Home Blog Page 32

आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से मिले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

0

आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से मिले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

• आध्यात्मिक जागरूकता के विषय पर बातचीत

ऋषिकेश: 18 मार्च।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ऋषिकेश में श्री श्री रविशंकर जी से शिष्टाचार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान दोनों के बीच सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित श्री श्री रविशंकर जी द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था विश्वभर में शांति, योग और मानवीय मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनके मार्गदर्शन से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है, जो उत्तराखंड जैसे आध्यात्मिक प्रदेश के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।

श्री श्री रविशंकर जी ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए राज्य की उन्नति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं और इसे और सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री ने संत-महात्माओं के मार्गदर्शन को राज्य के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण बताया।

चारधाम यात्रा : दुकानों के आवंटन को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश, उठाया ये कदम

0

रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड–केदारनाथ पैदल मार्ग पर कच्ची दुकानों के आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। निविदा प्रक्रिया को निरस्त न किए जाने से नाराज व्यापारियों ने तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलन में केदारनाथ यात्रा से जुड़े बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हो गए हैं, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों की लगातार अनदेखी कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि वर्ष 2024 में गुप्तकाशी में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पांच वर्षों तक दुकानों के संचालन को यथावत बनाए रखने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद हाल ही में जिला प्रशासन ने कच्ची दुकानों के आवंटन के लिए लॉटरी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया, जिसे व्यापारी अपने अधिकारों के खिलाफ बता रहे हैं।

आंदोलनरत व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक निविदा प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। उनका कहना है कि कच्ची दुकानें उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार हैं और इससे वंचित होने पर उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

इस आंदोलन को क्षेत्र पंचायत प्रमुख पंकज शुक्ला और व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट का भी समर्थन मिला है। दोनों नेताओं ने अनशन स्थल पर पहुंचकर व्यापारियों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

व्यापारियों ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर न्यायपूर्ण निर्णय लेने की मांग की है। आमरण अनशन के पहले दिन संदीप पुष्वाण, वीरेन्द्र सिंह कोटवाल, जसवंत सिंह बिष्ट, यशपाल सिंह पंवार, जसपाल सिंह पंवार, चंद्र मोहन सिंह चौहान और प्रेम सिंह रावत अनशन पर बैठे। इस दौरान सुनील भट्ट, विजेंद्र राणा, सुषमा, यशवीर सिंह रावत, महेंद्र सिंह रावत और महिपाल सिंह पुष्वाण सहित कई व्यापारी मौके पर मौजूद रहे।

अमेरिका–ईरान तनाव : गैस संकट से रेस्टोरेंट संचालक परेशान, डीजल भट्ठियां बनीं नया विकल्प

0

राजधानी में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कमी का असर अब साफ तौर पर बाजारों में दिखने लगा है। एलपीजी की सीमित आपूर्ति के चलते कई मिठाई दुकानों की भट्ठियां ठंडी पड़ गई थीं, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि, हलवाइयों ने इस संकट का समाधान खोजते हुए डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, राजधानी में करीब 19 हजार से अधिक व्यावसायिक गैस उपभोक्ता हैं। मौजूदा संकट के बीच सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक सिलिंडरों की सप्लाई सीमित कर दी है। शुरुआत में दुकानदारों ने पुराने स्टॉक के सहारे काम चलाया, लेकिन जैसे ही भंडार खत्म हुआ, उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ी।

एक प्रमुख मिठाई ब्रांड ने सबसे पहले राजस्थान से डीजल भट्ठियां मंगाकर प्रयोग शुरू किया। इसके सफल रहने के बाद अब तक शहर की विभिन्न दुकानों में 24 से अधिक डीजल भट्ठियां स्थापित की जा चुकी हैं और उनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

दुकानदारों का कहना है कि डीजल भट्ठियां गैस सिलिंडर की तुलना में अधिक किफायती साबित हो रही हैं। जहां एक डीजल भट्ठी को 10–11 घंटे चलाने में लगभग 20 लीटर डीजल खर्च होता है, वहीं इसी अवधि में दो से अधिक गैस सिलिंडरों की आवश्यकता पड़ती है।

परंपरागत रूप से हलवाई कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का भी उपयोग करते रहे हैं, लेकिन इनमें आग को नियंत्रित करना कठिन होता है। एक बार गर्म होने के बाद इन्हें तुरंत बंद नहीं किया जा सकता, जबकि डीजल और गैस भट्ठियां जरूरत के अनुसार आसानी से संचालित की जा सकती हैं।

मिठाई कारोबारी के अनुसार, डीजल भट्ठियां न केवल किफायती हैं, बल्कि अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम प्रदूषणकारी भी हैं। वर्तमान गैस संकट के बीच यह विकल्प कारोबारियों के लिए राहत का माध्यम बनता नजर आ रहा है।

डीजल भट्ठी कैसे काम करती है?

डीजल भट्ठी (Diesel Bhatti) मिठाई दुकानों, बेकरी और बड़े किचन में गैस के विकल्प के रूप में तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसके रेट और काम करने का तरीका इस प्रकार है:

  • डीजल भट्ठी एक तरह की बर्नर-आधारित हीटिंग सिस्टम होती है।
  • इसमें एक डीजल टैंक होता है, जिसमें ईंधन भरा जाता है।

  • एक बर्नर (Burner) डीजल को स्प्रे करके जलाता है।

  • एयर ब्लोअर (पंखा) हवा देता है जिससे जलना तेज और नियंत्रित होता है।

  • इससे उत्पन्न हीट सीधे कढ़ाई या भट्ठी के अंदर पहुंचती है।

  • तापमान को नॉब/कंट्रोल से कम-ज्यादा किया जा सकता है।

  • आसान भाषा में: यह गैस चूल्हे की तरह ही है, बस गैस की जगह डीजल जलता है और कंट्रोल थोड़ा ज्यादा एडवांस होता है।

डीजल भट्ठी के रेट (कीमत)

  • छोटी भट्ठी (मिठाई दुकान/हलवाई): 25,000 – 50,000।
  • मीडियम कमर्शियल भट्ठी: 50,000 – 1,20,000।

  • बड़ी इंडस्ट्रियल भट्ठी: 1.2 लाख – 3 लाख+।

  • राजस्थान और गुजरात से बनने वाली भट्ठियां बाजार में ज्यादा चल रही हैं।

खर्च कितना आता है?

  • 10–11 घंटे चलाने में: लगभग 15–20 लीटर डीजल।

  • डीजल की कीमत के हिसाब से: 1,500 – 2,000 प्रति दिन (लगभग)।

गैस vs डीजल भट्ठी

फायदे:

  • गैस सिलिंडर पर निर्भरता नहीं।

  • लंबे समय में सस्ती पड़ सकती है।

  • तापमान कंट्रोल आसान।

  • लगातार काम के लिए बेहतर।

नुकसान:

  • शुरुआत में मशीन खरीदने का खर्च।

  • डीजल की गंध/धुआं थोड़ा हो सकता है।

  • मेंटेनेंस (सफाई, बर्नर) जरूरी।

किनके लिए बेहतर?

  • हलवाई, मिठाई की दुकान।

  • बड़े ढाबे/रेस्टोरेंट।

  • कैटरिंग बिज़नेस।

मुंबई में गोवंश आधारित प्रतियोगिता का समापन, झुनझुनवाला कॉलेज की मौसम यादव को मिला 21 हज़ार रुपये का प्रथम पुरस्कार

0

मुंबई। युवा पीढ़ी को देशी गोवंश की उपयोगिता, वैज्ञानिक महत्व, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित गोवंश आधारित प्रतियोगिताओं का पुरस्कार वितरण समारोह विले पार्ले स्थित संन्यास आश्रम में संपन्न हुआ।

IMG 20260318 WA0015

इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्द्धन परिषद एवं उमा कल्याण ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई और आसपास के 18 शिक्षण संस्थानों में चित्रकला, निबंध, भाषण और काव्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं।

IMG 20260318 WA0006

इस अनूठी पहल में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजन को मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग सहित पब्लिक हाई स्कूल, गुरु नानक खालसा कॉलेज और रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। समारोह में रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज की छात्रा मौसम यादव को 21 हजार रुपये का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।

भवंस कॉलेज के पवनजीत गुप्ता को द्वितीय (11 हजार रुपये) तथा राम नारायण रुइया कॉलेज की तनु सिंह को तृतीय पुरस्कार (5100 रुपये) मिला। इसके अलावा महिमा मिश्रा, ऐश्वर्या शुक्ला और काजल कनौजिया को 1100-1100 रुपये के प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए। विजेताओं को प्रमाण पत्र और मेडल भी प्रदान किए गए।

 

IMG 20260318 WA0009

कार्यक्रम में उमा कल्याण ट्रस्ट की ट्रस्टी मीना अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन वरिष्ठ लेखक वीरेंद्र याज्ञिक ने किया। मुख्य अतिथि श्रीनारायण अग्रवाल ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए गौ सेवा से जुड़ने का आह्वान किया।

 

उन्होंने बताया कि मथुरा-वृंदावन स्थित श्री देवरहा बाबा गोशाला में 10 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। गौसेवी महेंद्र संगोई ने कच्छ (गुजरात) स्थित अहिंसा धाम में संचालित गौ संरक्षण कार्यों की जानकारी दी और विद्यार्थियों को वहां आने का निमंत्रण दिया।

IMG 20260318 WA0003

सुनील मानसिंहका ने पंचगव्य चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने वैदिक परंपरा में गौ माता के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, प्राध्यापक, समाजसेवी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में परिषद और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बीएलओ मैपिंग में सुस्ती पर सख्ती, तीन जिलों के ईआरओ को नोटिस

0

देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले प्रदेश में चल रही बीएलओ मैपिंग की धीमी प्रगति पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों में खराब प्रगति पर नाराजगी जताते हुए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

मंगलवार को आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अप्रैल में प्रस्तावित एसआईआर से पहले सभी जिलों में विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया जाए, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीति शामिल हो।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में अब तक 87 प्रतिशत मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन देहरादून और ऊधमसिंह नगर में यह आंकड़ा केवल 77 प्रतिशत तथा नैनीताल में 88 प्रतिशत है, जो अपेक्षा से कम है।

उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती कर मैपिंग कार्य में तेजी लाई जाए। साथ ही, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) का प्रशिक्षण लगातार जारी रखने के भी निर्देश दिए गए।

डॉ. पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि एसआईआर से पूर्व प्रत्येक बूथ पर शत-प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के साथ बैठक की जाए। इसके अलावा, गणना प्रपत्रों के समयबद्ध वितरण के लिए ठोस योजना बनाने को कहा गया है।

बड़ी कार्रवाई: ऊर्जा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई शीर्ष अधिकारी पदमुक्त, इनको दी गई जिम्मेदारी

0

देहरादून। उत्तराखण्ड शासन के ऊर्जा विभाग में बुधवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। शासन द्वारा जारी विभिन्न कार्यालय ज्ञापों के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करते हुए नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

ऊर्जा अनुभाग-2 के आदेश के अनुसार, उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) के महाप्रबंधक श्री गजेन्द्र सिंह बुदियाल को पूर्व में पिटकुल में निदेशक (परिचालन) का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। अब शासन ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए उन्हें उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार नियमित नियुक्ति होने तक सौंप दिया है। स्पष्ट किया गया है कि इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त वेतन या भत्ते देय नहीं होंगे।

वहीं, यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक श्री संदीप सिंघल को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है। गौरतलब है कि उन्हें वर्ष 2020 में तीन वर्ष के लिए नियुक्त किया गया था, जिसे बाद में मार्च 2024 में दो वर्ष का सेवा विस्तार भी दिया गया था।

इसी क्रम में, यूपीसीएल के निदेशक (परियोजना) श्री अजय कुमार अग्रवाल को भी उनके पद से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। उन्हें वर्ष 2021 में इस पद पर नियुक्त किया गया था और बाद में अग्रिम आदेशों तक तैनाती दी गई थी।

इसके अलावा, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक श्री अनिल कुमार को भी पद से हटाने का निर्णय लिया गया है। उन्हें पहले तीन वर्ष के लिए नियुक्त किया गया था और बाद में अक्टूबर 2024 में दो वर्ष का सेवा विस्तार प्रदान किया गया था।

बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामला: प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की तैयारी, PM आवास योजना के तहत लगेंगे कैंप

0

हल्द्वानी: नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विशेष कैंप लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

प्रशासन के अनुसार बनभूलपुरा क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे रेलवे भूमि अतिक्रमण विवाद के बीच अब प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित योजना के तहत लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर 4300 से अधिक प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने की तैयारी की जा रही है।

इस संबंध में जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संयुक्त रूप से क्षेत्र में कैंप आयोजित करेंगे। सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेई के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मचारियों को योजना से संबंधित फॉर्म वितरण और उन्हें भरवाने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि कार्य व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जा सके।

प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि बनभूलपुरा क्षेत्र में अगले तीन दिनों तक घर-घर जाकर पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के फॉर्म वितरित किए जाएंगे। इसके बाद 21 मार्च से रेलवे अतिक्रमण क्षेत्र में चिन्हित छह स्थानों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां प्रभावित परिवारों के फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सभी प्राप्त आवेदनों को एकत्रित कर उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे आगे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संपन्न हो।

बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से लगभग 50 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित हो रही है। ऐसे में जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है कि सभी प्रभावित परिवारों को समय पर राहत और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

चार धामों में मोबाइल और रील पर लगेगी रोक, बीकेटीसी ने तेज की यात्रा तैयारियां

0

देहरादून,। आगामी चारधाम यात्रा को लेकर Badrinath Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। समिति ने धामों की मर्यादा बनाए रखने के लिए मंदिर परिसरों के आसपास निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने और रील, फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

बीकेटीसी अध्यक्ष Hemant Dwivedi ने देहरादून के केनाल रोड स्थित कार्यालय के निकट आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि चारधाम यात्रा का शुभारंभ अप्रैल में होगा। Kedarnath Temple के कपाट 22 अप्रैल को, Badrinath Temple के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे, जबकि Gangotri Temple और Yamunotri Temple के कपाट Akshaya Tritiya (19 अप्रैल) को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण तेजी से बढ़ रहा है और अब तक 6 लाख से अधिक श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। 6 मार्च से 16 मार्च के बीच दो सप्ताह में कुल 6,17,853 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें केदारनाथ धाम के लिए 2,06,622, बदरीनाथ धाम के लिए 1,82,212, गंगोत्री धाम के लिए 1,15,763 और यमुनोत्री धाम के लिए 1,13,256 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है।

द्विवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देशन में धामों में पुनर्निर्माण और विकास कार्य जारी हैं। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बदरीनाथ धाम में कार्य प्रगति पर है।

उन्होंने बताया कि यात्रा वर्ष 2026-27 को ध्यान में रखते हुए बीकेटीसी की बजट बैठक में 121 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित बजट पारित किया गया है। इसमें बदरीनाथ धाम के लिए करीब 57.47 करोड़ रुपये और केदारनाथ धाम के लिए लगभग 63.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बैठक में धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी ध्वनिमत से पारित कर राज्य सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा ‘तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष’ की स्थापना का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

बीकेटीसी ने बताया कि यात्रा से पहले मंदिर परिसर, दर्शन पंक्तियों की रेलिंग, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और विश्राम गृहों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में मंदिर समिति का शिविर कार्यालय भी खोला जाएगा।

इस अवसर पर बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान और मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

हेमवती नंदन बहुगुणा को भारत रत्न देने की मांग, 37वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि

0

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Hemvati Nandan Bahuguna की 37वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष Suryakant Dhasmana ने बहुगुणा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bharat Ratna देने की मांग उठाई।

देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में धस्माना ने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा दूरदर्शी, सिद्धांतवादी और धर्मनिरपेक्ष नेता थे। उन्होंने देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बहुगुणा ने भारत को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार की थीं।

धस्माना ने बताया कि वर्ष 1978 में जब विशेषज्ञों ने देश में पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस की कमी की आशंका जताई थी और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना थी, तब बहुगुणा ने लीबिया के तत्कालीन शासक Muammar Gaddafi से मुलाकात कर भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। इस पहल के तहत भारत और लीबिया के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद लीबिया ने भारत को दो लाख मैट्रिक टन कच्चा तेल देने पर सहमति जताई थी।

उन्होंने कहा कि बहुगुणा ने देशभर में रसोई गैस को आम जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर गैस एजेंसियों का आवंटन किया। साथ ही पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के आश्रितों को भी प्राथमिकता के आधार पर गैस एजेंसियां प्रदान की गईं।

धस्माना ने कहा कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ऊर्जा संकट की स्थिति बन रही है, ऐसे में बहुगुणा की दूरदृष्टि और नीतियों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के बाद करीब साढ़े चार दशकों तक बहुगुणा उत्तर प्रदेश से लेकर केंद्र की राजनीति के प्रमुख केंद्र में रहे और अपने प्रशासनिक, राजनीतिक तथा सामाजिक कौशल से देश को दिशा दी। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, श्रम प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दिनेश कौशल, सरदार अमरजीत सिंह, अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष अमीचंद सोनकर, पूनम कंडारी, सुनील जायसवाल, आनंद सिंह पुंडीर, गगन छाछर, आदर्श सूद, सुशीला शर्मा, वीरेश शर्मा, यामीन खान, शरीफ बेग, चंद्रपाल, विवेक घिल्डियाल, नोहर सिंह, मनीष गर्ग, वीरेंद्र पंवार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

उत्तराखंड में गैस सिलेंडरों की किल्लत, एजेंसियों को नहीं मिल रही पर्याप्त सप्लाई

0

देहरादून: वैश्विक एलपीजी संकट का असर अब उत्तराखंड में भी साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत की शिकायतें सामने आ रही हैं। राजधानी देहरादून से लेकर उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ तक कई गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

हालांकि सरकार की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।

देहरादून में स्थिति काफी गंभीर बताई जा रही है। शहर की कई गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है। कई उपभोक्ता एजेंसियों पर जमाखोरी का आरोप लगा रहे हैं, जबकि एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें ही पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

एजेंसी संचालकों के अनुसार सामान्य दिनों में एक गैस एजेंसी को प्रतिदिन करीब 350 गैस सिलेंडर की आपूर्ति होती थी। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में पिछले आठ दिनों के दौरान केवल 190 सिलेंडर ही मिल पाए हैं। ऐसे में बढ़ती मांग के मुकाबले आपूर्ति बेहद कम पड़ रही है।

देहरादून की जाखन स्थित एक गैस एजेंसी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। एजेंसी को पहले रोजाना लगभग 350 सिलेंडर मिलते थे, लेकिन पिछले एक सप्ताह से अधिक समय में उन्हें महज 190 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए गए हैं। इसके चलते एजेंसी पर हर दिन उपभोक्ताओं की भीड़ लगी रहती है और लोगों में यह चिंता बढ़ती जा रही है कि उन्हें समय पर गैस मिल पाएगी या नहीं।

इस पूरे मामले में जब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के सेल्स अधिकारी बृजमोहन सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। कई बार कॉल करने के बावजूद उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे विभागीय अधिकारियों की उदासीनता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

उपभोक्ताओं और एजेंसी संचालकों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं की गई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में लोगों ने सरकार और संबंधित कंपनियों से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।