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प्राकृतिक गैस के दाम 17 फीसदी घटा सकती है सरकार

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नई दिल्ली। शुक्रवार से सरकार देश में प्राकृतिक गैस के दाम 17 फीसदी घटाकर 3.15 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर सकती है। इसका दाम वर्तमान में 3.82 डालर प्रति एमएमबीटीयू है।अक्तूबर 2014 में केन्द्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार द्वारा तय किये गए फार्मूले के अनुसार गैस के दाम में हर छह महीने में संशोधन होगा और इस लिहाज से अगला बदलाव एक अप्रैल को होना है।

सूत्रों के मुतबिक पेट्रोलियम मंत्रालय किसी भी समय गैस का संशोधित दाम घोषित कर सकता है। प्राकृतिक गैस का दाम एक अप्रैल 2016 से कम होकर 3.15 डालर प्रति एमएमबीटीयू किया जा सकता है। 30 सितंबर 2016 तक यह दाम लागू रहेगा। फार्मूले के अनुसार दाम प्रत्येक छह महीने के आधार पर तय किये जायेंगे।

दुनिया के प्रमुख गैस उत्पादक देश अमेरिका, कनाडा और रूस के औसत दाम के आधार पर इस दाम की गणना की जायेगी। जिस छह महीने के लिये दाम तय किया जायेगा उससे इन देशों के तीन माह पहले एक साल के औसत मूल्य के आधार पर गैस का दाम तय किया जायेगा।

इस फार्मूले के अनूसार अप्रैल 2016 से सितंबर 2016 छह महीने के लिये तीन माह पहले समाप्त हुये एक साल यानी एक जनवरी से 31 दिसंबर 2015 की अवधि के औसत बेंचमार्क दाम के आधार पर गैस का मूल्य 3.15 डालर प्रति एमएमबीटीयू होगा। इसका मौजूदा मूल्य 3.82 डालर प्रति एमएमबीटीयू है। गैस का दाम विशुद्ध क्लोरिफिक मूल्य के आधार पर 3.50 डालर रह सकता है जबकि इस समय यह 4.24 डालर प्रति एमएमबीटीयू है।

घाटे के कारण टाटा स्टील अपने ब्रिटेन के कारोबार को बेचेगी

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टाटा स्टील ब्रिटेन के अपने कारोबार को बेचने की योजना बना रही है. कंपनी के मुताबिक ब्रिटेन के स्टील कारोबार में लगातार हो रहे घाटे की वजह से वह अपनी इस इकाई को आंशिक या पूर्ण रूप से बेच सकती है. मंगलवार को मुंबई में बोर्ड की बैठक के बाद कंपनी ने यह घोषणा की. कंपनी की तरफ से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर स्टील की ज़्यादा आपूर्ति, निर्माण की बढ़ी हुई लागत और मुद्रा में अस्थिरता की वजह से ब्रिटेन और यूरोप में कारोबार की स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है और इसी कारण कंपनी ने यह फैसला लिया है. टाटा ने 2007 में एंग्लो-डच कंपनी कोरस का अधिग्रहण कर ब्रिटेन में अपना कारोबार शुरू किया था.

ख़बरों के मुताबिक टाटा ने कारोबार की बिक्री के लिए ब्रिटेन सरकार और इन्वेस्टमेंट कंपनी ग्रेबुल कैपिटल से बातचीत शुरू कर दी है. वहीं, टाटा के इस फैसले से हज़ारों कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है. ब्रिटेन के समाचार पत्र द गार्जियन के मुताबिक टाटा के इस फैसले से करीब पंद्रह हजार ब्रिटिश कर्मचारी प्रभावित होंगे. ब्रिटेन में पिछले कुछ सालों में कई स्टील कंपनियां घाटे के कारण अपना कारोबार बेच चुकी हैं.

बैंक के दम पर भी मुश्किल हुआ आईआईटी में दाखिला

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आईआईटी काउंसिल में बीटेक पाठ्यक्रम की फीस में बारह गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास हुआ तो बैंक के दम पर भी आईआईटी में दाखिला लेना मुश्किल होगा। बैंकों ने आईआईटी जैसे संस्थानों को ‘स्कॉलर’ की श्रेणी में रखा है।

इसका अर्थ आईआईटी में दाखिले के बाद बैंकों से आसानी से लोन मिल जाएगा लेकिन देश में पढ़ाई के लिए एसबीआई से अधिकतम 20 लाख रुपये ही शिक्षा ऋण लिया जा सकता है जबकि, बढ़ोतरी के बाद आईआईटी की फीस 24 लाख रुपये हो जाएगी। यानी, अधिकतम लोन लेने के बाद भी चार लाख रुपये कम रह जाएंगे।

इसके अलावा एसबीआई में एजुकेशन लोन पर ब्याज 11.30 प्रतिशत है। बीटेक चार साल का कोर्स है। फीस के लिए लोन हर साल लेना होता है। पढ़ाई के दौरान छात्र-छात्रा को लोन की किस्त जमा नहीं करनी होती लेकिन बैंक के अफसरों के अनुसार चार साल बाद ब्याज जोड़कर कर्ज की कुल राशि डेढ़ गुना से भी अधिक हो जाती है।

इस कर्ज की अदायगी अधिकतम 10 साल में करनी होती है। एसबीआई के चीफ मैनेजर अनिल सिन्हा कहते हैं, आईआईटी की फीस बढ़ने के बाद बैंक एजुकेशन लोन की अधिकतम सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो आईआईटी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को 24 लाख रुपये लोन मिलने की उम्मीद बन सकती है लेकिन चार साल की पढ़ाई के बाद कर्ज की कुल राशि तकरीबन 36 लाख रुपये हो जाएगी।

यह कर्ज चुकाने के लिए हर महीने की किस्त 50,220 रुपये बनेगी, जो 10 साल तक देनी होगी। आरबीआई के नियमानुसार वेतन की अधिकतम 50 फीसदी राशि ही किस्त के रूप में काटी जा सकती है।

इस लिहाज से आईआईटी से पढ़ाई खत्म करने के साथ विद्यार्थियों को एक लाख रुपये से अधिक वेतन की नौकरी मिल जानी चाहिए। इतने बड़े पैकेज की नौकरी आईआईटी के कई विद्यार्थियों को ही मिल पाती है। ऐसे में फीस बढ़ोतरी के बाद बैंक से लोन लेकर भी आईआईटी में पढ़ाई मुश्किल होगी।
आईआईटी काउंसिल की ओर से फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो आईआईटी से बीटेक की चार साल की फीस 24 लाख रुपये हो जाएगी। नौकरी पेशा लोगों की बात करें तो देश में सबसे अधिक वेतन प्रोफेसर और आईएएस का है। फीस बढ़ोतरी के बाद इस तबके के लिए भी अपने बच्चों को आईआईटी में पढ़ाना आसान नहीं होगा।

जेके इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आरआर तिवारी और एक आईएएस अफसर की ऐसी ही पहली प्रतिक्रिया रही। ऐसे में अन्य लोगों को स्थिति को समझा जा सकता है। इस फैसले के बाद आईआईटी की पढ़ाई एक खास वर्ग के लोगों के लिए ही आरक्षित हो जाएगी।

असम में मुसलमानों के रुख से कांग्रेस में उत्साह

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असम में मुसलमानों के रुख से जहां कांग्रेस उत्साहित है, वहीं इत्र कारोबारी और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल खासे दबाव में हैं। उन्हें अपनी ओर से यह घोषणा करनी पड़ रही है कि चुनाव के बाद वह कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं।

पिछली बार अजमल की पार्टी एआईडीयूएफ की वजह से मुसलमानों में कांग्रेस का खासा नुकसान हुआ था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अंजन दत्तो का दावा है कि इस बार मुसलमानों का भारी समर्थन कांग्रेस को मिलेगा।

असम देश का एक ऐसा राज्य है, जहां औसतन 34 फीसदी आबादी मुसलमानों की है, जिनमें असम के मूल निवासी असमिया मुसलमान और बांग्लादेश से यहां आकर बसे मुसलमान दोनों शामिल हैं।

राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से निचले (लोअर) असम की 43 सीटें तो इस कदर मुस्लिम बहुल हैं कि वहां मुकाबला ही कांग्रेस और एआईयू्डीएफ के बीच है। बारपेटा से धुबरी तक जाने पर गांव के गांव उन मुसलमानों के ही दिखते हैं, जो सालों पहले बांग्लादेश से यहां आकर बसे।

इन्हें बांग्लादेशी मुसलमान कहा जाता है और इस इलाके को अजमल का गढ़ माना जाता है, जहां से पिछली बार 2011 को एआईयूडीएफ ने 18 सीटें जीती थीं। धुबरी में करीब 80 फीसदी आबादी मुसलमानों की है।

इसके अलावा बराक घाटी की 15 विधानसभा सीटों पर असमिया मुसलमानों की खासी तादाद है। औसतन यहां भी 50 फीसदी आबादी मुसलमानों की है, जिनमें करीमगंज में तो 58 फीसदी मुस्लिम आबादी है।

कालाटंकडी, कछार सिलचर में करीब 38 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इसी तरह मध्य असम के मोरेगांव नौगांव जिलों में भी 35 से 40 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। कांग्रेस की सारी उम्मीद लोअर असम, बराक घाटी और मध्य असम की इन्हीं सीटों पर टिकी हुई है। पार्टी को उम्मीद है कि इस बार भाजपा को रोकने के लिए मुसलमानों का एकमुश्त वोट कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है।

उप्र चुनाव: ‘पीके’ ने तैयार किया कांग्रेस का चुनावी रोडमैप

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कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के चुनावी महासमर का तानाबाना बुन लिया है। सरकार बनाने के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले प्रशांत किशोर (पीके) ने कांग्रेस के मिशन यूपी का रोडमैप तैयार कर दिया है। फिलहाल प्रशांत की सलाह पर पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं पार्टी ने यूपी की सियासत में अपनी युवा ब्रिगेड को आगे लाने का भी मन बनाया है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो चुनावी समर में उतरने से पहले पार्टी का पूरा ध्यान फिलहाल संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना है। अप्रैल से सितंबर तक संगठन की संरचना को चुस्त-दुरुस्त किया जाएगा। अक्तूबर से पार्टी के दिग्गज और अनुभवी नेता सूबे में प्रवास करेंगे।

पार्टी ने प्रशांत किशोर के सुझावों पर ही यूपी में युवा और बेदाग छवि वाले नेताओं पर दांव आजमाने की तैयारी की है। गौरतलब है कि प्रशांत किशोर यूपी में 500 कार्यकर्ताओं की भारी भरकम टीम के साथ उतर रहे हैं। पार्टी अपने चुनाव प्रचार में तकरीबन 400 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

यूपी में चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी संभालेंगी। यह भी तय हो गया है कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री के तौर पर किसी को भी प्रोजेक्ट नहीं करेगी। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी ने यूपी को लेकर अभी से आतंरिक सर्वेक्षण कराना शुरू कर दिया है।

पिछले दिनो सर्वे के सिलसिले में पीके की टीम वाराणसी भी आई थी। अमेरिकी चुनाव सर्वेक्षण के तौर पर प्रशांत किशोर की टीम पहली बार कांग्रेस के लिए पैनल सर्वे कर रही है, जिसके परिणामों से हर महीने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अवगत कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस किसी भी दल से गठनबंधन नहीं करेगी। वह अकेले ही चुनाव लड़ेगी।

वाशिंगटन: शिखर सम्मेलन का केंद्र बिंदु परमाणु आतंकवाद का डर

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वाशिंगटन में गुरुवार शाम शुरू होने जा रहे परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में परमाणु हथियार के इस्लामिक स्टेट (आईएस) या किसी अन्य आतंकवादी संगठन के हाथों में न चले जाने का डर मुख्य मुद्दा होगा। इस शिखर सम्मेलन में रूस को छोड़कर 50 देश शामिल हो रहे हैं।

इस द्विवार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2010 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रयास से हुई। उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत में परमाणु अप्रसार को प्राथमिकता बनाने का संकल्प लिया था।

पिछले सप्ताह बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में आतंकवादी हमलों के बाद परमाणु हथियारों व सामग्रियों की सुरक्षा की कोशिशों को बल मिला है।

डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर बेन रोडेस ने कहा कि परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन का आगाज गुरुवार शाम व्हाइट हाउस में होगा, जहां राष्ट्रपति बराक ओबामा व संबंधित राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल परमाणु आतंकवाद से संबंधित डर के बारे में अपना नजरिया साझा करेंगे।

उधर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बुधवार को कहा कि दुनिया की महान परमाणु शक्तियों में से एक रूस प्रारंभिक चरण के दौरान इस शिखर सम्मेलन के कुछ मुद्दों और विषयों को लेकर उसे कोई खास तव्वजो न दिए जाने की वजह से विरोधस्वरूप इसमें शामिल नहीं हो रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद, ब्रिटेन के डेविड कैमरन, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप ताईप एरदोगन, यूक्रेन के पेट्रो पोरोशेंको और कजाकस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव इसमें शिरकत करेंगे।

'कोहली की बैटिंग देखकर मेरे बचे बाल भी खड़े हो गए थे'- गावस्कर

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पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार पारी खेलकर टीम इंडिया को टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले विराट कोहली की तारीफ की है। गावस्कर ने कहा कि विराट इस समय दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं।

कोहली ने नाबाद 82 रन की पारी खेलकर भारत को ग्रुप टू के अंतिम मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया पर छह विकेट से जीत दिलाई। इस जीत के साथ भारतीय टीम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गई, जहां 31 मार्च को मुंबई में उसका मुकाबला वेस्टइंडीज से होगा।

गावस्कर ने कहा कि कोहली कुछ अलग है। मेरे जो भी थोड़े बाल बचे हैं वह इस युवा जीनियस की पारी देखकर खड़े हो गए थे। यह बेहतरीन पारी थी। कोहली की महानता इस तथ्य में है कि वह दबाव में शानदार प्रदर्शन करता है और टीम के हितों को हर चीज से ऊपर रखता है।

जब भारत लक्ष्य का पीछा कर रहा हो तो उसका रिकॉर्ड देखिये। वह हमेशा उन्हें मैच जिताता है और यह ताकत और टाइमिंग का संयोजन है। कुछ ही बल्लेबाज में टॉप और बाटम हैंड के साथ खेलने की क्षमता है। जब वह टॉप हैंड के साथ ड्र्राइव खेलता है तो यह शानदार होता है। उस व्यक्ति का नि:स्वार्थ देखिये।

वह अपने कप्तान को स्ट्राइक देकर खुश था क्योंकि उसे पता था कि कप्तान भी खुद को साबित करना चाहता है। कई बार जब आप इस तरह की बड़ी पारी खेलते हो तो विजयी रन बनाना चाहते हो। लेकिन वह पूरी तरह से टीम के लिए खेलने वाला व्यक्ति है। भगवान का शुक्र है कि वह भारत के लिए खेल रहा है।

वहींख्‍ पूर्व ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज इयान चैपल भी कोहली की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। उनका कहना है कि कोहली का शॉट सेलेक्‍शन पूर्व कैरेबियाई दिग्गज ब्रायन लारा से भी बेहतर है।

वो फिल्में जो बाहुबली से ज्यादा दावेदार थीं नेशनल अवार्ड की

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एक दशक पहले तक नेशनल फिल्म अवार्ड में मनोरंजन करने वाली फिल्म का अवार्ड आमतौर पर किसी बॉलीवुड फिल्म को मिला करता था। जबकि अन्य श्रेणियों के श्रेष्ठ पुरस्कार तमिल, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला और मराठी फिल्मों के नाम होते थे। एक तरह से नेशनल फिल्म अवार्ड भारत में हिन्दी के इतर बनने वाले सिनेमा को पहचान दिलाने और उसे जिंदा रखने में योगदान देने लगा था।

लेकिन 63वें नेशनल फिल्म में जिन नामों की घोषणा हुई है, उससे आभाष होता है कि अब इस अवार्ड की तस्वीर भी बदल रही है। धीरे-धीरे कर के यह अवार्ड भी फिल्मफेयर अवार्ड की भांति बॉलीवुड फिल्मों पर केंद्रित होता जा रहा है।

इस साल फीचर श्रेणी के छह स्वर्ण कमल पुरस्कारों में से तीन बॉलीवुड के खाते में गए। जिनमें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (संजय लीला भंसाली/बाजीराव मस्तानी) सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर (नीरज घेवन/मसान) और सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म (बजरंगी भाईजान) शामिल हैं। सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का चौथा पुरस्कार भी हिंदी के खाते में है।

जबकि सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली फिल्म बाहुबली ने हिंदी में 100 करोड़ रुपये कमाए थे और यह कीर्तिमान बनाने वाली वह साउथ की पहली डब फिल्म है। सीधे तौर पर बाहुबली बात करें तो भी यह फिल्म स्पेशल इफेक्ट के लिए ही याद रह जाती है। जबकि इसी साल में बॉलीवुड समेत भारत की अन्य भाषाओं में ऐसी फिल्में बनी हैं, जो नेशनल अवार्ड पाने का माद्दा रखती हैं। अगली स्लाइड में जानिए, उन फिल्मों के बारे में।
नेशनल फिल्म अवार्ड चयन ज्यूरी के नजदकी सूत्रों के मुताबिक फिल्म ‘मसान’ ने सर्वेश्रष्ठ फिल्म चुनी गई ‘बाहुबली’ को कड़ी टक्कर दी थी। ज्यूरी के सदस्यों में इन दोनों को लेकर लंबी बहस चली। लेकिन अंततः फैसला हुआ कि ‘बाहुबली’ ही सर्वश्रेष्ठ है। जबकि ‘मसान’ के निर्देशक नीरज घेवन को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर अवार्ड देकर चलता कर दिया गया।

मसान वो फिल्म है, जिसे कांस फिल्म फेस्टिवल में देखने के बाद दुनियाभर के फिल्मों के जानकार खड़े होकर लगातार तीन मिनट तक ताली बजाते रहे थे। ‘मसान: अ सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ, डेथ एंड एवरीथिंग इन बिटवीन’ ने साल 2015 में एक नये तरह के सिनेमा की ओर ध्यानाकर्षित किया था। इसमें कोई तकनीकी खिलवाड़ नहीं था, पैसों से बनाया गया सिनेमा नहीं था, फिल्म में जीवन की कहानी पर उसका दर्शन हावी था। जीवन दर्शन की रेल पर्दे पर धड़धड़ाती गुजरती है और कहानी पुल की तरह थरथराती रह जाती है।

इस श्रेणी में दूसरी फिल्म थी, ‘माझी’। सिनेमा अपने कथानकों में साधारण इंसान को नायक बनाता है। निर्देशक केतन मेहता की मांझी सच्चे अर्थों में यह काम किया था। बिहार के गया जिले में स्थित गहलोर गांव और वजीरगंज ब्लॉक के बीच एक ऊंचे पहाड़ को काट कर रास्ता बना देने वाले दशरथ मांझी (1934-2007) की कहानी को केतन ने इस तरह से रुपहले पर्दे पर उतारा था कि पहाड़ को काट दिए जाने से उभर आए रास्ते को पर्दे पर देखते वक्त खालीपन नहीं दिखता। ऐसा महसूस होता है मानो कोई अदृश्य ताजमहल खड़ा है!!

इसी श्रेणी की तीसरी फिल्म एंग्री इंडियन गॉडेसेस थी, जो नेशनल अवार्ड का माद्दा रखती थी। हमारे शास्त्रों में देवियां पूजनीय हैं लेकिन घर और समाज में उनका क्या स्थिति है? हमारे दौर के सबसे ज्वलंत प्रश्नों में एक यह भी है। इस पर तेज गति से मंथन हो रहा है और मंथन से अमृत तथा विष दोनों निकल रहे हैं। निर्देशक पैन नलिन बदलते हुए भारतीय समाज में स्त्रियों के संघर्ष बेहद प्रासंगिक फिल्‍म खड़ी की थी। पैन नलिन भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह गुजरात से आते हैं और उनके पिता भी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। पैन अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में विशेष स्थान रखते हैं और उनकी एंग्री इंडियन गॉडेसेस कई देशों के फिल्म समारोहों में सराही गई।

चौथी फिल्म का नाम है, ‘मार्गरेटा विद द स्ट्रा’, जिसे नेशनल अवार्ड में महज मेंशन कर के छोड़ दिया गया। भारतीय सिनेमा में जिंदगी के पन्नों की तरतीब बदल कर कैसे कहानी बुनी जा सकती है, मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ इसका बढ़िया उदाहरण थी। इस तरह से मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ की कहानी ऐसी किशोरवय युवती का जीवन हमारे सामने लाती है, जो सेरेब्रल प्लेसी की शिकार है और अपनी यौन इच्छाओं का दमन नहीं करती। उसे लड़के हैंडसम लगते हैं और हमउम्र लड़की से भी उसे प्यार हो जाता है। ऐसे विषय पर फिल्म बनाने का साहस दिखाकर निर्देशिका शोनाली बोस बड़ा कदम उठाया था। ऐसे साहसी कार्यों को प्रोत्साहन की खूब जरूरत पड़ा करती थी।

इसी साल रिलीज हुई फिल्म ‘तितली’ में वो माद्दा था कि उसे नेशनल फिल्‍म अवार्ड में जगह दी जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लूटमार करने वाले परिवार की कहानी पर बनी यह फिल्‍म देश विदेश कई नामी फिल्म फेस्टिवल में जगह बनाने में कामयाब रही थी। विदेशी भाषा श्रेणी में इसके पास कई अवार्ड भी हैं, जो कई अन्य विदेशी फिल्म एसोसिएशनों ने दिए हैं। निर्देशक कनु बहल की यह फिल्म यथार्थवादी सिनेमा के काफी करीब पहुंची थी। बीते सालों में अनुराग कश्यप की इसी तरह की फिल्मों को नेशनल अवार्ड में जगह दी थी।

तपती गर्मियों में इन 5 घरेलू नुस्खों से दूर करे स्किन टैनिंग

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तपती, झुलसती गर्मियों में त्वचा के कालेपन से परेशान होकर ब्यूटी सैलून जाने के बजाय इस बार इन प्राकृतिक उपायों को अपनाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं। नींबू का रस: प्रभावित स्थान पर नींबू का रस लगाएं। इसे 15-20 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें उसके बाद ठंडे पानी से धो लें। कुछ सप्ताह यह करने पर त्वचा का कालापन और दाग धब्बे भी कम होंगे। नींबू के रस के साथ खीरा या दही मिलाकर भी लगा सकते हैं। कच्चा टमाटर: टमाटर के टुकड़े काटें और प्रभावित स्थान पर लगाएं। यह कालापन दूर करता है और नियमित इस्तेमाल करने पर कुछ सप्ताह में त्वचा की रंगत साफ करता है। दही: त्वचा पर दही और अन्य दुग्ध उत्पाद लगाने से त्वचा मुलायम होती है और उसकी रंगत और दाग धब्बों में भी सुधार होता है। एलोवेरा, गुलाब जल और ग्लीसरीन: इन तीनों का मेल त्वचा की खूबसूरती के लिए बेहद प्रभावशाली है। यह दाग धब्बों और कालेपन को हल्का करता है और त्वचा को चमकदार बनाता है। जई का आटा, शहद, दही: धूप के कारण झुलसी त्वचा की मृत कोशिकाओं को दूर करने के लिए ये कारगर घरेलू स्क्रब हैं। त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने से कुछ दिनों में कालापन दूर हो जाता है और त्वचा खिली निखरी हो जाती है।

सूखे की स्थिति और पानी का सीएम ने लिया जायजा

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मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के 21 कलेक्टरों के साथ बातचीत कर सूखे की स्थिति और चारा-पानी की उपलब्धता का जायजा लिया। इस दौरान सीएम ने जिला कलेक्टरों को यह अधिकार दिया कि वे सूखे से निपटने के लिए अपनी शक्तियों का पूरा इस्तेमाल करें, साथ ही किसानों और आम जनता की मदद के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने और उसे चौबीस घंटे संचालित करने के लिए वार रूम बनाने का निर्देश भी दिया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि पानी की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करें और अवैध रूप से पानी की बिक्री में लगे लोगों पर कठोरतम कार्रवाई करें। सीएम ने कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फसल बीमा योजना, जलयुक्त शिवार योजना और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शुरू काम की प्रगति पर समीक्षा की। खेत तालाब योजना, स्थान व्यवहार्यता के लिए भूजल सर्वेक्षण करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को राज्य में खेत तालाबों के लिए 69,986 आवेदन पत्र मिले हैं। उन्होंने कलेक्टरों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना को जिले वार लागू करने के निर्देश दिए हैं। इंदिरा आवास योजना, रमाई और शबरी योजना को तेजी से लागू करने के भी आदेश दिए।