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सर्राफा बाजार में भारी हलचल: चांदी एक दिन में 1 लाख से ज्यादा टूटी, सोना भी हुआ सस्ता

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नई दिल्ली/मुंबई: कीमती धातुओं के बाजार में पिछले कुछ दिनों की रिकॉर्ड तेजी के बाद शुक्रवार (30 जनवरी) को जबरदस्त मुनाफावसूली और बिकवाली का सिलसिला देखा गया, जिससे सोना-चांदी के भाव में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी मार्च डिलिवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम छूने के महज एक दिन बाद 25-30% तक लुढ़क गई।

एक सत्र में चांदी ₹1 लाख से ₹1.28 लाख प्रति किलो तक टूटकर ₹2.91 लाख से ₹3.32 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। सोना भी ₹15,000 से ₹33,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ (7-12% गिरावट), ₹1.83 लाख के हाई से ₹1.50 लाख से ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक गिर गया। यह हाल के वर्षों में सोना-चांदी की सबसे तेज एक दिवसीय गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

हाजिर बाजार (फिजिकल/लोकल सर्राफा) में भी यही हाल रहा। दिल्ली, मुंबई आदि प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम ₹1.65 लाख से ₹1.69 लाख के बीच और चांदी प्रति किलो ₹3.35 लाख से ₹3.95 लाख के आसपास ट्रेड कर रही है। सिल्वर और गोल्ड ETF में भी 20-25% तक की भारी गिरावट देखी गई।

गिरावट के प्रमुख कारण:

हाल की रिकॉर्ड रैली (जनवरी में चांदी में 170%+ उछाल) के बाद भारी प्रॉफिट बुकिंग और ओवरहीटेड मार्केट में सुधार।

अमेरिकी डॉलर में मजबूती (ट्रंप द्वारा नामित नए फेड चेयर के हॉकिश संकेतों से)।

वैश्विक बाजारों में बिकवाली: कॉमेक्स पर गोल्ड 7-11% और सिल्वर 30%+ तक नीचे, लिक्विडेशन और मार्जिन कॉल्स।

तकनीकी सुधार, सट्टेबाजी का दबाव और लिक्विडिटी क्रंच।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार ओवरबॉट हो चुका था। कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति ने बताया कि डॉलर की ताकत और तेज रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग स्वाभाविक थी। लॉन्ग टर्म निवेशकों को कीमती धातुओं में 15% से ज्यादा एक्सपोजर न रखने की सलाह दी जा रही है।

निवेशकों और ज्वैलर्स पर प्रभाव: सट्टेबाजों और ETF निवेशकों में अफरा-तफरी मची हुई है। ज्वैलर्स को राहत मिल सकती है क्योंकि गिरावट से खरीदारी बढ़ सकती है, लेकिन मेकिंग चार्जेस और त्योहारी डिमांड पर निर्भर रहेगा। चांदी का औद्योगिक उपयोग (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स) मजबूत बने रहने की उम्मीद है, लेकिन शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी जारी रहेगी।

आज के अनुमानित भाव (31 जनवरी सुबह/अर्ली ट्रेड, बाजार खुलने पर चेक करें):

MCX गोल्ड (फरवरी एक्सपायरी): ₹1.50 लाख से ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम (कल की गिरावट के बाद कुछ स्थिरता/रिकवरी)।

MCX सिल्वर (मार्च एक्सपायरी): ₹2.91 लाख से ₹3.95 लाख प्रति किलो (उच्च वोलेटिलिटी)।

दिल्ली/मुंबई हाजिर: 24K सोना ~₹1.65,795-₹1.69,340 प्रति 10 ग्राम, चांदी ~₹3.39,350-₹3.94,900 प्रति किलो।

विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। लंबी अवधि में चांदी की बुलिश संभावनाएं बनी हुई हैं (औद्योगिक मांग और सप्लाई डेफिसिट), लेकिन शॉर्ट टर्म में डॉलर ट्रेंड, फेड पॉलिसी और ग्लोबल रिस्क पर नजर रखें। यूनियन बजट 2026 और अन्य आर्थिक घटनाएं भी प्रभावित कर सकती हैं।

उत्तराखंड: DGP से मिलने पहुंचे विधायक अरविंद पांडे, परिवार पर लगे आरोपों की सख्त जांच और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग

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देहरादून: उत्तराखंड के सत्ता पक्ष के एक विधायक ने अपने परिवारजनों पर लगे मुकदमों और आरोपों के खिलाफ स्पष्टता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों या उनके परिवार पर कोई भी आरोप लगने पर उन्हें खुद ही जांच में सक्रिय सहयोग करना चाहिए और पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

इसी क्रम में, विधायक प्रदीप रावत ने आज देहरादून में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने परिवार पर दर्ज मुकदमों की कड़ी और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने यह प्रस्ताव रखा कि मामले से जुड़े तीनों पक्षों—जिन पर मुकदमा दर्ज है, जिन्होंने मुकदमा लिखवाया है और जो गवाह हैं—का पॉलीग्राफ परीक्षण (लाइ डिटेक्टर टेस्ट) कराया जाए।

विधायक ने कहा, “इससे स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सही है और कौन गलत। जो भी पक्ष गलत साबित होगा, उसे उचित सजा मिलनी चाहिए और जो निर्दोष है, उसे पूरी तरह दोषमुक्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने जोर दिया कि ऐसी वैज्ञानिक जांच से सच्चाई सामने आएगी और अनावश्यक विवादों का अंत होगा।

यह कदम सत्ता पक्ष के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल पेश करने की दिशा में देखा जा रहा है। डीजीपी ने विधायक की मांग पर विचार करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

जानकारों के अनुसार, पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग को अदालत की अनुमति से ही अमल में लाया जा सकता है, और यह जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया

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वाराणसी: ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि अगले 40 दिनों के भीतर गाय को ‘राज्यमाता’ (राज्य माता) का दर्जा दिया जाए और राज्य से बीफ निर्यात पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

शंकराचार्य ने कहा, “देश के कुल बीफ निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से होता है। कुर्सी के लोभ में यह पाप किया जा रहा है। सनातनी हिंदुओं पर डंडा बरसाना बंद कीजिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था, जो उन्होंने उपलब्ध करा दिया। अब सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुद को ‘सच्चे हिंदू’ साबित करने का समय दिया गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अल्टीमेटम देते हुए कहा, “हम आपको 40 दिन का समय दे रहे हैं। यदि 10 मार्च तक ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 11 मार्च को लखनऊ में सभी संत-महंत, आचार्य और संत समाज एकत्र होंगे तथा कड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे। आगे का निर्णय संत समाज लेगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो मुख्यमंत्री को ‘छद्म हिंदू’ या ‘नकली हिंदू’ घोषित करने को बाध्य होना पड़ेगा।

शंकराचार्य ने प्रशासन द्वारा माफी मांगने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा, “माफी मांगने का तरीका होता है। प्रशासन लालच दे रहा था कि नहा लीजिए, फूल बरसाएंगे, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब प्रमाण देने की बारी सरकार की है।”

यह बयान प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन से हुए विवाद के बाद आया है, जहां शंकराचार्य के शंकराचार्य पद पर सवाल उठाए गए थे। गौ-रक्षा और सनातन धर्म की रक्षा को लेकर संत समाज में बढ़ती नाराजगी के बीच योगी सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

उत्तराखंड में SIR की तैयारियां तेज: 1 से 15 फरवरी तक चलेगा विशेष अभियान, युवा-महिला मतदाताओं पर फोकस

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देहरादून: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया से पहले प्री-SIR गतिविधियां जारी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशन में राज्य में 1 से 15 फरवरी 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बीएलओ आउटरीच अभियान के दूसरे चरण में युवा एवं महिला मतदाताओं की मैपिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि मतदाता सूची को और अधिक सटीक, समावेशी और पारदर्शी बनाया जा सके।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि अभियान के पहले चरण में प्रदेश के कुल मतदाताओं में से लगभग 75 प्रतिशत की मैपिंग पूरी हो चुकी है। वर्तमान मतदाता सूची की मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से की जा रही है, जिससे पुराने और नए मतदाताओं के बीच सत्यापन आसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया मतदाताओं के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ. जोगदंडे ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को पूर्ण सहयोग दें, ताकि घर-घर जाकर होने वाली मैपिंग और सत्यापन प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। साथ ही, निर्वाचन विभाग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे शत-प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करें, जिससे अभियान में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।

यह विशेष अभियान SIR की सफलता के लिए आधार तैयार करेगा, जिसमें मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाने और योग्य मतदाताओं को शामिल करने पर जोर रहेगा। प्रदेश में SIR की शुरुआत फरवरी में संभावित है, जिसके बाद दावे-आपत्तियों का निस्तारण और अंतिम प्रकाशन होगा। मतदाताओं से अनुरोध है कि वे निर्वाचन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी चेक करें और आवश्यक सहयोग प्रदान करें।

उत्तराखंड : किस दिन खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, महाशिवरात्रि पर होगा तय

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रुद्रप्रयाग : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की जाएगी। यह तिथि उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांग गणना के आधार पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और तीर्थ पुरोहितों द्वारा संयुक्त रूप से निर्धारित की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन होने वाली इस विशेष पूजा-अर्चना के बाद आधिकारिक घोषणा की जाएगी, जिसके बाद चारधाम यात्रा का शुभारंभ तय होगा।

इधर, आगामी केदारनाथ यात्रा 2026 को लेकर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि यात्रा से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों पर फोकस किया जा रहा है। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता दी गई है, जहां प्रभावित स्थलों पर सुधार कार्य तेजी से चल रहे हैं।

जिलाधिकारी ने कहा, “यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए घोड़ा-खच्चर, डंडी-कंडी संचालकों, मंदिर समिति, होटल व्यवसायियों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित किया जा चुका है। सभी आवश्यक कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिल सके।”

प्रशासन का प्रयास है कि इस वर्ष भी लाखों भक्तों की आस्था को सम्मान देते हुए कोई कमी न रहे। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुलने की घोषणा हो चुकी है, जबकि केदारनाथ की तिथि महाशिवरात्रि पर फाइनल होगी। श्रद्धालु तैयारियां शुरू कर सकते हैं और आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की जानकारी रखें।

उत्तरकाशी में भीषण अग्निकांड, सिल्ला गांव की छानी में लगी आग से 6 पशुओं की मौत

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उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की भटवाड़ी तहसील के अंतर्गत ग्राम सिल्ला में आज सुबह एक दर्दनाक अग्निकांड हुआ है। श्री शैलेन्द्र पुत्र मंगल सिंह की छानी (गौशाला) में प्रातः करीब 8:40 बजे आग लग गई, जिससे 6 पशुओं की जिंदा जलकर मौत हो गई।

अग्निकांड में 1 भैंस, 3 बैल, 1 गाय और 1 गाय का बछड़ा कुल 6 पशु आग की चपेट में आकर मर गए। साथ ही पूरी गौशाला क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि, इस हादसे में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई और कोई जनहानि नहीं हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही राजस्व उप-निरीक्षक और पशु चिकित्सा विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने प्रभावित परिवार को तत्काल राहत पहुंचाने और आगे की जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है।

चकराता विधानसभा 2027: राम शरण नौटियाल, प्रीतम सिंह और बॉबी पंवार

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देहरादून : उत्तराखंड की चकराता विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित है और मुख्य रूप से जौनसारी जनजाति बहुल क्षेत्र है, हालंकि, अभी चुनाव में वक्त है, लेकिन 2027 विधानसभा चुनावों में इस सीट का राजनीतिक हॉटस्पॉट बनना तय है। इस सीट पर भाजपा (BJP) के राम शरण नौटियाल की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस (INC) के वर्तमान विधायक प्रीतम सिंह की लंबी विरासत है। वहीं, युवा एक्टिविस्ट बॉबी पंवार का उभरता फैक्टर भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

राम शरण नौटियाल: स्थानीय जड़ों और डबल इंजन विकास का चेहरा

राम शरण नौटियाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल के पिता, चकराता के स्थानीय राजनीति में एक जाना-माना नाम हैं। 2022 चुनाव में उन्होंने BJP के टिकट पर 27,417 वोट (37.67%) हासिल किए, जो INC के प्रीतम सिंह के 36,853 वोट (50.64%) से 9,436 वोटों से पीछे थे। नौटियाल की ताकत उनकी बेदाग छवि और ग्रामीण विकास के अनुभव है। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए कई काम कराए।

BJP की “डबल इंजन” सरकार (केंद्र में मोदी और राज्य में धामी) नौटियाल के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है। केंद्र की योजनाएं जैसे PMGSY (सड़कें), जल जीवन मिशन (पेयजल) और आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य) चकराता में क्रियान्वित हो रही हैं, जो पलायन रोकने में मददगार साबित हो सकती हैं। ईमानदार छवि और स्थानीय मुद्दों पर फोकस उन्हें बेहतर विकल्प बनाता है।

प्रीतम सिंह: लंबी विरासत लेकिन विकास में स्टाग्नेशन

प्रीतम सिंह, INC नेता, चकराता से छह बार MLA रह चुके हैं और पूर्व नेता विपक्ष व मिनिस्टर भी रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर 1988 से शुरू हुआ, और उन्होंने ST समुदाय के लिए आरक्षण जैसे मुद्दों पर काम किया। 2022 में उन्होंने 50.64% वोटों से जीत हासिल की, जो उनकी मजबूत पकड़ दिखाती है। हालांकि, आलोचक कहते हैं कि लंबे शासन में विकास रुका हुआ है। पलायन जारी है, युवा बेरोजगार हैं और स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधाएं अपर्याप्त हैं। 2027 में, INC की कमजोर संगठनात्मक स्थिति और राष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियां उनकी मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

बॉबी पंवार फैक्टर: युवा अपील लेकिन स्प्लिट वोट का खतरा

बॉबी पंवार, एक्टिविस्ट और स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष, चकराता की राजनीति में नया फैक्टर हैं। लाखामंडल  (चकराता तहसील) से आने वाले पंवार ने उत्तराखंड बेरोजगार संघ से शुरुआत की और पेपर लीक प्रोटेस्ट्स का चेहरा बने। 2024 लोकसभा चुनाव में टिहरी सीट से इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के रूप में उन्होंने 1.6 लाख वोट हासिल किए, जो कांग्रेस से भी ज्यादा थे। पंवार की ताकत युवा बेरोजगारों में है, जो पलायन और सरकारी नौकरियों पर फोकस करते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता बॉबी पंवार को वास्तव में एक विकल्प मानती है? क्या उनके पास इतना समर्थन है?

अजित पवार जल्द करने वाले थे एनसीपी के दोनों गुटों का विलय, निधन के बाद करीबी का बड़ा खुलासा

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिवंगत उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार अपने निधन से ठीक पहले एनसीपी के दोनों गुटों—अपने नेतृत्व वाले गुट और चाचा शरद पवार के गुट का विलय करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उनके एक करीबी सहयोगी ने बताया कि अजित पवार इस विलय को लेकर बहुत उत्सुक थे और प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। करीबी ने कहा, “अजित दादा ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि वे दोनों गुटों के एक होने के 100% पक्ष में हैं। पूरी तैयारी हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में घोषणा होनी थी।” यह खुलासा अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को बारामती के पास विमान दुर्घटना में मौत के बाद सामने आया है, जिसने महाराष्ट्र की सियासत को हिला कर रख दिया है।

2023 में अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर पार्टी तोड़ी थी और एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हो गए थे, जिससे एनसीपी दो गुटों में बंट गई। हाल के महीनों में दोनों गुटों के बीच सुलह के संकेत मिल रहे थे। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों ने संयुक्त उम्मीदवार उतारे थे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव (5 फरवरी को) के लिए भी ‘घड़ी’ चिन्ह पर मिलकर लड़ा जा रहा था। शरद पवार गुट के नेताओं ने पुष्टि की कि अजित पवार विलय पर चर्चा करने को तैयार थे और स्थानीय चुनावों के बाद फैसला लेने की बात चल रही थी। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 फरवरी को औपचारिक घोषणा का प्लान था।

अजित पवार की मौत ने इन योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि अजित गुट का नेतृत्व कौन संभालेगा—सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल या अन्य? क्या विलय होगा या महायुति गठबंधन में अजित गुट की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी? एनसीपी के वरिष्ठ नेता नरहरी झिरवाल ने कहा कि “दोनों गुट पहले से ही एक हैं, बिखरे रहने का कोई मतलब नहीं।” शरद पवार गुट के नेताओं ने भी संकेत दिए कि अजित पवार के साथ बातचीत चल रही थी। विश्लेषकों का मानना है कि यह त्रासदी परिवार को और करीब ला सकती है, लेकिन राजनीतिक गणित (महायुति vs MVA) अब बदल सकता है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि एनसीपी का भविष्य अब परिवार और वरिष्ठ नेताओं के फैसले पर निर्भर है।

उत्तराखंड : विकासनगर क्षेत्र में 12वीं कक्षा की छात्रा की निर्मम हत्या, चचेरा भाई फरार

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देहरादून :  विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के ढालीपुर-हरबर्टपुर मार्ग पर सड़क किनारे झाड़ियों में एक 18 वर्षीय छात्रा का खून से सना शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतका की पहचान मनीषा पुत्री आनंद सिंह, निवासी बोक्सा बस्ती ढालीपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में मृतका के चचेरे भाई सुरेंद्र उर्फ मांडू को मुख्य आरोपी बताते हुए उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।

पुलिस के अनुसार, 28 जनवरी की रात को कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि ढालीपुर हरबर्टपुर जाने वाले रास्ते पर सड़क किनारे झाड़ियों में एक युवती का शव पड़ा है। सूचना पर क्षेत्राधिकारी विकासनगर और कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। शव की शिनाख्त स्थानीय लोगों ने मनीषा के रूप में की, जिसके सिर पर गंभीर चोटें थीं।

मौके पर फील्ड यूनिट और फॉरेंसिक टीम बुलाई गई, जहां घटनास्थल की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की गई और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए।

मृतका के परिजनों से पूछताछ में पता चला कि बुधवार शाम मनीषा दांत की दवा लेने के लिए अपने ताऊ के बेटे सुरेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर अस्पताल गई थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

मृतका के पिता आनंद सिंह ने कोतवाली विकासनगर में तहरीर दी कि उनके भाई के पुत्र सुरेंद्र ने ही उनकी बेटी की हत्या की है। इस आधार पर मुकदमा संख्या 27/2026 धारा 103(1) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल के पास से आरोपी सुरेंद्र की मोटरसाइकिल और हत्या में प्रयुक्त दरांती बरामद कर ली है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दरांती को आरोपी ने घटना से मात्र दो दिन पहले खरीदा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने मृतका के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने अभियुक्त की जल्द गिरफ्तारी के लिए मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।