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कब खुलेगा यमुनोत्री हाईवे, खच्चरों के सहारे ग्रामीणों की जिंदगी

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यमुनोत्री हाईवे पर जंगलचट्टी और बनास के पास पिछले 19 दिनों से रुकावट बनी हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाईवे बंद होने से यमुनोत्री धाम और आसपास के आधा दर्जन गांवों-कस्बों के निवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर खरसाली गांव के लोग खच्चरों के सहारे ही अपनी जरूरतों को पूरा करने को मजबूर हैं, जबकि बच्चों की शिक्षा भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों की बढ़ती मुश्किलें

हाईवे बंद होने से खरसाली गांव तक 82 रसोई गैस सिलिंडर और 34 पैकेट रसद सामग्री खच्चरों के जरिए पहुंचाई गई है। बनास गांव के लोगों को हनुमानचट्टी में 109 रसद पैकेट वितरित किए गए, लेकिन यह अस्थायी राहत से ज्यादा कुछ नहीं है। स्थानीय निवासी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक उनकी जिंदगी जानवरों के भरोसे चलेगी। बच्चों की स्थिति और भी चिंताजनक है—सड़क बंद होने से कई स्कूल नहीं जा पा रहे, और जो जा रहे हैं, वे अपनी जान जोखिम में डालकर जा रहे हैं।

हाईवे बहाली में देरी

हालांकि, बृहस्पतिवार को एनएच ने हनुमानचट्टी के पास ऊंची पहाड़ी से लटके बोल्डर और पत्थर हटाकर वहां आवाजाही शुरू की, लेकिन जंगलचट्टी और बनास के पास की बड़ी-बड़ी चट्टानों ने चुनौती पेश की है। एनएच के कार्यकारी अभियंता मनोज रावत ने बताया कि बनास क्षेत्र में बड़ी चट्टानों के कारण काम में देरी हो रही थी, लेकिन शुक्रवार तक पोकलेन और चट्टान तोड़ने वाली कम्प्रेशर मशीनें वहां पहुंच रही हैं। उनका दावा है कि शुक्रवार शाम तक हाईवे को सुचारू करने का प्रयास जारी है, लेकिन ग्रामीणों में इस पर भरोसा कम है।

रसद वितरण का प्रयास

क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी पीड़ी सौंदाण ने बताया कि हनुमानचट्टी से खच्चरों के जरिए खरसाली के लिए 82 गैस सिलिंडर और 34 रसद पैकेट भेजे गए हैं। बनास गांव के लिए 109 रसद पैकेट वितरित किए गए, जबकि नारायणपुरी के लिए शुक्रवार को रसद भेजने की योजना है। फिर भी, यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं लग रही, और लोगों में असंतोष गहराता जा रहा है।

रोजमर्रा की जिंदगी को ठप

ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे बंदी ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर दिया है। बच्चों की शिक्षा, रसद की आपूर्ति और आपात स्थिति में मदद तक प्रभावित हो रही है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस संकट को गंभीरता से लेगा, या लोग अपनी मुश्किलों के साथ ही जीने को मजबूर रहेंगे?

नींद की कमी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल: मेंटल हेल्थ पर बढ़ता खतरा

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक जागना, स्क्रीन पर घंटों समय बिताना और अनियमित दिनचर्या आम हो चुकी है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये आदतें हमारी मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल रही हैं। नींद की कमी और असंतुलित लाइफस्टाइल न केवल दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं, बल्कि तनाव, चिंता और अवसाद जैसी गंभीर समस्याओं को भी जन्म दे रहे हैं।

नींद और मेंटल हेल्थ का गहरा रिश्ता

विशेषज्ञों के अनुसार, नींद हमारे मस्तिष्क के लिए ईंधन का काम करती है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद दिमाग को तनाव से निपटने और भावनाओं को संतुलित करने में मदद करती है। नींद की कमी से व्यक्ति चिड़चिड़ा, बेचैन और थका हुआ महसूस करता है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने पर यह अवसाद और गंभीर मानसिक विकारों का कारण बन सकती है।

अनहेल्दी लाइफस्टाइल का असर

अनियमित खानपान, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग, व्यायाम की कमी और कैफीन या अल्कोहल का अधिक सेवन हमारी जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) को बिगाड़ देता है। इससे नींद की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। नींद ठीक न होने पर शरीर और दिमाग दोनों थकान और तनाव से जूझने लगते हैं।

अनिद्रा (Insomnia), स्लीप एपनिया और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी समस्याएं नींद छीन लेती हैं। इनसे जूझ रहे लोग अक्सर चिंता, अवसाद और एकाग्रता की कमी का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन समस्याओं को नजरअंदाज करने से मानसिक धुंध (Mental Fog) बढ़ता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता और मस्तिष्क की कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होती हैं।

मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के उपाय

मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर नींद के लिए विशेषज्ञ निम्नलिखित उपाय सुझाते हैं:

  • नियमित नींद का शेड्यूल: रोजाना एक निश्चित समय पर सोएं और जागें।

  • स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और कंप्यूटर से दूरी बनाएं।

  • संतुलित आहार: रात को भारी या मसालेदार भोजन से बचें।

  • व्यायाम की आदत: दिन में 30 मिनट की हल्की कसरत नींद की गुणवत्ता बढ़ा सकती है।

  • तनाव प्रबंधन: सोने से पहले योग, ध्यान या गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।

  • विशेषज्ञ की सलाह: लगातार नींद की समस्या होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।

नींद केवल शारीरिक आराम का साधन नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की आधारशिला है। खराब लाइफस्टाइल और नींद की अनदेखी हमें धीरे-धीरे तनाव, चिंता और अवसाद की ओर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और व्यायाम के जरिए हम अपनी नींद और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। आइए, आज से ही अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं और स्वस्थ मन के साथ बेहतर जीवन जिएं।

सीपी राधाकृष्णन ने 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में ली शपथ

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सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

बता दें कि सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को हराकर जीत हासिल की थी। यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को अचानक इस्तीफा देने के बाद कराया गया था।

चुनाव के बाद राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने परिणाम की घोषणा करते हुए बताया था कि 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया, जिसमें 98.2 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।

प्रधानमंत्री का उत्तराखंड दौरा, आपदा राहत के लिए 1200 करोड़ की सहायता, मृतकों के परिजनों, घायलों और बच्चों के लिए भी बड़ी घोषणा

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देहरादून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देहरादून पहुँचकर उत्तराखंड में हाल ही में हुई अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायज़ा लिया। उन्होंने राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा बैठक की और राज्य को केंद्र सरकार की ओर से 1200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और अवसंरचना के पुनर्निर्माण के लिए बहुआयामी प्रयास किए जाएंगे। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों का पुनर्निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्गों की बहाली, विद्यालयों का पुनर्निर्माण और पशुधन के लिए मिनी किट का वितरण शामिल है।

प्रधानमंत्री ने आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और गंभीर रूप से घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि हालिया आपदा में अनाथ हुए बच्चों को PM CARES for Children योजना के अंतर्गत दीर्घकालिक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और कहा कि केंद्र सरकार इस कठिन समय में राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने आपदा राहत और बचाव कार्यों में लगे NDRF, SDRF, सेना, आपदा मित्र और प्रशासनिक टीमों के प्रयासों की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सहायता अंतरिम है और राज्य सरकार के मेमोरेंडम व केंद्रीय टीमों की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे और मदद दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार आपदा से निपटने और पुनर्निर्माण में हर संभव सहयोग देगी।

देहरादून पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, CM पुष्कर सिंह धामी ने किया स्वागत

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आपदा प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण और राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा के लिए देहरादून पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वागत किया गया। प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में प्रदेशवासियों के बीच उनकी उपस्थिति प्रभावितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और गंभीरता को दर्शाती है।

ADB और केंद्र सरकार ने टिहरी झील क्षेत्र में सतत पर्यटन के लिए किया 126.42 मिलियन डॉलर का ऋण समझौता

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देहरादून। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और भारत सरकार ने उत्तराखंड के टिहरी झील क्षेत्र में सतत और जलवायु-लचीले पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए 126.42 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते पर हस्ताक्षर वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जूही मुखर्जी और एडीबी के भारत में प्रभारी अधिकारी श्री काई वेई येओ ने किए। सुश्री मुखर्जी ने कहा कि यह ऋण उत्तराखंड सरकार की उस नीति का समर्थन करता है, जिसके तहत राज्य को विविध और सभी मौसमों में पर्यटन के लिए उपयुक्त स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, और टिहरी झील को प्राथमिक विकास क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

श्री काई वेई येओ ने कहा कि यह परियोजना जलविद्युत झील के आसपास सतत पर्यटन का मॉडल प्रस्तुत करती है, जो रोजगार सृजन, आय में विविधता और जलवायु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाती है।

परियोजना का लक्ष्य उत्तराखंड के सबसे जलवायु-संवेदनशील और आर्थिक रूप से वंचित क्षेत्रों में से एक, टिहरी गढ़वाल जिला है। यह परियोजना 87,000 से अधिक स्थानीय निवासियों और 27 लाख वार्षिक आगंतुकों को लाभान्वित करेगी। इसके तहत बेहतर पर्यटन योजना, उन्नत बुनियादी ढांचा, स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन और आपदा तैयारी जैसी गतिविधियों को लागू किया जाएगा।

मुख्य कार्यक्रमों में संस्थागत सुदृढ़ीकरण, जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा, भूस्खलन और बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए प्रकृति-आधारित समाधान, और महिलाओं, युवाओं तथा निजी क्षेत्र द्वारा संचालित समावेशी पर्यटन सेवाएं शामिल हैं।

विशेष पहल के रूप में महिलाओं, युवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के नेतृत्व में पर्यटन को समर्थन देने के लिए आजीविका मिलान अनुदान कार्यक्रम, विकलांग व्यक्तियों सहित सार्वभौमिक पहुंच डिज़ाइन, और पायलट गांवों में महिलाओं के नेतृत्व वाली आपदा जोखिम प्रबंधन योजना शामिल है।

फेक न्यूज लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा: संसद की समिति ने दिए कड़े कदम उठाने के सुझाव

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नई दिल्ली। संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने फेक न्यूज को सार्वजनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा करार दिया है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी है। रिपोर्ट में फेक न्यूज पर अंकुश लगाने के लिए दंडात्मक प्रावधानों में संशोधन, जुर्माना बढ़ाने और मीडिया संगठनों में जवाबदेही तय करने जैसी अहम सिफारिशें की गई हैं।

समिति ने सुझाव दिया है कि देश के सभी प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों में फैक्ट चेक तंत्र और आंतरिक लोकपाल को अनिवार्य किया जाए। साथ ही, संपादकीय स्तर पर संपादकों और विषय प्रमुखों तथा संस्थागत विफलताओं के लिए मालिकों और प्रकाशकों को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही गई है।

फर्जी खबरों पर रोक के लिए मौजूदा कानूनों में बदलाव की जरूरत बताते हुए समिति ने जुर्माने की राशि बढ़ाने की सिफारिश की है, ताकि यह प्रकाशकों और रचनाकारों के लिए निवारक साबित हो सके। समिति ने यह भी कहा है कि गलत सूचना की परिभाषा स्पष्ट की जाए और इसे संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाए।

फेक न्यूज पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए समिति ने फ्रांस जैसे देशों के कानूनों का उदाहरण दिया और सीमा पार से फैलने वाली गलत सूचना पर अंकुश के लिए एक अंतर-मंत्रालयी कार्यबल बनाने का सुझाव दिया। इस कार्यबल में कानूनी विशेषज्ञों के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण, विदेश मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल किए जाएं।

राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक, कांग्रेसियों ने कहा- पहले से की गई थी तैयारी

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रायबरेली। शहर के हरचंदपुर इलाके में कल एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया जब राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह के समर्थकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के काफिले को रास्ते में रोक लिया। समर्थकों की तरफ से “राहुल गांधी वापस जाओ” जैसे नारे लगाए गए। इस घटना के बाद कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई है।

कांग्रेस का कहना है कि विरोध पूर्व नियोजित था और प्रशासन को इस तरह की घटना की सूचना पहले से होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, पुलिस और सुरक्षा विभागों की लापरवाही के चलते राहुल गांधी की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस प्रशासन तथा विशेष सुरक्षा बलों (एलआईयू) की भूमिका और तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है। घटना के बाद इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

नेपाल में सामान्य होने लगे सामान्य, कर्फ्यू में ढील, फरार कैदी बने चुनौती

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काठमांडू। नेपाल के सीमावर्ती जिला धनुषा में हालात अब पूरी तरह सामान्य होने लगे हैं। सेना और पुलिस की मुस्तैदी के साथ-साथ स्थानीय लोगों के सहयोग ने स्थिति को नियंत्रण में लाने में अहम भूमिका निभाई है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने भी तनाव कम करने में मदद की है। हालांकि, नेपाल का रक्षा मंत्रालय किसी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है।

कर्फ्यू में ढील
रक्षा मंत्रालय ने हालात सामान्य होते देख कर्फ्यू में आंशिक ढील देने का निर्णय लिया है। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार गुरुवार सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सरकारी कर्मचारी, बैंक कर्मी और सार्वजनिक संस्थानों के स्टाफ पहचान पत्र दिखाकर आवागमन कर सकेंगे। वहीं, हवाई यात्रियों को टिकट दिखाने पर आवाजाही की अनुमति दी गई है। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सीमित ढील के साथ कर्फ्यू प्रभावी रहेगा, जबकि गुरुवार रात 7 बजे से शुक्रवार सुबह 6 बजे तक पुनः पूर्ण कर्फ्यू लागू रहेगा।

जेल ब्रेक कांड ने बढ़ाई चिंता
इस बीच नेपाल में आगजनी और हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर जेल ब्रेक की घटनाएँ हुई हैं। गृह मंत्रालय और नेपाल पुलिस के अनुसार देशभर की विभिन्न जेलों से कुल 13,572 कैदी फरार हो गए हैं।

फरार कैदियों की संख्या इस प्रकार है:

  • झुम्पका जेल: 1,575 कैदी

  • नक्कु जेल: 1,200 कैदी

  • दिल्ली बाजार जेल: 1,100 कैदी

  • कास्की जेल: 773 कैदी

  • चितवन जेल: 700 कैदी

  • कैलाली जेल: 612 कैदी

  • जलेश्वर जेल: 576 कैदी

  • नवलपरासी जेल: 500 से अधिक कैदी

  • सिंदुलीगढ़ी जेल: 471 कैदी

  • कान्चनपुर जेल: 450 कैदी

  • गौर जेल: 260 कैदी

  • दाङ जेल: 124 कैदी

  • सोलुखुम्बु जेल: 86 कैदी

  • बाजहाङ जेल: 65 कैदी

  • जुम्ला जेल: 36 कैदी

इसके अलावा अन्य जेलों और पुलिस कस्डटी से भी कैदी भागे हैं। कुल मिलाकर फरार कैदियों की संख्या 13,572 तक पहुँच चुकी है।

निगरानी कड़ी
फिलहाल जनकपुरधाम सहित संवेदनशील इलाकों में सेना और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ फरार कैदियों की तलाश और हालात पर नियंत्रण में जुटी हुई हैं।

दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, पांच संदिग्ध गिरफ्तार, आईईडी बनाने की सामग्री बरामद

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान में पाकिस्तान से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में विभिन्न राज्यों से पांच संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो दिल्ली से, एक मध्य प्रदेश से, एक हैदराबाद से और एक रांची से शामिल हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन संदिग्धों के पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने की सामग्री, हथियार और अन्य संदिग्ध वस्तुएं बरामद की गई हैं। इस गिरफ्तारी से एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम करने का दावा किया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, यह मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था और एन्क्रिप्टेड ऐप्स तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए संचालित हो रहा था।संदिग्ध युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, भर्ती करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के उद्देश्य से ऑनलाइन ग्रुप चला रहे थे।

मुख्य संदिग्धों में से एक अशरफ दानिश को रांची से गिरफ्तार किया गया, जो भारत में इस मॉड्यूल को संचालित करने का प्रमुख सदस्य था। अन्य चार संदिग्धों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन जांच में उनके पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े होने की पुष्टि हुई है।
अभियान के दौरान दिल्ली पुलिस ने चार से पांच राज्यों में छापेमारी की, जिसमें लगभग आठ संदिग्धों से पूछताछ की गई।

गिरफ्तार संदिग्धों के पास से बरामद सामग्री में एक देशी पिस्तौल, जिंदा कारतूस, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, सल्फर पाउडर, कॉपर शीट्स, बॉल बेयरिंग्स, स्ट्रिप वायर्स, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स, लैपटॉप, मोबाइल फोन और नकदी शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि ये सामग्रियां हथियार और विस्फोटक बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली थीं। जांच में यह भी पता चला है कि मॉड्यूल सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और युवाओं को भर्ती करने के लिए सक्रिय था।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह अभियान केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में चलाया गया। “आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क में थे और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे,” अधिकारी ने कहा। जांच अभी जारी है, जिसमें अन्य सदस्यों की पहचान और संभावित हमलों की योजनाओं की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस ने डिजिटल खातों की जांच तेज कर दी है ताकि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि हो सके।
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब देश में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज हो रहे हैं। हाल ही में रांची और दिल्ली में आईएसआईएस से जुड़े दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद यह दूसरा बड़ा ऑपरेशन है।