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अजित पवार जल्द करने वाले थे एनसीपी के दोनों गुटों का विलय, निधन के बाद करीबी का बड़ा खुलासा

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिवंगत उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार अपने निधन से ठीक पहले एनसीपी के दोनों गुटों—अपने नेतृत्व वाले गुट और चाचा शरद पवार के गुट का विलय करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उनके एक करीबी सहयोगी ने बताया कि अजित पवार इस विलय को लेकर बहुत उत्सुक थे और प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। करीबी ने कहा, “अजित दादा ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि वे दोनों गुटों के एक होने के 100% पक्ष में हैं। पूरी तैयारी हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में घोषणा होनी थी।” यह खुलासा अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को बारामती के पास विमान दुर्घटना में मौत के बाद सामने आया है, जिसने महाराष्ट्र की सियासत को हिला कर रख दिया है।

2023 में अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर पार्टी तोड़ी थी और एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हो गए थे, जिससे एनसीपी दो गुटों में बंट गई। हाल के महीनों में दोनों गुटों के बीच सुलह के संकेत मिल रहे थे। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों ने संयुक्त उम्मीदवार उतारे थे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव (5 फरवरी को) के लिए भी ‘घड़ी’ चिन्ह पर मिलकर लड़ा जा रहा था। शरद पवार गुट के नेताओं ने पुष्टि की कि अजित पवार विलय पर चर्चा करने को तैयार थे और स्थानीय चुनावों के बाद फैसला लेने की बात चल रही थी। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 फरवरी को औपचारिक घोषणा का प्लान था।

अजित पवार की मौत ने इन योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि अजित गुट का नेतृत्व कौन संभालेगा—सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल या अन्य? क्या विलय होगा या महायुति गठबंधन में अजित गुट की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी? एनसीपी के वरिष्ठ नेता नरहरी झिरवाल ने कहा कि “दोनों गुट पहले से ही एक हैं, बिखरे रहने का कोई मतलब नहीं।” शरद पवार गुट के नेताओं ने भी संकेत दिए कि अजित पवार के साथ बातचीत चल रही थी। विश्लेषकों का मानना है कि यह त्रासदी परिवार को और करीब ला सकती है, लेकिन राजनीतिक गणित (महायुति vs MVA) अब बदल सकता है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि एनसीपी का भविष्य अब परिवार और वरिष्ठ नेताओं के फैसले पर निर्भर है।

उत्तराखंड : विकासनगर क्षेत्र में 12वीं कक्षा की छात्रा की निर्मम हत्या, चचेरा भाई फरार

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देहरादून :  विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के ढालीपुर-हरबर्टपुर मार्ग पर सड़क किनारे झाड़ियों में एक 18 वर्षीय छात्रा का खून से सना शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतका की पहचान मनीषा पुत्री आनंद सिंह, निवासी बोक्सा बस्ती ढालीपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में मृतका के चचेरे भाई सुरेंद्र उर्फ मांडू को मुख्य आरोपी बताते हुए उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।

पुलिस के अनुसार, 28 जनवरी की रात को कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि ढालीपुर हरबर्टपुर जाने वाले रास्ते पर सड़क किनारे झाड़ियों में एक युवती का शव पड़ा है। सूचना पर क्षेत्राधिकारी विकासनगर और कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। शव की शिनाख्त स्थानीय लोगों ने मनीषा के रूप में की, जिसके सिर पर गंभीर चोटें थीं।

मौके पर फील्ड यूनिट और फॉरेंसिक टीम बुलाई गई, जहां घटनास्थल की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की गई और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए।

मृतका के परिजनों से पूछताछ में पता चला कि बुधवार शाम मनीषा दांत की दवा लेने के लिए अपने ताऊ के बेटे सुरेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर अस्पताल गई थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

मृतका के पिता आनंद सिंह ने कोतवाली विकासनगर में तहरीर दी कि उनके भाई के पुत्र सुरेंद्र ने ही उनकी बेटी की हत्या की है। इस आधार पर मुकदमा संख्या 27/2026 धारा 103(1) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल के पास से आरोपी सुरेंद्र की मोटरसाइकिल और हत्या में प्रयुक्त दरांती बरामद कर ली है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दरांती को आरोपी ने घटना से मात्र दो दिन पहले खरीदा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने मृतका के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने अभियुक्त की जल्द गिरफ्तारी के लिए मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कांग्रेस ने किया आंदोलन का ऐलान: तीन महीने तक हर विधानसभा में जन जागरण

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देहरादून: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आज देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगामी तीन महीनों में विधानसभा स्तर पर स्थानीय मुद्दों को लेकर जन जागरण, धरना-प्रदर्शन और जनता के बीच पहुंचने की रणनीति की घोषणा की। पार्टी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, महंगाई, महिला अपराध और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि 16 फरवरी को पार्टी कार्यकर्ता राज्यपाल आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की विफलताओं के खिलाफ कांग्रेस अब सड़कों पर उतरेगी और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाएगी।

चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों के बीच पहुंचेंगे और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण राज्य के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है और महिला अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने महंगाई को प्रदेश की जनता के लिए सबसे बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि आम आदमी की जेब पर लगातार बोझ बढ़ रहा है और सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि यह आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए दबाव बनाया जाएगा।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: भारत की मध्यम अवधि विकास दर 7% पर, FY27 में GDP ग्रोथ 6.8-7.2% अनुमानित

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के सुधारों के बाद भारत की मध्यम अवधि की संभावित विकास दर (Potential Growth) अब 7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है, जो अब ‘नया सामान्य’ बन चुकी है।

सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और भारी टैरिफ (विशेषकर अमेरिकी टैरिफ नीतियों) के बावजूद भारत ने चुनौतियों को अवसर में बदला। जीएसटी दरों में कमी से मांग को समर्थन मिला है और अगले वित्त वर्ष में घरेलू मांग तथा निवेश में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है। महंगाई दर लक्ष्य सीमा के अंदर नियंत्रित है, जबकि कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है, जिससे निवेश का माहौल अनुकूल बना हुआ है।

  • बुनियादी ढांचे पर निवेश: सरकार का पूंजीगत व्यय (Capex) अब जीडीपी के 4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। फिजिकल इंफ्रा (सड़क, रेल) और डिजिटल इंफ्रा (UPI, डिजिटल इंडिया) दोनों में भारी निवेश जारी।
  • एमएसएमई को बढ़ावा: छोटे उद्योगों के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाओं का विस्तार, क्रेडिट पहुंच में सुधार।
  • कृषि क्षेत्र: एमएसपी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और फसल बीमा के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस।
  • स्वदेशी निर्माण: निर्माण लागत घटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नई नीतियां बनाई जाएंगी।
  • बड़े सुधार: जीएसटी रेशनलाइजेशन, डिरेगुलेशन और कंप्लायंस सरलीकरण से व्यापार करना आसान हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वेक्षण से पहले कहा कि सरकार का मूल मंत्र “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” है। उन्होंने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को तेज करने का जिक्र करते हुए सभी सांसदों का आभार जताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आत्मनिर्भर और महत्वाकांक्षी भारत की झलक बताया। वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील भी इसी साल संभव है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि कमजोर वैश्विक परिदृश्य में भारत के आंकड़े एक आदर्श उदाहरण हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए ‘इक्विटी’ नियमों पर लगाई रोक, कहा- नए नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा जारी ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ पर तत्काल रोक लगा दी है। कोर्ट ने इन नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताते हुए केंद्र सरकार तथा यूजीसी को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आज कई याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें इन नियमों को सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण तथा संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं में मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए या पीछे जा रहे हैं? क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं?” उन्होंने कहा कि जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इनका दुरुपयोग हो सकता है। कोर्ट ने एक विशेष कमेटी गठित करने का भी सुझाव दिया।

ये नियम 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग आदि आधारित भेदभाव को रोकना था। इनमें इक्विटी कमेटी गठन, शिकायत निवारण और सख्त कार्रवाई के प्रावधान थे। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत दर्ज करने से वंचित करते हैं तथा मनमाने ढंग से लागू किए जा सकते हैं, जो यूजीसी एक्ट, 1956 का भी उल्लंघन है।

नियमों की अधिसूचना के बाद देशभर में छात्रों और शिक्षाविदों में आक्रोश फैल गया था। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से फिलहाल इन नियमों का क्रियान्वयन रुक गया है और पुरानी व्यवस्था बहाल हो गई है।

 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर भारतीय रुपया  

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नई दिल्ली : भारतीय रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स बाजार में रुपया 91.95 पर खुला और गिरकर 92.00 प्रति डॉलर के स्तर को छू लिया। यह पिछले क्लोजिंग स्तर से 1 पैसा कमजोर रहा, जबकि बुधवार को रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.99 पर बंद हुआ था—जो उसका अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर है। इससे पहले 23 जनवरी को इंट्रा-डे कारोबार में भी रुपया 92.00 के स्तर को छू चुका था।

इस साल अब तक रुपया करीब 2% कमजोर हो चुका है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के माल निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से यह लगभग 5% तक गिर चुका है।

गिरावट के प्रमुख कारण

  • अमेरिकी डॉलर में वैश्विक मजबूती और एशियाई मुद्राओं में कमजोरी।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को तटस्थ रखने के फैसले से डॉलर इंडेक्स में मजबूती।
  • भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति।
  • कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी—इस सप्ताह 4% से अधिक की बढ़ोतरी, ब्रेंट क्रूड 69.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। अमेरिका द्वारा ईरान को लेकर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी से आपूर्ति बाधित होने की आशंका।
  • पूंजी निकासी और आयातकों की डॉलर मांग में वृद्धि।

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी ने कहा, “लगातार पूंजी निकासी से डॉलर की मांग बनी हुई है, जिससे रुपया दबाव में है। भारत एक बड़ा तेल आयातक होने से कच्चे तेल की तेजी के प्रति अधिक संवेदनशील है।”

डॉलर इंडेक्स और वैश्विक बाजार

छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 0.29% गिरकर 96.16 पर कारोबार कर रहा था।

विशेषज्ञों की राय

फॉरेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि NDF बाजार में USD/INR का 92.00 स्तर महत्वपूर्ण है। यदि यह स्थायी रूप से टूटता है, तो रुपया 92.20-92.50 तक कमजोर हो सकता है। हालांकि, आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप और डॉलर में नरमी से गिरावट सीमित हो सकती है, जिससे रुपया 91.00-91.20 के स्तर की ओर लौट सकता है।

घरेलू शेयर बाजार पर असर

घरेलू बाजार में भी कमजोरी दिखी। बीएसई सेंसेक्स 343.67 अंक गिरकर 82,001.01 पर और निफ्टी 94.2 अंक टूटकर 25,248.55 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 480.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो सकारात्मक संकेत है।

आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक खबर

दिसंबर 2025 में भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) में 7.8% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई—यह दो वर्षों से अधिक का उच्चतम स्तर है। विनिर्माण (8.1%), खनन (6.8%) और बिजली (6.3%) क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन से यह वृद्धि हुई। एक साल पहले दिसंबर 2024 में वृद्धि दर मात्र 3.7% थी।

Uttarkashi : ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर सो गया युवक, दम घुटने पर मौत

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उत्तरकाशी : जिले के हर्षिल थाना क्षेत्र अंतर्गत झाला गांव में एक होटल में कार्यरत 25 वर्षीय युवक की अंगीठी के धुएं से दम घुटने के कारण मौत हो गई। यह हादसा क्षेत्र में हो रही भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के बीच हुआ, जब युवक ठंड से बचने के लिए अपने कमरे में अंगीठी जलाकर सो गया था।

पुलिस के अनुसार, मृतक महेश (25 वर्ष), निवासी हीना, झाला के एक होटल में नौकरी करता था। बीती मंगलवार की देर रात को उसने ठंड से बचाव के लिए कमरे में कोयले की अंगीठी जलाकर सोने का फैसला किया। सुबह जब होटल में ठहरे पर्यटक उसे नहीं देख पाए, तो उन्होंने होटल संचालक को सूचना दी। स्थानीय लोगों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पूरे कमरे में घना धुआं फैला हुआ था और महेश बिस्तर पर मृत अवस्था में पड़ा मिला।

सूचना मिलते ही हर्षिल थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। टीम ने शव का पंचनामा भरकर कब्जे में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। शव को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। उसके बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में घटना को दुर्घटना बताया है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण दम घुटने से मौत हुई। ठंड के मौसम में बंद कमरों में अंगीठी जलाकर सोने की यह घटना चेतावनी का संकेत है।

हादसों से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह

ऐसे हादसों से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि कमरे में अंगीठी जलाने के दौरान उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित किया जाए और रात भर जलती अंगीठी को न छोड़ें। क्षेत्र में जारी बर्फबारी के बीच पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऐसी सावधानियां बरतने की अपील की जा रही है।

अंशुमान केस: सुप्रीम कोर्ट से मिला न्याय, साइंस स्ट्रीम में जारी रहेगी पढ़ाई

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देहरादून : देहरादून के प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ स्कूल के प्रबंधन की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने करारा अंकुश लगाते हुए छात्र अंशुमान जायसवाल के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि छात्र को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में ही पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।

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मामला तब सामने आया जब सेंट जोसेफ स्कूल प्रबंधन ने कक्षा 10 में प्राप्त अंकों के आधार पर अंशुमान को विज्ञान संकाय में प्रवेश तो दे दिया, लेकिन बाद में बोर्ड परीक्षा में तय न्यूनतम प्रतिशत से कम अंक होने का हवाला देकर उसे जबरन विज्ञान से हटाकर कॉमर्स संकाय में भेजने का आदेश दे दिया। छात्र और उसके माता-पिता द्वारा बार-बार निवेदन करने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने अंशुमान को कक्षा में बैठने तक से रोक दिया।

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छात्र के पिता  राजकुमार जायसवाल ने इस फैसले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। अंततः उन्होंने बेटे के भविष्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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23 जनवरी को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अहम निर्णय सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि छात्र अंशुमान जायसवाल को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में ही पढ़ाई पूरी करने दी जाए और नियमों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिए कि छात्र द्वारा 11वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर स्कूल प्रबंधन और जिलाधिकारी देहरादून आपसी विचार-विमर्श कर यह तय करें कि उसे 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा विज्ञान संकाय से देने की अनुमति दी जाए या नहीं। इस फैसले से अंशुमान को अपनी प्रतिभा साबित करने और विज्ञान विषय में आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलेगा।

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा जगत में छात्रों के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। छात्र के पिता श्री राजकुमार जायसवाल ने न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ उनके बेटे, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए मिसाल है, जो स्कूलों की मनमानी का शिकार होते हैं।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से छोड़ा माघ मेला, ‘संगम स्नान अधूरा रह गया, आत्मा झकझोर गई

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प्रयागराज: माघ मेला के दौरान हुई कथित मारपीट और अपमान की घटना के बाद ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार सुबह प्रयागराज से दुखी मन से विदा लेने का ऐलान कर दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक होकर कहा कि वे आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना संगम स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है।

शंकराचार्य ने कहा, “प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है। यहां से इस तरह लौटना मेरे लिए बेहद पीड़ादायक है। जो घटना घटी, उसकी कल्पना भी नहीं की थी। उसने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। आज हम बिना स्नान किए जा रहे हैं, लेकिन सत्य की गूंज पीछे छोड़कर जा रहे हैं।”

प्रशासन के प्रस्ताव को ठुकराया शंकराचार्य ने बताया कि कल शाम और आज सुबह प्रशासन की ओर से उनके मुख्य कार्यालयाध्यक्ष को प्रस्ताव भेजा गया था कि जब चाहें ससम्मान स्नान करा दिया जाएगा, सभी अधिकारी मौजूद रहेंगे और पुष्पवर्षा करेंगे। लेकिन इसमें उस दिन की घटना के लिए कोई क्षमा याचना नहीं की गई थी। उन्होंने कहा, “यदि हम स्नान कर लेते और पुष्पवर्षा स्वीकार कर लेते, तो उस दिन की बात अधूरी रह जाती। अपने भक्तों और सनातन परंपरा के साथ न्याय नहीं होता। इसलिए हमने प्रशासन के आग्रह को ठुकरा दिया।”

मुगलों के समय जैसी घटना का आरोप शंकराचार्य ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि माघ मेले में उनके ब्राह्मण बटुक शिष्यों को चोटी (शिखा) पकड़कर घसीटा गया और पीटा गया। उन्होंने इसे “मुगलों के समय जैसी घटना” करार दिया। शंकराचार्य ने कहा, “एक तरफ गृहमंत्री का बयान आता है कि संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं यहां संतों को घसीटा और पीटा गया। यह सरकार का दोहरा चरित्र है।”

दो मिनट का मौन और प्रार्थना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य ने संतों का अपमान करने वालों को दंड मिले, ऐसी प्रार्थना करते हुए दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने कहा, “संगम तट पर हमारी भौतिक हत्या का प्रयास किया गया, इन दिनों हमारी पीठ की हत्या का प्रयास सफल रहा। यदि प्रशासन ने ऐसा किया तो ठीक है, लेकिन इसके पीछे यूपी सरकार का हाथ है। सनातन के विरोधी को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं।”

भावुक अपील और विदाई शंकराचार्य ने अंत में भावुक होकर कहा, “प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आए थे, लेकिन आज एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौट रहे हैं, जिसकी कल्पना कभी नहीं की थी। संगम में स्नान करना केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संतृप्ति का मार्ग है। आज मन इतना व्यथित है कि जल की शीतलता भी अर्थहीन हो गई। न्याय की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन सत्य के अनुत्तरित प्रश्नों को हवा में छोड़कर जा रहे हैं।

उत्तराखंड कैबिनेट के 8 बड़े फैसले, इन पर लगी मुहर

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली। सुबह 11 बजे शुरू हुई यह बैठक लगभग डेढ़ घंटे तक चली। बैठक की शुरुआत में सभी मंत्रियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान दुर्घटना में निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा।

कैबिनेट के प्रमुख फैसले

  1. स्वास्थ्य विभाग में नई सेवा नियमावली चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सेवा नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यकर्ताओं की भर्ती और सेवा शर्तों में सुधार होगा।
  2. भूमि अधिग्रहण में नई प्रक्रिया राजस्व विभाग के तहत आपसी समझौते के आधार पर परियोजनाओं के लिए भूमि मालिकों से भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई। इससे परियोजनाओं में तेजी आएगी और विवाद कम होंगे।
  3. उधम सिंह नगर में औद्योगिक विकास उधम सिंह नगर स्थित प्राग फॉर्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित करने के लिए सिडकुल को ट्रांसफर करने संबंधी शासनादेश में संशोधन को मंजूरी मिली।
  4. जनजाति कल्याण विभाग में पुनर्गठन अनुसूचित जनजाति बहुल जिलों (देहरादून, चमोली, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़) में विभागीय योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए पदों की आवश्यकता को देखते हुए विभागीय ढांचे में पुनर्गठन को सहमति दी गई।
  5. उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली 2025 इस संशोधन नियमावली के प्रख्यापन को मंजूरी मिली।
  6. भूजल निकासी पर जल मूल्य/प्रभार लागू राज्य में गैर-कृषि उपयोग के लिए भूजल निकासी पर जल मूल्य/प्रभार की दरें लागू करने का निर्णय लिया गया।
  7. उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी मिली। यह नीति नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
  8. शिक्षा और हवाई पट्टी से जुड़े फैसले
    • उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 में संशोधन कर जीआरडी उत्तराखंड नाम से एक नया निजी विश्वविद्यालय खोलने को मंजूरी।
    • गौचर और चिल्यालीसौड़ हवाई पट्टी को भारतीय वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच उच्च स्तरीय सहमति के आधार पर संयुक्त रूप से नागरिक एवं सैनिक संचालन के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में रक्षा मंत्रालय को लीज पर ट्रांसफर करने पर सहमति।

मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के बाद कहा कि ये फैसले राज्य के औद्योगिक विकास, जनजाति कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन नीति से उत्तराखंड को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।