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राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को 93 फीसदी चंदा कॉर्पोरेड से मिला

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नई दिल्ली – एक रिपोर्ट के अनुसार 2016-17 और 2017-18 के बीच छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त 20,000 रुपये से ऊपर के कुल चंदे का लगभग 93 फीसदी कॉर्पोरेट और व्यापारिक घरानों से आया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट से पता चला है कि इन छह पार्टियों को कुल 1,731 कॉर्पोरेट दाताओं से 1,059 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 915।59 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी रकम प्राप्त हुई।

इसके अलावा कांग्रेस को 151 कॉपोर्रेट दाताओं से 55।36 करोड़ रुपये मिले, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 23 दानदाताओं से 7।74 करोड़ रुपये मिले। रिपोर्ट में कहा गया है, “वित्त वर्ष 2016-17 और वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान, कॉर्पोरेट और व्यापारिक घरानों से 20,000 रुपये से ऊपर भाजपा और कांग्रेस का स्वैच्छिक योगदान क्रमश: 94 प्रतिशत और 81 प्रतिशत है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को सबसे कम दो प्रतिशत कॉर्पोरेट चंदा मिला। एडीआर ने यह भी उजागर किया है कि 2012-13 और 2017-18 के बीच कारोबारी घरानों के विभिन्न क्षेत्रों ने कुल 1,941।95 करोड़ रुपये का चंदा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, “राष्ट्रीय दलों को वित्त वर्ष 2014-15 (जब लोकसभा चुनाव हुए थे) में 573।18 करोड़ रुपये का अधिकतम कॉर्पोरेट चंदा प्राप्त हुआ था। इसके बाद वित्त वर्ष 2016-17 में 563।19 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2017-18 में 421।99 करोड़ रुपये मिले थे। 2016-17 और 2017-18 के चंदे में 25।07 प्रतिशत की कमी आई।”

प्रूडेंट/सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट दो राष्ट्रीय दलों के सबसे बड़े दान दाता रहे। रिपोर्ट में कहा गया है, “ट्रस्ट ने दो साल में कुल 46 बार चंदे दिए, जो 429।42 करोड़ रुपये रहा।” इसमें प्रूडेंट/सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट से भाजपा ने 33 चंदों में 405।52 करोड़ रुपये प्राप्त होने की घोषणा की, जबकि कांग्रेस ने 13 चंदों में 23।90 करोड़ रुपये प्राप्त किए।

इसके बाद भद्रम जनहित शालिका ट्रस्ट भाजपा और कांग्रेस के लिए दूसरा सबसे बड़ा कॉर्पोरेट दानदाता रहा, जिसने 10 बार, कुल 41 करोड़ रुपये के चंदे दिए। एडीआर ने कहा है कि चुनावी ट्रस्ट राष्ट्रीय पार्टियों के सबसे बड़े दानदाता थे, जिन्होंने कुल 488।42 करोड़ रुपये का चंदा दिया।

रियल एस्टेट सेक्टर 2016-17 में दूसरा सबसे बड़ा चंदा देने वाला था, जिसने कुल 49।94 करोड़ रुपये के चंदे दिए। वहीं 2017-18 में आरएचडब्ल्यू विनिर्माण क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता (74।74 करोड़ रुपये) था। भाजपा को विनिर्माण (107।54 करोड़ रुपये), रियल एस्टेट (88।57 करोड़ रुपये), खनन, निर्माण, निर्यात और आयात (57।40 करोड़ रुपये) सहित सभी 15 क्षेत्रों से सबसे अधिक चंदा मिला। एडीआर ने कहा कि कुल 916 चंदे, जिनके माध्यम से राष्ट्रीय दलों को 120।14 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, उनके पते का विवरण योगदान फॉर्म में नहीं है।

एडीआर ने यह भी कहा कि छह राष्ट्रीय दलों ने 347 चंदे प्राप्त करने की सूचना दी, जिसमें कॉर्पोरेट संस्थाओं से 22।59 करोड़ रुपये की राशि थी। इसमें इंटरनेट मौजूदगी शून्य थी। एडीआर का कहना है कि अगर वे ऐसा करते थे तो उनके काम में अस्पष्टता थी।

जल्द ही BJP का दामन थाम सकती हैं नाराज उर्मिला मातोंडकर

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मुंबई – महाराष्ट्र से कांग्रेस पार्टी के लिए एक और बुरी खबर सामने आ रही है। खबर है कि बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर पार्टी से नाराज चल रही हैं। खबर यह भी है कि वह जल्द ही बीजेपी या शिवसेना का दामन थाम सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी मुंबई से कांग्रेस की लोकसभा उम्मीदवार उर्मिला मातोंडकर पार्टी में चल रही वर्तमान उठापटक से नाराज चल रही हैं। उनका एक लेटर सामने आया है। इस लेटर में उर्मिला ने अपने लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हार का ठीकरा फोड़ा था।

खबर है कि इस गोपनीय पत्र के लीक होने के बाद से उर्मिला काफी नाराज हो गई हैं। उनके करीबियों की मानें तो जल्दी ही वह कांग्रेस छोड़ बीजेपी या शिवसेना का दामन थाम सकती हैं। करीबियों का कहना है कि वह बीजेपी और शिवसेना ज्वाइन करने के बारे में सीरियसली सोच रही हैं।

हालांकि खबरें यह भी आ रही हैं कि वह राज ठाकरे की पार्टी मनसे में भी दिलचस्पी दिखा रही हैं। दरअसल, वह खुद मराठी हैं और मुस्लिम हस्बैंड तथा जानी मानी अभिनेत्री होना उनका किसी भी पार्टी के लिए वैल्यू एडिशन हैं।

कांग्रेस के एक पदाधिकारी के अनुसार उर्मिला का कांग्रेस का साथ छोड़ना लगभग तय हो चुका है। वे कांग्रेसी नेताओं का फोन नहीं उठा रही हैं। जल्द ही उर्मिला अपने अगले कदम का खुलासा कर सकती हैं।

संसद में मंजूर हुआ आधार को स्वैच्छिक बनाने वाला विधेयक

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नयी दिल्ली : संसद ने बैंक में खाता खोलने और मोबाइल फोन का सिम लेने के लिए ‘आधार’ को स्वैच्छिक बनाने संबंधी ‘आधार और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक 2019’ को सोमवार को मंजूरी प्रदान कर दी।

राज्यसभा ने चर्चा के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा में यह विधेयक पिछले सप्ताह बृहस्पतिवार को ही पारित किया जा चुका है। उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार में संरक्षित डाटा को पूरी तरह से सुरक्षित बताया। उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य सदस्यों द्वारा डाटा सुरक्षा कानून बनाने की मांग पर आश्वासन दिया कि सरकार जल्द ही ‘डाटा संरक्षण विधेयक’ पेश करेगी। इसकी प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है। प्रसाद ने इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा डाटा सुरक्षा को लेकर उठाये गये सवालों के जवाब में कहा, पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने ‘आधार’ को कानूनी आधार दिये बिना ही लागू कर दिया था इसलिए यह निराधार था। इसे हमने कानूनी आधार प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय के फैसले के आलोक में पेश किया गया है। आधार पर देश की करोड़ों जनता ने भरोसा किया है। उन्होंने कहा कि इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी के पास आधार नहीं होने की स्थिति में उसे राशन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। इस बारे में कोई सूचना जाहिर करने के लिए धारक से अनुमति प्राप्त करनी होगी। प्रसाद ने कहा कि देश में 123 करोड़ आधार धारक हैं और इनसे जुड़ी किसी जानकारी को निजी कंपनियों या किसी अन्य पक्ष को लीक या जारी नहीं किया जा सकता है।

मिलिंद देवड़ा पर निरुपम का डबल अटैक

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मुंबई – कांग्रेस इस वक्त शायद अपने गठन के बाद से सबसे गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। कर्नाटक में सरकार के गिने-चुने दिन दिख रहे हैं। अध्यक्ष के नाम का कोई हल नहीं निकल रहा है। खुद भविष्य में गांधी परिवार के रोल को लेकर कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में पार्टी के अंदर की गुटबाजी भी अब खुलकर सामने आ रही है। पिछले दो दिनों से लगातार मुंबई कांग्रेस में यही स्थिति देखी जा रही है। पार्टी के एक नेता को नीचा दिखाने के लिए दूसरे नेता खुलेआम सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। संजय निरुपम ने सोमवार को फिर से मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले मिलिंद देवड़ा पर निशाना साधा है।

संजय निरुपम ने सोमवार को मिलिंद देवड़ा का नाम लिए बिना ट्विटर पर लिखा है, “‘युवा नेता’ जो पार्टी को ‘राष्ट्रीय स्तर’ पर स्थिर करना चाहते हैं, उन्होंने लोकसभा चुनाव के एक उम्मीदवार की शिकायत की कॉपी मीडिया हाउस को पब्लिश करने के लिए रिलीज की है। यह उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ चुनाव के बाद दी गई थी।” क्या इस तरीके से वो पार्टी को स्थिर करने जा रहे हैं?” दरअसल, मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले मिलिंद देवड़ा ने पार्टी को स्थिर करने के लिए खुद के नेशनल लेवल पर योगदान देने की इच्छा जताई थी, जिसपर निरुपम ने उनपर ये तंज कसा है।

इससे पहले रविवार को जब मिलिंद देवड़ा ने मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, तो भी निरुपम ने नाम लिए बिना उनपर सीधा तंज कसा था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “इस्तीफा में त्याग की भावना अंतर्निहित होती है। यहां तो दूसरे क्षण ‘नेशनल’ लेवल का पद मांगा जा रहा है। यह इस्तीफा है या ऊपर चढ़ने की सीढ़ी ? पार्टी को ऐसे ‘कर्मठ’ लोगों से सावधान रहना चाहिए।” दरअसल, देवड़ा ने तब इस्तीफा दिया, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी महासचिव का पद छोड़ने की घोषणा की। इससे पहले राहुल गांधी के इस्तीफे के महीने भर बाद तक सभी नेता चुप्पी साधे बैठे हुए थे।

दरअसल, मिलिंद देवड़ा के खिलाफ संजय निरुपम की भड़ास को इस तरह से समझा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही राहुल गांधी ने उनसे मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी छीनकर देवड़ा को सौंप दी थी। लेकिन, मिलिंद देवड़ा भी मायानगरी में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं दिला सके और खुद अपनी सीट भी गंवा बैठे। यही वजह है कि निरुपम को उनके खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका मिला हुआ है। हालांकि, देवड़ा राहुल गांधी के करीबी बताए जाते हैं। पिछले 4 जुलाई को भी जब राहुल मानहानि के एक केस में पेशी के लिए मुंबई पहुंचे थे, तो उनकी यात्रा का आयोजन मिलिंद देवड़ा ने ही कराया था।

फेसबुक-ट्विटर को सोशल मीडिया समिट में ट्रंप ने नहीं भेजा बुलावा

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वाशिंग्टन – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ट्विटर और फेसबुक से बेहद नाराज हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया क्षेत्र के माहौल और चुनौतियों पर बुलाये गए एक समिट में इन दोनों कंपनियों को नहीं बुलाया है। ये समिट 11 जुलाई को प्रस्तावित है। बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का लगातार इस्तेमाल करते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर वह अपने नीतिगत फैसले, कार्यकारी आदेश की जानकारी देते हैं। ट्रंप ट्विटर पर दुनिया में सबसे ज्यादा फॉलोअर रखने वाले नेताओं में से एक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे सोशल मीडिया क्षेत्र की इन दिग्गज कंपनियों को न बुलाने के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह विचार हो सकता है जिसके अनुसार, दोनों प्लेटफॉर्म्स कंजर्वेटिव या रिपब्लिकन के विचारों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।

फेसबुक और ट्विटर जैसी दिग्गज कंपनियों के बिना कोई सोशल मीडिया सम्मेलन की कल्पना भी नहीं कर सकता, लेकिन अपने प्लेटफॉर्म पर रिपब्लिकन पार्टी के विचारों का सम्मान नहीं करने के लिए ट्रंप बार-बार इन कंपनियों पर हमला कर चुके हैं।

ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जैक डोर्से के साथ अपनी पिछली बैठक में ट्रंप ने डोर्से से पूछा कि माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर विशेषकर उनके फॉलोवरों की संख्या कम कैसे हो रही है।

व्हाइट हाउस ने जून में इस सम्मेलन की घोषणा की थी और कहा था कि ये सम्मेलन दुनिया के डिजिटल लीडर्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाने पर मौजूदा चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए एक शानदार मंच होगा। व्हाइट हाउस ने अभी उन कंपनियों का नाम सार्वजनिक नहीं किया है जो इस सम्मेलन में भाग लेंगे।

बता दें कि ट्रंप फेसबुक और ट्विटर से इतने खफा है कि कुछ ही दिन पहले उनके दफ्तर व्हाइट हाउस ने एक टूल लॉन्च किया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक अगर ट्विटर या फेसबुक ने किसी शख्स को गलत तरीके से सेंसर या प्रतिबंधित किया है तो वो इस टूल के माध्यम से इसकी शिकायत कर सकता है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप समेत रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता इस बात की शिकायत कर चुके हैं कि ट्विटर और फेसबुक रिपब्लिकन और कंजरवेटिव पार्टी के नेताओं की आवाज को गलत तरीके से प्रतिबंधित करते रहते हैं।

बजट 2019: मध्यम वर्ग के उम्मीदों पर फिरा पानी, इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

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नई दिल्ली – बजट 2019 वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। उम्मीद थी कि इस बार बजट में पर्सनल इनकम टैक्स में छूट के दायरे को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बजट में आम टैक्स पेयर्स को कोई राहत नहीं दी गई है। 5 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए टैक्स स्लैब पहले जैसा ही है।

गौरतलब है कि 1 फरवरी को मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतरिम बजट पेश करते हुए तब के वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मिडिल क्‍लास को तोहफा देते हुए 5 लाख रुपये तक की कमाई को टैक्‍स से मुक्‍त कर दिया था।

निर्मला सीतारमण ने भाषण की शुरुआत में कहा कि ईमानदारी से टैक्स देनेवालों को धन्यवाद। उन्होंने आगे कहा कि वे देश के जिम्मेदार नागरिक हैं, टैक्स के रूप में जिनके मूल्यवान योगदान की वजह से देश का चहुंमुखी विकास हो पा रहा है। उन्होंने अंतरिम बजट में 5 लाख तक की सालाना टैक्सेबल आमदनी वालों को टैक्स से पूरी तरह से राहत देने की घोषणा को दोहराया है। हालांकि, जिनकी सालाना टैक्सेबल इनकम 5 लाख से ज्यादा है वे इस छूट के दायरे में नहीं आएंगे क्योंकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

वहीं ज्यादा कमाई करने वालों को थोड़ा झटका लगा है। अब 2 से 5 करोड़ रुपये सालाना कमाने वालों पर 3 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगेगा और साथ ही 5 करोड़ रुपये से अधिक कमाने पर 7 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इसके अलावा अगर कोई बैंक से एक साल में एक करोड़ से अधिक की राशि निकालता है तो उसपर 2 फीसदी का टीडीएस लगाया जाएगा। यानी सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक निकालने पर 2 लाख रुपये टैक्स में ही कट जाएंगे।

वहीं इलेक्ट्रिक वीइकल खरीदने पर इनकम टैक्स में 1.5 लाख की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलेगी। यह छूट वाहन खरीदने को लिए गए लोन पर दिए जाने वाले ब्याज पर मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की जीएसटी दर में भी कटौती होगी। इसे 12 प्रतिशत से कम करके 5 प्रतिशत किया जाएगा।

वहीं लोन लेकर 45 लाख रुपये तक कोई घर खरीदता है तो उसे इनकम टैक्स में 1.5 लाख की अतिरिक्त छूट मिलेगी। यह छूट उन्हें ही मिलेगी जो होम लोन मार्च 2020 से पहले या उस महीने तक लेंगे।

निर्मणा सीतारमण वित्त मंत्री ने बताया कि 400 करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनियों पर 25% कॉरपोरेट टैक्स लगेगा। इससे अब केवल .7 प्रतिशत कंपनियां 25% टैक्स कॉरपोरेट टैक्स के दायरे से बाहर रह गई हैं।

एक बार फिर ‘भगवा’ रंग में दिखने वाली है टीम इंडिया

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नई दिल्ली – विश्व कप में टीम इंडिया सेमीफाइनल में पहुंच गई है । बता दें कि लीग मुकाबले के दौरान टीम इंडिया नारंगी रंग की जर्सी में दिखी थी जिसको लेकर कई तरह की बातें भी हुई थीं और अब ऐसा लग रहा है कि टीम इंडिया एक फिर सेमीफाइनल में नारंगी(भगवा) रंग की जर्सी में नजर आ सकती है।

वैसे तो टीम इंडिया की नई जर्सी के पीछे आईसीसी का नियम रहा है और इसलिए लीग मैच में टीम इंडिया ने इंग्लैंड के खिलाफ नारंगी जर्सी पहनी थी। अब सेमीफाइनल में एक बार फिर अगर भारतीय टीम का सामना इंग्लैंड से होता है तो टीम इंडिया को उसी जर्सी में उतरना होगा ।

गौरतलब है कि आईसीसी के नए नियम के मुताबिक टूर्नामेंट के किसी मैच में दो टीमें एक ही रंग की जर्सी नहीं पहनकर खेल सकती हैं और उसमें किसी एक टीम को रंग बदलना होगा । इस मामले ये नियम मेजबान टीम पर लागू नहीं होगा और इसलिए भारत के खिलाफ इंग्लैंड को जर्सी बदलनी की जरूरत नहीं है।

बता दें कि इंग्लैंड और टीम इंडिया की दोनों की जर्सी नीले रंग की है और इसी वजह से भारतीय टीम को अपनी टी शर्ट का रंग बदल कर उतरना पड़ रहा है। बता दें कि मौजूदा विश्व कप में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा है और वह सेमीफाइनल में पहुंचकर खिताब से दो कदम ही दूर है।हालांकि माना जा रहा हैकि नॉकआउट दौर में टीम इंडिया को बाकी टीमों से भी कड़ी चुनौती मिल सकती है।

कांग्रेस ने हमारे साथ धोखा किया – अल्पेश ठाकोर

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गांधीनगर: कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर ने राज्यसभा उपचुनाव के मतदान के बाद गुजरात विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों के लिए शुक्रवार को उपचुनाव के लिए मतदान जारी है.

इस दौरान कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे चुके बागी विधायक अल्पेश ठाकोर और एक अन्य विधायक धवलसिंह जाला ने बीजेपी के पक्ष में वोटिंग कर दी. क्रॉस वोटिंग के बाद अल्पेश ने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया.

इस्तीफा देने के बाद ठाकोर ने कहा कि मैंने अंतर आत्मा की आवाज से मतदान किया और राष्ट्रीय नेतृत्व को ध्यान में रखकर के किया. जो पार्टी जन आधार खो चुकी है और जिस पार्टी ने हमारे साथ द्रोह किया है उसको मद्देनजर रख कर किया.

अल्पेश ठाकोर ने कहा कि मैंने राहुल गांधी पर विश्वास करके कांग्रेस ज्वाइन की थी. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं किया. हम बार-बार अपमानित होते रहे. इसलिए मैंने कांग्रेस के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है.

पश्चिम बंगाल का नाम कुछ भाजप नेता नहीं बदलने दे रहे : ममता बनर्जी

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कोलकाता – पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सरकार पर आरोप लगाया है कि ‘भाजपा नेताओं का एक वर्ग’ राज्य का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ नहीं करने दे रहा है।

बनर्जी ने सदन में कहा, हम 2003 से ही प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक यह नहीं हो पाया है। बंगाल को वंचित क्यों किया जा रहा है? सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारउन्होंने कहा, भाजपा नेताओं का एक वर्ग नाम परिवर्तन का विरोध कर रहा है। यह राजनीति से प्रेरित है। मैंने इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है।

बनर्जी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का नाम बदलकर बांग्ला करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की थी। उन्होंने इसके साथ ही मोदी से संसद के चल रहे सत्र में एक संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी कार्यवाही के लिए भी कहा।

नित्यानंद राय ने बुधवार को सांसद ऋतब्रत बनर्जी द्वारा पूछे गए एक सवाल पर कहा कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा था कि किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की जरुरत होती है और ऐसा सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

पिछले वर्ष 26 जुलाई को पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था और प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया था।

रोज यह एक काम करने से बढ़ेगी आकर्षण शक्ति

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तीसरी आंख यानी आज्ञा चक्र की दिव्य दृष्टि बढ़ाने वाली साधनाओं में ‘त्राटक’ मुख्य है। इसे बिंदु योग भी कहते हैं। अस्त-व्यस्त इधर-उधर भटकने वाली बाह्य और अन्तः दृष्टि को किसी बिंदु विशेष या लक्ष्य विशेष पर एकाग्र करने को बिंदु साधना कह सकते हैं। त्राटक का उद्देश्य यही है। त्राटक में बिंदु और दीपक जैसे साधनों का उपयोग किया जाता है। ध्यान के शुरुआती अभ्यास की दृष्टि से त्राटक को जरूरी और प्रमुख माना गया है
त्राटक के स्वरूप का वर्णन करते हुए हठयोग प्रदीपिका में कहा गया है-
निरीक्षे त्रिश्चलदृश्या सूक्ष्म लक्ष्यं समाहितः।
अश्रु संपात पर्यन्तं आचार्ये स्त्राटय स्मृतम्॥
यानी एकाग्र चित्त होकर निश्चल दृष्टि से सूक्ष्म लक्ष्य को तब तक देखते रहे जब तक आंखों में से आंसू न आ जाए। इस साधना को त्राटक कहते हैं।
योग रसायन में कहा गया है –
यथा धन्वी स्वकं लक्ष्यं वेधयत्यं चलेक्षणः।
तथैव त्राटकाभ्यासं कुर्मादेकाग्रमानसः।।
जैसे धनुष चलाने वाला मात्र अपने लक्ष्य को ही लक्ष्यबेध के क्षण में देखता है, वैसे ही त्राटक का अभ्यास एकाग्र मन से करना चाहिए। त्राटक के माध्यम से किया गया एकाग्रता का अभ्यास बढ़ते-बढ़ते समाधि की स्थिति तक जा पहुंचता है। समाधि के साथ दिव्य दृष्टि का-अतीद्रिंय चेतना भी जागृत हो जाती है। त्राटक का प्रतिफल समयानुसार समाधि के रूप में सामने आता है। कहा गया है-
त्राटकाभ्यासतश्चापि कालेन क्रमयोगतः।

त्राटक का अभ्यास –
वैसे तो त्राटक का अभ्यास बिंदु, तारा, सूर्य, चंद्र आदि पर किया जाता है, लेकिन फिर भी इसके अभ्यास में दीपक सबसे उपयुक्त है। मिलावटी या नकली घी की अपेक्षा शुद्ध तेल ज्यादा अच्छा है। मोमबत्ती का उपयोग भी किया जा सकता है। कम पावर के रंगीन बल्ब भी इस प्रयोजन की पूर्ति कर सकते हैं। इनमें से जो भी उपकरण काम में लाना हो, उसे छाती की सीध में चार से दस फुट तक की दूरी पर रखना चाहिए। पीछे काला, नीला या हरा पर्दा टंगा हो या इन रंगों से दीवार रंगी हो। त्राटक के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा है। रात्रि के समय भी किया जा सकता है। दिन में सूर्य का प्रकाश फैला रहने से यह साधना ठीक तरह नहीं बन पड़ती हैं। यदि दिन में ही करनी हो तो अंधेरे कमरे में करना चाहिए। साधना के लिए कमर सीधी, हाथ गोदी में, पालथी सही रखकर बैठना चाहिए। वातावरण में घुटन पैदा करने वाली बाधाएं नहीं होना चाहिए। यह अभ्यास दस मिनट में आरम्भ करके उसे एक-एक मिनट बढ़ाते हुए एक दो महीने में अधिक से अधिक आधे घंटे तक पहुंचाया जा सकता है। इससे अधिक नहीं किया जाना चाहिए। खुले नेत्र से प्रकाश ज्योति को दो से पांच सेकंड तक देखना चाहिए और आंखें बंद कर लेनी चाहिए। जिस स्थान पर दीपक जल रहा है उसी स्थान पर उस ज्योति को ध्यान नेत्रों से देखने की कोशिश करना चाहिए। एक मिनट बाद फिर आंखे खोल लेना चाहिए और पूर्ववत् कुछ खुले नेत्रों से ज्योति को देखकर फिर आंखें बंद कर लेना चाहिए। इस तरह हर एक-एक मिनट के अंतर से नेत्र खोलने और कुछ सेकंड देखकर फिर आंखे बंद करने और ध्यान द्वारा उसी स्थान पर ज्योति दर्शन बार-बार करते रहना चाहिए। योग रसायन में कहा गया है –
राजयोगसमाधिः स्यात् तत्प्रकारोऽधुनोच्यते।
त्राटक के अभ्यास से भी समयानुसार राजयोग की समाधि का लाभ संभव है। त्राटक विधियां अनेक प्रकार की हैं। मैस्मरेजम के अभ्यासी सफेद कागज पर काला गोला बनाते हैं। उसके मध्य में सफेद बिंदु रहने देते हैं। इस पर नेत्र दृष्टि और मानसिक एकाग्रता को केंद्रित किया जाता है। अष्टधातु के बने तश्तरीनुमा पतरे के मध्य में तांबे की कील लगा कर उस मध्य बिंदु को एकाग्र भाव से देखते रहने का भी वैसा ही लाभ बताया जाता है। कहते हैं कि धातु के माध्यम से बेधकदृष्टि की शक्ति और भी अधिक बढ़ती है।
क्या होगा अभ्यास के बाद
‘योग रसायन’ में त्राटक के विधान और प्रगति क्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा है-
दृश्यते प्रथमाभ्यासे तेजो बिदु समीपगम्।
चक्षषो रश्मिजातानि प्रसंरति समंततः॥
त्राटक के अभ्यास से प्रथम तेजोमय बिंदु पास आता दिखेगा। नेत्र से रश्मियां निकलती दिखेंगी।
तेजसा संवृतं लक्ष्यं क्षणं लुप्तं भवेत्ततः।
क्षणं दृष्टिगतं भूत्वा पुनलुप्तं भवेत्क्षणात्॥
फिर वह तेजपूर्ण बिंदु कभी लुप्त दीखेगा, कभी प्रकट हुआ दिखेगा । ऐसा ही क्रम बार-बार चलेगा।
त्राटक के लाभ –
1.एकाग्रता बढ़ने लगेगी।
2. आकर्षण व तेज बढ़ेगा और सम्मोहन शक्ति पैदा होगी।
3. दुसरों के मन के विचार समझ आने लगेंगे।
4. अधिक अभ्यास से भविष्य में होने वाली घटनाएं भी पहले से ही दिख सकती हैं।