Home Blog Page 1090

मोदी मेरे साथ दस मिनट मिनट बहस कर के दिखाएं : राहुल गांधी

0

नई दिल्ली – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस अल्पसंख्यक अधिवेशन में प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर बरसे। मोदी को उन्होंने डरपोक तक कह दिया, वहीं उन्होंने तमाम सरकारी संस्थान में आरएसएस के लोगों के बैठे होने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो तीन तलाक बिल को खारिज किया जाएगा।

अल्पसंख्यक अधिवेशन में राहुल गांधी ने आज मोदी पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री मोदी का चरित्र पांच साल तक उनसे लड़ने के बाद पता चल गया है, वह कायर हैं। जब उनके सामने कोई खड़ा होता है तो वह भाग खड़े होते हैं। राहुल गांधी यही नहीं रुके उन्होंने मोदी पर डोकलाम मामले में डर जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, चीन ने अपनी सेना डोकलाम में भेज दी लेकिन प्रधानमंत्री मोदी चीन के सामने हाथ बांधे खड़ें रहे।

मंच से ही मोदी को राहुल ने चुनौती दी कि मंच पर मेरे साथ प्रधानमंत्री मोदी को दस मिनट के लिए खड़ा कर दो और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस करवाओ, वह भाग जाएंगे। राहुल इससे पहले भी अपने भाषणों में कहते आए हैं कि मोदी मेरे साथ दस मिनट मिनट बहस कर के दिखाएं।

राहुल ने कहा, हिंदुस्तान जोड़ने की बात प्रधानमंत्री सिर्फ कर सकते हैं, तोड़ने की नहीं। तोड़ने की करी तो उनको हटा दिया जाएगा। नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस को 2019 में कांग्रेस हराने जा रही है। भारत के संस्थान किसी पार्टी के नहीं हैं। वह देश के हैं और उन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी है। फिर चाहे वह कांग्रेस हो या फिर कोई और पार्टी। उन्हें लगता है कि वह (भाजपा) देश से ऊपर हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा से साढ़े पांच घंटे पूछताछ

0

नई दिल्ली – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने करीब साढ़े पांच घंटे पूछताछ की। उनसे विदेश में कथित तौर पर अवैध संपत्ति रखने के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में गुरुवार को दूसरी बार पूछताछ की गई।

बुधवार को पहली बार वाड्रा से इस मामले में करीब छह घंटे तक पूछताछ की गई थी। मध्य दिल्ली के जामनगर हाउस में ईडी कार्यालय गुरुवार को वह सुबह करीब 11 बजकर 25 मिनट पर पहुंचे। इससे एक घंटे पहले उनके वकीलों की टीम वहां पहुंची।

दो घंटे की पूछताछ के बाद वह दोपहर के भोजन के लिए निकले और करीब एक घंटे बाद पूछताछ के लिए फिर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि वाड्रा से गुरुवार को दोबारा पूछताछ करने तथा ब्रिटेन में अचल संपत्ति हासिल करने के संबंध में और सवाल पूछने की जरूरत थी।

उन्होंने बताया कि उनका बयान धन शोधन निरोधक कानून(पीएमएलए) के तहत दर्ज किया जाएगा जैसे कि बुधवार को किया गया था। मामले के जांच अधिकारी समेत ईडी के तीन अधिकारियों की टीम ने उनसे करीब एक दर्जन सवाल पूछे।

पुरुषों से बराबरी नहीं करनी है, नारी को उससे आगे बढ़ना चाहिए- विश्वनाथ सचदेव

0

                          ‘ज्योतिर्मयी नारी शक्ति के विविध आयाम’ का लोकार्पण

वरिष्ठ पत्रकार एवं नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि नारी को उसकी जो गरिमा हैं उसे बनाए रखना चाहिए। आज भी नारी को लेकर जो स्थितियां हैं उसे बदलने की जरुरत है। पुरुषों से बराबरी नहीं करनी है, नारी को उससे आगे बढ़ना चाहिए। वे ‘ज्योतिर्मयी नारी शक्ति के विविध आयाम’ का लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

नारी सशक्तिकरण के लिए वैचारिक अभियान के अंतर्गत ‘नूतन सवेरा’ के सामयिक विशेषांक ‘ज्योतिर्मयी नारी शक्ति के विविध आयाम’ का लोकार्पण डॉ नीरजा माधव के हाथों मुंबई प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। लोकार्पण के बाद डॉ नीरजा माधव ने कहा कि प्राकृतिक भेद को जीवित रखते हुए नारी को तय करना पड़ेगा कि उसे किस रुप में कर्तव्य को अंजाम देना है। भारतीय रिश्तों में सामजंस्य की बनावट को विवेक से संभालने की चुनौती स्त्री के समक्ष हैं। पुरुषों को कटघरे में खड़े करने के बजाय नारी को विवेक और सद्भभाव से आगे बढ़ना चाहिए।

नवभारत टाईम्स के संपादक सुंदरचंद ठाकुर ने कहा कि आज भी महिलाओं की ओर देखने का दृष्टिकोण सकारात्मक नहीं हैं। महिलाओं को मौका दिया जाएगा तो निश्चित तौर पर वे पुरुषों के मुकाबले बेहतर परिणाम दे सकती हैं। उन्होंने अपनी मां की कहानी बताकर कहा कि हर एक जीवन में मां होती हैं जो सफलता की सीढ़ियों चढ़ने का पहला पड़ाव बनती हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर कार्य करनेवाली किरण उपाध्याय ने कहा कि महिला सर्तक रहती तो उनके अधिकांश समस्या खत्म हो सकती हैं। राजस्थानी महिला मंडल की पूर्व अध्यक्षा उर्मिला रुंगटा ने कहा कि बहुत ही खूबसूरत ढंग से किताब लिखी हैं। शिक्षा और आर्थिक स्वालंबन से महिला को शक्तिशाली बनाया जा सकता हैं।

‘नूतन सवेरा’ के प्रधान संपादक नंदकिशोर नौटियाल ने कहा कि नारी को अपने ही पैरों पर खड़ा होना चाहिए। इस मौके पर लेखिका राजुल की ‘वातायन’ किताब का विमोचन भी किया गया।

अतिथियों का स्वागत आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, बिनीता नौटियाल, प्रमोद सिंह, राजुल हमराही ने किया। सूत्रसंचालन कवि-गीतकार देवमणि पांडेय ने किया। आभार राजीव नौटियाल ने माना। कार्यक्रम के संयोजक थे वरिष्ठ पत्रकार सुरेशचंद्र शर्मा।

इस अवसर पर सर्वश्री रामनारायण सोमानी, डॉ योगेश्वर शर्मा, किशन शर्मा, चंद्रकांत जोशी, गिरेंद्र मित्तल, अनिल त्रिवेदी, मदनमोहन गोस्वामी, हरबंस सिंह बिष्ट, भंवरसिंह राजपुरोहित, मोहन सिंह बिष्ट, ओम व्यास, डॉ सुशीला गुप्ता, वसुधा सहस्त्रबुद्धे, अनंत श्रीमाली, शालिनी वाजपेयी, अशोक हमराही, सुनीता खंडूरी, अदिति खंडूरी, हरप्रीत सिंह बंगा, जगदीश पुरोहित, शार्दुल नौटियाल आदि मुंबई शहर के विभिन्न क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सवर्णों को 10% आरक्षण, लोकसभा चुनाव से पहले सवर्णों को साधने की कोशिश

0

आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने सवर्णों का वोट बैंक साधने की नीयत से एक बड़ा दांव खेला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी कैबिनेट ने सरकारी नौकरी में सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि ये दस फीसदी रिजर्वेशन संविधान के मुताबिक दिए गए 50% के ऊपर होगा। इसके लिए सरकार संविधान में संशोधन कर आरक्षण को 60 फीसदी तक बढ़ाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए मंगलवार को प्रस्ताव लाया जाएगा।

मोदी सरकार के इस फैसले को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सवर्ण वोटरों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सवर्णों को दिए जाने वाले इस आरक्षण का आधार उनकी आर्थिक स्थिति रखा गया है। कहा जा रहा है कि आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।

मोदी सरकार के इस दांव को 2019 लोकसभा चुनाव में सवर्ण वोटरों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बीते साल 2 अप्रैल को दलित आंदोलन के बाद से मोदी सरकार से सवर्ण नाराज चल रहे थे। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सवर्णों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। माना जा रहा है कि इसी को देखते हुए सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, ताकि आने वाले चुनाव में सवर्ण वोट बैंक को साधा जा सके।

मायावती ने कांग्रेस को दी धमकी, 24 घंटे में एमपी और राजस्थान सरकारों ने किया ‘सरेंडर’

0

भोपाल। मध्य प्रदेश के कानून मंत्री पीसी शर्मा ने मंगलवार को यहां कहा कि राज्य सरकार, पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा राजनीतिक पार्टियों और दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए सभी ‘राजनीतिक मामले’ वापस लेगी। यह घोषणा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती द्वारा नई कांग्रेस सरकार को जारी की गई चेतावनी के एक दिन बाद की गई है।
मायावती ने सोमवार को एक चेतावनी भरा बयान जारी कर कहा था कि अगर कांग्रेस बीते साल दलित समूहों द्वारा दो अप्रैल को आहूत भारत बंद के दौरान ‘निर्दोष लोगों’ के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस नहीं लेती है तो उनकी पार्टी राजस्थान व मध्य प्रदेश में सरकार से समर्थन वापस ले लेगी।
कानून मंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ने वाली किसी भी पार्टी का कोई व्यक्ति जिसे भाजपा सरकार ने जेल भेजा है उन राजनीतिक मामलों को वापस लिया जाएगा।”
मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 114 विधायक हैं और बसपा के दो विधायक हैं। विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत के आंकड़े से दो सीटें कम हैं। समाजवादी पार्टी का सिर्फ एक विधायक है और उसने भी सरकार को समर्थन दे रखा है। इसके अलावा चार निर्दलीय विधायक हैं।
उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मायावती की मांग जायज है। पिछली सरकार ने कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे और हमारी सरकार ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करने के बाद उन्हें वापस लेगी। कांग्रेस कार्यालय पर मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा, “हमारी सरकार इस तरह के सभी मामलों की समीक्षा करेगा ताकि बेगुनाहों की रिहाई सुनिश्चित की जा सके।”
बता दें कि राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 99 विधायक हैं और चुनाव पूर्व सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल का एक विधायक है। इसके अलावा बसपा के छह विधायक व 13 निर्दलीय सदस्य हैं।

कब तक यह सब सहते रहेंगे सामान्य नागरिक ?

0

कब तक यह सब सहते रहेंगे सामान्य नागरिक ?

                                                                                          – किशन शर्मा

सामान्य नागरिक केवल टैक्स भरते रहने के लिए ही जीते हैं । किसी भी कारणवश अगर कभी टैक्स भरने में ज़रा सी भी देर हो जाये तो उसका परिणाम भी भुगतना पडता है । सारी नियमावली और सज़ाएं केवल सामान्य नागरिकों के लिए ही होती हैं । अति अमीर को तो कोई छू भी नहीं पाता । बहुत अधिक बात बढ़ जाने पर विदेश भाग जाना उन लोगों के लिए सबसे सुविधाजनक रास्ता बन जाता है । नाम गिनाने और बताने की आवश्यकता नहीं है । सभी जानते हैं उन लोगों को जो अनेक लाख-करोड़ रुपये की गड़बड़ी करके विदेश में राजशाही ठाठ से जी रहे हैं ।

गरीब कहलाने वाले लोगों के अनगिनत बचावकर्ता उपस्थित हो जाते हैं । रातों रात किसी भी स्थान पर अनधिकृत झोपड़ी बन जाती है, फ़िर एक मोहल्ला ही खड़ा हो जाता है । किसी सम्बन्धित अधिकारी को वह अनेक वर्ष तक दिखाई नहीं देते, और बाद में उनका उसपर पूरा अधिकार जताया जाने लगता है । पानी, बिजली, शौचालय, सड़क, सब कुछ मुफ़्त में प्रदान कर दिये जाते हैं, वोट की खातिर । अगर कहीं झोपड़ियों को हटाने या तोड़ने की आवश्यकता आ ही जाये तो झोपड़ी धारकों को पुनर्वसित करने की मांग कर दी जाती है । किसी प्रकार का टैक्स तो ऐसे लोगों पर लगता ही नहीं । मैंने लगभग हर झोपड़ी में टेलीविज़न, पंखे, मोटर साइकिल, फ़्रिज आदि देखे हैं । फ़िर भी वे सब “गरीब” कहलाते हैं और वे किसी प्रकार का कोई टैक्स या बिल का भुगतान नहीं करते ।

आजकल किसानों के नाम पर एक नया खेल शुरू कर दिया गया है । कर्ज़ लेलो, लेते जाओ, चिंता मत करो, क्योंकि उन्हें कर्ज़ की रकम वापस नहीं करनी होगी । अनेक राजनेता भी अपने आप को किसान कहलवाते हैं, जबकि उन्हें किसानी की कोई भी जानकारी नहीं होती । लाखों-करोड़ों रुपये के कर्ज़ हर चुनाव से पूर्व माफ़ कर दिये जाते हैं, और किसान कहलाने वाले लोग तुरंत नये कर्ज़ का आवेदन कर देते हैं । यह सब झेलना पड़ता है, सामान्य नागरिकों को । कोई सरकार मंत्रियों या राजनेताओं से रुपये लेकर तो कर्ज़ माफ़ी करते नहीं हैं, और उसकी रकम बैंकों को वापस करते नहीं हैं । यह सारा बोझ उठाता है वोट बैंक, जबकि प्रशंसा होती है सरकार की और राजनेताओं की । अल्पसंख्यक कहलाने वाले अनेक लोग वास्तव में अब बहुसंख्यक होते जा रहे हैं । परंतु उनको कोई कुछ नहीं कहता । उनके नाम पर अलग राजनीति की जाती रहती है, क्योंकि वे “वोट बैंक” के महत्वपूर्ण सदस्य होते हैं ।

दलित और पिछड़े हुए कहलाने वाले अनगिनत लोग ऊंचे से ऊंचे पद पर विराजमान होकर भी हर सुविधा पाने के अधिकारी होते हैं । वोट के नाम पर यह सब कब तक सहते रहेंगे सामान्य नागरिक ? आरक्षण के रक्षण में सभी राजनेता जुट जाते हैं और अधिक से अधिक प्रतिभाशाली होने पर भी सामान्य नागरिक पिछड़ता जाता है । यह भी सहन करना पड़ता है सामान्य नागरिक को । मेरी एक सलाह है, सभी राजनेताओं को । अगर उन्हें आरक्षण से इतना ही प्रेम है तो अपने परिवार के सभी सदस्यों का इलाज केवल “आरक्षित” डाक्टरों से ही करवाएं । मंत्रीगण अपने सचिव, व्यक्तिगत सहायक, सुरक्षाकर्मी, सेवक आदि केवल “आरक्षित” लोगों को ही नियुक्त करें । उस समय उन्हें बड़े से बड़े उच्च शिक्षित लोगों की आवश्यकता क्यों महसूस होने लगती है, यह सभी जानते हैं । वे तो इलाज के लिये तुरंत विदेश भी चले जाते हैं क्योंकि वहां कोई “आरक्षित” डाक्टर नहीं होता । अधिकतर धनवान लोगों के मकान, कारें, नौकर-चाकर, जन्मदिन और विवाह आदि के समारोह पर लाखों-करोड़ रुपये खर्च कर दिये जाते हैं, और उन्हें अधिकारियों तथा राजनेताओं का भरपूर सहयोग घर बैठे मिलता रहता है । उनके टैक्स के मामले अनेक वर्ष तक अदालतों में चलते रहते हैं ।

मैंने कभी किसी अति अमीर व्यक्ति, राजनेता, फ़िल्मी सितारे को पुराने प्रतिबंधित नोट बदलवाने के लिये बैंक के बाहर लाइन में खड़े हुए नहीं देखा । उनके सारे पुराने प्रतिबंधित नोट कब और कैसे बदल गये, यह बताने की आवश्यकता नहीं है । सारे कष्ट सहने के लिए केवल सामान्य नागरिक को ही चुना जाता है । अति अमीर और तथाकथित गरीब तथा विशेष दर्जे के लोगों को कोई तकलीफ़ नहीं होती, हर तकलीफ़ के लिए हमारे देश में एक ही वर्ग के लोगों को चुन रखा है, और वह है सामान्य नागरिकों का वर्ग । मैं सोचता हूं कि किसी दिन इस सामान्य नागरिक की सहनशक्ति ने जवाब दे दिया तो क्या होगा ? आखिर कब तक यह सब सहते रहेंगे, केवल सामान्य नागरिक ?

 

केदार, यशोधाम एन्क्लेव,
प्रशांत नगर, नागपुर – 440015;
मोबाइल – 8805001042

यह अति आवश्यक था

0

It was very necessary

 

यह अति आवश्यक था
– किशन शर्मा

“अशोभनीय और अमानवीय” शीर्षक अपने पिछले लेख में मैंने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में कुछ तीखी टिप्पणी की थीं । कुछ लोग मुझसे नाराज़ हो गये । कुछ ने मुझे “भा0ज0पा0 विरोधी” और “मोदी विरोधी” भी कह दिया । मैंने किसी का बुरा नहीं माना, क्योंकि कम से कम मैं तो जानता हूं कि मैं राजनीति से दूर दूर तक संबन्ध नहीं रखता । न मैं किसी का भक्त हूं, न मैं किसी का समर्थक हूं और न किसी का विरोधी हूं । मैं एक अति साधारण व्यक्ति हूं और ऐसा ही बना रहना चाहता हूं । मैं एक कलाकार, लेखक, पत्रकार हूं, जिसका काम यही होता है कि वह समय रहते लोगों को चेता दे । फ़िर भी कोई न माने या न समझे, तो कोई क्या कर सकता है । मैं स्पष्टवक्ता हूं और चापलूसी करना या अपने स्वार्थ के लिये किसी की जी-हुज़ूरी करना, मेरे बस की बात नहीं है । मैंने अपनी इस आदत का अनेक बार “मूल्य” भी चुकाया है; परंतु अपनी आदत से बाज़ नहीं आ सका हूं ।

आजकल तो सरकारी पुरस्कार या कोई सरकारी पद पाने के लिये ”भगवा” रूप धारण करने के आदी हो गये हैं लोग । अवसर आने पर यही लोग “भगवा” को ज़मीन में गाढ कर सफ़ेद खादी पहनने लगेंगे या नीली या लाल टोपी धारण कर लेंगे । ऐसे लोगों के पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है । परंतु मेरे जैसे लोग कभी अवसरवादी नहीं हो सकते । न बहुत अधिक की आस है, न बहुत अधिक निराशा है । बस जैसा चल रहा है, वैसा ही चलता रहे, यही कामना रहती है । मैं इस बात से बहुत प्रसन्न नहीं हूं कि कांग्रैस अभी के चुनाव में तीन राज्यों में जीत गई । परंतु इस बात से प्रसन्न अवश्य हूं कि घमंड की हार हो गई । मैं बार बार यह उल्लेखित करना चाहता हूं कि देश का प्रधान मंत्री, केवल किसी एक दल का नेता नहीं होता; बल्कि वह पूरे देश और सभी देशवासियों का नेता होता है । उसके शब्द, उसकी भाषा, उसका व्यवहार कभी भी उसके पद की गरिमा के विरुद्ध नहीं होने चाहियें । मैंने लगभग सभी प्रधान मंत्रियों को निकट से देखा है, सबके साथ मंच साझा किया है, सबको सुना है । किसी प्रधान मंत्री ने इस निचले दर्जे की भाषा का प्रयोग कभी नहीं किया, जिस स्तर पर नरेन्द्र मोदी चले जाते रहे हैं । राजनेताओं या राजनीतिक दलों की आलोचना करना या उनपर कटाक्ष करना राजनीतिक दल के नेता को ही करना चाहिये । यह काम भा0ज0पा0 राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह करें, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी; परंतु देश का प्रधान मंत्री निम्नस्तरीय भाषा और शब्दों का प्रयोग, नाटकीय ढंग से सार्वजनिक मंच पर करे, तो मुझे स्वीकार्य नहीं है ।

राजनेता एक दूसरे की प्रशंसा करें, आलोचना करें, मज़ाक उडाएं; यह सब उनके अपने और अपने दल के स्वास्थ्य के लिये आवश्यक हो सकता है; परंतु देश का अग्रणी मुखिया इस प्रकार का व्यवहार करे तो ऐसा उसी के दल के स्वास्थ्य के लिये घातक सिद्ध हो सकता है । अभी के चुनाव में यह साबित भी हो गया । मैं इस चुनाव के परिणाम से आगामी लोक सभा चुनाव के परिणाम की तुलना नहीं करना चाहता । मेरा स्पष्ट मत है कि कुछ नेताओं के गर्व और अशोभनीयता पर अंकुश लगाने के लिये यह अति आवश्यक हो गया था । मैं यह जानता हूं कि इससे सबक लेना सम्बन्धित दल और उसके नेताओं के लिये ज़रूरी नहीं है । हो सकता है कि वे और निचले स्तर पर भी उतर जाएं । विपक्षी दलों के नेताओं को भी उछलने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस परिणाम से अगले चुनाव पर कोई बहुत बडा असर पडेगा, यह मैं नहीं मानता । देश की जनता के समक्ष वर्तमान नेतृत्व का कोई सशक्त विकल्प भी नहीं है । परंतु वर्तमान नेतृत्व को इन परिणामों से सीख लेते हुए अपने व्यवहार में उचित परिवर्तन लाने की नितांत आवश्यकता है ।

मेरा सुझाव है कि राजनीतिक दल के नेतागण पूरी नाटकीयता करते रहें, कैसी भी भाषा का उपयोग करते रहें, कैसे भी आरोप-प्रत्यारोप करते रहें; परंतु देश के नेतृत्व के प्रमुख को अपने शब्दों, भाषा, व्यवहार आदि में संयम बरतना अति आवश्यक है । अभी भी समय है सुधार करने के लिये । अन्यथा परिणाम बहुत घातक हो सकते हैं । मुझे ऐसा लगता है, कि जो कुछ हाल के चुनाव में हुआ, और जो छोटा सा झटका लगा; कुछ नेताओं के घमंड के नशे को उतारने के लिये यह अति आवश्यक था ।

901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव
प्रशांत नगर, नागपुर – 440015
मोबाइल – 8805001042

अशोभनीय और अमानवीय

0

अशोभनीय और अमानवीय

                                                                                     – किशन शर्मा

मैं प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रशंसक रहा हूँ, परंतु दिन-ब-दिन मेरी धारणाएं बदलती जा रही हैं और प्रशंसा का स्थान दुखभरी और क्षोभदायी भावनाओं से भरी आलोचना लेती जा रही है । मैं कभी भी किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा भी नहीं रहा हूं और किसी भी राजनीतिक दल का विरोधी भी नहीं रहा हूं ।

एक कलाकार और निष्पक्ष नागरिक के रूप में “जो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिये” की भावनाओं से प्रेरित होकर उन सभी के प्रति आदर और स्नेह रखता रहा हूं, जिन्होंने मुझे स्नेह दिया, मान दिया, अपनापन दर्शाया, और पहचान बनाये रखी । देश के सभी राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, अनगिनत केन्द्रीय मंत्री, अनेक राज्यों के राज्यपाल और मुख्य मंत्री, महाराष्ट्र के सभी राज्यपाल और मुख्य मंत्री तथा प्रधान न्यायाधीश, सेना के तीनों अंगों के प्रमुख, अन्य सुरक्षा बलों के प्रमुख, अनेक विदेशी हस्तियों, फ़िल्मी हस्तियों, वरिष्ठ पत्रकारों, उद्योगपतियों, डाक्टरों आदि ने मुझे सदैव स्नेह और अपनापन ही दिया है । मैं भी सभी का पूरा पूरा आदर करता रहा हूं । केवल मंच संचालक या गायक के रूप में ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत मित्र के रूप में भी मुझे अनेक गणमान्य व्यक्तित्वों के निकट रहने के अनेक अवसर मिलते रहे हैं ।

वर्तमान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्य मंत्री थे, तब मुझे जानते थे; परंतु प्रधान मंत्री बनने के बाद मेरे पत्रों के उत्तर तो दूर, उनकी प्राप्ति की सूचना तक मुझे कभी नहीं मिल सकी । इसलिये मैंने पिछले काफ़ी समय से उन्हें किसी भी विषय पर पत्र लिखना ही बंद कर दिया है । फ़िर भी मैं लंबे समय तक उनका प्रशंसक बना रहा । अब मेरी व्यक्तिगत भावनाओं को थोडी ठेस लगने लगी है, और मैं उनका विरोधी तो नहीं बन गया हूं, परंतु कभी कभी आलोचक अवश्य बनने लगा हूं । मैं जिन बातों से आहत होता गया हूं, उन बातों का उल्लेख करना भी आवश्यक है ।

पहली बात तो यह है कि एक प्रधान मंत्री की भाषा कभी भी स्तरहीन नहीं होनी चाहिये । दुर्भाग्यवश, नरेन्द्र मोदी, अपने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए उन्हीं की तरह की निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग करने लग जाते हैं । मैंने पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, या मनमोहन सिंह को कभी निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग करते हुए नहीं सुना । प्रधान मंत्री के पद की गरिमा का सम्मान कम से कम स्वयं प्रधान मंत्री को तो रखना चाहिये । मेरा स्पष्ट मत है कि देश का प्रधान मंत्री, किसी एक दल का नहीं बल्कि सम्पूर्ण देश का नेता होता है और उसके शब्द तथा उसकी भाषा सदैव गरिमापूर्ण होनी चाहिये ।

नरेन्द्र मोदी अनेक बार ऐसे शब्दों और ऐसी भाषा का प्रयोग कर जाते हैं जो उनके पद के अनुरूप नहीं हैं और अशोभनीय लगते हैं । दूसरी बात यह है कि वे कुछ अवसरों पर कुछ अति विशिष्ट व्यक्तियों का जानबूझ कर अनादर सा कर जाते हैं । लाल कृष्ण आडवाणी एक अति सम्माननीय व्यक्तित्व हैं । वे पूर्व उप-प्रधान मंत्री भी हैं और वरिष्ठतम राजनेता भी हैं । उनको सार्वजनिक तौर पर दुर्लक्षित करने के कुछ अवसर कम से कम मैंने तो अवश्य देखे हैं ।

एक समारोह में मंच पर लाल कृष्ण आडवाणी खडे थे, उनके सामने से नरेन्द्र मोदी उनकी तरफ़ देखे बिना आगे बढ गये और उनसे बहुत छोटे कुछ अन्य नेताओं से रुक कर बात करते रहे । मैंने स्वयं देखा कि लाल कृष्ण आडवाणी को उन्होंने राजघाट पर भी पूरी तरह दुर्लक्षित किया । मुरली मनोहर जोशी के साथ भी ऐसा हुआ है । यह भी मेरे विचार से एक प्रधान मंत्री के लिये अशोभनीय ही है । तीसरी घटना अभी हाल ही में गुजरात में हुई है । सरदार पटेल की विश्व भर में सबसे ऊंची मूर्ति को जब राष्ट्र को समर्पित करने का समारोह आयोजित किया गया था, तब प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गुजरात के दो भा0ज0पा0 नेता जो अब अलग अलग राज्यों के राज्यपाल हैं, गुजरात के मुख्य मंत्री तथा गुजरात के कुछ भा0ज0पा0 नेतागण तेज़ी से पूरे समारोह स्थल पर चले जा रहे थे । मैंने टेलीविज़न पर तो समारोह नहीं देखा, क्योंकि मैं टी0वी0 देखता ही नहीं हूं, परंतु मुझे पूरे समारोह का एक वीडियो प्राप्त हुआ, जिसे मैंने देखा । मुझे बहुत पीडा हुई यह देखकर कि गुजरात के राज्यपाल, प्रो0 ओ0 पी0 कोहली, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग भी हैं और आयु के लिहाज से भी बहुत वरिष्ठ भी हैं, वे अपनी बेंत के सहारे सबसे पीछे धीरे धीरे हर जगह अकेले चल रहे थे ।

प्रधान मंत्री को तो यह मालूम था कि राज्यपाल दिव्यांग हैं और सबके साथ साथ पूरे विशाल स्थल पर नहीं चल सकते हैं । या तो प्रधान मंत्री को उन्हें पूरे समारोह स्थल पर पैदल चलने से मना कर देना चाहिये था, या पहले ही मूर्ति के स्थल पर पहुंच कर रुकने के लिये कह देना था, और या उनके लिये एक व्हील चेयर की व्यवस्था करवा देनी चाहिये थी । मैं राज्यपाल ओ0 पी0 कोहली का कष्ट से भरा चेहरा देखकर विचलित हो गया, और मैंने यह भी देखा कि वे हर जगह सबसे पीछे बेंत के सहारे बडी मुश्किल से पहुंच पा रहे थे । प्रधान मंत्री तथा मुख्य मंत्री सहित किसी भी नेता ने इस ओर या तो ध्यान ही नहीं दिया, या राज्यपाल की दशा को दुर्लक्षित करते रहे । मुझे यह अमानवीय व्यवहार लगा । मेरा स्पष्ट मत है कि एक प्रधान मंत्री को अपने पद की गरिमा के लिहाज से ऐसे व्यवहार से सदैव बचना चाहिये, जो अशोभनीय और अमानवीय हो ।

901, केदार,
यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर,
नागपुर – 440015;
मोबाइल – 8805001042

‘मोदी की तारीफ’ पर भड़के तारिक अनवर कांग्रेस में शामिल

0

नई दिल्ली। राफेल विवाद पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार के पीएम मोदी के समर्थन में दिए गए बयान से नाराजगी जताते हुए पार्टी के दिग्गज नेता तारिक अनवर ने एनसीपी से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली।

तारिक अनवर ने एनसीपी का दामन छोड़ने के बाद लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था। बता दें कि तारिक अनवर ने राफेल पर शरद पवार के मोदी सरकार को लेकर दिए गए बयान से नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। तारिक अनवर को लेकर कयास लगाए जा रहे थे जल्द ही पार्टी में शामिल हो सकते हैं। जबकि कांग्रेस ने भी कहा था कि तारिक अनवर चाहें तो फिर से पार्टी में वापस आ सकते हैं।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार के राफेल विवाद पर दिए गए बयान से अनवर इतने नाराज थे उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तारिक अनवर ने कहा था कि जब राफेल मामले में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरा विपक्ष आवाज उठा रहा है, तब शरद पवार ने अप्रत्यक्ष तौर पर पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी, जोकि गलत है।

बता दें कि शरद पवार ने राफेल डील को लेकर जारी विवादों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए कहा था कि उनकी मंशा पर शक नहीं किया जा सकता। तारिक अनवर बिहार की कटिहार सीट से एनसीपी के सांसद हैं और यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

दलित समाज का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी के साथ होगा : अठावले

0

लखनऊ। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि सीबीआई में मचे घमासान से उसकी ही प्रतिष्ठा पर सवालिया निशान लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक संस्था के अंदर मचे विवाद पर राहुल गाँधी को राजनीति नहीं करना चाहिए।

कानपूर स्थित सर्किट हाउस में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि सीबीआई पर जनता बहुत भरोसा करती है ऐसे में उसकी कार्रवाई पारदर्षी होनी चाहिए। रिश्वतखोरी प्रकरण से सीबीआई की साख खराब हुई है। सीबीआई ने अपनी प्रतिष्ठा को कलंकित करने का काम किया है और इससे उसकी विश्वसनीयता भी कम हुई है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि सीबीआई विवाद के पीछे सरकार का कोई दोष नहीं है।

अठावले ने कहा कि इस विषय पर कांग्रेस और उनके अध्यक्ष राहुल गांधी को राजनीति करने की आवश्यकता नहीं है। मोदी सरकार को राहुल गांधी की इस राजनीति से कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। राफेल डील में कुछ भी गलत नहीं किया गया है लेकिन राहुल गांधी को दिन-रात रॉफेल ही नजर आता है। राहुल, मोदी का कभी विकल्प नहीं हो सकते।