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उद्धव ठाकरे ने सीएम फडणवीस के लिए क्यों तोड़ी शिवसेना की 53 साल पुरानी परंपरा?

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मुंबई – बुधवार को शिवसेना अपना 53वां फाउंडेशन डे मना रही है। लेकिन, जश्न के इस मौके के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति में जो बदलाव किया है, वह बहुत ही अनूठा है। बाल ठाकरे के जमाने से माना जाता रहा है कि शिवसेना अपनी निर्धारित परंपरा पर कायम रहने के प्रति बहुत ही संजीदा रहती है। यही नहीं वह पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों में किसी बाहरी को बुलाने से भी बचती है। लेकिन, इसबार उसकी इस सोच में बड़ा बदलाव आया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए उसने अपनी नीतियों में बड़ा परिवर्तन किया है। शिवसेना ने अपने वार्षिक कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस को बतौर चीफ गेस्ट बुलावा भेजा है। इसलिए सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उद्धव ठाकरे की पार्टी के नजरिए में इतना बड़ा परिवर्तन क्यों आया है?

मोदी सरकार के पिछले पांच साल की सरकार में लगभग साढ़े चार साल तक शिवसेना ने सत्ता में रहकर भी विपक्ष के भी कान काटने का काम किया था। लेकिन, जब लोकसभा का चुनाव नजदीक आया तो जमीनी हालात को भांपकर बीजेपी-शिवसेना दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा और राज्य में विपक्षी पार्टियों को धूल चटाने में फिर से कामयाब रहे। शिवसेना के फाउंडेशन डे कार्यक्रम में देवेंद्र फडणवीस को बुलाने के पीछे भी आने वाले विधानसभा चुनाव को ही माना जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक शिवसेना के एक नेता ने माना भी है कि, “सेना प्रमुख उद्धव ठाकरने ने फडणवीस को बुलावा भेजा है और इसके पीछे हमारे कैडर को ये सिगनल देना है कि यहां गठबंधन बरकार है, ताकि विधानसभा चुनाव साथ में लड़ने के लिए उनका मनोबल बढ़ाया जा सके।”

लोकसभा चुनाव के नतीजों से ये साफ हो गया है कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन दोनों दलों के हित में है। 2014 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना-बीजेपी का चुनाव पूर्व गठबंधन टूट गया था। चुनाव के बाद दोनों दलों ने फिर से साथ आकर सरकार बनाई थी। तब शिवसेना को ही ज्यादा नुकसान हुआ था और मुख्यमंत्री की कुर्सी बीजेपी के खाते में चली गई थी। शायद इसलिए इसबार उद्धव ठाकरे की ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर विधानसभा में अपनी दावेदारी मजबूत करने का इरादा है। बीजेपी के एक सीनियर नेता ने कहा है कि, “ठाकरे को पता है कि अगर विधानसभा चुनावों के बाद सेना को बीजेपी से मुकाबले के लिए बार्गेनिंग पावर चाहिए, तो उन्हें अपनी सीटें 63 से बढ़ानी होंगी। और सेना प्रमुख को यह पूरी तरह पता है कि राज्य में विपक्ष की जो हालत है, उसके चलते भगवा दल ही सत्ता में आएंगे, इसलिए पार्टी ने अपना ट्रैक बदल लिया है।” वैसे महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ मिलकर बिना ज्यादा विवाद के सरकार चलाने का श्रेय सीएम फडणवीस को जाता है, जिन्होंने उसके साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की बहुत ही सफल कोशिश की है।

वर्ल्डकप से बाहर हुए शिखर, भुवी पर अभी फैसला नहीं

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साउथम्पटन- भारतीय ओपनर शिखर धवन अपने बाएं हाथ के अंगूठे में फ्रैक्चर के कारण आईसीसी विश्वकप से बाहर हो गए हैं जबकि हैमस्ट्रिंग चोट से जूझ रहे तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। शिखर की जगह युवा विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत को टीम में शामिल किया गया है।

शिखर के अंगूठे में नौ जून को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच विजयी 117 रन बनाने के दौरान तेज गेंदबाज पैट कमिंस की गेंद पर हेयरलाइन फ्रैक्चर आ गया था। शिखर की चोट के बाद पंत को भारत से उनके कवर के तौर पर इंग्लैंड बुलाया गया था। भारतीय टीम प्रबंधन ने उस समय कहा था कि शिखर की चोट पर निगरानी रखी जाएगी और अगले 10-12 दिनों में कोई फैसला किया जाएगा।

टीम प्रबंधन को आखिर शिखर को बाहर करने का फैसला करना पड़ा और उनकी जगह पंत को भारतीय टीम में शामिल कर लिया गया। शिखर बुधवार को साउथम्पटन में भारतीय टीम के अभ्यास सत्र में मौजूद थे लेकिन उन्होंने बल्लेबाजी नहीं की। उनके बाएं हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी और समझा जाता है कि उन्हें डॉक्टर से मिलने जाना था। भारत को साउथम्पटन में 22 जून को अफगानिस्तान से अपना अगला मुकाबला खेलना है।

शिखर का विश्वकप से बाहर हो जाना टीम के लिए एक बड़ा झटका है। भारत विश्वकप में अबतक चार मैचों में से तीन जीत चुका है और उसका न्यूजीलैंड के साथ मैच वर्षा के कारण रद्द रहा था। टीम मैनेजर सुनील सुब्रमण्यम और फिटनेस ट्रेनर शंकर बासु ने बुधवार को पुष्टि की कि शिखर विश्वकप से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह टीम में पंत को शामिल कर लिया गया है।

बासु ने कहा, विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद यह पता चला है कि वह मध्य जुलाई तक मैदान में नहीं उतर सकते हैं इसलिए हमने उन्हें विश्वकप से बाहर करने का फैसला किया और पंत को उनकी जगह लेने के लिए बीसीसीआई से आग्रह किया है।

भारतीय टीम प्रबंधन ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से शिखर के विकल्प के लिए अनुमति मांगी थी। पहले यह माना जा रहा था कि शिखर इस महीने के आखिर तक अपनी चोट से उबर सकते हैं लेकिन चीजें योजना अनुसार नहीं रहीं और शिखर को टूर्नामेंट से बाहर हो जाना पड़ा। शिखर मध्य जुलाई तक क्रिकेट मैदान से बाहर रहेंगे।

बीसीसीआई अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की तकनीकी समिति को पत्र लिखेगी और शिखर के विकल्प के लिए आधिकारिक आग्रह करेगी।

21 वर्षीय पंत को विश्वकप टीम के पांच वैकल्पिक खिलाड़ियों में शामिल किया गया था। पंत को न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच से पहले शिखर के कवर के तौर पर इंग्लैंड बुलाया गया था। हालांकि भारत का न्यूजीलैंड के साथ मैच बिना कोई गेंद फेंके बारिश के कारण धुल गया था।

भारत के पाकिस्तान के साथ अगले मैच में लोकेश राहुल ने रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाली थी और पहले विकेट के लिए 136 रन जोड़े थे। इसी मैच के दौरान तेज गेंदबाज भुवनेश्वर की हैमस्ट्रिंग में चोट आयी थी और उन्हें अपना तीसरा ओवर अधूरा छोड़कर मैदान से बाहर जाना पड़ा था। भुवनेश्वर फिर मैदान में नहीं लौटे थे और उसके बाद बताया गया था कि वह अगले दो-तीन मैचों तक बाहर रहेंगे।

टीम प्रबंधन ने भुवनेश्वर को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है और उम्मीद की जा रही है कि वह बाद के मैचों में टीम में शामिल हो सकेंगे। फिलहाल भारत के पास मोहम्मद शमी के रुप में एक अन्य विशेषज्ञ तेज गेंदबाज है जो अंतिम एकादश में खेल सकता है। भारत का विश्वकप में अगला मुकाबला 22 जून को अफगानिस्तान से होना है।

अपनी जुबान की वजह से जीता चुनाव – आज़म खान

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रामपुर – समाजवादी पार्टी नेता आज़म खान ने शपथ के लेने के बाद इशारों ही इशारों में मोदी और भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके पास जुबान की ताकत थी इसलिए चुनाव जीत गए। यही नहीं ईवीएम पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक मशीन है तब तक सब कुछ मुमकिन है।

अपने भाषण में आजम खान ने कहा, उन्हें कुदरत ने बहुत मजबूत जुबान दी है, बाकी चीजें नहीं दीं। जबकि दूसरे लोगों के पास बाकी सब चीजें थीं।

उन्होंने कहा कि उनकी मजबूत जुबान की वजह से ही वो चुनाव जीत पाए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके लोगों को पीटा गया। उन्हें वोट नहीं डालने दिया गया। अगर वो वोट डाल पाते तो बड़ी जीत होती।

भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोर 15 अधिकारियों की मोदी सरकार ने की छुट्टी

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नयी दिल्ली : सरकार ने भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी के आरोपों में आयकर विभाग के अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के बाद मंगलवार को सीमाशुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के भी 15 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी।

भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी के आरोपों में बर्खास्त किये गये इन अधिकारियों में प्रधान आयुक्त स्तर का भी एक अधिकारी शामिल है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने बुनियादी नियमों के तहत नियम संख्या 56 (जे) का इस्तेमाल करते हुए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के प्रधान आयुक्त से सहायक आयुक्त पद तक के अधिकारियों को सेवामुक्त कर दिया है।

मंत्रालय के आदेश के मुताबिक इनमें कुछ पहले से निलंबित चल रहे थे। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इन अधिकारियों के खिलाफ या तो पहले से ही सीबीआई की ओर से भ्रष्टाचार के मामले दर्ज थे या इन पर रिश्वतखोरी, जबरन वसूली और आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप हैं।

आदेश के मुताबिक दिल्ली स्थित सीबीआईसी में प्रधान अतिरिक्त महानिदेशक (ऑडिट) अनूप श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त नलिन कुमार, कोलकाता में आयुक्त संसार चंद, चेन्नई में आयुक्त जी श्री हर्ष, आयुक्त रैंक के अधिकारियों अतुल दीक्षित एवं विनय बृज सिंह को ‘सेवामुक्त’ कर दिया गया है।

इसके अलावा दिल्ली जीएसटी जोन के उपायुक्त अमरेश जैन, अतिरिक्त आयुक्त रैंक के दो अधिकारियों अशोक महीदा एवं वीरेंद्र अग्रवाल, सहायक आयुक्त रैंक के अधिकारियों एस एस पबाना, एस एस बिष्ट, विनोद सांगा, राजू सेगर, मोहम्मद अल्ताफ और दिल्ली के लॉजिस्टिक निदेशालय के अशोक असवाल शामिल हैं।

इन सभी 15 अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले मिलने वाले वेतन एवं भत्तों के मुताबिक तीन महीने के वेतन एवं भत्ते दिये जाएंगे। नियम संख्या 56 (जे) के तहत लोकहित में किसी भी सरकारी अधिकारी को उचित प्राधिकारी द्वारा तीन माह की नोटिस अवधि के साथ सेवामुक्त किया जा सकता है।

सरकार ने इससे पहले पिछले सप्ताह ही भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और दुर्ब्यहार के आरोप में 12 आयकर अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया। इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोप में संयुक्त आयुक्त स्तर के चार आयकर अधिकारियों को पदावनत कर उपायुक्त रैंक का बना दिया गया।

योगी ने लगाया मंदिरों के आस-पास शराब और मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध

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वाराणसी – उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में सभी मंदिरों और अन्य धरोहर स्थलों की 250 मीटर की परिधि में शराब और मांसाहारी भोजन की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इससे पहले अप्रैल में वाराणसी, वृंदावन, अयोध्या, चित्रकूट, देवबंद, देवा शरीफ, मिस्रिख-नैमिशारण्य में सभी पूजा स्थलों पर शराब की दुकानों और मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने आबकारी विभाग के अधिकारियों को वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और इलाहाबाद के संगम क्षेत्र में एक किलोमीटर दूरी तक शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दे दिए हैं।

एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि वाराणसी नगर निगम (वीएमसी) ने दो दिन पहले इस ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी में मंदिरों और धरोहर स्थलों की 250 मीटर की परिधि में शराब और मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। यह निर्णय मेयर मृदुला जायसवाल की अध्यक्षता में वीएमसी की कार्यकारी समिति की बैठक में लिया गया। वीएमसी के उपाध्यक्ष नरसिंह दास ने कहा, “कार्यकारी समिति की बैठक में, पार्षद राजेश यादव ने मंदिरों और धरोहर स्थलों की 250 मीटर की परिधि में शराब और मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया।”

यादव ने कहा कि हरिद्वार और अयोध्या की तरह यहां भी मंदिरों और धरोहर स्थलों के पास शराब और मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। दास ने कहा कि चर्चा के बाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसे वीएमसी की अगली बैठक में पेश किया जाएगा, जिसमें पारित होने के बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार के पास भेजा जाएगा। साल 2017 में काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती और दर्शन के लिए टिकट की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू की गई थी। इसके तहत जो लोग मंदिर नहीं जा सकते हैं, वे आरती में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं और उन्हें प्रसाद डाक द्वारा दिया जाता है।

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है। इसे देश की आध्यात्मिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। यहां काशी विश्वनाथ के साथ लगभग 2,000 मंदिर हैं। हिंदू सभ्यता में अंतिम संस्कार के लिए इसे सर्वोत्तम स्थान माना जाता है। गंगा नदी के किनारे बसे इस पवित्र शहर में हिंदू तीर्थयात्री गंगा नदी में नहाने के लिए भी जाते हैं।

पाकिस्तानी महिलाओं को बेचा जा रही हैं चीन में

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फैसलाबाद: पाकिस्तान की महिलाओं को शादी के नाम पर बेचने और फिर उन्हें चीन में वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलने के मामले सामने आए हैं। एक महिला नताशा मसीह (19) का कहना था कि उसका नया पति- एक चीनी व्यक्ति जिसे उसके परिवार ने शादी में बेच दिया था -उसे प्रताड़ित कर रहा था। आखिरकार वह टूट गई और उसने अपनी मां को पूरी कहानी सुनाई और उनसे उसे घर लाने की गुहार लगाई।

उसने बताया कि उसके पति ने उसे चीन के एक स्थान पर एक होटल में छिपा दिया था और वह पिछले कुछ हफ्तों से उसे दूसरे पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर कर रहा था। उसने बताया कि उसके पति ने उसे बताया, ‘मैंने तुम्हें पाकिस्तान में खरीदा है। तुम मेरी हो। तुम मेरी संपत्ति हूं।’ नताशा उन सैकड़ों पाकिस्तानी लड़कियों में से एक थीं, जिन्होंने अपने परिवारों को नकद भुगतान के बदले में चीनी पुरुषों से शादी की थी। इन परिवारों में ज्यादातर ईसाई थे।

पुलिस की जांच में पाया गया है कि चीन में कई महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी ने हाल के सप्ताह में कई गिरफ्तारी की और छापेमारी की जिससे तस्करी के इस नेटवर्क का पता चलता है। परिवारों को बताया जाता है कि उनकी बेटियों की अच्छे व्यवसायियों से शादी की जायेगी और चीन में उन्हें अच्छा जीवन दिया जाएगा।

दो अधिकारियों ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने जांचकर्ताओं को तस्करी के बारे में चुप रहने का आदेश दिया है, क्योंकि वे चीन के साथ पाकिस्तान के घनिष्ठ आर्थिक संबंधों को खतरे में नहीं डालना चाहते हैं।

लापरवाही बरतने की वजह से 100 से ज़्यादा बच्‍चों की मौत, दो मंत्रियों के खिलाफ केस दर्ज!

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पटना – मुजफ्फरपुर जिले की एक अदालत में सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन व बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ एक मामला दायर किया गया। इन पर एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएल) से बीते पखवाड़े में लापरवाही बरतने की वजह से 82 बच्चों की मौत का आरोप लगाया गया है। बता दें कि ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में मस्तिष्क ज्वर सहित अन्य अज्ञात बीमारी से अबतक 93 बच्चों की मौत हो चुकी है।

बता दें कि हर्ष वर्धन, उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे व बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने मुजफ्फरपुर में सरकारी श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का रविवार को दौरा किया।

सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने मुजफ्फरपुर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सोमवार को मामला दायर किया। याचिका में कहा गया कि हर्ष वर्धन व मंगल पांडेय, एईएस प्रकोप को नियंत्रित करने की अपने ड्यूटी को पूरा करने में विफल रहे हैं। एईएस से बच्चों की सालों से मौत के बावजूद इन दोनों ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता व संवेदनशीलता पैदा करने के लिए कुछ नहीं किया।

अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 24 जून की तारीख तय कर दी। हाशमी ने कहा कि उन्होंने आईपीसी की धारा 323, 308 व 504 के तहत आरोपी हर्ष वर्धन और मंगल पांडेय के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा, ‘लापरवाही व बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से उचित इलाज नहीं मिलने से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है।’

हालात का जायजा लेने मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्य को सभी संभव तकनीक और आर्थिक मदद का आश्वासन दिया ।

हर्षवर्द्धन ने मेडिकल कालेज का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से कहा ‘मैं इस क्षेत्र के लोगों, विशेष रूप से प्रभावित परिवारों को विश्वास दिलाता हूं कि समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार को सभी संभव आर्थिक और तकनीकी सहयोग देगी ।’ उन्होंने इस रोग के कारण इस इलाके में पिछले कई वर्षों से हो रही बच्चों की मौत के मद्देनजर मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए वर्तमान व्यवस्था को अपर्याप्त मानते हुए कहा कि यहां कम से कम सौ बिस्तरों वाला बच्चों का अलग से गहन चिकित्सा कक्ष बनना चाहिए ।

हर्षवर्द्धन ने कहा कि उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को अगले साल तक युद्ध स्तर पर इसे तैयार कर लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में चार—पांच जगहों पर स्टेट आफ दी आर्ट वाईरोलोजी प्रयोगशाला कुछ ही महीनों में पूरा कर लिया जाएगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में एईएस से हुई बच्चों की मृत्यु पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने इस भयंकर बीमारी से मृत हुए बच्चों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से शीघ्र ही चार-चार लाख रुपए अनुग्रह अनुदान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन एवं चिकित्सकों को इस भयंकर बीमारी से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठाने का निर्देश देने के साथ एईस से पीड़ित बच्चों के ज़ल्द स्वस्थ होने के लिये ईश्वर से प्रार्थना की है।

ममता बनर्जी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को दिया सुरक्षा का भरोसा

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए नोडल अधिकारियों को नियुक्त करने के पुलिस को निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने सप्ताहभर से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास में सोमवार को हड़ताली चिकित्सकों के साथ बैठक की।

राज्य सचिवालय में आयोजित एक बैठक में चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने बनर्जी को मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में उन्हें आ रही समस्याओं से अवगत कराया। बनर्जी ने बैठक में मौजूद पुलिस अधिकारियों को डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए राज्य के अस्पतालों के वास्ते नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने को कहा। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सचिव, एमओएस चंद्रिमा भट्टाचार्य और राज्य के अन्य अधिकारियों के अलावा 31 जूनियर डॉक्टर भी बैठक में मौजूद थे। राज्य सरकार ने बैठक को कवर करने के लिए केवल दो क्षेत्रीय समाचार चैनलों को अनुमति दी।

मुख्यमंत्री ने हड़ताली डॉक्टरों से कहा कि राज्य सरकार ने किसी भी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है। जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त मंच के प्रतिनिधियों ने 11 जून को एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले में शामिल लोगों को दंडित किये जाने की भी मांग की। बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्याप्त कदम उठाये हैं और एनआरएस घटना में शामिल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

इससे पहले रविवार को पश्चिम बंगाल में राज्‍य सरकार के खिलाफ पिछले 6 दिनों से हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने वार्ता पर सहमति जताई थी। ममता की ओर से सुरक्षा के आश्‍वासन के बाद पश्चिम बंगाल के हड़ताली डॉक्‍टरों के रुख में नरमी आई है। रविवार को आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने कहा था कि वे प्रदर्शन खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत को तैयार हैं, लेकिन मुलाकात की जगह वे बाद में तय करेंगे।

लोकसभा में साध्वी प्रज्ञा के शपथ दौरान विपक्ष ने किया हंगामा !

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नई दिल्ली – अपने बयानों के कारण प्राय: विवादों में रहने वाली भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर सोमवार को जब लोकसभा की सदस्यता की शपथ ले रही थीं तो वहां भी विवाद ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। शपथ लेने के दौरान उन्होंने जब अपना नाम पढ़ा तो उसे लेकर कई विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति व्यक्त की। विपक्षी सदस्यों की तीखी आपत्ति के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार ने आश्वासन दिया कि साध्वी प्रज्ञा का जो नाम निर्वाचन प्रमाणपत्र में लिखा होगा वही सदन के रिकार्ड में दर्ज किया जाएगा।

सत्रहवीं लोकसभा के प्रथम सत्र के पहले दिन नवनिर्वाचित सदस्यों को सदन की सदस्यता की शपथ राज्यवार दिलवाई गयी। जब मध्य प्रदेश के सदस्यों का नंबर आया तो भोपाल से निर्वाचित होकर आयी साध्वी प्रज्ञा का नाम पुकारा गया। साध्वी प्रज्ञा ने संस्कृत में शपथ ली। उन्होंने अपना नाम साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पूर्णचेतनानन्द अवधेशानंद गिरि बोला। उन्होंने अपनी शपथ पूरी करने के बाद भारत माता की जय भी बोला।

उनके इस नाम को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष के कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई। पीठासीन अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने प्रज्ञा ठाकुर से संविधान या ईश्वर के नाम पर शपथ लेने को कहा। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि वह ईश्वर के नाम पर ही शपथ ले रही हैं और अपना वही नाम ले रही हैं जो उन्होंने फॉर्म में भरा है।

इस बीच कुछ देर तक लोकसभा के अधिकारी और कर्मचारी रिकार्ड में साध्वी प्रज्ञा का रिकार्ड में उल्लेखित नाम खोजते रहे। इसके बाद जब अध्यक्ष के हस्तक्षेप से हंगामा थमा तो ठाकुर ने शपथ-पत्र का नाम के बाद का हिस्सा ही पढ़ा। इस पर भी कांग्रेस के सदस्यों ने देर तक आपत्ति जताई। हालांकि कार्यवाहक अध्यक्ष कुमार ने आश्वासन दिया कि साध्वी प्रज्ञा का जो नाम निर्वाचन प्रमाणपत्र में लिखा होगा वही सदन के रिकार्ड में दर्ज किया जाएगा।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लेाकसभा चुनाव में भोपाल से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को हराया है। वह महात्मा गांधी के हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे और महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व प्रमुख और मुंबई आतंकवादी हमले दौरान जान गंवाने वाले हेमंत करकरे के बारे में चुनाव प्रचार के दौरान दिये गये उनके बयानों को लेकर विवादों में रहीं।

उनके शपथ लेने के बाद कुछ सदस्य शपथ के अंत में भारत माता की जय बोल रहे थे। इस पर आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शपथ-पत्र का एक प्रारूप और प्रक्रिया होती है, उसी अनुसार शपथ ली जानी चाहिए। इस पर पीठासीन वीरेंद्र कुमार ने कहा, ‘सदस्यों से अनुरोध है कि वे शपथ-पत्र का ही वाचन करें। उनकी इस व्यवस्था का संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया।’

कानून बनाकर करेंगे राम मंदिर का निर्माण – केशव मौर्य

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अयोध्या – उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने अयोध्या पहुंचकर राम​मंदिर के मुद्दे पर एक बार फिर बयान दिए हैं। मौर्या ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले या समझौते से राम मंदिर नहीं बनता है तो कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करवाया जाएगा। लेकिन बाबर के नाम पर अयोध्या में एक ईंट भी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने कहा है कि संतों का और राम भक्तों का संकल्प जल्दी ही पूरा होगा। अगर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला और आपसी समझौते से बात नहीं बनती है, तो देश की संसद में कानून बनाकर अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। अब बाबर के नाम पर एक भी ईंट कहीं नहीं रखी जाएगी।

अयोध्या में केशव मौर्या रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत गोपालदास के जन्मोत्सव समारोह में शिरकत की और संत सम्मेलन में संतों का आशीर्वाद भी लिया। जहां उन्होंने यह भी कहा कि मैं भी मंदिर मुद्दा वाला हूं और राम भक्त हूं। मैं भी चाहता हूं कि अयोध्या में जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण हो। ऐसा कहकर उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही रामलला की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। इसके बाद केशव मौर्या सर्किट हाउस पहुंचे और पार्टी के पदाधिकारियों से मुलाकात की। अधिकारियों की समीक्षा बैठक करने के बाद वे राम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत गोपालदास के जन्मोत्सव समारोह में शिरकत करने पहुंच गए। वहां संत सम्मेलन का उद्घाटन किया।