मुंबई/नई दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा विमल इलायची विज्ञापन को लेकर जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिनेता ने अपनी याचिका में एफडीए की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि विज्ञापन बनाने वाली कंपनी के बजाय उन्हें व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी करना उचित नहीं था।
महाराष्ट्र एफडीए ने अजय देवगन को नोटिस जारी करते हुए आरोप लगाया था कि विमल इलायची के विज्ञापन के माध्यम से राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार किया गया। विभाग का कहना है कि इस विज्ञापन से महाराष्ट्र में प्रतिबंधित उत्पाद का परोक्ष रूप से प्रचार-प्रसार हुआ। अजय देवगन ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले में विज्ञापन निर्माता कंपनी की जिम्मेदारी तय करने के बजाय उन्हें निशाना बनाकर नोटिस जारी किया गया है।
यह मामला केवल अजय देवगन तक सीमित नहीं है। एफडीए ने इसी तरह के नोटिस शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी जारी किए थे। तीनों अभिनेताओं के खिलाफ विज्ञापनों के जरिए प्रतिबंधित उत्पादों के परोक्ष प्रचार के आरोपों की जांच की गई। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के अनुसार, विभाग ने कथित नियम उल्लंघन की जांच पूरी कर ली है और इसमें नियमों का उल्लंघन पाया गया है।
एफडीए आयुक्त ने बताया कि अगले सप्ताह मामले को निर्णय के लिए संबंधित अधिकारी के समक्ष रखा जाएगा। अजय देवगन द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बावजूद विभाग अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष 4 नवंबर को संभावित है।
यह मामला एक बार फिर से सिनेमा जगत में सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट और प्रतिबंधित उत्पादों के विज्ञापनों के नियमों की चर्चा को गर्मा रहा है। अब सबकी निगाहें बॉम्बे हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और एफडीए की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।















