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एक्सक्लूसिव: अमृतकाल में पलायन का दंश झेलते गांव, कब टूटेगी जिम्मदारों की नींद?

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सरकारें दावा करती हैं। घोषणाएं करती हैं। आखिरी गांव को पहला गांव कहना भी ठीक है। परिभाषा भले ही अलग से गढ़ी जा सकती है। लेकिन, जंगलों की सीमाओं पर बसे ये अंतिम गांव भी पहले गांव हो सकते हैं। इनका विकास भी किया जा सकता है। सवाल यह है कि एक छोर बसे इन गांवों का विकास क्यों नहीं हो पा रहा है? सवाल यह है कि क्या सरकार के नुमायदों को यह पता नहीं चल पाता होगा कि जिन गांव में पहले 35-40 परिवार रहते थे। वो परिवार अब कहां रह रहे होंगे। सरकार की योजनाओं को गांवों में पहुंचाने वाले अधिकारी भी यह अच्छी तरह जानते होंगे कि गांव खाली हो रहे हैं। गांव में अब कोई रहना ही नहीं चाहता। यह भी जानते ही होंगे कि गांव में स्कूल नहीं हैं। अस्पताल तो दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नही और ना ही अस्पताल और स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क है।

नहीं पहुंची सड़क 

दिल्ली से उत्तराखंड तक आजादी का जश्न मनाया गया। देश में अमृतकाल पहले से ही चल रहा है, लेकिन नौगांव विकासखंड के चार गांवों कोटला, जखाली, धौंसाली और घुंड में ना तो आजादी के जश्न का असर नजर आया और ना ही इन गांवों में अमृतकाल का अमृत पहुंच पा रहा है। सरकारें दोवे तो करती हैं कि अंतिम छोर पर बसे अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाएं पहुंचाई जाएंगी। गांवों का विकास किया जाएगा। लेकिन, जिस सड़क के जरिए गांव तक विकास को पहुंचना था। आज तक वही सड़क नहीं बन पाई। आजादी के 77 साल में भी गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई।

धीरे-धीरे खाली होते चले गए

सड़क नहीं पहुंची तो गांव धीरे-धीरे खाली होते चले गए। एक के बाद एक शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए लोग गांव छोड़ते रहे। अब आलम यह है कि करीब 30-35 परिवारों वाले प्रत्येक गांवों में अब गिनती के ही लोग बचे हैं। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने कभी सड़क की मांग नहीं की। कई बार मांग उठाई। वोट मांगने जो भी नेता आता, जीतने के बाद कभी लौटता ही नहीं। जीत पक्की करने के लिए नेता पैदल भी गांव पहुंच जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जैसे ही उनको लग्जरी गाड़ी मिलती है, वो गांव के पगदंडियों को भूल जाते हैं।

बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य वजह 

बनाल पट्टी के कोटला, जखाली, धौंसाली और घुंड गावों में अब सन्नाटा पसरा रहता है। पहले यह गांव खेती-किसानी के लिए सबसे ज्यादा समृद्ध माने जाते थे। पशुपालन भी गांव में खूब होता था। लेकिन, जैसे-जैसे दौर बदला। लोग बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सड़क के अभाव में गांव से बाहर निकलने लगे। उसका असर अब यह है कि गांव अब पूरी तरह से खाली होने के कगार पर हैं।

२०२५ में कैसे बनेगा श्रेष्ठ गांव 

अगर सरकार ने जल्द ही इन गांवों की सुद्ध नहीं ली तो पलायन रोकने के सरकार के तमाम दावों की पोल खुल जाएगी। मुख्यमंत्री धामी को 2025 में उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ट राज्य बनाने का लक्ष्य है। सवाल है कि क्या इस तरह से उत्तराखंड 2025 तक हर क्षेत्र में श्रेष्ठ बन पाएगा। जिन गांवों से स्कूल और अस्पताल कई किलोमीटर दूर हों और उन तक पहुंचने के लिए पैदल दूरी नापनी पड़े, फिर कोई पलायन क्यों ना करे?

पुरोला में पलायन 

गांवों में खेत बंजर हो चले हैं। जिस तरह से कोटी-बनाल शैली का चौकट उत्तराखंड ही नहीं दुनियाभर में अलग पहचान रखता है। उसी तरह के चौकट इन गांवों में खस्ताहाल हो चले हैं। ग्रामीण अगर बागवानी या फिर कोई अन्य नगदी फसलें उगाते भी हैं, तो उनको बाजार तक पहुंचाना ही मुश्किल है। अधिकांश लोग खेती छोड़ चुके हैं। गांव के वो चौक सूने हैं, जहां कभी बुजुर्गों का जमघट लगता था। गांव की उन गलियों में अब कोई नजर नहीं आता, जहां युवा अपने सपनों को उड़ान देने की बातें करते थे। ज्यादातर लोग पलायन कर पुरोला विकासखंड के मठ, सुनाली, उदकोटी, धिवरा, भद्राली, कुमार कोट और मोल्टाड़ी गांवों में बस गए हैं।

प्राथमिक विद्यालय में मात्र 7 बच्चे

कोटला गांव के प्राथमिक विद्यालय में मात्र 7 बच्चे पढ़ रहे हैं। सरकार की योजना 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की है। अगर ऐसा हुआ तो ये स्कूल बंद कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं कम छात्र संख्या वाले बच्चों को कलस्टर स्कूलों में जरिए दूसरे स्कूलों में समायोजित करने की तैयारी है। लेकिन, सवाल यह है कि यहां आस-पास भी कोई नजदीकी स्कूल नहीं है, जहां आसानी से पहुंचा जा सके।

गांवों की स्थिति बदहाल

बनाल पट्टी के कोटला, जखाली, धौंसाली और घुंड गावों में खूब चहल-पहल रहा करती थी। लेकिन, वर्तमान में इन गांवों की स्थिति बदहाल हो चली है। गांव लगभग खाली हो चुके हैं। आखिर सरकार अब इन गांवों की सुध लेगी। गांव के रवींद्र पंवार का कहना है कि पलायन का मुख्य कारण मूलभूत सुविधाओं की कमी है। गांव में ना तो पढ़ने की सही व्यवस्था है और ना दूर-दूर तक स्वास्थ्य की कोई सुविधा है। गांव वाले जाएं तो जाएं कहां? संभवतः उनके इस सवाल का जवाब ना तो प्रशासन के पास है और ना सरकार जवाब देने की स्थिति में होगी। उसका कारण है कि सरकार तमात दावे और घोषणाएं पहले ही कर चुकी है, जो आज तक हवा में ही तैर रही हैं। उनको धरातल कब मिलेगा कोई नहीं जानता?

 

गांव का नाम                पूर्व में परिवार     वर्तमान स्थिति
जखाली          28-30 परिवार (करीब)     2-3 परिवार
धौंसाली        30-32 परिवार (करीब)   2-3
 घुंड           15-20 परिवार (करीब)   02
कोटला          40-45  परिवार (करीब)       28-30

जड़ों से अब भी जुड़े हैं लोग
बनाल पट्टी की खास बात यह है कि यहां के लोग अपनी जड़ों को कभी पूरी तरह से नहीं छोड़ते हैं। कोटला, जखाली, धौंसाली और घुंड गावों लोगों ने गांव भले ही छोड़ दिया हो, लेकिन जिन गांवों में बसे हैं, वहां अपने सभी परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं। इतना ही नहीं प्रत्येक साल या फिर निर्धारित नियमों के अनुसार थाती पूजन और अन्य धार्मिक आयोजनों में लोग अपने इन छोड़े हुए गांव में कुछ दिनों के लिए ही सही, लौटकर जरूर आते हैं।

लौट आएंगे लोग 

गांव के वन सरपंच दर्मियान पंवार, वीरेंद्र पंवार,चंद्र मोहन चौहान, अवतार सिंह चौहान, पुर्व फौजी दर्मियान सिंह पंवार, त्रिलोक पंवार,गोविंद पंवार,उपेंद्र पंवार, सूर्यपाल, किशन राणा, विकास पंवार,गंभीर पंवार, सचिन, भूपेंद्र सिंह आदि का कहना है कि यदि इन गांवों तक सड़क पहुंच जाती है तो एक बार फिर से ये गांव खुशाल होने लगेंगे और गांव में फिर से रौनक लौट आएगी।

एशियन गेम्स से पहले भारत के लिए बुरी खबर, स्प्रिंटर दुती चंद पर 4 साल का बैन

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बेहतरीन स्प्रिंटर दुती चंद पर चार साल का बैन लगा है. दुती डोप टेस्ट में फेल हो गईं और इसी कारण उन पर बैन लगया है. रिपोर्ट के मुताबिक उनका बैन तीन जनवरी 2023 से शुरू होगा. उनका सैंपलस पांच दिसंबर 2022 को लिया गया था और तब से उन्होंने जितने भी टूर्नामेंट्स में हिस्सा लिया उनके रिजल्ट मान्य नहीं होंगे. दुती चंद ने दो डोप टेस्ट में फेल हुईं हैं.

दुती ने भारत को अपने खेल से कई पदक दिलाए हैं. उन्होंने जकार्ता में 2018 में खेले गए एशियन गेम्स में दो सिल्वर मेडर जीते थे. उन्होंने ये मेडल 100 और 200 मीटर में जीते थे. उनके नाम 100 मीटर में नेशनल रिकॉर्ड है जो उन्होंने जून 2021 में इंडियन ग्रां प्री में बनाया था.इसी साल सितंबर में एशियाई खेलों का आयोजन किया जाना है और इससे पहले भारत के लिए ये खबर अच्छी नहीं है.

TIO रिपोर्ट में एंडी डोपिंग डिसिपिनलरी पैनल के हवाले से बताया है कि दुती इस बात को साबित नहीं कर पाईं कि उन्होंने जो नियमों का उल्लंघन किया वो जानबूझ कर नहीं किया था बल्कि गलती से हो गया था. दुती ने नेशनल डोपिंग एजेंसी नाडा के आर्टिकल 2.1 और 2.2 का उल्लंघन किया है. दुती का दिसंबर में 2022 में नाडा में दो बार टेस्ट हुआ था. उनके पहले सैंपल में प्रतिबंधित पदार्थ एनाबोलिक स्ट्रॉयड्स पाया गया. वहीं दूसरे सैंपल में एंडारिने और ओस्टारिने पाए गए थे. एडीडीपी के मुताबिक, दुती जो पदार्थ लिए उन्हें ड्रग्स कंटेंट को वाडा की प्रतिबंधित पदार्थ की लिस्ट से चैक नहीं किए थे.

दुती के पास हालांकि इस बैन के खिलाफ अपील करने के लिए 21 दिन का समय है. उन्होंने तय किया है कि वह इस बैन के खिलाफ अपील करेंगी. समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में दुती के वकील पार्थ गोस्वामी के हवाले से बताया है कि दुती इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी. वह पैनल के इस फैसले के खिलाफ रिव्यू की अपील कर सकती हैं. जनवरी से दुती ने हालांकि किसी भी कॉम्पटिशन में हिस्सा नहीं लिया है क्योंकि नाडा ने उन्हें पहले से ही अस्थायी तौर पर बैन कर रखा था.

दिल्ली-पुणे विस्तारा फ्लाइट में बम की धमकी, यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया

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नई दिल्ली : एयरपोर्ट पर दिल्ली-पुणे विस्तारा फ्लाइट में बम की धमकी मिली है। एयरपोर्ट पर आइसोलेशन बे में विमान का निरीक्षण चल रहा है। सभी यात्रियों को उनके सामान सहित सुरक्षित उतार लिया गया है। जीएमआर कॉल सेंटर को आज फ्लाइट में बम होने की कॉल मिली है।

इससे पहले दिल्ली से जर्मनी के फ्रैंकफर्ट जा रही एयरलाइंस में गर्म पेय पदार्थ गिरने से बच्ची झुलस गई थी। जिसके बाद विस्तारा एयरलाइंस ने बयान जारी बताया था कि यह घटना 11 अगस्त को फ्लाइट यूके 25 में हुई थी। विस्तारा कंपनी ने कहा कि दिल्ली-फ्रैंकफर्ट फ्लाइट में एक दस साल की बच्ची पर गर्म पेय पदार्थ गिर गया था, जिसकी वजह से वह घायल हो गई थी। कंपनी ने फैसला लिया है कि बच्ची के इलाज का पूरा खर्च विस्तारा उठाएगी।

जानकारी के मुताबिक, करीब 10 साल की बच्ची अपने माता-पिता के साथ यात्रा कर रही थी। कंपनी ने बताया कि हमारे केबिन क्रू ने बच्ची के माता-पिता के अनुरोध पर उसे चॉकलेट दी थी। बच्ची चंचल थी, इसलिए गर्म पानी उस पर गिर गया। जिसके बाद हमारे क्रू ने तुरंत प्राथमिक इलाज किया। इसके बाद लैंडिंग पर तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था करके बच्ची को माता पिता के साथ अस्पताल भेजा गया।

बिहार के अररिया में पत्रकार को बदमाशों ने घर में घुसकर मारी गोली

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अररिया में गुरुवार की रात दैनिक जागरण के पत्रकार विमल कुमार की हत्या कर दी गई। विमल दैनिक जागरण में अररिया के रानीगंज प्रखंड में संवाद सूत्र थे। जानकारी के अनुसार, अपराधी ने घर में घुसकर पत्रकार विमल को गोली मारी है।

चार साल पहले पत्रकार विमल के छोटे भाई शशिभूषण यादव उर्फ गब्बू यादव की भी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अभी ट्रायल चल रहा है, जिसकी सुनवाई 19 अगस्त को होगी।

रानीगंज के प्रेम नगर स्थित घर में दैनिक जागरण के पत्रकार विमल कुमार की शुक्रवार सुबह हत्या कर दी गई। हत्या के बाद से उनके घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका 15 साल का बेटा और 13 साल की बेटी है।

बताया जा रहा है कि विमल कुमार के भाई की भी तीन साल पहले 2019 में हत्या हुई थी। इस केस में वे एकमात्र गवाह थे। फिलहाल उनकी हत्या को इसी एंगल से देखा जा रहा है। पुलिस ने उनकी हत्या की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अररिया सदर अस्पताल ले जाया गया।

 

उत्तराखंड : CAU के काले कारनामों पर हाईकोर्ट सख्त, जवाब तलब…बच नहीं पाएंगे

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नैनीताल: क्रिकेट ऐसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) का गठन इसलिए किया गया था कि राज्य के होनहार खिलाड़ी क्रिकेट की दुनिया में आगे बढ़ेंगे। लेकिन, CAU ने क्रिकेटरों की बेहतरी को छोड़कर बाकी सबकुछ किया। यहां एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी जेबें भरी। जिसको भी मौका मिला, उसने खूब काला कारनामा किया।

केवल खिलाड़ियों का हक ही नहीं मारा। बल्कि, बेटियों की आबरू लूटने का काला कारनाम भी अंजाम दिया गया। वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सीएयू से हाईकोई ने सख्ती दिखाई है। एसोसिएशन से चार सप्ताह में जवाब देने कहा गया है।

इस मामले में अगली सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी। सुनवाई के दौरान खेल सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। उनकी ओर से कहा गया कि इससे उनका कोई मतलब नहीं है क्योंकि एसोसिएशन अपने आप मे एक स्वतंत्र बॉडी है।

मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2019 के बाद किक्रेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) में हुए चुनावों के बाद खिलाड़ियों के चयन के लिए उनसे रणजी व अन्य जगहों पर खेलने के लिए लाखों रुपये लिए जा रहा हैं।

खिलाड़ियों के खाने पीने से लेकर पानी के बिलों में लाखों रुपये की हेराफेरी की गई। जैसे केलों का बिल 32 लाख, पानी का बिल 22 लाख। खिलाड़ियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है जिसकी वजह से खिलाड़ी अन्य राज्यों की ओर से खेलने को मजबूर हो रहा रहे हैं। बोर्ड के पदाधिकारियों के खिलाफ अनियमितता व यौन शोषण के कई जगहों पर मुकदमे दर्ज हैं।

घोटाले में लिप्त पदाधिकारियों ने ट्रेजरर से फर्जी बिल बनाने के लिए दबाव बनाया है। उसके मना करने पर उसे पद से ही हटा दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि मामले की जांच हाईकोर्ट के तीन रिटायर्ड जजों की निगरानी में कराई जाए और घोटाले में लिप्त पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने में प्रतिबंध लगाने के साथ ही उनके खिलाफ कड़ी कार्र्वाई की जाए। बोर्ड को भंग कर इनकी जगह प्रशासक नियुक्त किए जाएं।

कुत्ता घुमाने से रोका तो तो गार्ड ने 10 को मारी गोली, जीजा-साले की मौत

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मध्य प्रदेश : राज्य के  इंदौर में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक गार्ड ने दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक रिश्ते में जीजा-साले हैं. उनके नाम राहुल और विमल हैं. वहीं, आरोपी गार्ड का नाम राजपाल है. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर तत्काल पुलिस पहुंची और आरोपी गार्ड को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

जानकारी के मुताबिक, आरोपी राजपाल ने अपने कुत्ते को टहलने के लिए गली में छोड़ा था. इसी दौरान मोहल्ले में रहने वाले ललित का कुत्ता भी घर से बाहर आ गया. इसके बाद दोनों कुत्ते एक-दूसरे पर भौंकने लगे. तभी विमल घर के बाहर आ गया और उसने पत्थर उठाकर राजपाल के कुत्ते को मार दिया. इसी बात पर राजपाल भड़क गया और अपनी लाइसेंसी बंदूक से हवाई फायर करने लगा.
इस हरकत पर विमल और राहुल ने अपनी आपत्ति जताई. जिसके बाद राजपाल ने दोनों पर गोली चला दी. वहीं, फायरिंग की घटना में वहां मौजूद अन्य लोग भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए. इंदौर के एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी गार्ड को हिरासत में ले लिया गया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. कुत्तों के विवाद में मृतक विमल और राहुल की आरोपी गार्ड से कुछ कहासुनी हुई थी.इसके बाद गार्ड ने छत पर जाकर गोलियां चला दीं. पुलिस ने आरोपी के पास से उसकी बंदूक को बरामद कर लिया है. आरोपी और मृतक के घर आसपास ही हैं.

पुलिस ने बताया कि हादसे में कुल आठ लोग जख्मी हुए हैं, जिनमें से 6 लोगों को पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों की एक टीम उनके इलाज में जुटी है. वहीं, पुलिस ने आसपास के लोगों से भी घटना के बारे में जानकारी ली है. मृतकों के घरवालों से भी पूछताछ की गई है. वहीं, इस घटना के बाद मोहल्ले में सन्नाटा पसरा है. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

MP के 39 और छत्तीसगढ़ के 21 उम्मीदवारों के नाम तय, BJP ने किया ऐलान

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BJP ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मध्य प्रदेश के 39 और छत्तीसगढ़ के 21 उम्मीदवारों का एलान कर दिया है। दोनों राज्यों में इस साल ही चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनाव के एलान से पहले ही पहली सूची की घोषणा कर भाजपा ने अपनी आक्रामक रणनीति साफ कर दी है। इससे पहले भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक नई दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में आयोजित हुई थी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बैठक के दौरान विचार-विमर्श में भाग लिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत भाजपा के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। इस दौरान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की चुनाव तैयारियों का जायजा लिया गया था। सीईसी सदस्यों ने आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की तैयारियों की समीक्षा भी की थी।

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555 64ddfcca3a968सीईसी में छत्तीसगढ़ पर चर्चा हुई थी। इस दौरान राज्य की 90 विधानसभा सीटों पर सिलसिलेवार से चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ को लेकर करीब दो घंटे बातचीत हुई। इसके बाद मध्यप्रदेश पर भी चर्चा की गई। पार्टी आला कमान मुख्य रूप से कमजोर सीटों पर केंद्रित थी।

आने वाले महीनों में देश के पांच राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव होने हैं। भाजपा केवल मध्य प्रदेश में सत्ता में है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है, जबकि तेलंगाना में बीआरएस सत्ता में है।

चंद्रयान-3 का लैंडर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल अलग हुए, सबको 23 अगस्त का इंतजार

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चंद्रयान-3 मिशन के लिए अच्छी खबर है। चंद्रयान-3 के लैंडर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल योजना के मुताबिक, दो टुकड़ों में टूटकर अलग-अलग चांद की यात्रा कर रहे हैं। इसीके साथ चंद्रयान-3 का लैंडर अब चांद के और करीब पहुंच गया है। यह 23 अगस्त को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। इसको लेकर  इसरो ने तैयारियां भी की हुई हैं और वैज्ञानिक नजर बनाए हुए हैं।

मिशन के अगले पड़ाव में अब लैंडर मॉड्यूल शुक्रवार को चांद की निचली कक्षा में पहुंचाया जाएगा। इसरो ने लैंडर मॉड्यूल की तरफ से एक्स पर एक पोस्ट में चंद्रयान-3 की यात्रा को लेकर ट्वीट भी किया। इसमें लैंडर की तरफ से प्रॉपल्शन के लिए कहा गया- “साथ में यात्रा के लिए शुक्रिया मित्र।” इसमें आगे कहा गया, “लैंडर मॉड्यूल सफलतापूर्वक प्रॉपल्शन मॉड्यूल से अलग हो गया। अब शुक्रवार शाम चार बजे इसे चांद की कक्षा में और नीचे उतारा जाएगा।

चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर, रोवर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल शामिल हैं। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे और 14 दिनों तक प्रयोग करेंगे। वहीं प्रॉपल्शन मॉड्लूय चांद की कक्षा में ही रहकर चांद की सतह से आने वाले रेडिएशंस का अध्ययन करेगा। इस मिशन के जरिए इसरो चांद की सतह पर पानी का पता लगाएगा और यह भी जानेगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं।

रामझूला पुल पर्यटकों के लिए बंद, मंडराया ख़तरा

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ऋषिकेश: भारी बारिश का कहर लगातार जारी है। पहाड़ से मैदान तक लगातार खतरा मंडरा रहा है। भूस्खल से कई घर तबाह हो चुके हैं। पुलों और सड़कों का बुरा हाल है। अब सबसे पुराने और ऐतिहासिक पुलों में से एक रामझूला पुल भी खतरा मंडराने लगा है। रामझूला पुल पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। पुल की नींव के पास दरार आ गई है।

पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंगा उफान पर है। माना जा रहा है कि कटाव होने के कारण ही दरार आई है। सुरक्षा के दृष्टिगत एसडीएम के निर्देश पर राम झूला पुल पर पर्यटकों के आवाजाही रोक दी गई है। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर पर्यटकों को राम झूला पुल पर जाने से रोकना शुरू कर दिया है।

वहीं, दूसरी आर मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटे के लिए सात जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक राज्य के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की आशंका है। अन्य जनपदों में हल्की बारिश हो सकती है।

देश के 100 शहरों में दौड़ेंगी 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसें, प्रोजेक्ट को मोदी कैबिनेट की मंजूरी

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देश में परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 100 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का फैसला लिया है. मोदी कैबिनेट ने इसके लिए 57 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इसके तहत देशभर में 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी

अनुराग ठाकुर ने कहा, PM मोदी के नेतृत्व में आज (बुधवार) केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई. मीटिंग में पीएम ई-बस सेवा को मंजूरी दे दी गई है. इस पर 57,613 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. देशभर में लगभग 10,000 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएंगी. अनुराग ठाकुर ने कहा, 57,613 करोड़ में से 20,000 करोड़ केंद्र सरकार देगी. इस योजना में 3 लाख और उससे ज्यादा की जनसंख्या वाले शहरों को कवर किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसों PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत चलाई जाएंगी.

पुरानी बसों के स्क्रैप के लिए अतिरिक्त बसें उन शहरों को दी जाएंगी. ये योजना दस साल तक चलेगी. इस स्कीम से शहरों में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा. अनुराग ठाकुर के मुताबिक, योजना में उन शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां व्यवस्थित परिवहन सेवा की कमी है. अनुराग ठाकुर ने बताया कि देश में 3 लाख से 40 लाख की आबादी वाले 169 शहर हैं और इस कार्यक्रम के लिए इनमें से चैलेंज मोड के आधार पर 100 शहरों का चयन किया जाएगा. ई-बसें सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के तहत इन चुने गए शहरों में परिचालित की जाएंगी.

इसके अलावा सरकार ने रेलवे की 7 मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दे दी. इस पर करीब 32,500 करोड़ रूपये का खर्च आएगा. रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में 2339 किलोमीटर जोड़ा जा सकेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, पीएम मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

देश के 9 राज्यों के 35 शहरों से जुड़ी इस परियोजना से रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में 2339 किलोमीटर जोड़ा जा सकेगा. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.