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हरिद्वार में शुरू हुआ पीएम मोदी का मिशन, 250 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

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गंगा को साफ रखने के लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत 1500 करोड़ से उत्तराखंड में 250 करोड़ की लागत की 43 योजनाओं का शिलान्यास बृहस्पतिवार को हरिद्वार में किया गया। इस परियोजना के तहत उत्तराखंड के उत्तरकाशी, गंगोत्री, यमुनोत्री, श्रीनगर, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ, बदरीनाथ में गंगा सफाई के लिए काम होगा।
इस मौके पर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री उमा भारती ने दावा कि अक्तूबर 2016 से गंगा सफाई का असर दिखाई देगा। वर्ष 2018 तक गंगा पूरी तरह से साफ हो जाएगी। कार्यक्रम के दौरान नमामि गंगे गान, वेबसाइट, एप भी लॉच किए गए।
बृहस्पतिवार को हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में योजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उमा भारती और महेश शर्मा ने योजना को मूर्त रूप देने की बात कही।
मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने योजनाओं में पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया, लेकिन योजना को आधी-अधूरी बताते हुए अन्य सहायक नदियों और अन्य प्रोजेक्ट शामिल करने की बात उठाई।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आश्वासन दिया कि गंगा के लिए मायके वालों को जो जिम्मेदारी दी गई है उसे वह बखूबी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में शिव के लिए वह विशुद्ध गंगाजल देंगे। उन्होंने नमामि गंगे के तहत शामिल किए गए 143 गांवों के अलावा पूरे प्रदेश के गांवों को जोड़ने की बात कही।
उन्होंने कहा कि जब तक योजना में प्रदेश के समस्त गांव और गंगा की सहायक नदियों को नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक गंगा की पूरी शुद्धता की बात बेमानी होगी। उन्होंने ऋषिकेश के मुनिकीरेती से हरिद्वार के रानीपुर झाल तक इंटरसेप्टर कैनाल बनाने की बात उठाई। उन्होंने कहा कि गंगा के किनारे बसे शहरों के पानी को डालने के लिए इंटरसेप्टर कैनाल की जरूरत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रदेश सरकार के पास विजन होना चाहिए। आय के अनेक साधन प्रदेश में होते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में चल रहे बायोगैस, कटे हुए बालों से एमिनो एसिड, गंगा के जल की बिक्री योजना, प्रदूषित पानी से मिथेन निकालकर बिजली बनाने सहित कई ऐसी योजनाएं गिनाई जिससे प्रदेश की आमदनी के साथ रोजगार भी बढ़ाया जा सकता है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए मदन मोहन मालवीय के अभियान के पूरे 100 साल बाद अभियान शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि गंगा के नाम पर कोई भी मतभेद नहीं रखता। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत घाट, पौधरोपण, नाले निर्माण, सफाई, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे आदि का इंतजाम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब तक गंगा सफाई के नाम पर जो 4 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए है उन्हें व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो यह कहते है कि पूजा, फूल सामग्री आदि से गंगा मैली होती है वे गलत हैं। गंगा सीवरेज, शहरों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली गंदगी से गंदी होती है।
उन्होंने गंगा सफाई के लिए एक्ट बनाने की बात कही। कहा कि एक्ट में कड़े नियमों का प्रावधान करते हुए गंदगी करने वालों को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि सीवर के ट्रीटमेंट पानी को गंगा में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि सिंचाई सहित अन्य कार्यों के उपयोग में लाया जाएगा।

रेप के आरोपी के घर से मिली छत्तीसगढ़ की छह लड़कियां

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यूपी में इलाहाबाद के सरायइनायत इलाके में गुरुवार को छत्तीसगढ़ पुलिस ने रेप को आरोपी को दबोचने के लिए तीन गांवों में दबिश दी। पुलिस को आरोपी तो नहीं मिला लेकिन करछना में उसके घर से छत्तीसगढ़ की छह लड़कियां बरामद कर लीं।
लड़कियों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ ले जाया गया। एक हफ्ते पहले भी छत्तीसगढ़ पुलिस ने दुबावल गांव में दबिश देकर आरोपी को उसके बहन के घर से दबोच लिया था। उस वक्त ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला कर आरोपी को छुड़ा लिया था।
यमुनापार में करछना के बरांव गांव का शेरू आरकेस्ट्रा पार्टी चलाता था। वह डांस के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड से लड़कियों को लाता था।
उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ की एक लड़की ने रेप का आरोप लगाया है। छत्तीसगढ़ पुलिस उसकी तलाश में इलाहाबाद आई। एक हफ्ते पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरोपी के बहन के घर सरायइनायत के दुबावल गांव में दबिश दी। आरोपी को पकड़ लिया गया था लेकिन गांव के लोगों ने पुसिल पर हमला बोलकर छुड़ा लिया था।
पीड़िता ने पुलिस को बयान दिया कि आरोपी कई अन्य लड़कियों को भी जबरन अपने घर में रखे हुए है। गरीब लड़कियों की तस्करी की बात सुनकर छत्तीसगढ़ पुलिस सन्न रह गई।
गुरुवार को छत्तीसगढ़ पुलिस की एक टीम ने सरायइनायत पुलिस के साथ दुबावल, कोटवा समेत तीन गांवों में आरोपी की तलाश में दबिश दी लेकिन वह नहीं मिला। तब छत्तीसगढ़ पुलिस ने करछना पुलिस के साथ आरोपी शेरू के बरांव स्थित घर पर दबिश दी।
वहां पुलिस को छह लड़कियां मिल गईं। जिनमें से कुछ बालिग थीं तो कुछ नाबालिग। पुलिस बरामद लड़कियों को लेकर चली गई। एसओ करछना एके सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ रेप के आरोपी के घर दबिश देकर छह लड़कियों को बरामद किया गया है लेकिन आरोपी नहीं मिला।

एक और आप विधायक पर छेड़खानी का आरोप

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नई दिल्ली: दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक एक के बाद एक कानून के शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला है साऊथ ईस्ट दिल्ली के देवली इलाके का, जिसके विधायक प्रकाश झारवाल पर एक महिला ने बदसुलूकी व छेड़खानी का आरोप लगाया है।
आम आदमी पार्टी के देवली से विधायक प्रकाश जारवाल पर एक महिला ने बदसलूकी और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत पर ग्रेटर कैलाश थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। महिला ने आरोप लगाया है कि 2 जून को वह पानी के मसले को लेकर ग्रेटर कैलाश के दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर गई तो वहां विधायक के साथियों ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया और जान से मारने की धमकी दी। वहीं, विधायक प्रकाश जारवाल ने उन्हें धक्का मारते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
उधर, विधायक प्रकाश जारवाल ने सफाई देते हुए कहा कि ये राजनीतिक साजिश के तहत बीजेपी की चाल है जिसके तहत उन्हें फंसाया गया है।
पीड़ित महिला ओम लता गिल के मुताबिक मामला बीते 2 जून का है, लेकिन उन्होंने इस बाबत कुछ दिन बाद उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से संपर्क किया। पुलिस ने जांच कर विधायक के खिलाफ 6 जुलाई को आई.पी.सी. की धारा 354, 506 व 509 के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
बता दें कि प्रकाश झारवाल देवली विधानसभा से विधायक हैं। इलाके के लोगों की शिकायत है कि पीने का पानी नहीं मिल रहा है।
वहीं, अब इलाके के सांसद ने भी दिल्ली सरकार के विधायक को आड़े हाथ लिया है। साऊथ दिल्ली के बीजेपी सांसद रमेश विधूड़ी ने भी आम आदमी पार्टी को महिलाओं के साथ दुर्वयवहार करने वाली पार्टी करार दिया है। सासंद का आरोप है कि आप के विधायक जनता के साथ हमेशा गलत व्यवहार करते हैं जिसके चलते आए दिन ये कानूनी शिकंजे में फंसते जा रहे हैं।
इलाके में पानी की गंभीर समस्या है। जब मीडिया की टीम पीड़ित महिला के घर पहुंची तो आसपास के लोगों ने मीडिया के कैमरों के सामने पानी की किल्लत की बात तो बताई ही साथ ही देवली इलाके में खुलेआम टैंकर माफियाओं का चल रहे कारोबार के बारे में भी बताया। लोगों का कहना है कि मुफ्त पानी की तो बात दूर है यहां तो एक ड्रम पानी भी खरीद कर पीना पड़ता है।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर दूरसंचार घोटाला का आरोप लगाया

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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर 45 हजार करोड़ रूपए के दूर संचार घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है. मार्च में आई सीएजी रिपोर्ट के हवाले से लगाए गए इस आरोप में कहा गया है कि छह दूरसंचार कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह घोटाला किया गया है.
इन कंपनियों में एयरटेल और वोडाफोन के भी नाम लिए गए हैं. अवकाश के दिन कांग्रेस मुख्यालय में रखी गई विशेष प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सीएजी की 11 मार्च 2016 की रिपोर्ट के अनुसार देश की छह प्रमुख दूरसंचार कंपनियों ने अपनी आय कम बताई है. जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रूपए का नुकसान हुआ है.
उन्होंने बताया कि इन छह कंपनियों में भारती एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस, टाटा, आइडिया और एयरसेल शामिल हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सीएजी ने इन कंपनियों के खातों का ऑडिट किया था.
इन कंपनियां के कोर्ट जाने पर इस दलील को खारिज कर दिया गया था कि निजी कंपनियां होने के कारण उनके खातों की जांच सीएजी नहीं कर सकता. कोर्ट ने इसे लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क से जुड़ा मामला करार दिया था. उन्होंने बताया कि यह पैसा सरकारी खजाने में जाता है, इसलिए सीएजी इसकी जांच कर सकता है.
सुरजेवाला ने कहा कि यह घोटाला 2006 से 2009 के बीच का है. कांग्रेस नेता ने कहा कि इस आय को छिपाने पर सरकार को दूरसंचार कंपनियों से बकाया राशि की वसूली की जानी चाहिए थी और उन पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा नहीं किया और उल्टा उन्हें फायदा पहुंचाया और अब उनका बचाव कर रही है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों ने 2006-07 से 2009-10 तक अपनी आय वास्तविक आय से 46,045 हजार करोड़ रूपए कम बताई है और उसने इन कंपनियों से 12488 करोड़ 93 लाख रूपए लाइसेंस, स्पेक्ट्रम और दूसरे शुल्क के रूप में वसूलने को कहा था.

अमरीका: प्रदर्शन के दौरान 4 पुलिसवालों की हत्या

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अमरीका में डैलस के अधिकारियों के मुताबिक एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बंदूकधारियों ने चार पुलिस वालों की गोली मारकर हत्या कर दी.
पुलिस के दो काले आदमियों को गोली मारने के विरोध में ये प्रदर्शन चल रहा था. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अचानक गोलीबारी होने से वहां भगदड़ मच गई. एक संदिग्ध को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है जबकि दूसरे ने आत्मसमर्पण कर दिया.
डैलस के पुलिस प्रमुख डेविड ब्रॉउन ने बताया कि बंदूकधारियों ने 11 अधिकरियों को घात लगाकर निशाना बनाया. इससे चार अधिकारियों की मौत हो गई.
उन्होंने बताया कि गोलीबारी में कई अन्य पुलिस अधिकारी घायल हैं और उनमें से कुछ की हालत काफी गंभीर है.
डेविड ने बताया हम मानते है कि "ये संदिग्ध इन अधिकारियों को तीनों तरफ से घेरने के लिए अपनी पोज़ीशन ले रहे थे. उनकी योजना अधिक से अधिक अधिकारियों को मारने की थी."
पुलिस ने बताया कि ऐसा लगता है कि दोनों बंदूकधारियों ने प्रदर्शन रैली के दौरान किसी 'ऊंची जगह' से गोलियां दागीं थीं.
मार्च आयोजित करने वालों में से एक रेवरेंड जेफ हुड ने डैलस मॉर्निंग न्यूज को बताया कि गोलीबारी होते ही उन्होंने लोगों को बचाव के लिए धक्का-मुक्की करते देखा. उन्होंने कहा, "मैं लोगों को सड़क से हटाने की कोशिश करते हुए वहां से से भागा और मैं अपने आपको चेक कर रहा था कि कहीं मुझे गोली तो नहीं लग गई." बम टीम गोलीबारी की जगह पर संदिग्ध के छोड़े गए गए संदेहास्पद उपकरण की जांच कर रही हैं.
पुलिस ने कंधे पर राइफल लटकाए एक संदिग्ध की फोटो जारी की. हालांकि ये साफ नहीं है कि वह गोलाबारी में शामिल था, बाद में पुलिस ने ट्वीट किया  कि उसने खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया था. डैलस के मेयर माईक रॉलिंग्स ने कहा ये शहर के लिए "दिल तोड़ने वाली घटना थी".
मिनेसोटा में फिलांडो कैस्टिल और लुइज़ियाना के बैटन रूज़ में आल्टन स्टर्लिंग की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई थी. ये मौतें इस प्रदर्शन का कारण बनी. इन दोनों घटनाओं के वीडियो वायरल होने से पूरे अमरीका में राष्ट्रीय बहस छिड़ गई.
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पुलिस के काले लोगों को गोली मारने की इ घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की और कहा, "सभी निष्पक्ष विचारधारा वाले लोगों को चिंतित होना चाहिए."
उन्होंने कहा "जब इस तरह की घटनाएं होती हैं तो हमारे साथी नागरिकों के एक बड़े हिस्सा को लगता है जैसे यह उनकी त्वचा के रंग की वजह से है, उनके साथ समानता का व्यवहार नहीं किया जा रहा और ये दुख देता है." डैलस में हो रहा विरोध भी पूरे अमरीका में पुलिस के अफ्रीकी अमरीकियों के खिलाफ जानलेवा हमलों को लेकर था.

इराक युद्ध : रिपोर्ट आ चुकी है, सबक बाकी हैं

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सर जॉन चिलकॉट की अगुवाई वाले पैनल ने बुधवार को जो ‘इराक वार इंक्वायरी रिपोर्ट’ जारी की, वह ब्रिटेन में कइयों के लिए एक तरह से उसकी पुष्टि ही है जो वे पहले से मानते थे. फिर भी इस रिपोर्ट के निष्कर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इराक पर हमले के कारणों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया. रिपोर्ट यह भी कहती है कि इस मसले को शांति से सुलझाने के लिए जो विकल्प हो सकते थे, उन्हें पूरी तरह से आजमाए बिना ही ब्रिटेन को युद्ध में उतार दिया गया.
इन निष्कर्षों में समकालीन राजनीति और भविष्य की नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता है. जांच में यह भी पता चला है कि ब्लेयर सरकार इस युद्ध के परिणामों को झेलने के लिए भी पूरी तरह से तैयार नहीं थी.अमेरिका और ब्रिटेन के इराक पर हमला करने और सद्दाम हुसैन की सरकार को गिराने के 13 साल बाद भी इस युद्ध का औचित्य साबित नहीं किया जा सका है. ब्लेयर और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसके लिए जो कारण दिए थे वे हवा-हवाई साबित हो चुके हैं. न तो इराक में कोई व्यापक जनसंहार के हथियार मिले, न ही हमला करने वाले अल कायदा और सद्दाम बीच कोई संबंध साबित कर पाए.
यानी उस युद्ध का कोई औचित्य नहीं था जिसके नतीजे में अब तक लाखों इराकी मारे जा चुके हैं और उनकी एक बड़ी आबादी अपनी जड़ों से उखड़ चुकी है. इस युद्ध के चलते इराक में जो बर्बादी हुई और अराजकता फैली उसने कई अतिवादी संगठनों के लिए उर्वर जमीन तैयार कर दी. आज दुनिया में सबसे बर्बर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) की जड़ें ऐसे ही एक संगठन 'अल कायदा इन इराक' तक जाती हैं.
इससे भी बुरा यह है कि इन बड़ी शक्तियों ने इराक की त्रासदी से कोई सबक नहीं सीखा. इराक पर हमला विनाशकारी साबित हुआ है, यह साफ दिखने पर भी पश्चिमी जगत ने 2011 में लीबिया में एक और सरकार गिरवा दी. इराक वाली गलती फिर दोहराई गई जिसने आतंकियों के लिए एक और स्वर्ग तैयार कर दिया.
ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी 2003 में इराक युद्ध के पक्ष में वोट दिया था. कैमरन सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई चाहते थे लेकिन उनका यह प्रस्ताव 2013 में ब्रिटिश संसद ने खारिज कर दिया. अमेरिका और ब्रिटेन ने भले ही सीरिया पर सीधे हमले की अपनी योजना टाल दी हो लेकिन, वे वहां पर सरकार विरोधी गुटों को मदद देना जारी रखे हुए हैं. इससे वहां हालात खराब होते जा रहे हैं जिसका फायदा आईएस और जबात अल नुसरा जैसे आतंकी संगठनों को हो रहा है.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि तानाशाहों का राज भी बर्बरता का होता है. लेकिन लड़ाई या फिर गृहयुद्ध के जरिये उन्हें सत्ता से बेदखल करना कहीं ज्यादा खतरनाक होता है जैसा कि संकट में घिरे ये देश साबित कर रहे हैं. आज पश्चिमी एशिया और पूर्वी अफ्रीका में जो अराजकता फैली हुई है उसकी जड़ में इराक युद्ध ही है. यह अस्थिरता कब खत्म होगी कोई नहीं जानता.
टोनी ब्लेयर की मुद्रा अब भी ऐसी नहीं लगती कि उन्हें कोई पछतावा है लेकिन, उनके उत्तराधिकारी अगर भविष्य में ऐसी गलतियां रोकने के प्रति गंभीर हैं तो वे चिलकॉट समिति के निष्कर्षों से आंखें मूंदे नहीं रह सकते. जैसा कि लेबर पार्टी के मुखिया जेरमी कॉर्बिन का कहना था, ‘चिलकॉट रिपोर्ट ने जिन फैसलों की कलई खोली है उन्हें लेने वालों को अपने फैसलों के नतीजे भुगतने चाहिए. चाहे वे जो भी हों.’

विंबलडन में भारत को दोहरा झटका, सानिया-बोपन्ना मिक्स्ड डबल्स में हारे

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भारतीय स्टार सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना को विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के मिश्रित युगल में मंगलवार को अपने-अपने जोड़ीदारों के साथ हार का सामना करना पड़ा. सानिया और क्रोएशिया के उनके जोड़ीदार इवान डोडिग की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी पहला सेट जीतने के बावजूद नील स्कुपस्की और अन्ना स्मिथ की गैरवरीय ब्रिटिश जोड़ी के हाथों दो घंटे सात मिनट तक चले मैच में 6-4, 3-6, 5-7 से हार गई.
सानिया और डोडिग को पहले दौर में बाई मिली थी. सानिया अब केवल महिला युगल में चुनौती पेश करेगी, जिसमें उन्होंने अपनी स्विस जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है. वहीं बोपन्ना और ऑस्ट्रेलिया की उनकी जोड़ीदार एनस्तेसिया रोडियानोवा की जोड़ी तीसरे दौर में पहुंचने में सफल रही लेकिन उससे आगे नहीं बढ़ पाई. जुआन सेबेस्टियन काबेल और मारियन डुक मारिन की गैरवरीयता प्राप्त कोलंबियाई जोड़ी ने बोपन्ना और रोडियानोवा की 13वीं वरीय जोड़ी को 7-6, 6-3 से हराया.
इस हार से बोपन्ना का विंबलडन का सफर भी समाप्त हो गया. बोपन्ना और रोमानिया के फ्लोरिन मर्जिया पुरूष युगल में पहले ही बाहर हो चुके थे. मिश्रित युगल में अब भारत की चुनौती लिएंडर पेस के हाथों में है. उनकी और हिंगिस की 16वीं वरीय जोड़ी ने कल रात न्यूजीलैंड के आर्टम सिताक और जर्मनी की लौरा सीगमंड को आसानी से 6-4, 6-4 से पराजित करके तीसरे दौर में प्रवेश किया था. उधर लड़कियों के वर्ग में भारत की करमन कौर थांडी भी शुरूआती सेट में जीत का फायदा नहीं उठा पाई और दूसरे दौर के मैच में जार्जिया की मरियम वोल्कवाद्जे से 6-4, 2-6, 2-6 से हार गईं.

मीका सिंह पर मॉडल ने दर्ज करवाया बदसलूकी और छेड़छाड़ का केस

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बॉलीवुड सिंगर मीका सिंह पर मुंबई की एक मॉडल और फैशन डिजाइनर ने बदसलूकी और छेड़छाड़ का केस दर्ज करवाया है. जवाबी शिकायत मीका ने भी दी है जिसमें जबरन 5 करोड़ रुपए वसूलने के लिए धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
मीका सिंह के स्टाफ के साथ बहस के बाद अचानक इस महिला का बाल महिला कांस्टेबल ने पकड़ा और उसे बाहर ले गई. काफी देर चले ड्रामे के बाद महिला महिला वर्सोवा पुलिस स्टेशन पहुंची जहां उसने बकाया पैसा मांगने पर बदसलूकी और फिर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए शिकायत दी.
बाद में मीका की ओर से दी गई जवाबी शिकायत में भी महिला पर जबरन 5 करोड़ रुपए मांगने के लिए धमकाने की बात कही गई है. मीका पर आरोप लगाने वाली महिला एक मॉडल और फैशन डिजायनर है.मुंबई पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
मीका पहले भी विवादों में रहे हैं. कुछ समय पहले दिल्ली में एक कार्यक्रम में एक डॉक्टर को स्टेज पर थप्पड़ मारने का वीडियो भी सामने आया था जिसके बाद उन पर केस दर्ज हुआ था. करीब 10 साल पहले अपनी बर्थ डे पार्टी में अभिनेत्री राखी सावंत को जबरन किस करने के बाद राखी ने काफी हंगामा किया था और मामला पुलिस तक पहुंच गया था.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिकायत के आधार पर वरसोवा थाने में आईपीसी की धाराओं 354 (महिला की शील भंग करना), 323 (चोट पहुंचाना) और 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.
उन्होंने कहा कि माडल अक्सर मीका के घर जाया करती थी. हालांकि आरोप खारिज करते हुए मीका ने शाम को जवाबी शिकायत दर्ज कराई और कहा कि माडल उससे जबरन धन वसूलने का प्रयास कर रही थी.

मिस तिब्बत तेनजिंग सांज्ञी को सातवें आसमान पर होना चाहिए था, पर इसका उल्टा क्यों हो रहा है?

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तेनजिंग सांज्ञी तकरीबन एक महीने पहले मिस तिब्बत चुनी गई हैं. उनके लिए बीते 27 दिन अबतक के सबसे हंसी-खुशी वाले दिन होने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 21 साल की यह लड़की तिब्बती महिलाओं के लिए एक आदर्श बननी चाहिए थी लेकिन सांज्ञी सोशल मीडिया पर अपने ही समुदाय के लोगों के निशाने पर हैं.
इसका कारण यह है कि वे तिब्बती भाषा – यू त्सांग, नहीं जानतीं. उनके बारे में सोशल मीडिया पर आई एक टिप्पणी कहती है, ‘यदि किसी को तिब्बती भाषा का बुनियादी ज्ञान भी नहीं है तो उसे तिब्बती महिलाओं के सौंदर्य का प्रतिनिधि बनने की अनुमति कैसे दी जा सकती है. यह मजाक है और पूरी तरह गलत है…’ फेसबुक पर डोल्मा सचु मे-लुंग लिखती हैं , ‘टूटी-फूटी और मिलावट वाली भाषा तुम को कहीं नहीं ले जाएगी… यदि तुम तिब्बत के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सकतीं तो तुम मिस तिब्बत नहीं हो…’
इस तरह की आलोचनाओं की बाढ़ आने के बाद संज्ञी को अपील करके बताना पड़ा कि वे एक तिब्बती शरणार्थी की बेटी हैं और उस माहौल में पली-बढ़ी हैं जहां उनका वास्ता तिब्बती बोलने वालों से नहीं पड़ा. फिलहाल उनकी अपील से सभी लोग सहमत हो गए हों ऐसा नहीं है लेकिन इस बार की मिस तिब्बत प्रतियोगिता से जुड़ा एक विवाद जरूर खत्म हो गया है, और शायद तबतक के लिए जबतक यह प्रतियोगिता दूसरी बार फिर आयोजित नहीं की जाती.
तिब्बती मूल की लड़कियों के लिए मैक्लॉयडगंज में हर साल मिस तिब्बत प्रतियोगिता का आयोजन होता है. हिमाचल प्रदेश का यह शहर तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय है. यहां 2002 से सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित हो रही है और बिना विवाद के आज तक एक भी आयोजन नहीं हुआ है.
यह सौंदर्य प्रतियोगिता लॉब्सेंग वांग्याल ने शुरू करवाई थी. धर्मशाला में रहने वाले इस फोटो जर्नलिस्ट ने जब अपने समुदाय के बीच मिस तिब्बत प्रतियोगिता के आयोजन का विचार रखा तो बड़े-बुजुर्गों ने उन्हें बुरी तरह झिड़का. इनका कहना था कि इससे मैक्लियॉडगंज की बदनामी होगी, जबकि उसे समुदाय के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा की उपस्थिति की वजह से बेहद पवित्र माना जाता है.
तिब्बती समुदाय के वरिष्ठ लोगों की चिंताएं अपनी जगह जायज थीं कि क्यों इस प्रतियोगिता में लड़कियों को बिकिनी भी पहननी थी. तिब्बती महिलाएं परंपरागत रूप से घुटनों से नीचे तक की स्कर्ट – चुबा और पूरी बांहों का ब्लाउज पहनती हैं. इस समुदाय में पश्चिमी देशों के तंग परिधानों को अच्छा नहीं समझा जाता. हालांकि इसके बाद भी वांग्याल अपनी योजना पर कायम रहे.
इस आयोजन के पीछे वांग्याल का तर्क है कि यह सौंदर्य प्रतियोगिता खूबसूरत लड़कियों का रैंप पर ठुमकते हुए चलनाभर नहीं है. उनके मुताबिक, ‘यह एक राजनीतिक आयोजन है जहां हम अपनी पहचान, संस्कृति और हमारी गौरवशाली परंपराओं का उत्सव मनाते हैं और इस आयोजन के जरिए बताते हैं कि हम एक देश हैं.’
इस आयोजन को अब तक 14 साल हो गए हैं लेकिन तिब्बती समुदाय के बीच अभी-भी इसे पूरी तरह मान्यता नहीं मिली है. तिब्बती समुदाय के एक स्त्रीवादी संगठन – तिब्बतन फेमिनिस्ट कलेक्टिव की सह-संस्थापक के सेंग सवाल उठाती हैं, ‘यह अपने आप में हास्यास्यपद नहीं है कि जिस आयोजन में मडजांग्समा – यानी बुद्धिमान, बहादुर और सही सीरत वाली महिला का चुनाव होना है उसकी टैग लाइन कहती है – ब्यूटी विद ब्रेन, लेकिन यहां आखिरी दिन तक ब्रेन की तरफ तो किसी का ध्यान ही नहीं जाता?’ यह तिब्बती समुदाय के सिर्फ एक व्यक्ति की राय नहीं है और इसी के चलते इस आयोजन को शुरुआत में काफी बुरी नजर से देखा जाता था. इन सालों में चार बार ऐसे भी मौके आए जब सौंदर्य प्रतियोगिता के लिए सिर्फ एक लड़की ने दावेदारी की और आखिरकार उसे ही मिस तिब्बत के ताज से नवाजा गया.
मिस तिब्बत को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लेने भेजा जाता है और चीन की आपत्ति के चलते बीते सालों में कुछ विवाद भी हुए हैं. 2004 और 2007 में मिस तिब्बत को अंतर्राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं से आखिरी समय में नाम वापस लेना पड़ा क्योंकि उनकी उपस्थिति पर चीन ने एतराज जताया था. चीन का कहना था कि ये लड़कियां प्रतियोगिता के दौरान अपने नाम वाली कपड़े की जो पट्टी पहनती हैं उसमें मिस तिब्बत के बजाय मिस तिब्बत-चीन लिखा होना चाहिए. जब इन लड़कियों ने ऐसा करने से इनकार किया तो उन्हें प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने दिया गया.
इस साल यांज्ञी के मिस तिब्बत चुने जाने पर उनको तिब्बती भाषा न आने से जुड़ा विवादभर चर्चा में नहीं है. तिब्बत के ‘डोनाल्ड ट्रंप’ कहे जाने वाले वांग्याल पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पसंद की प्रतियोगी को जिताने के लिए नतीजों में हेरफेर की है.
इन विवादों के बावजूद इसबार की मिस तिब्बत सौंदर्य प्रतियोगिता एक मायने में अपेक्षाकृत ज्यादा सफल साबित कही जा सकती है. प्रतियोगिता के फाइनल में चार लड़कियां पहुंची थीं – मसूरी की डेंचिन वांग्मो, न्यूयॉर्क की तेनजिन डावा, कर्नाटक के बायलाकुप्पे की तेनजिन डिकी और मनाली की तेनजिन संज्ञी. इन प्रतियोगियों के साथ वांग्याल दलाई लामा का आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे और दलाई लामा के साथ उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर की थी. इसके चलते तिब्बती समुदाय में इसबार की सौंदर्य प्रतियोगिता का कुछ खास विरोध नहीं हुआ.
पांच जून को तिब्बतन इन्स्टिट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स में मिस तिब्बत प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था और इसे देखने के लिए तकरीबन 2000 हजार लोग जुटे थे. प्राकृतिक चिकित्सक-काउंसलर ऊषा डोभाल और एक योग शिक्षक सुनीता सिंह चारों राउंड की जज थीं. स्थानीय ज्वेलर ने मिस तिब्बत के लिए चांदी के ताज की व्यवस्था की थी साथ ही एक लाख रुपये का नकद ईनाम दिल्ली के एक तिब्बती व्यापारी की तरफ से प्रायोजित था.
संज्ञी के प्रतियोगिता जीतने के साथ ही उन्हें तिब्बती भाषा न आने का विवाद शुरू हो गया था. अपनी आलोचना के बाद संज्ञी की जिस अपील का जिक्र हमने ऊपर किया वह उन्होंने मिस तिब्बत वेबसाइट और अपने फेसबुक पेज पर की थी. इसमें तिब्बती भाषा न जानने की वजह बताते हुए वे लिखती हैं, ‘… मेरी भाषा से जुड़ी कमजोरियां मुझे कहीं से भी कम तिब्बती नहीं बनातीं.’
संज्ञी की इस पोस्ट के बाद समुदाय के कई लोग उनके बचाव में भी आए. इन लोगों का कहना था कि 20 साल से कम उम्र के ज्यादातर तिब्बती अलग-अलग स्थानों और मुश्किल परिस्थितियों में पलेबढ़े हैं. और इसलिए अपनी भाषा पर पकड़ न होने के लिए इन्हें जिम्मेदार ठहराना जायज नहीं है. ‘विश्व में हर कहीं, पलायन के साथ मातृभाषाओं पर खतरा बढ़ जाता है क्योंकि तब पलायन करने वाले लोग अन्य भाषाओं के प्रभाव में आते हैं.’ तिब्बत की निर्वासित सरकार की संसद के सदस्य ल्हाग्यारी नामग्याल डोलकर कहते हैं, ‘यही बात तिब्बती भाषा के ऊपर भी लागू होती है.’

'बीफ' विरोधी अभियान ने क्रिकेट की गेंद के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं

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कुछ समय से चल रहे ‘बीफ’ विरोधी अभियान का असर उस खेल पर भी पड़ रहा है जिसे भारत में दूसरा धर्म कहा जाता है. द हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ समय से स्वयंभू गौ रक्षा दलों द्वारा व्यापारियों पर किए जा रहे हमलों में बढ़ोतरी के चलते क्रिकेट की गेंदों की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं.
उत्तर प्रदेश में क्रिकेट की गेंदों बड़ा कारोबार है. गाय की खाल की आपूर्ति में पहले की अपेक्षा काफी गिरावट आ गई है. यही वजह है कि राज्य में चल रही फैक्ट्रियों ने गेंदों की कीमतों में 100 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है.
अखबार से बात करते हुए मेरठ स्थित एक ऐसी ही फैक्ट्री के निदेशक का कहना है, ‘हमें अब ब्रिटेन से चमड़ा आयात करना पड़ रहा है. यह महंगा है क्योंकि इस पर इंपोर्ट ड्यूटी और दूसरे कई टैक्स लगते हैं. आखिर में इसका नुकसान खरीदने वाले को हो रहा है. साल भर पहले तक जो बॉल 400 रु की मिलती थी आज 800 की मिल रही है.’
बड़ी कंपनियों के पास तो गाय का आयातित चमड़ा इस्तेमाल करने का विकल्प है लेकिन, छोटे उत्पादकों को भैंस के चमड़े से काम चलाना पड़ रहा है जो गुणवत्ता के मामले में उतना अच्छा नहीं होता. जानकारों के मुताबिक यह मोटा होता है जिससे न सिर्फ रंगाई में दिक्कत आती है बल्कि गेंद बनने में लगने वाला समय भी बढ़ जाता है.
गाय के चमड़े के लिए उद्योग जगत अब उन राज्यों पर निर्भर है जहां गोवध पर प्रतिबंध नहीं है. इनमें केरल, पश्चिमी बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम शामिल है. लेकिन यहां से होने वाली आपूर्ति मांग के हिसाब से बहुत कम है.