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नोरा फतेही का हुआ एक्सीडेंट, कॉन्सर्ट में जाते वक्त नशे में धुत ड्राइवर ने मारी टक्कर

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मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री और मशहूर डांसर नोरा फतेही शनिवार शाम एक सड़क हादसे का शिकार हो गईं। वह साउथ मुंबई में आयोजित सनबर्न फेस्टिवल 2025 में डीजे डेविड गुएटा के साथ अपनी प्रस्तुति देने जा रही थीं, तभी अम्बोली के लिंक रोड पर एक नशे में धुत ड्राइवर ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी।

हादसे के तुरंत बाद नोरा की टीम ने उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराया। जांच में किसी गंभीर चोट या आंतरिक रक्तस्राव की आशंका नहीं पाई गई, हालांकि उन्हें हल्का कॉनकशन (सिर में झटका) लगा है। डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी, लेकिन नोरा ने अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट को प्राथमिकता देते हुए उसी शाम फेस्टिवल में अपनी परफॉर्मेंस पूरी की।

मुंबई पुलिस ने आरोपी ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। नोरा ने सोशल मीडिया पर फैंस को अपडेट देते हुए कहा, “मैं जिंदा हूं और ठीक हूं, लेकिन ये बहुत डरावना था। शराब पीकर गाड़ी न चलाएं।”

उत्तराखंड कांग्रेस की अग्निपथ योजना खिलाफ जन जागरण यात्रा का दूसरा चरण शुरू

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देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग द्वारा अग्निपथ और अग्निवीर योजना के खिलाफ चलाई जा रही जन जागरण यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन से हुई। कांग्रेस वर्किंग कमिटी (सीडब्ल्यूसी) सदस्य एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यात्रा को संबोधित करते हुए करण माहरा ने कहा कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना ने न केवल देश की सैन्य शक्ति को कमजोर किया है, बल्कि उत्तराखंड जैसे राज्य को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है, जहां युवाओं का प्रमुख रोजगार स्रोत सेना भर्ती रहा है। योजना लागू होने से युवाओं के देशसेवा के सपने टूट गए, सेना भर्ती के प्रति आकर्षण कम हुआ और इसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी बढ़ी तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा। उन्होंने यात्रा दल को सफलता की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा सरकारों पर सैनिकों और सेना की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा एक ओर सेना के नाम पर वोट लेती है, वहीं अग्निपथ योजना से स्थायी भर्ती बंद कर चार साल की अग्निवीर भर्ती लागू करके सेना को कमजोर कर रही है। साथ ही, उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों के लिए उपनल कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद समान वेतन और नियमितीकरण नहीं दिया जा रहा। धस्माना ने अग्निपथ को देश की सैन्य शक्ति के लिए विनाशकारी बताया।

पूर्व सैनिक विभाग अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने बताया कि यात्रा के पहले चरण में गढ़वाल क्षेत्र में लोगों का भरपूर समर्थन मिला और जनता ने योजना के दुष्परिणामों पर सहमति जताई। दूसरे चरण की यात्रा का विवरण इस प्रकार है:

  • 20 दिसंबर: शाम को रामनगर पहुंचकर रात्रि विश्राम।
  • 21 दिसंबर: सुबह रामनगर में रैली, रात्रि विश्राम रानीखेत।
  • 22 दिसंबर: सुबह रानीखेत में रैली, रात्रि विश्राम अल्मोड़ा।
  • 23 दिसंबर: सुबह अल्मोड़ा में रैली, रात्रि विश्राम हल्द्वानी।
  • 24 दिसंबर: सुबह बिंदुखत्ता में रैली, दोपहर बाजपुर में रैली के बाद देहरादून वापसी।

कार्यक्रम में महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी, महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी, श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, सुजाता पॉल, शिवांगी मिश्रा, पंकज क्षेत्री, आरपी ध्यानी, लेफ्टीनेंट सहदेव शर्मा, गोपाल सिंह गड़िया, बलबीर सिंह पंवार, राजपाल सिंह, महेश कुकरेती, लाल चंद शर्मा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

ITBP में सिपाहियों की वरिष्ठता को नई पहचान: दाहिने हाथ पर लगेगी ‘सीनियर कांस्टेबल’ की पीली-हरी ‘फीती’

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नई दिल्ली : भारत-चीन सीमा पर कठोर परिस्थितियों में डटे Indo-Tibetan Border Police (ITBP) के सिपाहियों के लिए एक अनूठी पहल शुरू हुई है। महानिदेशक (DG) प्रवीण कुमार के आदेश पर अब पहले ‘मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन’ (MACP) प्राप्त सिपाहियों को ‘सीनियर कांस्टेबल’ की विशेष ‘फीती’ पहनने का मौका मिलेगा। यह फीती उनके दाहिने हाथ पर कंधे से चार इंच नीचे लगाई जाएगी, जो उनकी लंबी सेवा और अनुभव को सम्मान देगी।

लद्दाख के काराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जACHEप ला तक फैली 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की निगरानी करने वाली ITBP की अधिकांश चौकियां 9,000 से 18,800 फीट की ऊंचाई पर हैं, जहां तापमान शून्य से 45 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा देने वाले सिपाहियों को पदोन्नति में देरी का सामना अक्सर करना पड़ता है। सिपाही से सीधे हवलदार बनने की मौजूदा व्यवस्था में वरिष्ठता का सम्मान न मिलने से मनोबल प्रभावित होता था। DG प्रवीण कुमार ने जवानों का उत्साह बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है।

फीती की खासियतें और शर्तें

  • रंग-डिजाइन: फीती पीले रंग की टेक्स्ट (‘सीनियर कांस्टेबल’) वाली हरे बैकग्राउंड पर होगी। फॉन्ट ‘एरियल 16’ का होगा।
  • पात्रता: केवल पहले MACP (वित्तीय अपग्रेडेशन) प्राप्त सिपाही ही इसे पहन सकेंगे। यह सभी कैडर (जनरल ड्यूटी, ट्रेड्समैन आदि) के लिए लागू होगा।
  • लाभ: आर्थिक या वरिष्ठता सूची में कोई बदलाव नहीं, लेकिन बटालियन कमांडेंट की मर्जी से अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। MACP आदेश जारी होते ही फीती लगाने का निर्देश तुरंत प्रभावी होगा।

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) में पहले आर्मी की तर्ज पर लांस नायक (एक फीती) और नायक (दो फीती) के पद थे, जो ‘स्पेशल अपॉइंटमेंट’ होते थे। इन्हें स्पेशल पे मिलता था, लेकिन पदोन्नति नहीं। बाद में 6th पे कमीशन के बाद ये पद समाप्त हो गए। अब केवल सिपाही और हवलदार बचे हैं। आर्मी में अभी भी ये रैंक मौजूद हैं। ITBP की यह पहल अन्य CAPF (BSF, CRPF, CISF आदि) में चर्चा का विषय बन गई है, जहां इसी तरह की योजना पर विचार हो सकता है।

ITBP का गौरवशाली इतिहास: 1962 में स्थापित ITBP हिमालयी सीमा की प्रहरी है। जवानों को पर्वतारोहण, स्कीइंग, सामरिक प्रशिक्षण के अलावा प्राकृतिक आपदाओं में ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। पिछले छह दशकों में सैकड़ों बचाव अभियान चलाकर हजारों जिंदगियां बचाई हैं। उत्साहवर्धन से बल की विशिष्ट छवि और मजबूत होगी। ITBP अधिकारियों के अनुसार, यह छोटा सा बदलाव जवानों को मानसिक संतुष्टि देगा, जो सीमा पर लंबी ड्यूटी के दौरान प्रेरणा स्रोत बनेगा।

T-20 विश्व कप और न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय टीम घोषित: सूर्यकुमार यादव कप्तान, अक्षर पटेल उप-कप्तान

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मुंबई :भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आज टी20 विश्व कप 2026 और जनवरी 2026 में होने वाली न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए 15 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। दोनों के लिए एक ही स्क्वॉड चुना गया है।

फॉर्म से जूझ रहे सूर्यकुमार यादव को कप्तानी बरकरार रखी गई है, जबकि अक्षर पटेल को उप-कप्तान बनाया गया है। चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर और कप्तान सूर्यकुमार यादव की मौजूदगी में मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय में चयन समिति की बैठक के बाद यह घोषणा की गई।

बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि खराब फॉर्म के कारण शुभमन गिल को टीम से बाहर कर दिया गया है। वहीं, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले ईशान किशन की टीम में वापसी हुई है। फिनिशर रिंकू सिंह को भी जगह मिली है। विकेटकीपर जितेश शर्मा को टीम से ड्रॉप कर दिया गया है।

भारत 2024 टी20 विश्व कप का डिफेंडिंग चैंपियन है और इस बार टूर्नामेंट की सह-मेजबानी कर रहा है। टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी 2026 से होगी, जबकि फाइनल 8 मार्च 2026 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। टूर्नामेंट में कुल 20 टीमें हिस्सा लेंगी, जिन्हें चार ग्रुप में बांटा गया है।

भारतीय टीम (टी20 विश्व कप 2026 और न्यूजीलैंड टी20 सीरीज के लिए):

  • सूर्यकुमार यादव (कप्तान)
  • अभिषेक शर्मा
  • संजू सैमसन (विकेटकीपर)
  • तिलक वर्मा
  • हार्दिक पांड्या
  • शिवम दुबे
  • अक्षर पटेल (उप-कप्तान)
  • रिंकू सिंह
  • जसप्रीत बुमराह
  • हर्षित राणा
  • अर्शदीप सिंह
  • कुलदीप यादव
  • वरुण चक्रवर्ती
  • वॉशिंगटन सुंदर
  • ईशान किशन (विकेटकीपर)

भारतीय टीम न्यूजीलैंड सीरीज के जरिए विश्व कप की तैयारी को अंतिम रूप देगी। फैंस को उम्मीद है कि डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में टीम एक बार फिर खिताब अपने नाम करेगी।

असम में दर्दनाक हादसा: राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आए हाथियों के झुंड, 8 की मौत; इंजन सहित 5 डिब्बे पटरी से उतरे

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गुवाहाटी/होजाई :असम के होजाई जिले में शनिवार तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जब सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 20507) जंगली हाथियों के एक झुंड से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में 8 हाथियों की मौत हो गई, जबकि एक हाथी गंभीर रूप से घायल हो गया। टक्कर के झटके से ट्रेन का इंजन और पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। राहत की बात यह रही कि ट्रेन में सवार किसी भी यात्री को चोट नहीं आई।

हादसा पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के लुमडिंग डिवीजन के अंतर्गत जमुनामुख-कामपुर सेक्शन में चांगजुराई क्षेत्र के पास रात करीब 2:17 बजे हुआ। घने कोहरे के कारण दृश्यता कम होने की वजह से यह दुर्घटना हुई मानी जा रही है। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि लोको पायलट ने हाथियों का झुंड देखते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाए, लेकिन टक्कर टालना संभव नहीं हो सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थान रेलवे द्वारा चिह्नित हाथी कॉरिडोर नहीं है।

नागांव के संभागीय वन अधिकारी सुहाश कदम ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मृत हाथियों का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है, जबकि घायल हाथी का इलाज चल रहा है। शवों का अंतिम संस्कार घटनास्थल के पास ही किया जाएगा।

हादसे के बाद प्रभावित सेक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों को अप लाइन से डायवर्ट कर दिया गया है। राहत ट्रेनें और वरिष्ठ रेल अधिकारी, जिसमें एनएफआर के महाप्रबंधक और लुमडिंग के मंडल रेल प्रबंधक शामिल हैं, मौके पर पहुंच गए। प्रभावित डिब्बों के यात्रियों को अन्य कोचों में शिफ्ट किया गया। बहाली कार्य पूरा होने के बाद ट्रेन को गुवाहाटी के लिए रवाना कर दिया गया, जहां अतिरिक्त कोच जोड़े जाएंगे।

यह घटना असम में ट्रेन-हाथी टक्कर की बढ़ती घटनाओं को उजागर करती है, जहां जंगली हाथी अक्सर रेल ट्रैक पार करते समय खतरे में पड़ जाते हैं। रेलवे और वन विभाग द्वारा ऐसे हादसों को रोकने के लिए उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन यह त्रासदी एक बार फिर सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देती है।

UGC की चेतावनी: फर्जी संस्थानों से सावधान, अवैध डिग्रियां बांट रहे हैं ये संस्थान

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नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रों, अभिभावकों और आम जनता को तीन फर्जी संस्थानों के खिलाफ बड़ी चेतावनी जारी की है। ये संस्थान बिना किसी वैधानिक मान्यता के खुद को विश्वविद्यालय बताकर डिग्रियां बांट रहे हैं। UGC ने स्पष्ट किया है कि इनसे प्राप्त कोई भी डिग्री उच्च शिक्षा या नौकरी (सरकारी या निजी) के लिए मान्य नहीं होगी।

UGC के अनुसार, ये संस्थान UGC अधिनियम, 1956 की धारा 2(f) या धारा 3 के तहत मान्यता प्राप्त नहीं हैं और न ही AICTE या किसी अन्य वैधानिक निकाय से अनुमति प्राप्त है। ऐसे में इनमें दाखिला लेना छात्रों के करियर को गंभीर खतरे में डाल सकता है।

फर्जी संस्थानों के नाम और स्थान:
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सॉल्यूशन (NIMS) – जानकीपुरी, नई दिल्ली यह संस्थान विभिन्न कोर्सों में डिग्रियां जारी कर रहा है, लेकिन इसे डिग्री देने का कोई अधिकार नहीं है।

सर्व भारतीय शिक्षा पीठ – देवनूर मेन रोड, विजय नगर, तुमकुर जिला, कर्नाटक यह संस्थान भी नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध डिग्रियां बांट रहा है।

नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ (नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ) – तडवाल गांव, अक्कलकोट तालुका, सोलापुर जिला, महाराष्ट्र कृषि संबंधित कोर्सों के नाम पर फर्जी डिग्रियां जारी कर रहा है।

UGC ने कहा कि ये ‘स्व-घोषित’ संस्थान हैं जो छात्रों को गुमराह करते हैं। हर साल कई छात्र ऐसे झांसे में आकर अपनी मेहनत और समय बर्बाद कर लेते हैं। आयोग समय-समय पर फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची अपडेट करता रहता है और छात्रों से अपील की है कि दाखिला लेने से पहले UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर संस्थान की मान्यता जरूर जांचें।

छात्रों को सलाह दी गई है कि किसी भी संस्थान में एडमिशन से पहले उसकी वैधता की पुष्टि करें, ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। UGC की यह कार्रवाई फर्जी शिक्षा संस्थानों पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षकों का आक्रोश: चयन/प्रोन्नत वेतनमान पर इंक्रीमेंट न देने के शासनादेश के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार के हालिया शासनादेश से शिक्षक समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। उत्तराखंड सरकारी वेतन (प्रथम संशोधन) नियमावली 2025 के तहत चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान पर दी जाने वाली एक अतिरिक्त वार्षिक वेतनवृद्धि केवल शैक्षणिक संवर्ग (शिक्षकों) के लिए समाप्त कर दी गई है, जबकि अन्य राज्य कर्मचारियों एवं निगम कर्मचारियों को यह लाभ जारी रहेगा। शिक्षक संगठनों ने इसे सरकार की हठधर्मिता करार देते हुए सड़क से कोर्ट तक संघर्ष की चेतावनी दी है।

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शिक्षक नेताओं का कड़ा विरोध

एससीईआरटी अध्यक्ष विनय थपलियाल ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप प्रदेश के करीब 1.5 लाख राज्य कर्मचारियों एवं 50 हजार निगम कर्मचारियों को चयन/प्रोन्नत वेतनमान पर इंक्रीमेंट का लाभ दिया जा रहा है। केवल शिक्षकों को इससे वंचित करना स्पष्ट भेदभाव है। उन्होंने चेताया कि शिक्षक इस अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

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क्या है संशोधन का विवाद?

उत्तराखंड सरकारी वेतन नियमावली 2016 के प्रस्तर 13 के उपनियम (i) एवं (ii) में 1 जनवरी 2016 से प्रोन्नति, समयमान या चयन वेतनमान पर एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि का प्रावधान था। 2025 के प्रथम संशोधन में इस लाभ को केवल शिक्षकों के लिए हटा दिया गया और इसे 1 जनवरी 2016 से ही प्रभावी बताया गया।

 

नतीजतन, जिन शिक्षकों को 2016 से यह लाभ मिला, उनके वेतन का पुनर्निर्धारण 2019 के शिक्षा विभाग के शासनादेश के अनुसार किया जाएगा, जिससे कई शिक्षकों को वित्तीय नुकसान होगा।

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पिछला विवाद और न्यायिक हस्तक्षेप

2019 में शिक्षा विभाग के शासनादेश में अतिरिक्त वेतनवृद्धि का उल्लेख न होने से कई शिक्षकों से वसूली शुरू की गई थी। जिन शिक्षकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, उन्हें राहत मिली और वसूली पर रोक लगी। उच्च न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला देते हुए वसूली वापस करने के आदेश दिए। अब नया संशोधन पुराने लाभ को रेट्रोस्पेक्टिवली (पीछे से प्रभावी) समाप्त कर रहा है, जिसे शिक्षक मनमाना बता रहे हैं।

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संवैधानिक आधार पर चुनौती

शिक्षक संगठनों का तर्क है कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) एवं अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर) का उल्लंघन है। समान परिस्थितियों में केवल एक संवर्ग को अलग रखना मनमाना वर्गीकरण है।

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साथ ही, वर्षों से मिल रहे लाभ को अचानक छीनना ‘वैध अपेक्षा के सिद्धांत’ (Doctrine of Legitimate Expectation) का हनन है। यदि राज्य कोई ठोस तर्कसंगत आधार (Intelligible Differentia) नहीं दिखा पाता, तो यह नियम असंवैधानिक घोषित हो सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण का कहर बरकरार: घने कोहरे और स्मॉग से दृश्यता शून्य, AQI ‘खतरनाक’ श्रेणी में

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में स्थानीय कारकों और धीमी हवा की गति के कारण प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार सुबह घने कोहरे और स्मॉग की मोटी चादर ने शहर को पूरी तरह ढक लिया, जिससे कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई। लगातार पांचवें दिन हवा ‘बेहद खराब’ से ‘खतरनाक’ श्रेणी में बनी हुई है।

एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, सुबह का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 376 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। कई क्षेत्रों में AQI 400 से पार हो गया, जबकि कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर यह 500-600 के स्तर तक पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों से पता चलता है कि PM2.5 और PM10 का स्तर अत्यधिक ऊंचा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

इस प्रदूषण और कोहरे के कारण लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर अस्थमा और सांस के मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है। कम दृश्यता से सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जबकि हवाई यातायात में भी देरी और रद्दीकरण देखे जा रहे हैं। दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लो विजिबिलिटी प्रक्रियाओं के तहत उड़ानों में बदलाव की चेतावनी दी गई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि शांत हवाओं और ठंड के कारण प्रदूषक हवा में फंस रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। GRAP स्टेज-4 के तहत सख्त उपाय लागू हैं, लेकिन फिलहाल राहत के आसार कम हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनें और संवेदनशील समूह बाहर जाने से बचें।

उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज: दून घाटी कोहरे की चादर में लिपटी, पहाड़ों में बर्फबारी की संभावना

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देहरादून: उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम ने करवट बदल ली है। राज्य की राजधानी देहरादून सहित दून घाटी में सुबह से ही घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे फिजाएं ठंडी और ठिठुरन भरी हो गई हैं। बढ़ती सर्दी के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के मैदानी इलाकों, खासकर देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। तराई-भाबर क्षेत्रों में शीत लहर चलने की आशंका है, जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं।

उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग जैसे पहाड़ी जिलों में आज से हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यह मौसमी बदलाव 20 से 22 दिसंबर तक बना रह सकता है।

इस बीच, बारिश होने से राजधानी देहरादून में वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है, क्योंकि कोहरा और प्रदूषण कुछ हद तक धुल सकता है। हालांकि, कोहरे के कारण सड़क यातायात और दृश्यता प्रभावित होने की चेतावनी दी गई है। motoristaों से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने वाली है, इसलिए लोगों को गर्म कपड़े और जरूरी सावधानियां अपनाने की अपील की गई है।614505,72230c,8f0d03,5b5d01,67a1b9

सीएम धामी का डालनवाला थाने पर औचक निरीक्षण: थानेदार अनुपस्थित मिले, तत्काल लाइन हाजिर

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के डालनवाला पुलिस स्टेशन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान थानाध्यक्ष (थानेदार) को ड्यूटी पर अनुपस्थित पाए जाने पर उन्होंने तत्काल प्रभाव से उन्हें लाइन हाजिर करने के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून-व्यवस्था और जनसेवा जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे मामलों में फौरन कड़ी कार्रवाई होगी।

विभिन्न बैठकों के बाद मुख्यमंत्री अचानक पुलिस स्टेशन पहुंचे और वहां की पूरी कार्यप्रणाली की गहन जांच की। उनके इस निरीक्षण से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया तथा व्यवस्थाओं की असल स्थिति उजागर हुई।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने थाने में आए फरियादी नागरिकों से सीधे संवाद किया और उनकी शिकायतों को ध्यान से सुना। उन्होंने पुलिसकर्मियों को आदेश दिया कि शिकायतों को महज औपचारिकता न समझा जाए, बल्कि पूरे जिम्मेदारी के साथ दर्ज किया जाए तथा उनका शीघ्र, निष्पक्ष और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री महिला हेल्प डेस्क पर भी गए और वहां मौजूद महिला फरियादियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। महिला सुरक्षा संबंधी मामलों में संवेदनशीलता, गोपनीयता और त्वरित कार्रवाई को जरूरी बताते हुए उन्होंने किसी भी ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

उन्होंने एफआईआर रजिस्टर की विस्तार से जांच की, दर्ज मामलों पर हुई कार्रवाई, फॉलो-अप की स्थिति और लंबित प्रकरणों की जानकारी ली। साथ ही ड्यूटी रजिस्टर तथा उपस्थिति रजिस्टर का भी निरीक्षण कर कर्मियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।

थाने के बंदी गृह में गंदगी और अव्यवस्था देखकर मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी जताई और तुरंत साफ-सफाई तथा मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस थाने की स्थिति ही प्रशासन की कार्यसंस्कृति का आइना होती है।

वाहन जांच अभियान, वेरिफिकेशन ड्राइव और अपराध नियंत्रण संबंधी कार्रवाइयों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने किसी भी शिथिलता पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय ट्रैफिक व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए उन्होंने विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तुरंत थाने पहुंचे और मौके पर स्थिति का जायजा लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े हर अधिकारी और कर्मचारी जनता के प्रति जवाबदेह हैं। जनसेवा में लापरवाही, अनुशासनहीनता या असंवेदनशीलता किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनहित में सख्त से सख्त कार्रवाई से सरकार पीछे नहीं हटेगी।