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उत्तराखंड: बागेश्वर उपचुनाव के लिए BJP ने घोषित किया प्रत्याशी

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बागेश्वर: भाजपा ने बागश्वर उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याश की घोषणा कर दी है। पूर्व दिवंगत कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी। भाजपा ने दिवंगत मंत्री की पत्नी पार्वती दास को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस पहले ही बंसत कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है।

हिमाचल का हाल बेहाल, 20 से अधिक लोगों की मौत, मलबे में दबी कई जिंदगियां

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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ के कारण 20 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी है। पिछले 3 दिनों से प्राकृतिक आपदा से गिरे मंडी जिला में 13 लोगों की मौत हुई। इसके बाद सोलन जिला में सात लोगों की मौत होने की सूचना है। प्रदेश में तबाही की स्थिति लगातार बनी हुई है।

वहीं, शिमला के समरहिल इलाके के शिव मंदिर में बड़ा हादसा हुआ, जिसमें 25 से 30 लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, मंदिर पर पहाड़ टूटकर गिर पड़ा, जिसके बाद मलबे में करीब 30 लोग दब गए।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने भी घटना स्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मंदिर के अंदर अभी भी 20-25 लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्होंने आगे कहा कि ध्वजारोहण किया जाएगा, स्वतंत्रता दिवस पर राजभवन में ‘एट-होम’ कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।

मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले 24 घंटों तक मानसून इसी प्रकार सक्रिय रहेगा। राज्य के अधिकांश भागों में भारी वर्षा का क्रम जारी रहने से नदियां, नाले व खड्डे उफान पर रहेंगे। चंडीगढ़-शिमला फोरलेन चक्की मोड पर वाहनों के लिए बाधित है।

धर्मपुर की तनयाहड पंचायत के नल्याणा में मकान में मलवाल प्रवेश कर जाने की वजह से तीन लोगों के दबने की सूचना है। वहीं, नाहन के कंडईवाला में रविवार देर शाम को बादल फटने से 50 घरों में मलबा भर गया है।

चुराह, सलूनी सहित जिला का पहाड़ी क्षेत्र पूरी तरह से धुंध के आगोश में है। उधर जिला प्रशासन ने खराब मौसम में लोगों से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही वाहन चालकों को भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन ले जाने की बात कही है।

उत्तराखंड: चारधाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित, CM ने अधिकारियों से ली जानकारी

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देहरादून: मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में उच्चाधिकारियों की बैठक लेते हुए निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही अतिवृष्टि के दृष्टिगत सभी अलर्ट मोड पर रहें। उन्होंने अधिकारियों से अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों एवं वहां किए जा रहे राहत व बचाव कार्यों की जानकारी भी प्राप्त की।

अतिवृष्टि के दृष्टिगत 2 दिनों के लिए चारधाम यात्रा भी स्थगित कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम के पूर्वानुमान को देखकर ही यात्रा करें।

मुख्यमंत्री ने अतिवृष्टि के कारण जनपद पौड़ी में हताहत हुए लोगों की आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिवारजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। जिला प्रशासन और एस.डी.आर.एफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को घायलों को शीघ्र उचित उपचार दिलवाने के भी निर्देश दिए हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाय कि अतिवृष्टि से प्रदेश में जहां भी नुकसान हो रहा है, प्रभावितों को मानकों के अनुसार मुआवजा राशि यथाशीघ्र मिल जाय। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि से प्रदेश में हुई क्षति का पूरा आंकलन किया जाए।

मुख्यमंत्री जिलाधिकारियों से भी अतिवृष्टि के कारण हुए नुकसान एवं राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी के संबंध में लगातार जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि जिला प्रशासन एवं राहत-बचाव में लगे सभी दलों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाए।

उत्तरकाशी में आफत की बारिश, नदी में बही महिला, घर और गौशालाएं क्षतिग्रस्त

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मोरी: भारी बारिश ने तबाही मचाई है। उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र के टिकोची के दुचाणु गांव से भारी नुकसान की खबरें आ रही है। जानकारी के अनुसार देर रात अतिवृष्टि के कारण जालू खड्ड उफान पर आ गया। जिससे आराकोट क्षेत्र के ग्राम टिकोची में पावर नदी के दूसरी ओर दुचाणु गांव के लोगों की तीन गौशालाएं और दो घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि एक महिला बह गई है। 10 बकरियों और दो गायों के बहने की भी यूचना है। जबकि, दो लोग घायल बताए जा रहे हैं। मोरी पुलिस और तहसील प्रशासन मौके पर पहुंच गया है।

उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर, यहां मलबे में दबा रिसार्ट

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रुद्रप्रयाग: भारी बारिश का दौर जारी है। प्रदेशभर से भारी नुकसान की खबरें सुबह से ही सामने आ रही हैं। चमोली में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। वहीं, केदारनाथ पैदल मार्ग पर बड़ी लिंचलोली के पास बीते देर रात बादल फटने की घटना सामने आई है। बादल फटने से टेंटों में सो रहे करीब छह लोग फंस गए। जिनमें से पांच लोगों को निकाल लिया गया है। एक व्यक्ति अभी भी फंसा हुआ है।

छानी कैंप में तीन दुकानों को नुकसान पहुंचा है। पैदल मार्ग पूर्ण तह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौर हो कि बीते देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है।

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लिनचोली में गदेरा उफान पर आने से टेंट में रह रहे एक नेपाली मूल के व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक लापता चल रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि लिनचोली क्षेत्र अंतर्गत दिनांक रात्रि अतिवृष्टि होने के कारण खाली कैंप से पहाड़ी की तरफ गधेरे में नेपाली बसावट में मलवा आने से कपिल बहादुर पुत्र कालू बहादुर उम्र 27 वर्ष सुखद कैलाली आंचल शेती नेपाल की मलबे में दबने से मौत हो गई।

रुद्रप्रयाग में बेलनी पुल के पास हनुमान मंदिर भी अलकनंदा नदी के जलस्तर बढ़ने से डूब चुका है.केदारनाथ पैदल रास्ते पर बड़ी लिंचलोली के पास बीते देर रात बादल फटने से टेंटों में सो रहे करीब छह लोग फंस गए. जिनमें से पांच लोगों को निकाल लिया गया है. वहीं भारी बारिश से जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

ऋषिकेश की मोहन चट्टी में एक रिसार्ट मलबे से दब गया। एक परिवार के यहां दबने की आशंका है। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम वहां तक नहीं पहुंच पा रही है। चारों तरफ से सड़कें अवरुद्ध है। डीएम पौड़ी की ओर से जेसीबी भेजी गई है। एसएसपी श्वेता चौबे ने कहा कि स्थानीय लोग की मदद से जानकारी जुटाई जा रही है।

मोहन चट्टी में हुई यह घटना मध्य रात 2:00 बजे की बताई गई है। यहां तक पहुंचने वाले वाया नीलकंठ ,वाया गरुड़ चट्टी सभी रास्ते बंद हैं। पूरे प्रखंड की स्थिति अच्छी नहीं बताई जा रही है। मोहन चट्टी में एक रिसार्ट के ऊपर भारी बारिश का मलबा आने से रिसार्ट के भीतर एक परिवार के दबे होने की आशंका जताई गई है।

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देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में आपदा का माहौल बन गया है। बादल व नदी ने रौद्र रूप ले किया है। कई स्थानों पर खेत व पुस्ते ढह गए। पीपीसीएल पुल के पास स्थित एक निजी संस्थान का भवन भरभरा कर धराशायी हुआ। सड़कों पर नदी बहने लगी। क्षेत्रवासियों ने घर खाली कर दिए। कई गांवों का संपर्क कट गया है।

कोटद्वार आसपास के क्षेत्र में बीती रात से लगातार बारिश चल रही है। बारिश के कारण जहां एक और राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया है, वहीं नदियों का भी जल स्तर बड़ा है। खोह नदी के उफान पर आने से सोमवार सुबह नदी तट पर बसे कुछ मकान नदी में समा गए। हालांकि गृह स्वामी पूर्व में ही इन मकानों को छोड़ चुके थे।

उत्तरकाशी में सुबह से वर्षा हो रही है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू के पास अवरुद्ध है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू बैंड और डाबरकोट के पास अवरुद्ध हुआ है। वर्षा होने के कारण अभी राजमार्ग को सुचारू करने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

भारी वर्षा के चलते हरिद्वार में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी धीराज सिंह की ओर से कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों के अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है।

उत्तराखंड: भारी बारिश से तबाही, चमोली में फटा बादल

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चमोली : प्रदेश भर में देर रात से ही कई स्थानों पर मूसलधार बारिश लगातार जारी है। आज सुबह तड़के चमोली जिले के लोहान गांव के पास बादल फटने से लोगों की खेती को भारी नुकसान हुआ है।

 

जबकि, गांव के कुछ नीचे मायापुर बाजार में भी तबाही मची है। यहां मलबे के नीचे कई वाहन भी दबे नजर आ रहे हैं। जबकि, कुछ वाहनों के और दबे होने की आशंका भी जताई जा रही है। गनीमत यह रही इस हादसे में जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

 

मायापुर बाजार पूरी तरह से मलबे पटा हुआ नजर आ रहा है। यहां दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है। जानकारी के अनुसार यह हादसा आज सुबह करीब साढ़े चार से पांच बजे के बीच हुआ है।

 

भारी बारिश से जहां गांव को नुकसान पहुंचा है। वहीं, बिरही गंगा पावर प्रोजेक्ट में भी नुकसान हुआ है। सड़क और गांव के रास्ते पूरी तरह से तबाह हो गए। जिस तरह से तबाही का मंजर नजर आ रहा है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां कितना भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि अब तक नुकसान का आकलन नहीं किया गया है। लेकिन, तस्वीरें बता रही हैं कि स्थिति भयावह है।

उत्तराखंड : इस जिले में कल बंद रहेंगे स्कूल, आदेश जारी

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देहरादून: मौसम विभाग ने 14 अगस्त के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया है। इसको लेकर आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि आंगनबाड़ी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।IMG 20230813 WA0041 1096x1536 1

ये है आदेश

भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा दिनांक 13 अगस्त, 2023 को जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार दिनांक 13 एवं 14 अगस्त, 2023 को जनपद देहरादून में कही-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने / वर्षा के अति तीव्र से अत्यन्त तीव्र वर्षा होने का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वर्तमान में जनपद के समस्त क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा को दृष्टिगत संवेदनशील स्थलों में भूस्खलन की सम्भावना बढ़ जाती है।

इससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटित हो सकती है। अतः आपदा न्यूनीकरण के दृष्टिगत जनपद के कक्षा 01 से 12 तक संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थाओं और आंगनबाड़ी केन्द्रों में दिनांक 14.082023 को एक दिन का अवकाश घोषित किया जाता है।

अतएव, जनपद समस्त शासकीय / गैर शासकीय एवं निजी स्कूलों के साथ सभी आंगनबाडी केन्द्र दिनांक 14.08.2023 को बन्द रहेंगे। मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी देहरादून को निर्देशित किया जाता है कि उपरोक्त समस्त शैक्षणिक संस्थाओं एवं आंगनबाडी केन्द्रों में उक्त आदेश का अनुपालन कराना सुनिश्चित करायेंगे।

 

क्या फिर से डराने वाला है कोरोना, सताने लगा चौथी लहर का डर!

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कोरोना को लेकर फिर चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। कोरोना के नए वेरिएंट एरिस के कारण वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा रही है। यूके, भारत सहित कई देशों में कोरोना के वैरिएंट EG.5.1 के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। कोरोना को लेकर जारी साप्ताहिक रिपोर्ट में, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने बताया कि दुनियाभर में 10 जुलाई से 6 अगस्त तक कोरोना के लगभग 15 लाख नए मामले दर्ज किए, जो पिछले 28 दिनों की तुलना में 80 प्रतिशत की वृद्धि है। ओमिक्रॉन का ही सब-वैरिएंट माने जाने वाले इस नए वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक देखी जा रही है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की साप्ताहिक अपडेट में बताया गया है कि संक्रमण के मामले तो बढ़े हैं पर मौत के मामलों कमी आई है। मौतों की संख्या 57 प्रतिशत गिरकर 2,500 रह गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है यह आंकड़े अधिक हो सकते हैं, क्योंकि महामारी के पहले चरण की तुलना में बहुत कम परीक्षण किए जा रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर संक्रमण के बढ़ते मामले चिंता बढ़ा रहे हैं, हालांकि भारत के नजरिए से बात करें तो यहां स्थिति काफी नियंत्रित लग रही है। भारत में मई के महीने में कोरोना के इस नए वैरिएंट के मामले पहली बार रिपोर्ट किए गए थे, हालांकि इसके बाद संक्रमण या फिर अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, देश में संक्रमण के मामलों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। संक्रमण की स्थिति की निगरानी की जा रही है, जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए नए वैरिएंट पर नजर रखा जा रहा है।

संक्रमण के ज्यादातर नए मामले वेस्टर्न पेस्फिक रीजन क्षेत्र से रिपोर्ट किए जा रहे यहां संक्रमण में 137 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जापान जैसे कई देशों में हाल के हफ्तों में मामलों में वृद्धि देखी गई है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में सबसे ज्यादा नए मामले कोरिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और इटली से सामने आए हैं, वहीं ब्राजील, कोरिया, रूस, पेरू और ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

पुणे स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इनफेक्शियस डिजीज के निदेशक डॉ. संजय पुजारी बताते हैं, सार्स-सीओवी-2 का एरिस यानी EG.5.1, ओमिक्रॉन वेरिएंट XBB.1.9.2 का ही एक उप प्रकार है। इसके मूल स्ट्रेन की तुलना में इसमें दो अतिरिक्त स्पाइक म्यूटेशन (Q52H, F456L) हैं। इन म्यूटेशनों के कारण वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक देखी जा रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की तुलना में इस नए वैरिएंट की इम्युनिटी स्केपिंग क्षमता अधिक हो सकती है, ऐसे में जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है उनमें भी संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट के कारण संक्रमितों में गंभीर लक्षण नहीं देखे जा रहे हैं। ज्यादातर लोग तेज बुखार, सामान्य सर्दी, शरीर दर्द और सिरदर्द की समस्या का ही अनुभव कर रहे हैं, रोगियों में गंभीर रोग या फिर अस्पताल में भर्ती होने के मामले अधिक नहीं देखे जा रहे हैं। हालांकि जिस तरह से इस वैरिएंट की प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता देखी जा रही है, इससे भविष्य में संक्रमण के मामलों के बढ़ने की आशंका अधिक हो सकती है।

 

देश के इस अस्पताल में 12 घंटे के भीतर 17 मरीजों की मौत

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महाराष्ट्र: ठाणे के कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल में चौंकाने वाला और दुखद मामला सामने आया है. इस अस्पताल में 12 घंटे में 17 मरीजों की मौत हो गई. इसमें गहन चिकित्सा इकाई में 12 और अन्य इकाइयों में चार मरीजों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं. आरोप है कि अस्पताल में सुविधाओं की घोर कमी है. अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं, जबकि मरीजों का भारी दबाव रहता है.

जानकारी के मुताबिक अस्पताल में एक ही रात में 17 लोगों की जान चली गई. अस्पताल प्रशासन ने इस खबर की पुष्टि की है. अस्पताल प्रशासन ने कहा कि कुछ मरीजों की मौत इसलिए हुई क्योंकि वे अंतिम समय में निजी अस्पतालों से आए थे और उनमें से कुछ की उम्र 80 साल से अधिक थी. वहीं, सिविल अस्पताल बंद होने के बाद से ठाणे जिले के सभी मरीज इसी अस्पताल में पहुंचे रहे हैं.मरीजों का दबाव बढ़ने से डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी हो गई है. इसी अस्पताल में 10 अगस्त को एक ही दिन में 5 लोगों की मौत हो गई थी.

उस समय विधायक जीतेंद्र अवध और अन्य दलों के नेताओं ने अस्पताल जाकर विरोध प्रदर्शन किया था. इस अस्पताल में रात 10.30 बजे से सुबह 8.30 बजे तक 17 लोगों की मौत के बाद से हड़कंप मच गया है. ठाणे जिला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गढ़ है. ठाणे नगर निगम मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नियंत्रण में है. ऐसे में नगर निगम के छत्रपति शिवाजी अस्पताल में हुई मौत ने शिवसेना (शिंदे गुट) की चिंता बढ़ा दी है.

कुछ महीने पहले कलवा अस्पताल में चल रही अव्यवस्था का निरीक्षण करने के बाद कलवा अस्पताल के डीन के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी. लेकिन पिछले कुछ दिनों से सिविल अस्पताल के शिफ्ट होने और कालवा अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से प्रशासन तनाव में है. इससे पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने ठाणे में सुपर स्पेशलिटी कैंसर अस्पताल का भूमिपूजन किया. साथ ही जिला सामान्य अस्पताल की बिल्डिंग को तोड़कर उस जगह पर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का भी निर्माण किया जा रहा है. लेकिन ऐसा करते समय सवाल उठता है कि क्या सबसे पुराने छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल की उपेक्षा की गई है.

उत्तराखंड : यहां भू-धंसाव से खतरे में पूरा गांव, डराने वाली हैं स्वीरें

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पौड़ी: मॉनसून शुरू होने से लेकर अब तक लगातार भारी बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। सड़कें बंद हैं। लगातार भूस्खलन से खतरा मंडरा रहा है। जोशीमठ भू-धंसाव की खतरनाक स्थिति को लोगों ने देखा। उन भयावह तस्वीरों को देखकर पूरा देश चिंता में था। जोशीमठ वाले आज भी दहशत में हैं। ऐसा ही एक मामला यमकेश्वर के डांडामंडल क्षेत्र के देवरराना गांव में भू-धंसाव का सामने आया है। यहां की तस्वीरें भी डराने वाली हैं.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यमकेश्वर ब्लॉक के डांडामंडल क्षेत्र के देवराना में नौ और 10 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के कारण कई मकानों में करीब दो फीट चौड़ी दरारें आ गई हैं। कई मकान टूटे गए हैं। गांव के करीब 32 परिवार खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों की सूचना पर प्रशासन ने गांव में डेरा डाल दिया है। ग्रामीणों ने गांव के विस्थापन की मांग की है।

दरारें आने के कारण गांव का मोटर मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जिसके कारण गांव का संपर्क ऋषिकेश बाजार और ब्लाक मुख्यालय यमकेश्वर से टूट गया है। गांव के ऊपरी और निचले हिस्से में जमीनें खिसक रही हैं। जिससे ग्रामीणों में दहशत हैं।

ग्रामीण रातभर खुली आंखों में रातें काटने को मजबूर हैं। यह दरारें तीन किलोमीटर के क्षेत्र में आई हैं। स्थानीय ग्रामीण भरोसा कंडवाल, राजेंद्र डोबरियाल ने अपना घर छोड़ दिया है। अमरदेव देवराणी, सुनील ग्वाड़ी, मोहन ग्वाड़ी, योगेश्वर कंडवाल, जगदीश कंडवाल, महावीर देवराणी, कुशल सिंह,बीरेंद्र सिंह आदि ग्रामीण भी प्रभावित हुए हैं।

कसाण गांव में रुपेंद्र सिंह का मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। मकान के पीछे पहाड़ी खिसक रही है। जिसके कारण आसपास भारी दरारें पड़ चुकी हैं। वर्ष 2007 में भी इसी परिवार के चार लोग बादल फटने से आए मलबे में दब गए थे। तब से इनका विस्थापन नहीं हुआ है।

पौड़ी प्रशासन गांव को विस्थापन करने के लिए कई बार पत्रावलियां बना चुका है। लेकिन उसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में है। धारकोट गांव में भी भूमि धंसने के कारण गजेंद्र असवाल का मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। जिससे अन्य ग्रामीण भी घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।

इससे सटे गांव भूमियासारी में भी सड़कों पर दरारें और जमीन खिसकने से ग्रामीणों को जानमाल के खतरे का डर सता रहा है। ग्रामीण विस्थापन की मांग कर रहे हैं।