उत्तराखंड : क्या हाकम फिर बच निकलेगा, तस्वीरें वायरल, उठ रहे सवाल?

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देहरादून: अधीनस्त चयन सेवा आयोग पेपर लीक मामले में BJP जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत के पकड़े जाने के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही सोशल मीडिया में कुछ सवाल भी तैरने लगे हैं। इनमें जो सबसे बड़ा सवाल है, वह यह है कहीं हाकम को बचाया तो नहीं जा रहा है? जिस तरह से वो बैंकॉक से देहरादून और फिर वहां से अपने गांव भी पहुंच गया और किसी को खबर तक नहीं लगी? लोग सवाल कर रहे हैं कि जिसको एसटीएफ और पुलिस खोज रही हो और जिसका इंतजार जिला पंचायत उत्तरकाशी भ्रष्टाचार मामले में बयान दर्ज कराने के लिए एसआईटी इंतजार कर रही हो। आखिर कैसे वो बच निकला? और दोनों ही जांच टीमें उसका बस इंतजार करती रह गई।

इससे एक और जो बड़ी बात है। वह यह है कि उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बिल्कुल स्पष्ट हो चला है कि भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार जनता पार्टी है और जिस तरीके से नौकरियों में भ्रष्टाचार किया जा रहा है और धीरे-धीरे हाकम सिंह रावत जैसे भाजपा के पदाधिकारियों के नाम इस भ्रष्टाचार में आ रहे हैं, वह स्पष्ट कर देता है कि भारतीय जनता पार्टी को युवाओं के हितों से कोई लेना देना नहीं है।

मुजीब नैथानी ने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष आरबीएस रावत के द्वारा पत्र लिखा गया था कि आयोग के सदस्य उन पर नियुक्तियों के लिए दबाव बना रहे हैं और ऐसी नियुक्तियां ना होने पर वह भर्ती को रद्द करना चाहते हैं अतः भर्ती रद्द ना की जाए। मगर त्रिवेंद्र रावत ने उस पत्र पर कोई कार्यवाही ना करते हुए भर्तियां रद्द कर दी।

आयोग पर उठती उंगलियों से क्षुब्ध हो आरबीएस रावत ने इस्तीफा दे दिया था। स्पष्ट है कि त्रिवेंद्र रावत का भर्तियों में अनियमितता कराना ही मुख्य उद्देश्य था जिसकी पूर्ति ना होने पर आयोग के अध्यक्ष के आग्रह के बावजूद उनके द्वारा भर्तियों को रद्द कर दिया गया और जिससे युवाओं का भविष्य अंधकार में चला गया।

त्रिवेंद्र रावत कार्यकाल में वन दरोगा पद पर ब्लूटूथ के माध्यम से भर्ती घोटाला हुआ था, जिसमें मंगलौर हरिद्वार में दर्ज एफआईआर में हाकम सिंह का नाम प्रमुख था, मगर हाकम सिंह की त्रिवेंद्र रावत के साथ करीबियों के चलते जाँच अधिकारियों पर दबाव बना कर जाँच से हाकम सिंह रावत का नाम ही हटा दिया गया। यह बताता है कि त्रिवेंद्र रावत सीधे-सीधे आयोग में की जा रही भर्तियों के भ्रष्टाचार में शामिल हैं ।

यद्यपि कई पुलिस अधिकारी भी इसमें शक के दायरे में हैं जो येन केन प्रकारेण सत्ता का आनंद लेने के चक्कर में संविधान की बजाय इन नेताओं की मिजाजपुर्सी करते रहते हैं, जिसके क्रम में क्राइम स्टोरी के सम्पादक, पत्रकार राजेश शर्मा को रात को बिन किसी वारंट के उठा ले जाना और देशद्रोह जैसी धाराओं में झूठा मुकदमा दर्ज कराना तक शामिल है। मुजीब नैथानी ने इन सभी भर्तियों की सीबीआई जाँच की मांग भी की।

उन्होंने कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के मुखिया हाकम सिंह के साथ उसके रिसॉर्ट में नजर आ रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी भी है। जिस तरह से फोटो सामने आई हैं। उससे यह लग रहा है कि डीजीपी के साथ भी उनको नजदीकियां हैं। सवाल यह है कि क्या इससे जांच प्रभावित होने का खतरा नहीं है?