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ओला और उबर ग्राहकों की बढ़ सकती है परेशानी, सरकार ने किया..

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प्रतीकात्मक तस्वीर

आज के समय में ओला और उबर हमारे यातायात का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं| अब हमें जब भी कहीं जाना होता है तो हम पहले ओला और उबर के बारे में सोचते हैं क्योंकि कैब हमें अपनी जगह से लेकर झन जाना हो वहाँ आसानी से पहुँचा देती है। लगातार बेहतर होती सर्विसेज़ के कारण ओला और उबर की डिमांड बढ़ने लगी है और लोग इसके आदी भी होने लगे हैं ख़ासकर उन मेट्रो शहरों में जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधन कम हैं|

लेकिन अब ओला और उबर के ग्राहकों के लिए आ सकती है मुश्किल क्योंकि केंद्र सरकार पीक आवर्स यानी अधिक मांग वाली अवधि में कैब एग्रीगेटर्स को ग्राहकों से बेसिक फेयर से अधिक किराया लेने की इजाजत दे सकती है| जिसका भारी असर कैब का प्रयोग करने वाले ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा| दरअसल एग्रीगेटर्स इंडस्ट्री के लिए कुछ नए नियम बनाये जा रहे हैं, जिसका फ़ायदा कैब कम्पनियों को हो सकता है।

कैब कंपनियां डिमांड-सप्लाई को मैनेज करने के लिए सर्ज प्राइसिंग लागू करने के लिए सरकार से कहती आई है| इस विधेयक के लागू हो जाने से यात्रा के लिए ग्राहक को तीन गुना तक ज़्यादा किराया देना पड़ सकता है। इस विधेयक में बताया जा रहा है कि कैब एग्रीगेटर्स सर्ज प्राइसिंग के तहत कितना किराया ग्राहक से ले सकती है| 1 सितम्बर 2019 से लागू मोटर व्हीकल एक्ट के बाद से ही इस प्रस्ताव को डिजिटल इंटरमिडियरी यानी मार्केट मानकर कैब एग्रीगेटर्स के लिए यह प्रस्ताव में लाया जा रहा है| खबरों के अनुसार कर्नाटक देश का पहला राज्य है जिसने कैब एग्रीगेटर्स को रेगुलेट यानी नियमित किया है|

उत्तर प्रदेश में अब सरकारी ख़ज़ाने से नहीं होगा मंत्रियों के आयकर बिलों का भुगतान

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उत्तर प्रदेश में लगभग 4 दशक पुराना एक क़ानून मंत्रियों के आयकर का भुगतान राजकोष से सुनिश्चित करता था। ‘उत्तर प्रदेश मंत्री वेतन भत्ते एवं विविध कानून 198’ तब बना था जब विश्वनाथ प्रताप सिंह मुख्यमंत्री थे। विश्वनाथ प्रताप सिंह के सहयोगी रहे कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि क़ानून पारित होते समय मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने विधानसभा में तर्क दिया था कि राज्य सरकार को ही आयकर का भुगतान करना चाहिए, क्योंकि अधिकतर मंत्री गरीब पृष्ठभूमि से हैं, और उनकी आय बहुत कम है। इस क़ानून की वजह से अब तक 19 मुख्यमंत्रियों और लगभग 1000 मंत्रियों को फायदा पहुंचा है.

राज्यसभा के 2012 के चुनाव के समय दाख़िल हलफ़नामे के मुताबिक़ उस समय बसपा सुप्रीमो मायावती की संपत्ति 111 करोड़ रुपए बताई गई थी। लोकसभा के हाल के चुनाव के समय दाख़िल हलफ़नामे के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भी उनकी पत्नी डिंपल के साथ 37 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है। विधान परिषद के 2017 के चुनाव के समय दाख़िल हलफ़नामे के मुताबिक़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संपत्ति 91 लाख रुपए से अधिक है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता पी.एल पुनिया कहते हैं कि वेतन अब पहले की तुलना में कई गुना बढ़ चुके हैं, इसलिए इस रियायत की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है, बेहतर होगा कि इस कानून पर पुनर्विचार करके इसे ख़त्म कर दिया जाना चाहिए।

इसी विषय में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि अब तक ‘उत्तर प्रदेश मंत्री वेतन भत्ते एवं विविध कानून 1981’ के अंतर्गत सभी मंत्रियों के आयकर बिल का भुगतान राज्य सरकार के सरकारी ख़ज़ाने से किया जाता रहा था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के अनुसार यह निर्णय लिया गया है, कि अब सभी मंत्री अपने आयकर का भुगतान स्वयं करेंगे। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकारी ख़ज़ाने से अब मंत्रियों के आयकर बिलों का भुगतान नहीं किया जाएगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने यह सूचना दी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ‘उत्तर प्रदेश मंत्री वेतन भत्ते एवं विविध कानून 1981’ के इस प्रावधान को अब ख़त्म कर दिया जाएगा।

नये यातायात नियम प्रशंसनीय और स्वागतयोग्य: किशन शर्मा

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अंतत: केन्द्रीय सडक यातायात मंत्री नितिन गडकरी जी ने यातायात विभाग को कुछ बहुप्रतीक्षित अधिकार प्रदान करने का निर्णय ले लिया है । सरकार ने घोषणा कर दी, और तुरंत ही अपेक्षित विरोध शुरू हो गया । पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, राजस्थान जैसे राज्यों की भा0ज0पा0 विरोधी दलों की सरकारों से तो यह अपेक्षित था, परंतु महाराष्ट्र में इसका विरोध होना, अचरजकारी है । चुनाव का समय निकट होने के कारण यह विरोध किया जा रहा होगा, अन्यथा भा0ज0पा0 शासित प्रदेश में अन्य कोई कारण नज़र नहीं आता ।

निजी स्तर पर मैं स्वयं नये कानून और जुर्माने की बढाई गई राशि तथा सज़ा का समर्थन करता हूं । वास्तव में यह अति आवश्यक था इस देश में । 50 या 100 रुपये का दंड कोई महत्व नहीं रखता आज के समय में । कानून और नियम तोडने वाले अधिकांश लोग 50 या 100 रुपये का नोट जेब में तैयार ही रखते रहते थे, कि चाहे दंड भरना पडे या पुलिसकर्मी को देना पडे, वह रकम तुरंत दी जा सके । लोगों के मन से डर ही गायब हो गया था और नियम कानून की धज्जियां उडाने वाले बच्चे, युवा, वयस्क, और वृद्ध महिला-पुरुष निडर होकर अपनी शान दिखाते रहते थे ।

जब भी पुलिस के उच्च अधिकारियों से मैंने इस विषय पर चर्चा की, वे हमेशा यही कहते रहे कि जुर्माना और सज़ा बढाये बिना लोगों को नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता । मैंने अनेक लेख यातायात की दुर्दशा पर लिखे परंतु किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया । देश भर में राजमार्गों पर, महामार्गों पर, महानगरों में, नगरों में, कस्बों में और छोटे छोटे गावों में जिस लापरवाही से वाहन गलत दिशा में चलाये जाते रहे हैं, इसकी जानकारी सभी को है, और फ़िर भी किसी को नहीं है । असीमित संख्या में तेज़ रफ़्तार से उल्टी दिशा में चलाये जाने वाले वाहनों को देखकर मैं अनेक बार आश्चर्य से यह सोचने पर मजबूर होता रहा हूं कि कहीं मैं ही तो गलत दिशा में वाहन नहीं चला रहा ।

दोपहिया वाहनों पर कम से कम तीन व्यक्ति तो बैठे दिखाई देते ही रहे हैं । तीन सवारी बैठाने वाले औटोरिक्षा में मैंने अनेक बार 9 या 10 व्यक्ति भी बैठे देखे हैं । बसों में भरे हुए लोगों के अलावा, बस की छत पर बैठे हुए लोग और पीछे लटके हुए लोग कहीं भी दिखाई दे जाते हैं । तेज़ रफ़्तार से वाहन चलाना और बाएं-दाएं कैसे भी वाहन चलाना आजकल के लोगों का अलग अन्दाज़ हो गया है । भारी सामान दोपहिया वाहन पर ले जाना, और मोबाइल फ़ोन का प्रयोग वाहन चलाते समय करना शायद अटलनीय क्रम होता जा रहा था । अपने वाहन को कहीं भी, कैसे भी और कभी भी खडा कर देना या मोड देना भी नियमित कृत्य बनता जा रहा था ।

लाल बत्ती होने पर भी सिग्नल पर नहीं रुकना एक ऐसा नियमित काम हो गया है कि अब किसी को भी तब आश्चर्य होने लगता है, जब कोई मुझ जैसा व्यक्ति रुक कर हरी बत्ती की प्रतीक्षा करने लगता है । लोग हंसते हैं, चिल्लाते हैं और गालियां भी देते हैं । “पुलिस वाला नहीं है, फ़िर क्यों रुका है, और हमारा रास्ता क्यों रोक रखा है” जैसे वाक्य सुनता रहा हूं । पुलिस वाले हों, तब भी अनेक लोग कहां डरते हैं ? अनेक पुलिसकर्मी डरे हुए रहते हैं आजकल के वाहन चालकों से । तेज़ रफ़्तार से वाहन चलाते हुए अनेक लोग कभी भी रोके जाने पर रुकने की बजाय, पुलिसकर्मी पर ही वाहन चढा देते हैं और अनेक पुलिसकर्मी इस तरह घायल होते रहे हैं ।

दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट सिर पर नहीं पहनना बल्कि या तो हाथ में लटका लेना, या वाहन के हैंडल में लटका लेना, या पीछे लटका लेना, या पैरों के पास रख लेना; आम बात है । कार में सीट बैल्ट का उपयोग नहीं करना भी आम बात ही है । फ़ैंसी नम्बर लिखवाना शान दिखाने की बात होती है । कार के कांच पर रंगीन फ़िल्म लगाना तो बडे लोगों की निशानी माना जाता है । अनेक बडे राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों और फ़िल्मी कलाकारों के वाहनों पर ऐसी फ़िल्में लगी रहती हैं । वाहनों पर अनधिकृत रूप से “पुलिस”, “ऑन गवर्नमेंट ड्यूटी”, या “वी0आई0पी0” लिखकर भी कुछ लोग घूमते रहते हैं ।

“प्रैस” लिखकर अनेक लोग क्या दर्शाना चाहते हैं, यह मैं तो नहीं जानता । कुछ वाहनों पर बडे बडे अक्षरों में “चेयरमैन”, “प्रधान मंत्री”, “मंत्री”, “अध्यक्ष” लिखा होता है और उसके नीचे छोटे छोटे अक्षरों में, “मोहल्ला कमेटी”, “शिक्षा समिति”, आदि लिख देते हैं कुछ लोग । ऐसे लोगों को बडी रकम का जुर्माना या सख्त सज़ा ही ठीक करने का प्रयास कर सकती है, और उसके लिये नये यातायात नियम घोषित करके नितिन गडकरी जी ने एक प्रशंसनीय कार्य किया है । मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि जिस दिन दोपहिया और तीनपहिया वाहनों को नियंत्रित कर लिया जायेगा, उस दिन से सडक दुर्घटनाओं की संख्या में कमी और यातायात नियमों की अवहेलना में कमी निश्चित रूप से दिखाई देने लगेगी । वास्तव में, यातायात के नये नियम, एक बहुप्रतीक्षित निर्णय है, जो प्रशंसनीय भी है और स्वागत योग्य भी है ।

( किशन शर्मा: 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर – 440015; मोबाइल – 8805001042 )

इस तरह भाजपा ने अपनी पकड़ को किया मज़बूत, बसपा के दानिश अली को मिली ये ज़िम्मेदारी..

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2014 के बाद से भाजपा का जो विजय रथ चला है तो अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा, बल्कि भाजपा की पकड़ हर जगह मजबूत हुई है। चाहें वह विश्वविद्यालय के चुनाव हों देश की जनता का दरबार हो या फिर संसद। हर जगह बीजेपी ने सबको अपने रंग में रंग लिया है। और अब बात करते हैं संसदीय समितियों के गठन की, तो संसद की कुल 24 स्थाई समितियों में से 13 की अध्यक्षता में भाजपा ने बाज़ी मारी है। और चार की अध्यक्षता कांग्रेस के सांसद करेंगे। बीजेपी के जयंत सिन्हा को वित्त समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है।

बीजद के पिनाकी मिश्रा और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को भी इसे समिति की सदस्यता दी गई है। इसके अलावा बीजेपी के पी.पी चौधरी को विदेश मामले की समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है तो वहीं कांग्रेस के पी चिदंबरम और सपा नेत्री जया बच्चन को भी समिति की सदस्यता दी गई है। कांग्रेस के आनंद शर्मा को गृह मामलों की समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। भाजपा के शेरिंग नामग्यालय को भी सदस्य बनाया गया है।

बीजेपी के टी.जी वेंकटेश को परिवहन पर्यटन और संस्कृति की समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। इसके साथ सुमनलता अंबरीश को भी सदस्यता मिली है। कांग्रेस के शशि थरूर को इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की समिति का अध्यक्ष पद प्राप्त हुआ है। तो कांग्रेस के ही कार्ति चिदंबरम बीजेपी के सनी देओल और टीएमसी की महुआ मोइत्रा को भी सदस्यता मिली है। भाजपा के सत्यनारायण जटिया को मानव संसाधन विकास समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। टीआरएस की तरफ से के. केशवराव को उद्योग समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया।

बीएसपी के दानिश अली को भी सदस्य के रूप में नियुक्ति मिली। कांग्रेस के जयराम रमेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर्यावरण और वन अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किये गए। इसके साथ साक्षी महाराज और असदुद्दीन ओवैसी को भी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। जबकि सपा के रामगोपाल यादव को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। कांग्रेस के एके एंटनी बीजेपी के सुरेश प्रभु और सुब्रमण्यम स्वामी को भी सदस्य बनाया गया है।

बीजेपी के भूपेंद्र यादव को व्यक्तिगत, सार्वजनिक, शिकायत, क़ानून और न्याय संबंधी समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति मिली है। भाजपा के ही पीसी गद्दीगौदर को कृषि पर समिति के समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। एमडीएमके के वाइको को भी सदस्यता मिली है। राजीव रंजन सिंह को ऊर्जा समिति के अध्यक्ष का पद मिला है। तो बीजेपी की शोभा करंदलाजे साथ ही अखिलेश यादव और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी सदस्यता दी गई है। टीएमसी के सुदीप बंधोपाध्याय को खाद्य एवं उपभोक्ता मामले साथ ही सार्वजनिक वितरण समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। और एमसी मैरी कॉम और भगवंत मान को भी समिति का सदस्य बनाया गया है। बीजेपी के भतृहरि मेहताब को श्रम पर समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। तो वरुण गांधी को भी सदस्यता दी गई है।

आर्थिक मंदी: इस बड़ी कंपनी ने भी रोका ट्रक का उत्पादन..

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यूं तो सरकार ने कहा है कि आर्थिक मंदी से निपटने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। लेकिन देश में इसका असर दिखाई पड़ रहा है। इसी सप्ताह हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड ने कमज़ोर मांग की वजह से अपने विभिन्न निर्माण कारख़ानों में उत्पादन 16 दिन तक बंद रखने की घोषणा की थी। हिंदुजा से पहले मारुति भी अपने कारख़ानों को कुछ दिनों के लिए बंद रख चुकी है।

अब खबर है, कि शुक्रवार को ‘महिंद्रा एंड महिंद्रा’ ने शेयर बाज़ारों में भेजी सूचना में कहा है कि तिमाही के दौरान 3 दिन अतिरिक्त उत्पादन स्थगित रहेगा। कंपनी स्पष्ट किया है कि उसके पास वाहनों का पर्याप्त भंडार है। इसलिए कंपनी प्रबंधन को ऐसा नहीं लगता कि इससे बाजार में उसके वाहनों की उपलब्धता पर कोई असर पड़ने वाला है। साथ ही ‘महिंद्रा एंड महिंद्रा’ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस महीने के अंत में कृषि उपकरण क्षेत्र में भी 1 से 3 दिन तक उत्पादन बंद रखेगी।

मौजूदा तिमाही में अपने वाहन कारख़ानों में 8 से 17 दिन तक उत्पादन बंद रखने की घोषणा की वजह बताते हुए कंपनी ने कहा है कि बिक्री का उत्पादन के साथ समायोजन करने के लिए वह यह क़दम उठा रही है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी ग्रोथ रेट) 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में 5 फ़ीसदी रह गई है। आर्थिक मंदी पर विपक्षी पार्टियां सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। लेकिन आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से ऊपर उठकर इस आर्थिक मंदी से देश को उभारने के लिए सभी दलों को एक साथ होकर प्रयास करने की ज़रूरत है।

रेप आरोपी स्वामी चिन्मयानन्द की मुश्किलें बढीं, इस वजह से…

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Chinmayanand

सियासत बहुत ताक़तवर होती है, जिसके पैरों तले कई बार कई मासूम ज़िन्दगियों की बर्बादी की दास्तान लिखी जाती है। लेकिन बहुत से ऐसे क़िरदार होते हैं, जो इसे अपनी बदनसीबी समझ कर चुपचाप ग़लत बात को सहते नहीं, बल्कि ग़लत के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं। ऐसे ही एक मामले में एक रेप पीड़िता ने मंत्री कुलदीप सेंगर के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाई। और अभी भी अपनी लड़ाई बहादुरी से लड़ रही है। और अब एक और लड़की ने एक मंत्री के ख़िलाफ़ रेप का मामला उठाया है। जो रोज़ मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। आइये जान लेते हैं क्या है पूरा मामला।

यूपी के शाहजहांपुर के स्वामी सुखदेवानंद विधि महाविद्यालय में एल एल एम करने वाली एक छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि एक सन्यासी ने कई लड़कियों की ज़िंदगी बर्बाद की है और उसे और उसके परिवार को इस सन्यासी से जान का ख़तरा है और जब लड़की के पिता ने आरोपी सन्यासी के ख़िलाफ़ रेप और शारीरिक शोषण की रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए,तो पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।

यह सन्यासी और कोई नहीं स्वामी चिन्मयानंद है। जिसके ऊपर एक छात्रा ने रेप का आरोप लगाया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही करते हुए एसआईटी का गठन किया है। और रेप पीड़िता छात्रा को न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। इसी के तहत शुक्रवार को एसआईटी छात्रा से चिन्मयानंद का आमना-सामना कराने के लिए छात्रा को चिन्मयानंद के घर भी लेकर गई थी।

इससे पहले गुरुवार को एसआईटी ने चिन्मयानंद से पुलिस लाइन में 7 घंटे तक कड़ी पूछताछ भी की। उनसे रेप पीड़ित छात्रा और उसके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित सारी जानकारी ली गई। और इसके साथ चिन्मयानंद से उनकेऊपर लगाए गए यौन शोषण के आरोपों, मालिश कराते हुए वायरल वीडियो और 5 करोड़ की रंगदारी मांगने के आरोपों से जुड़े कई सवाल पूछे गए। इससे पहले एसआईटी ने छात्रा की मेडिकल जांच भी करवाई थी। चिन्मयानंद पर लगे आरोपों के बारे में रेप पीड़ित छात्रा के एक दोस्त का कहना है कि उसके पास चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ कुछ वीडियो सबूत के तौर पर रखे हुए हैं जिन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

बीमारियों से करे बचाव, सेहत से भरी ये पौष्टिक कटोरी

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यह तो हम सब जानते ही हैं कि सूप स्वास्थ्य की दृष्टि से शरीर के लिए कितने फ़ायदेमंद होते हैं। सूप पीने से शरीर को पौष्टिकता तो मिलती ही है साथ ही इनका लाजवाब स्वाद ज़ुबान को भी ख़ूब भाता है और बरसात के मौसम में अगर गर्मागर्म सूप का मज़ा लिया जाए तो ये हमें पूरी पौष्टिकता तो देता ही है, साथ ही मौसम का मज़ा भी दोगुना कर देता है। तो आज जानते हैं कि स्वाद और सेहत का मेल कैसे मिलता है सूप से।

हम अक़्सर सूप खाना खाने से पहले इ पीते हैं क्योंकि खाना खाने से पहले अगर गरमा गरम सूप सेवन किया जाए तो भूख़ खुलकर लगती है ये सेहत की दृष्टि से बहुत अच्छा है। बीमारी में अक्सर हमारी भूक कम हो जाती है और सही पोषण न मिलने से हमारा शरीर बहुत कमज़ोर और शक्तिहीन हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर सूप को खाने में आवश्यक रूप से शामिल करने की सलाह देते हैं, ताकि सूप से शरीर को ऊर्जा और शक्ति मिले। इससे बीमारी से जल्द से जल्द उबरने में सहायता मिलती है। इसी तरह जब हम बीमार होते हैं तो शरीर में पानी की बहुत कमी भी हो जाती है, ऐसे में सूप पीने से शरीर में पानी की मात्रा और पौष्टिकता दोनों बढ़ाती है।

सूप पौष्टिकता से भरपूर होता है क्योंकि उसमें उन सब्ज़ियों और खाद्य पदार्थों के सारे पौष्टिक तत्व होते हैं, जिनसे उसे बनाया जाता है। जो तरल रूप में हमारे शरीर में पहुंचकर उसे ऊर्जावान बनाते हैं। अगर स्वाद के दृष्टिकोण से देखा जाए तो जवाब मिलेगा सूप बेहद स्वादिष्ट भी होते हैं साथ ही ये पचने में भी बहुत आसान होते हैं सूप पीकर शरीर में भारीपन भी नहीं लगता और पेट भर भी जाता है।

अगर किसी वजह से ज़ुबान का स्वाद बिगड़ गया है और कुछ भी खाना अच्छा नहीं लग रहा तो बस पीकर देखिये स्वादिष्ट गरमागरम सूप हल्की काली मिर्च डालकर। अगर ज़ुखाम है या गले में ख़राश या गले में दर्द तो गर्मागर्म सूप बहुत राहत पहुँचाता है। ख़ासकर टमाटर का सूप सर्दी ज़ख़ाम में फ़ायदेमंद होता है। इसके साथ ही आप चाहें तो सब्ज़ियों का सूप भी पी सकते हैं।

अगर आप हेल्थ हेल्थ कॉन्शियस हैं और अपने वज़न पर नियंत्रण रखना चाहते हैं और मोटापे से जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं, सूप से बेहतर आपके लिए क्या हो सकता है इससे मिले पोषण भी और शरीर में जाने वाली सब्ज़ियों की मात्रा से शरीर बने हेल्थी बिना एक्स्ट्रा कैलोरी के। इससे शरीर की कमज़ोरों भी दूर होती है और बढ़ती है शरीर की इम्युनिटी। साथ ही सूप का प्रतिदिन सेवन करने से म्यूकस पतला हो जाता है जिससे बैक्टिरिया और वायरस से बचाव होता है और संक्रमण का ख़तरा भी नहीं रहता।

सोनिया के आने से नए तेवर में आयी कांग्रेस..

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2014 के बाद से कांग्रेस की जो स्थिति है, उसमें कांग्रेस को अब किसी चमत्कार का ही इंतज़ार है। और एक कुशल नेतृत्व ही वह चमत्कार दिखा सकता है। और इस चमत्कार की उम्मीद कांग्रेस को सोनिया गांधी से है। ग़ौरतलब है, कि सोनिया गांधी के कांग्रेस की डूबती नैया की बागडोर संभालते ही कांग्रेस पार्टी में एक नए उत्साह का संचार हुआ है।

पूरे 1 साल और 8 महीने के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सोनिया गांधी ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत कर दी है। एक तरह से वह पार्टी के लिए संकट मोचन बनकर आई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी एक बार फिर से संभालने के बाद गुरुवार को सोनिया गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करी, जो करीब 4 घंटे चली जिसमें सभी नेताओं ने अपनी-अपनी बात कही और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपनी विचार रखे। बैठक के बाद, एक पदाधिकारी ने कहा कि ऐसा लग रहा है, जैसे हम 2004 के चुनाव से पहले के माहौल में आ गए हो, अब हम अपनी ग़लतियों से सबक लेते हुए एक नई रणनीति बना रहे हैं.

पार्टी की बैठक में, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सब को स्पष्ट कर दिया कि सत्ता तक पहुंचने के लिए सड़क पर संघर्ष करना बहुत ज़रूरी है। साथ ही ख़ुद को मजबूत स्थिति में लाने के लिए बूथ से प्रदेश तक कार्यकर्ताओं की पूरी फ़ौज खड़ी करनी होगी। सोनिया गांधी ने कहा, कि हमें अपनी विचारधारा को मजबूत करना होगा। तभी हम मुक़ाबले के लिए तैयार होंगे। और उन्होंने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर भी ज़ोर दिया।

सोनिया गांधी ने बैठक में हर पदाधिकारी की बात सुनी ख़ुद सवाल भी किए और पदाधिकारियों के सवालों के जवाब भी दिए। कांग्रेस पार्टी के एक नेता के अनुसार बैठक में पहले के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा सक्रियता थी। अब देखना यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की दूसरी पारी कांग्रेस के लिए वरदान साबित होती है या नहीं।

वर्तमान समय में अधिकांश नागरिकों का संकल्प- “हम नहीं सुधरेंगे”- किशन शर्मा

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कोई भी कितनी भी और कैसी भी घोषणाएं करता रहे, नियम बनाता रहे, धमकियां देता रहे, परंतु आजकल के हर उम्र के भारतवासियों ने नियम, कानून की धज्जियां उडाने का संकल्प ही ले रखा है । यह एक बहुत बडी चुनौती है प्रशासन और पुलिस के लिये, और इसका कोई उत्तर या समाधान किसी के भी पास नज़र नहीं आता है । हर क्षण, हर व्यक्ति केवल अपनी सुविधा देखकर, अपना महत्व दर्शाने का ही प्रयास करता नज़र आता है।

किसी ने टोक दिया तो तुरंत, “जानता नहीं मैं कौन हूं” या “तू कौन है और क्या है” जैसे वाक्य गरजते हुए बोलते रहते हैं, अधिकांश लोग। छोटी छोटी बातें भी आजकल लोग न सुनते हैं और न मानते हैं । हर क्षण नियम-कानून की धज्जियां उडाने में ही सबको आनंद आता रहता हसि और अपना अलग महत्व दिखाने का भी सुख मिलता रहता है । किसी एक वर्ग को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है । यह बीमारी हर व्यक्ति को लग चुकी है । अनेक बडे बडे मंत्रियों और नेताओं को कहीं भी थूकते हुए मैंने देखा है ।

पान, तम्बाखू या गुटका खाने के शौकीन ये लोग, चलती हुई कार का दरवाज़ा खोल कर कभी भी और कहीं भी ढेर सारा पीक उगल देते हैं । सामान्य नागरिक फ़िर पीछे क्यों रहेंगे । वे भी थूकते रहने के आदी हो गये हैं । कहीं भी पेशाब करना, खुले में शौच करना और कचरा कहीं भी फ़ेंक देना भारतीयों की आदत बन चुका है । रेलगाडी में गंदगी भरी रहती है और यात्रीगण उसमें बढोत्तरी ही करते रहते हैं । शौचालयों में न केवल गंदगी का साम्राज्य रहता है, बल्कि कमोड में कुछ भी गिरा देने की आदत भी बन गई है अनेक लोगों की, जिससे वह अवरुद्ध हो जाता है ।

खाना खाने के बाद प्लेट आदि कहीं भी ऐसे ही छोड देते हैं, और चाय के कागज़ या प्लास्टिक के कप तो हर तरफ़ बिखरे पडे रहते हैं । हवाई जहाज़ में भी शौचालय गंदे ही छोड देते हैं अनेक यात्री । यातायात नियम तो बनाये ही इसी लिये जाते हैं कि लोग उन्हें तोडते रहें । उल्टी दिशा में वाहन चलाना, फ़ुटपाथ पर वाहन चलाना, रुकने का सिग्नल होने पर भी नहीं रुकना, हेल्मेट नहीं पहन कर दोपहिया वाहन चलाना, दोपहिया वाहन पर कम से कम तीन लोगों को बैठाना, कार में सीट बैल्ट का उपयोग नहीं करना, वाहन चलाते हुए मोबाइल फ़ोन पर बात करते रहना.

औटो रिक्षा में दस तक सवारी बैठाना, बस और औटो रिक्षा कहीं भी रोक कर यात्रियों को उतारना या बैठाना, कहीं भी और कैसे भी वाहन खडा कर देना आदि सभी लोगों की आदत में शामिल हो गया है, और वे प्रशासन और पुलिस को चुनौती देते रहते हैं कि “हिम्मत है तो हमें सुधार कर दिखाओ” । रिश्वत अब आवश्यक हो गई है । किसी भी तरह का काम हो, पहले “कुछ” दो, फ़िर बात करो । पहले ऐसा सोचा जाता था कि महिलाएं न रिश्वत लेती हैं और न नियम-कानून ही तोडती हैं;

परंतु यह एक निर्विवाद सत्य बन गया है कि आजकल सबसे अधिक नियम-कानून की अवहेलना महिलाओं द्वारा ही की जाने लगी है और रिश्वत लेने में भी वो बहुत अधिक सक्रिय होती जा रही हैं । सडकों को खोदने वाले कभी भी उन्हें वापस ठीक नहीं करते । सडकों पर मवेशियों की भीड बढती ही जा रही है, लेकिन किसी को कोई चिंता ही नहीं है । अब तो अनेक अदालतों में भी खुलेआम रिश्वत लेने का क्रम चल पडा है । हम भारतवासियों की यह विशेषता है कि अपने देश में हम किसी की परवाह नहीं करते, परंतु विदेश जाते ही वहां के सभी नियम-कानून तुरंत मानने लगते हैं ।

आजकल तो प्रेम प्रदर्शन भी निडर होकर किया जाने लगा है । पूरे चेहरे को कपडे से ढंककर लडके-लडकियां निकलते हैं ताकि कोई पहचान ही न सके और नि:संकोच एक दूसरे से लिपटते रहते हैं, चुंबन करते रहते हैं । आजकल शब्दों और भाषा की तो किसी को परवाह ही नहीं रह गई है । मैं जब भी लोगों को नियम- कानून की अवहेलना करते देखता हूं, तो मेरा खून खौल जाता है, परंतु फ़िर यह सोचकर चुप रह जाता हूं कि “मैं कौन हूं” । अशिष्ट व्यवहार, अनादरपूर्ण व्यवहार, छल-कपट भरा व्यवहार, आजकल की प्रमुख विशेषताएं बन गये हैं । आज की वास्तविकता यही है कि हम सब इस कदर बिगड गये हैं कि अब कितने भी प्रयास करने से कुछ भी नहीं हो पाएगा । अधिकांश भारतीयों ने यह निश्चय ही कर लिया है कि कुछ भी हो जाये, परंतु “हम नहीं सुधरेंगे” ।

(किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर-440015; मोबाइल – 8805001042)

माइग्रेन के दर्द से दिलाएँ छुटकारा, किचन की ये आम चीज़ें

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प्रतीकात्मक तस्वीर

दर्द कैसा भी हो इंसान को परेशान करने के लिए काफ़ी होता है लेकिन अगर ये दर्द हो माइग्रेन का तब तो मानो आफ़त ही आ जाती है। कई बार इतना असहनीय दर्द होता है कि इंसान ठीक से आँखें भी नहीं खोल पाता। अगर आपके सिर के आधे हिस्से में ऐसा दर्द होता है, जिसे आप सहन नहीं कर सकते, तो ये माइग्रेन की समस्या हो सकती है| माइग्रेन के कारण सिर में बार-बार तेज दर्द होता है। ये दर्द सिर के आधे हिस्से में फैला होता है। माइग्रेन का दर्द एक से ज्यादा दिन तक रहता है|

इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसका इलाज छिपा है किचन की कुछ आम चीज़ों में। आज हम बताने जा रहे है, इस दर्द से राहत के लिए कुछ घरेलू उपाय, जिसे आजमाकर आप दर्द से निज़ात पा सकते है। दालचीनी:- दालचीनी का प्रयोग खाने के मसालों के अलावा रोगों के उपचार में भी किया जाता है| दालचीनी का पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएँ और आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धुलने से सिर का दर्द चला जायेगा|

अदरक:- अदरक की चाय पीने से ना केवल मानसिक तनाव से राहत मिलती है बल्कि माइग्रेन से होने वाले सिर दर्द से भी राहत मिलती है| अंगूर का जूस:– अंगूर का जूस दिन में दो बार पीने से सिर के दर्द में राहत मिलती है| अंगूर के जूस में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन A और C होता है जो माइग्रेन के दर्द को कम करने में सहायक है|

इसके अलावा सिर की मालिश एक असरदार उपाय है, मालिश करने से रक्त प्रवाह बढ़ता है| जिससे सिर दर्द जल्दी दूर हो जाता है| जब भी सिर में दर्द हो और आपको लगे कि ये माइग्रेन हो सकता है तो तेज रोशनी में नहीं जाना चाहिए और अगर जाना हो तो चश्मे का प्रयोग करना चाहिए| अगर आपके आसपास तेज रोशनी है तो उसे कम कर दें क्योंकि तेज रोशनी से माइग्रेन का दर्द बढता है| इन उपायों का प्रयोग कर माइग्रेन के असहनीय दर्द से बचा जा सकता है