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रुलाने वाली है 'प्यासा' बनने के पीछे की कहानी

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गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा’ को हिन्दी सिनेमा इतिहास की दुर्लभ फिल्मों में से एक है। फिल्म की पढ़ाई होने वाले संस्‍थानों में इसे भगवान की तरह पूजते हैं। इसके बनने में एक वेश्या का बहुत बड़ा योगदान है। इसके बारे में फिल्म के लेखक अब्रार आल्वी किताब ‘टेन ईयर्स विद गुरुदत्त’ में बड़े ही विस्तार से और भावनात्मक तरीके से बताते हैं।

एक दिन अब्रार से उनके कॉलेज के दिनों के कुछ दोस्त मिलने आए। उन्हें लेकर समुद्र किनारे निकल गए। वहां कुछ बातचीत के बाद तीन लड़कियां पेश की गईं। उनमें दो पंद्रह-सोलह साल की थी और तीसरी अट्ठाइस-उनतीस साल की। अब्रार से उनमें एक चुनने के लिए कहा गया। अब्रार बताते हैं कि तब वह इन मामलों में ‘अनाड़ी’ थे। उनकी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। दोस्तों की जिद थी कि कोई एक चुननी पड़ेगी मजबूरी में अब्रार ने बड़ी उम्र की औरत की ओर इशारा किया।

अब्रार बताते हैं कि इस पर वह औरत भौंचक्की रह गई। उसने परेशान होकर कहा, ‘इन कमसिन कलियों के होते हुए, मुझे’। हालांकि फिर शाम ढली, रात आई, जैसे रात जवान होती गई, उनके सारे दोस्त समुद्र किनारे लड़कियां लेकर निकलते गए। लेकिन अब्रार वहीं उस औरत के साथ एक कुटीर में बैठे रहे, उससे बात करने पर पता चला उसका नाम, ‘गुलाबो’ है।

फिल्म ‘प्यासा’ में गुलाबो की पहली झलक भ्रामक है। वह अपनी पीछ कैमरे की ओर किए खड़ी होती है, एक महीन, पारदर्शी साड़ी में लिपटी। जैसे फिल्‍म आगे बढ़ती है, गुलाबो का चरित्र खुलकर सामने आता है। वह एक पारंपरिक सड़कछाप वेश्या है। लेकिन उसमें एक गरिमा छिपी है साथ ही उस शायर के लिए प्रेम और सम्मान भी। यह कोई कोरी कल्पना नहीं। उस रात के बाद अब्रार और गुलाबो के बीच पनपे रिश्ते की असल कहानी है।

अब्रार एक लेखक थे। स्वभावतन लेखक किस्म के आदमियों को जिंदगियों की अनुभव खींचते हैं। उस रात जब अब्रार को उनके दोस्त गुलाबों सौंप कर रंगरेलिया मनाने में व्यस्त हो गई, तब अब्रार ने उस औरत से लगातार बातें करते रहे। सुबह करीब छह बजे जब अब्रार के दोस्तों को आया तो वह वहां से तत्काल चले जाना चाहते थे। लेकिन अब्रार का मन था कि उन्हें उसी कार में बिठाया जाए, जिसमें गुलाबो को बैठाया जा रहा है, ताकि वह उससे थोड़ी और बात कर सकें।

अब्रार बताते हैं कि इन सब के बीच अचानक गुलाबो ने अचानक मेरी कलाई पकड़कर कहा, ‘मेरे साथ चलो ना, कुछ देर और साथ रहेगा’‌। मैंने कहा, ‘कार में इतनी जगह नहीं है कि सब अट पाएं’, तो उसने कहा, ‘मेरी गोद में बैठ जा ना बुद्धू’ और हंसने लगी। किताब लिखे जाने तक अब्रार की अच्छी खासी उम्र हो चली थी, लेकिन उनकी यादयाश्त की दाद देनी पड़ेगी। उन्हें पूरी तरह से याद था। गुलाबो का घर बस स्टेशन के बाद पहली गली यानि तेली गली के पास गुलाबो का निवास था। उसका कोठा मुर्गी गली में था।

उस एक रात में अब्रार ने गुलाबो के साथ शारीरिक संबंध तो नहीं बनाए थे, लेकिन उन्होंने गुलाबो को इतना आकर्षित कर लिया था कि गुलाबो ने खुद ही उनसे आगे मिलने के तरीके ढूंढ़ने लगी थी। एक दिन अब्रार उसके निवास स्‍थान पर उससे मिलने गए तो एक लड़की ने बहाना बनाकर उन्हें गुलाबो से रोकने की कोशिश की। लेकिन गुलाबो ने उसे सुन लिया और शेरनी की तरह उस पर झपट्टा मार पड़ी। एक-दूसरे नोचते-खरोचते गुलाबो ने अब्रार का हा‌‌थ पकड़ा और एक टैक्सी में बैठ गई।

कुछ देर बाद एलिफिंस्टिन रोड स्थित एक इमारत के सामने टैक्सी रोकवाई। अब्रार के पास टैक्सी वाले को देने को पैसे भी नहीं थे। अब्रार बताते हैं कि उन्होंने खुद को बेहद असहाय महसूस किया। वहां हल्की और फीकी रोशनी थी और कमरे में बस एक ही बिस्तर था। दोनों बैठकर बातें करने लगे। तभी कोई दरवाजा खटखटाने लगा। अब्रार की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। लेकिन गुलाबो ने दौड़कर दरवाजा खोला। सामने वाले शख्स ने उसे अखबार में लिपटी हिन्दुस्तानी व्हिस्की का एक पौवा दिया।

अब्रार कहते हैं कि उस रात पीते-पिलाते और बातें करते उन्होंने ऐसी गुलाबो देखी जो पहले कभी नहीं देखी थी। वह कहते हैं, ‘मुझे याद है कि बातों के बीच में मैंने एक बार गालियों की झड़ी लगा डाली। जिसे सुनते ही गुलाबो ने आगे झुककर मेरे मुंह पर हाथ रख दिया। अरे ये क्या, क्यों मुझे रोक रही हो! उसने मुझे एक पल के लिए देखा और अपना सिर दीवार की तरफ घुमाते हुए अपने हाथों से अपनी आंखें बंद करते हुए दिल पर लगने वाली बात बोली।’

गुलाबो ने अब्रार से कहा, ‘मैं एक गिरी हुई लड़की हूं, एक वेश्या, पर तुम तो ऐसी नहीं। तुम्हारे मुंह से ये अपशब्द शोभा नहीं देते।’ बाद पता चला गुलाबो जन्म से वेश्यावृति के धंधे में नहीं थी। वह मजबूरन इस धंधे में आई थी। उसका जन्म एक हिन्दु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उसका नाम, ‘देवी’ था। किशोरावस्था में एक मनमोहक हृष्टपुष्ट सिपाही पर उसका दिल आ गया। उसी के चक्कर में वह घर छोड़कर भाग गई। लेकिन भागने के बाद पता चला वह पहले से शादीशुदा है।

बेघर और विवशता की हालत में वह इधर-उधर भटक रही थी। तभी एक कोठे वाली मौसी की नजर उस पर पड़ी। और वही से वो ‘देवी’, ‘गुलाबो’ हो गई। एक तरफ गुलाबो खुलती गई। दूसरी तरफ अब्रार ‘मिस्टर एंड मिसिज 55’ में व्यस्त होते गए। उन दिनों को याद करते हुए अब्रार बताते हैं, ‘मुझे कभी-कभी ऐसा लगता था कि मैं गुलाबो पर कठोर हो रहा था, उसकी मित्रता को गंभीरता से नहीं ले रहा था।’ कुछ सोचकर अब्रार धीरे कहते हैं, ‘कुछ भी हो उस समय की सच्चाई यही थी। आज अगर जब मैं उन दिनों को याद करता हू तो मेरा मन ग्लानि से भर जाता है’। क्या हुआ इसके बाद गुलाबो का।

कई दिनों अपनी शूटिंग में व्यस्त रहने के बाद एक दिन अचानक जब अब्रार गुलाबो से मिलने पहुंचे तो एक लड़के ने उन्हें रोका, ‘मेरी मां बहुत बीमार है। पिताजी उसे डॉक्टर के पास ले गए हैं। वह जल्दी ही आती होगी। उसने मुझसे कहा था कि आप आ सकते हैं। वह चाहती थी उसके आने तक आप रुको।’

कुछ देर बाद वो आ गई। कुछ बातों के बाद अब्रार जाने लगे। इस पर अचानक उनको देखा और बोली, ‘तुम अब नहीं आओगे न। अब तुम व्यस्त हो चले हो। तुम अपनी गुलाबो को भूल जाओगे। जब कभी भूले भटके मुझसे मिलने आओगे तब बहुत देर हो चुकी होगी।’ असल में उसे टीबी हो गई थी।
एक दिन अब्रार उससे मिलने को व्याकुल हुए। वह उसी इलाके से बस से गुजर रहे थे। उन्होंने बाहर झांक देखा गुलाबो की शव यात्रा गुजर रही थी। पता नहीं क्या उसके चेहरे को नहीं ढका गया था।

एक दिन घर में बैठकर अब्रार ने अपने दिल की ये टीस बस यूं ही गुरुदत्त को सुनाई। गुरुदत्त कहानी पर संम्मोहित हो गए। उन्होंने इस पर फिल्म बनाने की ठान ली। फिल्म बनाते वक्त इसमें आवश्यकतानुसर जोड़-घटाव किए गए। लेकिन मूल कहानी प्यासा की यही से उपजी। फिल्म में कुछ पंक्तियां तो हूबहू वैसी की वैसी रखी गई जैसी गुलाबो के मुंह से निकली थीं।

'वन नाइट स्टैंड'में सनी लियोनी ने तोड़ दी बोल्डनेस की हदें

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सनी लियोनी की आने वाली फिल्म ‘वन नाइट स्टैंड’ का टीजर रिलीज किया गया है। सनी फिल्म में बेहद बोल्ड दिखी हैं। उन्होंने इस फिल्म में जो सीन किए हैं, वो उनकी पुरानी फिल्मों के सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाले हैं।

सनी लियोनी की फिल्म ‘वन नाइट स्टैंड’ के नाम से ही साफ है कि फिल्म का विषय बोल्ड होगा। फिल्म के पोस्टर रिलीज के साथ भी फिल्म के बोल्ड होने का प्रमाण मिला। अब फिल्म के टीजर ने तो बोल्डनेस की हदें तोड़ दी हैं।

सनी लियोनी और तनुज वीरवानी की मुख्य भूमिकाओं वाली ‘वन नाइट स्टैंड’ एक ऐसे जोड़े की कहानी है, जो मिलते हैं और एक-दूसरे के नाम तक सही से पूछे बिना सेक्स करते हैं।

एक रात के सेक्स के बाद दोनों अलग हो जाते हैं। मगर इसके बाद भी लड़का लड़की को भूलता नहीं। इस पर लड़की साफ करती है कि वो एक रात के लिए मिले थे इस रिश्ते को आगे मत बढ़ाओ।

इसके बाद भी दोनों के बीच नजदीकी बढ़ती रहती है। लेकिन जब दोनों पास आते हैं, तो दोनों में झगड़े होने लगते हैं।
फिल्म में बिना ज्यादा पहचान के एक रात के लिए संबंध बनाने और फिर अपने रास्ते चल देने की कहानी है। फिल्म में दिखाया गया है कि एक रात के लिए सेक्स करने के लिए बिस्तर पर आना और फिर अपने रास्ते चल देना क्या है। इस तरह के रिश्तों में परेशानी क्या आती है।

फिल्म की चर्चा इसके हॉट सीन को लेकर हो रहा है। टीजर में सनी लियोनी अपने चिर-परिचित अदांज में बेहद मादक लग रही हैं।

कोहली की करिश्माई पारी ने खोला टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल का 'दरवाजा'

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मोहाली में महिला टीम की हार के बाद उसी मैदान पर विराट कोहली के बल्ले ने ऐसा आग उगला कि कंगारू टीम के सारे आक्रमण धरे के धरे रह गए। एक तरह से नॉकआउट कहे जाने वाले इस मुकाबले में टीम इंडिया ने कोहली के चमत्कारिक प्रदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया को 5 गेंद शेष रहते 6 विकेट से हराते हुए लगातार दूसरी बार सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया।

पिछली बार की उपविजेता रही टीम इंडिया ने सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए दमदार खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया से मिले 161 रनों के लक्ष्य के जवाब में भारत ने 19.1 ओवर में ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया। कोहली एक बार फिर जीत के नायक बने और उन्होंने 51 गेंदों में 9 चौके और 2 छक्के की मदद से अविजित 82 रनों की पारी खेली। साथ ही उन्होंने कप्तान धोनी के साथ पांचवें विकेट के लिए 67 रनों की अटूट साझेदारी की। जीत का चौका धोनी के बल्ले से निकला। कप्तान ने 9 गेंदों में 14 रन बनाए।

अब सेमीफाइनल में टीम इंडिया का मुकाबला वेस्टइंडीज से 31 मार्च को होगा। जब‌कि वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल मुकाबला बुधवार 30 मार्च न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच होगा। मोहाली में पहले बल्लेबाजी करते हुए कंगारू टीम ने 6 विकेट पर 160 रन बनाए। उसकी ओर से ऐरोन फिंच ने 43 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली।

हार्दिक पांड्या ने 2 विकेट झटके जबकि अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे शेन वाटसन ने भी 23 रन देकर 2 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया के बाहर होने से वाटसन का अंतरराष्ट्रीय करियर यहीं पर खत्म हो गया। उन्होंने इस मैच से पहले ही ऐलान कर दिया था कि इस टी-20 वर्ल्ड कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

सेमीफाइनल में जाने के लिए मिले 161 रनो के जवाब में भारतीय ओपनिंग जोड़ी ने अच्छी शुरुआत दी। शिखर धवन ने पहले ओवर में अपनी पहली गेंद पर चौका जड़ा। तीसरे ओवर में धवन ने हेजलवुड की गेंद पर छक्का लगाया। अगले ओवर में रोहित ने भी मैच में अपना पहला चौका घुमाया। लेकिन चौ‌थे ओवर में वह (13) कैच आउट हुए।

पहला विकेट गिरने के बाद विराट कोहली ने आते ही लगातार दो चौके लगाए। कुछ ही देर में रोहित शर्मा (12) कंगारू गेंदबाज शेन वॉटसन की गेंद पर बोल्ड हुए। इसके बाद सुरेश रैना (10) ने एक चौका लगाया। लेकिन कंगारू ऑलराउंडर वॉटसन की घातक गेंद का शिकार हो गए।
12 वें ओवर में विराट कोहली ने टीम की ओर से दूसरा छक्का लगाया। अगले ओवर में युवराज के छक्के ने मोहाली के मैदान की रौनक बढ़ा दी। चोटिल होने के चलते युवराज मैदान में काफी संघर्ष करते हुए नजर आए। 14 वें ओवर में उन्होंने अपना विकेट गंवाया। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 45 रनों की साझेदारी हुई। युवराज 21 के स्कोर पर वॉटसन के शानदार कैच का शिकार हुए।

उनके बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी क्रीज पर पहुंचे। धोनी के चौके ने भारत के 100 रन पूरे किए। फिर कोहली ने अपने बल्ले की हनक दिखाई और 17 वें ओवर में फिफ्टी पूरी की। अगले ओवर की पहली दो गेंदों पर कोहली ने दो ताबड़तोड़ चौके और अगली गेंद पर एक छक्का लगाया। अब 12 गेंदों पर भारत को जीत के लिए 20 रनों की जरुरत थी। पहली गेंद डॉट जाने के बाद कोहली ने 19 वें ओवर की दूसरी, तीसरी और चौ‌थी गेंद पर ताबड़तोड़ तीन चौके जड़े। आखिरी गेंद पर भी कोहली ने चौका लगाया। आखिर ओवर में कप्तान धोनी के चौके ने टीम इंडिया की जीत में मुहर लगा दी।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की बल्लेबाजी बेहद आक्रामक रही। हालांकि पहले ओवर में भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने कंगारू ओपनर उस्मान ख्वाजा को एक ही चौका दिया लेकिन अगले ओवर में ख्वाजा ने जसप्रीत बुमराह को नहीं बख्‍शा और उनके ओवर में चार ताबड़तोड़ चौके जड़ दिए। तीन ओवर में 32 रन लुटाने के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने चौथे ओवर में ही फिरकी गेंदबाज आर अश्विन को उतार दिया।
अश्विन को भी कंगारूओं ने नहीं छोड़ा और उनके पहले ही ओवर में एेरोन फिंच ने लगातार दो छक्के जड़ दिए। ऑस्ट्रेलियाई टीम महज चौ‌थे ओवर में ही 50 रन का आंकड़ा पार कर गई। लेकिन पांचवें ओवर में टीम की वापसी कराते हुए नेहरा ने ख्वाजा (26 रन, 6 चौके) को विकेट के पीछे कैच आउट कराकर चलता किया। पहले झटके के बाद भारतीय गेंदबाजों ने कंगारू बल्लेबाजों पर दबाव डालना शुरू किया। तीसरे नंबर पर डेविड वॉर्नर पहुंचे। दूसरी सफलता अश्विन ने डेविड वॉर्नर (6) को आउट कर दिलाई।

युवराज ने अपनी पहली ही गेंद पर कंगारू कप्तान स्टीव स्मिथ (2) को आउट कर भारत की झोली में तीसरी सफलता डाली। 13 वें ओवर में फिंच (43) ने हार्दिक पांड्या की गेंद पर चौका जड़कर टीम के 100 रन पूरे किए। हालांकि अगली गेंद पर वह बाउंड्री पर कैच आउट हो गए। 17 वें ओवर में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने खतरनाक लग रहे ग्लेन मैक्सवेल (31) को आउट कर भारत की झोली में पांचवीं सफलता डाली। आखिर में भारत की ओर से कसी हुई गेंदबाजी हुई। हार्दिक ने आखिर ओवर की पहली गेंद पर जेम्स फॉकनर (10) को बाउंड्री पर कैच आउट किया।

गुरमीत राम रहीम की कंपनी MSG ने बाजार में लॉन्च किए 151 प्रोडक्ट

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डेरा सच्चा सौदा की कंपनी एमएसजी ऑल ट्रेडिंग इंटरनेशनल प्राइवेट लि़ ने रविवार को कहा कि उसने खाद्य वस्तुओं सहित कुल 151 उत्पाद को बाजार में लांच किए हैं। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने ये उत्पाद पेश किए। डेरा के एक प्रवक्ता ने कहा कि इन उत्पादों में बासमती चावल, चाय, दालें और बिस्कुट शामिल हैं।

कंपनी के निदेशक सी पी अरोड़ा ने कहा कि ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को पूरा करते हैं। कंपनी की देशभर में बिक्री केन्द्र खोलने का भी इरादा है। कंपनी ने कहा आने वाले समय में जल्द ही वह जैविक उर्वरक की भी बिक्री करेगी।

सेना को 619 और एचएमवी ट्रकों की आपूर्ति करेगी टाटा मोटर्स

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टाटा मोटर्स भारतीय सेना को 619 अतिरिक्त हाई मोबिलिटी (एचएमवी) मल्टी एक्सेल ट्रकों की आपूर्ति करेगी। इसके लिए टाटा मोटर्स ने आगे एक और करार किया है। कंपनी ने बयान में कहा कि इससे पहले उसे 1,239 6 गुणा 6 मएमवी ट्रकों की आपूर्ति का आर्डर मिला था। कंपनी ने कहा कि यह किसी निजी क्षेत्र की किसी वाहन विनिर्माता कंपनी को इस तरह की प्रणाली (एचएमवी वाहन) के लिए दिया गया सबसे बड़ा आर्डर है।

टाटा मोटर्स के उपाध्यक्ष रक्षा एवं सरकारी कारोबार वेरनन नोरोन्हा ने कहा, हम 619 अतिरिक्त इकाइयों का आर्डर हासिल कर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं। देश में बने हमरे टाटा 6 गुणा 6 एचएमवी ने कड़े परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया है और हमें इसके लिए शीर्ष यूरोपीय व वैश्विक रक्षा कंपनियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है।

अलग राज्य की मांग करने वाले महाराष्ट्र के महाधिवक्ता ने दिया इस्तीफा

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अलग विदर्भ राज्य की मांग करके चौतरफा फंसे राज्य के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आज सुबह अपना इस्तीफा राज्यपाल के विद्यासागर राव को सौंप दिया। हालांकि अभी उसे स्वीकार किया गया नहीं इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

बता दें कि महाराष्ट्र के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने मराठवाड़ा को अलग राज्य बनाने की मांग की थी। जिसके बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल शिवसेना सहित विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी ने अणे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया ‌था। विपक्ष ने अणे के बयान को लेकर सोमवार को विधानसभा और विधान परिषद में कामकाज नहीं होने दिया।

वहीं, शिवसेना भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आ गई और शिवसेना के मंत्रियों ने अणे को पद से हटाए बिना कैबिनेट की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस हंगामे के बाद भाजपा के एक नेता ने बताया था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अणे को अपना पद छोड़ने के लिए कह सकते हैं।
शिवसेना ने श्रीहरि अणे को महाराष्ट्र का ओवैसी बताते हुए कहा है कि जिस तरह से एमआईएम के औवैसी बंधु देश के टुकड़े करने का प्रयास कर रहे हैं, उसी तरह राज्य के महाधिवक्ता महाराष्ट्र के टुकड़े करने की बयानबाजी कर रह रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल एवं एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने अणे को निलंबित किए जाने की मांग की थी।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अणे को पदमुक्त किए जाने तक सदन नहीं चलने देंगे। अणे इससे पहले विदर्भ को अलग राज्य बनाने के लिए जनमत संग्रह कराए जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि उनके उस बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उस समय उनका बचाव करते हुए कहा था कि अलग राज्य के गठन का अधिकार संसद और केंद्र सरकार का है, इसलिए उन्हें त्यागपत्र देने की जरूरत नहीं है।

और बढ़ा मुलायम का सियासी कुनबा, 21वें सदस्य ने दी दस्तक

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देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार का कुनबा और बढ़ गया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को रविवार को लखनऊ कैंट सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया है। अपर्णा के साथ ही मुलायम परिवार के 21वें सदस्य की राजनीति की मुख्यधारा में एंट्री हो गई।

मुलायम सिंह देश के इकलौते ऐसे नेता है जिनका बेटा मुख्यमंत्री हैं और परिवार के छह सदस्य सांसद हैं। मुलायम सिंह खुद तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके हैं।

वह विधानमंडल के दोनों सदनों में नेता विरोधी दल रहे हैं और छठी बार के सांसद हैं। इस समय वह आजमगढ़ से सांसद और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके बड़े बेटे अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

सपा मुखिया के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री और सपा के प्रमुख प्रवक्ता हैं। उनके बेटे आदित्य यादव उर्फ अंकुर पीसीएफ के चेयरमैन हैं।

अंकुर की मां और शिवपाल सिंह यादव की पत्नी सरला यादव जिला सहकारी बैंक इटावा की निदेशक हैं। सपा मुखिया के भतीजे अनुराग यादव समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव हैं।

मुलायम सिंह 2014 में मैनपुरी और आजमगढ़ से सांसद चुने गए थे। उन्होंने मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया था। इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनके पौत्र तेज प्रताप सिंह यादव सांसद चुने गए हैं।

तेज प्रताप की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी राज लक्ष्मी के साथ हुई है। सपा अध्यक्ष की पुत्रवधू और सीएम अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से दूसरी बार सांसद हैं।

सपा मुखिया के बड़े भाई अभयराम के बेटे धर्मेंद्र यादव बदायूं से सांसद हैं। मुलायम के चचेरे भाई रामगोपाल यादव राज्यसभा सदस्य और पार्टी महासचिव हैं। रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव फिरोजाबाद से सांसद हैं।

सीएम अखिलेश यादव विधान परिषद सदस्य हैं। वह कन्नौज और फिरोजाबाद से सांसद रह चुके हैं। मंत्री शिवपाल यादव जसवंत नगर से विधायक हैं। रामगोपाल यादव के भतीजे अरविंद यादव पिछले दिनों स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से एमएमलसी चुने गए हैं।

मुलायम सिंह के छोटे भाई राजपाल सिंह के बेटे अभिषेक यादव उर्फ अंशुल इटावा जिला पंचायत के अध्यक्ष चुने गए हैं। 25 वर्षीय, एमबीए डिग्रीधारी अंशुल कुछ महीने पहले ही राजनीति में सक्रिय हुए हैं।

सपा मुखिया की भतीजी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या मैनपुरी जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। उनकी एक अन्य रिश्तेदार वंदना यादव हमीरपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष चुनी गई हैं।

सांसद तेज प्रताप की मां मृदुला यादव सैफई की ब्लॉक प्रमुख हैं। सपा मुखिया मुलायम सिंह के बहनोई अजंट सिंह यादव भी ब्लॉक प्रमुख चुने गए हैं। मुलायम सिंह के भाई राजपाल यादव की पत्नी प्रेमलता जिला पंचायत सदस्य हैं।

रामगोपाल यादव के भतीजे बिल्लू यादव भी ब्लॉक प्रमुख हैं। रामगोपाल यादव के भतीजे की पत्नी मीनाक्षी यादव मैनपुरी से जिला पंचायत सदस्य हैं।

हरीश रावत ने किया सरकार बनाने का दावा, पहुंचे राजभवन

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प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के चंद घंटों के अंदर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार बनाने का दावा किया है। इस संबंध में रावत ने राज्यपाल को पत्र दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री रावत पांच विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे थे।

राज्यपाल से भेंट न होने के कारण रावत ने राजभवन में विशेष कार्याधिकारी को पत्र दिया। इसमें 28 मार्च को सदन के फ्लोर पर बहुमत साबित करने का दावा किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में कहा है कि ‘आपने मुझे 28 मार्च को विधानसभा सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दिया था।

रावत ने कहा कि उनके पास पूर्ण बहुमत है वह राज्यपाल की आज्ञा के अनुपालन में सोमवार को सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे। इसके लिए उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्हें बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिला और राष्ट्रुपति शासन लागू कर दिया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री रावत के साथ वित्त और संसदीय कार्य मंत्री रहीं इंदिरा हृदयेश, विधायक हेमेश खर्कवाल, गणेश गोदियाल, मनोज तिवारी, अनुसुइया प्रसाद मैखुरी तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय रहे।

अब सत्ता का केंद्र होगा राजभवन, नौकरशाही का अहम रोल

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प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद अब सत्ता का केंद्र राजभवन बन जाएगा। राज्यपाल की रिपोर्ट को आधार बनाकर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर धारा 356 का इस्तेमाल किया है, जिससे प्रदेश की समस्त सरकारी मशीनरी सीधे राजभवन के अधीन आ गई है।

राष्ट्रपति शासन के बाद राज्यपाल के पद में असीमित शक्तियां निहित हैं। नौकरशाही अब सीधे राजभवन को रिपोर्ट करेगी और राज्यपाल की तय गाइडलाइन पर उसे कामकाज करना होगा। इस व्यवस्था के तहत अधिकारियों को कामकाज की अधिक स्वतंत्रता मिलने की उम्मीद रहेगी।

संविधान की धारा 356 में प्रावधान है कि अगर राज्य में निर्वाचित सरकार संवैधानिक प्रावधानों एवं मर्यादाओं के निर्वहन में विफल रहती है तो राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश को आधार बनाकर राज्य सरकार को बर्खास्त, भंग या फिर निलंबित कर सकते हैं। उत्तराखंड में विधानसभा निलंबित कर दी है, जिसके बाद तमाम शक्तियां राज्यपाल को प्राप्त होंगी।

ऐसे में नौकरशाही प्रत्यक्ष रूप से राजभवन के अधीन होने से कामकाज अधिक स्वतंत्र रूप से होने की संभावना रहेगी। सचिवों को अब हर फाइल पर विभागीय मंत्रियों के अनुमोदन से राहत मिलेगी, जिससे नौकरशाही को निर्णय लेने की स्वतंत्रता अधिक मिलेगी।

राष्ट्रपति शासन के दौरान नौकरशाही का सबसे अहम रोल है, जिसमें मुख्य सचिव की भूमिका सबसे अहम होती है। विभागीय फाइलें से मुख्य सचिव के माध्यम से राजभवन जाएंगी। लेकिन प्रमुख सचिव गृह व प्रमुख सचिव कार्मिक का रोल भी अहम होगा। सचिवों की कार्यप्रणाली में राजनीतिक दखल कम होगा। सचिवालय के बाद जिलों की प्रशासनिक इकाइयों के अधिकार भी इस दौरान अधिक हो जाते हैं।

उत्तराखंड में लगाया गया राष्ट्रपति शासन, हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है कांग्रेस

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देहरादून: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। केंद्र सरकार ने बीती रात कैबिनेट की बैठक के बाद राष्ट्रपति से इसके लिए सिफ़ारिश की थी जिसे राष्ट्रपति ने मान लिया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि वह केंद्र के इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।

केंद्र सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा गई थी और विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त हो रही थी जिसे देखते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला किया गया है।

विधानसभा को भंग नहीं किया गया है बल्कि निलंबित रखा गया है। उधर, कांग्रेस और ख़ासतौर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे संविधान और लोकतंत्र की हत्या बताया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि धारा 356 के प्रयोग का इससे बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता है। पिछले नौ दिन से हर दिन संविधान के प्रावधानों की हत्या हो रही थी।

नौ दिन पहले कांग्रेस के नौ विधायकों की बग़ावत का पटाक्षेप उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के तौर पर हुआ। राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट की सिफ़ारिश राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूर कर ली। ये फ़ैसला उत्तराखंड विधानसभा में बहुमत परीक्षण से ठीक एक दिन पहले हुआ।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा चुकी थी।

जेटली ने कहा कि संविधान में लिखा है कि जब बजट फेल होता है तो इस्तीफ़ा देना होता है। स्वतंत्र भारत में पहला उदाहरण है जब एक एक फेल्ड बिल को बिना वोट लिए पारित होने की घोषणा कर दी गई। 18 तारीख़ के बाद से जो सरकार चली है वो असंवैधानिक है।

उधर, मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे लोकतंत्र और संविधान की हत्या बताते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

रावत ने कहा कि शायद ही ऐसा कोई उदाहरण जिसे बहुमत सिद्ध करने से एक दिन पहले ही बर्ख़ास्त कर दिया जाए। सरकार का बहुमत विधानसभा में तय होना चाहिए था। ऐसी क्या जल्दबाज़ी थी कि सरकार को भंग कर दिया गया।

अरुण जेटली ने ये भी कहा कि विधानसभा स्पीकर ने बीजेपी के एक बाग़ी विधायक के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की जबकि वो कांग्रेस के नौ बाग़ी विधायकों के ख़िलाफ़ मनमाने तरीके से दल बदल कानून का प्रयोग कर रहे थे।

जेटली ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची है जिसका डिसक्रिमिनेटरी तरीके से प्रयोग हुआ। ये पहला उदाहरण है स्वतंत्र उदाहरण में कि एविडेंस आया हो और अपने मुंह से मुख्यमंत्री जी हॉर्स ट्रेडिंग का प्रयास कर रहे हों।

राष्ट्रपति शासन के ऐलान के बावजूद उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर रहे गोविंद सिंह कुंजवाल ने बाग़ी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का ऐलान कर दिया।
उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि हमें राष्ट्रपति शासन की कोई सूचना नहीं मिली है।

साफ़ है कि उत्तराखंड की सियासत को लेकर खींचतान अभी बाक़ी है। विधानसभा को भंग नहीं किया गया है बल्कि निलंबित रखा गया है। ऐसे में राष्ट्रपति शासन के बावजूद किसी नई सरकार के गठन का विकल्प अभी खुला है। देखना है कि इसके लिए बीजेपी अगर पहल करती है तो कब।

उत्तराखंड में वसंत के मौसम में ही सियासी सरगर्मियों ने पारा काफ़ी बढ़ा दिया है। विधायकों की ख़रीदफ़रोख़्त के आरोपों के बीच बीते दो महीने में दूसरी बार किसी राज्य सरकार को बर्ख़ास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा है। हालांकि अरुणाचल में इसके बाद बीजेपी ने सरकार बना ली, लेकिन क्या उत्तराखंड में भी बाग़ियों के सहारे ऐसा करने की कोशिश होगी। ये एक बड़ा सवाल है।