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सुप्रीम कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पेश करने का मुलायम पर आरोप

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नई दिल्ली – समाजवादी पार्टी (एसपी) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव पर उच्चतम न्यायालय में एक शपथपत्र दायर करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की फर्जी रिपोर्ट लगाने का आरोप लगा है। ऐसे में उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा आय से अधिक संपत्ति के मामले में और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए फर्जी हलफनामे में आदेश खारिज करके जांच कराने की मांग की गई है।

25 मार्च को सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कांग्रेस के विश्वनाथ चतुर्वेदी द्वारा दायर एक याचिका पर सीबीआई और मुलायम सिंह यादव से जवाब मांगा था। 2007 में दायर की गई जनहित याचिका में विश्वनाथ ने कोर्ट से कहा था कि इस बात की जांच कराई जाए कि मुलायम सिंह, उनके बेटों अखिलेश और प्रतीक यादव पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने 12 वर्षों तक क्या किया।

मुलायम सिंह यादव ने अपनी याचिका में चतुर्वेदी पर आरोप लगाया था कि वह राजनीतिक विवाद कोर्ट में ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने उन्हें 30 जुलाई, 2007 और 20 अगस्त, 2007 की दो स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर और सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी तिलोत्तमा वर्मा की ओर से 2 फरवरी 2009 को तैयार की गई स्टेट्स रिपोर्ट के आधार पर उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम ने अपने हलफनामे में कहा कि याचिकाकर्ता ने 2019 के आम चुनाव के समय गलत तरीके से याचिका दायर की। उन्होंने 30 जुलाई 2007 और 20 अगस्त 2007 की स्टेट्स रिपोर्ट का खुलासा किए बिना ही याचिका दायर की है। 2 फरवरी 2009 को स्टेट्स रिपोर्ट (वर्मा द्वारा) के विश्लेषण को अदालत में प्रस्तुत किए बिना सिर्फ 26 अक्टूबर 2007 की रिपोर्ट के आधार पर याचिका दायर की। सीबीआई ने 2007 की स्टेट्स रिपोर्ट और साथ ही दो रिपोर्टों के विश्लेषण को खारिज कर दिया था। एजेंसी ने इन रिपोर्ट्स को जालसाजी बताते हुए इसकी एफआईआर दर्ज कराई थी।

इसके साथ ही सीबीआई की ओर से इस मामले में एक जांच कमिटी गठित की गई थी जिन्हें यह पता लगाना था कि जाली स्टेट्स रिपोर्ट और 2 फरवरी, 2009 की फर्जी विश्लेषण रिपोर्ट के लिए कौन जिम्मेदार है? जाली स्टेटस रिपोर्ट की जांच के बाद सीबीआई ने 28 दिसंबर, 2012 को नई दिल्ली के पटियाला हाउस में विशेष अदालत में अंतिम रिपोर्ट दायर की थी। कोर्ट में दायर की गई इस रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा था कि 2 फरवरी 2009 की जो रिपोर्ट तिलोत्तमा वर्मा द्वारा तैयार करने की बात कही जा रही है, ऐसी कोई रिपोर्ट उन्होंने तैयार नहीं की थी। इसके साथ ही 30 जुलाई 2007 और 20 अगस्त 2007 को भी सीबीआई ने इस तरह की कोई स्टेट्स रिपोर्ट तैयार नहीं की। यहां तक कि जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और डीआईजी सहित शाखा अधिकारियों ने अपने बयानों में ऐसी कोई भी स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने से इनकार किया है। सीबीआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सील कवर के अंदर सीबीआई की बिना तिथि वाली स्टेट्स रिपोर्ट रखी है। हो सकता है कि 30 जुलाई और 20 अगस्त की कथित स्टेट्स रिपोर्ट इन्हीं रिपोर्ट्स के कई पैराग्राफ्स हटाकर तैयार की गई।

नया व्यवसाय

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लोग अपने अपने ढंग से धन कमाने के अनेक रास्ते ढूंढते रहते हैं । एक नया रास्ता धन और नाम कमाने का कुछ लोगों ने ढूंढ निकाला है । वैसे इसके प्रयोग बहुत पहले से कुछ व्यापारिक मस्तिष्क वाले लोग करते रहे हैं, परंतु आजकल यह व्यवसाय बहुत तेज़ गति से सफ़लतापूर्वक चल निकला है । अलग अलग नगरों में अनेक लोग संगीत के मंच कार्यक्रम आयोजित करने लगे हैं ।

पारम्परिक गायकों के स्थान पर ऐसे हर कार्यक्रम में, हर जगह, हर दिन, नये नये गायकों के नाम उनके चित्र के साथ प्रचारित-प्रसारित किये जाते हैं । कार्यक्रम की संकल्पना करने वाले व्यक्ति का नाम और चित्र भी प्रचार-प्रसार का अंग होता है । कार्यक्रम का शीर्षक किसी फ़िल्मी गीत के शब्द या किसी अक्षर को लेकर रख दिया जाता है । संगीत नियोजक का नाम या सभी वादकों के नाम भी प्रचारित-प्रसारित किये जाते हैं । मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि आदि के नाम भी लिख दिये जाते हैं । हर गायक से तीन हज़ार से पांच हज़ार रुपये तक की राशि प्रत्येक गीत के लिये वसूली जाती है।

आमतौर पर आयोजक या प्रस्तुतकर्ता स्वयं भी गायक ही होता या होती है, जो मुफ़्त में अपना प्रचार-प्रसार भी करने में सफ़ल हो जाते हैं और बिना कोई मूल्य चुकाये अपनी गायन कला का प्रदर्शन भी कर लेते हैं । ऐसे कार्यक्रमों के लिये कोई प्रवेश शुल्क नहीं होता, क्योंकि सारा खर्च सभी उत्साही गायक स्वयं उठा लेते हैं । उनको मंच पर अपनी कला का कैसा भी प्रदर्शन करना होता है । वे अपने परिवार के सदस्यों, परिचितों और मित्रों को नि:शुल्क कार्यक्रम में आमंत्रित भी कर लेते हैं । अगर दस-पन्द्रह गायक भी कार्यक्रम में भाग ले रहे होते हैं और प्रत्येक गायक बीस-पच्चीस लोगों को भी अपने गीत पर ताली बजवाने और “वंस मोर” की आवाज़ लगवाने के लिये लाने में सफ़ल हो जाते हैं, तो सभागार लोगों से लगभग भर ही जाता है।

यह अलग बात है कि अधिकांश बेसुरे-बेताले और प्रभावहीन गायकों की भारी-भरकम “कला” का बोझ बहुत अधिक समय तक न उठा पाने के कारण अपने अपने आमंत्रक का गीत सुनने तक अधिकतर लोग मजबूरी में बैठे रहते हैं और अपने गायक का गीत समाप्त होते ही मंच के पीछे उसे बधाई देकर वे अपने घर लौट जाते हैं । थोडी देर बाद सभागार खाली होता चला जाता है । उन गायकों के द्वारा अपनी “श्रेष्ठतम” कला का वीडियो बनाकर बाद में फ़ेसबुक या “यू ट्यूब” पर डाल दिया जाता है और उनके मित्रगण उनके बेसुरे गाने की भी भरपूर प्रशंसा तुरंत करते रहते हैं । देश भर की बात तो अलग ही है, लेकिन किसी एक नगर में भी हर सप्ताह ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किये जाने लगे हैं । गायकों के हर दिन नये नाम दिखाई दे जाते हैं और दूसरी बार मुश्किल से ही कहीं नज़र आते हैं ।

मुख्य आयोजक-गायक का नाम अवश्य बार बार देखने को मिलता रहता है क्योंकि वह लगातार कार्यक्रम आयोजित करने के व्यवसाय में व्यस्त हो जा जाता है । पहले के समय में किसी फ़िल्मी अभिनेता, गायक, संगीत निर्देशक, या गीतकार का नाम और चित्र तभी प्रचारित-प्रसारित किया जाता था जब वह स्वयं कार्यक्रम में उपस्थित हो रहा हो । आजकल सब बडे बडे कलाकारों के नाम और चित्र ऐसे कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार फ़लकों और विज्ञापनों में प्रमुखता से दिखाए जाने लगे हैं ।

गायक-संगीत निर्देशक जगजीत सिंह की पत्नी गायिका चित्रा सिंह और पंडित रामचन्द्र द्विवेदी “कवि प्रदीप” की पुत्री मितुल प्रदीप ने इस प्रथा पर रोक लगवा दी थी । उनका कहना था कि उनसे अनुमति लिये बिना और “रौयल्टी” के रूप में कुछ सम्मानजनक राशि दिये बिना कोई उन कलाकारों के नाम का उपयोग अपने कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में नहीं कर सकेगा । कुछ बडे कलाकारों के पुत्र-पुत्री-बहू-दामाद आदि ने धन कमाने का यह रास्ता अपना लिया है । अब वे उन बडे कलाकारों के जन्मदिन या पुण्यतिथि से सम्बन्धित अनेक कार्यक्रमों में भारी-भरकम रकम लेकर मुख्य अतिथि बनकर उपस्थित होने लग गये हैं । अधिकांश वास्तविक गुणी गायक आजकल खामोश बैठे हुए हैं और हर दिन नये नये गायकों के नाम सुनते रहते हैं । कभी कभी तो मैं भी यह सोचने लगता हूं कि क्या हर शहर का हर व्यक्ति प्रतिभाशाली गायक बनता जा रहा है । जो भी हो, व्यापारिक मस्तिष्क रखने वाले कुछ व्यवसाइयों ने आजकल धूमधाम से शुरू कर दिया है, धन कमाने का यह नया व्यवसाय ।

किशन शर्मा, 901, केदार,
यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर,
नागपुर – 440015;
मोबाइल – 8805001042

चंद्रबाबू का प्रशांत किशोर को बड़ा ऑफर

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नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक दिलस्प मोड़ आ गया है, टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांक किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) को मेगा कांट्रेक्ट का ऑफर दिया है। वह भी तब जबकि एक महीने पहले ही राजनीतिक रिसर्च फर्म ने चंद्रबाबू नायडू को बुरी तरह से सत्ता से बहार करने में वाईएसआर कांग्रेस की मदद की थी। न्यूज 18 की एक खबर की मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के अनुसार, नायडू ने भारतीय-राजनीतिक कार्रवाई समिति को एक बहु-वर्षीय अनुबंध की पेशकश की है।
प्रशांत किशोर को चंद्रबाबू नायडू ने दिया ऑफर

I-PAC के अंतिम ग्राहक वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी थे, जिन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की है। इस चुनाव में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी भारी हार का सामना करना पड़ा था। जगन ने 2017 में किशोर को काम पर रखा था, जब उनकी राज्य में राजनीतिक स्थिति बेहद ही खराब स्थिति में थी। प्रशांत किशोर ने जगन के साथ मिलकर पार्टी के लिए पहला कदम 3600 किमी की पद यात्रा का उठाया था। इस यात्रा के तहत जगन में पूरे राज्य की पदयात्रा की थी। माना जाता है कि इस पदयात्रा ने जगन के पक्ष में हवा को मोड़ दिया। इसने जगन को मतदाताओं के करीब लाया।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि एक आधिकारिक समझौता हुआ है या नहीं। सूत्रों ने बताया कि नायडू ने I-PAC को एक प्रस्ताव रखा है। 2016 में भी नायडू किशोर की टीम के पास गए थे, लेकिन यह डील नहीं हो सकती थी। इस बात का सभी को बता है। इसके बाद विधानसभा चुनावों में नायडू और प्रशांत किशोर के बीच तल्खी देखने को मिली थी। प्रचार अभियान के दौरान नायडू ने प्रशांत किशोर को ‘बिहारी डाकू’ बताया था। उस समय नीतीश कुमार की जद (यू) के उपाध्यक्ष किशोर ने कहा था कि, नायडू निश्चित हार से बौखलाए हुए हैं।

बता दें कि, नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर दोनों ही पहले कह चुके हैं कि, आईपैक पूर्व में संगठनों के साथ जुड़ने के लिए स्वतंत्र है। बता दें हाल ही में प्रशांत किशोर ने 8 जून को ममता बनर्जी के साथ मुलाकात की थी। जिसके बाद माना जा रहा है कि, वह अगले असाइंमेंट के तौर पर वह ममता बनर्जी के साथ विधानसभा चुनावों में जुड़ सकते हैं। प्रशांत किशोर 2014 में नरेंद्र मोदी के लिए लोकसभा चुनावों में प्रचार की कमान संभाल चुके हैं।

3 प्रोजेक्टों के लिए रिलायंस एंटरटेनमेंट व जेपी फिल्म्स की साझेदारी

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धीरूभाई अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस एंटरटेनमेंट ने विषय-वस्तु विकसित करने और तीन नए प्रोजेक्टों पर काम करने के लिए जेपी फिल्म्स के साथ साझेदारी की है।

इन प्रोजेक्टों में दो फीचर फिल्में और एक वेब-श्रृंखला शामिल है। जे.पी. दत्ता की बेटी निधि दत्ता इन प्रोजेक्टों की अगुवाई करेंगी।

एक ऐतिहासिक फारसी महाकाव्य पर आधारित फिल्म का निर्देशन जे.पी. दत्ता करेंगे, जबकि दूसरी फिल्म कश्मीर में तैनात एक भारतीय सैन्य अधिकारी की बायोपिक होगी।

रिलायंस एंटरटेनमेंट के ग्रुप सीईओ शिवाशीष सरकार ने एक बयान में कहा, ‘दर्शकों के बीच बेहतरीन कंटेंट पहुंचाने को लेकर रिलायंस एंटरटेनमेंट ने जेपी फिल्म्स के साथ एक कॉमन विजन शेयर किया। सभी तीनों प्रोजेक्ट समुचित संबंधित शैलियों से जुड़े होंगे।’

युद्ध की पृष्ठभूमि वाली देशभक्तिपूर्ण फिल्में बनाने के लिए चर्चित जे.पी. दत्ता ने कहा, ‘मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के आशीर्वाद से जेपी फिल्म्स और रिलायंस एंटरटेनमेंट मिलकर साथ में सिनेमा जगत में यह यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, जिसके लिए हम बेहद प्रसन्न हैं।’

बंगाल में रहना है तो बांग्ला बोलनी पड़ेगी – ममता बनर्जी

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कोलकाता – पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में रहने वालों को बांग्ला भाषा में बोलना सीखना होगा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दोहराया कि बाहरी लोग राज्य में डॉक्टरों के आंदोलन को उकसा रहे हैं। ममता ने भाजपा पर बंगालियों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ”बाहरी लोग डॉक्टरों को उकसा रहे हैं। मैंने सही कहा था कि वे कल के प्रदर्शन में शामिल थे। मैंने (एसएसकेएम अस्पताल में) कुछ बाहरियों को नारेबाजी करते हुए देखा।”

ममता ने आरोप लगाया कि हाल में हुए लोकसभा चुनावों में ईवीएम में ”गड़बड़ी” की गई थी। उन्होंने कहा कि चुनाव कराने के लिए मतपत्रों का इस्तेमाल होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”सिर्फ इसलिए कि वे (भाजपा) ईवीएम में गड़बड़ी करके कुछ सीटें जीत गये, इसका मतलब यह नहीं कि वे बंगालियों और अल्पसंख्यकों को पीट सकते हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

उन्होंने कहा, ”पुलिस हंगामा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। अगर कोई बंगाल में रह रहा है तो उसे बांग्ला (भाषा) सीखनी पड़ेगी।”

भारतीय भाषाओं में अब देने होंगे सभी टीवी शोज के टाइटल – केंद्र सरकार

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नई दिल्ली – केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को टीवी चैनलों को लेकर नया आदेश जारी किया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने टीवी सीरियलों की शुरुआत और अंत में दिए जाने वाले टाइटलों को भारतीय भाषाओं में भी दिए जाने का आदेश जारी किया है। सरकार के इस आदेश का मकसद भारतीय भाषाओं का प्रचार और प्रसार है। सरकार का यह आदेश सिर्फ टीवी चैनलों के लिए नहीं है बल्कि सिनेमा के लिए भी है।

शुक्रवार को सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि, टीवी चैनलों को आदेश जारी किया जा रहा है कि जो भी सीरियल वह प्रसारित करते हैं, कई बार उनकी शुरुआत और अंत में दिए जाने वाले शीर्षक और क्रेडिट अक्सर अंग्रेजी भाषा में दिए जाते हैं। भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए उनसे यह कहा गया है कि ये शीर्षक और क्रेडिट उस भाषा में भी दें जिस भाषा में वह सीरियल प्रसारित कर रहे हो।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने आगे कहा, ‘भारतीय भाषा के अलावा अगर वह अंग्रेजी में भी शीर्षक और क्रेडिट देना चाहते हैं तो इसके लिए वे स्वतंत्र हैं। हम कुछ भी प्रतिबंधित नहीं कर रहे हैं, असल में हम भारतीय भाषाओं को जोड़ रहे हैं। हम सिनेमा के लिए भी ऐसा आदेश जारी कर रहे हैं।

खुद सुरक्षित रहना उत्तर प्रदेश में लोगो को सीखना होगा : अखिलेश

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एटा – उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या की भर्त्सना करते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरूवार को कहा कि योगी सरकार से न्याय की उम्मीद बेमानी है और राज्य के लोगों को अपनी सुरक्षा के बारे में खुद सोचना होगा।

सुश्री यादव के अंतिम संस्कार में भाग लेने आये श्री यादव ने पत्रकारों से कहा कि कचहरी में वकील के चैम्बर में हत्या इतनी बड़ी घटना है कि इसकी कल्पना कोई नही कर सकता हैं। कल जब मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था पर बैठक कर रहे उस समय अपराधी अपराध कर रहे थे।

उन्होने कहा कि इस सरकार से न्याय की उम्मीद बेमानी है। इस जघन्य हत्याकांड की जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से करायी जानी चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा ” चुनाव के बाद चिन्हित करके समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही हैं। हम एक सूची राज्यपाल को देगे जिनकी हत्या हुई हैं। सरकार परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दे। इस हत्याकांड पुलिस की भूमिका की भी जॉच हो। इस सरकार से जनता न्याय की उम्मीद नही कर सकती हैं।

श्री यादव ने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुये सरकार पर संदेह जताया कि सपा कार्यकर्ताओं की हत्या में पुलिस तो शामिल नहीं है।

शाहरुख होंगे मेलबर्न के फिल्म फेस्ट में मुख्य अतिथि

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मेलबर्न – अभिनेता शाहरुख खान मेलबर्न के 10वें इंडियन फिल्म फेस्टिवल में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगे।

विक्टोरिया राज्य सरकार द्वारा इंडियन फिल्म फेस्टिवल का आयोजन मेलबर्न में 8 से 17 अगस्त के बीच किया जाएगा। इस साल फेस्टिवल की केंद्रीय थीम ‘हौसला’ है। किंग खान के नाम से मशहूर शाहरुख आधिकारिक रूप से 8 अगस्त को अन्य अतिथियों और फेस्टिवल निदेशक मीतू भौमिक लांगे के साथ आयोजन का उद्घाटन करेंगे। वह न्यौते से खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बयान दिया, “इस साल फेस्टिवल की थीम ‘हौसला’ से मैं काफी आनंदित हूं।”

नाना पाटेकर के खिलाफ तनुश्री का केस मुंबई पुलिस ने किया बंद

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मुंबई – एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी है।

मुंबई पुलिस के प्रवक्ता व पुलिस उपायुक्त मंजूनाथ शिंगे कहा, “हां, हमने अदालत के समक्ष बी-समरी रिपोर्ट दायर की है।” कहा जा रहा है कि पुलिस ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के बाद यह कदम उठाया है, जिसने वस्तुत: मामले को समाप्त कर दिया है।

अब यूजर्स को पैसा देगा Facebook

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नई दिल्ली – Facebook अब यूजर्स को पैसा देगा। यानी अगर अगर Facebook का इस्तेमाल करते हैं तो इसके लिए आपको भुगतान किया जाएगा, वह भी अमेरिकी डॉलर्स में। हालांकि यह ऐप अमेरिका में लांच किया गया है। इसे दुनिया के दूसरे देशों में कब लांच किया जाएगा, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। खबरों के अनुसार फेसबुक आपको हर माह 20 डॉलर का भुगतान करेगा।

टेक वेबसाइट्‍स TechCrunch के मुताबिक फेसबुक स्टडी के लिए एक ऐप लांच किया है, जिसमें रिसर्च करने वाले प्रतिभागियों से डेटा इकट्ठा करेगा और इसके डॉलर्स का भुगतान किया जाएगा।

इस ऐप को डाउनलोड करते समय आपको अपने मोबाइल के टर्म और कंडिशन में अनुमति देनी होगी। इस ऐप द्वारा फेसबुक यह जानेगा कि आपके स्मार्ट फोन में कौन-कौनसे ऐप डाउनलोड है और आप उन ऐप्स का इस्तेमाल कब से कर रहे हैं। फेसबुक इस ऐप से आप जिस देश में रहते हैं, उसके बारे में भी जानने की कोशिश करेगा। फेसबुक इस ऐप से जानेगा कि आप कौनसे नेटवर्क का प्रयोग करते हैं।

खबरों के मुताबिक यह ऐप अभी अमेरिका में लांच हुआ है। इसमें विज्ञापन पर क्लिक करने पर Applause’s की वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे, जो फेसबुक के स्टडी ऐप में रिचर्स ऑपरेशंस पार्टनर है। इसकी वेबसाइट पर जाने पर आपको ऐप के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी। स्टडी ऐप के ऑप्ट-इन होने पर आपको कौनसा मुआवजा मिलेगा और इस ऐप से आपक कैसे बाहर निकल सकते हैं।

फेसबुक के मुताबिक वह आपके आईडी, पासवर्ड और आपके द्वारा शेयर की गई सामग्री को इकट्ठा नहीं करेगा। इसके अलावा वह स्टडी ऐप से थर्ड पार्टी ऐप किसी संस्था को न बेचेगा और न विज्ञापनों के लिए प्रयोग करेगा।