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'वन नाइट स्टैंड'में सनी लियोनी ने तोड़ दी बोल्डनेस की हदें

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सनी लियोनी की आने वाली फिल्म ‘वन नाइट स्टैंड’ का टीजर रिलीज किया गया है। सनी फिल्म में बेहद बोल्ड दिखी हैं। उन्होंने इस फिल्म में जो सीन किए हैं, वो उनकी पुरानी फिल्मों के सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाले हैं।

सनी लियोनी की फिल्म ‘वन नाइट स्टैंड’ के नाम से ही साफ है कि फिल्म का विषय बोल्ड होगा। फिल्म के पोस्टर रिलीज के साथ भी फिल्म के बोल्ड होने का प्रमाण मिला। अब फिल्म के टीजर ने तो बोल्डनेस की हदें तोड़ दी हैं।

सनी लियोनी और तनुज वीरवानी की मुख्य भूमिकाओं वाली ‘वन नाइट स्टैंड’ एक ऐसे जोड़े की कहानी है, जो मिलते हैं और एक-दूसरे के नाम तक सही से पूछे बिना सेक्स करते हैं।

एक रात के सेक्स के बाद दोनों अलग हो जाते हैं। मगर इसके बाद भी लड़का लड़की को भूलता नहीं। इस पर लड़की साफ करती है कि वो एक रात के लिए मिले थे इस रिश्ते को आगे मत बढ़ाओ।

इसके बाद भी दोनों के बीच नजदीकी बढ़ती रहती है। लेकिन जब दोनों पास आते हैं, तो दोनों में झगड़े होने लगते हैं।

फिल्म में बिना ज्यादा पहचान के एक रात के लिए संबंध बनाने और फिर अपने रास्ते चल देने की कहानी है। फिल्म में दिखाया गया है कि एक रात के लिए सेक्स करने के लिए बिस्तर पर आना और फिर अपने रास्ते चल देना क्या है। इस तरह के रिश्तों में परेशानी क्या आती है।

फिल्म की चर्चा इसके हॉट सीन को लेकर हो रहा है। टीजर में सनी लियोनी अपने चिर-परिचित अदांज में बेहद मादक लग रही हैं।

कोहली की करिश्माई पारी ने खोला टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल का 'दरवाजा'

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मोहाली में महिला टीम की हार के बाद उसी मैदान पर विराट कोहली के बल्ले ने ऐसा आग उगला कि कंगारू टीम के सारे आक्रमण धरे के धरे रह गए। एक तरह से नॉकआउट कहे जाने वाले इस मुकाबले में टीम इंडिया ने कोहली के चमत्कारिक प्रदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया को 5 गेंद शेष रहते 6 विकेट से हराते हुए लगातार दूसरी बार सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया।

पिछली बार की उपविजेता रही टीम इंडिया ने सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए दमदार खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया से मिले 161 रनों के लक्ष्य के जवाब में भारत ने 19.1 ओवर में ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया। कोहली एक बार फिर जीत के नायक बने और उन्होंने 51 गेंदों में 9 चौके और 2 छक्के की मदद से अविजित 82 रनों की पारी खेली। साथ ही उन्होंने कप्तान धोनी के साथ पांचवें विकेट के लिए 67 रनों की अटूट साझेदारी की। जीत का चौका धोनी के बल्ले से निकला। कप्तान ने 9 गेंदों में 14 रन बनाए।

अब सेमीफाइनल में टीम इंडिया का मुकाबला वेस्टइंडीज से 31 मार्च को होगा। जब‌कि वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल मुकाबला बुधवार 30 मार्च न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच होगा। मोहाली में पहले बल्लेबाजी करते हुए कंगारू टीम ने 6 विकेट पर 160 रन बनाए। उसकी ओर से ऐरोन फिंच ने 43 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली।

हार्दिक पांड्या ने 2 विकेट झटके जबकि अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे शेन वाटसन ने भी 23 रन देकर 2 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया के बाहर होने से वाटसन का अंतरराष्ट्रीय करियर यहीं पर खत्म हो गया। उन्होंने इस मैच से पहले ही ऐलान कर दिया था कि इस टी-20 वर्ल्ड कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

सेमीफाइनल में जाने के लिए मिले 161 रनो के जवाब में भारतीय ओपनिंग जोड़ी ने अच्छी शुरुआत दी। शिखर धवन ने पहले ओवर में अपनी पहली गेंद पर चौका जड़ा। तीसरे ओवर में धवन ने हेजलवुड की गेंद पर छक्का लगाया। अगले ओवर में रोहित ने भी मैच में अपना पहला चौका घुमाया। लेकिन चौ‌थे ओवर में वह (13) कैच आउट हुए।

पहला विकेट गिरने के बाद विराट कोहली ने आते ही लगातार दो चौके लगाए। कुछ ही देर में रोहित शर्मा (12) कंगारू गेंदबाज शेन वॉटसन की गेंद पर बोल्ड हुए। इसके बाद सुरेश रैना (10) ने एक चौका लगाया। लेकिन कंगारू ऑलराउंडर वॉटसन की घातक गेंद का शिकार हो गए।

12 वें ओवर में विराट कोहली ने टीम की ओर से दूसरा छक्का लगाया। अगले ओवर में युवराज के छक्के ने मोहाली के मैदान की रौनक बढ़ा दी। चोटिल होने के चलते युवराज मैदान में काफी संघर्ष करते हुए नजर आए। 14 वें ओवर में उन्होंने अपना विकेट गंवाया। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 45 रनों की साझेदारी हुई। युवराज 21 के स्कोर पर वॉटसन के शानदार कैच का शिकार हुए।

उनके बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी क्रीज पर पहुंचे। धोनी के चौके ने भारत के 100 रन पूरे किए। फिर कोहली ने अपने बल्ले की हनक दिखाई और 17 वें ओवर में फिफ्टी पूरी की। अगले ओवर की पहली दो गेंदों पर कोहली ने दो ताबड़तोड़ चौके और अगली गेंद पर एक छक्का लगाया। अब 12 गेंदों पर भारत को जीत के लिए 20 रनों की जरुरत थी। पहली गेंद डॉट जाने के बाद कोहली ने 19 वें ओवर की दूसरी, तीसरी और चौ‌थी गेंद पर ताबड़तोड़ तीन चौके जड़े। आखिरी गेंद पर भी कोहली ने चौका लगाया। आखिर ओवर में कप्तान धोनी के चौके ने टीम इंडिया की जीत में मुहर लगा दी।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की बल्लेबाजी बेहद आक्रामक रही। हालांकि पहले ओवर में भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने कंगारू ओपनर उस्मान ख्वाजा को एक ही चौका दिया लेकिन अगले ओवर में ख्वाजा ने जसप्रीत बुमराह को नहीं बख्‍शा और उनके ओवर में चार ताबड़तोड़ चौके जड़ दिए। तीन ओवर में 32 रन लुटाने के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने चौथे ओवर में ही फिरकी गेंदबाज आर अश्विन को उतार दिया।

अश्विन को भी कंगारूओं ने नहीं छोड़ा और उनके पहले ही ओवर में एेरोन फिंच ने लगातार दो छक्के जड़ दिए। ऑस्ट्रेलियाई टीम महज चौ‌थे ओवर में ही 50 रन का आंकड़ा पार कर गई। लेकिन पांचवें ओवर में टीम की वापसी कराते हुए नेहरा ने ख्वाजा (26 रन, 6 चौके) को विकेट के पीछे कैच आउट कराकर चलता किया। पहले झटके के बाद भारतीय गेंदबाजों ने कंगारू बल्लेबाजों पर दबाव डालना शुरू किया। तीसरे नंबर पर डेविड वॉर्नर पहुंचे। दूसरी सफलता अश्विन ने डेविड वॉर्नर (6) को आउट कर दिलाई।

युवराज ने अपनी पहली ही गेंद पर कंगारू कप्तान स्टीव स्मिथ (2) को आउट कर भारत की झोली में तीसरी सफलता डाली। 13 वें ओवर में फिंच (43) ने हार्दिक पांड्या की गेंद पर चौका जड़कर टीम के 100 रन पूरे किए। हालांकि अगली गेंद पर वह बाउंड्री पर कैच आउट हो गए। 17 वें ओवर में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने खतरनाक लग रहे ग्लेन मैक्सवेल (31) को आउट कर भारत की झोली में पांचवीं सफलता डाली। आखिर में भारत की ओर से कसी हुई गेंदबाजी हुई। हार्दिक ने आखिर ओवर की पहली गेंद पर जेम्स फॉकनर (10) को बाउंड्री पर कैच आउट किया।

सूखे की स्थिति और पानी का सीएम ने लिया जायजा

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मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के 21 कलेक्टरों के साथ बातचीत कर सूखे की स्थिति और चारा-पानी की उपलब्धता का जायजा लिया। इस दौरान सीएम ने जिला कलेक्टरों को यह अधिकार दिया कि वे सूखे से निपटने के लिए अपनी शक्तियों का पूरा इस्तेमाल करें, साथ ही किसानों और आम जनता की मदद के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने और उसे चौबीस घंटे संचालित करने के लिए वार रूम बनाने का निर्देश भी दिया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि पानी की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करें और अवैध रूप से पानी की बिक्री में लगे लोगों पर कठोरतम कार्रवाई करें। सीएम ने कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फसल बीमा योजना, जलयुक्त शिवार योजना और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शुरू काम की प्रगति पर समीक्षा की। खेत तालाब योजना, स्थान व्यवहार्यता के लिए भूजल सर्वेक्षण करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को राज्य में खेत तालाबों के लिए 69,986 आवेदन पत्र मिले हैं। उन्होंने कलेक्टरों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना को जिले वार लागू करने के निर्देश दिए हैं। इंदिरा आवास योजना, रमाई और शबरी योजना को तेजी से लागू करने के भी आदेश दिए।

अलग राज्य की मांग करने वाले महाराष्ट्र के महाधिवक्ता ने दिया इस्तीफा

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अलग विदर्भ राज्य की मांग करके चौतरफा फंसे राज्य के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आज सुबह अपना इस्तीफा राज्यपाल के विद्यासागर राव को सौंप दिया। हालांकि अभी उसे स्वीकार किया गया नहीं इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

बता दें कि महाराष्ट्र के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने मराठवाड़ा को अलग राज्य बनाने की मांग की थी। जिसके बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल शिवसेना सहित विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी ने अणे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया ‌था। विपक्ष ने अणे के बयान को लेकर सोमवार को विधानसभा और विधान परिषद में कामकाज नहीं होने दिया।
वहीं, शिवसेना भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आ गई और शिवसेना के मंत्रियों ने अणे को पद से हटाए बिना कैबिनेट की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस हंगामे के बाद भाजपा के एक नेता ने बताया था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अणे को अपना पद छोड़ने के लिए कह सकते हैं।

शिवसेना ने श्रीहरि अणे को महाराष्ट्र का ओवैसी बताते हुए कहा है कि जिस तरह से एमआईएम के औवैसी बंधु देश के टुकड़े करने का प्रयास कर रहे हैं, उसी तरह राज्य के महाधिवक्ता महाराष्ट्र के टुकड़े करने की बयानबाजी कर रह रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल एवं एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने अणे को निलंबित किए जाने की मांग की थी।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अणे को पदमुक्त किए जाने तक सदन नहीं चलने देंगे। अणे इससे पहले विदर्भ को अलग राज्य बनाने के लिए जनमत संग्रह कराए जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि उनके उस बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उस समय उनका बचाव करते हुए कहा था कि अलग राज्य के गठन का अधिकार संसद और केंद्र सरकार का है, इसलिए उन्हें त्यागपत्र देने की जरूरत नहीं है।

जारवा आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ना उनके वजूद के लिए खतरा है और उन्हें उनके हाल पर छोड़ना भी

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सुदूर अंडमान में हुई एक हत्या ने इन दिनों पुलिस-प्रशासन के सामने एक दुविधा खड़ी कर दी है. पांच महीने के इस बच्चे की हत्या नवंबर 2015 में हुई थी. लेकिन हत्या के आरोपी को गिरफ्तार करने को लेकर पुलिस अभी तक असमंजस में है.

इसकी वजह भी है. यह हत्या 300 वर्ग मील के दायरे में सिमट चुकी जारवा आदिवासी जनजाति के इलाके में हुई है. 50 हजार साल पहले अफ्रीका से भारत आई इस जनजाति में अब करीब 400 लोग ही बचे हैं और वे अभी भी लगभग उसी तरीके से रहते हैं जैसे हजारों साल पहले रहते थे. जारवाओं की आदिम संस्कृति को संरक्षण देने के उद्देश्य से उन्हें विशेष दर्जा मिला हुआ है. पुलिस को उनके मामलों में दखल देने की इजाजत नहीं है.

खबरों के मुताबिक पांच महीने के इस बच्चे की हत्या इसलिए हुई कि वह मिश्रित नस्ल का था. फिलहाल अधिकारी बहुत फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं. अभी तक मामले में दो बाहरी लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें महिला से बलात्कार का आरोपित और बच्चे का संभावित पिता भी शामिल है. दूसरा आरोपित वह है जिसने उस आदिवासी को शराब पिलाई जिस पर हत्या का शक है.

जारवा समुदाय समय-समय पर चर्चा में आता रहता है. कुछ साल पहले ब्रिटेन के अखबार द ऑब्जर्वर द्वारा जारी एक वीडियो के बाद भी यह समुदाय सुर्खियों का विषय बना था. वीडियो में कुछ पर्यटकों के सामने जारवा महिलाएं नाचती हुई दिखाई दे रही थीं. पर्यटकों के साथ एक पुलिसवाला भी था जो कुछ खाने के सामान के बदले इन महिलाओं को नाचने के लिए कह रहा था. मानवाधिकार संगठनों ने जारवा आदिवासियों के साथ हो रहे इस बर्ताव को रोकने के लिए भारत सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की थी. इस घटना के बाद पिछले चार सालों में भारत सरकार और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान के प्रशासन कुछ सख्ती जरूरी दिखाई है लेकिन आज भी अंडमान में अघोषित रूप से जारवा आदिवासियों की ह्यूमन सफारी जारी है.
बीते साल अंडमान ट्रंक रोड (एटीआर) पर भी विवाद हुआ था जो इन आदिवासियों के निवास क्षेत्र से गुजरती है. यह रोड उत्तरी अंडमान को दक्षिणी अंडमान से जोड़ती है. जारवा दक्षिण अंडमान में रहते हैं. इनकी मुख्य बसाहट के चारों तरफ पांच किमी का क्षेत्र सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है. यह इलाका केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी पोर्ट ब्लेयर और बरतांग के बीच में है. द्वीप समूह आने वाले पर्यटक एटीआर से ही सफर तय करते हैं. इस दौरान उनका सामना जारवा आदिवासियों से होता रहता है.

एटीआर से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए आदिवासियों की तस्वीरें उतारने और उन्हें कुछ भी देने की मनाही है. लेकिन यह प्रतिबंध कभी कड़ाई से लागू नहीं किया गया. एक अनुमान के मुताबिक हर साल यहां तकरीबन दो लाख पर्यटक आते हैं और इनमें से ज्यादातर को जारवा आदिवासियों के ‘अजूबा’ होने की जानकारी होती है. पिछले कई सालों से ऐसी खबरें आती रही हैं कि स्थानीय टूर एजेंट और गाइड पर्यटकों से पैसा लेकर उन्हें जारवा आदिवासी दिखाने ले जाते हैं. पर्यटकों द्वारा इन्हें खानेपीने का सामान, जिसमें तंबाकू से लेकर शराब तक शामिल है, देने के मामले भी उजागर हुए हैं. मानवशास्त्री कहते हैं कि तकरीबन 50 हजार साल से मुख्य समाज से कटकर जंगल के बीच रह रहे ये आदिवासी अब शराब और तंबाकू के लती बन रहे हैं.
इस आदिवासी समुदाय का मुख्य समाज से कभी संबंध नहीं रहा इसलिए इनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता आधुनिक बीमारियों के सामने शून्य है.

इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर जनवरी, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एटीएआर के संरक्षित क्षेत्र वाले हिस्से को बंद करने का आदेश दे दिया था. लेकिन अंडमान में इसका विरोध होने लगा. दरअसल यह 287 किमी लंबी सड़क इस द्वीपसमूह की जीवनरेखा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अंडमान प्रशासन ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह जारवा आदिवासियों के संरक्षण के लिए नए नियम बनाएगा और उन्हें सख्ती से लागू करेगा. इसके बाद एटीआर पर लगी आवागमन की रोक खत्म हो गई. साथ में जारवा आदिवासियों की ह्यूमन सफारी फिर से चलने लगी, लेकिन सावधानी से.
अंडमान-निकोबार में एक समय मूल जनजातियों के पांच समूह पाए जाते थे. आज इनमें से सिर्फ चार बचे हैं. इनमें भी जारवा आदिवासियों की संख्या सबसे ज्यादा है. लंबे अरसे तक जारवा आदिवासियों की छवि आक्रामक बनी रही है. कहा जाता है कि 1950 के दशक में जब अंडमान ट्रंक रोड बन रही थी तब इन्होंने सड़क निर्माण में लगे मजदूरों पर हमले कर कुछ लोगों की हत्या कर दी थी. यह समुदाय 1997 में पहली बार मुख्य धारा के समाज के संपर्क में आया. तब एक जारवा लड़का सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था. इसका इलाज पोर्टब्लेयर के अस्पताल में हुआ. जहां उसने थोड़ी बहुत हिंदी सीख ली थी. इसके जरिए जारवा आदिवासियों के बारे में कई जानकारियां मिलीं है. यह लड़का कुछ समय के बाद अपने मूल समुदाय में लौट गया. इस घटना के बाद जारवा और मुख्य समाज के बीच कुछ हद तक दोस्ताना संबंध बने हैं.

केंद्र सरकार ने जारवा जनजाति को 1956 के एक कानून के हिसाब से संरक्षित घोषित किया है. वह समय-समय पर अंडमान प्रशासन के जरिए इनके लिए नीतियां भी बनाती रही हैं. लेकिन इस सब के बीच यह बहस भी लगातार चलती रही है कि इस जनजाति को कैसे बचाया जाए. दुनियाभर में जनजातियों को बचाने के दो ही तरीके अपनाए जाते हैं. इनमें पहला है कि उन्हें जागरूक करके धीरे-धीरे मुख्यधारा में शामिल किया जाए. दूसरा तरीका है कि उनके लिए संरक्षित क्षेत्र बनाकर उनके समाज में न्यूनतम हस्तक्षेप किया जाए. जारवा आदिवासियों को बचाने का पूरा अभियान भी इस समय इन्हीं दो बिंदुओं के बीच उलझा हुआ है. इन दोनों विकल्पों के पक्ष और विपक्ष में कई तरह के तर्क दिए जाते हैं.
जो लोग जारवा आदिवासियों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सरकारी कोशिशों को बढ़ाने की बात करते हैं उनका मानना है कि देश की कई जनजातियों का अस्तित्व इसी तरह से बचा है. अंडमान-निकोबार से भाजपा के सांसद विष्णु पांडा रे इसके सबसे बड़े समर्थक हैं. उनका कहना है कि इन लोगों को शिक्षित करके मुख्यधारा के समाज से जोड़ना चाहिए तभी ये बच सकते हैं. इस वर्ग का मानना है कि जारवा इलाके को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर देने से आप उन तक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंचा सकते. ऐसे में उनकी आबादी किसी भी समय संक्रामक बीमारियों की चपेट में आकर पूरी तरह खत्म हो सकती है.

मानवाधिकार संगठनों से लेकर सरकार तक में एक बड़ा तबका है जो जारवा आदिवासियों के सामाजिक तानेबाने में किसी भी तरह के हस्तक्षेप के सख्त खिलाफ है. ये लोग बाहरी लोगों और पर्यटकों से इनका संपर्क खतरनाक मानते हैं. सोसाइटी फॉर अंडमान-निकोबार इकोलॉजी (सेन) संगठन से जुड़े समीर आचार्य एक रिपोर्ट में कहते हैं कि पर्यटकों के कारण यह जनजाति नष्ट होने की कगार पर पहुंच रही है क्योंकि पर्यटक इन लोगों को खाने का सामान देते हैं जिससे आदिवासी बीमार पड़ रहे हैं. सर्वाइवल इंटरनेशनल का कहना है कि 50 हजार साल से यह जनजाति खुद को अपने में सीमित रखे हुए हैं इसलिए इनमें आधुनिक लोगों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया व वायरस से लड़ने की क्षमता नहीं है. यदि जारवा आधुनिक लोगों के संपर्क में आते हैं तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

मानवाधिकार संगठन इसके लिए ग्रेट अंडमानी जनजाति का उदाहरण देते हैं जो बीते सालों में मुख्यधारा के समाज से काफी घुलमिल गई थी. लेकिन बीमारियों और शराब की लत में पड़कर यह जनजाति अब लगभग खत्म हो चुकी है. माना जाता है कि पूरे द्वीप समूह पर इस समय ग्रेट अंडमानी जनजाति के लोगों की तादाद 50 से ज्यादा नहीं है.

बहस के इन दोनों बिंदुओं के बीच केंद्र सरकार ने 2004 में जारवाओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष नीति बनाई थी. इसमें तय किया गया है जब तक इस जनजाति को बचाने से जुड़े अध्ययन पूरे नहीं हो जाते सरकार अपनी तरफ से इन लोगों के जीवन में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगी. केंद्र सरकार फिलहाल इसी नीति पर कायम है. लेकिन दूसरी तरफ पर्यटन के नाम पर अभी-भी जारवा आदिवासियों को बाहरी लोगों के मेलजोल का मौका-मिल रहा है. इस समय जनजाति को बचाने की किसी भी नीति पर पूरी तरह अमल नहीं हो पा रहा है.

हो सकता है एक बच्चे की हत्या के इस मामले के बाद जारवा क्षेत्र में पर्यटन पर लगी पाबंदियां और कड़ी हो जाएं. यह कदम जारवा आदिवासियों की मानवीय गरिमा तो बचा लेगा लेकिन उनके अस्तित्व का सवाल अभी-भी पहले की तरह अनुत्तरित रहेगा.

हरीश रावत ने किया सरकार बनाने का दावा, पहुंचे राजभवन

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प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के चंद घंटों के अंदर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार बनाने का दावा किया है। इस संबंध में रावत ने राज्यपाल को पत्र दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री रावत पांच विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे थे।

राज्यपाल से भेंट न होने के कारण रावत ने राजभवन में विशेष कार्याधिकारी को पत्र दिया। इसमें 28 मार्च को सदन के फ्लोर पर बहुमत साबित करने का दावा किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में कहा है कि ‘आपने मुझे 28 मार्च को विधानसभा सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दिया था।

रावत ने कहा कि उनके पास पूर्ण बहुमत है वह राज्यपाल की आज्ञा के अनुपालन में सोमवार को सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे। इसके लिए उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्हें बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिला और राष्ट्रुपति शासन लागू कर दिया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री रावत के साथ वित्त और संसदीय कार्य मंत्री रहीं इंदिरा हृदयेश, विधायक हेमेश खर्कवाल, गणेश गोदियाल, मनोज तिवारी, अनुसुइया प्रसाद मैखुरी तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय रहे।

उत्तराखंड में लगाया गया राष्ट्रपति शासन, हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है कांग्रेस

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देहरादून: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। केंद्र सरकार ने बीती रात कैबिनेट की बैठक के बाद राष्ट्रपति से इसके लिए सिफ़ारिश की थी जिसे राष्ट्रपति ने मान लिया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि वह केंद्र के इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।

केंद्र सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा गई थी और विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त हो रही थी जिसे देखते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला किया गया है।
विधानसभा को भंग नहीं किया गया है बल्कि निलंबित रखा गया है। उधर, कांग्रेस और ख़ासतौर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे संविधान और लोकतंत्र की हत्या बताया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि धारा 356 के प्रयोग का इससे बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता है। पिछले नौ दिन से हर दिन संविधान के प्रावधानों की हत्या हो रही थी।
नौ दिन पहले कांग्रेस के नौ विधायकों की बग़ावत का पटाक्षेप उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के तौर पर हुआ। राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट की सिफ़ारिश राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूर कर ली। ये फ़ैसला उत्तराखंड विधानसभा में बहुमत परीक्षण से ठीक एक दिन पहले हुआ।

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा चुकी थी।

जेटली ने कहा कि संविधान में लिखा है कि जब बजट फेल होता है तो इस्तीफ़ा देना होता है। स्वतंत्र भारत में पहला उदाहरण है जब एक एक फेल्ड बिल को बिना वोट लिए पारित होने की घोषणा कर दी गई। 18 तारीख़ के बाद से जो सरकार चली है वो असंवैधानिक है।

उधर, मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे लोकतंत्र और संविधान की हत्या बताते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

रावत ने कहा कि शायद ही ऐसा कोई उदाहरण जिसे बहुमत सिद्ध करने से एक दिन पहले ही बर्ख़ास्त कर दिया जाए। सरकार का बहुमत विधानसभा में तय होना चाहिए था। ऐसी क्या जल्दबाज़ी थी कि सरकार को भंग कर दिया गया।

अरुण जेटली ने ये भी कहा कि विधानसभा स्पीकर ने बीजेपी के एक बाग़ी विधायक के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की जबकि वो कांग्रेस के नौ बाग़ी विधायकों के ख़िलाफ़ मनमाने तरीके से दल बदल कानून का प्रयोग कर रहे थे।

जेटली ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची है जिसका डिसक्रिमिनेटरी तरीके से प्रयोग हुआ। ये पहला उदाहरण है स्वतंत्र उदाहरण में कि एविडेंस आया हो और अपने मुंह से मुख्यमंत्री जी हॉर्स ट्रेडिंग का प्रयास कर रहे हों।

राष्ट्रपति शासन के ऐलान के बावजूद उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर रहे गोविंद सिंह कुंजवाल ने बाग़ी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का ऐलान कर दिया।
उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि हमें राष्ट्रपति शासन की कोई सूचना नहीं मिली है।

साफ़ है कि उत्तराखंड की सियासत को लेकर खींचतान अभी बाक़ी है। विधानसभा को भंग नहीं किया गया है बल्कि निलंबित रखा गया है। ऐसे में राष्ट्रपति शासन के बावजूद किसी नई सरकार के गठन का विकल्प अभी खुला है। देखना है कि इसके लिए बीजेपी अगर पहल करती है तो कब।

उत्तराखंड में वसंत के मौसम में ही सियासी सरगर्मियों ने पारा काफ़ी बढ़ा दिया है। विधायकों की ख़रीदफ़रोख़्त के आरोपों के बीच बीते दो महीने में दूसरी बार किसी राज्य सरकार को बर्ख़ास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा है। हालांकि अरुणाचल में इसके बाद बीजेपी ने सरकार बना ली, लेकिन क्या उत्तराखंड में भी बाग़ियों के सहारे ऐसा करने की कोशिश होगी। ये एक बड़ा सवाल है।

मस्जिद से अजान के दौरान पीएम मोदी ने चुनावी भाषण से लिया कुछ विराम

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खड़गपुर (पश्चिम बंगाल): चुनावी जनसभा में तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चा की नीतियों पर बरसने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना भाषण उस समय रोक दिया, जब पास की मस्जिद से अजान की आवाज आने लगी। पश्चिम मिदनापुर जिले में यहां के बीएनआर मैदान पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए प्रचार के दौरान पीएम मोदी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही अजान शुरू हुई, उन्होंने अपना भाषण रोक दिया और अजान खत्म होने की प्रतीक्षा की।

मैदान पर मौजूद हजारों लोगों ने उनसे बोलने का आग्रह किया, लेकिन पीएम मोदी ने हाथ के इशारे से उनसे शांत रहने को कहा।

भाषण शुरू करने पर उन्होंने कहा, “क्षमा करें, अजान हो रही थी। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से किसी की इबादत में खलल पड़े। इसलिए मैं कुछ मिनट के लिए रुक गया।”
इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चा पर बंगाल को तबाह करने का आरोप लगाया।

नवंबर 2014 में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता में भाषण के दौरान अजान शुरू होने पर इसी तरह भाषण रोक दिया था।

कोयला घोटाले में बड़ा फैसला; झारखंड इस्पात के दो निदेशक दोषी करार, 31 मार्च को सजा का ऐलान

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नई दिल्ली: सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के एक मामले में झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के दो निदेशकों आर एस रूंग्टा और आर सी रूंग्टा को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आर एस रूंग्टा और आर सी रूंग्टा को भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए उन्हें हिरासत में लेने के आदेश दिए। अदालत ने इस मामले में सजा की मात्रा पर दलीलों की सुनवाई के लिए 31 मार्च का दिन तय किया है। यानी दोषियों को सजा 31 मार्च को सुनाई जाएगी।

गौर हो कि सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने पिछली 21 मार्च को मामले में फैसला सुनाने के लिये 28 मार्च की तारीख तय की थी। कोयला ब्लाक आवंटन घोटाला मामले में यह पहला प्रकरण है जिसमें विशेष अदालत अपना फैसला सुनाया है। विशेष अदालत कोयला घोटाला मामले से जुड़े सभी पहलुओं को देख रही है।

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि कि जेआईपीएल और तीन अन्य कंपनियों- मेसर्स इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग लि., मेसर्स आधुनिक एलॉयज एंड पावर लि. तथा मेसर्स पवनजय स्टील तथा पावर लि. को संयुक्त रूप से धादू कोयला ब्लाक आबंटित किये गये। लेकिन न तो जांच समिति ने आवेदनकर्ता कंपनी के दावे का सत्यापन किया और न ही राज्यमंत्री (एमओएस) ने आवेदनकर्ता कंपनियों के आकलन के लिये कोई तौर-तरीके अपनायें। अदालत ने इन पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा चलाया है।

'भारतीय जासूस' के बयान को भारत ने किया खारिज, वीडियो पर उठाए सवाल

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भारत और पाकिस्तान के बीच मंगलवार को तब वाकयुद्ध शुरू हो गया जब पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार किए गए भारतीय नौसेना के एक पूर्व अधिकारी का एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने देश के इशारे पर बलूचिस्तान में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने का कथित इकबालिया बयान देने का दावा किया। हालांकि, भारत ने इस आरोप को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि हो सकता है कि उन्हें ईरान से अपह्त कर लिया गया हो।

भारत ने साथ ही पाकिस्तान से भारतीय नागरिक को दूतावास तक पहुंच मुहैया कराने की मांग की है।

पाकिस्तानी सेना के इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम बाजवा और संघीय सूचना मंत्री परवेज राशिद ने वीडियो जारी करने के लिए इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन किया। उन्होंने कहा कि कुलभूषण यादव ने अशांत बलूचिस्तान प्रांत में संकट पैदा करने के लिए भारतीय गुप्तचर एजेंसी रॉ के लिए काम करने की बात स्वीकार की है।
यादव को हाल ही में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था और पाकिस्तान ने उन्हें भारतीय नौसेना का अधिकारी बताया है। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि नौसेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेने के बाद से उनका सरकार से कोई सम्पर्क नहीं है। यद्यपि बाजवा ने दावा किया कि यादव अब भी सेवारत अधिकारी हैं जिन्हें 2022 में सेवानिवृत्त होना है।
विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में मंगलवार रात जारी एक बयान में कहा, हमने पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी का जारी वीडियो देखा है, जो ईरान में व्यापार कर रहे थे तथा जो अस्पष्ट परिस्थितियों में पाकिस्तान की हिरासत में हैं। वीडिया में यह व्यक्ति जो बयान दे रहा है उसका वास्तव में कोई आधार नहीं है। व्यक्ति जो यह दावा करता है कि वह ये बयान अपनी इच्छा से दे रहा है, न केवल सहज विश्वास को चुनौती देता है बल्कि स्पष्ट तौर पर सिखाये जाने का संकेत करता है।
बयान में कहा गया है, सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है कि यह व्यक्ति हमारे इशारे पर पाकिस्तान में विध्वंसकारी गतिविधियों में लिप्त था। हमारी जांच से यह खुलासा होता है कि ईरान से एक वैध व्यापार संचालित करने के दौरान उसे परोक्ष रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
इसमें कहा गया है, हम जहां इस पहलु की आगे भी जांच कर रहे हैं, अब उसकी पाकिस्तान में मौजूदगी के साथ ही ईरान से उसके अपहरण की आशंका सवाल खड़े करती है। यह तभी स्पष्ट होगा जब हमें उस तक दूतावास पहुंच मुहैया करायी जाए तथा हम पाकिस्तान सरकार से आग्रह करते हैं वह हमारे अनुरोध पर तत्काल जवाब दें।
बयान में आगे कहा गया है, यहां यह ध्यान देना प्रासंगिक है कि हमारे अनुरोध के बावजूद हमें किसी विदेशी देश में हिरासत में रखे गए एक भारतीय नागरिक तक दूतावास पहुंच मुहैया नहीं करायी गई है जो एक स्वीकार्य अंतरराष्ट्रीय प्रथा है।

यादव के मामले का उल्लेख करते हुए बाजवा ने भारत पर पाकिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में भारत के हस्तक्षेप का इससे स्पष्ट सबूत नहीं हो सकता।

पाकिस्तान का दावा है कि यादव ने ईरान के चाबहार में एक छोटा कारोबार खड़ा किया था और कराची तथा बलूचिस्तान में पाक विरोधी गतिविधियों को निर्देशित किया।
बाजवा ने राशिद के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और कबाड़ कारोबारी के रूप में गदानी में काम कर रहा था।