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उत्तराखंड : जारी रहेगा बारिश का सिलसिला, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

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देहरादून: मौसम की मार लगातार जारी है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में भारी बारिश हो रही है, जिसके चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पढ़ रहा है। अब भी राज्यभर में 10 स्टेट हाईवे समेत 167 सड़कें बंद हैं। इस बीच मौसम विभाग ने एक बाद फिर अलर्ट जारी किया है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने पूरे प्रदेश के लिए तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। जबकि, देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले के अधिकतर इलाकों में तेज बारिश होने की अधिक आशंका जताई है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि पांच अगस्त तक प्रदेश भर के सभी इलाकों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पांच अगस्त के बाद भी पूरे राज्य में अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

भारी बारिश के चलते प्रदेश में 10 स्टेट हाईवे समेत 167 सड़कें बंद हैं। जिस तरह से मौसम विभाग की ओर से बारिश का पूर्वानुमान लगाया गया है। उससे एक बात तो साफ है कि आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है और लोगों की परेशानियां भी फिलहाल कम नहीं होने वाली हैं।

अनुच्छेद 370 पर आज होगी सुप्रीम सुनवाई, CJI करेंगे संविधान पीठ की अगुवाई

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नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त किये जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार से प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी।पिछले 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 पर सुनवाई की रूपरेखा तय करते हुए दो अगस्त से रोजाना सुनवाई करने की बात कही थी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया था कि मामले की सुनवाई नियमित सुनवाइयों के दिन यानी मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी।

सोमवार और शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट में मिसलेनियस डे कहे जाते हैं, जिन दिनों नए मामलों की सुनवाई होती है। पांच सदस्यीय संविधान पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। इस संविधान पीठ की एक खासियत है, इसकी अगुवाई वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कर रहे हैं और पीठ के अन्य न्यायाधीशों में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के वरिष्ठता क्रम को देखा जाए तो पीठ में शामिल तीन अन्य न्यायाधीश भी भविष्य में चीफ जस्टिस आफ इंडिया बनेंगे।

केंद्र सरकार ने 05 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू कश्मीर में बांट दिया था। याचिका में 370 हटाने की वैधानिकता और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया गया है। चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट में उन याचिकाओं पर सुनवाई का नंबर आया है। 2 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सात जजों की पीठ को भेजने की मांग खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इसकी जरूरत नहीं है और मामले को पांच जजों की ही पीठ सुनेगी।

इस मामले में केंद्र सरकार ने गत 10 जुलाई को एक ताजा हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें केंद्र ने कहा है कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहां पूरे क्षेत्र ने शांति, विकास, संपन्नता और स्थिरता आयी है। लेकिन पीठ ने टिप्पणी में कहा था कि कोर्ट के सामने विचार के लिए सिर्फ कानूनी विषय है।

जोरदार हंगामे के बीच दिल्ली सेवा विधेयक लोकसभा में पेश

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भारी हंगामे के बीच आखिरकार सरकार ने लोकसभा में दिल्ली सेवा अध्यादेश को बदलने के लिए विधेयक पेश किया। गृहमंत्री अमित शाह की ओर से गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे पेश किया। इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संसद को दिल्ली के लिए कानून बनाने का अधिकार है।

इस पर आपत्ति करना राजनीति से प्रेरित है। वहीं, विपक्षी सांसदों ने इस दौरान सदन के भीतर जमकर हंगाना काटा। हालांकि सदम में हंगामे के कारण इस विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी, अब कल इस पर चर्चा होगी। बता दें कि लोकसभा की कार्यवाही कल 2 अगस्त तक के लिए स्थगित की गई है।

लोकसभा में GNCT (संशोधन) विधेयक 2023 पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान ने सदन को दिल्ली राज्य के संबंध में कोई भी कानून पारित करने की शक्ति दी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि दिल्ली राज्य को लेकर संसद कोई भी कानून ला सकती है। सारी आपत्ति राजनीतिक है। कृपया मुझे यह बिल लाने की अनुमति दें।

जैसे ही गृह मंत्री शाह ने इस विधेयक पर बोलना शुरू किया, आम आदमी पार्टी के सांसद शुशील कुमार रिंकू ने विरोध जताना शुरू कर दिया। वे वेल में भी आ गए। सरकार के खिलाफ विपक्ष की नारेबाजी के बीच रिंकू ने कहा कि मुझे बोलने का मौका नहीं दिया गया। यह लोकतंत्र की हत्या है। आप भीमराव अंबेडकर का अपमान कर रहे हैं। इस दौरान रिंकू और कांग्रेस सदस्य टी एन प्रतापन को आसन के सामने कागज फेंकते देखा गया।

हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को उनके व्यवहार के लिए फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि सभी को बोलने के लिए समय दिया जाएगा। इस तरह का व्यवहार अच्छा नहीं है। देश देख रहा है।

उत्तराखंड : 2024 से पहले गढ़वाल-कुमाऊ में फंसी कांग्रेस, मुद्दा भुनाने में जुटी BJP!

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देहरादून : 2024 लोकसभा चुनाव सिर पर है। बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है। एक तरफ इंडिया गठबंधन है और दूसरी ओर इस गठबंधन में शामिल हर राजनीति दल का अपना एजेंडा। इनमें सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी कांग्रेस है। जाहिर है कांग्रेस का फोकस 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत के लिए प्रत्येक राज्य की हर सीट पर होगा। उत्तराखंड भी उन्हीं राज्यों में से एकएक है। पार्टी को यहां से काफी उम्मीदें भी है। कांग्रेस की नजर पांचों विधानसभा सीटों पर तो है, लेकिन, उसके लिए पहले पार्टी के भीतर चल रहे संग्राम को जीतना जरूरी होगा।

भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में कांग्रेस को और अधिक सकतर्कता से आगे बढ़ना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस, भाजपा को बैठे-बिठाए मुद्दे थमा दे रही है। उसका नतीजा यह है कि जहां कांग्रेस को भाजपा पर हमलावर होना चाहिए था। वहां, भाजपा, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करना माहरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। इससे सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस 2024 की जंग को जीत पाएगी?

दरअसल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने एक बयान दिया था। उस बयान में उन्होंने अंकिता हत्याकांड को लेकर लोगों में जोश जगाने के लिए कुछ ऐसे शब्द कह दिए, जिनको भाजपा ने मुद्दा बना लिया। करन माहरा के इस बयान पर बवाल मचा हुआ है। जहां कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने करना माहरा का समर्थन किया। वहीं, यह भी कहा कि वो थोड़े संयतिम शब्दों का प्रयोग कर सकते थे।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत पूर्व सीएम हरीश रावत समेत करन माहरा के बयान का बचाव करते नजर आ रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया के जरिए भाजपा नेताओं के पुराने बयानों की एक लंबी फेहरिस्त को पेश कर भाजपा पर पलटवार भी किया जा रहा है। कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और बंशीधर भगत के बयानों के वीडियो को लगातार लोगों के सामने ला रही है।

यहां तक तो सब ठीक था। लेकिन, इससे आगे की कहानी में कुछ ऐसा ट्वीस्ट आया, जिसकी कल्पना कांग्रेस ने शायाद नहीं की होगी। करन माहरा ने जो बयान दिया। उस बयान पर अब कांग्रेस के भीतर से ही विरोध के सुर उठने लगे हैं। कांग्रेस में गढ़वाल के कुछ नेता सवाल उठ रहे हैं। दबी जुबान में विरोध भी हो रहा है।

करन माहरा के माफी मांगने के बाद यह मामला थोड़ा शांत होने लगा था। लेकिन, इस बीच कांग्रेस संगठन ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र शाह को प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बयानबाजी करने पर नोटिस भेज कर जवाब तलब कर लिए। इससे थमती नजर आ रही कांग्रेस की कलह थमने के बजाय लगातार बढ़ता ही जा रही है। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गिरीमा मेहरा दसौनी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रदेश महासचिव राजेंद्र शाह पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को कैसे संभालती है?

इधर, भाजपा मामले को भुनाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है। भाजपा लगातार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ हमलावर है। वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा का लक्ष्य केवल और केवल गढ़वाल-कुमाऊं के बीच खाई पैदा करना है। कुलमिलाकर देखा जाए तो एक ओर कांग्रेस को अपनी ही पार्टी के भीतर गढ़वाल-कुमाऊं को लेकर दूरी पैदार करने के प्रयासों को पाटना होगा। वहीं, दूसरी ओर भाजपा के गढ़वाल-कुमाऊं के दांव को भी बेअसर करने के लिए उससे मजबूत दांव चलना होगा।

सवाल केवल इतनाभर नहीं है कि कांग्रेस की लड़ाई सड़क पर कैसे आई। सवाल यह है कि भाजपा को कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका कौन दे रहा है? दरअसल, इसके लिए कोई और नहीं। बल्कि कांग्रेस के नेता खुद जिम्मेदार हैं। जिस बयान के लिए पार्टी के अध्यक्ष माफी मांग चुके हैं। उस प्रतिक्रिया के जवाब में पार्टी की मुख्य प्रवक्ता का बयान बेहद गैरजिम्मेदाराना है।

कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने राजेंद्र शाह पर गंभीर आरोप लगा दिए। जिस पर राजेंद्र शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इतना ही नहीं, राज्य आंदोलनकारियों में भी इसको लेकर गुस्सा है। दिल्ली जंतर-मंतर पर आंदोलकारियों ने गरिमा माहरा दसौनी के बयान पर रोष भी प्रकट किया। एक और बड़ा सवाल यह है कि पार्टी की मुख्य प्रवक्ता होने के नाते क्या उनको राज्य आंदोलनकारियों पर गलत बयान देना चाहिए था?

इससे एक बात को साफ है कि कांग्रेस की जो कलह पार्टी फोरम पर निपटाई जा सकती थी। उसे कांग्रेस ने बड़ा स्तर पर खुद ही फैलाने का काम किया, जिसका लाभ भाजपा भी उठा रही है। भाजपा को कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका मिल रहा है। जिम्मेदार पदों पर बैठे कांग्रेस नेताओं को संयम बरतने की जरूरत है, जिससे ऐसे विवादों को पार्टी के भीतर ही निपटाया जा सके और कमजोर होती कांग्रेस को मजबूती दी जा सके।

बिहार सरकार को बड़ी राहत, अब होगा जातीय सर्वे, ये है पूरा मामला

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बिहार: हाईकोर्ट अपने अंतरिम फैसले से आगे अंतिम फैसले में यही करेगा। हाईकोर्ट ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की दी तारीख के अंदर बिहार में जातीय जनगणना को लेकर उठ रहे सवालों पर सुनवाई कर ली। चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन व जस्टिस पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने लगातार पांच दिनों तक (3 जुलाई से लेकर 7 जुलाई तक) याचिकाकर्ता और बिहार सरकार की दलीलें सुनीं।

कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना बताने वालों की भी पूरी दलील सुन ली और फिर सरकार के उस दावे का पक्ष भी सुना, जिसके अनुसार यह जाति आधारित सर्वे है। आज पटना हाईकोर्ट ने सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने इसे सर्वे की तरह कराने की मंजूरी दे दी है।

जल्दी ही बिहार सरकार फिर से जातीय जन-जनगणना शुरू करवाएगी। हालांकि कोर्ट के इस फैसले से याचिकाकर्ता नाखुश हैं। उनका कहना है कि अब वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को तीसरी बार बिहार की जाति आधारित जन-गणना के केस को पटना हाईकोर्ट के पास भेजा था। दो बार जनहित के नाम पर याचिका पहुंचने पर सुप्रीम न्यायालय ने इसे हाईकोर्ट का केस बताते हुए वापस किया था।

इसके बाद पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और यहां 04 मई को अंतरिम फैसला राज्य सरकार के खिलाफ आया। कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए 04 मई तक जुटाए सभी डाटा को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। पटना हाईकोर्ट से अपने खिलाफ अंतरिम आदेश को देखकर बिहार की नीतीश सरकार अगली तारीख का इंंतजार किए बगैर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा- “पटना हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले में काफी हद तक स्पष्टता है, लेकिन अंतिम फैसला आए बगैर सुप्रीम कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होगी।

पटना हाईकोर्ट ने 04 मई को अंतरिम आदेश दिया और कुछ ही घंटे में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर तमाम जिलाधिकारियों के जरिए गणना में लगे सारे कर्मियों तक एक लाइन का मैसेज पहुंच गया कि डाटा को यथास्थिति सुरक्षित किया जाए। इसके बाद क्या हुआ? दरअसल, भले ही सरकार ने 80 प्रतिशत काम पूरा होने की बात की है लेकिन सच्चाई यही है कि यह आंकड़ा कागज पर जानकारी जुटाने वालों का है।

मतलब, 80 फीसदी के करीब लोगों की जानकारी पेपर पर ली गई है। जमा की गई जानकारी (डाटा) का औसतन 25 फीसदी भी अभी ऑनलाइन अपलोड नहीं हुआ है। जिस सरकारी सर्वर की बात सरकार ने की है, उसकी जगह ज्यादातर डाटा अभी पेपर पर ही है।

हरियाणा में हिंसा के बाद तनाव, अब तक पांच की मौत, लगा कर्फ्यू

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हरियाणा : नूंह में दो समुदायों में हिंसक झड़प को लेकर प्रशासन अलर्ट है। उपद्रव को देखते हुए शाम को जिला उपायुक्त प्रशांत पंवार ने धारा 144 लागू कर दी। शाम चार बजे के बाद दो अगस्त तक के लिए जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह के अफवाह को फैलने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

गुरुग्राम के सोहना में शांति बहाल करने के लिए सद्भावना कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में दो समुदाय की ओर से 21-21 लोगों को शामिल किया गया। जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कमेटी के साथ बैठक की। इस दौरान उपायुक्त ने शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं, कमेटी में शामिल लोगों ने नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।

विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने नूंह में हिंसा को लेकर पुलिस-प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से कोई तैयारी नहीं थी, जबकि कई दिनों से इस यात्रा को लेकर स्थानीय प्रशासन से संवाद हो रहा था। इस धार्मिक यात्रा में हजारों लोग इकट्ठा होने वाले थे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए इस यात्रा के मद्देनजर अर्द्धसैनिक बल की तैनाती होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभी भी वहां सुरक्षा के इंतजाम दुरुस्त नहीं है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा, “संवाद के जरिए सभी विषयों का हल निकाला जा सकता है। प्रदेश के सभी नागरिक हरियाणा एक हरियाणवी एक के सिद्धांत पर चलते हुए समाज और प्रदेश के हित में सहयोग दें। नूंह में जिस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई उस स्थिति में हर आम नागरिक की जिम्मेदारी समाज और प्रदेश के प्रति और भी बढ़ जाती है। ऐसे में हमें कोई भी संदेश प्रचारित करते हुए और भी अधिक संवेदनशील होना चाहिए।

कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं है। देश की अखंडता और शांति के लिए सबको मिलकर प्रयास करते रहना चाहिए। सभी से विनम्र अनुरोध है कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें और भाईचारे को बनाए रखें। नूंह विधायक आफताब अहमद ने कहा कि जिले में हुई हिंसक घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले विवादित वीडियो की देन है।

यहां यात्रा पहले भी निकलती थी और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में दोनों धर्मों के लोग शामिल होते थे मेरा मानना है कि एक साजिश के तहत वीडियो बनाकर मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी ने प्रसारित किया जिसके चलते यहां का माहौल खराब हुआ और हिंसक घटना हुई। पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से नाकाम रहा घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए।

बिना किसी कट के सेंसर बोर्ड से पास हुई OMG-2

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अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ओएमजी 2 को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। बीते दिनों इस फिल्म का टीजर सोशल मीडिया पर रिलीज हुआ था, जिसे फैंस ने पसंद किया है।

लेकिन, इसके टीजर में भगवान शिव का अभिषेक रेल की पटरी के किनारे पानी से हो रहा है, इस सीन को लेकर यूजर्स ने काफी हंगामा किया था। इसके अलावा और भी अन्य कई कारणों के चलते कहा जा रहा था कि इस फिल्म के कई सीन्स पर सेंसर बोर्ड कैंची चलाएगा, हालांकि ऐसा नहीं हुआ है।

OMG-2 पिछले कुछ हफ्तों से CBFC (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) की ओर से फिल्म को आ रहीं दिक्कतों के कारण चर्चा में है। अधिकारियों के साथ तमाम चर्चाओं के बाद आखिरकार इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिल गया है। अक्षय कुमार, पंकज त्रिपाठी और यामी गौतम अभिनीत व अमित राय निर्देशित फिल्म को 2 घंटे 36 मिनट के स्वीकृत रन-टाइम के साथ ‘ए – एडल्ट ओनली’ का सर्टिफिकेट दे दिया गया है।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा हो रही है कि सेंसरशिप के मुद्दों के कारण फिल्म में कई कट्स लगाए जाएंगे। खबरों के अनुसार, फिल्म में कोई कट नहीं होगा। OMG-2 को बिना किसी कट के पास कर दिया गया है। फिल्म के कुछ सीन, डायलॉग्स और कैरेक्टर हैं, जिन्हें सेंसर बोर्ड के सदस्यों के साथ चर्चा के बाद निर्माताओं ने एडिट कर दिया है।

 

 

उत्तराखंड : ग्राम प्रधान के घर आई खुशियां और छिन गई कुर्सी

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उत्तरकाशी: पंचायती राज विभाग ने पंचायतों में चुनाव के लिए दो अधिक बच्चे नहीं होने का नियम लागू किया हुआ है। इस नियम का उल्लंघन करने पर कई ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों की कुर्सियां छिन चुकी हैं। ऐसा ही एक और माला नौगांव ब्लॉक के मसाल गांव का सामने आया है। प्रधान बनने के बाद तीसरा बच्चा पैदा करना ग्राम प्रधान खेमराज सिंह को हमंगा पड़ गया। ग्राम प्रधान को पद से मुक्त कर दिया गया है।

आदेश में कही गई बातें 

तृतीय संतान के जन्म होने की पुष्टि होने के कारण अनर्ह होने के आधार पर विकास खण्ड नौगांव के प्रधान ग्राम पंचायत मसालगांव खेमराज सिंह को जिला मजिस्ट्रेट उत्तरकाशी के द्वारा उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथा संशोधित 2019) की धारा-138 (1) (घ) में विद्यमान प्राविधानों के अर्न्तगत ग्राम प्रधान मसालगांव के पद से पदमुक्त किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं।

इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट अभिषेक रूहेला द्वारा जारी आदेश के अनुसार खेमराज सिंह, प्रधान ग्राम पंचायत, मसालगांव विकास खण्ड नौगांव वर्ष 2019 के सामान्य निर्वाचन में प्रधान पद पर निर्वाचित हुये, निर्वाचन के समय प्रधान, ग्राम पंचायत मसालगांव की 02 जीवित सन्तान थी। खण्ड विकास अधिकारी, नौगांव के पत्र दिनांक 14 सितम्बर, 2022 के द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार खेमराज सिंह की तृतीय सन्तान के जन्म होने की पुष्टि हुयी है।

प्रधान, ग्राम पंचायत मसालगांव खेमराज सिंह, द्वारा उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा-8 (5) के अर्न्तगत अपील प्रस्तुत की गयी। अपील का निस्तारण आदेश दिनांक 28 अप्रैल, 2023 को अपीलार्थी के पक्ष में स्वीकार किया गया एवं मुख्य विकास अधिकारी, उत्तरकाशी द्वारा जिला पंचायत राज अधिकारी, उत्तरकाशी को निर्देश दिये गये कि शिकायतकर्ता श्री कीर्तन सिंह के पत्र दिनांक 18 मार्च, 2023 को दी गयी शिकायत (मय शपथ-पत्र) पर दो सप्ताह में जाँच करवाकर पुनः पत्रावली प्रस्तुत करें। जिला पंचायत राज अधिकारी, उत्तरकाशी ने अपने पत्रसंख्या 153 दिनांक 16 मई, 2023 के द्वारा प्रश्नगत प्रकरण में आख्या मुख्य विकास अधिकारी, उत्तरकाशी को उपलब्ध करायी गयी।

जिला मजिस्टथ्ेट ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि मुख्य विकास अधिकारी, उत्तरकाशी के आदेश पत्रांक 673 दिनांक 13 जुलाई, 2023 में यह उल्लेख किया गया है कि श्री खेमराज सिंह, प्रधान, ग्राम पंचायत मसालगांव विकास खण्ड नौगांव को उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्वान्त के अर्न्तगत पर्याप्त समय एवं अवसर उपलब्ध कराये जा चुके हैं, इसके उपरान्त भी श्री खेमराज सिंह, प्रधान ग्राम पंचायत मसालगांव, विकास खण्ड नौगांव के द्वारा अन्तिम अपील पत्रसंख्या 593 दिनांक 03 जुलाई, 2023 पर अपील / प्रतिउत्तर न प्रेषित करना यह प्रदर्शित करता है कि श्री खेमराज सिंह, प्रधान, ग्राम पंचायत मसालगांव विकास खण्ड नौगांव को कुछ नही कहना है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में जिला मजिस्टेªट द्वारा उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा-138 के सम्बन्ध में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये खेमराज सिंह, प्रधान, ग्राम पंचायत मसालगांव को उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथा संशोधित 2019) की धारा 8 की उपधारा (1) (द) के अनुसार स्पष्ट अनर्ह होने के आधार पर उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथा संशोधित 2019) की धारा-138 (1) (घ) (प्प्प्) में विद्यमान प्राविधानों के अर्न्तगत ग्राम प्रधान मसालगांव के पद से पदमुक्त किए जाने का आदेश निर्गत किया गया है।

सुबह-सुबह सब्जी विक्रेताओं से मिलने आजादपुर मंडी पहुंचे राहुल गांधी

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सब्जियों और फलों की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर देश को दो वर्गों में बांटने का आरोप लगाया. आज सुबह राहुल गांधी अचानक दिल्ली में आजादपुर मंडी गए और वहां फल और सब्जी विक्रेताओं से मुलाकात की.

राहुल गांधी ने कई दुकानदारों से सब्जियों की बढ़ती कीमतों को लेकर उनसे बातचीत की और उनके हालात पर चिंता जाहिर की. इससे पहले राहुल गांधी ने ट्विटर पर एक सब्जी विक्रेता का वीडियो शेयर कर मोदी सरकार पर हमला किया था.

राहुल गांधी ने कहा था कि सब्जी जैसी चीजे भी आम जनता की पहुंच से दूर होती जा रही हैं. अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ रही है. इनके आंसुओं को पोंछना जरूरी है.

उत्तराखंड : अगले चार दिन ऐसा रहेगा मौसम, येलो अलर्ट जारी

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देहरादून: मानसून शुरू होने के बाद से अब तक लगातार भारी बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने आज फिर सभी जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि देहरादून, नैनीताल, चम्पावत और बागेश्वर में अन्य जिलों के मुकाबले अधिक बारिश होने के आसार हैं।

ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार चार अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। लागातार बारिश के कारण कई सड़कें बंद हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ मार्ग मलबा आने के कारण बंद है। जिसके चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।