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उत्तरकाशी : ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान से प्रशासन अधिक सुलभ और पारदर्शी बना : मुख्यमंत्री 

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  • चिन्यालीसौड़ एवं गौचर हवाई पट्टियों का संचालन सेना करेगी; चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर।

उत्तरकाशी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ विकास खंड परिसर में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टालों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों की शिकायतें व समस्याएं सुनकर मौके पर ही अधिकांश का निराकरण करवाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का यह अभियान आम जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुगम, सुलभ और पारदर्शी बनी है। अब तक 600 से अधिक शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनमें पांच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया और 40 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिला। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जिला मुख्यालय जाने की जरूरत न पड़े, इसलिए गांव-गांव में शिविर लगाकर समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।

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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हेली सेवा विस्तार पर महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) और गौचर (चमोली) हवाई पट्टियों का संचालन भारतीय सेना के माध्यम से किया जाएगा। ये दोनों पट्टियां सामरिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा की तैयारियां पहले से ही तेज कर दी गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिले। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार समन्वयक की भूमिका निभा रही है, जबकि स्थानीय तीर्थ पुरोहित, होटल, टैक्सी-मैक्सी संचालक और स्थानीय लोग ही यात्रा को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के उद्घोष का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनेगा और उत्तराखंड इसमें महत्वपूर्ण योगदान देगा। महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि राज्य सरकार महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को देश-विदेश में पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। अब तक दो लाख से अधिक ‘लखपति दीदियों’ को सशक्त किया जा चुका है।

स्थानीय लोगों की मांग पर मुख्यमंत्री ने सीएचसी चिन्यालीसौड़ और महाविद्यालय के उच्चीकरण को सीएम घोषणा में शामिल करने का आश्वासन दिया।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यह अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है। पांच लाख से अधिक नागरिकों ने इसमें भाग लिया और 40 हजार से अधिक को प्रमाण-पत्र जारी किए गए। जहां समस्याओं का मौके पर समाधान संभव नहीं होता, उन्हें ऑनलाइन ट्रैक कर फॉलो-अप किया जा रहा है।

चारधाम यात्रा 2026: पहली बार केदारनाथ और बदरीनाथ में लगेगी एटीसी प्रणाली, मौसम की पल-पल जानकारी से हेलीकॉप्टर उड़ानें होंगी सुरक्षित

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देहरादून: आगामी चारधाम यात्रा 2026 के दौरान हेलीकॉप्टर यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहली बार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) प्रणाली स्थापित की जा रही है, जिससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पल-पल मौसम की जानकारी उपलब्ध होगी और उड़ानों पर सतत निगरानी रखी जा सकेगी।

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ और उत्तरकाशी क्षेत्र में हुए दो हेलीकॉप्टर हादसों में 13 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। इन हादसों के बाद डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और यूकाडा ने हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए सख्त सुरक्षा मानक लागू किए हैं।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल जाता है। घाटियों में धुंध, बारिश या बर्फबारी हेलीकॉप्टर उड़ानों में बाधा डालती है और हादसों का जोखिम बढ़ाती है। इस समस्या से निपटने के लिए केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में एटीसी सिस्टम लगाया जा रहा है। इस प्रणाली से मौसम की रीयल-टाइम जानकारी मिलेगी, साथ ही हेलीकॉप्टरों की लाइव ट्रैकिंग संभव होगी। यदि मौसम प्रतिकूल होता है, तो उड़ान की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इसके अलावा, सिरसी और सहस्त्रधारा हेलिपैड पर पहले से ही एटीएस (एयर ट्रैफिक सर्विसेज) प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही केदारनाथ और बदरीनाथ में ये नई एटीसी व्यवस्थाएं चालू कर दी जाएंगी।

यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि प्रदेश में सुरक्षित हेली सेवा संचालन के लिए फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता तीर्थयात्रियों की सुरक्षा है। केदारनाथ हेली सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया 25 फरवरी तक पूरी कर ली जाएगी। उसके बाद केदारनाथ और बदरीनाथ में एटीसी सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिससे मौसम संबंधी सटीक जानकारी मिल सकेगी और खराब मौसम में उड़ानें रोकी जा सकेंगी।”

यह कदम चारधाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ) के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा पर निर्भर श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा। यात्रा अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली है, और इन नई व्यवस्थाओं से हादसों का खतरा काफी कम होने की उम्मीद है। यूकाडा और डीजीसीए मिलकर अन्य सुरक्षा उपायों जैसे उड़ानों की संख्या में नियंत्रण, अनुभवी पायलटों की तैनाती और वेदर स्टेशनों की स्थापना पर भी काम कर रहे हैं।

कोटी बनाल में आयोजित दो दिवसीय रथ देवता ठाकुर साहब का दो दिवसीय घड्याला संपन्न, बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त

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बड़कोट : कोटी बनाल में आयोजित दो दिवसीय रथ देवता ठाकुर साहब का दो दिवसीय जागरण (घड्याला) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। रथ देवता के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त पहुंचे। जागरण प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर्व के दो दिन बाद रात के समय होता है और अगले दिन रथ देवता के जागरण का समापन होता है।

उत्तराखंड की लोक संस्कृति और आस्था में रथ देवता (जिन्हें ठाकुर साहब या ठाकुर महाराज के नाम से भी जाना जाता है) का विशेष स्थान है। ये लोक देवता मुख्य रूप से उन दिवंगत आत्माओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने जीवनकाल में जनकल्याण के कार्य किए, ईमानदारी और न्याय के प्रतीक बने, या असमय मृत्यु के बाद चमत्कारों से लोकप्रिय हुए। ऐसे व्यक्तियों को मृत्यु के बाद रथ देवता के रूप में पूजा जाता है, और उनकी पूजा में जागरण, घड्याला (रात्रि जागरण), रथ देवता अवतरण के साथ ही पांडव नृत्य का विशेष महत्व होता है।

कोटी बनाल (उत्तरकाशी जिले की बनाल पट्टी में स्थित कोटी गांव) के रथ देवता ठाकुर साहब का वास्तविक नाम दलेब सिंह रावत था। वे बनाल पट्टी के कोटी गांव के एक सम्मानित व्यक्ति थे, जिनकी ईमानदारी, न्यायप्रियता और जनसेवा के कारण मृत्यु के बाद उन्हें लोक देवता का दर्जा मिला।

स्थानीय कथाओं और परंपराओं के अनुसार, ठाकुर महाराज ने जीवन में सदाचार और समाज की भलाई के लिए जो कार्य किए, वे आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। उनकी पूजा मुख्य रूप से बनाल क्षेत्र के साथ ही पूरी रवांई में होती है, जहां भक्त उनके मंदिर में दर्शन, मनौती और जागरण के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

रथ देवता अपने पाशवा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। साथ ही रथ देवता लोगों की समस्याओं का समाधान भी करते हैं। भक्त रथ देवता खुशहाली की कामना करते हैं। जागरण संपन्न होने के प्रसाद वितरण किया जाता है। भक्त रथ देवता के घड्याले का पूरे साल इंतजार करते हैं।

गलगोटियास यूनिवर्सिटी पर चीनी रोबोटिक डॉग को अपना बताकर पेश करने के आरोप, एक्सपो से बाहर करने के आदेश

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नई दिल्ली: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के एक्सपो क्षेत्र से ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटियास यूनिवर्सिटी को तुरंत स्टॉल खाली करने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई समिट में यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद के बाद हुई है, जिसमें आरोप लगे हैं कि इसे अपनी इन-हाउस विकसित तकनीक बताकर पेश किया गया, जबकि यह चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का तैयार मॉडल है।

विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें यूनिवर्सिटी की एक प्रतिनिधि (प्रोफेसर नेहा सिंह बताई जा रही हैं) रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ के फीचर्स समझा रही थीं। वीडियो में दावा किया गया कि यह यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ द्वारा विकसित है और कैम्पस में सर्विलांस व मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल होता है। प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी ₹350 करोड़ से अधिक की AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली पहली प्राइवेट संस्था है।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तुरंत इसकी पोल खोल दी। रोबोट की तस्वीरें और वीडियो की तुलना से पता चला कि यह यूनिट्री गो2 (Unitree Go2) मॉडल है, जो चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी का कमर्शियल प्रोडक्ट है। भारत में यह रोबोट ऑनलाइन ₹2-3 लाख में आसानी से उपलब्ध है। कई यूजर्स ने इसे ‘मेड इन इंडिया’ इनोवेशन के नाम पर धोखा करार दिया और यूनिवर्सिटी पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया।

सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की कि विवाद बढ़ने और सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचने के बाद गलगोटियास यूनिवर्सिटी को एक्सपो क्षेत्र तत्काल खाली करने को कहा गया। यह कदम समिट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया, क्योंकि यह आयोजन भारत की AI क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया गया है।

यूनिवर्सिटी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया पर सफाई जारी की। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसने कभी रोबोट को खुद विकसित करने का दावा नहीं किया। यह यूनिट्री कंपनी से खरीदा गया टूल है, जिसे छात्रों को रोबोटिक्स और AI की हैंड्स-ऑन लर्निंग के लिए लाया गया था। यूनिवर्सिटी ने इसे अकादमिक उद्देश्य से इस्तेमाल करने वाला बताया और कहा, “हमने इस रोबोडॉग को कभी नहीं बनाया, न ही कभी ऐसा दावा किया।”

हालांकि, कई रिपोर्ट्स में वीडियो और पहले के प्रमोशनल कंटेंट का जिक्र है, जहां इसे इन-हाउस डेवलपमेंट से जोड़ा गया था, जिससे सफाई पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई है, जहां यूजर्स इसे ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ और भारतीय इनोवेशन के नाम पर धोखा बता रहे हैं। विपक्षी नेता और टेक कम्युनिटी ने भी पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं।

देहरादून जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी, परिसर खाली कराया; पुलिस जांच में जुटी

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देहरादून: देहरादून के जिला न्यायालय परिसर में बुधवार को बम विस्फोट की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। जिला जज कार्यालय को प्राप्त धमकी भरे ई-मेल के बाद तुरंत सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई और पूरे परिसर को खाली करा लिया गया।

एसएसपी सिटी प्रमेंद्र डोभाल के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। सभी जजों, अधिवक्ताओं, स्टाफ और मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। परिसर के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई और बम निरोधक दस्ते (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड) तथा अन्य विशेष टीमें जांच-पड़ताल में जुटी हुई हैं।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने पुष्टि की कि धमकी वाला ई-मेल सीधे जिला जज कार्यालय को प्राप्त हुआ है। शुरुआती जांच में इस धमकी के पीछे पाकिस्तानी संगठन की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में लगी हुई हैं।

यह धमकी उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों से मिल रही बम धमकियों की कड़ी का हिस्सा प्रतीत होती है। इससे पहले नैनीताल, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और नैनीताल सहित कई अन्य जिलों के न्यायालयों को इसी तरह के ई-मेल मिले थे, जिनमें जज चैंबरों में आरडीएक्स या आईईडी बम प्लांट होने का दावा किया गया था। उन सभी मामलों में गहन तलाशी के बाद कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और धमकियां झूठी साबित हुईं।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। जांच पूरी होने तक न्यायालय परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कार्यवाही सीमित रूप से संचालित की जा रही है। पुलिस ने मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई जारी है।

AI के दौर में ट्रांसक्रिप्ट पर सवाल: वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त

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नई दिल्ली।देश के सर्वोच्च न्यायालय ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत से जुड़े मामले में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट्स की सटीकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा, “हम AI के दौर में हैं”, ऐसे में अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन में उच्च स्तर की शुद्धता अपेक्षित है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वांगचुक की हिरासत के समर्थन में प्रस्तुत किए गए वीडियो साक्ष्यों से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने अदालत में उनके भाषणों की ट्रांसक्रिप्ट पेश की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि लगभग 3 मिनट के भाषण की 7–8 मिनट लंबी ट्रांसक्रिप्ट दाखिल की गई है। कोर्ट ने इसे गंभीर विसंगति मानते हुए कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि केंद्र द्वारा पेश ट्रांसक्रिप्ट में ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो वांगचुक ने कथित तौर पर कहे ही नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपलब्ध है, तब अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन कम से कम 98% तक सटीक होना चाहिए। अदालत ने केंद्र से वास्तविक (Actual) वीडियो रिकॉर्डिंग और उसकी प्रमाणिक ट्रांसक्रिप्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है, तो इससे हिरासत आदेश की वैधता भी प्रभावित हो सकती है।

मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। उस दिन केंद्र सरकार से संशोधित और प्रमाणिक ट्रांसक्रिप्ट दाखिल करने को कहा गया है। अदालत इस बात की भी जांच करेगी कि प्रस्तुत दस्तावेज हिरासत आदेश के आधार के रूप में कितने ठोस हैं।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की हिरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग और साक्ष्यों की शुद्धता के मानकों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत गया है कि डिजिटल युग में साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी और भी अधिक पारदर्शी और सटीक होनी चाहिए। यदि ट्रांसक्रिप्ट में गंभीर त्रुटियां पाई जाती हैं, तो इसका असर NSA के तहत जारी हिरासत आदेशों की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।

उत्तराखंड: चार धाम यात्रा के लिए अब ऑनलाइन पंजीकरण पर लगेगा शुल्क, फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने का फैसला

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देहरादून:  उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण फ्री नहीं होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को एक न्यूनतम शुल्क चुकाना होगा। यह कदम मुख्य रूप से फर्जी पंजीकरणों को रोकने और वास्तविक यात्रियों की संख्या का सटीक आकलन करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

होटल संचालकों की लंबे समय से की जा रही मांग पर यह फैसला लिया गया है। कई यात्री ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद यात्रा पर नहीं पहुंचते, जिससे फर्जी रजिस्ट्रेशन की समस्या उत्पन्न होती है। इससे होटलों में ठहरने वाले वास्तविक यात्रियों को अक्सर पंजीकरण नहीं मिल पाता और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गढ़वाल मंडल के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित एक समिति शुल्क की राशि तय करेगी। सूत्रों के अनुसार, न्यूनतम 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक का शुल्क लग सकता है, हालांकि अंतिम राशि समिति की सिफारिश और शासन की मंजूरी के बाद तय होगी।

चार धाम यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ यात्रा शुरू होगी, जबकि केदारनाथ धाम 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम 23 अप्रैल को खुलेंगे। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया इसी सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पंजीकरण अनिवार्य रहेगा, लेकिन यात्रियों की कुल संख्या पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी।

ट्रांजिट कैंप में आयोजित बैठक में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन तथा अन्य हितधारकों से चर्चा की। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा। होटल बुकिंग पहले से कराने वाले यात्रियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह बदलाव चार धाम यात्रा में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और स्थानीय व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पिछले वर्षों में लाखों श्रद्धालु चार धाम पहुंचे थे, और इस बार भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि शुल्क लगाने से फर्जीवाड़ा रुकेगा और यात्रा अधिक सुचारू रूप से संचालित होगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से पंजीकरण कराएं तथा किसी तीसरे पक्ष से फीस के नाम पर ठगे जाने से बचें।

गोवंश संरक्षण पर आधारित कविता प्रतियोगिता का आयोजन, इन्होंने हासिल किया प्रथम स्थान

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मुंबई : गोवंश संरक्षण को केंद्र में रखकर आयोजित एक विशेष काव्य प्रतियोगिता का फाइनल गुरु नानक खालसा महाविद्यालय, माटुंगा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रतियोगिता गुरु नानक खालसा महाविद्यालय, उमा कल्याण ट्रस्ट तथा भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्द्धन परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। मुंबई और आसपास के 15 विभिन्न कॉलेजों के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती प्रमिला भारती रहीं, जिन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि कविता केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को सही दिशा देने का एक सशक्त साधन भी है। खालसा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. डॉ. रत्ना शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि हिंदी विभागाध्यक्ष एवं उपप्राचार्य प्रो. डॉ. मृगेन्द्र राय ने प्रतियोगिता का संचालन किया। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने विशेष अतिथि के रूप में उमा कल्याण ट्रस्ट के गोवंश संरक्षण संबंधी कार्यों की प्रशंसा की।

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प्रतियोगिता के परिणामों में रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज की मौसम यादव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, भवंस कॉलेज के पवनजीत गुप्ता ने द्वितीय स्थान हासिल किया तथा राम नारायण रुइया कॉलेज की तनु सिंह तृतीय स्थान पर रहीं। कीर्ति कॉलेज की महिमा मिश्रा और एल.आर. तिवारी डिग्री कॉलेज की ऐश्वर्या शुक्ला को प्रोत्साहन पुरस्कार दिए जाएंगे। विजेताओं को पुरस्कार वितरण के लिए शीघ्र एक अलग समारोह आयोजित किया जाएगा। निर्णायक मंडल में डॉ. आर.एस. दुबे, डॉ. बी.पी. सिंह और डॉ. उषा मिश्रा शामिल थे।

यह काव्य प्रतियोगिता गोवंश आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय देशी गोवंश की वैज्ञानिक उपयोगिता, सांस्कृतिक महत्व, ग्रामीण जीवन में भूमिका तथा पर्यावरण संरक्षण में योगदान से अवगत कराना है। आयोजकों का मानना है कि ऐसी गतिविधियों से विद्यार्थी गाय से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेंगे, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ेंगे तथा देशभक्ति की भावना मजबूत होगी।

प्रतियोगिताएं तीन वर्गों में विभाजित हैं—9वीं-10वीं, 11वीं-12वीं तथा स्नातक-स्नातकोत्तर स्तर। निबंध, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताएं पहले दो वर्गों के लिए हैं, जबकि काव्य प्रतियोगिता सभी तीनों वर्गों में आयोजित की जा रही है। सभी प्रतियोगिताओं का विषय गोवंश से संबंधित है और भाषा हिंदी निर्धारित है। प्रथम चरण में मुंबई क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों में ये प्रतियोगिताएं चल रही हैं तथा जल्द ही अन्य शहरों में भी इनका विस्तार किया जाएगा।

आयोजन में मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग, हिंदी सेवा परिषद, पब्लिक हाई स्कूल, गुरु नानक खालसा कॉलेज और रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज ने सहयोग प्रदान किया। यह पहल गोवंश संरक्षण के साथ-साथ युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

BKTC सदस्य वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती का निधन, 84 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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गुप्तकाशी। बदरीनाथ-केदारनाथ धाम से जुड़े वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित एवं बीकेटीसी सदस्य श्रीनिवास पोस्ती (84) का निधन हो गया। उनके निधन से तीर्थ पुरोहित समाज, मंदिर समिति और क्षेत्रवासियों में शोक की लहर है।

गुप्तकाशी के लंबगोंडी गांव निवासी श्री पोस्ती लगातार चार बार बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्य रहे। इसके साथ ही वे केदार सभा सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। धामों की परंपराओं, पूजा व्यवस्थाओं और तीर्थ पुरोहित समाज के हितों के लिए उनका योगदान लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा।

सौम्य स्वभाव और धर्मकार्य के प्रति समर्पण

बीकेटीसी अध्यक्ष ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीनिवास पोस्ती का सौम्य व्यवहार, सरल व्यक्तित्व और केदारनाथ मंदिर तथा बदरीनाथ मंदिर की सेवा के प्रति उनकी निष्ठा सदैव याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि उनका निधन तीर्थ समाज और मंदिर समिति के लिए अपूरणीय क्षति है।

श्रद्धांजलि अर्पित

इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। क्षेत्रवासियों ने बताया कि श्री पोस्ती धार्मिक आयोजनों, परंपराओं और सामाजिक गतिविधियों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते थे।

तीर्थ पुरोहित समाज ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

श्री केदारनाथ धाम के कपाट इस यात्रा वर्ष 22 अप्रैल को खुलेंगे

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श्री केदारनाथ धाम के कपाट
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शिवरात्रि के अवसर पर आज शीतकालीन गद्दी श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में कपाट खुलने की तिथि तय।

उखीमठ/ रूद्रप्रयाग: 15 फरवरी ।ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट इस यात्रा वर्ष 22 अप्रैल को वृष लग्न में प्रात: 8 बजे दर्शनार्थ खुलेंगे।
आज रविवार पूर्वाह्न शिवरात्रि के अवसर पर परंपरानुसार केदारनाथ रावल रावल भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल एवं मंदिर समिति सदस्यों, धर्माचार्यों,जन प्रतिनिधियों वेदपाठियों एवं पंचगाई हकहकूकधारियों, प्रशासन की उपस्थिति में शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में पंचांग गणना के पश्चात कपाटोद्घाटन की तिथि घोषित हुई तथा
भगवान श्री केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली के केदार प्रस्थान का कार्यक्रम भी घोषित हो गया। इस अवसर पर श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ को भब्य रूप से साढ़े नौ क्विंटल फूलों से सजाया गया था तथा दानीदाताओं ने भंडारे आयोजित किये सैकड़ो श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में दर्शन किये वातावरण जय श्री केदार के उदघोष के साथ भक्तिमय हो गया।

*श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय होने के कार्यक्रम में उखीमठ पहुंचे श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के अवसर पर सभी देश-विदेश के तीर्थयात्रियों को शिवरात्रि की शुभकामनाएं दी कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा प्रदेश के कुशल नेतृत्वशील मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देश में आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने हेतु समिति राज्य सरकार एवं प्रशासन के साथ समन्वय से कार्य कर रही है बताया कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुल रहे है आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि निर्धारित होते ही अब बीकेटीसी यात्रा तैयारियों को गति देगी।*

वहीं बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने कहा कि श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि निश्चित होते ही बीकेटीसी ने यात्रा तैयारियां पूरी कर ली है इसी संदर्भ में मंदिर समिति कार्यालयों विश्राम गृहों का निरीक्षण भी चल रहा है।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया  कि आज पूर्वाह्न शिवरात्रि को शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में संपन्न हुए कपाट खुलने की तिथि निर्धारण के कार्यक्रम में भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली यात्रा का केदारनाथ पहुंचने का कार्यक्रम भी घोषित हुआ। दिनांक श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में 18 अप्रैल को भैरवनाथ जी की पूजा अर्चना संपन्न हो जायेगी।भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से 19 अप्रैल को फाटा रवाना होगी, 20 अप्रैल दूसरे पड़ाव गौरीकुंड तथा 21 अप्रैल अप्रैल को पंचमुखी डोली श्री केदारनाथ धाम पहुंच जायेगी 22 अप्रैल को प्रात: 8 बजे इस यात्रा वर्ष श्री केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलेंगे।

वहीं इस यात्रा वर्ष श्री केदारनाथ धाम में एम टी गंगाधर मुख्य पुजारी का दायित्व संभालेंगे श्री मदमहेश्वर धाम हेतु शिवशंकर लिंग श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ शिवलिंग पूजा व्यवस्था का दायित्व संभालेंगे पुजारी बागेश लिंग अतिरिक्त व्यवस्था में रहेंगे वहीं शिवरात्रि के अवसर पर दानीदाता मुजफ्फरनगर निवासी अभिनव सुशील द्वारा श्री ओंकारेश्वर मंदिर को फूलों से सजाने में सहयोग किया।

आज कपाट खुलने की तिथि तय होने के अवसर पर जिलापंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग ऐश्वर्या रावत, चारधाम यात्रा मुख्य सलाहकार बीडी सिंह उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, देवीप्रसाद देवली सहित बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, उपजिलाधिकारी अनिल रावत, आदि मौजूद रहे।