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वर्मा की जासूसी नहीं बल्कि नियमित गश्त पर थे उसके कर्मचारी: आईबी सूत्र

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नयी दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में मचे घमासान में आज उस समय और विवाद गहराया जब जबरन छुट्टी पर भेजे गए ब्यूरो के डाइरेक्टर आलोक वर्मा के घर के सामने चार संदिग्धों को उनके सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ा। हालाँकि पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। चारों संदिग्धों ने स्वयं को खुफिया ब्यूरो (आईबी) का कर्मचारी बताया और कहा कि वे अपने नियमित गश्त पर थे। उनके इस बयान की पुष्टि ख़ुफ़िया ब्यूरो (आईबी) ने भी किया है।
आईबी ने कहा है कि उसके कर्मचारी राजधानी के अतिविशिष्ट क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे और वह केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व प्रमुख आलोक वर्मा की जासूसी नहीं कर रहे थे।

बता दें कि आईबी के चार कर्मचारियों को गुरुवार सुबह अलोक वर्मा के 2 जनपथ स्थित आवास के बाहर से पकड़े जाने के बाद यह कहा जा रहा है कि वे छुट्टी पर भेजे गये सीबीआई निदेशक श्री वर्मा की जासूसी कर रहे थे।

आईबी के सूत्रों का कहना है कि वह उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में अपने कर्मचारियों को नियमित गश्त के लिए तैनात करती है क्योंकि इन क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों का निवास है। ये कर्मचारी नियमित गश्त पर थे और इन पर गलत आरोप लगाया जा रहा है कि वे वर्मा की जासूसी कर रहे थे।
सूत्रों का कहना है कि जनपथ पर वर्मा के आवास के निकट कुछ लोगों के असामान्य रूप से इक्कठा होने का पता लगाने के लिए ये कर्मचारी वहां रूके थे। इनके पास आईबी का परिचय पत्र था और यदि वे जासूसी के लिए जाते तो गुप्त रूप से जाते लेकिन ऐसा कुछ नहीं था। उनकी मौजूदगी को गलत रूप में पेश किया जा रहा है। श्री वर्मा के आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने इन कर्मचारियों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।

गौरतलब है कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से निदेशक आलोक वर्मा के साथ विवाद के बाद सरकार ने असाधारण कदम उठाते हुए वर्मा और अस्थाना दोनों को कार्यमुक्त करके छुट्टी पर भेज दिया है।

शिवपाल यादव की पार्टी का हुआ रजिस्ट्रेशन, कहा – ”हमें धकेल कर निकला गया”

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी से अलग होकर समाजवादी सेक्युलर मोर्चा नमक नयी पार्टी का रजिस्ट्रेशन करा लिया है। पार्टी का गठन करने के बाद शिवपाल सिंह यादव ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी का चुनाव आयोग में पंजीयन हो गया है और उसे ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया’ नाम मिला है।

शिवपाल ने लखनऊ में आयोजित मोर्चा के एक कार्यक्रम में कहा ‘‘हमारी पार्टी का रजिस्ट्रेशन हो गया है। अब हमारी पार्टी का नाम ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया’ होगा।” जसवंतनगर सीट से अब भी सपा के विधायक शिवपाल ने सपा से अलग होने के कारणों का जिक्र करते हुए किसी का नाम लिये बगैर कहा कि वह हमेशा सपा में एकजुटता चाहते थे, लेकिन कुछ ‘चुगलखोरों और चापलूसों’ की वजह से उन्हें मजबूरन पार्टी से किनारा करना पड़ा।

उन्होंने कहा ‘‘हम तो हमेशा से परिवार और पार्टी में एकता चाहते थे। हमने लम्बे समय तक इंतजार किया लेकिन ना तो मुझे और ना ही नेताजी (सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव) को उचित सम्मान मिला। हमें तो धकेल कर निकाल दिया गया।‘‘ शिवपाल ने अपने समर्थकों से कहा, ‘‘मैं आप सबसे कहता हूं कि अगर कहीं कुछ गलत हो रहा है तो उसके बारे में बताने के लिये आप स्वतंत्र हैं। मैं अपनी पार्टी को यह आजादी दूंगा।‘‘ मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सपा अध्यक्ष बनने के बाद हाशिये पर पहुंचे शिवपाल ने ‘उपेक्षा’ से नाराज होकर पिछली 29 अगस्त को समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन किया था। उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का एलान किया था।

मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने पिछले दिनों शिवपाल के साथ मंच साझा करते हुए कहा था कि वह ‘चाचा‘ के साथ हैं। व्यापक जनसमर्थन मिलने का दावा करने वाले शिवपाल ने कहा कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश, दोनों ही जगह जनविरोधी सरकार है। उनकी गलत नीतियों और फैसलों से जनता परेशान है। नोटबंदी और जीएसटी ने व्यापारियों के साथ-साथ पूरी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने जनता से किये गये वादे पूरे नहीं किये हैं। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला ने शिवपाल का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में बड़ी सियासी ताकत बनेगी।

सबरीमाला मंदिर के कपाट एक महीने के लिए बंद, महिलाएं नहीं कर सकीं प्रवेश,

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केरल के सबरीमाला मंदिर का कपाट आज से एक महीने के लिए बंद हो जायेगा। भगवान अयप्पा के मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने सम्बन्धी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद पिछले पांच दिनों में 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की कोई भी महिला सबरीमाला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकी। अब तक दो पत्रकारों समेत सात महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों के कड़े विरोध पर उन्हें लौटना पड़ा।

रविवार को भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं ने तीन तेलुगु भाषी महिलाओं को मंदिर तक जाने वाली पहाड़ियों पर चढ़ने से रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले महीने 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के भगवान अयप्पा के मंदिर में दर्शन पर लगी सदियों पुरानी रोक हटाने संबंधी फैसला देने के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने अयप्पा मंत्रोच्चारण करते हुए महिलाओं को पहाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया।

सबरीमाला मंदिर के पारंपरिक संरक्षक पांडलम के शाही परिवार ने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं को लेकर ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ मंदिर की पवित्रता को नष्ट करने की कोशिश कर रही थी। महिलाओं को सुरक्षित ले जाने वाली पुलिस ने बताया कि महिलाओं को मंदिर के रीति रिवाजों के बारे में जानकारी नहीं थी। जबकि जो महिला प्रतिबंधित आयु वर्ग में नहीं थीं, उन्हें पवित्र पहाड़ियों पर चढ़ने की इजाजत थी।

मामले पर सीपीआई (एम) के सदस्य एस रामचंद्रन पिल्लई ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करने वाले भक्त अल्पसंख्यक थे और उन्हें पूरे केरल समाज का समर्थन नहीं मिला था। उन्होंने सबरीमाला पर कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था।

केरल मुस्लिम जमैथ काउंसिल ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी। लाखों हिंदू भक्तों की भावनाओं को चोट पहुंचाने के लिए उसे धर्म निकाला किया गया है।

गोवा: कांग्रेस के सपनों पर उसके अपनों ने फेरा पानी

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नई दिल्ली: गोवा में सरकार बनाने का सपना देख रही कांग्रेस पार्टी को उसके ही दो विधायकों ने उसके सपने पर पानी फेर दिया। दरअसल, पार्टी के दो विधायक सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपते कल नई दिल्ली में बीजेपी में शामिल हो गए। उनके इस कदम से कांग्रेस ने राज्य में नंबर वन होने की हैसियत भी गवां दी।

पिछले दिनों कांग्रेस ने दावा किया था कि बीजेपी के कई विधायक उसके संपर्क में हैं। लेकिन उसका यह दावा धरा का धरा रह गया। दोनों विधायकों के बीजेपी में शामिल होते ही विधानसभा का गणित बदल गया है। दोनों के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद बहुमत का आंकड़ा 21 से गिरकर 20 हो गया है। साथ ही विधानसभा में दोनों दलों के विधायकों की संख्या 14-14 यानि बराबर हो गयी है।

गोवा में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस को 17 सीटें मिली थी जबकि बीजेपी को 13 सीटें मिली थी। बीजेपी ने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, गोवा फोरवॉर्ड पार्टी के तीन तीन विधायकों सहित तीन निर्दलीय विधायकों और एक एनसीपी के विधायक के समर्थन से सरकार बनाई थी।

सूत्रों के मुताबिक गोवा कांग्रेस के कुछ और विधायक भी बीजेपी के संपर्क में हैं। अगर कांग्रेस में और टूट हुई तो बीजेपी सरकार के ऊपर से दूसरे सहयोगी दलों का दवाब कम हो जाएगा। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि सत्ता का दरुपयोग हो रहा है, आतंक और भय का माहौल बनाया जा रहा है, जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विरोधी पार्टियों को तोड़ा जा रहा है।

हालाँकि कांग्रेस ऐसे आरोपों की झड़ी पहली बार नहीं लगा रही है। 2017 में चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद सरकार बनाने में नाकामयाब रही। बीजेपी ने दूसरे नंबर की पार्टी होने के बावजूद छोटे दलों के विधायकों को एकजुट किया और सरकार बना लिया।

 

रेप का आरोप लगाने वाली विनीता नंदा पर आलोक नाथ ने ठोका मानहानि का मुकदमा

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हिन्दी फिल्मों और टीवी सीरियल्स में संस्कारी बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध आलोक नाथ ने अपने ऊपर बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली टीवी सीरियल निर्माता विनीता नंदा के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया है। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने नंदा से लिखित माफीनामे और एक रुपये के हर्जाने की मांग की है। हालाँकि आलोक नाथ के ऊपर कई महिलाओं ने आरोप लगाए हैं, लेकिन अब इन सभी आरोपों को अदालत में साबित करना होगा।

बता दें कि #Mee Too अभियान के तहत पूर्व टीवी सीरियल्स निर्माता और लेखिका विनीता नंदा ने बीते हफ्ते आलोक नाथ के ऊपर आरोप लगाया था कि उन्होंने नशीला पेय पदार्थ पिलाकर उनके साथ रेप किया। महिला प्रोड्यूसर ने 19 साल पहले घटी घटना का ज़िक्र करते हुए आलोक नाथ के बारे में कई और खुलासे किए।

महिला का आरोप है कि आलोक नाथ ने अपने घर पर हुई एक पार्टी के दौरान उन्हें नशीला पेय पदार्थ पिलाया और इसके बाद जब वो महिला घर जाने के लिए निकली तो आलोक ने उन्हें लिफ्ट दी। इस दौरान उन्हें गाड़ी में और शराब पिलाई गई और फिर धुंधली यादों के सहारे महिला ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि आलोक नाथ ने उनके साथ रेप किया।

आलोक नाथ इस मामले में अपनी सफाई पहले दे चुके हैं और उनका कहना था, “मैं इस बात से न तो सहमत हूं और न ही इसे झुठला रहा हूं. वो अगर कह रही हैं कि बलात्कार हुआ है तो ऐसा ज़रूर हुआ है लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया है।”

वैज्ञानिकों का दावा, समय की गति को कैद कर सकता है यह कैमरा

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वाशिंटन। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कैमरा विकसित किया है, जिसके जरिये समय को स्थिर कर पाना या यूं कहें समय को कैद करना संभव हो गया है। दरअसल इस कैमरे की मदद से प्रकाश की अत्यंत धीमी गति को कैद किया जा सकता है। दुनिया का सबसे तेज कैमरा कहा जाने वाला यह कैमरा प्रति सेकंड 100 खरब फ्रेम कैद करने में सक्षम है।

अमेरिका स्थित कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह आधुनिक कैमरा प्रकाश और पदार्थ के बीच पारस्परिक प्रभाव को लेकर अब तक के अनछुए रहस्यों के बारे में अंत:दृष्टि दे सकता है। हाल के वर्षों में अरैखिक प्रकाश विज्ञान और छायांकन में नवोन्मेषों के बीच संयोजन से जीवविज्ञान एवं भौतिकी में गतिशील घटनाओं के माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण के नवीनतम और अत्यधिक प्रभावी तरीकों के लिये नये द्वार खुले हैं।

आखिर आम चुनाव से पहले ही यह तूफ़ान क्यों उठा : एमजे अकबर

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नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने कहा कि आखिर यह तूफान आम चुनाव के कुछ महीने पहले ही क्यों उठा? क्या ये कोई एजेंडा है? इन झूठे और आधारहीन आरोपों ने मेरी प्रतिष्ठा और सद्भावना को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है। मैं अपने ऊपर लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा। नाइजीरिया दौरे पर गए केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर रविवार की सुबह दिल्ली लौटे।

विदेश राज्य मंत्री ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मेरे खिलाफ लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। ये सभी आरोप द्वेष भावना से लगाए गए हैं। मैं ऑफिशल टूर पर बाहर था इसलिए पहले जवाब नहीं दे पाया। विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि कुछ तबको में बिना किसी सबूत के आरोप लगाने की बीमारी हो गई है। अब मैं लौट आया हूं और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाए, इसके बारे में मेरे वकील देखेंगे।

बता दें कि #MeToo के तहत करीब 10 महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इससे पहले जैसे ही एमजे अकबर दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकले तो पत्रकारों ने उन पर लगे आरोपों से संबंधित सवालों के बौछार करने लगे, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि मैं बाद में बयान जारी करूंगा।

एमजे अकबर पर लगे आरोपों की होगी जांच : अमित शाह

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देश भर में चल रहे #MeToo कैंपेन के तहत महिलाएं महिलाएं आपबीती शेयर कर रही हैं और बता रही हैं कि जीवन के किस हिस्से और किस वक्त में उन्हें यौन शोषण का शिकार पड़ा या उनसे काम के बदले फेवर मांगा गया। इसी कड़ी में मौजूदा केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार रहे एमजे अकबर पर कई महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। जिसके बाद से उनपर कार्रवाई की मांग उठ रही है। खुद भाजपा की महिला मंत्रियों ने भी अकबर के खिलाफ मोर्चा खोला और कहा कि पीड़िताओं को न्याय मिलना चाहिए।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि विदेश राज्यमंत्री पर लगे आरोपों की जांच होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री पर जो आरोप लगे हैं उनकी सत्यता की भी जांच होनी चाहिए।

अमित शाह ने कहा, ‘देखना पड़ेगा ये सच है या झूठ। हमें पद की सत्यता और जिस व्यक्ति ने इसे पोस्ट किया है उसकी भी जांच करनी होगी। आप मेरे नाम का इस्तेमाल करते हुए भी कुछ लिख सकते हैं। हम इस पर जरूर सोचेंगे।’

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां अविश्वसनीय आरोप लगाए जा सकते हैं। लेकिन उनके इस बयान ने भाजपा में एक बहस शुरू करने का काम जरूर किया है। शाह ने साफ किया है कि एमजे अकबर पर लगे आरोपों के बाद एक नकारात्मक संदेश जा रहा है और पार्टी इसे लेकर चिंतित है। शुक्रवार को अकबर के खिलाफ एक और अकाउंट से मी टू अभियान के अंतर्गत आरोप लगाए गए हैं। सोशल मीडिया पर यौन शोषण के आरोपों को लेकर जारी बहस के कारण पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

अमित शाह का कहना है कि सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां किसी भी तरह के आरोप लगाए जा सकते हैं। चाहे वो कितने भी पुराने क्यों ना हो। लेकिन एमजे अकबर के खिलाफ चल रहे विवाद ने भाजपा को डराने का काम किया है क्योंकि मोदी सरकार में महिलाओं के पक्ष में कई फैसले लिए गए हैं। ऐसे में अपने मंत्री का नाम यौन शोषण के आरोप में आने के कारण भाजपा परेशान है।

उधर इस मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्यमंत्री रामदास अठावले का कहना है कि यदि एमजे अकबर के खिलाफ लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकबर का पक्ष सुनना भी जरूरी है। शिकायतें गंभीर हैं और भाजपा को कार्रवाई करनी चाहिए।

क्यों आते हैं भूकंप ? जानिए, क्या है ‘रिंग ऑफ़ फायर’

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पिछले महीने 28 सितम्बर को इंडोनेशिया में भूकंप और फिर उसकी वजह से आयी सुनामी ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा के बाद अब भी करीब 5,000 लोग लापता हैं। आपदा के बाद सुलावेसी द्वीप से ही 2,000 से ज्यादा शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि अभी भी शहर के मलबे में 5,000 के आसपास लोगों के शव दबे हो सकते हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पालू में 1,636 लोगों की मौत हुई। माना जा रहा है कि आखिरी रिपोर्ट आने तक मौत का यह आंकड़ा पांच हजार से भी ऊपर जा सकता है। सुनामी के दौरान पूरे-पूरे गांव तबाह हो गए थे। सबसे ज्यादा नुकसान इंडोनेशिया के पालू और डोंगला शहरों को हुआ है। बिजली और संचार की व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है।

इंडोनेशिया में आए इस भूकंप का केंद्र एक द्वीप सुलावेसी था। भूकंप की रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.5 थी। भूकंप के जोरदार झटकों की वजह से समुद्र में सुनामी की ऊंची-ऊंची लहरें खड़ी हो गईं, जिन्होंने इस द्वीप पर भारी तबाही मचाई।

इस प्राकृतिक आपदा के कारण इंडोनेशिया में लगातार आने वाले भूकंप और सुनामी फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। इसी साल की शुरुआत में लोमबोक द्वीप में कई तगड़े भूकंप आए थे। जिसमें सबसे ज्यादा खतरनाक 5 अगस्त को आया भूकंप था जिसकी तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 6.2 थी। इस भूकंप में 550 लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह 2010 में 7.5 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके बाद सुमात्रा के तटीय इलाकों में भयानक सुनामी आई थी। जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसी भूकंप की वजह से जावा द्वीप पर 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

28 सितम्बर को आये इस भूकंप और सुनामी के चलते लोगों को 14 साल पहले की सुनामी की तबाही की याद ताजा हो गयी, जब रिक्टर स्केल पर 9.1 तीव्रता के भूकंप ने भयानक सुनामी को जन्म दिया था, जिसका बहुत बुरा असर सुमात्रा पर हुआ था। इतना बुरा कि इसे दुनिया के जाने हुए इतिहास की सबसे खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। इसका असर 14 देशों पर पड़ा था। इस सुनामी का बड़ा शिकार इंडोनेशिया भी बना था, जहां इस सुनामी की वजह से 1 लाख 68 हज़ार लोगों की मौत हो गई थी।

इंडोनेशिया,जावा और सुमात्रा जैसे देशों में अक्सर आनेवाले भूकंप और फिर समुद्र में उठने वाली ऊँची लहरों अर्थात सुनामी के आने के कारणों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इंडोनेशिया भौगोलिक रूप से ‘प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के रिंग ऑफ फायर पर स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखी संबंधी घटनाओं की सक्रियता सबसे ज्यादा होती है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 7,000 झटके लगते हैं, जिनमें ज्यादातर झटके मध्यम तीव्रता के होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह ‘रिंग ऑफ फायर’ सक्रिय ज्वालामुखी वाले इलाके में आता है। प्रशांत महासागर के किनारे-किनारे स्थित यह तटीय इलाका दुनिया का सबसे खतरनाक भू-भाग है। इंडोनेशिया भी इसी खतरनाक और एक्टिव भूकंप जोन में स्थित है और ‘रिंग ऑफ़ फायर’ का हिस्सा है। यही कारण है कि यहां पर इतने ज्यादा भूकंप आते हैं।

यह रिंग ऑफ फायर का इलाका करीब 40 हज़ार किमी के दायरे में फैला है। यहां पर विश्व के कुल सक्रिय ज्वालामुखियों के 75 फीसदी ज्वालामुखी हैं। अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी इलाके में दुनिया के 90 फीसदी भूकंप आते हैं और बड़े भूकंपों में से भी 81 फीसदी इसी इलाके में आते हैं।

 

गुजरात में सहमे उत्तर भारतीय, 20 हजार लोगों ने किया पलायन

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गुजरात के साबरकांठा जिले में एक 14 माह की बच्ची से बलात्कार की घटना के बाद गुजरात में रह रहे उत्तरभारतीयों के खिलाफ नफरत का माहौल बन गया और उत्तर भारत के लोगों पर हमले होने शुरू हुए जिसके चलते अबतक लगभग 20 हजार लोगों को गुजरात से पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। उत्तर भारतीयों पर होने वाले इन हमलों ने सबको हैरान कर दिया है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग इन हमलों का शिकार हो रहे है। इन दोनों प्रदेशों को लोग गुजरात छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं और पलायन का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पलायन के चलते उत्तर गुजरात में कई विनिर्माण समूहों में उत्पादन बाधित हो गया है।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने दावा किया था कि पिछले 48 घंटों में कोई घटना नहीं हुई है। लेकिन इनके बाद ही अहमदाबाद में करीब 47 उत्तर भारतीयों को बंधक बना लिया गया है। गुजरात में रहने वाले प्रवासियों पर किए गए हमलों को लेकर पुलिस ने 35 एफआईआर दर्ज की है और लगभग 450 लोगों को हिरासत में लिया है।

उत्तर भारतीय विकास परिषद के अध्यक्ष महेश सिंह कुशवाहा ने दावा किया है कि पिछले एक हफ्ते में गुजरात से करीब 20,000 उत्तर भारतीयों ने पलायन किया है। बिहार के खगरिया सांसद पप्पू यादव ने मार्च निकालकर इन हमलों की निंदा भी की थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुजरात सीएम से बात की और सुरक्षा का जायजा लिया। दोनों ने कहा कि गुजरात के सीएम ने उन्हें इस तरह की घटनाओं पर सख्त एक्शन लेने का भरोसा दिया है। इस बीच सोमवार शाम को ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जहां पर कुछ लोग उत्तर भारतीयों को निशाना बना रहे हैं।