विजयदशमी के अवसर पर नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ा बयान दिया था। जिसकी वजह से राजनीति के गलियारों में हलचल मच गई है। बता दें कि मोहन भागवत ने कहा था कि जो भारत के हैं, जो भारतीय पूर्वजों के वंशज हैं, वह सभी विविधताओं को स्वीकार, सम्मान व स्वागत करते हुए आपस में मिलजुल कर देश के वैभव व मानवता में शांति बढाने का काम करने में जुट जाते हैं, वह सभी भारतीय हिंदू हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान बसपा सुप्रीमो मायावती को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा, “हाल ही में आरएसएस प्रमुख ने एक बयान में कहा था कि इस देश में मुस्लिम ख़ुश हैं क्योंकि भारत एक ‘हिंदू राष्ट्र’ है। बसपा इस बयान से सहमत नहीं है। आरएसएस प्रमुख को इस तरह का बयान देने से पहले सच्चर समिति की रिपोर्ट को पढ़ लेना चाहिए।”
मायावती ने कहा, ‘बाबासाहेब आंबेडकर ने सिर्फ़ हिंदुओं को ध्यान में रखकर संविधान नहीं तैयार किया था। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के आधार पर सभी धर्म के लोगों का ख़्याल रखा था।’ उन्होंने कहा ‘भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ना कि हिंदू राष्ट्र’ है।
बता दें कि महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र अपनी पार्टी का प्रचार करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा था कि मोदी सरकार की विफल नीतियां ही मौजूदा आर्थिक मंदी का कारण हैं। मायावती ने कहा, “दलितों और अनुसूचित जनजातियों के हितों के लिए बनाए गए क़ानूनों को सरकार ने निष्प्रभावी कर दिया है। इससे देश में दलितों का शोषण करने वालों को बढ़ावा मिला है।” उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है कि देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति चिंताजनक है।















