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उत्तराखंड मौसम अपडेट : भीषण गर्मी से मिलेगी राहत, 28 और 29 मई को इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट

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देहरादून। उत्तराखण्ड में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी से अब लोगों को राहत मिलने के आसार हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के विभिन्न जनपदों में आगामी दिनों में वर्षा, गर्जन, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि तथा तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने 28 मई के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि होने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जो कुछ स्थानों पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं। वहीं राज्य के अन्य जिलों में भी तेज हवाओं और गर्जन की संभावना व्यक्त की गई है।

इसके अलावा 29 मई को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इन जिलों में तेज बारिश, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली तथा 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है। साथ ही उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में भारी वर्षा की भी संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने 30 और 31 मई के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने संबंधित जिलों के प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को अलर्ट मोड पर रखने तथा त्वरित कार्रवाई के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। उन्होंने लोगों से आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और कमजोर संरचनाओं से सतर्क रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने अल्मोड़ा को दी 138 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात

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अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने मंगलवार को अल्मोड़ा पहुंचकर जनपद को करीब 138 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने 17 योजनाओं का लोकार्पण और 9 योजनाओं का शिलान्यास किया।

अल्मोड़ा स्थित Soban Singh Jeena University के नवीन प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, नगर विकास और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा व्यवस्था और पेयजल योजनाओं को तेजी से मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जनपद है। यहां की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन योजनाओं से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

112 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने करीब 112.11 करोड़ रुपये की 17 योजनाओं का लोकार्पण किया। इनमें रानीखेत तहसील भवन निर्माण, महिला पॉलीटेक्निक अल्मोड़ा की बाउंड्रीवाल, बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण, पेयजल योजनाएं, विभिन्न मोटर मार्गों का सुधारीकरण, बाढ़ सुरक्षा कार्य और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लमगड़ा में ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण जैसी योजनाएं शामिल हैं।

इसके अलावा Soban Singh Jeena University के प्रशासनिक भवन और कुलपति आवास निर्माण कार्य का भी लोकार्पण किया गया, जिसकी लागत करीब 25 करोड़ रुपये है।

25 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री ने लगभग 25.97 करोड़ रुपये की 9 योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें विभिन्न मोटर मार्गों के डामरीकरण, बैराज निर्माण, मंदिर सौंदर्यीकरण और विद्यालयों में कक्षा-कक्ष निर्माण कार्य शामिल हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री Ajay Tamta, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, कुलपति सतपाल सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी अंशुल सिंह और एसएसपी चंद्रशेखर आर घोड़के सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

केरल में ED छापों पर बवाल, पिनराई विजयन के आवास के बाहर हंगामा

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तिरुवनंतपुरम। केरल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के दौरान बुधवार को बड़ा राजनीतिक हंगामा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष Pinarayi Vijayan के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास के बाहर सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और ईडी अधिकारियों के वाहनों पर हमला कर दिया। घटना में एक पुलिसकर्मी के घायल होने की भी सूचना है।

जानकारी के अनुसार, ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (CMRL) मामले में ईडी ने केरल के 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इसी क्रम में तिरुवनंतपुरम के बेकरी जंक्शन स्थित पिनराई विजयन के किराए के आवास पर भी जांच की गई। बताया जा रहा है कि जैसे ही ईडी अधिकारी तलाशी पूरी कर बाहर निकले, वहां मौजूद सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने उनके वाहनों को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने ईडी की गाड़ियों पर पथराव किया और तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तलाशी के दौरान पिनराई विजयन और उनके परिवार के सदस्य घर के अंदर मौजूद थे। इस बीच बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता आवास के बाहर जमा होकर केंद्र सरकार और ईडी के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने परिसर में घुसने की कोशिश भी की, जिससे तनाव और बढ़ गया।

ईडी ने इस मामले में पिनराई विजयन, उनकी बेटी Veena Vijayan और पूर्व मंत्री एवं दामाद P.A. Mohammed Riyas से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली है। छापों के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। सीपीआई (एम) महासचिव M. A. Baby ने ईडी की कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है।

वहीं पिनराई विजयन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईडी लंबे समय से उनके घर पर छापा मारना चाहती थी। उन्होंने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर निशाना साधते हुए कहा कि इस कार्रवाई से कुछ लोगों को खास संतुष्टि मिलेगी। विजयन ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्षी दलों को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों से सीपीआई (एम) को कमजोर नहीं किया जा सकता और पार्टी हर चुनौती का मजबूती से सामना करेगी।

उत्तरकाशी में आवारा कुत्तों का आतंक, एक दिन में 16 लोगों पर हमला

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उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर के विभिन्न इलाकों में एक ही दिन में कुत्तों ने 16 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। सबसे गंभीर मामला तांबाखानी क्षेत्र से सामने आया, जहां एक चार वर्षीय मासूम पर घर के आंगन में घुसकर कुत्ते ने हमला कर दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष है।

जानकारी के अनुसार, तांबाखानी निवासी गौरव का चार वर्षीय बेटा दिव्यांश घर के आंगन में खेल रहा था। इसी दौरान मोहल्ले में घूमने वाला एक आवारा कुत्ता अचानक घर में घुस आया और बच्चे पर हमला कर दिया। बच्चे को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों ने किसी तरह बच्चे को कुत्ते से छुड़ाया और तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।

वहीं केदारघाट क्षेत्र में भी एक व्यक्ति पर कुत्ते ने हमला कर दिया। स्थानीय निवासी हरीश कुमार ने बताया कि वह सड़क किनारे खड़े थे, तभी अचानक एक कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने डंडे की मदद से खुद को बचाया, लेकिन तब तक वह घायल हो चुके थे।

इसके अलावा जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में 14 अन्य लोग भी आवारा कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं। जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पिछले दो महीनों से प्रतिदिन औसतन आठ से दस लोग डॉग बाइट के मामलों में अस्पताल पहुंच रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और पशुपालन विभाग की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार बढ़ते हमलों के कारण लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

नगर पालिका की प्रभारी ईओ कुसुम राणा ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हो गए हैं। एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के निर्माण के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है। तब तक पशुपालन विभाग के सहयोग से आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा: क्या 2027 से पहले कांग्रेस को मिलेगी बूस्टर डोज?

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उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय बाद कांग्रेस को ऐसा मौका मिला है, जिसे पार्टी केवल एक औपचारिक दौरे के रूप में नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत के तौर पर देख रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित दो दिवसीय उत्तराखंड दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य कांग्रेस लगातार संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व संकट और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता जैसे सवालों से जूझ रही है।

चार जून को अल्मोड़ा में जनसभा, पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन और पांच जून को देहरादून में कांग्रेस नेताओं व संगठन के साथ बैठक—इन तीन कार्यक्रमों को यदि राजनीतिक नजरिए से देखा जाए, तो यह केवल एक सामान्य दौरा नहीं बल्कि कांग्रेस की “री-लॉन्चिंग एक्सरसाइज” भी माना जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है राहुल गांधी का यह दौरा?

उत्तराखंड में कांग्रेस पिछले कई वर्षों से भाजपा के मजबूत चुनावी और संगठनात्मक ढांचे के सामने संघर्ष करती दिखाई दी है। 2022 विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी माहौल की उम्मीदों के बावजूद पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर सकी। इसके बाद कई वरिष्ठ नेताओं की निष्क्रियता, गुटबाजी और संगठनात्मक ढीलापन लगातार चर्चा में रहा।

ऐसे में राहुल गांधी का सीधे मैदान में उतरना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ा संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या केवल चुनाव हारना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटना रहा है। राहुल गांधी का दौरा इस मनोबल को फिर से खड़ा करने का प्रयास माना जा रहा है।

अल्मोड़ा से संदेश: पहाड़ की राजनीति पर फोकस

राहुल गांधी की पहली बड़ी जनसभा अल्मोड़ा में प्रस्तावित है। यह केवल भौगोलिक चयन नहीं बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।

कुमाऊं क्षेत्र में कांग्रेस परंपरागत रूप से मजबूत आधार रखने का दावा करती रही है, लेकिन पिछले चुनावों में भाजपा ने यहां भी अपनी पकड़ मजबूत की।

अल्मोड़ा से राहुल गांधी पलायन, बेरोजगारी, सैन्य भर्ती, शिक्षा और स्वास्थ्य संकट, और पहाड़ी जिलों में घटती आबादी जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर सकते हैं।कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा के“डबल इंजन”मॉडल के बावजूद पहाड़ के मूल मुद्दे आज भी जस के तस हैं।

पौड़ी का पूर्व सैनिक सम्मेलन: रणनीतिक राजनीति

उत्तराखंड को सैनिक बाहुल्य राज्य माना जाता है। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और सैनिक परिवार राज्य की राजनीति को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन आयोजित करना कांग्रेस की एक बेहद रणनीतिक चाल मानी जा रही है।

  • अग्निपथ योजना।
  • सैन्य भर्ती में बदलाव।
  • युवाओं में रोजगार को लेकर असंतोष।

जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश करता रहा है। राहुल गांधी पहले भी अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस इस सम्मेलन के जरिए सैन्य परिवारों और युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

देहरादून बैठक का फोकस संगठन

राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम देहरादून में होने वाली संगठनात्मक बैठक मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी, विधायकों, पूर्व विधायकों और आनुषंगिक संगठनों के साथ राहुल गांधी की बैठक कई संकेत देती है। बैठक में संगठन में जवाबदेही तय हो सकती है। निष्क्रिय नेताओं को संदेश दिया जा सकता है और 2027 की तैयारी का रोडमैप तैयार हो सकता है।

उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से प्रभावित रही है। वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग शक्ति केंद्र अक्सर पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े करते रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी की मौजूदगी संगठन को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।

कांग्रेस को कैसे मिल सकता है“बूस्टर डोज?

1. कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा

कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड को पर्याप्त राजनीतिक महत्व नहीं देता। राहुल गांधी का सीधा दौरा इस धारणा को बदल सकता है।

2. भाजपा के खिलाफ नैरेटिव सेट करने का मौका

कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, पेपर लीक, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्वतीय क्षेत्रों की बदहाली जैसे मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में दिख सकती है।

3. युवा वोट बैंक पर फोकस

राहुल गांधी की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में युवाओं, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी और बेरोजगार युवा हैं, जिन तक पहुंच बनाने की कोशिश कांग्रेस कर सकती है।

4. 2024 लोकसभा हार के बाद रिकवरी प्रयास

लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की सभी सीटें भाजपा के खाते में गईं। ऐसे में कांग्रेस अब विधानसभा स्तर पर लंबी तैयारी शुरू करना चाहती है। राहुल गांधी का दौरा उसी प्रक्रिया की शुरुआती कड़ी माना जा रहा है।

5. पहाड़ बनाम मैदान की राजनीति

कांग्रेस लंबे समय बाद फिर“पर्वतीय अस्मिता”और “स्थानीय मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश कर सकती है। भाजपा पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि विकास का बड़ा हिस्सा केवल चुनिंदा शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहा।

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि कांग्रेस के लिए यह दौरा राजनीतिक ऊर्जा ला सकता है, लेकिन केवल भीड़ जुटा लेना चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होगा।

कांग्रेस के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं

  • मजबूत संगठन का अभाव।
  • स्पष्ट मुख्यमंत्री चेहरा नहीं होना।
  • आंतरिक गुटबाजी।
  • बूथ स्तर पर कमजोर नेटवर्क।
  • भाजपा की बेहद आक्रामक चुनावी मशीनरी।

भाजपा की नजर भी इस दौरे पर

राजनीतिक तौर पर भाजपा भी राहुल गांधी के दौरे को हल्के में नहीं लेगी। भाजपा कोशिश करेगी कि कांग्रेस की आंतरिक कलह को मुद्दा बनाया जाए। राहुल गांधी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाएं, और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं को सामने रखकर जवाबी नैरेटिव तैयार किया जाए।

राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की जमीन तलाशने की कोशिश है।

यदि यह दौरा संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी राजनीतिक आंदोलन में बदलने में सफल होता है, तो यह कांग्रेस के लिए वास्तव में“बूस्टर डोज”साबित हो सकता है।

लेकिन यदि दौरा केवल भाषणों और भीड़ तक सीमित रह गया, तो उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव लाना कांग्रेस के लिए फिर मुश्किल हो जाएगा।

इबोला अलर्ट के बीच बेंगलुरु एयरपोर्ट पर युगांडा की महिला आइसोलेट, जांच के लिए भेजे गए सैंपल

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नई दिल्ली/बेंगलुरु: दुनियाभर में इबोला वायरस को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर युगांडा से भारत पहुंची एक 28 वर्षीय महिला को एहतियातन आइसोलेट किया गया है। महिला 23 मई को बेंगलुरु पहुंची थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसे निगरानी में रखते हुए इंदिरा नगर स्थित एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव Ritwik Ranjanam Pandey ने बताया कि महिला में इबोला के स्पष्ट लक्षण नहीं पाए गए हैं, लेकिन एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की टीम ने थकान और शरीर में दर्द जैसे कुछ शुरुआती संकेतों को देखते हुए सैंपल जांच के लिए भेजने का फैसला किया।

पुणे भेजे गए सैंपल

महिला के सैंपल जांच के लिए National Institute of Virology, पुणे भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भारत पहुंचने के बाद महिला ने पहले एक होटल में ठहराव किया था, लेकिन बाद में हल्के लक्षण सामने आने पर उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

फिलहाल महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रोटोकॉल के तहत दोबारा टेस्ट भी किया जाएगा। अब सभी की नजरें NIV पुणे से आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

इबोला को लेकर दुनिया भर में बढ़ी सतर्कता

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। World Health Organization ने 17 मई को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में बढ़ते मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।

इसके बाद भारत के कई राज्यों ने सतर्कता बढ़ा दी है। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर इबोला प्रभावित देशों से लौटने वाले लोगों को 21 दिनों तक स्वास्थ्य निगरानी में रहने की सलाह दी है।

एयरपोर्ट और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ी

देश के कई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। अमृतसर, दिल्ली और मुंबई समेत प्रमुख एयरपोर्ट पर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की विशेष जांच की जा रही है। वहीं बिहार सरकार ने नेपाल सीमा और एयरपोर्ट्स पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता और समय पर जांच बेहद जरूरी है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

यूपी में आंधी-तूफान से भारी तबाही, आठ लोगों की मौत, कई जिलों में बिजली व्यवस्था ध्वस्त

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लखनऊ: भीषण गर्मी और लू के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सोमवार देर रात और मंगलवार सुबह आए तेज आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचा दी। लखीमपुर खीरी, गोंडा, सीतापुर, बस्ती, संतकबीरनगर और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में हुए हादसों में अब तक आठ लोगों की मौत की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

तेज हवाओं के कारण सैकड़ों टिनशेड उड़ गए, कई मकानों की दीवारें और स्कूलों की बाउंड्रीवाल ढह गईं। बिजली के पोल और पेड़ गिरने से कई जिलों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

लखीमपुर में आग से 40 घर जलकर राख

लखीमपुर खीरी के कारीबडेरी गांव में आंधी के दौरान लगी आग ने विकराल रूप ले लिया। आग की चपेट में आकर करीब 40 घर जल गए। ग्रामीणों के अनुसार तेज हवा के कारण आग तेजी से फैली और देखते ही देखते कई परिवारों की गृहस्थी राख में बदल गई। कई मवेशियों के भी जलने की सूचना है।

नेशनल हाईवे-30 पर जगह-जगह पेड़ गिरने से घंटों जाम लगा रहा। सुबह प्रशासन और वन विभाग की टीम ने रास्ता साफ कराया। जिले में एक किसान की मौत की भी सूचना है।

गोंडा में रेल यातायात प्रभावित

गोंडा जिले में मनकापुर-अयोध्या रेल मार्ग पर पेड़ गिरने से ट्रेनों का संचालन बाधित हो गया। वंदे भारत एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी करीब 40 मिनट तक ट्रैक पर खड़ी रहीं। रेलवे की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मार्ग को बहाल किया।

वहीं शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने से ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन प्रभावित हो गई, जिससे कई ट्रेनें घंटों देरी से चलीं। लखनऊ मेल, चंडीगढ़ सुपरफास्ट और अन्य ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा।

बस्ती में पेड़ गिरने से मासूम की मौत

बस्ती जिले के रघुनाथपुर गांव में तेज आंधी और बारिश के दौरान एक छप्पर पर पीपल का पेड़ गिर गया। हादसे के समय परिवार के सात लोग अंदर सो रहे थे। घटना में एक चार वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल बताए जा रहे हैं।

संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर में बिजली संकट

संतकबीरनगर में आंधी के कारण करीब 80 बिजली पोल और 30 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। कई क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। महुई क्षेत्र में मकान का छज्जा गिरने से एक युवक की मौत हो गई।

सिद्धार्थनगर में भी 150 से अधिक बिजली पोल और 15 ट्रांसफार्मर गिरने से विद्युत व्यवस्था चरमरा गई। देवरिया और महराजगंज में भी कई इलाकों में बिजली बाधित रही।

फसलों को भारी नुकसान

आंधी-तूफान का असर किसानों पर भी पड़ा है। कई जिलों में आम और केले की फसलें जमीन पर गिर गईं। किसानों ने भारी नुकसान की आशंका जताई है।

सीएम योगी ने दिए राहत के निर्देश

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और बिजली व्यवस्था जल्द बहाल करने के आदेश जारी किए गए हैं।

लू का कहर जारी

आंधी और हल्की बूंदाबांदी के बावजूद प्रदेश में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। बांदा 47.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म स्थान बना हुआ है। उरई और प्रयागराज समेत कई शहरों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया।

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में कुछ जिलों में तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई है, जबकि कई इलाकों में लू का असर जारी रहने की चेतावनी दी गई है।

उत्तराखंड : जंगल की भीषण आग से दहशत, इस यूनिवर्सिटी के परिसर तक पहुंचीं लपटें

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पौड़ी। जनपद पौड़ी के देवप्रयाग क्षेत्र में जंगल में लगी भीषण आग ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी। बाह बाजार के निकट जंगल में भड़की आग धीरे-धीरे रिहायशी इलाकों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर तक पहुंच गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया। देर रात कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

जानकारी के अनुसार, देवप्रयाग नगरपालिका के वार्ड संख्या चार स्थित बाह बाजार क्षेत्र में आग सौड़ गांव की ओर से फैलते हुए पहुंची। इससे पहले भी नृसिंहाचल पर्वत पर लगी आग को विश्वविद्यालय परिसर के अध्यापकों और वन विभाग की टीम ने करीब चार घंटे की मेहनत के बाद बुझाया था। हालांकि दो दिन बाद एक बार फिर आग ने विकराल रूप ले लिया और धीरे-धीरे विश्वविद्यालय परिसर की ओर बढ़ने लगी।

स्थिति गंभीर होते देख परिसर प्रशासन ने तत्काल वन विभाग, दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दी। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वन विभाग की टीम ने एक ओर से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैलती चली गई।

दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन घटनास्थल तक पाइप नहीं पहुंच पाने से आग बुझाने में परेशानी हुई। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियातन छात्रों और कर्मचारियों से आवास खाली करा दिए। छात्रावास के ऊपर उठती आग की ऊंची लपटों को देखकर छात्रों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

कुछ ही देर में आग बाह बाजार के ऊपर स्थित जंगल तक पहुंच गई और तेजी से बस्ती की ओर बढ़ने लगी। आग की लपटें घरों के करीब पहुंचती देख स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीण अपने घरों को बचाने के लिए खुद आग बुझाने में जुट गए। कई घंटों की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने आग को बस्ती तक पहुंचने से रोक लिया।

हालांकि सोमवार को भी कई स्थानों पर आग सुलगती रही। बाह बाजार के ऊपर स्थित खेड़ा गांव चारों ओर से आग की चपेट में आ गया, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहा। जंगल में लगी आग से पूरे क्षेत्र में धुएं का गुबार फैल गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है।

जंगल की आग का असर वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। कई जंगली जानवर और पक्षी जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों और विश्वविद्यालय परिसर की ओर पहुंच रहे हैं। पिछले तीन दिनों से परिसर के आसपास गुलदार दिखाई देने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके अलावा कई घायल पक्षी भी सड़कों और बस्तियों में नजर आए।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति Srinivas Varkhedi ने मामले का संज्ञान लिया है। भविष्य में परिसर को जंगल की आग से सुरक्षित रखने के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाएगी, जिसमें वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।

उत्तराखंड में पंचायतों के 3800 से अधिक पद खाली, सरकार ने भेजा चुनाव कराने का प्रस्ताव

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देहरादून। उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में लंबे समय से हजारों पद खाली पड़े हैं। प्रदेश में छह महीने से अधिक समय से 3800 से ज्यादा पंचायत पद रिक्त हैं, जिसके चलते 33 ग्राम पंचायतें असंगठित हो गई हैं। इन पंचायतों को केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता नहीं मिल पा रही है और विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

पंचायत निदेशालय ने रिक्त पदों पर उपचुनाव कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष हरिद्वार को छोड़कर प्रदेश के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए थे। इसके बाद नवंबर 2025 में उपचुनाव भी हुए, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।

निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, ग्राम पंचायत सदस्यों के कुल 55,587 पदों में से 3,843 पदों पर नामांकन ही नहीं हुआ। इसके अलावा देहरादून और उत्तरकाशी में क्षेत्र पंचायत सदस्य के एक-एक पद रिक्त हैं। अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण में क्षेत्र प्रमुख और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में कनिष्ठ उप प्रमुख का पद भी खाली चल रहा है।

विकास कार्यों पर पड़ रहा असर

पंचायतों के असंगठित होने से 15वें वित्त आयोग की राशि में कटौती का प्रावधान है। इससे संबंधित पंचायतों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और स्थानीय विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। पंचायतों में नियमित बैठकें भी नहीं हो पा रही हैं।

संयुक्त निदेशक पंचायत हिमानी ने बताया कि जब तक पंचायतें असंगठित रहेंगी, तब तक उन्हें केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है।

कई जिलों की पंचायतें प्रभावित

प्रदेश के पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और ऊधमसिंह नगर जिलों की कई ग्राम पंचायतें असंगठित श्रेणी में शामिल हैं। इनमें पौड़ी की सुल्मोड़ी, पालकोट और डांगी, अल्मोड़ा की हरोली गनोली, खौड़ी और झीपा, चमोली की चलियापानी और बेडगांव, उत्तरकाशी की मुखवा और पटूड़ी समेत कुल 33 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

केंद्र से सहायता दिलाने की मांग

पंचायतीराज मंत्री Madan Kaushik ने कहा कि असंगठित पंचायतों को भी विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य बाधित न हों।

भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण

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  • टी.एस लामा

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Dharmendra को मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

अभिनेता की ओर से उनकी पत्नी एवं अभिनेत्री-सांसद Hema Malini ने सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर उनकी बेटी Ahana Deol भी मौजूद रहीं। समारोह के दौरान माहौल भावुक रहा और उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ महान अभिनेता को श्रद्धांजलि दी।

धर्मेंद्र को यह सम्मान भारतीय सिनेमा और कला जगत में छह दशकों से अधिक समय तक दिए गए उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। अपनी दमदार अदाकारी, एक्शन और संवेदनशील भूमिकाओं के कारण वह ‘बॉलीवुड के ही-मैन’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

इससे पहले वर्ष 2012 में भी धर्मेंद्र को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था। पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में खुशी और गर्व का माहौल है।

धर्मेंद्र का नाम भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में शुमार किया जाता है, जिन्होंने अपने अभिनय और व्यक्तित्व से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। उनका यह सम्मान भारतीय फिल्म उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।