राजस्थान हाई को’र्ट की ओर से जारी हुआ नोटिस, गहलोत सरकार के मंत्री शांतिलाल से मंगा….

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कोरो’ना काल के दौरान गहलोत सरकार के यूडीएच एवं विधि मंत्री शांतिलाल धारीवाल (Shantilal Dhariwal) के लिए राजस्थान की हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जरिए है कोर्ट ने उनसे जवाब मंगा है। बता दें कि बुधवार को मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहंती की खंडपीठ ने मंत्री शांतिलाल धारीवाल को एक नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने ये नोटिस गणेश चतुर्वेदी की जनहित याचिका को देखते हुए जारी किया है। खबर के मुताबिक कोर्ट ने मंत्री के साथ ही स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव, निदेशक, जयपुर नगर निगम के आयुक्त और नियुक्ति पाने वाले सेवानिवृत अधिकारी से भी जवाब तलब किया है।

इस याचिका के चलते बताया जा रहा है कि महावीर प्रसाद सिंह जो के एक रिटा’यर्ड अधिकारी है। उन्होंने 5 अगस्त, 2019 को स्वायत्त शासन विभाग में विधि सलाहकार को अपॉइंट करने के लिए आवेदन किया था। बता दें कि उसी दिन मंत्री शांतिलाल धारीवाल ने राज्य के विधि मंत्री के तौर पर उनकी इस अपॉइंटमेंट को मंजूरी दे दी। जिसके बाद अगले ही दिन विभाग ने महावीर प्रसाद स्वामी के नियुक्ति के आदेश भी जारी कर दिए। दाखिल की गई याचिका में स्वामी की इस नियुक्ति को नियामो के खिलाफ बताया गया और उसको र’द्द करने की मांग की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से को’र्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने बताया कि महावीर प्रसाद स्वामी पहले तो एक ही दिन में आवेदन की कार्र’वाई की और फिर उसको स्वायत्त शासन विभाग में विधि सलाहकार के रूप में नियुक्ति दे दी गई। बता दें कि हर महीने 50 हजार रूपए की सैलरी भी दी जा रही है और बताया जा रहा है कि अपॉइंट होने के एक महीने के अंदर ही उन्हें 30 अगस्त, 2019 को जयपुर नगर निगम में विधि निदेशक के पद का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंप दिया गया। ये पूरी तरह से निय’म के खिला’फ है।

याचिका में महावीर प्रसाद स्वामी की नियुक्ति को चुनौ’ती देने का आधार राजस्थान सिविल सर्विस पेंशन नियम-1926 को बनाया गया है। दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि, निय’म-151 और 164-ए के अनुसार स्थायी पद पर 65 साल से अधिक आयु वाले व्यक्ति की फिर से नियुक्ति नहीं की जा सकती है। 2018 में जुलाई में ही महावीर प्रसाद स्वामी 66 साल के हो गए थे। मुख्यमंत्री के स्तर पर भी महावीर प्रसाद स्वामी की नियुक्ति के मामले में कोई मंज़ूरी नही ली गयी है। लेकिन कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री की अनुमति ज़रूरी है ऐसा प्रशासनिक सुधार विभाग के 31 मई, 2019 के आदेश के अनुसार कहा गया है। स्वामी की नियुक्ति से पहले विधि सलाहकार की नियुक्ति के लिए कोई आवदेन भी नहीं मांगे गए और न ही किसी तरह की कोई प्रक्रिया अपनाई गई।