बच्ची को दफ़न करने गए शख्स ने जैसे ही फावड़ा ज़मीन के अन्दर किया हुआ कुछ ऐसा कि..

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कहते हैं ऊपर वाले के खेल निराले होते हैं। आनंद फ़िल्म के यह बोल कितने सटीक बैठते हैं कि, ‘ज़िंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है, उसे ना तो आप बदल सकते हैं, ना मैं, हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिनकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों में बंधी है।’ इसी बात को साबित करती एक घटना बरेली शहर के हितेश कुमार सिरोही के साथ घटित हुई।

बता दें कि पुलिस अधीक्षक (नगर) अभिनंदन सिंह से प्राप्त ख़बर के अनुसार बरेली के सीबीगंज स्थित वेस्टर्न कॉलोनी के रहने वाले हितेश कुमार सिरोही के घर गुरुवार को एक बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन, कुछ ही देर बाद उनकी ख़ुशियां मातम में बदल गयीं, क्योंकि कुछ ही देर में बच्ची की मौत हो गई, इसके बाद हितेश शाम को ही बच्चे को दफ़नाने के लिए शमशान घाट पहुंचे और गड्ढा ख़ुदवाया, गड्ढा खोदते हुए करीब 3 फुट तक खुदाई की गई होगी कि गड्ढा खोद रहे मज़दूर का फ़ावड़ा गड्ढे के अंदर एक घड़े से टकराया।

घड़े को जब बाहर निकाला गया, तो उसके अंदर एक नवजात बच्ची थी। जो जीवित थी और उसकी सांसें बहुत तेज़-तेज़ चल रही थीं। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह ने बताया है कि हितेश कुमार सिरोही ने उस बच्ची को भगवान का तोहफ़ा समझ कर अपना लिया है। किसी ने सच ही कहा है कि भगवान एक हाथ लेता है तो दूसरे हाथ दे भी देता है। बता दें कि बच्ची का बरेली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ विनीत शुक्ला ने बच्ची की हालत में सुधार बताया है। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र पांडे ने बताया कि बच्ची को ज़िंदा दफ़नाने के मामले में जांच चल रही है।