सेना ने मोर्चा संभालते हुए त्वरित कार्रवाई की। व्हाइट नाइट कोर ने बताया कि यह मुठभेड़ रात के अंधेरे में हुई और समय रहते घुसपैठ की कोशिश को विफल कर दिया गया।

ऑपरेशन महादेव और शिवशक्ति से झटका

पिछले दिनों सुरक्षाबलों ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन महादेव’ शुरू किया था, जिसके तहत तीन आतंकियों को ढेर किया गया। मारे गए आतंकियों में हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा भी शामिल था। इसके बाद ‘ऑपरेशन शिवशक्ति’ के तहत पुंछ के देवागर सेक्टर में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों को मार गिराया गया। इसी क्रम में नगरोटा में आतंकियों के एक सहयोगी को तीन पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया गया।

विष्णुगाड़ पीपलकोटी परियोजना स्थल पर गिरी चट्टान, डाइवर्जन का चल रहा है काम

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चमोली: चमोली जिले में शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। हेलंग में अलकनंदा नदी के किनारे निर्माणाधीन विष्णुगाड़ पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के डाइवर्जन साइट पर अचानक एक विशाल चट्टान से लबा गिरने लगा। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त मौके परमजदूर काम कर रहे थे।

यह घटना उस समय हुई जब डाइवर्जन निर्माण कार्य चल रहा था। हालांकि, जो वीडियो सामने आया है, उसमे कोइ मजदूर नजर नहीं आ राहा है। एक व्यक्ति चट्टान से दूर नजर आ रहा है, जो अफरा-तफरी में फोन पर बात करता हुआ नजर आ रहा है। वीडियो की अभी आधिकारिक पुष्टी भी नहीं हुई है।

नैनीताल हाईकोर्ट: पंचायत चुनावों की वोटर लिस्ट में बाहरी नामों पर हुई सुनवाई, दिया ये आदेश

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले के बुधलाकोट ग्रामसभा, उधम सिंह नगर की कई ग्राम सभाओं और उत्तरकाशी के बड़कोट नगर पालिका क्षेत्र में पंचायत चुनावों की वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों के नाम शामिल किए जाने के खिलाफ दायर तीन जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सभी याचिकाओं को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि अब जबकि चुनाव संपन्न हो चुके हैं, यदि किसी प्रत्याशी या मतदाता को आपत्ति है तो वह चुनाव याचिका दायर कर सकता है।

दोषी अधिकारी निलंबित

राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत के बाद विवादित वोटर लिस्टों का परीक्षण किया गया है। जिन लोगों के नाम संदेहास्पद या गलत पाए गए, उन्हें सूची से हटा दिया गया है। साथ ही ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), जिन्होंने बिना उचित सत्यापन के नाम जोड़े थे, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। बड़कोट में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी है।

याचिका में गंभीर आरोप

नैनीताल जिले के बुधलाकोट निवासी आकाश बोरा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि उनके गांव की वोटर लिस्ट में 82 बाहरी लोगों के नाम जोड़े गए, जिनमें अधिकांश उड़ीसा और अन्य राज्यों से हैं। शिकायत पर एसडीएम ने जांच कमेटी गठित की थी, जिसने जांच में 18 नाम बाहरी व्यक्तियों के पाए। बावजूद इसके, अंतिम सूची से इन्हें नहीं हटाया गया। कोर्ट में अतिरिक्त 30 संदिग्ध नामों की सूची भी पेश की और आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हाईकोर्ट ने उठाए अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से स्पष्ट पूछा कि वोटर लिस्ट तैयार करते समय आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड या स्थायी निवास से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया या नहीं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि ऐसा किया गया है तो उसका रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या केवल मौखिक सूचना के आधार पर ही नाम जोड़े गए।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025: आरक्षण चक्र लागू, 12 जिलों के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित

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देहरादून :  राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर आरक्षण चक्र को अंतिम रूप दे दिया है। पंचायतीराज अनुभाग-1 द्वारा जारी शासनादेश (संख्या: 1088/XII(1)/2025/86(22)/2019 दिनांक 01 अगस्त 2025) के अनुसार, राज्य के 12 जिलों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।

इस फैसले के तहत महिलाओं, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग (अनारक्षित) के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पदों का आरक्षण चक्र पहले बार लागू किया गया है।

आरक्षण निर्धारण के आधार

उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अधिनियम, 2025 और पंचायतों के आरक्षण एवं आवेदन नियमावली 2025 के तहत यह आरक्षण तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश (दिनांक 10.05.2022) और हाईकोर्ट के निर्णय (दिनांक 11.06.2025) को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह आदेश पारित किया।

आरक्षण सूची – जिला पंचायत अध्यक्ष पद (2025):

1 अल्मोड़ा – महिला

2 बागेश्वर महिला – अनुसूचित जाति

3 चंपावत – अनारक्षित

4 चमोली – अनारक्षित

5 देहरादून – महिला

6 नैनीताल – अनारक्षित

7 पौड़ी गढ़वाल – महिला

8 पिथौरागढ़ – अनुसूचित जाति

9 रुद्रप्रयाग – महिला

10 टिहरी गढ़वाल – महिला

11 उधमसिंह नगर – पिछड़ा वर्ग

12 उत्तरकाशी -अनारक्षित

शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रस्ताव पर आपत्ति या सुझाव देना चाहता है, तो वह 15 दिन के भीतर लिखित में अपना पक्ष पंचायतीराज विभाग, सचिवालय परिसर, 04-सुभाष मार्ग, देहरादून में प्रस्तुत कर सकता है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व हेतु विशेष शर्तों और परीक्षण के बाद ही आरक्षण देने के निर्देश के बाद यह नया आरक्षण चक्र लागू किया गया है। पहली बार पूरे प्रदेश में डिस्ट्रिक्ट लेवल पर आरक्षण का समुचित चक्र लागू किया गया है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 : भाजपा के जीत के दावों की कांग्रेस ने खोली पोल, गिनाई बड़े चेहरों की हार

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उत्तराखंड में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के नतीजों ने प्रदेश की सियासत को झकझोर दिया है। एक ओर भाजपा ने इन चुनावों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों की जीत बताते हुए “भगवामय प्रदेश” का दावा किया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने इन दावों की वास्तविकता को चुनौती देते हुए भाजपा के कई दिग्गज नेताओं और उनके परिजनों की हार को जनता के स्पष्ट संकेत के रूप में परिभाषित किया है। इस चुनाव ने साफ कर दिया है कि भले ही पार्टी कार्यालय में मिठाई बंट रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जनता ने सत्ताधारी दल को सन्देश दे दिया है, “काम दिखाओ, चेहरा नहीं।”

भाजपा के दिग्गजों की हार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भले ही गैर-दलीय होते हैं, लेकिन इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन वाले उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा ने इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक अभियान में बदल दिया था, लेकिन उसके कई शीर्ष नेताओं के परिजनों और पूर्व पदाधिकारियों को करारी हार मिली:

  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का गृह जनपद चमोली में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

  • उत्तरकाशी में पूर्व विधायक मालचंद की पुत्री और पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येंद्र राणा चुनाव हार गए।

  • टिहरी में पूर्व प्रमुख नीलम बिष्ट और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कंचन गुनसोला की बहू चुनाव में पराजित हुईं।

  • विधायक शक्ति लाल शाह के दामाद भी चुनाव हार गए।

  • पौड़ी में विधायक दिलीप रावत की पत्नी को पराजय मिली।

  • नैनीताल में विधायक सरिता आर्य के पुत्र की हार ने चर्चा बटोरी।

  • पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी भी चमोली से चुनाव हार गईं— खास बात यह कि वे भाजपा में शामिल हो चुकी थीं।

  • चंपावत में पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल की बेटी, पूर्व प्रमुख लक्ष्मण सिंह के बेटे, भतीजे और बहुएं चुनाव नहीं जीत सकीं।

  • कई पूर्व जिला अध्यक्ष और मंडल स्तर के नेता भी पराजित हुए।

कांग्रेस ने इन परिणामों को अपने पक्ष में बताते हुए कहा कि भाजपा के पास जश्न मनाने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा सिर्फ आतिशबाजी कर रही है, जबकि मैदान में उनके अपने चेहरे जमींदोज हो गए हैं। ये जनादेश सत्ता के दंभ और प्रचार की राजनीति के खिलाफ है। कांग्रेस के अनुसार, इन चुनावों ने संकेत दिया है कि प्रदेश की जनता 2027 की ओर बदलाव का मन बना चुकी है।

पंचायत चुनावों में भाजपा ने जिस तरह विधानसभा जैसी रणनीति अपनाई, वह उसके खिलाफ गया। पार्टी की “टॉप डाउन” अप्रोच में स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत प्रभाव की अनदेखी की गई। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में व्यक्ति का सामाजिक जुड़ाव, स्थानीय कार्य, ईमानदारी और जनसंपर्क ही निर्णायक कारक होते हैं—not party tag. इन चुनावों में कई जगह भाजपा कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ते नजर आए, जिससे अंदरूनी फूट और असंतोष उजागर हुआ। सिर्फ पोस्टर, बैनर और मीडिया प्रचार पंचायत चुनाव में काम नहीं करते—यह बात भाजपा को समझनी होगी।

कांग्रेस को इन परिणामों से मनोबल मिला है। संगठन को लंबे समय बाद कुछ ऐसा मिला है, जिसे “जनता की स्वीकृति” कहा जा सकता है। हालांकि, कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि जीत की ओर यात्रा स्थिर संगठन, स्पष्ट दृष्टिकोण और लगातार जमीनी संपर्क से होती है। य

पंचायत चुनाव न सही, लेकिन इसके नतीजे साफ तौर पर संकेत कर रहे हैं कि सत्ता विरोधी रुझान जमीनी स्तर पर पनप रहा है। भाजपा के प्रभावशाली चेहरे अब अपराजेय नहीं रहे और प्रदेश की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर है। 2027 में कौन जीतेगा, यह अभी दूर की बात है, लेकिन आज की सच्चाई यह है कि भाजपा को आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है और कांग्रेस को आत्मविकास की।