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नेपाल में सामान्य होने लगे सामान्य, कर्फ्यू में ढील, फरार कैदी बने चुनौती

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काठमांडू। नेपाल के सीमावर्ती जिला धनुषा में हालात अब पूरी तरह सामान्य होने लगे हैं। सेना और पुलिस की मुस्तैदी के साथ-साथ स्थानीय लोगों के सहयोग ने स्थिति को नियंत्रण में लाने में अहम भूमिका निभाई है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने भी तनाव कम करने में मदद की है। हालांकि, नेपाल का रक्षा मंत्रालय किसी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है।

कर्फ्यू में ढील
रक्षा मंत्रालय ने हालात सामान्य होते देख कर्फ्यू में आंशिक ढील देने का निर्णय लिया है। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार गुरुवार सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सरकारी कर्मचारी, बैंक कर्मी और सार्वजनिक संस्थानों के स्टाफ पहचान पत्र दिखाकर आवागमन कर सकेंगे। वहीं, हवाई यात्रियों को टिकट दिखाने पर आवाजाही की अनुमति दी गई है। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सीमित ढील के साथ कर्फ्यू प्रभावी रहेगा, जबकि गुरुवार रात 7 बजे से शुक्रवार सुबह 6 बजे तक पुनः पूर्ण कर्फ्यू लागू रहेगा।

जेल ब्रेक कांड ने बढ़ाई चिंता
इस बीच नेपाल में आगजनी और हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर जेल ब्रेक की घटनाएँ हुई हैं। गृह मंत्रालय और नेपाल पुलिस के अनुसार देशभर की विभिन्न जेलों से कुल 13,572 कैदी फरार हो गए हैं।

फरार कैदियों की संख्या इस प्रकार है:

  • झुम्पका जेल: 1,575 कैदी

  • नक्कु जेल: 1,200 कैदी

  • दिल्ली बाजार जेल: 1,100 कैदी

  • कास्की जेल: 773 कैदी

  • चितवन जेल: 700 कैदी

  • कैलाली जेल: 612 कैदी

  • जलेश्वर जेल: 576 कैदी

  • नवलपरासी जेल: 500 से अधिक कैदी

  • सिंदुलीगढ़ी जेल: 471 कैदी

  • कान्चनपुर जेल: 450 कैदी

  • गौर जेल: 260 कैदी

  • दाङ जेल: 124 कैदी

  • सोलुखुम्बु जेल: 86 कैदी

  • बाजहाङ जेल: 65 कैदी

  • जुम्ला जेल: 36 कैदी

इसके अलावा अन्य जेलों और पुलिस कस्डटी से भी कैदी भागे हैं। कुल मिलाकर फरार कैदियों की संख्या 13,572 तक पहुँच चुकी है।

निगरानी कड़ी
फिलहाल जनकपुरधाम सहित संवेदनशील इलाकों में सेना और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ फरार कैदियों की तलाश और हालात पर नियंत्रण में जुटी हुई हैं।

दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, पांच संदिग्ध गिरफ्तार, आईईडी बनाने की सामग्री बरामद

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान में पाकिस्तान से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में विभिन्न राज्यों से पांच संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो दिल्ली से, एक मध्य प्रदेश से, एक हैदराबाद से और एक रांची से शामिल हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन संदिग्धों के पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने की सामग्री, हथियार और अन्य संदिग्ध वस्तुएं बरामद की गई हैं। इस गिरफ्तारी से एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम करने का दावा किया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, यह मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था और एन्क्रिप्टेड ऐप्स तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए संचालित हो रहा था।संदिग्ध युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, भर्ती करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के उद्देश्य से ऑनलाइन ग्रुप चला रहे थे।

मुख्य संदिग्धों में से एक अशरफ दानिश को रांची से गिरफ्तार किया गया, जो भारत में इस मॉड्यूल को संचालित करने का प्रमुख सदस्य था। अन्य चार संदिग्धों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन जांच में उनके पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े होने की पुष्टि हुई है।
अभियान के दौरान दिल्ली पुलिस ने चार से पांच राज्यों में छापेमारी की, जिसमें लगभग आठ संदिग्धों से पूछताछ की गई।

गिरफ्तार संदिग्धों के पास से बरामद सामग्री में एक देशी पिस्तौल, जिंदा कारतूस, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, सल्फर पाउडर, कॉपर शीट्स, बॉल बेयरिंग्स, स्ट्रिप वायर्स, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स, लैपटॉप, मोबाइल फोन और नकदी शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि ये सामग्रियां हथियार और विस्फोटक बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली थीं। जांच में यह भी पता चला है कि मॉड्यूल सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और युवाओं को भर्ती करने के लिए सक्रिय था।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह अभियान केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में चलाया गया। “आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क में थे और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे,” अधिकारी ने कहा। जांच अभी जारी है, जिसमें अन्य सदस्यों की पहचान और संभावित हमलों की योजनाओं की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस ने डिजिटल खातों की जांच तेज कर दी है ताकि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि हो सके।
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब देश में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज हो रहे हैं। हाल ही में रांची और दिल्ली में आईएसआईएस से जुड़े दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद यह दूसरा बड़ा ऑपरेशन है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राज्य में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आई भारत सरकार की अन्तर-मंत्रालयी टीम ने भेंट की

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मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। मानसून अवधि में राज्य को अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन, बाढ और जल भराव की गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को मिलकर पूर्वानुमान प्रणाली को और अधिक विकसित करने की दिशा कार्य करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ है। जनहानि के साथ ही परिसंपत्तियों को भी अत्यधिक क्षति पहॅुंची है। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने व भूस्खलन की घटनाओं से जमीन का स्थाई नुकसान होता है, ऐसी जगहों को दोबारा खेती-बाड़ी या निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त करना संभव नहीं हो पाता है। इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना पर भी उन्होंने बल दिया।

भारत सरकार की अंतर मंत्रालयी टीम के सदस्यों ने उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, पौड़ी गढवाल, चमोली, बागेश्वर एवं नैनीताल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री से भेंट की। गृह मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में आई इस टीम में अनु सचिव शेर बहादुर, अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह, निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह शामिल थे।

अंतर मंत्रालयी टीम ने आपदा प्रभावितों से बातचीत कर मिले फीड बैक का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत कार्यों को सराहनीय बताया। आपदा प्रभावितों के लिए राहत शिविरों में रहने व भोजन की समुचित व्यवस्था, मौके पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को भी केन्द्रीय टीम ने बेहतर बताया।

केन्द्रीय टीम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आपदा में मृतकों के परिजनों तथा जिनके घर पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकोे रू. पॉंच लाख की तात्कालिक सहायता राशि दिए जाने से भी प्रभावितों को काफी राहत मिली है। राज्य में सभी गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण डाटा जिला प्रशासन के पास उपलब्ध होने एवं उनके स्वास्थ्य व सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था हेतु निरंतर संपर्क रखने की पहल की भी केन्द्रीय टीम ने सराहना की।

टीम के सदस्यों ने कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण पहल को अन्य राज्यों में भी अपनाने के लिए अपना सुझाव प्रस्तुत करेगी। केन्द्रीय टीम ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भूस्खलन व बाढ़ से नदियों में अत्यधिक मात्रा में सिल्ट भर जाने के कारण जल स्तर ऊपर उठने से भविष्य में नुकसान की संभावना को भी भ्रमण के दौरान उनके संज्ञान में लाया गया है।

कल उत्तराखंड पहुंचेंगे PM मोदी, आपदा प्रभावित क्षेत्रों का करेंगे हवाई सर्वेक्षण

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देहरादून। उत्तराखंड में हाल ही में आई भीषण आपदा से पूरा प्रदेश प्रभावित है। आपदा ने उत्तरकाशी के धराली से लेकर चमोली के थराली, रुद्रप्रयाग के छेनागाड़ और पिथौरागढ़ तक भारी नुकसान पहुंचाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को उत्तराखंड का दौरा करेंगे। वे देहरादून पहुंचेंगे और शाम लगभग 4:15 बजे प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।

इसके बाद शाम लगभग 5 बजे प्रधानमंत्री अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेना और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की स्थिति का आकलन करना है।

उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न प्रशासनिक और विकास संबंधी फैसले लिए

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देहरादून। उत्तराखंड कैबिनेट में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।पशुपालन विभाग द्वारा 9 पर्वतीय जनपदों अल्मोड़ा, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चम्पावत, पौड़ी, बागेश्वर, टिहरी, रुद्रप्रयाग के कुक्कुट पालकों के लिए कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना लागू जाएगी। इस योजना के अन्तर्गत प्रारम्भिक वर्ष 2025-26 में ब्रायलर फार्म योजना के अन्तर्गत 816 एवं कुक्कुट वैली स्थापना योजना के अन्तर्गत 781 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। जिसके तहत कुल आहार सब्सिडी -रूपये 2,83,85,000 (रूपये दो करोड़ तिरासी लाख पिच्चासी हजार मात्र) का आवंटन किया जाएगा।

परिवहन विभाग
देहरादून शहर में ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए देहरादून सिटी ट्रांसपोर्ट लिमिटेड के नाम से स्पेशल परपज व्हीकल का गठन किया जाएगा। जो देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा संचालित ई-बसों को संचालित किए जाने, प्रधान मंत्री ई-बस सेवा योजना के अन्तर्गत ई-बसों के संचालन तथा वर्तमान नगर बस सेवा का संचालन सुगठित-सुव्यवस्थित करने का कार्य करेगा।

आवास विभाग
जनपद ऊधमसिंहनगर में प्राधिकरण क्षेत्र में नियोजित कालोनियों एवं व्यावसायिक निर्माण हेतु ग्राम फाजलपुर महरौला, तहसील रूद्रपुर अंतर्गत कुल रकबा 9.918 हे० भूमि को वर्तमान सर्किल रेट पर जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, ऊधमसिंहनगर के पक्ष में आवंटन किया जाएगा।

न्याय अनुभाग
महाधिवक्ता, उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल के अधिष्ठान कार्यालय में आशुलिपिक संवर्ग में वरिष्ठ प्रमुख निजी सचिव (वेतनमान 123100-215900, लेवल-13. ग्रेड पे-8700) का 01 पद सृजन के साथ ही आशुलिपिक (वेतनमान-29200-92300, लेवल-05) का 01 पद समर्पित किया जाएगा। उत्तराखंड सेवा का अधिकार का नवम वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 को विधानसभा पटल पर प्रस्तुत किए जाने को मंजूरी

उत्तराखंड में बड़ा बस हादसा, दो लोगों की मौत, 13 घायल

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टिहरी: चम्बा-ऋषिकेश नेशनल हाईवे पर नगणी के पास बड़ा बस हादसा हो गया है। घनसाली के घुत्तू से ऋषिकेश जा रही विश्वनाथ सेवा की बस पलट गई। हादसे में 2 लोगों की मौत हुई है और 13 लोग घायल हैं। अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह मौके पर मौजूद हैं। गंभीर रूप से घायल 2 लोगों को एम्स रेफर किया गया है।

नेपाल में लोकतंत्र की लपटें: ओली समेत कई मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, संसद-राष्ट्रपति भवन जलाए गए, 19 से अधिक मौतें, आंदोलन बेकाबू

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काठमांडू :नेपाल में जेन-जेड (Gen Z) युवाओं के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों ने मंगलवार को चरम पर पहुंचकर सरकार को गिरा दिया। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जबकि कृषि मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, गृह मंत्री समेत कम से कम चार अन्य मंत्रियों ने नैतिक आधार पर पद छोड़ दिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के निजी आवासों सहित कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन में अब तक 19 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बंद कर दिया गया है, जबकि सेना ने सुरक्षा की कमान संभाल ली है।

प्रदर्शन सोमवार को भड़के जब सरकार ने फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अचानक बैन लगा दिया। युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए सड़कों पर उतर आए। शुरुआती शांतिपूर्ण विरोध पुलिस की गोलीबारी का शिकार हुआ, जिसमें 19 लोग मारे गए। मंगलवार को कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए हजारों प्रदर्शनकारी काठमांडू की सड़कों पर उतरे और तोड़फोड़ मचाई। सिंगा दुर्बार कॉम्प्लेक्स (प्रधानमंत्री कार्यालय) और संसद भवन में घुसकर आग लगा दी गई। वायरल वीडियो में युवा नारे लगाते दिख रहे हैं: “केपी चोर, देश छोड़ो!”

ओली का इस्तीफा दोपहर में राष्ट्रपति को सौंपा गया, जिसमें उन्होंने कहा, “देश की असाधारण स्थिति को देखते हुए, मैं समस्या के संवैधानिक और राजनीतिक समाधान के लिए इस्तीफा दे रहा हूं।” राष्ट्रपति पौडेल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया और नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने ओली के भक्तपुर स्थित निजी आवास को आग लगा दी, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा और उनकी पत्नी विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा पर हमला किया गया।

देउबा दंपति को घर में घुसकर पीटा गया, हालांकि उनकी जान पर कोई संकट नहीं आया। पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार को घर में बंदकर जिंदा जला दिया गया, जबकि वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सड़क पर घसीटकर पीटा गया। एक डीएसपी को प्रदर्शनकारियों ने पीट-पीटकर मार डाला, जो युवाओं पर गोली चलाने का आदेश देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल ने बयान जारी कर कहा, “कुछ समूह असाधारण परिस्थितियों का फायदा उठाकर आम नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और वार्ता की अपील की। राष्ट्रपति पौडेल ने भी शांति की मांग की। कर्फ्यू के बावजूद बैंकों में लूटपाट हुई और नेपाली कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय को जलाया गया। आंदोलन अब भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म (परिवारवाद) और आर्थिक संकट के खिलाफ फैल चुका है। युवा सोशल मीडिया पर मंत्रियों के बच्चों की फिजूलखर्ची पर सवाल उठा रहे हैं।

यह आंदोलन बांग्लादेश (2024) और श्रीलंका (2022) के जन-आंदोलनों से मिलता-जुलता है, जहां युवाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्ता उखाड़ फेंकी। नेपाल में 2008 के बाद राजशाही समाप्त होने के बाद यह सबसे बड़ा संकट है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति को नई सरकार गठन के लिए देउबा या पुष्प कमल दहाल जैसे नेताओं से बात करनी पड़ सकती है, लेकिन गठबंधन टूट चुका है। नेपाली कांग्रेस के कई नेता ओली सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं।

एयर इंडिया ने काठमांडू उड़ानें रद्द कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है, जबकि भारत और चीन जैसे पड़ोसी देश स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आंदोलनकारियों की मांगों में भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई, राष्ट्रीय सरकार का गठन और राजनीतिक पदों के लिए आयु सीमा शामिल है। फिलहाल, नेपाल राजनीतिक अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है।

सीपी राधाकृष्णन बने देश के नए उपराष्ट्रपति, 152 वोटों से दर्ज की जीत

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नई दिल्ली: एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल कर देश के नए उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए हैं।

मंगलवार को हुए मतदान में राधाकृष्णन को कुल 452 वोट प्राप्त हुए, जबकि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता।
चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद बी सुदर्शन रेड्डी ने नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति को बधाई दी।

रेड्डी ने कहा, “मैं सीपी राधाकृष्णन को उनके कार्यकाल की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं देता हूं। भले ही परिणाम मेरे पक्ष में नहीं रहा, लेकिन वैचारिक लड़ाई और अधिक जोश के साथ जारी रहेगी।”

सीपी राधाकृष्णन का यह जीत एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के सामने संसद के उच्च सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने सहित कई अहम जिम्मेदारियां होंगी।

नेपाल में सियासी संकट: पीएम केपी शर्मा ओली ने दिया इस्तीफा

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काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। यह इस्तीफा देशभर में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ जेनरेशन-जेड के हिंसक प्रदर्शनों के बाद आया, जिसमें सोमवार को 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हो गए। राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में उग्र प्रदर्शनों ने नेपाल को गहरे राजनीतिक संकट में धकेल दिया है।

प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में लगाई आग

मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में संसद भवन में घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी, जिससे भवन से गहरे काले धुएं के गुबार उठते देखे गए। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने नेपाल सुप्रीम कोर्ट और अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की। काठमांडू में एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम बहुत खुश हैं कि ओली ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन हमारी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। हम सुशासन और जवाबदेही चाहते हैं।”

मंत्रियों के घरों पर हमले

प्रदर्शनकारियों ने कई मंत्रियों के घरों को निशाना बनाया। उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बिष्णु पौडेल, ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का, विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा और गृह मंत्री रमेश लेखक के आवासों पर पथराव और आगजनी की गई। नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर बिस्व पौडेल के घर पर भी हमला हुआ। इसके अलावा, सीपीएन (यूएमएल) पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतीक हथौड़ा और हंसिया का चिह्न गिरा दिया गया।

स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्री प्रदीप पौडेल ने प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई के खिलाफ असहमति जताते हुए इस्तीफा दे दिया। फेसबुक पर अपने बयान में उन्होंने कहा, “युवाओं की सुशासन और न्याय की मांग को दबाने के लिए गोलीबारी उचित नहीं है। मेरी अंतरात्मा मुझे मंत्रिमंडल में बने रहने की इजाजत नहीं देती।” इससे पहले गृह मंत्री रमेश लेखक और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी भी नैतिक आधार पर इस्तीफा दे चुके हैं।

त्रिभुवन हवाई अड्डा बंद, उड़ानें रद्द

प्रदर्शनों के बीच त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। हवाई अड्डा प्राधिकरण के महाप्रबंधक हंसराज पांडे ने बताया कि कोटेश्वर के पास धुएं के कारण दोपहर 12:45 बजे से उड़ानें रोक दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने ड्रोन, आतिशबाजी और लेजर लाइट्स का उपयोग कर हवाई संचालन को बाधित करने की कोशिश की। कई मंत्रियों को सेना के हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

काठमांडू कलिंग साहित्य महोत्सव स्थगित

हिंसक प्रदर्शनों के कारण 13-14 सितंबर को प्रस्तावित चौथा काठमांडू कलिंग साहित्य महोत्सव स्थगित कर दिया गया। आयोजकों ने बताया कि 60 से अधिक भारतीय लेखक, जिनमें बानू मुश्ताक और दीपा भाष्थी शामिल थे, और 200 नेपाली लेखक इस आयोजन में भाग लेने वाले थे। महोत्सव अब 14-15 फरवरी 2026 को होगा। आयोजक रश्मि रंजन परिदा ने कहा, “वर्तमान परिस्थितियों में यह आयोजन उचित नहीं होगा।”

ओली का इस्तीफा और राजनीतिक संकट

केपी शर्मा ओली ने अपने इस्तीफे में कहा, “देश की असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए और संवैधानिक समाधान की दिशा में प्रयासों को सुगम बनाने के लिए मैंने इस्तीफा दिया है।” इससे पहले, सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने ओली से इस्तीफा देने की सलाह दी थी, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। सूत्रों के अनुसार, ओली ने दुबई में शरण लेने की योजना बनाई थी और इसके लिए हिमालया एयरलाइंस को तैयार रखा गया था।

नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने ओली से तत्काल इस्तीफे की मांग की थी, और उनकी पार्टी ने सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार शुरू किया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने भी ओली के इस्तीफे और नए चुनावों की मांग की है।

प्रदर्शनकारियों की मांगें

जेन-जेड प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, कदाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनकी मांगों में शामिल हैं:

  • प्रधानमंत्री और सरकार का इस्तीफा.

  • भ्रष्टाचार के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी निगरानी संस्था की स्थापना.

  • बार-बार असफल नेताओं पर सार्वजनिक पदों से प्रतिबंध.

पीएम मोदी के दौरे के बीच दो मेडिकल कॉलेजों को बम से उड़ाने की धमकी, प्रशासन सतर्क

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चंबा : हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बीच मंगलवार को मंडी और चंबा जिले के दो प्रमुख मेडिकल कॉलेजों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिले। मंडी के श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नेरचौक और चंबा मेडिकल कॉलेज को निशाना बनाए गए इस ईमेल ने प्रशासन और पुलिस को हाई अलर्ट पर ला दिया है। एहतियातन दोनों अस्पताल परिसरों को खाली करवाया गया, जिससे मरीजों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

धमकी भरा ईमेल और तत्काल कार्रवाई

मंगलवार तड़के 3:30 बजे नेरचौक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके वर्मा को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें अस्पताल परिसर को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। प्राचार्य ने सुबह 10:30 बजे बल्ह की एसडीएम स्मृतिका नेगी को इसकी सूचना दी। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। चंबा मेडिकल कॉलेज को भी इसी तरह का ईमेल मिला। दोनों ईमेल की भाषा और शैली समान होने से संदेह है कि ये एक ही व्यक्ति या समूह द्वारा भेजे गए हैं।

प्रशासन ने दोनों मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी बंद कर दी और कक्षाएं निलंबित कर दीं। मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर परिसर से बाहर निकाला गया, और कई मरीज पेड़ों की छांव में इंतजार करते दिखे। अस्पताल की पार्किंग में खड़े वाहनों को भी बाहर निकाला गया।

पुलिस और बम निरोधक दस्ते की तैनाती

मंडी और चंबा में पुलिस, क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी), दमकल विभाग और बम निरोधक दस्ते ने तुरंत मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। स्निफर डॉग्स की मदद से परिसर की गहन जांच की जा रही है। अभी तक किसी भी संदिग्ध वस्तु की जानकारी नहीं मिली है। मंडी के पुलिस अधीक्षक ने बताया, “हम हर संभावित कोण से जांच कर रहे हैं। ईमेल की उत्पत्ति तमिलनाडु से होने का संदेह है, और साइबर क्राइम यूनिट इसकी तकनीकी जांच कर रही है।”

मरीजों और कर्मचारियों में दहशत

नेरचौक मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 300 से अधिक मरीज उपचाराधीन हैं, और रोजाना 1,000 से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। धमकी के बाद मरीजों और उनके तीमारदारों में दहशत फैल गई। कई मरीजों को खुले मैदान में स्थानांतरित किया गया, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा। चंबा मेडिकल कॉलेज में भी स्थिति समान थी, जहां मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां

हिमाचल में इससे पहले भी शिमला स्थित राज्य सचिवालय और मंडी के उपायुक्त कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। इन मामलों में जांच के बाद कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी, और पुलिस को अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। इस बार की धमकी में तमिलनाडु से संबंध होने का उल्लेख होने से जांच एजेंसियां इसे गंभीरता से ले रही हैं।