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चीन में मिला नया बैट वायरस HKU5-CoV-2, वैज्ञानिकों ने कहा-सतर्क रहें

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस (Covid-19) की शुरुआत चीन से हुई थी, जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। अब चीन के वैज्ञानिकों ने एक और बैट वायरस की खोज की है, जिसका नाम HKU5-CoV-2 रखा गया है। यह नया वायरस कोविड-19 के समान बताया जा रहा है और इससे भविष्य में संभावित खतरे की आशंका जताई गई है।

वुहान की लैब में हुई खोज

इस वायरस की खोज वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों ने की है, जिसका नेतृत्व प्रसिद्ध चीनी वायरोलॉजिस्ट शी झेंगली कर रही हैं। कोरोना वायरस पर अपने शोध के कारण शी झेंगली को ‘बैटवुमन’ के नाम से भी जाना जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि HKU5-CoV-2 वायरस इंसानों के ACE2 रिसेप्टर्स से जुड़ सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कोविड-19 (SARS-CoV-2) जुड़ता था। इसका मतलब है कि यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैल सकता है।

फिलहाल कोई इंसानी संक्रमण नहीं, लेकिन खतरा बरकरार

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अब तक इस वायरस से कोई इंसान संक्रमित नहीं हुआ है, लेकिन इसका स्वरूप और कार्यप्रणाली कोविड-19 और MERS वायरस से मिलती-जुलती है। अभी इसकी संक्रमण क्षमता SARS-CoV-2 से कम बताई जा रही है, लेकिन आगे जाकर म्यूटेशन (आनुवंशिक बदलाव) होने पर यह अधिक खतरनाक रूप ले सकता है। इसलिए इस पर निरंतर शोध किया जा रहा है ताकि समय रहते किसी भी संभावित महामारी को रोका जा सके।

HKU5-CoV-2 वायरस के संभावित लक्षण

अगर यह वायरस इंसानों में फैलता है, तो इसके लक्षण कोविड-19 और MERS की तरह हो सकते हैं। संभावित लक्षणों में शामिल हैं:
बुखार और खांसी
सांस लेने में दिक्कत
गले में खराश
थकान और शरीर में दर्द

रिसर्च में क्या पता चला?

🔹 यह वायरस इंसानी कोशिकाओं, फेफड़ों और आंतों के टिश्यू को संक्रमित कर सकता है
🔹 सीधे चमगादड़ से इंसानों में या किसी अन्य जानवर के माध्यम से फैल सकता है
🔹 विभिन्न स्तनधारी जीवों के ACE2 रिसेप्टर्स से जुड़ने में सक्षम है, जिससे इंसानों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

कैसे फैल सकता है यह वायरस?

👉 यदि कोई व्यक्ति संक्रमित चमगादड़ या उसके शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों (जैसे लार, मूत्र या मल) के संपर्क में आता है, तो संक्रमण हो सकता है।
👉 यह वायरस पहले किसी अन्य स्तनधारी जीव को संक्रमित कर सकता है और फिर इंसानों में फैल सकता है

क्या HKU5-CoV-2 महामारी बन सकता है?

🔸 वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इस वायरस में महामारी बनने की क्षमता नहीं दिख रही है।
🔸 इसकी संक्रमण क्षमता SARS-CoV-2 की तुलना में कम बताई जा रही है
🔸 हालांकि, अगर इस वायरस में म्यूटेशन हुआ तो यह भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकता है

हालांकि अभी तक HKU5-CoV-2 से कोई भी इंसान संक्रमित नहीं हुआ है, लेकिन इसकी खोज के बाद वैज्ञानिक सतर्क हो गए हैं। वुहान के वैज्ञानिक लगातार इस पर शोध कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित महामारी को समय रहते रोका जा सके। कोविड-19 से मिले अनुभवों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वायरस को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।

सुरंग हादसे में बचाव अभियान जारी, फंसे लोगों के बचने की उम्मीद बेहद कम

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हैदराबाद: तेलंगाना के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग हादसे में फंसे आठ लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। दो दिन पहले सुरंग के निर्माणाधीन हिस्से का एक भाग ढह गया था, जिसके बाद से मजदूर और इंजीनियर अंदर फंसे हुए हैं। हालांकि, राज्य के मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने सोमवार को स्वीकार किया कि उनके जीवित बचने की संभावना अब बेहद कम है।

उत्तराखंड के ‘रैट माइनर्स’ की टीम शामिल

बचाव कार्य को तेज करने के लिए उत्तराखंड के सिल्कयारा सुरंग रेस्क्यू ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाली ‘रैट माइनर्स’ की टीम को बुलाया गया है। मंत्री राव के मुताबिक, सुरंग में कीचड़ और भारी मलबे के कारण बचाव कार्य अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे फंसे हुए लोगों तक पहुंचने में कम से कम तीन से चार दिन का समय लग सकता है।

सुरंग में 25 फीट तक पानी और मलबा जमा

मंत्री कृष्णा राव ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद बताया कि नौ मीटर व्यास वाली सुरंग में 30 फीट में से 25 फीट तक कीचड़ भरा हुआ है। जब उन्होंने बचाव दल के साथ सुरंग के भीतर लोगों को आवाज दी, तो कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “हमारी तस्वीरों में सुरंग का अंत दिख रहा था, लेकिन वहां पूरी तरह से कीचड़ और पानी जमा था। ऐसे में उनके जीवित बचने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।”

भारी मशीनरी से हटाया जा रहा मलबा

बचाव कार्य के तहत सुरंग से मलबा निकालने और ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। हादसे के वक्त सुरंग में मौजूद टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम), जिसका वजन सैकड़ों टन है, ढहने के बाद पानी के तेज बहाव में लगभग 200 मीटर तक बह गई थी।

‘कन्वेयर बेल्ट’ से निकाला जाएगा मलबा

बचाव दल अब ‘कन्वेयर बेल्ट’ प्रणाली को पुनः चालू करने की कोशिश कर रहा है ताकि तेजी से मलबा हटाया जा सके। हालांकि, मंत्री राव ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात को देखते हुए फंसे हुए लोगों को निकालने में अभी भी तीन-चार दिन का समय लग सकता है।

फंसे हुए लोगों की पहचान

सुरंग में फंसे आठ लोगों की पहचान उत्तर प्रदेश के मनोज कुमार और श्री निवास, जम्मू-कश्मीर के सनी सिंह, पंजाब के गुरप्रीत सिंह और झारखंड के संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू के रूप में हुई है। इनमें से दो इंजीनियर, दो ऑपरेटर और चार मजदूर शामिल हैं।

बचाव अभियान जारी

तेलंगाना सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियां बचाव कार्य में लगी हुई हैं। सुरंग में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण अभियान बेहद कठिन हो गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस ऑपरेशन पर टिकी हैं कि क्या कोई चमत्कार हो सकता है।

महासू देवता मंदिर का होगा पुनर्विकास, सीएम धामी ने काम में तेजी लाने के दिए निर्देश

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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने दो दिवसीय जौनसार-बावर दौरे के तहत सोमवार सुबह हनोल में मॉर्निंग वॉक के दौरान स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का फीडबैक लिया और लोगों की समस्याओं को सुना।

महासू देवता मंदिर क्षेत्र के पुनर्विकास मास्टर प्लान

मुख्यमंत्री ने महासू देवता मंदिर क्षेत्र के पुनर्विकास मास्टर प्लान पर अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और स्थानीय लोगों को अधिक लाभ मिले।

छात्राओं से बातचीत

बाजार भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने विद्यालय जा रही छात्राओं से भी मुलाकात की और उन्हें आगामी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षा को राज्य के विकास की नींव बताया और कहा कि सरकार शिक्षा प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

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सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जौनसार-बावर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि क्षेत्र के विकास के लिए सभी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सकें।

त्यूणी में ‘मुख्य जन सेवक’ कार्यक्रम 

इससे पहले, मुख्यमंत्री धामी ने त्यूणी में आयोजित ‘मुख्य जन सेवक’ कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि मां यमुना की सहायक नदी टोंस के तट पर, इस नैसर्गिक सुंदरता और आध्यात्मिक चेतना से भरपूर क्षेत्र में आने का अवसर मिला। महासू महाराज के आशीर्वाद से राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।”

मुख्यमंत्री ने इस दौरान अपने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले महासू महाराज के दर्शन करने की बात को याद किया और कहा कि वह लंबे समय से इस यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे थे।

महासू महाराज के दर्शन से पहले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारी

सीएम धामी ने कहा कि उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि 27 तारीख को मुखवा हर्षिल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने से पहले महासू देवता के दर्शन जरूर करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे आने-जाने से कुछ नहीं होता, जब महासू महाराज का आदेश होता है, तभी हम उनके दर्शन करने आ सकते हैं।”

उत्तराखंड के लिए सशक्त भू-कानून लागू

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस बार विधानसभा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में लंबे समय से सशक्त भू-कानून की मांग की जा रही थी, जिसे उनकी सरकार ने पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भूमि और संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए यह कानून बेहद महत्वपूर्ण था।

महासू महाराज की कृपा से वचन पूरा किया – सीएम धामी

मुख्यमंत्री ने कहा, “महासू महाराज की कृपा से राज्य की देवतुल्य जनता से किए गए सभी वचन पूरे किए जा रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार उत्तराखंड की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि बाहरी ताकतें राज्य की भूमि और संसाधनों का दुरुपयोग न कर सकें। मुख्यमंत्री के इस दौरे को जौनसार-बावर क्षेत्र के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

आईपीएस केवल खुराना का निधन, उत्तराखंड पुलिस में शोक की लहर

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देहरादून। उत्तराखंड पुलिस सेवा से एक दुखद समाचार सामने आया है। 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी और आईजी (महानिरीक्षक) केवल खुराना का निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। मात्र 47 वर्ष की उम्र में उनका यूं चले जाना पुलिस विभाग के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

केवल खुराना ने अपने करियर में उत्तराखंड पुलिस विभाग में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रहे, इसके अलावा यातायात निदेशक और होमगार्ड्स के प्रमुख जैसे अहम पदों पर भी कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल में उत्तराखंड की यातायात व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए। वर्तमान में वे आईजी प्रशिक्षण के पद पर कार्यरत थे।

उनके असमय निधन से पुलिस विभाग के साथ ही उनके सहकर्मियों और परिवार में शोक की लहर है। उनके सहयोगियों ने उन्हें एक कुशल, ईमानदार और समर्पित अधिकारी के रूप में याद किया है। उत्तराखंड पुलिस ने उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और डीजीपी उत्तराखंड ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “केवल खुराना जी एक उत्कृष्ट अधिकारी थे, जिन्होंने पूरी निष्ठा के साथ सेवा की। उनका जाना प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें और परिजनों को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें।”

उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन ने उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके गृह नगर ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

विधानसभा में ठहाकों की गूंज: कृषि मंत्री गणेश जोशी प्राकृतिक खेती पर अटक गए

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देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में उस समय ठहाके गूंज उठे जब प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी प्राकृतिक खेती के बारे में बोलते-बोलते अटक गए। विपक्ष के तीखे सवालों के बीच मंत्री जी जब प्राकृतिक खेती की परिभाषा देने लगे, तो वे अपनी ही बात में उलझ गए।

“प्राकृतिक खेती… मतलब, जो एकदम प्राकृतिक होती है, बिना… मतलब, जो…,” मंत्री जी इतना ही बोल पाए कि सदन ठहाकों से गूंज उठा। उनके जवाब पर विपक्ष ने चुटकी ली और सत्तापक्ष के कई विधायक भी हंसी रोक नहीं पाए।

क्या है मामला?

विधानसभा में विपक्ष ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को लेकर सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए थे। जब कृषि मंत्री गणेश जोशी ने जवाब देना शुरू किया, तो वे ‘प्राकृतिक खेती’ का सही अर्थ स्पष्ट नहीं कर पाए। उनकी हिचकिचाहट को लेकर विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा, “जब मंत्री जी को ही नहीं पता कि प्राकृतिक खेती क्या है, तो किसान कैसे समझेगा?”

सोशल मीडिया पर चर्चा

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें लोग मंत्री जी के ज्ञान पर सवाल उठा रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक पर कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक टिप्पणियां करते हुए लिखा, “मंत्री जी, पहले खुद समझिए फिर किसानों को समझाइए!”

सरकार की सफाई

इस मामले पर सफाई देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मंत्री जी अचानक सवालों से घिर गए थे और उन्होंने बाद में सही जानकारी दी। सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

विपक्ष का हमला

विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “जब मंत्री ही तैयार नहीं हैं, तो किसान सरकार से क्या उम्मीद करे?”

*उत्तराखंड विधान सभा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है*

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देहरादून,विधानसभा भवन उत्तराखंड

*उत्तराखंड विधान सभा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है*

पंचम विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने 21 फरवरी, 2025 को एक दिन में सबसे लंबा 11 घंटे 51 मिनट तक सदन की कार्यवाही का संचालन कर अपना ही पूर्व का रिकॉर्ड तोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उत्तराखंड विधान सभा के इतिहास में बिना एक सेकंड का ब्रेक लिए बिना अब तक की सबसे लंबी सत्र संचालन की अवधि है।

 

इससे पहले भी उत्तराखंड विधान सभा में लंबे सत्र चलने के कई उदाहरण मिलते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:

28 फरवरी, 2024 (पंचम विधानसभा) – 11 घंटे 20 मिनट (अध्यक्ष: श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण)

15 जून, 2017 (चतुर्थ विधानसभा) – 04 घंटे 40 मिनट – अध्यक्ष: श्री प्रेमचंद अग्रवाल
06 घंटे 45 मिनिट- उपाध्यक्ष : श्री रघुनाथ सिंह चौहान

11 जून, 2002 (प्रथम विधानसभा) – 11 घंटे 11 मिनट (अध्यक्ष: श्री यशपाल आर्य) शामिल हैं।

 

लेकिन 21 फरवरी, 2025 को हुए इस ऐतिहासिक सत्र ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण के इस अद्वितीय नेतृत्व ने सदन में नई ऊर्जा का संचार किया। आमतौर पर, विधान सभा सत्र के दौरान माननीय सदस्य विभिन्न कारणों से सदन में आते-जाते रहते हैं, जिससे उन्हें कार्यवाही के दौरान कुछ विश्राम मिल जाता है। लेकिन इसके विपरीत, माननीय अध्यक्ष ने बिना किसी विश्राम के, एक दिन के दूसरे सत्र में निरंतर 08 घंटे 47 मिनट तक कार्यवाही का संचालन किया, जो अपने आप में एक मिसाल है।

 

 

यह भी उल्लेखनीय है कि 2022 में पदभार ग्रहण करने के बाद से अब तक किसी भी सत्र की कार्यवाही के दौरान उन्होंने ब्रेक नहीं लिया है, जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड की विधायी प्रणाली में एक नया मानक स्थापित करती है, बल्कि अन्य विधानसभाओं के लिए भी एक प्रेरणा का कार्य करती है। विधानसभा अध्यक्ष की इस कार्यशैली ने संसदीय प्रणाली को अधिक प्रभावी और अनुशासित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

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इस ऐतिहासिक क्षण के लिए उत्तराखंड विधान सभा की समस्त कार्यपालिका और माननीय सदस्यगणों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की।

शिक्षा व्यवस्था पर हुई चर्चा, कांग्रेस उठाए कई सवाल

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में नियम 58 के तहत राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जोरदार चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की खामियों को उजागर करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भारी कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। शिक्षकों को पहाड़ों में भेजना सरकार के लिए अब भी एक चुनौती बना हुआ है।

सरकार की नीयत पर सवाल

कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्कूलों के भवन तक नहीं हैं। सरकार शिक्षा बजट के रूप में 8,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिख रहा। उन्होंने कहा कि हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा अच्छी शिक्षा पाए, लेकिन सरकारी तंत्र इसमें विफल साबित हो रहा है।

नैतिक शिक्षा को अनिवार्य करने की मांग

कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने विद्यालयों में नैतिक शिक्षा अनिवार्य करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा समाज में चरित्र निर्माण कमजोर होगा। इस मांग का समर्थन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भी शिक्षा मंत्री से पहली से बारहवीं कक्षा तक नैतिक शिक्षा शुरू करने की अपील की।

शिक्षकों की कमी और जर्जर स्कूलों का मुद्दा

उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने खटीमा में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने मिड-डे मील की राशि बढ़ाने की भी मांग की। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने कहा कि विधायक बनने के तीन साल बाद भी वे अपने क्षेत्र के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करा सके हैं। धारचूला विधायक हरीश धामी ने सीमांत क्षेत्रों में विद्यालयों की बदहाल स्थिति पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पहाड़ों में काम करने के लिए प्रेरित करने की कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है, जिससे इन क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था चौपट होती जा रही है।

शिक्षा मंत्री का जवाब

विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में 20,823 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 18,714 शिक्षक कार्यरत हैं। 2,900 शिक्षकों की काउंसलिंग चल रही है और 1,900 शिक्षकों ने ज्वाइन कर लिया है। धारचूला के लिए 150 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिनमें से 98 ने ज्वाइन कर लिया है।

किताबें मुफ्त

मंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य में किसी भी स्कूल को बंद नहीं किया जाएगा। सरकार कक्षा 12 तक की किताबें मुफ्त उपलब्ध करा रही है, साथ ही 9वीं की छात्राओं को मुफ्त साइकिल और 10 लाख बच्चों को मुफ्त कॉपियां दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में 100% शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।

शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी

शिक्षकों की नियुक्ति पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि एलटी के 1,544 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 613 लेक्चरर की भर्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक को पांच साल तक पहाड़ में सेवा देना अनिवार्य होगा और किसी भी विधायक को शिक्षकों के स्थानांतरण की सिफारिश नहीं करनी चाहिए। सरकार ने आश्वासन दिया कि 17,000 स्कूलों में से जिन 10,000 स्कूलों की रजिस्ट्रियां नहीं हैं, उन पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

उत्तराखंड विधानसभा सत्र का आज पांचवां दिन, देखें लाइव

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उत्तराखंड की ट्विंकल डोगरा का सफल डबल हैंड ट्रांसप्लांट

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फरीदाबाद के अमृता अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड की रहने वाली ट्विंकल डोगरा का सफल डबल हैंड ट्रांसप्लांट कर डॉक्टरों ने उत्तर भारत की पहली इस तरह की सर्जरी को अंजाम दिया। लगभग 12 घंटे चली इस जटिल सर्जरी के बाद ट्विंकल को नया जीवन मिला है।

हादसे ने बदली जिंदगी

उत्तराखंड की ट्विंकल डोगरा कपड़े सुखाने के दौरान हाई टेंशन तार की चपेट में आ गई थीं, जिससे उनके हाथ और पैर बुरी तरह झुलस गए। डॉक्टरों ने उनके पैर तो ठीक कर दिए, लेकिन गंभीर जलन के कारण दोनों हाथ काटने पड़े। इस दर्दनाक हादसे के बाद ट्विंकल करीब ढाई साल तक बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गईं।

चार साल का इंतजार, फिर मिली जिंदगी 

ट्विंकल ने अपने प्रोफेसर से हाथों के ट्रांसप्लांट की संभावना पर चर्चा की और उन्हें पता चला कि फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में हैंड ट्रांसप्लांट संभव है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल में खुद को डोनर की प्रतीक्षा सूची में रजिस्टर कराया।चार साल के लंबे इंतजार के बाद दिसंबर 2024 में डॉक्टरों को एक 76 वर्षीय बुजुर्ग महिला के अंगदान की जानकारी मिली। यह महिला ब्रेन हेमरेज के चलते ब्रेन डेड हो चुकी थीं, और उनके परिवार ने अंगदान करने का फैसला लिया।

12 घंटे की जटिल सर्जरी, डॉक्टरों ने किया कमाल

डॉक्टरों ने पहले महिला का ब्लड ग्रुप ट्विंकल से मिलाया, जो पूरी तरह से मेल खा गया। इसके बाद ट्विंकल को अस्पताल बुलाया गया और 12 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद सफल ट्रांसप्लांट किया गया। डॉ. मोहित शर्मा, प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के प्रमुख, ने बताया, “यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। नसों, धमनियों और ऊतकों को जोड़ना आसान नहीं होता। लेकिन हमारी टीम ने जबरदस्त तालमेल से यह काम कर दिखाया। ट्विंकल के हाथ अब मूवमेंट करने लगे हैं, और पूरी तरह से ठीक होने में करीब एक से डेढ़ साल लग सकता है।”

चुनौतीपूर्ण था ट्रांसप्लांट, डॉक्टरों ने दी जानकारी

डॉ. अनिल मुरारका ने बताया कि, “इस सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती थी कि डोनर और रिसीवर की रक्त नलियों में 50% का अंतर था, जो आमतौर पर इतना अधिक नहीं होता। लेकिन हमने इस चुनौती को स्वीकार किया और सफलता प्राप्त की।” डॉ. शिखा, जो प्लास्टिक सर्जरी की कंसल्टेंट हैं, ने ऑपरेशन प्रक्रिया के बारे में बताया, “यह एक टाइम-सेंसिटिव सर्जरी थी। चार अलग-अलग टीमों ने समन्वय से कार्य किया। एक टीम डोनर से हाथ निकालने का काम कर रही थी, दूसरी रिसीवर की तैयारी में लगी थी, तीसरी नसों को जोड़ने में जुटी थी, और चौथी पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए थी।”

ट्विंकल की जिंदगी में लौटी रोशनी

सर्जरी के बाद ट्विंकल धीरे-धीरे रिकवरी कर रही हैं और उन्होंने चीजों को महसूस करना भी शुरू कर दिया है। ट्विंकल ने कहा, “मैं अपने डोनर और डॉक्टरों की आभारी हूं। जिन हाथों को खोने के बाद मैंने कभी उम्मीद छोड़ दी थी, आज वे फिर से मेरे साथ हैं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं।” उन्होंने अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अपील की और बताया कि एक व्यक्ति का अंगदान 13 लोगों की जान बचा सकता है।

निष्कर्ष: चिकित्सा विज्ञान में एक नई उपलब्धि

ट्विंकल डोगरा का डबल हैंड ट्रांसप्लांट न केवल एक मेडिकल सफलता है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपने अंग खो चुके हैं। यह सर्जरी साबित करती है कि सही तकनीक, टीमवर्क और दान की भावना से जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। फरीदाबाद के अमृता अस्पताल के डॉक्टरों ने ट्विंकल को नया जीवन देने के साथ-साथ चिकित्सा जगत में एक नया इतिहास भी रच दिया है।

कांग्रेस सांसद पर बीच बाजार हमला, 10 संदिग्धों की हुई पहचान

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गुवाहाटी: असम के नागांव जिले में कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन और उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) पर हुए हमले के मामले में अब तक 10 लोगों की पहचान हो चुकी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करेगी। राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की भी घोषणा की है।

रूपाहीहाट में हमला

गुरुवार को धुबरी लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन, उनके बेटे तंजील और उनके पीएसओ पर रूपाहीहाट इलाके में नकाबपोश बदमाशों ने हमला कर दिया। आरोपियों ने ‘रकीबुल हुसैन वापस जाओ’ के नारे भी लगाए। हमलावरों ने क्रिकेट बैट से हमला करने की कोशिश की, हालांकि सांसद और उनके बेटे को कोई चोट नहीं आई। उनके दो सुरक्षा अधिकारियों को मामूली चोटें आई हैं।

मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

असम विधानसभा में इस घटना पर बोलते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। जब भी सांसद रकीबुल हुसैन नागांव जिले में रहेंगे, विशेष रूप से सामगुरी और रूपाहीहाट क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा बढ़ा दी जाएगी।

विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

इस हमले की निंदा करते हुए 15 से अधिक विपक्षी दलों के गठबंधन, असम सोनमिलिटो मोर्चा ने इसे राज्य में लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। मोर्चा ने कहा कि यह घटना असम के भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत है और राज्य में ‘जंगल राज’ को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस का विधानसभा में विरोध प्रदर्शन

इस हमले के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने शुक्रवार को असम विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव भी पेश किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने इसे खारिज कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

विपक्ष का सरकार पर निशाना

असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिला पुलिस और स्थानीय थाने को पहले से सूचना देने के बावजूद दिनदहाड़े ऐसी घटना हुई। यह हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार की नाकामी को दर्शाता है। राज्य में बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता चिंता का विषय है।”