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सपनों के 'बजट' में घुमड़ता किसान

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वित्त वर्ष 2016-17 के लिए संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आज पेश किए गए बजट की यह सबसे अहम बात है। हालांकि बजट का अर्थशास्त्र कैसे काम करता है इस मामले में मेरी समझ कमजोर है, बावजूद इसके आगामी पांच साल में किसानों की आय को दोगुना करने का सरकार का विचार एक सपने जैसा मालूम पड़ता है। इसलिए जरूरी था, वित्त मंत्री अरुण जेटली देश को यह बताने का साहस करते कि यह लक्ष्य कैसे हासिल किया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पांच साल में हर वर्ष खेती की आय में करीब 14 फीसदी सालाना बढ़ोतरी की जरूरत होगी। आगे बढ़ने से पहले हम एक नजर खेती और किसानी को सरकार ने बजट में क्या-क्या दिया है, जान लें।

जेटली ने किसानों और कृषि पर बजट को फोकस करते हुए अपने बजट भाषण में कहा कि ‘कृषि एवं किसानों के कल्‍याण के लिए 35,984 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार का मकसद जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की समस्‍या को दूर करने, सिंचाई के लिए नए बुनियादी ढांचे का निर्माण करने, उर्वरक के संतुलित उपयोग के साथ मृदा उर्वरता को संरक्षित करने एवं कृषि से बाजार तक संपर्क मुहैया कराने का है। उन्होंने कहा कि ‘141 मिलियन हेक्‍टेयर शुद्ध खेती वाले क्षेत्रों में से केवल 65 मिलियन हेक्‍टेयर ही सिंचित हैं। इस बारे में, उन्‍होंने ‘प्रधानमंत्री सिंचाई योजना’ की घोषणा की जिससे कि अन्‍य 28.5 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई के साथ लाने के लिए मिशन मोड में लागू किया जा सके। एआईबीपी के तहत 89 परियोजनाओं को फास्‍ट ट्रैक किया जाएगा जो अन्‍य 80.6 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई के तहत लाने में मदद करेगा। इन परियोजनाओं में से 23 को 31 मार्च 2017 से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इस मद में अगले वर्ष 17 हजार करोड़ रुपए और अगले पांच वर्षों में 86,500 करोड़ रुपए की जरूरत होगी।
वित्‍त मंत्री ने घोषणा की कि लगभग 20 हजार करोड़ रुपए की प्रारंभिक कार्पस राशि से नाबार्ड में एक समर्पित दीर्घावधि सिंचाई निधि बनाई जाएगी। बहुपक्षीय वित्‍त पोषण के लिए 6 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से भूजल संसाधनों के ठोस प्रबंधन के लिए एक ऐसे ही कार्यक्रम का भी प्रस्‍ताव रखा गया है। इसके अलावा मार्च 2017 तक 14 करोड़ कृषि जोतों के कवरेज को मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के लिए लक्ष्‍य निर्धारित कर रखा है। यह किसानों को उर्वरक का उचित उपयोग करने में मदद करेगा। उन्‍होंने कहा कि ‘उर्वरक कंपनियों के 2,000 मॉडल खुदरा विक्रय केंद्रों को अगले तीन वर्षों में मृदा एवं बीज परीक्षण सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

वित्त मंत्री के मुताबिक यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि किसानों को पर्याप्त और समय पर ऋण मिले। उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2015-16 में 8.5 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 2016-17 में कृषि ऋण का लक्ष्य 9 लाख करोड़ रुपए होगा जो आज तक का उच्चतम स्तर है।’ किसानों के ऋण भुगतान का बोझ कम करने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि ब्याज छूट के लिए 2016-17 के बजट में 15,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
जैविक खेती के तहत 5 लाख एकड़ वर्षा जल क्षेत्रों को लाने के लिए ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ की घोषणा की गई है। इसी वर्ष 14 अप्रैल को डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के जन्‍मदिवस पर एकीकृत कृषि विपणन ई-मंच राष्‍ट्र को समर्पित किया जाएगा। इसके तहत सभी किसानों तक न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य सुनिश्चित करने के लिए तीन विशिष्‍ट पहलों को अमल में लाया जाएगा जिसमें खरीदारी का विकेन्‍द्रीकरण, एफसीआई के माध्‍यम से ऑनलाइन खरीदारी प्रणाली और दालों की खरीदारी के लिए प्रभावी प्रबंध करना शामिल है।

दुग्‍ध उत्‍पादन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए पशुधन संजीवनी, नकुल स्‍वास्‍थ्‍य पत्र, उन्‍नत प्रजनन प्रौद्योगिकी, ई-पशुधन हॉट और देसी नस्‍लों के लिए राष्‍ट्रीय जीनोमिक केन्‍द्र की स्‍थापना करने की भी घोषणा बजट में की गई है। इन परियोजनाओं में अगले कुछ वर्षों के दौरान 850 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा जेटली ने ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को ग्रांट इन एड के रूप में 2.87 लाख करोड़ रुपए आवंटित करने की घोषणा की। ऐसा 14वें वित्‍त आयोग की सिफारिशों के अनुसार किया गया है और यह राशि पिछले पांच वर्ष की तुलना में 228 प्रतिशत अधिक है। दीन दयाल अंत्‍योदय मिशन को प्रत्‍येक सूखाग्रस्‍त विकास खंड में और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को ऐसे ही जिलों में शुरू किया जाएगा।
खेती और किसानी के लिए सरकार द्वारा बजट में की गई इन बातों से तो समझ में नहीं आया कि पांच साल में किसानों की आय दोगुनी कैसे हो जाएगी। ये तो बस कृषि क्षेत्र को आवंटित बजट राशि में किस मद में कितना खर्च होना है उसका ब्योरा बताया गया है। इस बजट राशि से सीधे तौर पर किसानों का कोई भला नहीं हो सकता। हां! खेती और किसानी क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए धीरे-धीरे एक ढांचा जरूर खड़ा होगा जिसका फायदा एक वक्त के बाद किसानों को मिलेगा। देश का किसानों इस वक्त जिन हालातों से गुजर रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। दो दिन पहले आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया कि औसतन एक किसान की सालाना आमदनी 20 से 30 हजार रुपये है। तो क्या ये मानें कि पांच साल बाद इस किसान की सालाना आमदनी 40 हजार से 60 हजार रुपए हो जाएगी। अगर हो भी गई तो क्या इस बात का दावा किया जा सकता है कि महंगाई का आंकड़ा दोगुना या उससे अधिक नहीं होगा।

दूसरी अहम बात यह कि खेती-किसानी पर लगातार आपदा की वजह से किसान भीषण कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक घाटे का सौदा होने की वजह से हर रोज ढाई हजार किसान खेती छोड़ रहे हैं और हर दिन 50 के करीब किसान मौत को गले लगा रहे हैं। और तो और, देश में अभी किसानों की कोई एक परिभाषा भी नहीं है। वित्तीय योजनाओं में, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो और पुलिस की नजर में किसान की अलग-अलग परिभाषाएं हैं। ऐसे में किसान हितों से जुड़े लोग उम्मीद जता रहे थे कि आम बजट में गांव, खेती और किसान के अस्तित्व को बचाने के लिए सकारात्मक तौर पर फौरी राहत देने वाली कोई पहल होगी। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पिछले 5 वर्षों के आंकडों के मुताबिक सन् 2009 में 17 हजार, 2010 में 15 हजार, 2011 में 14 हजार, 2012 में 13 हजार और 2013 में 11 हजार से अधिक किसानों ने खेती-बाड़ी से जुड़ी तमाम दुश्वारियों समेत अन्य कारणों से आत्महत्या की राह चुन ली। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या की दर सबसे अधिक रही है।

यह उस देश के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है जहां की 60 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी से गुजारा करते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए था कि जिस तरह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उबारने के लिए एक लाख करोड़ से अधिक की राशि का बजट में प्रावधान किया गया, उसी तरह से किसानों का कर्जा माफ करने के लिए बजट में यथोचित धनराशि का प्रावधान किया जाता। सब-कुछ अगर किसान के लिए किया जा रहा है तो उस किसान को बचाने का काम तो पहले किया जाना चाहिए। बजट में इसके लिए तात्कालिक राहत जैसी कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। हां थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है कर्ज पर ब्याज माफी के मद में 15 हजार करोड़ रुपये से, लेकिन यह तो ऊंट के मुंह में जारी के समान है।

कुल मिलाकर कहें तो देश एक बड़े संकट की तरफ बढ़ रहा है जहां कोई किसानी नहीं करना चाहता, लेकिन भोजन सबको चाहिए। इस गम्भीर विषय पर समय रहते सरकारों को संजीदा होना होगा और व्यावहारिक रणनीति बनानी होगी।’ विशेषज्ञों का भी मानना है कि आने वाले दशकों में खाद्यान्न जरूरतों में वृद्धि के चलते वैकल्पिक खाद्य वस्तुओं, मसलन डेयरी उत्पादों, मत्स्य व पोल्ट्री उत्पादों के विकल्पों पर भी ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि खेती के समानांतर रोजगार के नऐ विकल्पों की जरूरत महसूस की जा रही है। जब औद्योगिक उत्पादन लगातार उतार चढ़ाव झेल रहा है ऐसे में अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करने वाले कृषि क्षेत्र के लिए मौसम की बेरूखी के कारण खाद्यान्न उत्पादन में कमी की आशंका संकट की स्थिति का संकेत दे रही है।

26/11 हमलों के दोषी कसाब को छुड़ाने के लिए रची गई साजिश का हेडली ने किया खुलासा

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मुंबई: मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने शुक्रवार को खुलासा किया कि बंधक बनाए गए इजरायली नागरिकों के बदले कसाब को छुड़ाने की कोशिश हुई थी। पूर्व लश्कर आतंकी हेडली अब अमेरिका में सरकारी गवाह बन चुका है और अमेरिका की जेल में कैद है। पाकिस्तान आतंकवादी अजमल कसाब को मुंबई हमलों के दौरान जिंदा पकड़ लिया गया था। उसे बाद में फांसी दी गई थी।

विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने बाद में संवाददताओं को बताया कि हेडली ने बताया कि उसने अपने लश्करे तैयबा समूह के आकाओं को यह सुझाव दिया था कि मुंबई हमलों के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए 9 आतंकवादियों को पाकिस्तान के सर्वोच्च वीरता सम्मान ‘निशाने हैदर’ से नवाजा जाए।

हेडली ने विशेष न्यायाधीश जी. ए. सनाप की अदालत में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हो रही जिरह में बताया कि जब कसाब को 27 नवंबर 2008 को जिंदा पकड़ लिया गया, तो हेडली के मुख्य संपर्क साजिद मीर ने आतंकवादियों को आदेश दिया कि वे इजरायली नागरिकों को बंधक बनाए रखें। उसके बाद वे इजरायल के प्रधानमंत्री और दूतावास से संपर्क कर भारत सरकार पर कसाब को छोड़ने का दबाव बनाने वाले थे। हेडली ने यही बातें अमेरिकी अदालत में भी कही थीं।

मुंबई हमले के मुख्य आरोपियों में से एक सैयद जैबुद्दीन अंसारी उर्फ अबु जुंदाल के वकील अब्दुल वहाब खान की जिरह के दौरान हेडली ने खान के सवाल के जवाब में कहा कि उसने निजी तौर से इजरायली दूतावास के अफसरों से बात नहीं की थी, क्योंकि मुंबई हमले के समय वह लाहौर में था।
हेडली ने साथ ही बताया कि वह दिसंबर 1971 से ही भारत तथा भारतीयों से नफरत करता था, जब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उसके स्कूल पर भारत की ओर से बम गिराया गया था और जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। हेडली ने बताया, ‘मुझे भारत तथा भारतीयों से सात दिसंबर, 1971 को ही नफरत हो गई थी, जब भारतीय विमानों ने मेरे स्कूल पर बमबारी की थी। इस हवाई हमले ने मेरे स्कूल को नष्ट कर दिया था। स्कूल में उस दौरान काम कर रहे कई लोग इस हमले में मारे गए थे।’

एक अन्य खुलासे में हेडली ने कहा कि उसने शिवसेना के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम (फंड रेजिंग प्रोग्राम) आयोजित करने की भी कोशिश की, जिसके लिए वह इसके संस्थापक-संरक्षक दिवंगत बाल ठाकरे को अमेरिका आमंत्रित करना चाहता था। हालांकि उसकी योजना वहां उन्हें मारने की नहीं थी। हेडली ने कहा कि वह ठाकरे की अमेरिका यात्रा को लेकर शिवसेना के जन संपर्क पदाधिकारी राजाराम रेगे के संपर्क में था।
हालांकि हेडली की ठाकरे से कभी मुलाकात नहीं हुई और रेगे ने जब उसे बताया कि ठाकरे की अधिक उम्र व अस्वस्थता के कारण उनका अमेरिका जाना मुश्किल है तो वह शिवसेना के अन्य नेताओं को भी अमेरिका आमंत्रित करने के लिए तैयार था।

महबूबा मुफ्ती आज पेश करेंगी सरकार बनाने का दावा

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पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा व पार्टी विधायक दल के नेता डॉ. निर्मल सिंह शनिवार को दोपहर साढ़े तीन बजे राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा, सांसद जुगल किशोर और वरिष्ठ पीडीपी नेता नईम अख्तर ने प्रस्तावित मुलाकात की पुष्टि की है।

इससे पहले लग रहा था कि बात बनते-बनते फिर अटक गई है। दिनभर चली मेराथन बैठकों के बाद आखिरकार यह सहमति बनी। शुक्रवार को प्रस्तावित मुलाकात एन वक्त पर टल गई। दोपहर में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा ने पार्टी की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि राज्यपाल से मुलाकात करने के पहले पीडीपी से बातचीत की जाएगी।

दोनों दलों के अध्यक्षों को शुक्रवार को राज्यपाल एनएन वोहरा से मिलना था। भाजपा महासचिव राम माधव ने बताया कि दोनों दलों के नेता आपस में चर्चा करने के बाद राज्यपाल से मिलने एक साथ जाएंगे। अटकलें लगने लगीं कि मंत्रिमंडल में भाजपा मंत्रियों की संख्या और महकमों को लेकर पेच फंस गया है।

मुफ्ती सरकार में अपना पलड़ा हलका रखने वाली भाजपा अब बराबरी का दावा कर रही है। शुक्रवार को दिनभर पीडीपी और भाजपा की बैठकों का दौर चलता रहा। देर शाम भाजपा विधायक बाली भगत के आवास पर दोनों दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसके बाद भी बात पूरी तरह बनी नहीं। फिर बातचीत का एक दौर और हुआ, जिसके बाद शनिवार को गवर्नर से मिलना तय हुआ। माना जा रहा है कि 29 मार्च को शपथ ग्रहण हो सकता है।
शुक्रवार को सुबह भाजपा विधायक दल की बैठक में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार बनाने पर सर्वसम्मति से मुहर लग गई। डॉक्टर निर्मल सिंह को फिर उप मुख्यमंत्री बनाना तय हुआ। वीरवार को पीडीपी विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए महबूबा मुफ्ती को आम सहमति से चुना गया था।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सांसद जुगल किशोर व शमशेर सिंह मन्हास की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक हुई। बैठक के बाद राम माधव ने कहा कि भाजपा राज्य के विकास और स्थिर सरकार के लिए कुछ मुद्दों पर महबूबा मुफ्ती व अन्य नेताओं के साथ चर्चा करना चाहती है।

राज्यपाल से न मिलने के पीछे मंत्री पद के पेच के सवाल पर राम माधव ने कोई जवाब देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पीडीपी के साथ कोई मतभेद नहीं हैं, लेकिन, जरूरी मुद्दों पर बातचीत होगी। श्रीनगर से जम्मू पहुंची पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी भाजपा के रुख को देखते हुए राज्यपाल से मिलने का कार्यक्रम टाल दिया।

भाजपा पीडीपी में फंसे पेच को सुलझाने के लिए शाम को दोनों पार्टियों के नेताओं की बैठक पूर्व मंत्री बाली भगत के निवास हुई। दोनों तरफ से अपने रुख से गठबंधन सहयोगी दल को अवगत करवा दिया गया।

'रॉ एजेंट' की गिरफ्तारी पर भारत-पाकिस्तान में तनातनी

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बलूचिस्तान में एक कथित रॉ एजेंट की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच कूटनीतिक बयानबाजियों का दौर तेज हो गया है।

पाकिस्तान के विदेश सचिव ने इस मामले पर भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर उनके सामने गंभीर आपत्ति जताई है। वहीं भारत की ओर से कहा गया है कि गिरफ्तार शख्स से उसका कोई लेना-देना नहीं है। जिस शख्स को गिरफ्तार किया गया है उसने भारतीय नौसेना से रिटायरमेंट ले लिया है। इसके बाद से नौसेना से उसका कोई संपर्क नहीं रहा है।

भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के कथित एजेंट की अवैध गतिविधियों को लेकर पाकिस्तान ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए शुक्रवार को भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावले को तलब किया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि विदेश सचिव ने आज भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर उनसे एक रॉ अधिकारी के पाकिस्तान में ग़ैरक़ानूनी ढंग से घुसने और बलूचिस्तान और कराची में उसकी विध्वंसकारी गतिविधियों पर विरोध और गहरी चिंता जताई है।
इससे पहले बलूचिस्तान के गृहमंत्री मीर सरफराज बुगती ने बृहस्पतिवार को दावा किया था कि जिस कथित रॉ एजेंट की गिरफ्तारी की गई है उसका नाम कुलयादव भूषण है और वह भारतीय नौसेना का कमांडर रैंक का अधिकारी है। उन्होंने दावा किया कि भूषण बलूच अलगाववादियों और आतंकियों के संपर्क में था।

भूषण को बलूचिस्तान के चमन इलाके से गिरफ्तार किया गया। लेकिन शुक्रवार को पाकिस्तान के इस दावे का भारत ने पुरजोर खंडन किया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दावों का खंडन करते हुए कहा कि जिस शख्स को गिरफ्तार किया गया है उसका भारतीय नौसेना से कोई संबंध नहीं है।

भारत की किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने में कोई रुचि नहीं है और वह दृढ़ता से यक़ीन रखता है कि पाकिस्तान में स्थिरता और शांति क्षेत्र के हित में है। स्वरूप ने कहा पाकिस्तान में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने पकड़े गए शख्स से मुलाकात की इजाजत मांगी है ताकि पाकिस्तानी दावे की सच्चाई जांची जा सके।

गौरतलब है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान और कराची में हिंसा फैलाने के लिए हमेशा भारत को जिम्मेदार ठहराता रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब उसने यहां से किसी रॉ एजेंट को गिरफ्तार करने का दावा किया है। हालांकि भारत ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत का किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने में कोई रुचि नहीं है और वह दृढ़ता से यक़ीन रखता है कि पाकिस्तान में स्थिरता और शांति क्षेत्र के हित में है।

दूसरी ओर बलूचिस्तान के गृह मंत्री सरफराज बुगती ने कहा कि गिरफ्तार शख्स बलूच अलगाववादियों और आतंकियों के संपर्क में था। उसका बलूचिस्तान और कराची में अशांति फैलाने का इरादा था।

शूटिंग छोड़कर सुजैन का जन्मदिन मनाने पहुंचे अर्जुन रामपाल

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बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल और रितिक रौशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान का नाम फिर सुर्खियों में है। ऐसी खबरें आई हैं कि अर्जुन रामपाल अपनी फिल्म की शूटिंग बीच में छोड़कर सुजैन का जन्मदिन मनाने के लिए मुंबई पहुंच गए।
सुजैन खान का जन्मदिन 26 अक्टूबर को होता है और इसी दिन अर्जुन रामपाल शिलॉन्ग से मुंबई लौटे। अर्जुन इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘रॉकऑन-2’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अर्जुन खासतौर पर सुजैन का जन्मदिन मनाने के लिए ही मुंबई पहुंचे।
गौरतलब है कि रितिक और सुजैन के अलग होने के समय भी ऐसी खबरें आई थीं कि अर्जुन रामपाल से बढ़ती नजदीकियों की वजह से यह कपल अलग हो रहा है। रितिक से तलाक के बाद भी सुजैन को कई बार अर्जुन के साथ देखा गया है।
हालांकि दोनों ने ही इन खबरों को बकवास करार दिया है। यह एक इत्तेफाक भी हो सकता है कि अर्जुन उसी दिन शिलॉन्ग से रवाना हुए जिस दिन सुजैन का जन्मदिन था लेकिन दोनों के बारे में जो खबरें आती रहती हैं उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अर्जुन अपनी दोस्त के जन्मदिन के मौके पर ही मुंबई पहुंचे।

कॉमेडी फिल्म में काम करना आसान नही: कुणाल खेमू

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बॉलीवुड एक्टर कुणाल खेमू कॉमेडी फिल्मों में काम करना आसान नही मानते हैं। कुणाल की फिल्म ‘गुड्डू की गन’ 30 अक्टूबर के रिलीज होने जा रही है।
कुणाल का कहना है कि  उन्हें कॉमेडी फिल्म में काम करना हमेशा चिंताजनक लगता है। कुणाल ने  कहा, ‘मैं परिवार और दोस्तों के साथ ‘गुड्डू की गन’ देखने के लिए उत्साहित हूं। लेकिन कॉमेडी फिल्में हमेशा थोड़ी चिंताजनक रहती हैं, क्योंकि आपकों नहीं पता कि कब लोगों का मनोरंजन हो रहा है और कब नहीं।’
चर्चा है कि कुणाल खेमू पहले इस फिल्म में काम नही करना चाहते थे लेकिन उनकी पत्नी सोहा अली खान इसे लेकर काफी कॉन्फीडेंट थीं।
सोहा ने कहा, ‘मैंने स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी थी। कुणाल ने मुझे कहानी सुनाई थी। इसके बाद मुझे इसके प्रोमोज और गीत पसंद आए। मैं फिल्म के लिए उत्साहित थी, क्योंकि फिल्म का आइडिया अविश्वसनीय है। देखते हैं कि पर्दे पर यह कैसे तब्दील होती है। मुझे कुणाल और फिल्म की टीम पर पूरा विश्वास है।’

टेस्ट सीरीज में खेलने के लिए आर अश्विन फिट!

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भारतीय टीम के ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने उम्मीद जताई है कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले टीम से जुड़ जाएंगे। वनडे सीरीज के दौरान अश्विन चोटिल हो गए थे।
29 वर्षीय अश्विन ने कहा, ‘कानपुर में पहले वनडे में मुझे चोट लग गई थी जिसके बाद मुझे वनडे सीरीज से बाहर होना पड़ा था। चोट अब ठीक है और टेस्ट सीरीज में खेलने के लिए मैं आश्वस्त हूं।’
अश्विन को पांच मैचों की सीरीज के पहले मैच में कानपुर में चोट लगी थी जिसके बाद वह सीरीज से बाहर हो गए थे। वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम करने वाले मेहमान टीम टेस्ट मैच में भी कमाल कर सकती है। दोनों देशों के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच 5 नवंबर से मोहाली में खेला जाएगा।
वनडे सीरीज में टीम इंडिया की हार के बारे में अश्विन ने कहा कि टीम ने अंत तक लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा, ‘दक्षिण अफ्रीका एक मजबूत टीम है। उन्होंने पहले भी अच्छी क्रिकेट खेली है इसलिए टेस्ट सीरीज में कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।’

पाकिस्तान से डरता है भारत, PCB के पीछे-पीछे आएगा BCCI: मियांदाद

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पूर्व पाकिस्तानी कप्तान जावेद मियांदाद ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि यह दरअसल सरकार के इशारों पर चलने वाला बोर्ड है जो हुक्मरानों की अनुमति से फैसला लेता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों को बहाल करने के संबंध में बीसीसीआई के रवैये से नाराज मियांदाद ने भारतीय बोर्ड के सचिव अनुराग ठाकुर के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि बीसीसीआई अपनी सरकार से निर्देश लेकर काम करता है। मियांदाद ने कहा, ‘बीसीसीआई क्रिकेट बोर्ड नहीं है यह तो सरकार का बोर्ड है।’
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कहा, ‘भारत का अन्य क्रिकेट देशों के साथ काफी खराब रवैया है और यह उसके पतन की शुरुआत है। वह दिन दूर नहीं जब भारत खुद पाकिस्तान के साथ सीरीज खेलने के लिए आग्रह करेगा। एक बात तो साफ है कि न ही बीसीसीआई और न ही सरकार, पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों की बहाली के लिए संजीदा है।’
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष शहरयार खान हाल में भारत दौरे पर गए थे जहां उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर से द्विपक्षीय सीरीज को लेकर बातचीत करनी थी लेकिन यह बातचीत हो नहीं पाई और शहरयार को निराश स्वदेश लौटना पड़ा। बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच क्रिकेट संभव नहीं है।
58 वर्षीय मियांदाद ने साथ ही दुनिया के शीर्ष तीन क्रिकेट बोर्ड भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की सारी क्रिकेट ताकत अपने हाथ में रखने पर आलोचना करते हुए कहा, ‘इन तीन ‘बिग थ्री’ के बनने से पहले आईसीसी सभी देशों के लिये 10 साल का फ्यूचर टूर कार्यक्रम बनाता था लेकिन अब ये तीन फैसला करते हैं कि अन्य बोर्ड को क्या करना है जो वाकई शर्मनाक है।’
पाकिस्तान के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक मियांदाद ने कहा कि जब लगातार अंतराल पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज होती है तो भारत और पाकिस्तान के बीच में सीरीज क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा, ‘भारत ही हमारे साथ नहीं खेलना चाहता क्योंकि वे पाकिस्तान से हारने से डरते हैं।’
मियांदाद ने साथ ही जोर दिया कि पाकिस्तान को अगले साल भारत की मेजबानी में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर पीसीबी के लिए सम्मान मायने रखता है तो उन्हें वर्ल्ड कप के लिए टीम नहीं भेजनी चाहिए। यह हमारे देश की इज्जत का सवाल है जिसका भारत सम्मान नहीं करता है।’

सानिया और हिंगिस की लगातार दूसरी जीत

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विजय रथ पर सवार चल रही भारत की सानिया मिर्जा और उनकी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस ने वर्ष के आखिरी टूर्नामेंट डब्ल्यूटीए फाइनल्स के अपने दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी करते हुये लगातार पांच गेम जीतकर बुधवार को रेड ग्रुप में लगातार दूसरी जीत हासिल कर ली.
टॉप सीड सानिया और हिंगिस की जोड़ी ने सातवीं वरीयता प्राप्त चेक गणराज्य की जोड़ी आंद्रिया लावाकोवा और लूसी रादेका को एक घंटे 17 मिनट में 6-3, 6-4 से हराकर सेमीफाइनल के लिये अपनी दावेदारी मजबूत कर ली.
सानिया-हिंगिस ने पहला सेट दो ब्रेक के सहारे 34 मिनट में 6-3  से जीत लिया लेकिन विपक्षी जोड़ी ने दूसरे सेट में जवाबी प्रहार करते हुये 4-1 की बढ़त बनाकर सानिया-हिंगिस को चौंका दिया. इस साल आठ खिताब जीत चुकी शीर्ष वरीय जोड़ी ने जबरदस्त वापसी करते हुये लगातार पांच गेम जीतकर दूसरा सेट 6-4 से समाप्त करते हुये जीत अपने नाम कर ली.
भारतीय और स्विस जोड़ी ने मैच में पांच में चार ब्रेक अंकों को भुनाया जबकि विपक्षी टीम छह में से दो ब्रेक अंक ही भुना पायी. सानिया इस टूर्नामेंट की गत चैंपियन हैं. उन्होंने गत वर्ष जिम्बाब्वे की कारा ब्लैक के साथ यह खिताब जीता था. सानिया इस सा में हिंगिस के साथ जोड़ी बनाकर दो ग्रैंड स्लेम सहित कुल आठ खिताब जीत चुकी हैं.
इस बीच एकल मुकाबलों में दूसरी सीड स्पेन की गरबाइन मुगुरुजा और चौथी वरीय चेक गणराज्य की पे क्वीतोवा ने अपने-अपने मुकाबले जीत लिये. मुगुरुजा की व्हाइट ग्रुप में यह लगातार दूसरी जीत है जबकि क्वीतोवा ने पहली जीत का स्वाद चखा। मुगुरुजा ने जर्मनी की एंजेलिक केर्बर को 6-4,6-4 से हराया.
क्वीतोवा ने लूसी सफारोवा को लगातार सेटों में हराकर व्हाइट ग्रुप में अपनी पहली जीत दर्ज की जबकि लगातार दूसरा मैच हारने के बाद सफारोवा की उम्मीदें लगभग समाप्त हो गई हैं. चौथी वरीय क्वीतोवा ने आठवीं सीड और अपनी फेड कप टीम साथी सफारोवा को एक घंटे 48 मिनट में 7-5 ,7-5 से पराजित किया.
दोनों खिलाड़ियों ने अपने पहले मुकाबले हारे थे ऐसे में क्वीतोवा के लिये यह जीत टूर्नामेंट में बने रहने के लिये काफी अहम है. दो बार की विंबलडन चैंपियन क्वीतोवा ने सफारोवा के खिलाफ बेहतरीन शुरूआत की और एक समय दोनों स्कोरबोर्ड पर लगभग बराबर चल रही थीं.
सफारोवा ने पहले सेट में बेजां भूलें की और 5-5 पर स्कोर बराबर होने के बाद क्वीतोवा को पहला ब्रेक प्वांइट मिला और फिर उन्होंने 7-5 से सेट जीतकर बढ़त बना ली. दूसरा सेट भी काफी रोमांचक रहा और सफारोवा ने दो बार क्वीतोवा की सर्विस ब्रेक कर 3-0 की बढ़त बनाई. लेकिन विश्व की पांचवें नंबर की खिलाड़ी क्वीतोवा ने वापसी करते हुये लगातार अच्छे शाट खेले और बराबरी हासिल कर ली.
क्वीतोवा ने फिर दो ब्रेक अंक बचाते हुये 5-3 की बढ़त बनाई. सफारोवा ने वापसी करते हुये स्कोर 5-5 से बराबर किया लेकिन क्वीतोवा ने सेट में टाईब्रेक की नौबत नहीं आने दी और यह सेट 7-5 से निपटाते हुये मैच अपने नाम किया. क्वीतोवा की इस जीत से उनका सफारोवा के खिलाफ करियर रिकार्ड 8-0 पहुंच गया.

उत्तराखंड जन-कवि गिर्दा की पत्नी ने ठुकराया पुरस्कार

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उत्तराखंड के जन कवि गिर्दा की पत्ती ने कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड लेने से मना कर दिया है।
आयोजकों के जन सरोकारों से न जुड़े होने के चलते जन कवि गिर्दा की पत्नी श्रीमती हीरा देवी ने आयोजकों द्वारा गिर्दा को दिया गया कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड लेने से इनकार किया है।
उल्लेखनीय है कि गिर्दा को दिया गया यह पुरस्कार मंगलवार को आयोजकों में से ही किसी एक ने ग्रहण किया था। गिर्दा स्मृति मंच के संयोजक महेश जोशी का कहना है कि जनकवि और रंगकर्मी स्व. गिरीश तिवारी गिर्दा की पत्नी को पुरस्कार के लिए नैनीताल आमंत्रित किया गया था।
वह हल्द्वानी से नैनीताल तो आईं लेकिन कार्यक्रम स्थल पर नहीं गईं और न ही उन्होंने राज्यपाल द्वारा गिर्दा को दिया गया मरणोपरांत कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार ग्रहण किया। श्री जोशी ने बताया कि गिर्दा की पत्नी ने� पुरस्कार लेने से पूर्व जनसंस्कृति और गिर्दा से जुड़े रहे लोगों ने विचार विमर्श किया कि क्या उन्हें यह पुरस्कार लेना चाहिए या नहीं।
इस पर गिर्दा से और जन संस्कृति से जुड़े लोगों ने एकमत होकर गिर्दा की पत्नी को यह पुरस्कार नहीं लेने का अनुरोध किया। इस पर स्वर्गीय गिर्दा की पत्नी ने पुरस्कार लेने से मना कर दिया।
जब उनसे पूछा गया कि गिर्दा के नाम का पुरस्कार किसी ने मंच में ग्रहण कर लिया है तो उन्होंने कहा कि जिसने पुरस्कार ग्रहण किया है वह इसे अपने घर ले जाएं मेरे पास यह पुरस्कार किसी भी हाल में नहीं आना चाहिए क्योंकि मैंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया है।
बता दें कि मंगलवार को राज्यपाल ने जनकवि रहे स्व. गिरीश तिवारी गिर्दा को मरणोपरांत कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ� टाइम एचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया जिसे गिर्दा की पत्नी की अनुपस्थिति में आयोजकों में से ही किसी एक ने ग्रहण किया था।