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एससी-एसटी एक्ट: सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदलने से इंकार किया

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एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि वह एक्ट के खिलाफ नहीं है लेकिन निर्दोषों को सजा नहीं मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं उन्होंने हमारा आदेश पढ़ा भी नहीं है। हमें उन निर्दोष लोगों की चिंता है जो जेलों में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट की खुली अदालत में केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल की याचिका पर जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच सुनवाई कर रही है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर फैसला देते हुए इन मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया था। भारत बंद के दौरान दलित आंदोलन हिंसक हो गया और अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अभी की परिस्थिति काफी मुश्किल है, ये एक तरह के इमरजेंसी हालात हैं। 10 लोग अभी तक मर चुके हैं, हज़ारों-करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हो गया है। इसलिए केंद्र सरकार की ये अपील है कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द होनी चाहिए।

गौरतलब है पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए इसके तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी गई थी। जबकि मूल कानून में अग्रिम जमानत की व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं दर्ज मामले में गिरफ्तारी से पहले डिप्टी एसपी या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी आरोपों की जांच करेगा और फिर कार्रवाई होगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद दलित संगठनों और नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था।

धरती के वायुमंडल में पंहुचते ही राख हुआ बेकाबू चीनी स्पेस स्टेशन तियांगोंग-1

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शंघाई। चीन का बेकाबू हो चुका स्पेस स्टेशन तियांगोंग-1 सोमवार को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में धरती के वायुमंडल में पहुंचते ही नष्ट हो गया। चीनी स्पेस अथॉरिटी ने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह यान सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर धरती के वायुमंडल में आया और इसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो गया। हालाँकि इसके कुछ हिस्से अब धरती पर गिरेंगे लेकिन पेइचिंग के मुताबिक, कोई भी हिस्सा ज्यादा बड़ा नहीं होगा।

चीन ने 10.4 मीटर लंबा यह स्पेसक्राफ्ट साल 2011 में लॉन्च किया था। चीन की स्पेस एजेंसी चाइना नैशनल स्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक तियांगोंग-1 से मार्च 2016 से संपर्क टूट चुका था। जिसके बाद से यह अंतरिक्ष में घूम रहा था।

बता दें कि साढ़े आठ टन वजन वाला यह स्पेस स्टेशन साल 2016 में ही अपना नियंत्रण खो चुका था और तब से ही यह धरती की तरफ गिर रहा है। वैज्ञानिकों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस स्पेसक्राफ्ट का अधिकतर हिस्सा गिरते समय जलकर खाक हो जाएगा लेकिन 10 से 40 प्रतिशत हिस्सा मलबे के रूप में बचा रह सकता है जो धरती पर गिर सकते हैं। इस मलबे के धरती पर गिरने के कारण किसी प्रकार हानि की आशंका वैज्ञानिकों ने नहीं जताई थी।

तेजस्वी यादव ने भागवत को बताया बिहार हिंसा का जिम्मेदार, कहा – भागवत ने लोगों को दी ट्रेनिंग

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पटना। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने बिहार में रामनवमी जुलूस के बाद भडक़ी हिंसा के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख को जिम्मेदार ठहराया है। तेजस्वी ने भागवत पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अभी हाल ही में आरएसएस प्रमुख 14 दिनों के लिए बिहार दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने लोगों को रामनवमी के दौरान दंगा भडक़ाने की ट्रेनिंग दी थी। अब लोगों को उनके बिहार दौरे का एजेंडा समझ में आ रहा है।

मालूम हो कि बिहार में रामनवमी के जुलूस के बाद भड़की हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही। दो समुदायों के बीच भड़की हिंसा ने पुरे बिहार को अपने चपेट में ले लिया है। शुक्रवार को नवादा में बजरंगबली की मूर्ति तोडऩे को लेकर दो समुदायों में झड़प हो गई। बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए पुलिस को करीब दस राउंड फायरिंग करनी पड़ी।

खबरों के अनुसार आसामाजिक तत्वों ने धार्मिक स्थल को क्षतिग्रस्त कर दिया जिससे नाराज होकर लोगों ने पटना-रांची राजमार्ग 31 को जाम कर दिया। भीड़ ने इलाके की कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया और गाडिय़ों के शीशे तोड़े। हालात खराब होते देख जिलाधिकारी और एसपी भी मौके पर पहुंच गए। जिले के सभी प्रमुख धर्मस्थलों पर पुलिस बल को तैनात किया गया है।

चीनी सेना ने अपने सैनिकों की संख्या में की भारी कटौती

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बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति के तौर पर दोबारा सत्ता संभालने के साथ ही शी जिनपिंग ने अपने देश की सेनाओं में लगातार सुधार कर रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को चीनी सेना की ओर से ऐलान किया गया है कि वह अपने सैनिकों की संख्या में कटौती करेगी। चीनी मिलिट्री की ओर से तीन लाख सैनिकों की कटौती करने का ऐलान किया गया है।

चीनी मिलिट्री की ओर से कहा गया है कि सैनिकों में कटौती करने का मकसद मिलिट्री की लड़ने की ताकत में और इजाफा करना और इसकी गुणवत्‍ता में सुधार करना है। चीनी मिलिट्री की क्षमता अब दो मिलियन सैनिकों की है। चीन के रक्षा प्रवक्‍ता कर्नल रेन ग्‍यूओकियांग ने मीडिया को बताया, ‘हमने तीन लाख सैनिकों की कटौती करने का लक्ष्‍य तय किया था और अब हमने उसे हासिल कर लिया है।’

बता दें कि साल 2015 में चीन में हुई मिलिट्री परेड में राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने सैनिकों की संख्‍या में तीन लाख की कटौती का ऐलान किया था। पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की क्षमता साल 1980 तक 4.5 मिलियन थी। साल 1985 में इसे तीन मिलियन किया गया और बाद में इसे 2.3 मिलियन कर दिया गया।

पीएलए की ओर से पिछले वर्ष भी कहा गया था कि वह मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम के तहत अपने ग्राउंड ट्रूप्स में एक मिलियन से कुछ की कटौती करेगा। चीन ने मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम के तहत नेवी को एक बड़ा रोल दिया हुआ है और नेवी को इस रोल के तहत अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर चीन का प्रभाव और बढ़ाना है। वैसे चीन की ओर से ट्रूप्‍स की संख्‍या में कटौती शी जिनपिंग की ओर से भ्रष्‍टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का भी हिस्‍सा है।

पाक मीडिया में अपनी ही सरकार की आलोचना, कहा – भारत से सीखो

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के प्रति सुरक्षा जाँच के नाम पर अमेरिका के अपमानजनक व्यववहार को लेकर पाकिस्तानी मीडिया और वहां की जनता में काफी गुस्सा है। पाकिस्तानी मीडिया ने इस पर अमेरिका को तो आड़े हाथ लिया ही साथ ही अपनी सरकार की भी जमकर खिचाई की।

पाकिस्तानी पत्रकारों ने शाहिद खाकान अब्बासी को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि जब वो खुद को सम्मान नहीं दिला पा रहे तो आम पाकिस्तानी की सम्मान की सुरक्षा कैसे करेंगे। पाकिस्तानी पैनल में मौजूद पूर्व सैन्य अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि हमें भी पाकिस्तानी एयरपोर्ट पर अमेरिकियों का स्वागत ऐसे ही करना चाहिए। एक दूसरे पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि इस पूरी घटना ने हमारा सिर शर्म से झुका दिया है। भारतीय एक्टर्स के साथ भी ऐसा हुआ है लेकिन भारत ने जिस तरह अपना विरोध जताया था उससे सीखना चाहिए।

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहीद खाकान अब्बासी को अमेरिका के जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट पर पिछले हफ्ते अपमानजनक सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। करीब 20 करोड़ लोगों के मुल्क के प्रधानमंत्री होने के बावजूद शाहिद खाकान अब्बासी के चेकिंग के दौरान उनके कपड़े तक उतरवा लिए गए। पूरी जांच पड़ताल करके ही पाकिस्तानी पीएम को आगे बढ़ने की इजाजत मिली। पीएम अब्बासी अपनी बीमार बहन से मिलने के लिए निजी दौरे पर अमेरिका गए थे। पाकिस्तानी न्यूज चैनलों पर जो खबरें चल रही है उसके मुताबिक पीएम के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है और ऐसे में निजी दौरे जैसी कोई चीज नहीं होती है।

  देश भर में दुपहिया वाहन चालकों को मिली हुई है, असीमित छूट

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देश भर में दुपहिया वाहन चालकों को मिली हुई है, असीमित छूट

    – किशन शर्मा

यह एक निर्विवादित सत्य है कि हिंदुस्तान में सडक दुर्घटनाओं का सबसे बडा कारण लापरवाही से चलाए जाने वाले और यातायात नियमों का पालन न करने वाले दुपहिया वाहन चालक ही हैं । पिछले लगभग दस वर्ष में देश भर में वाहनों की संख्या असीमित गति से बढी है, और दुपहिया वाहनों की संख्या में कितनी बढोत्तरी हुई है, इसका वास्तव में किसी को भी पता नहीं है । हर दिन समाचारों में सडक दुर्घटनाओं का उल्लेख होता है, परंतु उससे दुपहिया वाहन चालकों पर कोई असर दिखाई नहीं देता । सिग्नल की अनदेखी करके आगे बढ जाना, गलत दिशा में वाहन चलाना, बहुत तेज़ रफ़्तार से वाहन चलाना, एक दुपहिया वाहन पर कम से कम तीन व्यक्तिओं को बैठाना, कहीं भी और कैसे भी वाहन खडा कर देना, बिना इशारा दिये कहीं भी वाहन को मोड देना, फ़ुटपाथ पर वाहन चलाना आदि आजकल हर गांव, हर कस्बे, हर नगर और हर महानगर में बडी आम बात हो गई है । एक हाथ में मोबाइल पकड कर बात करते हुए वाहन चलाना या कान और कंधे के बीच में मोबाइल रखकर टेढी गर्दन करके वाहन चलाना भी आम बात हो गई है । पुलिस विभाग इन सब के विरुद्ध आमतौर पर कोई कार्रवाई नहीं करता । नागपुर सहित अनेक नगरों में तो दुपहिया वाहन चालकों के पक्ष में सरकारी आदेश जारी कर दिये गये हैं कि “वैस्ट हाईकोर्ट रोड” जैसी महत्वपूर्ण सडक पर दोनों तरफ़ केवल दुपहिया वाहन ही पार्क किये जा सकते हैं । कार आदि की पार्किंग कहीं दूर छोटी गलियों में करने के आदेश दे दिये गये । इसमें भी यह देखकर दुख होता है कि गलियों में अनगिनत दुपहिया वाहन ही पार्क किये हुए दिखाई देते हैं । कार चालक अगर कहीं अपनी कार गली में पार्क कर भी दे तो लौटने पर उसे बहुत देर तक उन महानुभावों की प्रतीक्षा करनी पडती है जो उस बीच उसकी कार के चारों तरफ़ कैसे भी आडी-टेढी स्कूटर या मोटरसाइकिल पार्क करके चले गये । कार वाला अपनी कार को वहां से हिला भी नहीं पाता । हैलमेट या तो दुपहिया वाहन के हैंडल में लगा रहता है, या पीछे की तरफ़ कैरियर में लटका होता है । कोई कोई चालक अपने पीछे बैठे साथी के हाथ में हैलमेट इसलिये दे देता है कि कहीं पुलिसकर्मी दिखाई दे तो वो तुरंत चालक के सिर पर हैलमेट पहना दे और फ़िर तुरंत हटा भी दे । तेरह-चौदह साल के लडके-लडकियां शान से दुपहिया वाहन चलाते हुए घूमते रहते हैं । एक दिन मैंने एक चौराहे पर खडे पुलिसकर्मी से पूछा कि उसके सामने ही उल्टी दिशा में और लाल बत्ती के होते हुए भी तेज़ रफ़्तार में दुपहिया चालक दौडे चले जा रहे हैं तो उनके विरुद्ध वह कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है । उस पुलिसकर्मी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “साहब, हमको मरना नहीं है । ये लडके-लडकियां हमारे ऊपर अपनी गाडी चढा देते हैं । और फ़िर किसी  को पकड भी लें तो तुरंत किसी नेता या अधिकारी का फ़ोन आ जाता है कि इसे छोड दो । हमारे कई साथी इस चक्कर में अपनी हड्डियां तुडवाकर अस्पताल में जाते रहे हैं । हमारा विभाग या अफ़सर उनके हाल पूछने भी नहीं जाते । तो आप ही बताइये, हम लोग कैसे कुछ भी कार्रवाई करें” । एक बार मैंने अपना एक आकलन पुलिस आयुक्त को लिखकर भेजा कि लगभग 80 प्रतिशत कार चालक यातायात नियमों का पालन करते हैं । लगभग 40 प्रतिशत औटोरिक्षा चालक भी नियमों का पालन करते हैं । लगभग 90 प्रतिशत दुपहिया वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं और लगभग 95 प्रतिशत महिला दुपहिया वाहन चालक पूरी तरह से लापरवाह और निर्भीक होकर वाहन चलाती हैं । कुछ दिन बाद यातायात पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने मुझे उत्तर भेजा, “आपका आकलन किसी हद तक सही है । अनेक युवा नियमों का पालन नहीं करते । यहां यह स्पष्ट कर दूं कि हम अपनी क्षमता से भी अधिक कार्य कर रहे हैं और नियम तोडने वालों के विरुद्ध कडी कार्रवाई भी कर रहे हैं, परंतु कर्मचारियों की कमी के कारण और अति विशिष्ट व्यक्तियों के “मूवमेंट” की देखरेख करने में हम हर जगह और हर समय पुलिस कर्मियों को खडा नहीं कर पाते हैं । जो पालक अपने बच्चों को कम उम्र में वाहन खरीद कर दे देते हैं और उन्हें चलाने की भी अनुमति दे देते हैं, क्या उनका इस सम्बन्ध में कोई दायित्व नहीं बनता ? हम हर गली-चौराहे पर और हर वाहन चालक के पीछे पुलिस कर्मी नहीं लगा सकते है।“ मैं गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ आदि अनेक राज्यों में घूम चुका हूं और “हाई वे” पर भी उल्टी दिशा में अनगिनत वाहनों को तेज़ी से आते हुए देखकर कभी कभी यह सोचने लगता हूं कि कहीं मैं ही तो उल्टी दिशा में नहीं जा रहा । सडक दुर्घटनाओं की बढती संख्या चिंताजनक होती जा रही है, परन्तु इससे अधिकांश वाहन चालकों पर कोई भी असर दिखाई नहीं देता । हाल ही में मैंने एक पत्र सडक परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी जी को लिख कर निवेदन किया था कि वे वाहनों की, विशेषकर दुपहिया वाहनों की असीमित बढती जा रही बिक्री पर रोक लगाने की दिशा में कोई सुधार करने का प्रयास करें, और मुझे यह जानकर थोडा संतोष हुआ कि उन्होंने अभी यह वक्तव्य दिया है कि उनका मंत्रालय वाहनों की बिक्री को सीमित करने के बारे में विचार कर रहा है । सडक दुर्घटनाओं की बढती संख्या और दिन-ब-दिन बढती लापरवाही तथा यातायात नियमों की अनदेखी को देखकर और अधिकारियों-कर्मचारियों की निष्क्रियता को देखकर मुझे ऐसा प्रतीत होने लगा है कि दुपहिया वाहन चालकों को उनकी तरफ़ से हर तरह की असीमित छूट प्रदान की जा रही है ।

901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर – 440015 – मोबाइल – 8805001042 ।

 

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी पर लगाई रोक

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नई दिल्ली। एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्‍ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी न किए जाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा दर्ज होने वाले मामलों में अग्रिम जमानत की भी मंजूरी दे दी है। मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को अदालत ने कहा कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी चाहिए और फिर आगे ऐक्शन लेना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के अंतर्गत तत्काल गिरफ्तारी के कड़े प्रावधान को हल्का कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि कई मौकों पर निर्दोष नागरिकों को आरोपी बनाया जा रहा है और सरकारी कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी निभाने से डराया जाता है, जबकि यह कानून बनाते समय विधायिका की ऐसी मंशा नहीं थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में किसी लोकसेवक या सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी उसकी नियुक्ति करने वाले प्राधिकार से मंजूरी और गैर लोकसेवक के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की स्वीकृति से ही की जाएगी, जो उचित मामलों में ऐसा कर सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि अग्रिम जमानत नहीं देने का प्रावधान उन परिस्थितयों में लागू नहीं होगा जब पहली नजर में कोई मामला नहीं बनता हो या साफतौर पर मामला झूठा हो। इसका निर्धारण तथ्यों और परिस्थितियों के अनुसार संबंधित अदालत करेगी। इस कानून की धारा18 में इसके प्रावधानों के तहत आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने पर रोक है।

शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार में तकनीकी शिक्षा निदेशक डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन को अपने विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इंकार करने के कारण इस कानून के तहत आरोपी बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर यह व्यवस्था दी। महाजन ने बंबई हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी जिसने उन्हें अग्रिम जमानत देने और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इंकार कर दिया था।

अप्रैंटिस छात्रों ने चार घंटे तक रोक दी मुंबई की धड़कन

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मुंबई :रेलवे में स्थाई नौकरी की मांग को लेकर अप्रैंटिस छात्रों ने मंगलवार सुबह आंदोलन शुरू कर दिया। यह आंदोलन करीब 4 घंटे तक चला। छात्रों ने मुंबई की जान और वहां की जिंदगी की रफ्तार कही जाने वाली लोकल ट्रेनों को माटुंगा और छत्रपति शिवाजी टर्मिनिल रेलवे स्टेशन के बीच ट्रैक को जाम कर रोक दिया, जिससे आम जन-जीवन कुछ देर के लिए प्रभावित हो गया। छात्र अभी भी रेलवे ट्रैक के बगल में डटे हुए हैं।

आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि 20 फीसदी कोटा को हटा दिया जाए और स्थायी नौकरी दे दी जाए। इन अप्रेंटिस छात्रों का कहना है कि वे सालों तक काम कर चुके हैं लेकिन इन्हें स्थाई नौकरी नहीं मिल रही है।

छात्रों के आंदोलन पर राजनीति भी गरमा गयी है। आंदोलनकारियों को कांग्रेस और एमएनएस का समर्थन प्राप्त है। बातचीत से मामले को सुलझाने और छात्रों को पटरी से हटाने गयी पुलिस पर आंदोलनकारी छात्रों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

अपनी मांगों को लेकर छात्र आंदोलन के दौरान रेलवे पटरियों पर बैठ गये जिस कारण ट्रेनों का आवागमन बाधित हो गया। ट्रेनों के आवागमन के बाधित होने के कारण लाखों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ऑफिस टाइम होने और सीएसटी-माटुंगा की लाइन पर ज्यादा ट्रैफिक होने से आम लोगों को भी परेशानी हुई। लोकल ट्रेनों के साथ ही लंबी दूरी के ट्रेनें भी आंदोलन के कारण देर हो गयीं।

महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आंदोलन को लेकर कहा कि नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अप्रेंटिस छात्रों के लिए 20% सीट आरक्षित है। वे ज्यादा सीट की मांग कर रहे हैं।

नीरव मोदी की जमीन पर किसानों का दावा, शुरू की जुताई

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पंजाब नैशनल बैंक के 11 हजार करोड़ से ज्यादा के घोटाले में आरोपी नीरव मोदी की जमीन पर स्थानीय किसानों ने अपना दवा ठोकते हुए कब्ज़ा कर लिया है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के खंडाला गांव स्थित नीरव मोदी की जमीन पर किसान ट्रैक्टर लेकर पहुंचे और जुताई-कोड़ाई का काम भी किया। किसानों का आरोप है कि नीरव मोदी ने उनकी जमीन बहला फुसलाकर कौड़ी के भाव में खरीद लिया था। किसानों ने जमीन जोतकर इसपर अपना दावा जताया है।

किसानों का यह भी कहना है कि नीरव मोदी ने हमें ठगते हुए हमारी जमीन हड़प ली थी। हमने आज जो जुताई की है, वह एक तरह का विरोध प्रदर्शन है, जिसमें हम यह दिखाना चाहते हैं कि यह जमीन हमने उसे नहीं दी है…इसपर हमारा कब्जा है। नीरव को बैंकों द्वारा करोड़ो रुपये दिये गये लेकिन किसानों को 10 हजार रुपये से ज्यादा नहीं दिये जाते हैं। सरकार की इस नीति के खिलाफ हमने भूमि आंदोलन शुरू किया है।

गोरखपुर की हार ने BJP को सिखाया सबक : राजनाथ सिंह

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर भाजपा को समाजवादी पार्टी के हाथों हार का सामना करने के बाद पार्टी में मंथन का दौर शुरू हो चुका है। हार के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार से भाजपा को सबक मिला है कि ऐसा भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि ऐसा दोबारा नहीं होगा।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्य मंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत हुई है। गोरखपुर लोकसभा सीट पर उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पांच बार से लगातार सांसद थे। वहीं, बिहार के अररिया लोकसभा सीट पर भी भाजपा को आरजेडी के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले मध्यप्रदेश और राजस्थान में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार मिली थी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस बयान कि देश के लोगों में भाजपा के खिलाफ गुस्सा है, पर पूछे गए सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा, ‘वो विपक्षी पार्टी के नेता हैं और ऐसी बातें बोलना उनसे अपेक्षित है। लेकिन समय बताएगा कि देश लोगों में किसके खिलाफ गुस्सा है।’ राजनाथ सिंह से जब प्रधानमंत्री पद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं अतिमहत्वकांक्षी नहीं हूं। जिसे भी यह जिम्मेदारी दी गई है वो इसको जिम्मेदारी पूर्वक निभा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।’