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जनता का कल्याण केवल कागजी दावों पर कैसे होगा : मायावती

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लखनऊ – बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को बिना नाम लिए केन्द्र सरकार पर हमला बोला और कहा कि केवल कागजी दावों से जनता का हित व कल्याण कैसे संभव है। मायावती ने ट्वीट किया कि विकास दर की बड़े-बड़े दावों से देश के 130 करोड़ गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों आदि का अब तक सही भला नहीं हो पाया है। इनकी दिन-प्रतिदिन की समस्याएं अनवरत गंभीर होती जा रही हैं जो अति-दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। केवल कागजी दावों से जनता का हित व कल्याण कैसे संभव है।

उन्होंने ट्वीट में आगे लिखा, “लोगों को हसीन सपने दिखाना परन्तु उस हिसाब से काम नहीं करना व भावनाएं भड़काकर राजनीतिक रोटी सेंकना भाजपा की विशेषता रही है। आज पेश आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रमाणित करता है कि गरीबी, बेरोजगारी, किसान आत्महत्या आदि गंभीर समस्याओं के मामले में यह सरकार उदासीन व लापरवाह रही है।”

दया बेन के रूप में नजर आएगा एक नया चेहरा

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टीवी के चर्चित शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में सबसे पापुलर किरदार यानी दया बेन लंबे समय से शो में नजर नहीं आई हैं। इस किरदार को निभाने वाली दिशा साल 2017 में गर्भवती होने के बाद मैटरनिटी लीव पर चली गईं और अभी तक उन्होंने शो में वापसी नहीं की। अब कहा जा रहा है कि दया बेन के रूप में एक नया चेहरा दर्शकों को नजर आ सकता है।

दरअसल, दिशा के शो से ब्रेक लेने के बाद मेकर्स ने काफी लंबे वक्त तक उनका इंतजार किया। बीच में ऐसी खबरें भी आईं कि वह जल्द ही शो में वापसी करेंगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। माना जा रहा है कि दिशा शो में वापिस नहीं आना चाहती और इसलिए अब मेकर्स एक नए चेहरे की तलाश में हैं।

वैसे शो के प्रोड्यूसर्स को दयाबेन को शो में लाने की कोई जल्दबाजी नहीं है। दयाबेन के किरदार के लिए जिस भी एक्ट्रेस का चुनाव होगा वो बहुत ही सोच समझकर किया जाएगा। जरूरी नहीं है कि दया बेन के किरदार में कोई एक्ट्रेस ही हो। अगर मेकर्स को कोई पसंद आ गया तो किसी आम लड़की को भी यह रोल उसे भी ऑफर किया जा सकता है।

बता दें कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा भारत के सबसे ज्यादा चलने वाले धारावाहिकों में से एक है। लगातार 10 सालों से यह टॉप 10 टीआरपी वाला धारावाहिक है।

इस महीने के अंत में कुलभूषण जाधव पर इंटरनेशनल कोर्ट में सुनाया जाएगा फैसला

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नई दिल्‍ली – हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत इस महीने के आखिर में कुलभूषण जाधव पर फैसला सुना सकता है। वो पाकिस्‍तान के जेल में बंद हैं। सूत्रों के मुताबिक इस महीने के आखिरी तक कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला आ सकता है। गुरुवार को जाधव मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी कहा कि कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को फैसला सुनाना है।

यह फैसला कब सुनाया जाएगा, इसकी तारीख का भी ऐलान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय करेगा। इससे पहले 20 फरवरी को भारत ने जाधव की मौत की सजा को रद्द करने की मांग की थी। साथ ही पाकिस्तान की सैन्य अदालत और ICJ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था।

सुनवाई के पहले चरण के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट हरीश साल्वे ने कहा था कि जाधव की एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा की गई सुनवाई उचित प्रक्रिया के न्यूनतम मानकों को भी पूरा नहीं करती है। लिहाजा आईसीजे को इसको गैरकानूनी घोषित किया जाना चाहिए।

इंजीनियर पर कांग्रेस विधायक नितेश राणे ने फेंका कीचड़

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पणजी – मध्य प्रदेश में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र एवं विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम के एक अफसर की बैट से पिटाई का मामला अभी पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ कि अब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के पुत्र एवं कांग्रेस विधायक नितेश राणे द्वारा एक सरकारी अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करने का वीडियो सामने आया है।

इस वीडियो में विधायक नितेश और उनके समर्थकों ने गुरुवार को एक सरकारी इंजीनियर पर पहले कीचड़ डाला और बाद में उसे कणकवली इलाके में एक पुल से बांध दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो में विधायक नितेश को अपने समर्थकों के साथ इंजीनियर प्रकाश शेडेकर को मुंबई-गोवा राजमार्ग के पास एक पुल पर सवाल-जवाब करते हुए देखा गया।

सिंधुदुर्ग जिले की कणकवली से विधायक नितेश ने पहले इंजीनियर के साथ सवाल-जवाब किये और फिर उनके समर्थकों ने उस पर दो बाल्टी कीचड़ डाल दिया। उसके बाद कांग्रेस विधायक और उनके समर्थक उस इंजीनियर को धकेल कर पुल के किनारे ले गए और उसे पुल से बांध दिया।

बताया जा रहा है कि नितेश मुंबई-गोवा हाइवे पर निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे थे। कणकवली में क्षतिग्रस्त सड़कों के निरीक्षण के दौरान बहुत सारे गड्ढे मिलने पर वह नाराज हो गए, जिसके बाद यह घटना हुई।

कांग्रेस विधायक नितेश राणे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष के प्रमुख नारायण राणे के पुत्र हैं। नितेश कणकवली विधानसभा सीट से वर्ष 2014 के चुनाव में 25 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। उनके पिता नारायण राणे ने 21 सितम्बर 2017 को कांग्रेस से इस्तीफा देकर ‘महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष’ नाम से अपनी पार्टी बनायी थी।

नारायण राणे वर्ष 1999 में करीब नौ महीने तक राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन्हें शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का करीबी माना जाता था। वर्ष 2005 में अनबन के बाद उन्होंने शिवसेना छोड़ दी थी और कांग्रेस में शामिल हुए थे।

कुछ साल पहले नितेश राणे और उनके तीन समर्थकों को महाराष्ट्र सीमा पर टोल बूथ के अधिकारियों की पिटाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय टोल के पैसे मांगने पर यह झगड़ा हुआ था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

गौरतलब है कि पिछले महीने वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश के इंदौर में क्रिकेट बैट से नगर निगम के एक अधिकारी के साथ मारपीट की थी। अधिकारी को सिर में चोटें आईं और आकाश को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंदौर की घटना का संज्ञान लिया और पार्टी नेताओं को ऐसे कामों में शामिल होने के लिए फटकार लगाई।

महांग आध्यात्मिक तीर्थ जहाँ मन शांत हो जाता है

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कैलाश-मानसरोवर आध्यात्मिक संवेदनाओं वाला ऐसा पवित्र तथा मनोरम स्थान है, जहाँ शांति निवास करती है। प्रकृति कितनी खूबसूरत और विविधतापूर्ण है, यह यहाँ आकर ही जाना जा सकता है। विचलित मन यहाँ आकर स्थिरता प्राप्त करता है। जाति धर्म और संप्रदाय यहाँ गौण ही जाते हैं।
कैलाश पर्वत 48 किमी में फैला हुआ है। मानसरोवर झील 4 हजार फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है और 320 वर्ग किमी में फैली है। यदि आप इसकी परिक्रमा करना चाहते हैं तो यह परिक्रमा कैलाश की सबसे निचली चोटी दारचेन से शुरू होती है और सबसे ऊँची चोटी डेशफू गोम्पा पर पूरी होती है। यहाँ से कैलाश पर्वत को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है, मानो भगवान शिव स्वयं बर्फ से बने शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इस चोटी को हिमरत्न भी कहा जाता है। परिक्रमा पथ पर एक किमी की परिधि वाला गौरी कुंड स्थित है। यह कुंड हमेशा बर्फ से ढँका रहता है। तीर्थयात्री बर्फ हटाकर इस कुंड के पवित्र जल में स्नान करते हैं। यहीं से एशिया की चार प्रमुख नदियां – ब्रह्मपुत्र, करनाली, सिंधु और सतलज निकलती हैं।
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति मानसरोवर (झील) की धरती को छू लेता है वह बर्ह्मा के बनाये स्वर्ग में पहुँच जाता है और जो व्यक्ति झील का पानी पी लेता है उसे भगवन शिव के बनाये स्वर्ग में जाने का अधिकार मिल जाता है। मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में देवतागण यहाँ स्नान करते हैं। शाक्त ग्रंथों के अनुसार सटी का हाथ इसी स्थान पर गिरा था जिससे इस झील का निर्माण हुआ। इसे 51 शक्ति पीठों में से एक माना गया है। बौद्ध सांउडे कैलाश पर्वत को कांग रिनपोचे पर्वत भी कहते हैं। कहा जाता है कि मानसरोवर के पास ही भगवान बुद्ध महारानी माया के गर्भ में आये थे।
जैन धर्म में कैलाश को अष्टपद पर्वत कहा जाता है। जैन धर्म के अनुयायी मानते हैं कि प्रथम तीर्थंकर भगवान् ऋषभनाथ को यहीं पर आध्यात्मिक ज्ञान मिला।
गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है तो एक प्रकार की आवाज भी सुनाई देती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह मृदङ्ग की आवाज है।
बौद्ध तथा पाली ग्रंथों में मानसरोवर अनोप्ता तथा अनवतप्ता के नाम से वर्णित है जिसका अर्थ है – बिना ताप वाली और बिना कष्टवाली झील। मानसरोवर झील का जल जीतना मीठा है उतना किसी और नदी-सरोवर का नहीं है।
प्रत्येक वर्ष कैलाश-मानसरोवर की यात्रा का आयोजन भारत सरकार का विदेश मंत्रालय करता है, जिसमें उत्तराखंड सरकार के कुमायूं मंडल विकास निगम तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का महत्वपूर्ण सहयोग होता है। पहले यह भू-भाग तिब्बत सरकार के अधीन था लेकिन तिब्बत पर चीन का अधिपत्य होने के बाद अब यह भू-भाग चीन सरकार के अधीन आ गया है। इसलिए कैलाश-मानसरोवर की यात्रा के लिए चीन सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है।
यह यात्रा मई-जून से लेकर सितम्बर तक ही आयोजित की जाती है। 6 – 6 दिन के अंतराल पर यात्रियों के 16 जत्थे भेजे जाते हैं। प्रत्येक जत्थे में लगभग 60 यात्री होते हैं। सामान्यतया यह यात्रा 28 दिन में पूरी होती है।
यात्रा के इच्छुक व्यक्तियों के लिए भारत सरकार का विदेश मंत्रालय बकायदा आवेदन आमंत्रित करता है, जिसे भरकर विदेश मंत्रालय के बताये पते पर भेजना होता है। आवेदन स्वीकार होने तथा विभिन्न प्रक्रियाओं के पूर्ण होने पर आवेदनकर्ता यात्रा के लिए वैध हो जाता है। भारत सरकार के अलावा कई टूर एन्ड ट्रेवल एजेंसियां भी इस यात्रा का आयोजन करती हैं।
कैलाश-मानसरोवर पहुँचने के कई मार्ग हैं। भारत में उत्तराखंड से होकर सीधे तिब्बत पहुंचा जा सकता है अथवा नेपाल के रास्ते काठमांडू से चलकर नेपाल-चीन सीमा पार करके कैलाश मानसरोवर जा सकते हैं। नेपाल होकर कैलाश जाने वाली इस यात्रा की व्यवस्था प्राइवेट ऑपरेटर्स करते हैं, जो बहुत थकाऊ और महँगी होती है। जो लोग नेपाल होकर यात्रा करना चाहते हैं उन्हें भारत सरकार से अनुमति लेनी आवश्यक नहीं है लेकिन पासपोर्ट तथा वीसा जैसी औपचारिकताएं अनिवार्य हैं।
यहाँ की मानसरोवर झील का जल पवित्र तथा पुण्यकारक माना गया है। इसका जल जब शांत होता है और हवाएं स्तब्ध होती हैं तब मानसरोवर के दक्षिणी हिस्से से कैलाश पर्वत का प्रतिबिम्ब मानसरोवर में दिखायी पड़ता है। यह अकेला तीर्थ है जिसमे देवता का कोई विग्रह नहीं है। कैलाश स्वयं महांग शिव है। इसके उत्तर-पूर्व दिशा में मान्धाता पर्वत के विशाल शीर्ष भाग झील में प्रतिबिंबित होते दिखायी पड़ते हैं। ऐसी मान्यता है कि कैलाश पर्वत से एक जोति निकलती है। इसे देखने के लिए तीर्थयात्री रात को टकटकी लगाए बैठे रहते हैं।

रातोरात इंटरनेट पर छाने वाली बुजुर्ग फैन को विराट कोहली देंगे मैच टिकटों का तोहफा

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बर्मिंघम – बांग्लादेश के खिलाफ विश्व कप मैच के दौरान वुवुजेला बजाकर रातोरात इंटरनेट पर छाने वाली 87 वर्षीय भारतीय प्रशंसक ने कहा है कि कप्तान विराट कोहली ने उन्हें भारत के बाकी बचे मैचों के टिकट देने का वादा किया है। टीम इंडिया का समर्थन करने वाले यह वृद्ध महिला एक ही रात में पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरकर स्टार बन गई है।

चारुलता पटेल नामक महिला न तो भारत में पैदा हुई और न ही कभी यहां आई, अलबत्ता उनके मातापिता भारतीय थे। उनका जन्म अफ्रीकी देश तंजानिया में हुआ लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें भारतीय संस्कृति से बेहद प्यार है।

87 साल की चारुलता का भारत प्रेम मंगलवार की रात पूरी दुनिया ने देखा। उन्होंने प्रत्येक बाउंड्री पर पीले रंग का वुवुजेला बजाकर और भारतीय ध्वज लहराकर सभी का ध्यान खींचा था। उनके इस उत्साह को कोहली और भारतीय उप कप्तान रोहित शर्मा ने भी देखा और दोनों मैच के बाद उनसे मिले और यहां तक कि उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया।

चारुलता ने ‘टाइम्स नाऊ’ से कहा, ‘विराट मैच के बाद मेरे से मिलने आया। उसने मेरे पैर छुए और मैंने उसे आशीर्वाद दिया। मैं उसे अच्छा काम जारी रखने और विश्व कप जीतने को कहा। मैं हमेशा भारतीय टीम की सफलता के लिए प्रार्थना करती हूं। मैं तहेदिल से भारतीय क्रिकेट टीम को शुभकामनाएं देती हूं।’

लंदन से टीम की हौसलाअफजाई के लिए पहुंची इस प्रशंसक ने कहा, ‘विराट ने कहा कि वह बाकी बचे 2-3 मैचों में मुझे देखना चाहेगा लेकिन मैंने उसे कहा कि मेरे पास टिकट नहीं हैं और इसके बाद उसने कहा कि चिंता मत कीजिए मैं आपको ये दे दूंगा।’ महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भी उनकी टिकट का खर्चा देने की पेशकश की है।

तिरंगा स्कार्फ पहनकर पहुंची चारूलता की भारतीय खिलाड़ियों के साथ बातचीत आईसीसी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी साझा की गई थी। कोहली ने भी ट्‍विटर पर चारुलता और अन्य भारतीय प्रशंसकों का आभार जताया।

भारतीय कप्तान ने ट्वीट किया, ‘हमारे सभी प्रशंसकों विशेषकर चारुलता पटेल को उनके प्यार और समर्थन के लिए शुक्रिया कहना चाहता हूं। वह 87 बरस की हैं और मैंने जिन्हें देखा उनमें संभवत: सबसे अधिक जज्बे और प्रतिबद्धता वाली प्रशंसक हैं। आयु सिर्फ एक संख्या है, जज्बा आपको काफी आगे तक ले जाता है।’

उम्र के इस पड़ाव पर भले ही चारुलता को व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ रहा है लेकिन दर्शकदीर्घा में मंगलवार को उनका जोश देखते ही बनता था। वह चंचल युवती की तरह टीम इंडिया को चीयरअप कर रहीं थी।

क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की अंबति रायडू ने की घोषणा

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नई दिल्ली – टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज अंबति रायडू ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। इस बात की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने दी है। BCCI के एक अधिकारी ने बताया कि रायडू ने बीसीसीआई को संन्यास के लिए लिए पत्र लिखा है।

दरअसल, अंबति रायडू वर्ल्ड कप की टीम इंडिया में नहीं चुने जाने से निराश थे। रायडू ने विश्व कप टीम में जगह नहीं बना पाने के बाद इस फैसले का मजाक उड़ाते हुए ट्वीट भी किया था। माना जा रहा है कि उनका यही एक ट्वीट उनके क्रिकेट करियर को ले डूबा। क्योंकि, उन्हें वर्ल्ड कप के लिए बीसीसीआई ने स्टैंड बाय पर रखा था। इसके बावजूद उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया।
वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले रायडू ने ट्वीट कर कहा था कि 30 मई से इंग्लैंड में शुरू हो रहे टूर्नामेंट के मैचों को देखने के लिए उन्होंने 3D चश्मे का ऑर्डर कर दिया है। हालांकि, उनके इस ट्वीट के बाद भी बीसीसीआई ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की और कहा कि रायडू पर जुर्माना लगाने की उसकी कोई योजना नहीं है।
वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले टीम इंडिया को 4 नंबर का बल्लेबाज नहीं मिल रहा था। टीम संशय में थी कि किसे मौका दिया जाए, इस रेस में विजय शंकर, ऋषभ पंत, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव और अंबति रायडू के नामों की चर्चा थी।

अंत में विश्व कप के लिए 15 सदस्यीय टीम में अंबति रायडू की जगह वियज शंकर को तरजीह दी गई। रायडू बोर्ड के इस फैसले के बाद गुस्सा हो गए। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए चयनकर्ताओं के विजय शंकर को टीम में लेने के फैसले पर बिना नाम लिए सवाल उठाया था। उन्होंने एक ट्वीट में मुख्य चयनकर्ता एम। एस। के। प्रसाद कि इस बात की खिल्ली उड़ाई थी कि ‘विजय शंकर टीम को तीन आयाम (थ्री-डाइमेंशन) प्रदान करेंगे।’

रायडू ने ट्वीट किया था, ‘विश्व कप देखने के लिए 3-डी चश्मों का एक नया सेट ऑर्डर कर दिया है।’ हालांकि, रायडू को रिजर्व खिलाड़ी के तौर पर रखा गया कि अगर किसी खिलाड़ी को चोट लगती है तो उन्हें टीम में शामिल किया जाएगा।

रिजर्व में नाम होने के बावजूद, शिखर धवन और विजय शंकर के चोटिल होने पर भी उन्हें टीम में नहीं शामिल किया गया और ऋषभ पंत एवं मयंक अग्रवाल को उनकी जगह मौका दिया गया। यह कहानी अपने में बता रही है कि उनका ट्वीट करना भारी पड़ गया और शायद यही कारण है कि उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। जिसके बाद अब उन्होंने संन्यास की घोषणा की।

कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपी बरी

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नई दिल्ली – बहुचर्चित बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में सीबीआई कोर्ट से बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी बरी हो गया है। विशेष सीबीईआई कोर्ट ने बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। गौरतलब है कि 2005 में कृष्णानंद राय की हुई हत्या के आरोप में बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी समेत कई आरोपी थे। इनमें मुन्ना बजरंगी का भी नाम शामिल था, जिसकी बीते दिनों जेल में हत्या कर दी गई थी।

गौरतलब है कि 29 नवम्बर 2005 को करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र गोडउर गांव निवासी बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय क्षेत्र के सोनाड़ी गांव में क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने के बाद वापस अपने गांव लौट रहे थे। शाम करीब चार बजे बसनियां चट्टी पर उनके काफिले को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस हत्याकांड में एके-47 और कई ऑटोमैटिक हथियार का उपयोग किया गया था। एके 47 की गोलियों की बौछार से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। बताया जाता है कि इस हमले के दौरान करीब 5 सौ से अधिक गोलियों का प्रयोग किया गया था।

विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की एक साथ हत्या से तब गाजीपुर ही नहीं बल्कि पूरे यूपी और बिहार में भी हड़कंप मच गया था। हत्याकांड के विरोध में लगभग एक हफ्ते तक गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी में आगजनी, तोड़फोड़ और आंदोलन चलते रहे थे।

इस हत्याकांड के बाद बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए सीबीआई से जांच करवाई जाए। जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।

इसके बाद में अलका राय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केस की सुनवाई उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की। अलका राय कि याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली में ट्रांसफर कर दी थी। लेकिन घटना के 14 साल बाद जब अदालत का फैसला आया तो अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी का इस्तीफा

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नई दिल्ली – राहुल गांधी ने औपचारिक तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्विटर पर जारी 4 पन्नों के बयान में राहुल गांधी ने कहा है कि बतौर कांग्रेस अध्यक्ष 2019 लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी उनकी है, पार्टी को नए बदलाव की जरूरत है। ऐसे में वो अपने पद से इस्तीफा देते हैं। अपने बयान में राहुल गांधी ने जल्द से जल्द नया अध्यक्ष भी चुन लेने की बात कही है।

राहुल गांधी, कांग्रेस 2019 के चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के लिए अध्यक्ष के तौर पर मैं जिम्मेदार हूं। पार्टी की तरक्की के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है। इसलिए मैं पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं। पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कड़े फैसले करने होंगे और बहुत से लोगों को 2019 में मिली हार की जिम्मेदारी लेनी होगी। सिर्फ दूसरों को जवाबदेह ठहराना और अध्यक्ष के तौर पर खुद जिम्मेदारी न लेना नाइंसाफी होगी।

राहुल गांधी ने अपनी चिट्ठी में ये भी लिखा है कि उनके मन में बीजेपी को लेकर किसी भी तरह का गुस्सा या नफरत नहीं है। लेकिन उन्होंने लिखा कि बीजेपी जैसा भारत बनाना चाहती है। उसका राहुल गांधी विरोध करते हैं।

राहुल गांधी, कांग्रेसमेरा संघर्ष कभी सियासी शक्ति के लिए था ही नहीं। मेरे मन में बीजेपी के लिए कोई घृणा या गुस्सा नहीं है, लेकिन वो जैसा भारत बनाना चाहते हैं, उसका मेरा रोम-रोम विरोध करता है। ये विरोध इसलिए है क्योंकि इंडिया को लेकर उनकी सोच और मेरी सोच अलग है। ये लड़ाई नई नहीं है। ये लड़ाई हमारी मिट्टी पर हजारों साल से हो रही है। जहां उन्हें अलगाव दिखता है, मुझे समानता दिखती है। जहां उन्हें घृणा दिखती है, मुझे प्यार दिखता है। जिससे वो डरते हैं, उसे मैं गले लगाता हूं।

ट्विटर पर जारी बयान के कुछ ही देर बाद राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट का Bio भी बदल दिया। इसे बदलकर अब कांग्रेस अध्यक्ष की जगह मेंबर ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस और मेंबर ऑफ पार्लियामेंट कर दिया गया है।

इससे पहले कांग्रेस के कई नेताओं की तरफ से राहुल गांधी को अध्यक्ष पद पर बने रहने की सलाह दी गई। लेकिन राहुल किसी की नहीं माने। खुद उनकी मां और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने भी उनको इस्तीफा न देने की सलाह दी थी। लेकिन राहुल लगातार हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की बात कर रहे थे। जिसके बाद अब उन्होंने खुद बयान दिया है और पार्टी को अध्यक्ष चुनने को कहा है।

हाल ही में सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी सांसदों ने राहुल गांधी को मनाने की अंतिम कोशिश की, लेकिन राहुल अपने फैसले पर कायम रहे और कहा कि वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी से कहा कि हार की जिम्मेदारी पूरी पार्टी की है, वो खुद इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। सभी 51 सांसदों ने भी उनसे यही बात कही, लेकिन राहुल गांधी ने किसी की नहीं मानी

40 सांसदों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की मुलाकात

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नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यभार संभालते ही अपने पुराने वादों को पूरा करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में पीएम मोदी ने बुधवार को 40 सांसदों के ग्रुप से आज सुबह प्रधानमंत्री निवास पर मुलाकात की। आगे भी इस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलग-अलग ग्रुप में सांसदों से मुलाकात करेंगे। अपने पिछले कार्यकाल में भी प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों के ग्रुपों से मुलाकात की थी। इस बार भी पीएम मोदी यह सिलसिला जारी रखेंगे। अपने घर पर मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने सभी सांसदों से कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसदों से उनके संसदीय क्षेत्र के बारे में चर्चा की। इसके अलावा सांसदों को पीएम मोदी ने यह भी बताया कि सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्रों में कैसे काम करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को सत्र के दौरान संसद में मौजूद रहने के लिए कहा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि संसद के काम में सांसदों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सांसदों से कहा कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में भी लोगों से लगातार संपर्क में रहना चाहिए और उनकी समस्याओं के बारे में ध्यान देना चाहिए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए सांसदों को 7 ग्रुप में बांटा गया था। सांसदों को युवा, एसटी-एससी, ओबीसी, महिला और अन्य वर्गों में बांटा गया था। मुलाकात में आसानी के लिए सांसदों को अलग-अलग ग्रुप में विभाजित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी बैठकों के दौरान राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों के सांसदों से मुलाकात करेंगे। संसदीय मामलों के संबंध में उनसे बातचीत भी की जाएगी। इन सांसदों में अल्पसंख्यक सांसदों का भी जिक्र है।