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उत्तराखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज, इन जिलों में हो सकती है बारिश

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उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आज 25 फरवरी और कल 26 फरवरी राज्य भर में मौसम शुष्क रहेगा। किसी भी जिले में बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं है, और 13 जिलों में पूरी तरह से सूखा मौसम बना रहेगा।

हालांकि, शुक्रवार 27 फरवरी से मौसम में बदलाव दिखाई देगा। मौसम विभाग ने तीन पहाड़ी जिलों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है। इनमें गढ़वाल मंडल के सीमांत जिले उत्तरकाशी और चमोली शामिल हैं, जहां कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश होगी। इन जिलों में 3000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी संभव है। कुमाऊं मंडल के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भी इसी तरह बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान है। शेष 10 जिलों में मौसम शुष्क ही रहेगा।

फरवरी का अंत भी इसी बदलते मौसम के साथ होगा। शनिवार 28 फरवरी को भी उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है, जबकि 3000 मीटर से ऊपर बर्फबारी जारी रह सकती है। बाकी जिलों में मौसम सामान्य और शुष्क रहेगा।

मार्च की शुरुआत में मौसम फिर से स्थिर हो जाएगा। 1 और 2 मार्च को पूरे राज्य में शुष्क मौसम का अनुमान है, बारिश या बर्फबारी की कोई संभावना नहीं दिख रही। न्यूनतम तापमान में अगले 2-3 दिनों तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद तापमान में वृद्धि शुरू हो सकती है। मौसम केंद्र के अनुसार, 3-4 दिनों के अंदर कई स्थानों पर अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभव है, जिससे गर्मी का अहसास बढ़ेगा।

मैंने दखल न दिया होता तो पाकिस्तान के पीएम मर भी सकते थे..!

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान एक बार फिर बड़ा दावा किया कि उन्होंने पिछले 10 महीनों में आठ युद्धों को रोक दिया है। ट्रंप ने कहा, “मेरे पहले 10 महीनों में हमने आठ युद्ध खत्म कर दिए हैं, जिनमें कंबोडिया-थाईलैंड, भारत-पाकिस्तान का संघर्ष भी शामिल है। भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध भी हो सकता था।”

ट्रंप ने आगे कहा कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की जान भी जा सकती थी। उन्होंने दावा किया, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद कहा कि मेरे दखल के बिना 35 मिलियन लोग मर सकते थे और प्रधानमंत्री की मौत हो जाती।” ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के अलावा इस्राइल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान, कांगो-रवांडा, सर्बिया-कोसोवो, मिस्र-इथियोपिया जैसी अन्य लड़ाइयों को भी रोकने का श्रेय लिया।

इस दौरान ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की सफलताओं के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की खास तारीफ की। ट्रंप ने उन्हें “शांतिदूत” बताते हुए कहा कि इनकी मेहनत से अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ट्रंप का यह दावा मध्यावधि चुनावों से पहले उनकी उपलब्धियों को हाइलाइट करने का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, कई फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इन दावों को अतिरंजित या विवादास्पद बताया गया है। कुछ संघर्षों में अमेरिकी भूमिका को लेकर संबंधित देशों (जैसे भारत) ने अलग राय जताई है, और कुछ मामलों में संघर्ष फिर से शुरू होने की खबरें भी आई हैं।

यह बयान ट्रंप के “शांति के राष्ट्रपति” (President of Peace) वाले नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इसे अतिशयोक्ति करार दिया है।

उत्तराखंड: बोर्ड परीक्षा के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा, पकड़े गए 8 मुन्ना भाई

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हरिद्वार : उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षाओं में हिंदी विषय के पेपर के दौरान हरिद्वार के राजकीय इंटर कॉलेज, सलेमपुर परीक्षा केंद्र पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कुल आठ फर्जी परीक्षार्थी (चार छात्र और चार छात्राएं) असली छात्रों की जगह परीक्षा देते हुए पकड़े गए। इन्हें लोकप्रिय फिल्मी संदर्भ में ‘मुन्ना भाई’ और ‘मुन्नी बहन’ कहा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इन फर्जी परीक्षार्थियों ने मूल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड में अपनी फोटो चिपका कर या बदलकर परीक्षा देने की कोशिश की। कक्ष निरीक्षक की सतर्कता और सख्त निगरानी के कारण यह खेल शुरुआती दौर में ही पकड़ा गया। जांच के दौरान एक-एक कर सभी आठ आरोपी बेनकाब हो गए।

परीक्षा केंद्र के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी संदिग्धों की उत्तर पुस्तिकाएं जब्त कर सील कर दीं और गोपनीय अनुभाग को भेज दिया। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। जांच में स्कूल प्रबंधन, बाहरी लोगों या किसी संगठित गिरोह के संलिप्त होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फर्जी परीक्षार्थी एक ही निजी स्कूल (सावित्री देवी मेमोरियल स्कूल) से जुड़े बताए जा रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। बोर्ड परीक्षाओं में नकल और प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा रखी है, लेकिन यह घटना परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा नियमों के उल्लंघन में शामिल सभी लोगों को दंडित किया जाएगा। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, हल्द्वानी में रेलवे की जमीन से हटेगा अतिक्रमण

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हल्द्वानी (उत्तराखंड) में रेलवे की जमीन पर बसे परिवारों के पुनर्वास को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह एक विशेष शिविर आयोजित करे, ताकि रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक सरकारी/रेलवे भूमि पर रह रहे और बेदखली का सामना कर रहे परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकें।
यह मामला हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां रेलवे की लगभग 29-32 एकड़ भूमि पर दशकों से हजारों परिवार (करीब 50,000 लोग) बसे हुए हैं। रेलवे ने इस भूमि को परियोजना विकास (जैसे रेलवे विस्तार) के लिए आवश्यक बताते हुए अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलीलें
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी कि:
यहां करीब 5,000 परिवार दशकों से रह रहे हैं, कई के पास पट्टे वाली जमीन है।
रेलवे ने पहले कभी इस भूमि की मांग नहीं की थी।
उन्होंने एक मैप पेश किया, जिसमें पास की खाली जमीन का उपयोग सुझाया गया।
एक साथ इतने बड़े पैमाने पर परिवारों को पीएमएवाई के तहत घर उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है।
दिल्ली की झुग्गी पुनर्वास नीति की तरह यहां भी कोई कट-ऑफ तारीख निर्धारित होनी चाहिए।
भूषण ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन बहुत कम परिवार ही पात्र पाए जाएंगे।
केंद्र सरकार और रेलवे का पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि:
भूमि रेलवे की है और परियोजना के लिए आवश्यक है; अतिक्रमणकारी शर्तें नहीं थोप सकते।
पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये का अंतरिम भत्ता दिया जाएगा।
रेलवे और राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों की सामूहिक पहचान करने तथा पुनर्वास व्यवस्था का आश्वासन दिया।
केंद्र ने बताया कि 13 जमीनों पर फ्रीहोल्ड है, और हर्जाना राज्य व रेलवे दोनों मिलकर देंगे।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश और अगली सुनवाई
उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority) को शिविर लगाने का निर्देश, जहां परिवार पीएमएवाई आवेदन कर सकें। शिविर रमजान के बाद (15 मार्च के बाद) आयोजित हो, और 31 मार्च तक पूरा किया जाए।
नैनीताल के कलेक्टर को आवेदनों की पात्रता जांचकर रिपोर्ट सौंपने का आदेश।
तब तक रेलवे भूमि से कोई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होगी।
मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी।
यह निर्देश हल्द्वानी में लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक अहम कदम है, जहां पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में हाईकोर्ट के बेदखली आदेश पर रोक लगाई थी और मानवीय पुनर्वास पर जोर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेलवे की भूमि पर रहने वालों को पुनर्वास का अधिकार है, लेकिन वे भूमि पर दावा नहीं कर सकते।

शंकराचार्य को फंसाने की साजिश? शाहजहांपुर के पत्रकार ने किया बड़ा खुलासा

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वाराणसी : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज यौन शोषण के आरोपों के बीच नया मोड़ आया है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने सोमवार देर शाम केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ पहुंचकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष पांडेय (आशुतोष ब्रह्मचारी) ने उन्हें फोन पर दबाव बनाकर शंकराचार्य को फंसाने की कोशिश की और झूठे आरोप लगाने के लिए आर्थिक लालच दिया।

पत्रकार रमाशंकर दीक्षित का आरोप रमाशंकर दीक्षित ने मठ में पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखी और एक लिखित बयान सौंपा। उन्होंने कहा, “आशुतोष पांडेय ने मुझे फोन किया और दबाव बनाते हुए कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बद्रीनाथ में एक छोटी बच्ची के यौन शोषण का आरोप लगाओ। तुम्हारा पूरा आर्थिक सहयोग किया जाएगा।

उन्होंने आगे बताया, “मैंने साफ इनकार कर दिया और कहा कि मेरे पिताजी दंडी संन्यासी थे, इसलिए मेरी आत्मा ऐसी गवाही नहीं दे सकती। इस पर आशुतोष ने धमकी दी कि ‘अगर तुम हमारा साथ नहीं दोगे तो हमारे पास और रास्ते हैं। रमाशंकर ने कहा कि वे इस तरह के किसी भी झूठे आरोप में शामिल नहीं होना चाहते और शंकराचार्य के प्रति अपनी निष्ठा जताई। उन्होंने मठ में हस्ताक्षरित बयान देकर घटना की जानकारी दी।

शंकराचार्य का बयान: यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं, गैर-बीजेपी राज्य से कराई जाए जांच केदारघाट में मौजूद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मुझ पर लगे आरोप पूरी तरह निराधार और साजिशपूर्ण हैं। मैं जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हूं, लेकिन जनता का यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है। इसलिए जांच यूपी पुलिस की बजाय किसी गैर-बीजेपी शासित राज्य की पुलिस से कराई जाए।

उन्होंने कहा कि जांच जल्द शुरू हो, सच सामने आए और झूठ बोलने वाले बेनकाब हों। मैंने कभी किसी बच्चे या महिला के साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया। यह मेरी छवि खराब करने की सुनियोजित साजिश है। प्रयागराज के झूंसी थाने में आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज हुई है, जिसमें शंकराचार्य और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी पर दो नाबालिग वेदपाठी छात्रों के यौन शोषण का आरोप है। पुलिस ने पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

टीवी डिबेट के बाद हिंसा: कांग्रेस प्रवक्ता हनुमंत पवार पर हिंदुत्व कार्यकर्ता तुषार दमगुडे समेत साथियों ने की मारपीट 

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पुणे : पुणे में एक टीवी डिबेट के बाद राजनीतिक विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता हनुमंत पवार पर हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तुषार दमगुडे तथा उनके पांच साथियों ने कथित तौर पर मारपीट की। घटना सोमवार शाम करीब 5:30 बजे पुडारी न्यूज (Pudhari News) चैनल के कार्यालय के बाहर मित्र मंडल चौक में हुई। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

घटना की शुरुआत डिबेट से

हनुमंत पवार और तुषार दमगुडे पुडारी न्यूज के एक लाइव डिबेट में हिस्सा लेने पहुंचे थे। दोनों पहले भी कई टीवी बहसों में आमने-सामने आ चुके हैं। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों बाहर निकले, जहां बहस फिर से शुरू हो गई। पवार के अनुसार, दमगुडे ने उनसे भाजपा-आरएसएस का विरोध करने और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का समर्थन करने पर सवाल किया। बहस के दौरान पवार ने एक वायरल वीडियो का जिक्र किया, जिसमें हरियाणा के सिकरी बैंक्वेट हॉल के शौचालय के दरवाजों पर छत्रपति शिवाजी महाराज और महारानी पद्मिनी के चित्र लगे थे। पवार ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता शिवाजी महाराज का अपमान करते हैं।

पवार का दावा है कि डिबेट खत्म होने पर उन्होंने सपकाळ को कॉल करने के लिए बाहर गए। तभी दमगुडे और उनके साथियों ने गालियां देना शुरू किया और धमकियां दीं। जब पवार ने कहा कि वे धमकियों से नहीं डरते, तो दमगुडे ने थप्पड़ मारा और पिस्तौल दिखाकर धमकाया। इसके बाद उनके साथियों ने लात-घूंसे और बुक्के मारे।

पुलिस में शिकायत, दो गिरफ्तार

हनुमंत पवार ने स्वारगेट पुलिस स्टेशन में तुषार दमगुडे, बाळासाहेब गालफाडे, गौरव राठोड, श्रीनिवास निगडे, ऋषिकेश परदेशी और अभिमन्यू मैड के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आरोपों में मारपीट, शिवीगाल, जीवे मारने की धमकी और हथियार दिखाना शामिल है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की है। अब तक दो आरोपियों को ताबे में लिया गया है। तुषार दमगुडे की पिस्तौल जब्त की गई है और उसका लाइसेंस भी जांच के दायरे में है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई करेगी।

दमगुडे का पलटवार

तुषार दमगुडे ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि हाल ही में एक अन्य न्यूज चैनल डिबेट में टीपू सुल्तान के मुद्दे पर पवार ने उनसे आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। दमगुडे का आरोप है कि चैनल के बाहर भी पवार ने उन्हें गालियां दीं और नक्सलियों के खिलाफ बोलने पर धमकाया। दमगुडे ने कहा कि वे पवार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताया है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने वीडियो शेयर कर निंदा की और कहा कि वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा और दहशत से आवाज दबाना अस्वीकार्य है। कांग्रेस नेताओं ने तत्काल कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की।

उत्तराखंड कुंभ मेला 2027 : तैयारियों के लिए 500 करोड़ रुपये जारी होने पर CM धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार

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देहरादून: केंद्र सरकार ने हरिद्वार में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेला 2027 की तैयारियों के लिए उत्तराखंड को 500 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। इस फैसले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया है। सीएम धामी ने कहा कि यह धनराशि कुंभ को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा, “कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक समरसता का विश्वविख्यात महापर्व है। केंद्र द्वारा स्वीकृत यह राशि आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, यातायात प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कार्यों को तेज गति देगी।”

केंद्र का निरंतर सहयोग

सीएम धामी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की उत्तराखंड के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने चारधाम परियोजना, ऑल वेदर रोड, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार जैसे प्रमुख विकास कार्यों में केंद्र के सहयोग को राज्य के लिए मजबूत संबल बताया। “यह सहयोग कुंभ मेला 2027 के सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार के संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा,” उन्होंने कहा।

धामी ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से कुंभ 2027 ऐतिहासिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप में आयोजित होगा। करोड़ों श्रद्धालुओं को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। राज्य सरकार समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्ता पूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कुंभ की तैयारियां तेज

हरिद्वार में जनवरी 2027 (मकर संक्रांति) से अप्रैल 2027 (चैत्र पूर्णिमा) तक चलने वाले इस अर्धकुंभ में प्रमुख स्नान तिथियां शामिल हैं। लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अपेक्षित भीड़ को देखते हुए तैयारियां जोरों पर हैं। हाल ही में सीएम धामी ने हरिद्वार पहुंचकर कुंभ मेला कंट्रोल बिल्डिंग में समीक्षा की और 234 करोड़ रुपये के 34 स्थायी विकास कार्यों का शिलान्यास किया। इनमें बुनियादी ढांचे, पुलों की मरम्मत, पार्किंग, बिजली, पानी, शौचालय और पैदल मार्ग शामिल हैं।राज्य सरकार ने कुल 3848 करोड़ रुपये की मांग की है, जिसमें से 500 करोड़ की पहली किस्त मिल गई है। मुख्यमंत्री ने अक्टूबर 2026 तक अधिकांश इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं।

बड़ी खबर : गृह मंत्रालय ने जारी की भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’, जानें इसमें क्या है खास

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नई दिल्ली: गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार को भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति जारी की, जिसका नाम ‘प्रहार’ (PRAHAAR) रखा गया है। यह नीति दस्तावेज़ (8-9 पेज) MHA की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। ‘प्रहार’ का अर्थ ‘हमला’ या ‘प्रहार’ है और यह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को औपचारिक रूप देता है। नीति का उद्देश्य आतंकवाद के सभी रूपों को रोकना, आतंकियों, उनके फाइनेंसरों और समर्थकों को फंड, हथियार और सुरक्षित ठिकानों से वंचित करना है।

यह नीति भारत को दशकों से प्रभावित करने वाले सीमा पार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद पर खास फोकस करती है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि जिहादी आतंकी संगठन और उनके फ्रंटल (मुखौटा) संगठन भारत में हमलों की साजिश रचने, समन्वय करने, सुविधा प्रदान करने और उन्हें अंजाम देने में लगे हुए हैं। वैश्विक आतंकी समूह जैसे अल-कायदा और ISIS स्लीपर सेल्स के जरिए देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। विदेशी धरती से काम करने वाले हिंसक चरमपंथी आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिशें रच रहे हैं।

उभरते खतरे: ड्रोन, साइबर, CBRNED और क्रिप्टो नीति में नए खतरे पर गंभीर चिंता जताई गई है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में हैंडलर ड्रोन जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकी गतिविधियां आसान बना रहे हैं। आतंकी समूह संगठित आपराधिक नेटवर्क का इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स, भर्ती और हमलों के लिए कर रहे हैं। सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स, एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट जैसे टूल्स से प्रोपेगैंडा, फंडिंग और निर्देशन गुमनाम तरीके से हो रहा है।

CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) सामग्री तक पहुंच और इस्तेमाल की कोशिशों को रोकना बड़ी चुनौती है। क्रिमिनल हैकर्स और राष्ट्र-राज्य साइबर अटैक्स से भारत को निशाना बना रहे हैं। ड्रोन और रोबोटिक्स का खतरनाक इस्तेमाल भी चिंता का विषय है।

नीति के सात स्तंभ (PRAHAAR acronym) 

  • P — Prevention of terror attacks to protect Indian citizens and interests (आतंकी हमलों की रोकथाम)
  • R — Responses, which are swift and proportionate to the threat posed (तेज और संतुलित प्रतिक्रिया)
  • A — Aggregating internal capacities for achieving synergy in a whole-of-government approach (सरकारी एजेंसियों में समन्वय और क्षमता वृद्धि)
  • H — Human rights and Rule of Law based processes for mitigation of threats (मानवाधिकार और कानून के दायरे में कार्रवाई)
  • A — Attenuating the conditions enabling terrorism, including radicalisation (रेडिकलाइजेशन और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली स्थितियों को कम करना)
  • A — Aligning and shaping the international efforts to counter terrorism (अंतरराष्ट्रीय सहयोग)
  • R — Recovery and resilience through a whole-of-society approach (पुनर्बहाली और समाज की मजबूती)

प्रतिरोध और प्रतिक्रिया तंत्र

  • इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) और जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) रियल-टाइम इनपुट शेयरिंग का नोडल प्लेटफॉर्म बने रहेंगे।
  • स्थानीय पुलिस पहले रिस्पॉन्स देगी, जिसे स्पेशल स्टेट/CT फोर्स और NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) सपोर्ट करेगी। NSG नोडल नेशनल CT फोर्स है।
  • जल, जमीन और हवा तीनों मोर्चों पर खतरे का सामना; क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (पावर, रेलवे, एविएशन, पोर्ट्स, डिफेंस, स्पेस, एटॉमिक एनर्जी) की सुरक्षा मजबूत।
  • गैर-कानूनी हथियार सिंडिकेट और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ राज्यों में संयुक्त कार्रवाई। आतंकी फंडिंग को कानूनी ढांचे से बाधित करने पर जोर।

रेडिकलाइजेशन और युवाओं की भर्ती पर फोकस आतंकी समूह भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं। पहचान होने पर ग्रेडेड पुलिस कार्रवाई की जाती है। समुदाय, धार्मिक नेता, उदारवादी प्रचारक और NGOs जागरूकता फैला रहे हैं। युवाओं को रचनात्मक तरीके से शामिल किया जा रहा है। जेलों में कट्टरपंथ रोकने के लिए स्टाफ को अलर्ट किया जाता है।

यह नीति आतंकवाद को किसी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ती। भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ व्यापक फ्रेमवर्क की मांग करता रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रहार’ रिएक्टिव से प्रोएक्टिव, इंटेलिजेंस-लेड अप्रोच की ओर बड़ा कदम है, जो उभरते डिजिटल और हाइब्रिड खतरों से निपटने में मदद करेगा।

उत्तराखंड 2027 की अग्निपरीक्षा : चुनाव, अर्धकुंभ और जनगणना एक साथ…कब होंगे विधानसभा चुनाव?

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देहरादून: उत्तराखंड के लिए 2027 सिर्फ एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि प्रशासनिक, राजनीतिक और लॉजिस्टिकल स्तर पर एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है। एक ही साल में विधानसभा चुनाव, हरिद्वार अर्धकुंभ और राष्ट्रीय जनगणना जैसे ये तीन बड़े आयोजन राज्य की सरकारी मशीनरी पर दबाव डालने वाले हैं। यही वजह है कि सरकार ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं, जबकि सियासी गलियारों में समय से पहले चुनाव की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।

राज्य की 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव मूल रूप से फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित हैं। ठीक उसी दौरान हरिद्वार में अर्धकुंभ का भव्य आयोजन होना है, जो 14 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति) से शुरू होकर 20 अप्रैल 2027 (चौत्र पूर्णिमा) तक चलेगा। इसमें 10 प्रमुख स्नान तिथियां हैं, जिनमें फरवरी-मार्च के चार अमृत स्नान (6 फरवरी मौनी अमावस्या, 11 फरवरी बसंत पंचमी, 20 फरवरी माघ पूर्णिमा और मार्च-अप्रैल के अमृत स्नान) शामिल हैं। लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़, शाही स्नान और अखाड़ों की व्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की चुनौती पहले से ही भारी है।

चुनाव के दौरान केंद्र और राज्य की सुरक्षा बलों की भारी तैनाती होती है। अर्धकुंभ में भी सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और अन्य राज्यों से अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ती है। दोनों आयोजन एक साथ होने पर पुलिस बल, वाहन, कमांड सेंटर और यहां तक कि हेलीकॉप्टरों की डिमांड में टकराव तय है। इसके अलावा जनगणना की प्रक्रिया भी फरवरी-मार्च 2027 के आसपास शुरू होने वाली है, जिसमें हजारों सरकारी कर्मचारियों को घर-घर सर्वे के लिए लगाना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में केंद्र से 500 करोड़ रुपये का बजट अर्धकुंभ के लिए हासिल किया है और इसे ‘पूर्ण कुंभ’ की तर्ज पर आयोजित करने का ऐलान किया है। लेकिन, प्रशासनिक अधिकारी मान रहे हैं कि तीन बड़े कार्यक्रमों का एक साथ होना राज्य के लिए बड़ी चुनौती होगी।

सियासी गलियारों और सोशल मीडिया में इन दिनों यह चर्चा गरम है कि क्या सरकार चुनाव नवंबर-दिसंबर 2026 में करा सकती है? कारण साफ है, अर्धकुंभ जैसा बड़ा और धार्मिक आयोजन, जनवरी से अप्रैल तक होगा। अगर चुनाव फरवरी-मार्च में हुए तो कुंभ की सुरक्षा और चुनावी ड्यूटी में टकराव होना साफ है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

कुछ विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर भाजपा को अपनी वापसी पर भरोसा है तो वह 2026 के अंत में चुनाव करा सकती है, ताकि कुंभ के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बना रहे। वहीं अगर विपक्षी दलों (विशेषकर कांग्रेस) की गतिविधियां बढ़ीं तो चुनाव को अप्रैल 2027 (कुंभ समाप्त होने के बाद) तक टाला भी जा सकता है। हालांकि चुनाव आयोग अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दे रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां 2027 को लक्ष्य करके ही चल रही हैं।

2027 उत्तराखंड के लिए सिर्फ चुनावी साल नहीं, बल्कि एक अग्निपरीक्षा है। अगर सरकार इन तीनों आयोजनों को सुचारू रूप से संभाल लेती है तो यह उसकी बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन, अगर समय से पहले चुनाव की अटकलें सही साबित हुईं तो यह फैसला प्रशासनिक दबाव कम करने के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति भी साबित होगा। फिलहाल सभी की नजरें चुनाव आयोग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

AI समिट में प्रदर्शन के मामले में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी पिछले सप्ताह भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए ‘शर्टलेस’ (बिना शर्ट) विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है। पुलिस ने चिब को तिलक मार्ग थाने में लगभग 15-20 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद मंगलवार सुबह गिरफ्तार किया। इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

प्रदर्शन 20 फरवरी 2026 को समिट के एग्जिबिशन हॉल में हुआ था। युवा कांग्रेस के करीब एक दर्जन कार्यकर्ताओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर समिट में प्रवेश किया और अचानक अपनी शर्ट उतारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने टी-शर्ट्स पर प्रिंटेड स्लोगन और प्रधानमंत्री की तस्वीर वाली टी-शर्ट्स लहराते हुए विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सरकार पर ‘कंप्रोमाइज्ड’ होने का आरोप लगाया।

पुलिस ने घटना के तुरंत बाद चार युवा कांग्रेस नेताओं—कृष्णा हरि और कुंदन यादव (बिहार), नरसिम्हा यादव (तेलंगाना) और अजय कुमार (उत्तर प्रदेश)—को गिरफ्तार किया था। बाद में ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से तीन और कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया। उदय भानु चिब को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए पूछताछ के लिए 23 फरवरी को तिलक मार्ग थाने बुलाया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिब ने पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं किया और जांच को गुमराह करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया है।

युवा कांग्रेस ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और सरकार की नीतियों के खिलाफ वैध विरोध बताया था। उदय भानु चिब ने पहले कहा था कि यह “पीसफुल प्रोटेस्ट” था और पार्टी जांच में सहयोग करेगी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने वैश्विक आयोजन को अपनी “गंदी और नंगी राजनीति” का मंच बना दिया, जो विचारधारात्मक दिवालियापन दर्शाता है।

बीजेपी उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा ने प्रदर्शन को “देश विरोधी” करार दिया। वहीं, कुछ विपक्षी दलों और सहयोगियों ने भी प्रदर्शन की शैली पर सवाल उठाए और इसे “अनुचित” तथा “शर्मनाक” बताया। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताते हुए गिरफ्तारी को “अवैध हिरासत” करार दिया। IYC के एक महासचिव ने कहा कि यह “अंग्रेजों जैसा शासन” है। प्रदर्शन के बाद तिलक मार्ग थाने के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवान गेट पर मुस्तैद हैं। इलाके में आने-जाने वालों की सघन जांच की जा रही है।