राष्ट्रपति चुनाव से पहले सामने आया यशवंत सिन्हा का बयान, “भवन में एक और रबड़ स्टांप आया तो…”

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राष्ट्रपति चुनाव को लेकर तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं। एक तरफ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अपनी तैयारियों में व्यस्त है तो दूसरी ओर सभी विपक्षी दल एक जुट होकर भाजपा गठबंधन का सामने करने को तैयार हैं। गोरतलब हैं कि भाजपा गठबंध की ओर से राष्ट्रपति चुनाव के लिए आदिवासी समुदाय की नेता द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आया है। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष की विचार विमर्श के बाद यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा गया है। राष्ट्रपति चुनाव का उम्मीदवार चुने जाने के बाद उनका एक बयान सामने आया है।

उनका कहना है कि इस चुनाव में अपने बेटे को बीच में नहीं लाना चाहते। वह बीजेपी के सांसद हैं, उनको लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “मेरा बेटा अपने ‘राज धर्म’ का पालन करेगा और मैं अपने ‘राष्ट्र धर्म’ का पालन करूंगा।” वह आगे कहते हैं कि “यह चुनाव महज भारत के राष्ट्रपति के चुनाव से कहीं बढ़कर है। यह चुनाव सरकार की तानाशाही प्रवृत्तियों का विरोध करने की दिशा में एक कदम है। यह चुनाव भारत की जनता के लिए संदेश है कि इन नीतियों का विरोध होना चाहिए।”

इस बीच यशवंत सिन्हा सिन्हा ने अपने अपोजिट मैदान में उतरी नेता द्रौपदी मुर्मू को लेकर भी बात कही। उन्होंने कहा कि “सार्वजनिक जीवन के अपने लंबे अनुभव से, मैं कह सकता हूं कि एक व्यक्ति का उत्थान पूरे समुदाय को आगे नहीं बढ़ाता है। पूरे समुदाय का उत्थान सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियों पर निर्भर करता है। इस पर और टिप्पणी किए बिना, मैं कहूंगा कि हमारे अपने इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां एक समुदाय में एक व्यक्ति के उत्थान के जरिये उस समुदाय को एक इंच भी ऊपर उठाने में मदद नहीं मिली है। यह केवल प्रतीकात्मक है और इसके अलावा कुछ नहीं है।”

वह आगे कहते हैं कि “राष्ट्रपति भवन में आने वाला व्यक्ति ‘रबड़ स्टांप’ से कहीं अधिक होना चाहिये। अगर राष्ट्रपति भवन में एक और रबड़ स्टांप आ जाएगा, तो विनाशकारी होगा। अगर वह चुने जाते हैं, तो वह राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों के ‘दुरुपयोग’ को तत्काल बंद कर देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय और निष्पक्षता बनी रहे।”