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ISIS साजिश का पर्दाफाश : 32 वाहनों को IED से लैस करने की योजना, कार में विस्फोटक बरामद

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नई दिल्ली/फरीदाबाद :  दिल्ली के लाल किले के पास हाल ही में हुए कार धमाके से जुड़ी एक खतरनाक आतंकी साजिश का खुलासा खुफिया एजेंसियों ने गुरुवार को किया है। सूत्रों के अनुसार, संदिग्धों ने देश के कई शहरों में एक साथ विस्फोटों को अंजाम देने के लिए करीब 32 पुराने वाहनों को विस्फोटक से लैस करने की योजना बनाई थी। यह साजिश ISIS की शाखा ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ से जुड़ी बताई जा रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा दर्शाती है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।

साजिश का खुलासा: 32 वाहनों पर निशाना

खुफिया सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों ने हमलों के लिए एक हुंडई i20 और एक फोर्ड इकोस्पोर्ट वाहन को पहले ही मॉडिफाई करना शुरू कर दिया था। इनमें इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) लगाने की तैयारी थी। जांच आगे बढ़ने पर यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि साजिश का दायरा कहीं अधिक बड़ा था—संदिग्धों ने 32 अन्य पुराने वाहनों को विस्फोटक से लैस करने की तैयारी की थी। इन वाहनों को विभिन्न शहरों में एक साथ भेजकर सिलसिलेवार धमाके करने की योजना थी।

जांच टीम अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इसी तरह के और वाहन छिपे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, आठ संदिग्ध चार अलग-अलग स्थानों पर हमलों की तैयारी कर रहे थे, और प्रत्येक को एक विशिष्ट शहर सौंपा गया था। ये संदिग्ध एक साथ कई IED लेकर हमले करने की फिराक में थे।

मुख्य आरोपी और फंडिंग का खेल

इस साजिश के केंद्रीय चरित्रों में डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, डॉ. उमर और शाहीन के नाम प्रमुख हैं। इनमें से डॉ. मुजम्मिल पर 2021-2022 के बीच मारे गए आतंकवादियों के सहयोगियों से संपर्क बनाए रखने का आरोप है। जांच में सामने आया कि मुजम्मिल को इरफान उर्फ मौलवी ने ISIS शाखा ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ से जोड़ा था। 2023-2024 में बरामद हथियारों का इस्तेमाल इस मॉड्यूल ने स्वतंत्र आतंकी समूह गढ़ने के लिए किया था।

फंडिंग के मामले में भी सनसनीखेज खुलासा हुआ। आरोपियों ने मिलकर करीब 20 लाख रुपये नकद जुटाए, जो डॉ. उमर को सौंपे गए। इस रकम से गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से 20 क्विंटल NPK उर्वरक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम का मिश्रण) खरीदा गया, जिसकी कीमत लगभग 3 लाख रुपये थी। NPK उर्वरक का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री बनाने के लिए किया जाता है, जो IED तैयार करने के इरादे को साफ करता है। जांच एजेंसियां अब इन पुराने आतंकी मामलों से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं।

फरीदाबाद में लाल इकोस्पोर्ट कार से सनसनी

साजिश का एक अहम सबूत फरीदाबाद के खंदावली गांव में मिला। मंगलवार सुबह खेतों में खड़ी एक लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार में विस्फोटक बरामद होने से इलाके में हड़कंप मच गया। यह वही कार है, जिसका इस्तेमाल दिल्ली के लाल किले धमाके में किया गया था। सूचना मिलते ही NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड), फोरेंसिक टीम और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा।

कार के आसपास के 10 घरों को खाली करा लिया गया और पूरे इलाके को सील कर दिया गया। 400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जो किसी भी संभावित धमाके से निपटने के लिए तैयार हैं। जांच में पता चला कि कार को दो पुरुषों और एक महिला ने खड़ा किया था, जिनमें फहीम नाम के व्यक्ति का साला (पेशे से कार मिस्त्री) शामिल है। फहीम का ससुराल धौज गांव में है, जहां अल फलाह यूनिवर्सिटी स्थित है। आशंका है कि सर्विस के दौरान फहीम के साले का संपर्क यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और संदिग्ध आतंकियों से हुआ।

सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट, जांच तेज

इस खुलासे के बाद दिल्ली-एनसीआर समेत प्रमुख शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक है, और चप्पे-चप्पे पर पुलिस पहरा है। स्थानीय लोग भयभीत हैं, जबकि विस्फोटक की प्रकृति और मकसद का पता लगाने की कोशिश जारी है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क भविष्य में और बड़े हमलों की योजना बना रहा था।

पुलिस और NIA संयुक्त रूप से संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। इस साजिश से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है, और आगे गिरफ्तारियां होने की संभावना है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को हाई अलर्ट जारी किया है।

हाईकोर्ट ने रद्द किया IO के वेतन से 500 रुपये कटौती का आदेश, कहा- बिना सुनवाई के दंड नहीं

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नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, टिहरी गढ़वाल द्वारा एक जांच अधिकारी (IO) के वेतन से 500 रुपये की कटौती कर मुआवजा देने के आदेश को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी सेवक के वेतन से दंडात्मक कटौती बिना सुनवाई का अवसर दिए नहीं की जा सकती।

मामला 2013 का है। उप-निरीक्षक सरिता शाह ने टिहरी गढ़वाल में दर्ज एक बलात्कार के मामले की जांच की थी। पीड़िता नाबालिग थी और आरोप उसके पिता व चाचा पर था। IO सरिता शाह ने जांच पूरी कर धारा 376 एवं 506 IPC के तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों को बरी कर दिया और IO पर टिप्पणी की कि उन्होंने एक आरोपी को निराधार फंसाया एवं गिरफ्तार किया। सत्र न्यायाधीश ने धारा 358 CrPC के तहत IO को 500 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया और SP टिहरी को निर्देश दिया कि यह राशि सरिता शाह के वेतन से काटी जाए।

सरिता शाह ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि:

  • धारा 358 CrPC के प्रावधान IO पर लागू नहीं होते।
  • मुआवजा देने का अधिकार मजिस्ट्रेट को है, सत्र न्यायाधीश को नहीं।
  • वेतन कटौती सेवा करियर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, इसलिए बिना सुनवाई के ऐसा आदेश असंवैधानिक है।
  • नामों में मामूली भ्रम के आधार पर IO को दोषी ठहराना उचित नहीं था।

उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए सत्र न्यायाधीश का पूरा आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन अनिवार्य है। बिना पक्ष सुने दंड नहीं दिया जा सकता। IO की टिप्पणी व वेतन कटौती का आदेश रद्द।

लाल किला धमाका मॉड्यूल बेनकाब: नूंह में छापेमारी, डायरियों से ‘ऑपरेशन’ के गुप्त कोड उजागर

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मेवात के नूंह में अमोनियम नाइट्रेट खरीद नेटवर्क की कड़ियाँ अब तेजी से खुल रही हैं। स्पेशल सेल की टीम ने मंगलवार को नूंह में कई फर्टिलाइज़र दुकानों पर छापेमारी की। टीम ने सभी दुकानों की वीडियो बनाकर जम्मू-कश्मीर पुलिस को भेजी, ताकि आरोपी मुजम्मिल उन दुकानों की पहचान कर सके, जहां से उसने और उमर ने फर्टिलाइज़र के नाम पर रासायनिक पदार्थ खरीदे थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि लाल किला विस्फोट मामले के आरोपी—डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन—ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपये नकद जुटाए थे, जिन्हें बाद में उमर को सौंपा गया।

इधर, डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजम्मिल की डायरियाँ भी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लग गई हैं। दो डायरियाँ अलफलाह यूनिवर्सिटी कैंपस से बरामद हुईं—उमर के रूम नंबर 4 और मुजम्मिल के रूम नंबर 13 से। इसके अलावा एक और डायरी धौज में उस कमरे से मिली है, जहाँ से 360 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। यह स्थान यूनिवर्सिटी से महज़ 300 मीटर की दूरी पर है।

पकड़ी गई डायरियों और नोटबुक में कई कोड वर्ड्स मिले हैं, जिनमें 8 से 12 नवंबर की तारीखों का संदर्भ दर्ज है। सूत्रों के अनुसार, डायरी में ‘ऑपरेशन’ शब्द का कई बार उपयोग किया गया है, जो जांच एजेंसियों को संभावित बड़ी साजिश की ओर संकेत देता है। जांच एजेंसियां अब इन कोड वर्ड्स और नकद लेन-देन को जोड़कर पूरे मॉड्यूल की परतें खोलने में जुटी हैं।

देहरादून में बेटों की गुंडागर्दी पर डीएम सख्त — कैंसर पीड़ित मां-बाप को घर से निकालने वाले बेटों पर जिला बदर की कार्रवाई शुरू

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देहरादून :  देहरादून में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। दो जवान बेटों द्वारा अपनी कैंसर पीड़ित मां और बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट और गाली-गलौज करने की शिकायत पर जिलाधिकारी देहरादून ने दोनों बेटों के खिलाफ ‘गुंडा अधिनियम’ के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। डीएम ने दोनों को 25 नवम्बर को न्यायालय में पेश होने के आदेश दिए हैं।

जनता दर्शन में बुजुर्ग दंपती ने सुनाई दर्दभरी कहानी

10 नवम्बर को आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में देहरादून निवासी गीता देवी और उनके पति राजेश ने जिलाधिकारी से मिलकर बताया कि उनके दोनों बेटे उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। शराब के नशे में आए दिन मारपीट और गाली-गलौज करते हैं। गीता देवी कैंसर से जूझ रही हैं, फिर भी बेटों के अत्याचार से राहत नहीं। परेशान होकर दोनों बुजुर्ग अब किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं।

कोर्ट में तलब किए दोनों बेटे

डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक कार्रवाई प्रारंभ की। दोनों बेटों को नोटिस जारी कर 25 नवम्बर 2025 को डीएम कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि “जो भी शांति व्यवस्था भंग करेगा या बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”

बुजुर्गों को मिल रहा सहारा

जिलाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जहाँ डीएम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप कर पीड़ित बुजुर्गों को राहत दी है। कुछ मामलों में समझौता कराते हुए परिवारों को टूटने से बचाया गया है, वहीं गंभीर मामलों में आरोपियों को जिला बदर तक किया गया है।

जनता दर्शन बन रहा है ‘न्याय का दरवाज़ा

देहरादून में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम अब आम जनता के लिए एक न्याय का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। विशेष रूप से बुजुर्गों और महिलाओं के मामलों में डीएम की तत्परता से पीड़ितों को राहत मिल रही है।

धामी कैबिनेट के 12 बड़े फैसले: उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के लिए समिति, आपदा पीड़ितों को बढ़ी राहत

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई प्रदेश कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनमें उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण, आपदा पीड़ितों को राहत और देवभूमि परिवार योजना जैसे अहम फैसले शामिल हैं।

उपनल कर्मचारियों के लिए राहत

कैबिनेट ने उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतनमान से जुड़े मामलों पर विचार करते हुए एक मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति दो माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

साथ ही, बड़ा फैसला लेते हुए यह भी तय किया गया कि अब उपनल के माध्यम से विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए उपनल का विदेश मंत्रालय में पंजीकरण कराया जाएगा।

आपदा पीड़ितों को बढ़ी राहत राशि

राज्य में हाल की आपदाओं में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिजनों को अब चार लाख के स्थान पर पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं, पक्के मकान के पूरी तरह ध्वस्त होने पर भी पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

संविदा और दैनिक वेतनभोगियों के लिए बनी समिति

कैबिनेट ने दैनिक वेतन, संविदा और तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति कटऑफ डेट तय कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, ताकि नियमितीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित ढंग से लागू किया जा सके।

देवभूमि परिवार योजना को मिली मंजूरी

बैठक में प्रदेश में देवभूमि परिवार योजना लागू करने का भी फैसला लिया गया। इस योजना के तहत उत्तराखंड में निवासरत परिवारों की एकीकृत परिवार आईडी बनाई जाएगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र परिवारों तक पहुँच सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ कर्मचारियों के हितों की रक्षा और आपदा प्रभावितों को त्वरित राहत देना है।

उत्तराखंड : इनकम टैक्स की रेड, बिल्डरों और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे

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देहरादून में आयकर विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग ने बुधवार सुबह बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की अलग-अलग टीमें शहर के नामी बिल्डरों और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही हैं। ये रेड सुबह करीब सात बजे से शुरू हुईं और अभी भी जारी हैं।

जांच के दायरे में प्रसिद्ध बिल्डर राकेश बत्ता, कमल अरोड़ा, इंदर खत्री, कसीगा स्कूल के संचालक रमेश बत्ता के साथ-साथ शराब कारोबारी कमल अरोड़ा और प्रदीप वालिया शामिल हैं। टीमें मुख्य रूप से एमकेपी रोड, द्वारका स्टोर क्षेत्र और राजपुर रोड स्थित उनके घरों व दफ्तरों पर डटी हुई हैं। अधिकारी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई टैक्स चोरी, काले धन और अवैध लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच का हिस्सा है। आयकर विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। छापेमारी वाले इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और आम लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी गई है। शहर में हड़कंप का माहौल है और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।

2027 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक : तीन दिग्गजों को तीन बड़ी जिम्मेदारियां

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उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस हाईकमान ने बड़ा दांव खेला है। राष्ट्रिय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गणेश गोदियाल को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का अध्यक्ष नियुक्त किया। साथ ही, प्रीतम सिंह को चुनाव प्रचार समिति (कैंपेन कमिटी) और हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति (इलेक्शन मैनेजमेंट कमिटी) की कमान सौंपी गई। निवर्तमान अध्यक्ष करण माहरा को कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) में स्पेशल इनवाइट बनाकर सम्मानजनक विदाई दी गई। इसके अलावा, 27 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का संदेश दिया गया।

यह फेरबदल कोई साधारण बदलाव नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी है। उत्तराखंड में बीजेपी की लगातार दूसरी सरकार के बावजूद जनता में असंतोष बढ़ रहा है। बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार और UCC जैसे मुद्दों पर कांग्रेस हमलावर है। हाईकमान ने तीनों दिग्गजों को जोड़कर गुटबाजी खत्म करने और सभी क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने का प्लान बनाया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है। यह नियुक्तियां मिशन 2027 की मजबूत नींव हैं। अब देखना है कि तीन दिग्गज अपनी जिम्मेदारियां कैसे निभाते हैं और बीजेपी की सत्ता को चुनौती देते हैं या नहीं।

गणेश गोदियाल – PCC अध्यक्ष

गणेश गोदियाल उत्तराखंड कांग्रेस के अनुभवी नेता हैं। उन्होंने 2002 में थलीसैंण से पहली बार विधायक बनकर राजनीति में प्रवेश किया और भाजपा के दिग्गज रमेश पोखरियाल निशंक को हराया। 2012 में श्रीनगर से फिर जीते। 2021-2022 तक वह पहले भी PCC अध्यक्ष रह चुके हैं। हरीश रावत के करीबी माने जाने वाले गोदियाल गढ़वाल क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते हैं। 2022 चुनाव में हार के बाद इस्तीफा देने वाले गोदियाल को हाईकमान ने दोबारा कमान सौंपकर भरोसा जताया है। वह संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए जाने जाते हैं।

प्रीतम सिंह – कैंपेन कमिटी अध्यक्ष

प्रीतम सिंह कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ विधायकों में से एक हैं। चकराता से छह बार विधायक चुने गए। 1993 में पहली जीत के बाद 2002, 2007, 2012, 2017 और 2022 में लगातार सफलता। दो बार कैबिनेट मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके। नेता प्रतिपक्ष के रूप में बीजेपी सरकार पर तीखे हमले करते रहे। देहरादून जिले के मैदान और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी मजबूत पैठ है, साथ उत्तरकाशी की यमुनाघाटी में मजबूत पकड़ रखते हैं।

हरक सिंह रावत – इलेक्शन मैनेजमेंट कमिटी अध्यक्ष

डॉ. हरक सिंह रावत उत्तराखंड के सबसे विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली नेता हैं। 1991 में भाजपा से शुरूआत, उत्तर प्रदेश में सबसे कम उम्र के मंत्री बने। कई बार पार्टी बदली – भाजपा, बसपा, कांग्रेस, फिर भाजपा और 2022 में निष्कासित होने के बाद वापस कांग्रेस। कोटद्वार और रुद्रप्रयाग से विधायक, कई मंत्रालय संभाले। बूथ मैनेजमेंट और संसाधन प्रबंधन में माहिर। उनकी वापसी से कांग्रेस को गढ़वाल के पहाड़ व मैदानी दोनों क्षेत्र में फायदा मिलेगा।

राजनीतिक विश्लेषण: क्यों है यह मास्टरस्ट्रोक?

क्षेत्रीय संतुलन और गुटबाजी का अंत: गोदियाल गढ़वाल, प्रीतम मैदान-ग्रामीण और हरक सिंह रावत प्लेन्स-गढ़वाल में मजबूत। तीनों अलग-अलग गुटों से हैं, उन्हें जोड़कर हाईकमान ने एकता का संदेश दिया। पहले गुटबाजी से 2022 में हार हुई थी, अब धड़ेबाजी खत्म होने की उम्मीद।

चुनावी तैयारी की मजबूती: जिला अध्यक्षों की एकसाथ नियुक्ति पहली बार हुई। बूथ स्तर तक संगठन मजबूत होगा। 2025 निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के बाद कांग्रेस को झटका लगा था, अब 2027 के लिए रणनीति तैयार।

Delhi Blast: दो कारों से आए थे ‘आतंकी’, क्या एक कार अभी भी राजधानी में घूम रही है?

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के ठीक सामने सोमवार शाम करीब 6:45 बजे एक आई-20 कार में हुआ भीषण धमाका आतंकी हमला साबित हुआ है। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी। धमाके में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 38 से अधिक घायल हैं।

मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी की मौत, डीएनए से होगी शिनाख्त

पुलिस के अनुसार, धमाका जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के लेधपोरा निवासी डॉ. उमर नबी भट (35) ने अंजाम दिया। फरीदाबाद के अल फलाह मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर उमर खुद इस विस्फोट में मारा गया। उसका शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया है, इसलिए पहचान के लिए उसकी मां का डीएनए सैंपल लिया गया है।

सीसीटीवी फुटेज में नकाबपोश उमर ही कार चलाता दिख रहा है। वह कार में अकेला था।

जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद का सफेदपोश मॉड्यूल बेनकाब

जांच से पता चला है कि उमर फरीदाबाद स्थित एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का सदस्य था, जिसके तार जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े हैं। यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।

सोमवार सुबह ही फरीदाबाद में छापों में 3,000 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था और तीन डॉक्टरों समेत आठ लोग गिरफ्तार किए गए थे। उमर पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही जगह बदलकर बच निकला था।

कार का 11 घंटे का रूट ट्रेस

  • उमर ने सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में करीब तीन घंटे बिताए।
  • वहां वह मोबाइल पर फरीदाबाद में अपने साथियों की गिरफ्तारी की खबरें पढ़ता रहा।
  • जांच एजेंसियों ने कार के पूरे 11 घंटे के रूट को सीसीटीवी से ट्रेस कर लिया है।

दो तरह के विस्फोटक बरामद, अमोनियम नाइट्रेट से ज्यादा खतरनाक दूसरा पदार्थ

घटनास्थल से दो जिंदा कारतूस और दो अलग-अलग विस्फोटकों के नमूने मिले हैं।

  • पहला: अमोनियम नाइट्रेट
  • दूसरा: अमोनियम नाइट्रेट से भी ज्यादा शक्तिशाली

फोरेंसिक टीम ने 40 से अधिक सैंपल इकट्ठा किए हैं। प्रारंभिक जांच में अमोनियम नाइट्रेट, डीजल और डेटोनेटर के मिश्रण की पुष्टि हुई है।

आत्मघाती हमला या बौखलाहट में विस्फोट?

एजेंसियां अभी इसे प्लान्ड सुसाइड अटैक नहीं मान रही हैं।

  • कार किसी लक्ष्य से टकराई नहीं, चलती हुई थी।
  • बम पूरी तरह तैयार नहीं था।
  • जमीन पर गड्ढा नहीं बना, न ही छर्रे या धातु के टुकड़े मिले।
  • कोई आईईडी नहीं लगा था।

अधिकारी मान रहे हैं कि गिरफ्तारी के डर से भागते वक्त घबराहट में विस्फोट हुआ होगा।

अब तक की गिरफ्तारियां

  • उमर के पिता गुलाम नबी भट, दो भाई और दोस्त सज्जाद हिरासत में।
  • कार देने वाला पुलवामा का तारिक गिरफ्तार।
  • कार की खरीद-फरोख्त से जुड़े तीन अन्य लोग पकड़े गए।
  • अल फलाह यूनिवर्सिटी के कुछ डॉक्टर सहकर्मी हिरासत में।
  • कश्मीर में चार लोग पकड़े गए, दो को दिल्ली लाया गया।

यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम में केस दर्ज

दिल्ली पुलिस ने यूएपीए की आतंकी साजिश वाली धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

दिल्ली हाई अलर्ट, बड़ी साजिश नाकाम

अगर विस्फोटक का सही इस्तेमाल होता तो नुकसान कहीं ज्यादा होता। समय पर कार्रवाई से बड़ी आतंकी वारदात टल गई। दिल्ली के सभी बॉर्डर, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और होटलों पर कड़ी चेकिंग जारी है।

दिल्ली सरकार का ऐलान

  • मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख
  • स्थायी रूप से अशक्त को ₹5 लाख
  • गंभीर घायलों को ₹2 लाख
  • सामान्य घायलों को ₹20,000

एनआईए अब पूरे मामले की तह तक जाएगी। देश भर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

दिल्ली धमाका: पुलवामा से फरीदाबाद तक फैला आतंकी मॉड्यूल बेनकाब, दो तरह के विस्फोटक बरामद

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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के लाल किले के सामने सोमवार शाम हुए भीषण कार धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जांच एजेंसियों ने मंगलवार को इसे आतंकी कृत्य मानते हुए मामले की कमान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी। धमाके में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्य आरोपी पुलवामा का डॉ. उमर नबी भट खुद विस्फोट में मारा गया।

मुख्य आरोपी उमर नबी की मौत, डीएनए से होगी शिनाख्त

पुलवामा के लेधपोरा निवासी डॉ. उमर नबी भट (आयु करीब 35 वर्ष) फरीदाबाद के अल फलाह मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर था। पुलिस के अनुसार, उमर ही वह नकाबपोश शख्स था जो आई-20 कार चला रहा था। शव क्षत-विक्षत होने के कारण उसकी मां का डीएनए सैंपल लिया गया है।

जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद का सफेदपोश मॉड्यूल

जांच में पता चला है कि धमाका फरीदाबाद स्थित सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसके तार जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े हैं। मॉड्यूल कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। सोमवार को फरीदाबाद में छापों में 3,000 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था, जिसमें तीन डॉक्टरों समेत आठ लोग गिरफ्तार हुए थे। उमर पुलिस छापे से भाग निकला था।

कार का 11 घंटे का रूट ट्रेस

सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि उमर कार में अकेला था। उसने सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में करीब तीन घंटे बिताए और फरीदाबाद में अपने साथियों की गिरफ्तारी की खबरें ऑनलाइन पढ़ता रहा। जांच एजेंसियों ने कार के 11 घंटे के रूट की पूरी जानकारी जुटा ली है।

दो तरह के विस्फोटक बरामद

घटनास्थल से दो कारतूस और दो तरह के विस्फोटकों के नमूने मिले हैं। एक अमोनियम नाइट्रेट है, जबकि दूसरा इससे भी ज्यादा शक्तिशाली बताया जा रहा है। फोरेंसिक टीम ने 40 से अधिक सैंपल इकट्ठा किए हैं। प्रारंभिक जांच में अमोनियम नाइट्रेट, ईंधन तेल और डेटोनेटर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है।

आत्मघाती हमला या बौखलाहट में विस्फोट?

एजेंसियां अभी इसे पूर्वनियोजित आत्मघाती हमला नहीं मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि उमर गिरफ्तारी के डर से भाग रहा था और घबराहट में विस्फोट हुआ हो सकता है। बम पूरी तरह तैयार नहीं था, कोई गड्ढा नहीं बना और न ही छर्रे या धातु के टुकड़े मिले। कार चलती हुई थी और आईईडी का इस्तेमाल नहीं हुआ।

पुलवामा से लेकर कश्मीर तक गिरफ्तारियां

  • उमर को कार देने वाला पुलवामा का तारिक गिरफ्तार।
  • उमर के पिता गुलाम नबी भट, दो भाई और दोस्त सज्जाद हिरासत में।
  • कार की खरीद-फरोख्त से जुड़े तीन अन्य लोग पकड़े गए।
  • अल फलाह विश्वविद्यालय के कुछ डॉक्टर सहकर्मी हिरासत में।
  • कश्मीर में चार लोग पकड़े गए, दो को दिल्ली लाया गया।

जैश की महिला शाखा की प्रमुख डॉ. शाहीन गिरफ्तार

लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद जैश-ए-मोहम्मद की महिला भर्ती शाखा जमात-उल-मोमिनात की सदस्य थी। वह पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में थी और खासकर छात्राओं को भर्ती करने का काम कर रही थी। उसका भाई डॉ. परवेज भी हिरासत में है।

बड़ी साजिश नाकाम, दिल्ली हाई अलर्ट पर

एजेंसियों का मानना है कि अगर विस्फोटक का सही इस्तेमाल होता तो नुकसान बहुत बड़ा होता। समय पर कार्रवाई से बड़ी आतंकी वारदात टल गई। दिल्ली में सभी बॉर्डर चेकपोस्ट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और होटलों पर कड़ी चौकसी बरती जा रही है।

दिल्ली सरकार का ऐलान

मृतकों के परिजनों को 10 लाख, स्थायी अशक्तों को 5 लाख, गंभीर घायलों को 2 लाख और सामान्य घायलों को 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम में केस दर्ज

दिल्ली पुलिस ने यूएपीए की आतंकी साजिश वाली धाराओं और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एनआईए अब पूरे मामले की गहन जांच करेगी।

उत्तराखंड कांग्रेस में बड़ा बदलाव: गणेश गोदियाल बने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत को मिली अहम जिम्मेदारी

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नई दिल्ली:  कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए गणेश गोदियाल को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।

नई नियुक्ति के साथ ही पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए दो अहम समितियों के अध्यक्ष भी घोषित किए हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि डॉ. हरक सिंह रावत को इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस पुनर्गठन को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पार्टी ने उनके कार्यकाल और योगदान की सराहना करते हुए धन्यवाद भी व्यक्त किया है।

इस फैसले को उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक रणनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठनात्मक बदलाव से कांग्रेस का फोकस अब चुनावी तैयारियों पर और तेज़ होने की उम्मीद है।