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भगोड़े नीरव मोदी के पास मिले 3 पासपोर्ट

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नई दिल्ली – भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के पास तीन पासपोर्ट हैं। लंदन पुलिस की गिरफ्तारी के बाद जब उसे शहर के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, तब उसके पास तीन पासपोर्ट होने का पता चला। लंदन पुलिस (स्कॉटलैंड यार्ड) ने भारतीय जांच एजेंसियों की तरफ से कारोबारी को गिरफ्तार किया है।

नीरव मोदी के वकीलों की टीम की अगुवाई कर रहे जॉर्ज हेपबर्न स्कॉट ने अदालत से जमानत के लिए आग्रह करते समय कई यात्रा दस्तावेज होने की बात कही। जमानत अर्जी को जिला न्यायाधीश मारी मैलोन ने खारिज कर दिया।

भारत का खुशहाली के मामले में और नीचे आया नंबर

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खुशहाली के मामले में भारत की हालत पिछले साल के मुकाबले और बिगड़ी है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट में इस साल भारत 7 स्थान नीचे चला गया है। 156 देशों की इस लिस्ट में भारत का 140वां नंबर है। इसका मतलब है कि बाकी 139 देशों के लोग भारत के लोगों से ज्यादा खुश हैं।

खुशहाली की इस लिस्ट में भारत अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से भी पीछे है। इस लिस्ट में पाकिस्तान 67वें, बांग्लादेश 125वें और चीन 93वें नंबर पर है।

विश्व के 10 सबसे खुशहाल देश
फिनलैंड
डेनमार्क
नॉर्वे
आइसलैंड
नीदरलैंड
स्विट्जरलैंड
स्वीडन
न्यूजीलैंड
कनाडा
ऑस्ट्रिया

रैंकिंग में सबसे नीचे रहने वाले 10 देश

साउथ सूडान (रैंक- 156)
मध्य अफ्रीकी गणराज्य (रैंक- 155)
अफगानिस्तान (रैंक- 154)
तंजानिया (रैंक- 153)
रवांडा (रैंक- 152)
यमन (रैंक- 151)
मलावी (रैंक- 150)
सीरिया (रैंक- 149)
बोत्सवाना (रैंक- 148)
हैती (रैंक- 147)

संयुक्त राष्ट्र की खुशहाली लिस्ट 6 कारकों (आय, स्वस्थ जीवन की उम्मीद, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता) के आधार पर तय की जाती है। संयुक्त राष्ट्र की सातवीं सालाना वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट में इस बात पर भी गौर किया गया है कि लोगों के बीच चिंता, उदासी और गुस्से सहित नकारात्मक भावनाओं में बढ़ोतरी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र की लिस्ट में फिनलैंड को लगातार दूसरे साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश माना गया है। उसके बाद डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड और नीदरलैंड का नंबर है। वहीं युद्धग्रस्त दक्षिण सूडान के लोग अपने जीवन से सबसे अधिक नाखुश हैं, इसके बाद मध्य अफ्रीकी गणराज्य (155), अफगानिस्तान (154), तंजानिया (153) और रवांडा (152) हैं। दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक होने के बावजूद, अमेरिका खुशहाली के मामले में 19 वें स्थान पर है।

देश को चौकीदार नहीं, ईमानदार PM की जरुरत : ओवैसी

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान पर हमला बोला है। पुलवामा, उरी और पठानकोट हमलों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए पूछा है कि आप कैसे चौकीदार हैं।

समझौता ब्लास्ट केस में ट्रायल कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की मांग करते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असल में देश के ‘चौकीदार’ हैं तो असीमानंद को बरी किए जाने के खिलाफ सरकार को अपील करनी चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओवैसीने कहा, ‘इस देश को चौकीदार की जरूरत नहीं है। इस देश को एक ईमानदार प्रधानमंत्री की जरूरत है।…देश को ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो संविधान को समझता हो, जिसकी भावना धर्मनिरपेक्षता, न्याय, बंधुत्व और आजादी है।’

ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी को 29 तक हिरासत में भेजा

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नई दिल्‍ली : ब्रिटेन की अदालत ने पीएनबी बैंक घोटाले में फरार आरोपी नीरव मोदी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। 29 मार्च तक हिरासत में भेजा। अदालत के न्यायधीश ने कहा कि इस बात पर विश्वास करने के व्यापक सबूत हैं कि जमानत देने पर नीरव मोदी समर्पण नहीं करेंगे।

इससे पहले, नीरव मोदी को लंदन के होलबोर्न में गिरफ्तार किया गया। इसे भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। खबर है कि नीरव मोदी की पत्‍नी एमी मोदी के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी हुआ है।

इससे पहले, भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बुधवार को स्कॉटलैंड यार्ड ने गिरफ्तार कर लिया करीब दो अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामले में वांछित भगोड़े कारोबारी को भारत वापस लाने के प्रयासों की दिशा में इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रत्यर्पण निदेशालय ने मनी लौंड्रिंग के एक मामले में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिये लंदन की एक अदालत में अपील की थी। अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को नीरव मोदी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था।

स्कॉटलैंड यार्ड ने एक बयान में कहा, “नीरव दीपक मोदी (जन्मतिथि: 24 फरवरी 1971) को भारतीय एजेंसियों की तरफ से 19 मार्च को हॉलबार्न में गिरफ्तार कर लिया गया। उसे 20 मार्च को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।”

गिरफ्तारी की जगह से इस बात के संकेत मिलते हैं कि नीरव मोदी वेस्ट एंड के सेंटर पाइंट के उसी आलीशान अपार्टमेंट में रह रहा था जहां उसके होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। ऐसा लग रहा है कि उसे प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया गया है। नीरव के मामले में ब्रिटेन की अदालत की उन्हीं प्रक्रियाओं का दोहराव होगा जो धोखाधड़ी एवं मनी लौंड्रिंग के मामले में अप्रैल 2017 में विजय माल्या की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। माल्या उसके बाद से जमानत पर है।

एनआईए कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी आरोपी किया बरी

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नई दिल्ली – समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस के सभी आरोपी बरी हो गए हैं। हरियाणा के पंचकूला की विशेष एनआईए कोर्ट ने असीमानंद समेत मामले के सभी चारों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है। असीमानंद के अलावा बरी होने वालों में कमल चौहान, राजिंद्र चौधरी और लोकेश शर्मा के नाम शामिल हैं।

अपना फैसला सुनाने से पहले कोर्ट ने केस में फैसले से ठीक पहले गवाही के लिए आए एक पाकिस्तानी नागरिक के आवेदन को ठुकरा दिया। इससे पहले 6 मार्च को इस केस में अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए फैसले की तारीख 11 मार्च तय की थी। लेकिन 11 मार्च को अंतिम समय में एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा केस में गवाही दर्ज कराने के लिए आवेदन दाखिल किए जाने की वजह से कोर्ट ने अपना फैसला टाल दिया था।

इस मामले में जनवरी 2014 में एनआईए की अदालत ने दक्षिणपंथी नेता स्वामी असीमानंद और तीन अन्य आरोपियों- कमल चौहान, राजिंद्र चौधरी और लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप तय किए थे। फैसले के लिए कोर्ट में मुख्य आरोपी असीमानंद, कमल चौहान, लोकेश शर्मा और राजिंदर चौधरी सभी मौजूद थे।

गौरतलब है कि 18 फरवरी 2007 को दिल्ली से लाहौर जाने वाली समझौता एक्सप्रेस में हरियाणा के पानीपत के पास विस्फोट हुआ था। इस विस्फोट में 68 लोगों की मौत हुई थी,। मरने वालो में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे। हालांकि मृतकों में 10 भारतीय और 15 अज्ञात भी थे। इन 68 लोगों में से 64 यात्री थे जबकि अन्य चार रेलवे अधिकारी थे।

मामले की जांच में एटीएस को इस ब्लास्ट में ‘अभिनव भारत’ नाम के संगठन के शामिल होने के संकेत मिले थे। जिसके बाद इस केस को एनआईए को सौंपा दिया गया था। एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था।

जेल से लोकसभा चुनाव लड़ेगा ट्रिपल मर्डर का आरोपी हाजी इजलाल

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मेरठ – मेरठ के बहुचर्चित गुदड़ी बाजार तिहरे हत्याकांड का आरोपी इजलाल ने जेल से लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है। बता दें कि इजलाल इस समय मेरठ की जिला जेल में बंद है। इस बात की पुष्टि इजलाल के भाई परवेज ने की है। परवेज ने बताया कि जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

22 मई 2008 में मेरठ के थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत गुदड़ी बाजार में मेरठ कॉलेज के तीन छात्र सुधीर उज्जवल, सुनील ढाका और पुनीत गिरि की निर्मम तरीके से तलवार से काटकर हत्या कर दी गई थी। तीनों के शवों को कार की डिग्गी में डालकर हत्यारोपियों ने बिनौली नहर के पास फेंकने की कोशिश की थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पूरा शहर हिल गया था। इस हत्याकांड की गूंज प्रदेश और देश की राजधानी तक सुनाई दी थी। हत्याकांड के खिलाफ मेरठ के छात्र सड़कों पर उतर आए थे। कई दिन तक व्यापारियों ने बाजार बंद रखा था।

हत्याकांड का मुख्य आरोपी गुदड़ी बाजार कोतवाली निवासी हाजी इजलाल साल 2008 से मेरठ जेल में बंद है। इजलाल के भाई हाजी परवेज ने का कहना है कि इजलाल के लिए कांग्रेस और बसपा से टिकट मांगा था। इजलाल की मां जुबैदा ने 2005 में बसपा के समर्थन से मेयर का चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गई थी। इजलाल का पर्चा भरवाने के लिए कोर्ट से अनुमति जा रही है। परवेज का कहना है कि मामला अभी चल रहा है।

इस बार भी नहीं लड़ूंगी लोकसभा चुनाव, मायावती का ऐलान

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नई दिल्ली – बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा ऐलान किया है। मायावती ने कहा है कि वो 2019 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।

बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मायावती ने कहा, “मैं जब चाहूं, लोकसभा का चुनाव जीत सकती हूं। कभी भी चुनकर संसद में जा सकती हूं। हमारा गठबंधन मजबूत स्थिति में है, फिर भी मैं चुनाव नहीं लड़ूंगी। अभी पिछड़ों के लिए लड़ना है और पूरे यूपी पर ध्यान केंद्रित करना है।”

मायावती ने कहा, “मौजूदा हालात को देखते हुए और पार्टी जनहित को लेकर यह फैसला लिया है। मुझे पूरा भरोसा है कि मेरी पार्टी के लोग मेरे इस फैसले को समझेंगे और पूरी लगन से गठबंधन को जिताने में जुट जाएंगे।”

आगे जहां से चाहूं, सीट खाली कराकर चुनाव लड़कर संसद जा सकती हूं। अगर मैं चुनाव लड़ती हूं तो मेरे मना करने के बाद भी कार्यकर्ता मेरी लोकसभा सीट पर प्रचार करने जाएंगे, इससे बाकी सीटों पर चुनाव प्रभावित होगा।

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन का जीतना ज्यादा जरूरी है, राजनीति में कई बार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, अभी देशहित और पार्टी के मूवमेंट को देखते हुए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है।

राजनीति में परिवारवाद

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युग युग से आमतौर पर यही चलन रहा है कि “राजा” का बेटा “राजा” ही होता है, बल्कि “राजा” का बेटा ही “राजा” होता है । किसी राजा के बेटा न हो तो बेटी या परिवार का कोई अन्य सदस्य राजा बनता रहा है । अन्य क्षेत्रों में भी अधिकांश लोगों ने इसी चलन को बढावा दिया है । डाक्टर का बेटा या बेटी डाक्टर ही बनाये जाते हैं । मेरे एक मित्र डाक्टर साहब ने अपने प्रतिभाहीन और लगभग निष्क्रिय बेटे को लाखों रुपये का अनुदान और रिश्वत देकर केवल इसलिये डाक्टर बनाने का प्रयास किया क्योंकि उनके क्लिनिक को उनके बाद चलाने के लिये डाक्टर कहलाने वाला कोई चाहिये था । अनेक बच्चे तो केवल इसीलिये पढाई भी अधिक नहीं करते रहे क्योंकि उन्हें अपने पारीवारिक व्यापार या धंधे को ही आगे बढाना होता था । परंतु कला के क्षेत्र में यह प्रयास असफ़ल ही होता रहा है ।

हिन्दी फ़िल्म जगत को तो यह श्राप ही मिला हुआ है कि किसी फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, अभिनेत्री, गीतकार, संगीत निर्देशक, गायक की दूसरी पीढी कुछ भी करने में सफ़ल नहीं होगी । अनेक फ़िल्मी लोग अपने बेटे या बेटी को फ़िल्म जगत में स्थापित करने के प्रयास में खुद भी बर्बाद हो गये । राजनीति के क्षेत्र में पहले इतना अधिक परिवारवाद नहीं था । फ़िर भी स्वतंत्र भारत में शुरू से ही कुछ बडे नेताओं ने परिवारवाद को ही प्राथमिकता दी, और अनेक बडे नेता इस प्रयास में सफ़ल भी हुए । परंतु वर्तमान में यह प्रथा अपनी सारी गरिमा खोने लगी है । किसी भी दल का कार्यकर्ता, जीवनभर केवल कार्यकर्ता ही बना रह जाता है, और दरी बिछाने, माइक लगाने, मंच तैयार करने, भीड जुटाने, और प्रचार सामग्री बांटने में ही उसका जीवन समाप्त हो जाता है । वह कभी भी स्वयं नेता नहीं बन पाता, क्योंकि उसके दल के नेता की पत्नी, बेटा, बेटी, भतीजा, भतीजी, साला, बहन, बहनोई, भाई, भाभी में से कोई भी, कभी भी नेता बनकर अवतरित हो जाता है ।

इस प्रकार नेता बनने वाले का इसमें कोई दोष नहीं होता, क्योंकि उसको “साहब” कहकर पैर छूने वालों की कोई कमी नहीं होती । वह व्यक्ति नेता बनने लायक है या नहीं, इस बारे में अवसरवादी चमचे कभी सोचते भी नहीं; बस “साहब” कहकर आगे-पीछे घूमने लगते हैं । कम उम्र के युवा भी “साहब” कहलाकर अकडने लग जाते हैं । किसी वरिष्ठ नेता को साहब कहा जाये, इसमें मेरा कोई विरोध नहीं है; परंतु नये नये युवा को केवल परिवारवाद और चापलूसी के कारण “साहब” कहा जाये, यह कम से कम मुझे तो स्वीकार नहीं है । नेतागण यह कहते रहते हैं कि हमारे परिवार के सदस्य भावी नेता नहीं बनेंगे तो क्या सडक पर भीख मांगेंगे ।

यह परम्परा किसी की काबलियत को जांच कर ही अपनाई जानी चाहिये, अन्यथा केवल सम्बन्धित नेता को या उसके दल को ही नहीं, पूरे देश को उसका बुरा परिणाम भुगतना पडता है । लगभग सभी प्रसिद्ध राजनेताओं को अपने परिवार के सदस्यों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति नज़र ही नहीं आता, और इसलिये हर नेता का और हर दल का सामान्य कार्यकर्ता केवल सामान्य कार्यकर्ता ही बना रह जाता है, भले ही वह अपने नेता और दल के प्रति कितना भी निष्ठावान और प्रतिभावान क्यों न हो । मेरा स्पष्ट मत है कि कम से कम वर्तमान राजनीति में केवल परिवारवाद को ही आगे बढाने की अस्वस्थ और गलत परम्परा को अपने स्वयं के, सम्बन्धित राजनीतिक दल के, और देश के हित में आंख मींचकर अपनाने की स्वार्थपूर्ण नीति को बदलने की नितांत आवश्यकता है ।

निर्णय तो राजनेताओं को ही लेना है, परंतु मैं बिना मांगी अपनी राय तो दे ही सकता हूं । मतदाता भी इस बारे में सोचें और ऐसे पारीवारिक नेताओं को समर्थन देने से पूर्व उनमें से हर एक की काबलियत और क्षमता का आंकलन अवश्य करें । ऐसा न हो कि यह परिवारवाद की अस्वस्थ परम्परा बाद में विवाद का कारण बन जाये और फ़िर सभी लोग पछताने लगें ।

किशन शर्मा,
मंच संचालक और विविध भारती के पूर्व वरिष्ठ उद्घोषक एवं ज्येष्ठ पत्रकार
901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर – 440015 ; मोबाइल – 8805001042

मोदी और शाह मेरे साथ संस्कृत में मंत्र पढ़ने का मुकाबला करो – ममता बनर्जी

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कोलकाता – पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को मंत्र पढ़ने में अपना मुकाबला करने की चुनौती दी है। मंगलवार को कोलकाता में बनर्जी ने कहा, पूजा का मतलब सिर्फ तिलक लगा लेना नही होता ना ही इससे पूजा पूरी हो जाती है। अमित बाबू और मोदी बाबू आएं और मुझसे मंत्र पढ़ने का मुकाबला कर लें कॉम्पटीशन करें। पता चल जाएगा कि संस्कृत ज्यादा आती है और किसे कितने मंत्र आते हैं।

ममता बनर्जी ने कोलकाता में खुद को हिन्दुओं की हितैषी कहने पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि ये लोग सिर्फ दिखावा करते है। बार-बार मंदिर जाकर पूजा को भी दिखावे की तरह ही करते हैं। अगर उन्हें मंत्र आते हैं तो मुझसे मुकाबला कर लें। ममता ने कहा कि भाजपा सालों से अयोध्या में मंदिर की राजनीति कर रही है लेकिन कभी इसे नहीं बना पाई क्योंकि वो मंदिर को राजनीतिक फायदे की तरह से इस्तेमाल करती है।

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधती रहती है। इससे पहले राफेल में भ्रष्टातार और सीबीआई के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप भी वो मोदी पर लगा चुकी हैं। वो भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की कोशिशें भी लगातार करती रही हैं।

आगामी लोकसभा चुनाव के चलते ममता बनर्जी और भाजपा नेता एक बार फिर एक-दूसरे पर हमलावर हैं। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। यहां सात चरणों में चुनाव होंगे। टीएमसी, लेफ्ट और कांग्रेस के अलावा भाजपा भी इस चुनाव में राज्य में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है।

शिवसेना बोली, इस बार होगी NDA की सरकार

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मुंबई: शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि 2014 में बनी सरकार बीजेपी की थी जबकि अगली सरकार एनडीए की होगी। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि उन्होंने 2014 के राजनीतिक हालात में बदलाव का पूर्वानुमान व्यक्त किया था और अब 2019 लोकसभा चुनाव के राजनीतिक हालात का पूर्वानुमान जाहिर कर रहे हैं। राउत ने कहा कि बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनावों में करीब 210 सीटें मिल सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए को करीब 300 सीटें मिलेंगी। इस बार लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल जबकि अंतिम चरण का मतदान 19 मई को होगा। नतीजों की घोषणा 23 मई को होगी।

बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी शिवसेना के नेता राउत ने कहा कि अभी बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं दिख रहा, लेकिन यदि बीजेपी को 200 से कम सीटें मिलती हैं तो अगले प्रधानमंत्री का नाम तय करने में एनडीए के घटक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 282 सीटें मिली थीं जो 1984 के लोकसभा चुनावों के बाद किसी पार्टी को मिली सबसे ज्यादा सीटें हैं।

राउत ने कहा कि करीब साढ़े तीन साल पहले “मैंने कहा था कि 2014 में देश के हालात और 2019 की स्थिति के बीच बड़ा फर्क है। साल 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी थी। साल 2019 में यह (सरकार) एनडीए की होगी।”

सीटों के बारे में पूछने पर राउत ने कहा कि बीजेपी को करीब 210 जबकि एनडीए को 300 सीटें मिल सकती हैं। उन्होंने संकेत दिए कि पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद राजनीतिक विमर्श बदल गया है। लोग केंद्र में स्थिर सरकार चाहते हैं। राउत से जब पूछा गया कि बीजेपी और शिवसेना ने पिछले चार साल से चल रही जुबानी जंग को भुलाकर गठबंधन जारी रखने का फैसला क्यों किया, इस पर उन्होंने कहा, “राष्ट्रहित में गठबंधन किया गया।”

यह पूछे जाने पर कि क्या आपको लगता है कि मोदी ने हालिया दिनों में अपना आक्रामक अंदाज छोड़ा है, इस पर उन्होंने कहा कि सभी को विनम्र रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “आपको लोगों के सामने झुकना पड़ेगा। कोई उनका आका नहीं हो सकता। न तो नेहरू, न तो अंग्रेज और न ही मुगल ऐसे बन सके। आपको विनम्र बनना होगा।”

राउत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल करार का मुद्दा आक्रामक तरीके से उठाया था, लेकिन पुलवामा हमले के बाद यह मुद्दा पीछे चला गया। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर राउत ने कहा, “यह मुद्दे अहम हैं, लेकिन अब इन्हें नई लोकसभा में उठाया जाएगा। हम इन मुद्दों को छोड़ने वाले नहीं हैं।”