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नैनीताल हाईकोर्ट: पंचायत चुनावों की वोटर लिस्ट में बाहरी नामों पर हुई सुनवाई, दिया ये आदेश

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले के बुधलाकोट ग्रामसभा, उधम सिंह नगर की कई ग्राम सभाओं और उत्तरकाशी के बड़कोट नगर पालिका क्षेत्र में पंचायत चुनावों की वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों के नाम शामिल किए जाने के खिलाफ दायर तीन जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सभी याचिकाओं को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि अब जबकि चुनाव संपन्न हो चुके हैं, यदि किसी प्रत्याशी या मतदाता को आपत्ति है तो वह चुनाव याचिका दायर कर सकता है।

दोषी अधिकारी निलंबित

राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत के बाद विवादित वोटर लिस्टों का परीक्षण किया गया है। जिन लोगों के नाम संदेहास्पद या गलत पाए गए, उन्हें सूची से हटा दिया गया है। साथ ही ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), जिन्होंने बिना उचित सत्यापन के नाम जोड़े थे, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। बड़कोट में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी है।

याचिका में गंभीर आरोप

नैनीताल जिले के बुधलाकोट निवासी आकाश बोरा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि उनके गांव की वोटर लिस्ट में 82 बाहरी लोगों के नाम जोड़े गए, जिनमें अधिकांश उड़ीसा और अन्य राज्यों से हैं। शिकायत पर एसडीएम ने जांच कमेटी गठित की थी, जिसने जांच में 18 नाम बाहरी व्यक्तियों के पाए। बावजूद इसके, अंतिम सूची से इन्हें नहीं हटाया गया। कोर्ट में अतिरिक्त 30 संदिग्ध नामों की सूची भी पेश की और आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हाईकोर्ट ने उठाए अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से स्पष्ट पूछा कि वोटर लिस्ट तैयार करते समय आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड या स्थायी निवास से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया या नहीं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि ऐसा किया गया है तो उसका रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या केवल मौखिक सूचना के आधार पर ही नाम जोड़े गए।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025: आरक्षण चक्र लागू, 12 जिलों के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित

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देहरादून :  राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर आरक्षण चक्र को अंतिम रूप दे दिया है। पंचायतीराज अनुभाग-1 द्वारा जारी शासनादेश (संख्या: 1088/XII(1)/2025/86(22)/2019 दिनांक 01 अगस्त 2025) के अनुसार, राज्य के 12 जिलों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।

इस फैसले के तहत महिलाओं, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग (अनारक्षित) के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पदों का आरक्षण चक्र पहले बार लागू किया गया है।

आरक्षण निर्धारण के आधार

उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अधिनियम, 2025 और पंचायतों के आरक्षण एवं आवेदन नियमावली 2025 के तहत यह आरक्षण तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश (दिनांक 10.05.2022) और हाईकोर्ट के निर्णय (दिनांक 11.06.2025) को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह आदेश पारित किया।

आरक्षण सूची – जिला पंचायत अध्यक्ष पद (2025):

1 अल्मोड़ा – महिला

2 बागेश्वर महिला – अनुसूचित जाति

3 चंपावत – अनारक्षित

4 चमोली – अनारक्षित

5 देहरादून – महिला

6 नैनीताल – अनारक्षित

7 पौड़ी गढ़वाल – महिला

8 पिथौरागढ़ – अनुसूचित जाति

9 रुद्रप्रयाग – महिला

10 टिहरी गढ़वाल – महिला

11 उधमसिंह नगर – पिछड़ा वर्ग

12 उत्तरकाशी -अनारक्षित

शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रस्ताव पर आपत्ति या सुझाव देना चाहता है, तो वह 15 दिन के भीतर लिखित में अपना पक्ष पंचायतीराज विभाग, सचिवालय परिसर, 04-सुभाष मार्ग, देहरादून में प्रस्तुत कर सकता है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व हेतु विशेष शर्तों और परीक्षण के बाद ही आरक्षण देने के निर्देश के बाद यह नया आरक्षण चक्र लागू किया गया है। पहली बार पूरे प्रदेश में डिस्ट्रिक्ट लेवल पर आरक्षण का समुचित चक्र लागू किया गया है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 : भाजपा के जीत के दावों की कांग्रेस ने खोली पोल, गिनाई बड़े चेहरों की हार

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उत्तराखंड में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के नतीजों ने प्रदेश की सियासत को झकझोर दिया है। एक ओर भाजपा ने इन चुनावों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों की जीत बताते हुए “भगवामय प्रदेश” का दावा किया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने इन दावों की वास्तविकता को चुनौती देते हुए भाजपा के कई दिग्गज नेताओं और उनके परिजनों की हार को जनता के स्पष्ट संकेत के रूप में परिभाषित किया है। इस चुनाव ने साफ कर दिया है कि भले ही पार्टी कार्यालय में मिठाई बंट रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जनता ने सत्ताधारी दल को सन्देश दे दिया है, “काम दिखाओ, चेहरा नहीं।”

भाजपा के दिग्गजों की हार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भले ही गैर-दलीय होते हैं, लेकिन इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन वाले उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा ने इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक अभियान में बदल दिया था, लेकिन उसके कई शीर्ष नेताओं के परिजनों और पूर्व पदाधिकारियों को करारी हार मिली:

  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का गृह जनपद चमोली में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

  • उत्तरकाशी में पूर्व विधायक मालचंद की पुत्री और पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येंद्र राणा चुनाव हार गए।

  • टिहरी में पूर्व प्रमुख नीलम बिष्ट और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कंचन गुनसोला की बहू चुनाव में पराजित हुईं।

  • विधायक शक्ति लाल शाह के दामाद भी चुनाव हार गए।

  • पौड़ी में विधायक दिलीप रावत की पत्नी को पराजय मिली।

  • नैनीताल में विधायक सरिता आर्य के पुत्र की हार ने चर्चा बटोरी।

  • पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी भी चमोली से चुनाव हार गईं— खास बात यह कि वे भाजपा में शामिल हो चुकी थीं।

  • चंपावत में पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल की बेटी, पूर्व प्रमुख लक्ष्मण सिंह के बेटे, भतीजे और बहुएं चुनाव नहीं जीत सकीं।

  • कई पूर्व जिला अध्यक्ष और मंडल स्तर के नेता भी पराजित हुए।

कांग्रेस ने इन परिणामों को अपने पक्ष में बताते हुए कहा कि भाजपा के पास जश्न मनाने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा सिर्फ आतिशबाजी कर रही है, जबकि मैदान में उनके अपने चेहरे जमींदोज हो गए हैं। ये जनादेश सत्ता के दंभ और प्रचार की राजनीति के खिलाफ है। कांग्रेस के अनुसार, इन चुनावों ने संकेत दिया है कि प्रदेश की जनता 2027 की ओर बदलाव का मन बना चुकी है।

पंचायत चुनावों में भाजपा ने जिस तरह विधानसभा जैसी रणनीति अपनाई, वह उसके खिलाफ गया। पार्टी की “टॉप डाउन” अप्रोच में स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत प्रभाव की अनदेखी की गई। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में व्यक्ति का सामाजिक जुड़ाव, स्थानीय कार्य, ईमानदारी और जनसंपर्क ही निर्णायक कारक होते हैं—not party tag. इन चुनावों में कई जगह भाजपा कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ते नजर आए, जिससे अंदरूनी फूट और असंतोष उजागर हुआ। सिर्फ पोस्टर, बैनर और मीडिया प्रचार पंचायत चुनाव में काम नहीं करते—यह बात भाजपा को समझनी होगी।

कांग्रेस को इन परिणामों से मनोबल मिला है। संगठन को लंबे समय बाद कुछ ऐसा मिला है, जिसे “जनता की स्वीकृति” कहा जा सकता है। हालांकि, कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि जीत की ओर यात्रा स्थिर संगठन, स्पष्ट दृष्टिकोण और लगातार जमीनी संपर्क से होती है। य

पंचायत चुनाव न सही, लेकिन इसके नतीजे साफ तौर पर संकेत कर रहे हैं कि सत्ता विरोधी रुझान जमीनी स्तर पर पनप रहा है। भाजपा के प्रभावशाली चेहरे अब अपराजेय नहीं रहे और प्रदेश की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर है। 2027 में कौन जीतेगा, यह अभी दूर की बात है, लेकिन आज की सच्चाई यह है कि भाजपा को आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है और कांग्रेस को आत्मविकास की।

21 वर्षीय प्रियंका नेगी बनीं मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट की ग्राम प्रधान, मुख्यमंत्री धामी ने दी बधाई

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गैरसैंण (चमोली)। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में हुए पंचायत चुनाव में 21 वर्षीय प्रियंका नेगी ने ग्राम प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। इस ऐतिहासिक जीत के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं प्रियंका को फोन कर बधाई दी और कहा कि वे गांव के विकास के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने सारकोटवासियों को भी शानदार चुनाव प्रक्रिया के लिए बधाई दी और ग्राम वासियों की भागीदारी को लोकतंत्र की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश के मॉडल गांव के रूप में चुना गया है। इस दिशा में विकास कार्य तेज गति से चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी शीघ्र ही गांव का निरीक्षण करेंगे। सीएम धामी ने प्रियंका नेगी से अपील की कि वे गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएं। उन्होंने प्रियंका को देहरादून आमंत्रित भी किया।

गैरसैंण ब्लॉक के तहत आने वाले सारकोट गांव की नव निर्वाचित प्रधान प्रियंका नेगी ने अपनी प्रतिद्वंदी प्रियंका देवी को 421 बनाम 235 मतों के अंतर से हराया। प्रियंका नेगी गैरसैंण महाविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में स्नातक हैं और हाल ही में उनका परिणाम घोषित हुआ है। उनकी इस जीत के साथ वह क्षेत्र की सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान बन गई हैं। प्रियंका नेगी के पिता राजे सिंह नेगी भी वर्ष 2014 से 2019 तक सारकोट गांव के प्रधान रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी के साथ मिलकर गांव के समग्र विकास में पूर्ण सहयोग करेंगे।

सारकोट बना राज्य के लिए मॉडल
सारकोट गांव चमोली जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक है, जहां वर्तमान में 300 से अधिक परिवार निवास करते हैं। गांव में पलायन न होने और सामाजिक सक्रियता के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण से इस गांव को मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम घोषित किया था। तब से लेकर अब तक गांव में कई विकास योजनाएं चलाई जा रही हैं।

प्रियंका ने अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा, “मुख्यमंत्री की ओर से चल रहे विकास कार्यों को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही गांव की महिलाओं को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।” सारकोट में यह जीत सिर्फ एक पंचायत चुनाव नहीं, बल्कि युवा नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव: चमोली में पूर्व फौजी ने किया बड़ा राजनीतिक उलटफेर, पूर्व मंत्री की पत्नी को दी शिकस्त

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चमोली : उत्तराखंड पंचायत चुनाव के नतीजों ने जहां कई पुराने समीकरणों को बदल दिया है, वहीं चमोली जिले की रानों जिला पंचायत सीट से आए एक चौंकाने वाले परिणाम ने सबको चौंका दिया। यहां पूर्व सैनिक लक्ष्मण खत्री ने सियासत के दिग्गजों को धूल चटाते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी को 479 वोटों से करारी शिकस्त दी है।

यह हार सिर्फ एक प्रत्याशी की नहीं, बल्कि पूरे एक राजनीतिक परिवार की साख पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। रजनी भंडारी पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी हैं, जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। उनकी इस राजनीतिक घर वापसी के बाद पहले ही बद्रीनाथ विधानसभा उपचुनाव में उन्हें कांग्रेस के लखपत बुटोला से हार का सामना करना पड़ा था। अब पंचायत चुनाव में उनकी पत्नी की पराजय ने उनके राजनीतिक ग्राफ को और गिरा दिया है।

पूर्व फौजी लक्ष्मण खत्री की जीत को आम जनता के बीच उनकी सादगी, सेवा और ज़मीनी जुड़ाव का नतीजा माना जा रहा है। गांव-गांव जाकर संपर्क साधने और स्थानीय मुद्दों को लेकर की गई उनकी स्पष्ट बातों ने मतदाताओं को काफी प्रभावित किया। वहीं रजनी भंडारी के हारने के पीछे स्थानीय स्तर पर गहराती नाराजगी और परिवार की लगातार सक्रिय राजनीति से उपजा असंतोष एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

इस सीट से एक और अहम बात यह रही कि भाजपा के चमोली जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल भी इस मुकाबले में पिछड़ गए और चौथे स्थान पर रहे। यह भाजपा के लिए जिले में गंभीर संदेश की तरह देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रानों सीट से यह परिणाम न सिर्फ पंचायत स्तर की राजनीति के समीकरणों को बदलने वाला है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में भी इसकी गूंज सुनाई दे सकती है। भंडारी परिवार की लगातार हारों ने उनकी पकड़ कमजोर की है, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं और नए चेहरों को अब मौका मिलता दिख रहा है।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव में कांग्रेस का परचम, 8 जिलों में बनेगा कांग्रेस का बोर्ड: धस्माना

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देहरादून : उत्तराखंड के पंचायत चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में नया संदेश दे दिया है। कांग्रेस ने इस बार गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक पंचायत चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने दावा किया है कि प्रदेश के 12 में से 8 जिलों में कांग्रेस अपना जिला पंचायत बोर्ड बनाने जा रही है, जबकि भाजपा को इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है।

देहरादून में मीडिया से बातचीत करते हुए धस्माना ने कहा, “चुनाव परिणाम कांग्रेस की वापसी का संकेत हैं। भाजपा की जनविरोधी नीतियों से जनता त्रस्त है और पंचायत चुनाव में उसने साफ-साफ बदलाव का मन बना लिया है।” उन्होंने बताया कि केवल राजधानी देहरादून में ही कांग्रेस ने अब तक घोषित परिणामों में 16 में से 12 सीटें जीत ली हैं।

धस्माना ने प्रमुख विजेताओं के नाम गिनवाते हुए कहा कि चकराता विधायक और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के बेटे अभिषेक सिंह ने बर्नाड वात्सिल से जीत हासिल की है। इनके अलावा मंगरोली से वीरेंद्र सिंह, राएगी से श्याम सिंह, बायला से प्रवीण रावत, मोहना से केशर सिंह, लाखामंडल से अमिता वर्मा, आरा से दिवान सिंह तोमर, चंद्रोटी पुंडीर से पिंकी रोहिला, एटनबाग से पिंकी रोहिला, केदारवाला से हेमलता आजाद, नवाबगढ़ से संजय किशोर, और माजरी ग्रांट से सुखविंदर कौर विजयी हुए हैं।

गढ़वाल के चमोली जिले से भी कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है। गोपेश्वर के पिलांग से विपिन फर्स्वाण, सिमली से विक्रम सिंह कठैत, देवड़खदौरा से जयप्रकाश पंवार, कोठली से साक्षी नेगी, मालसी से कामेश्वरी नेगी और चौंडा से कलावती देवी विजयी घोषित हुए हैं।

धस्माना ने कहा कि टिहरी, पौड़ी और उत्तरकाशी जिलों में भी कांग्रेस मजबूत स्थिति में है, वहीं कुमाऊं मंडल के जिलों – अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ से भी कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि न केवल जिला पंचायत, बल्कि क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर भी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने भाजपा को मात दी है। “क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की बात करें तो बड़ी संख्या में गैर-भाजपाई उम्मीदवारों की जीत यह दिखाती है कि जनता ने भाजपा को स्पष्ट रूप से नकार दिया है,”

सैनिक के बेटे की इलाज के अभाव में मौत पर सियासी घमासान, कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

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देहरादून : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सुर्खियों में है। चमोली जिले के एक दूरस्थ गांव में तैनात सैनिक के डेढ़ वर्षीय बेटे की इलाज के अभाव में दर्दनाक मौत के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने इस घटना को “राज्य पर कलंक” बताते हुए धामी सरकार पर करारा हमला बोला है।

देहरादून में कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए माहरा ने कहा कि “उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं खुद वेंटिलेटर पर हैं, और पहाड़ी जिलों में तो हालात और भी बदतर हैं। एक सैनिक की पत्नी अपने बीमार बेटे को चमोली से बागेश्वर के पांच अस्पतालों में लेकर भटकती रही, लेकिन हर जगह उसे सिर्फ रेफर किया गया। अंत में हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए समय पर एंबुलेंस तक नहीं मिली और मासूम ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।”

उन्होंने कहा कि जब देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात जवानों के परिवार को इस प्रकार की पीड़ा झेलनी पड़े, तो यह पूरे राज्य और शासन तंत्र के लिए शर्मनाक है। “धामी सरकार एक ओर सैनिक सम्मान की बातें करती है, दूसरी ओर सैनिक का बच्चा इलाज के अभाव में मर जाता है। यह दोहरे चरित्र की पराकाष्ठा है,” माहरा ने कहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मूलभूत विषयों से ध्यान हटाकर केवल आबकारी और खनन पर फोकस कर दिया है। “सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को पीपीपी मॉडल के हवाले कर दिया है, जिससे जिला अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बन कर रह गए हैं। न डॉक्टर हैं, न दवाइयां, और न ही जीवन रक्षक सेवाएं। यही वजह है कि पलायन का बड़ा कारण भी ये ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था बन गई है।”

माहरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से इस मुद्दे को उठाती आ रही है और आने वाले विधानसभा सत्र में इस मामले को प्रमुखता से उठाकर सरकार को जवाबदेह बनाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्राथमिकता में बदलाव नहीं किया और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ नहीं किया, तो कांग्रेस जन आंदोलन की राह पकड़ेगी।

लोक कलाकार लच्छू ने रचा इतिहास: 3.5 फीट कद, लेकिन हौसला पहाड़ जैसा, बने BDC मेंबर

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बागेश्वर : उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 में बागेश्वर जनपद के गरुड़ ब्लॉक से एक ऐसा नाम उभरा है जिसने न सिर्फ राजनीति में नई मिसाल कायम की है, बल्कि समाज को यह दिखा दिया कि कद से नहीं, हौसले और सेवा-भाव से प्रतिनिधि बनते हैं।

हम बात कर रहे हैं लक्ष्मण कुमार उर्फ पहाड़ी लच्छू की, जिनकी हाइट मात्र 3.5 फीट है, लेकिन जनसेवा के इरादे और जमीनी जुड़ाव ने उन्हें जैसर गढ़खेत क्षेत्र पंचायत सीट से BDC (क्षेत्र पंचायत सदस्य) का विजेता बना दिया।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले लोक कलाकार लच्छू के गीत, नृत्य और अभिनय पहले से ही स्थानीय जनता के बीच मशहूर थे, लेकिन इस बार उन्होंने जनसेवा का बीड़ा उठाया और मैदान में उतरे। प्रचार के दौरान उन्होंने कभी बाइक से, तो कभी घोड़े पर सवार होकर गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क किया।

लच्छू को कुल 348 वोट मिले, जबकि निकटतम प्रतिद्वंदी कैलाश राम को 230, पप्पू लाल को 227 और प्रताप राम को 181 वोट मिले। इस तरह लच्छू ने 118 वोटों के अंतर से शानदार जीत दर्ज की है।

लक्ष्मण उर्फ लच्छू पेशे से एक लोक कलाकार हैं। वो पहाड़ी गीतों पर अभिनय करते हैं, डांस करते हैं और अपनी कलाकारी के ज़रिए कई बार सामाजिक संदेश भी देते हैं। कई बार उनका छोटा कद मज़ाक का विषय भी बना, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

अब जब वो BDC सदस्य बन चुके हैं, तो उनका पहला वादा है कि “गांव के विकास के लिए बिना रुके काम करूंगा। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता है।

उत्तराखंड के इस पंचायत चुनाव में जहां कई जगहों पर युवाओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की, वहीं लच्छू जैसे उम्मीदवारों की जीत से यह भी साबित हो गया कि अब ग्रामीण भारत भी नेतृत्व के लिए काबिलियत और नीयत को प्राथमिकता देने लगा है न कि बाहरी दिखावे को।

लच्छू की जीत एक संदेश है उन सभी के लिए, जो शारीरिक सीमाओं को अपने सपनों की दीवार मानते हैं।“मैं हर मंच पर बोला हूं – मेरा कद छोटा हो सकता है, पर दिल और सोच बड़ी है। अब मौका मिला है तो कुछ करके दिखाऊंगा। गांव मेरा घर है, और अब मैं इसका सेवक हूं।”

—लच्छू, नव-निर्वाचित BDC सदस्य

भुत्सी जिला पंचायत : चुनाव आयोग ने किया रद्द, सुप्रीम कोर्ट से बहाल हुआ नामांकन, BJP प्रत्याशी को हराया

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टिहरी: टिहरी जिले के धनौल्टी विधानसभा क्षेत्र की भुत्सी जिला पंचायत सीट (वार्ड नंबर 10) इस पंचायत चुनाव में एक असाधारण कानूनी और चुनावी लड़ाई का गवाह बनी, जिसने सबका ध्यान आकर्षित किया। यह गाथा आज सीता देवी मनवाल की जीत के साथ समाप्त हुई, जिन्होंने अपनी उम्मीदवारी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँची महत्वपूर्ण बाधाओं को पार करने के बाद अपनी जीत को मजबूत किया।

मनवाल की जीत की यात्रा दृढ़ता का प्रमाण है, क्योंकि उन्होंने न्यायिक ‘अग्निपरीक्षा’ और ‘जनता की अग्निपरीक्षा’ दोनों को सफलतापूर्वक पार किया। उन्होंने प्रभावशाली 4,596 मत प्राप्त किए, जबकि भाजपा समर्थित सरिता नकोटी को 4,351 मत मिले। मनवाल की 245 मतों के अंतर से मिली निर्णायक जीत इसे उत्तराखंड के वर्तमान त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में सबसे संघर्षपूर्ण जीत बनाती है।

नामांकन रद्द हुआ, फिर बहाल हुआ

विवाद तब शुरू हुआ जब रिटर्निंग अधिकारी ने शुरू में सीता मनवाल का नामांकन रद्द कर दिया, जिससे सरिता नकोटी को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया। हार न मानते हुए, मनवाल ने तुरंत नैनीताल उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को पलट दिया और निर्वाचन आयोग को उन्हें चुनाव चिन्ह आवंटित करने का निर्देश दिया।

इस फैसले के बाद निर्वाचन आयोग ने नकोटी की निर्विरोध जीत को रद्द कर दिया और मनवाल को चुनाव चिन्ह जारी किया। हालांकि, भाजपा समर्थित सरिता नकोटी ने फिर इस मामले को आगे बढ़ाते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अवकाश याचिका (एसएलपी) दायर की। मामले की सुनवाई के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिससे मनवाल के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया।

कानूनी लड़ाई खत्म होने के बाद, भाजपा की सरिता नकोटी और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सीता मनवाल, दोनों ने एक fiercely contested चुनाव में खुद को झोंक दिया। दोनों दलों ने भुत्सी सीट पर कब्जा करने के लिए काफी प्रयास और संसाधन लगाए थे।

अंततः, सीता मनवाल का लचीलापन और जनता का जनादेश प्रबल हुआ। उन्होंने अपनी जीत को “संविधान, न्यायपालिका और जनता की संयुक्त जीत” बताया। मनवाल का असाधारण संघर्ष और अंतिम सफलता अब राज्य भर में कई महिलाओं और जन प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने जा रही है।

जैसे-जैसे उत्तराखंड पंचायत चुनाव के परिणाम घोषित किए जा रहे हैं, जो जीत और हार दोनों को दर्शा रहे हैं, सीता मनवाल की कहानी लोकतांत्रिक भावना और अटूट दृढ़ संकल्प के एक शक्तिशाली उदाहरण के रूप में सामने आती है।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव : बीटेक पास 22 साल की साक्षी बनीं प्रधान

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देहरादून: उत्तराखंड में दो चरणों में संपन्न हुए पंचायत चुनाव के परिणाम सामने आने लगे हैं, और कई जिलों में प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। कुछ युवा चेहरों ने जीत दर्ज कर सबको चौंकाया है, वहीं कई स्थानों पर परिणाम टॉस या पर्ची से तय हुए हैं।


युवा चेहरों की जीत:

  • 22 वर्षीय साक्षी बनीं प्रधान: पौड़ी जिले के पाबौ ब्लॉक की कुई गांव से 22 वर्षीय साक्षी ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। देहरादून से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद साक्षी ने अपने गांव लौटकर विकास का बीड़ा उठाया और चुनाव मैदान में उतरीं। उन्होंने कहा कि वह अपने बीटेक के अनुभव को गांव के विकास में लगाएंगी।
  • सबसे कम उम्र की प्रधान (मुनस्यारी): मुनस्यारी के क्विरीजीमिया ग्राम पंचायत में 22 वर्षीय ईशा ग्राम प्रधान चुनी गईं, जो विकासखंड में सबसे कम उम्र की प्रधान हैं। उनकी शैक्षिक योग्यता बीए बीएड है।

रोचक मुकाबले और विशेष परिणाम:

  • टॉस/पर्ची से निर्णय:
    • कर्णप्रयाग के भैसवाड़ा ग्राम पंचायत में प्रधान पद के दोनों प्रत्याशियों को बराबर मत मिलने पर ममता देवी को पर्ची के जरिए विजेता घोषित किया गया।
    • रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के कांदी गांव में लक्ष्मी देवी और पूनम देवी को 168-168 मत मिले। जिलाधिकारी प्रतीक जैन की मौजूदगी में पर्ची से लक्ष्मी देवी को प्रधान घोषित किया गया।
  • गलत विजेता की घोषणा पर बवाल: कर्णप्रयाग की क्षेपं वार्ड खरसांई से पहले गलती से लक्ष्मण राणा को विजयी घोषित कर दिया गया, जबकि राकेश मोहन राणा को अधिक मत मिले थे। बाद में प्रशासन ने पुर्नमतगणना के बाद राकेश मोहन राणा को विजयी घोषित किया। इस त्रुटि से लक्ष्मण राणा को मानसिक आघात पहुंचा।
  • यूट्यूबर दीपा नेगी हारीं: रुद्रप्रयाग की ग्राम पंचायत घिमतोली से यूट्यूबर दीपा नेगी को कविता देवी ने पराजित किया।

प्रमुख सीटों पर परिणाम:

रुद्रप्रयाग जिले:

  • जिला पंचायत वार्ड कंडारा से अजयवीर भंडारी निर्वाचित।
  • घिमतोली से कविता देवी ने यूट्यूबर दीपा नेगी को हराया।

टिहरी जिले:

  • देवप्रयाग की छड़ियारा क्षेत्र पंचायत सीट से पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण के बेटे अरविंद सिंह सजवाण ने जीत हासिल की।
  • कीर्तिनगर में द्वितीय चक्र के प्रधान पद के विजयी प्रत्याशी:
    • जियालगढ़ से दिनेश कुमार
    • सरोला से मकानी देवी
    • मलेथा से रश्मि रावत
    • भैंसवाड़ा – ममता देवी (पर्ची से)
    • घिड़ियाल गांव – मंजू देवी
    • रनकंडियाल – आशीष कुमार
  • कीर्तिनगर क्षेत्र पंचायत सदस्य:
    • नैथाणा- अनीता देवी
    • मुन्डोली – सुरेश कुमार
    • मलेथा- संजय

देहरादून जिले:

  • विकासनगर: दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर मतगणना स्थल के पास जाम में एक एंबुलेंस फंस गई, जिससे एक युवक तड़पता रहा।
  • चकराता ब्लॉक परिणाम:
    • बगूर पंचायत से प्रधान पद पर चंद्रा देवी 48 मतों से विजयी।
    • चिल्हाड पंचायत से प्रधान पद पर सर्वानन्द बिजल्वाण 25 मतों से विजयी।
    • चातरा पंचायत से प्रधान पद पर शीला नौटियाल 305 मतों से विजयी।
    • किस्तुड पंचायत से प्रधान पद पर रीना 311 मतों से विजयी।
    • पेनुवा पंचायत से प्रधान पद पर अंकिता 1 वोट से जीतीं।

पौड़ी जिले:

  • विकासखंड बीरोंखाल ग्राम प्रधान परिणाम:
    • हिमांशु रावत – नांनस्यू
    • मंजू नेगी – पंचराड
    • सिताब सिंह – नागणी
    • पूजा देवी – बमराडी
    • प्रेम सिंह – तिमलाखोली
    • गोपाल सिंह – थापला
    • दयमंती देवी – शीला तत्ला
    • कृति निधी पाल – मासी
    • रेशमा देवी – गेंहुलाड
    • पूजा देवी – सीली तल्ली
    • रेशमा देवी – घोडपाला मल्ला
    • नरेंद्र कुमार – कमलिया
    • विद्यावती देवी – धोबीघाट
    • हेमा देवी – फरसाडी
    • अनीता देवी – खलदार
    • मंजू देवी – तलांई
    • विनोद जोशी – सेंधार
    • लीला देवी – कमडई
    • नीलम देवी – बंदरकोट
    • सिद्धी शाह – लाछी
    • शीतल देवी – भतबों

कर्णप्रयाग से ग्राम प्रधान पद के घोषित परिणाम:

  • चौकी – राखी देवी
  • कमेड़ा – भागवत प्रसाद
  • दुवा – महावीर
  • काण्डा – यशवंत सिंह
  • बरतोली – बीरा देवी
  • ढमढमा – रमेश सिंह
  • मझखोला – सुमेदा बिष्ट
  • सुनाक – संजय सिंह
  • औव्याग्वाड – चंदा चौधरी
  • खरसांई – शिवानी
  • दियारकोट – बलदेव सिंह
  • घतोडा – जयवीर सिंह
  • गवनी – धीरेन्द्र सिंह
  • बैनोली – भगतपाल
  • कल्याणी – कविता देवी
  • छातोली – सरोजनी देवी
  • सुनाली – सावित्री देवी

देवाल विकासखंड क्षेत्र पंचायत पद के घोषित परिणाम:

  • सेलखोला वार्ड – चन्द्रा देवी (ग्राम. सेलखोला, पोस्ट. देवाल)
  • सवाड वार्ड – दलवीर राम (ग्राम. सवाड़, पोस्ट. सवाड़, देवाल)

देवाल ब्लॉक ग्राम प्रधान पद के घोषित परिणाम:

  • देवाल (सेलखोला) – कविता मिश्रा
  • कैल – नीमा मिश्रा
  • हाटकल्याणी – मनोज कुमार
  • अट़ठू – उमेश चन्द्र
  • देवसारी – सुनीता देवी
  • कोठी – लक्ष्मी देवी
  • सवाड – आशा धपोला
  • झलिया – दलवीर सिंह
  • ताजपुर – मदन मोहन

मतगणना जारी है और पल-पल के अपडेट्स सामने आ रहे हैं, जो उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में नए नेतृत्व की तस्वीर पेश कर रहे हैं।