दिल्ली आ रही इंडिगो फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी
आपसी झगड़ा बना जानलेवा, पति ने पत्नी की हत्या के बाद की आत्महत्या
हरिद्वार हरिद्वार के कनखल थाना क्षेत्र अंतर्गत जमालपुर के वसंत कुंज में सोमवार देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई है। पारिवारिक कलह में एक पति ने पहले अपनी पत्नी की निर्मम हत्या कर दी और फिर खुदकुशी कर ली। यह वारदात क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच दहशत का माहौल है।
घटना की जानकारी मिलते ही सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। कई बार आवाज देने के बावजूद जब भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पुलिस छत के रास्ते घर में दाखिल हुई। अंदर का नज़ारा देख पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
बेडरूम में महिला का शव खून से सना पड़ा था। उसके सिर पर डंडे और लोहे की सरिया से हमला किए जाने के स्पष्ट निशान थे। छत पर पति का शव मिला, जिससे अंदेशा है कि उसने खुदकुशी की। मृतक पति ई-रिक्शा चालक था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दंपति के बीच आए दिन झगड़े होते थे और संतान को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा था।
सीओ सिटी शिशुपाल सिंह ने बताया, “महिला ने सोमवार देर रात एक परिचित महिला को फोन कर अपने घर बुलाया था, लेकिन वह वहां नहीं पहुंच पाई। उसी रात यह वारदात हुई।”
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस का मानना है कि यह गृह क्लेश का मामला है, लेकिन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।
भारत ने ईरान में रह रहे नागरिकों के लिए जारी की नई एडवाइजरी, छात्रों को सुरक्षित निकालने का अभियान तेज़
तेहरान/नई दिल्लीः ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर संकट की ओर धकेल दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों, खासकर छात्रों के लिए एक नई और सख्त एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों से “शीघ्र और सुरक्षित रूप से ईरान छोड़ने” की अपील की है।
तेहरान छोड़ने की सख्त सलाह
भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि जो भारतीय नागरिक या Person of Indian Origin (PIO) तेहरान में मौजूद हैं और जिनके पास आवश्यक संसाधन हैं, वे तुरंत शहर छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। दूतावास ने कहा है कि जब तक वापसी की व्यवस्था नहीं हो जाती, लोग ऐसी जगह ठहरें जो अपेक्षाकृत सुरक्षित हो और दूतावास के संपर्क में रहें।
दूतावास ने यह भी आग्रह किया है कि जो भारतीय नागरिक अभी तक मिशन के संपर्क में नहीं आए हैं, वे तुरंत अपने ठिकाने और संपर्क जानकारी साझा करें। इसके लिए तीन विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं: +98 9010144557, +98 9128109115, +98 9128109109
भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी का कार्य शुरू
ईरान में करीब 10,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 1,500 छात्र कश्मीर से हैं। अधिकांश छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान में हैं। सैन्य तनाव के मद्देनज़र भारत ने इन छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है।
तीन प्रमुख मेडिकल विश्वविद्यालयों तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से छात्रों को निकाल कर पहले से तय सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्र वेलेंजक परिसर से बस द्वारा कोम शहर भेजे गए हैं। उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और अराक यूनिवर्सिटी के छात्रों को भी निकालने की प्रक्रिया जारी है।
हवाई क्षेत्र बंद, निकासी अब आर्मेनिया के ज़रिए
ईरान के हवाई क्षेत्र के आंशिक रूप से बंद होने के कारण छात्रों की निकासी अब भूमिगत मार्गों से की जा रही है। भारत सरकार छात्रों को ईरान से आर्मेनिया, फिर जॉर्जिया, और वहाँ से पश्चिम एशिया के रास्ते भारत वापस लाने की योजना पर काम कर रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 110 छात्रों का पहला जत्था आर्मेनिया सीमा पर पहुँच चुका है। तेहरान में सोमवार को निकासी के लिए विशेष बसों की व्यवस्था की गई थी।
दूतावास की चौकसी और प्रशासन से समन्वय
भारतीय दूतावास ने ईरानी विश्वविद्यालयों से लगातार संपर्क बनाए रखा है। शिराज यूनिवर्सिटी और इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से भी छात्रों की निकासी की योजना मंगलवार सुबह के लिए बनाई गई है। दूतावास ने अराक यूनिवर्सिटी प्रशासन से सभी भारतीय छात्रों को निकालने में मदद की अपील की है।
नागरिकों से संयम और सतर्कता की अपील
भारत सरकार ने अपने नागरिकों से इस संवेदनशील परिस्थिति में अफवाहों से दूर रहने, केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने और हर हाल में संयम बरतने की अपील की है। भारतीय दूतावास हर संभव सहायता देने के लिए 24 घंटे सक्रिय है।
नज़रें आगे की रणनीति पर
पश्चिम एशिया में हालात किसी भी क्षण और बिगड़ सकते हैं। भारत ने वक्त रहते अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो तेज़ क़दम उठाए हैं, वो काबिल-ए-तारीफ़ हैं। लेकिन अब आगे की चुनौती है — सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी और वहाँ बचे लोगों की लगातार निगरानी। दूतावास का यह मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो यह निकासी अभियान और भी जटिल हो सकता है।
उत्तराखंड में चार दिन तक भारी बारिश का अलर्ट
देहरादून : उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने आगामी 17 जून से 20 जून 2025 तक प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश, तेज़ गर्जन, आकाशीय बिजली गिरने और झोंकेदार हवाओं की संभावना जताई है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियाँ बरतने की अपील की है।
17 जून
राज्य के नैनीताल, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही सभी जिलों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने, तीव्र से अति तीव्र वर्षा और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं की संभावना जताई गई है।
18 जून
इस दिन बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी वर्षा की आशंका है। समस्त ज़िलों में तेज़ बारिश के छोटे-छोटे दौर, बिजली गिरने और तेज़ हवाओं का खतरा बना रहेगा।
19 जून
नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में फिर से भारी बारिश हो सकती है। इस दिन भी पूरे प्रदेश में गरज-चमक और तेज़ हवाओं की स्थिति बनी रहेगी।
20 जून
देहरादून और नैनीताल जिलों के कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। अन्य जिलों में भी बिजली गिरने, तेज़ बारिश और हवा के झोंकों का सिलसिला जारी रह सकता है।
मौसम विभाग की अपील
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पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचें।
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नदी-नालों के आसपास न जाएँ।
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आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सुरक्षित स्थानों पर रहें।
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मोबाइल, रेडियो, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूरी बनाए रखें।
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किसानों और पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारियां
राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी ज़िलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। SDRF, पुलिस, लोक निर्माण और बिजली विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री खट्टर से की मुलाकात, जल विद्युत और आवास परियोजनाओं के लिए मांगी विशेष सहायता
नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं के विकास, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन और ऋषिकेश-हरिद्वार क्षेत्र में विद्युत लाइनों को भूमिगत करने संबंधी विषयों पर विशेष सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में बिजली की लाइनों को भूमिगत एवं स्वचालित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कुमाऊं एवं अपर यमुना क्षेत्र में जल विद्युत परियोजनाओं के लिए ₹4000 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग की मांग की। साथ ही राज्य के दूरस्थ एवं कठिन भू-भागों में पंप स्टोरेज परियोजनाओं के विकास के लिए ₹3800 करोड़ की अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता जताई। CM धामी ने पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड (PSDF) के अंतर्गत पिटकुल की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए डीपीआर स्वीकृति और 100 प्रतिशत अनुदान की मांग भी रखी। इन परियोजनाओं की कुल लागत ₹1007.82 करोड़ है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत राज्य में निजी भागीदारी मॉडल से संचालित हो रही परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में एकमुश्त अनुदान की नीति से कैश फ्लो बाधित हो रहा है। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि सरकारी भूमि पर लागू 40:40:20 की चरणबद्ध सहायता प्रणाली को निजी भूमि आधारित परियोजनाओं पर भी लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं के समय पर पूर्ण होने में सहायता मिलेगी।मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि बैंकों, एनबीएफसी और अन्य वित्तीय संस्थानों को स्पष्ट दिशानिर्देश दिए जाएं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लाभार्थियों को सरल ऋण सुविधा मिल सके।
बैठक में मुख्यमंत्री ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को मेरठ के मोदीपुरम से आगे हरिद्वार तक विस्तारित करने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से राज्य में यातायात सुगम होगा, शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा और समग्र आर्थिक विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री की इस पहल को राज्य के ऊर्जा एवं आवास क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने जनगणना और जाति जनगणना की अधिसूचना जारी की, 1 मार्च 2027 से होगी शुरुआत
केंद्र सरकार ने सोमवार को जनसंख्या जनगणना की अधिसूचना जारी की, जिसकी प्रक्रिया मार्च 2027 से शुरू होगी। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, “जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए और 26 मार्च, 2018 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए, भारत सरकार ने घोषणा की है कि भारत की जनसंख्या की जनगणना वर्ष 2027 के दौरान की जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 होगी, सिवाय केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित गैर-सामयिक क्षेत्रों और हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड राज्यों के लिए
जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 होगी, सिवाय केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित गैर-सामयिक क्षेत्रों और हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड राज्यों के लिए। इन विशेष क्षेत्रों लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित गैर-सामयिक क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 तय की गई है।
15 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में एक बैठक में आगामी जनगणना की तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में गृह सचिव, भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (RG&CCI) तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 16वीं जनगणना की तैयारियों की समीक्षा की। मंगलवार को जनगणना की राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी। इस जनगणना में पहली बार जातिगत गणना भी की जाएगी। इस कार्य में 34 लाख गणनाकर्मी और पर्यवेक्षक तथा लगभग 1.3 लाख जनगणना कर्मचारी शामिल होंगे, जो अत्याधुनिक मोबाइल डिजिटल उपकरणों का उपयोग करेंगे।” जनगणना दो चरणों में की जाएगी।
पहला चरण: हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) -इसमें प्रत्येक घर की आवासीय स्थिति, संपत्तियों और सुविधाओं की जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (PE) – इसमें प्रत्येक व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य जानकारी एकत्र की जाएगी।
इस बार की जनगणना डिजिटल माध्यम से मोबाइल ऐप के जरिए की जाएगी। नागरिकों के लिए स्वयं-गणना (Self-enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। डेटा संग्रहण, प्रसारण और भंडारण के दौरान डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत कठोर सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। यह जनगणना अब तक की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।(इनपुट- एएनआई )
मुख्यमंत्री समेत नागरिक उड्डयन सचिव और UCADA के CEO के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग
देहरादून: केदारनाथ-गौरीकुंड मार्ग पर 15 जून को हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद, अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने इस हादसे के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, नागरिक उड्डयन सचिव और यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (गैर इरादतन हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
प्रशासनिक लापरवाही और हेली-कंपनियों की मुनाफाखोरी
इस संबंध में संगठन ने पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड को एक औपचारिक पत्र सौंपा है, जिसमें हादसे को ‘प्रशासनिक लापरवाही और हेली-कंपनियों की मुनाफाखोरी’ का परिणाम बताया गया है। पत्र में मांग की गई है कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

हादसों की फेहरिस्त से उठे सवाल
गौरतलब है कि यह हादसा उत्तराखंड में पिछले डेढ़ महीने में हुई पांचवीं हेली दुर्घटना है, जिसने प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे की प्रमुख वजह खराब मौसम और कम दृश्यता बताई जा रही है, बावजूद इसके हेलीकॉप्टर को उड़ान की अनुमति दी गई।
प्रमुख मांगें
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सभी सिंगल इंजन हेलीकॉप्टरों की हिमालयी क्षेत्र में उड़ानों पर तत्काल रोक।
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हेली-सेवाओं की कार्यप्रणाली की जांच के लिए स्वतंत्र समिति का गठन।
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UCADA और DGCA की भूमिका की निष्पक्ष जांच।
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मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा और सहायता।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी
आर्यन एविएशन को 15 जून के लिए सुबह 6 से 7 बजे तक का उड़ान स्लॉट दिया गया था, जबकि हेलीकॉप्टर ने उड़ान 5रू30 बजे ही भर दी। यह क्ळब्। और न्ब्।क्। द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (ैव्च्) का सीधा उल्लंघन है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि चारधाम यात्रा के दौरान अब तक 8,000 से अधिक उड़ानें हो चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों के तहत अपेक्षित डबल इंजन हेलीकॉप्टर का उपयोग नहीं किया गया।

जिम्मेदारी तय करने की मांग
पत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामीए नागरिक उड्डयन मंत्री के तौर पर, नागरिक उड्डयन सचिव के खिलाफ एसओपी के अनुपालन में विफलता के लिए। यूकाडा के सीईओ के खिलाफ हेली संचालन और निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मुकदमा जर्द करने की मांग की गई है।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा राज्यव्यापी जन आंदोलन का रूप ले सकता है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, सुरक्षा मानकों और जनजीवन की रक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
उत्तराखंड : केदारनाथ पैदल यात्रा फिर शुरू, कल मार्ग बंद होने से रोकी गई थी यात्रा
रुद्रप्रयाग : मौसम अनुकूल रहने के चलते श्री केदारनाथ धाम यात्रा पुनः सुचारु रूप से शुरू हो गई है। बीती शाम प्रशासन और विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं द्वारा पैदल मार्ग पर आए मलबे और पत्थरों को हटाकर यात्रा मार्ग को चालू कर दिया गया था।
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से यात्री वाहनों के माध्यम से सीतापुर एवं सोनप्रयाग पार्किंग तक पहुंच रहे हैं। सुव्यवस्थित पार्किंग के पश्चात श्रद्धालु शटल सेवा द्वारा गौरीकुंड पहुंच रहे हैं और वहां से पैदल, घोड़े-खच्चर या डंडी-कंडी के माध्यम से आगे की यात्रा कर रहे हैं।
हालांकि, उत्तराखंड मौसम विभाग ने आज और आगामी दिनों के लिए वर्षा की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में अचानक होने वाली तेज बारिश से यात्रा मार्ग में भूस्खलन या पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा पर निकलें और यात्रा के दौरान पुलिस व प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन अवश्य करें, जिससे उनकी यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।
उत्तराखंड में दर्दनाक हादसा, अज्ञात वाहन की टक्कर से तीन युवकों की मौत
विकासनगर : प्रदेश में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला विकासनगर-सेलाकुई थाना क्षेत्र का है, जहां लेबर चौक के पास एक अज्ञात वाहन की टक्कर से स्कूटी सवार तीन युवकों की मौत हो गई। हादसे में एक युवक की मौके पर ही जान चली गई, जबकि दो अन्य ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अज्ञात वाहन चालक की तलाश शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, रविवार देर रात करीब 11:10 बजे सेलाकुई थाने के कंट्रोल रूम को एक सड़क दुर्घटना की सूचना मिली। पुलिस टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची, जहां लेबर चौक के पास एक स्कूटी को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी।
हादसे में स्कूटी चला रहा सूरज (20) मौके पर ही दम तोड़ गया, जबकि उसके साथ सवार मुकेश (26) और अनिल (22) को गंभीर अवस्था में सीएचसी प्रेमनगर ले जाया गया। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
सेलाकुई थाना के वरिष्ठ उप निरीक्षक जितेन्द्र कुमार के अनुसार, तीनों युवक सेलाकुई की एक निजी कंपनी में काम करते थे। रविवार रात वे अपने मित्र सुरजीत के जन्मदिन की पार्टी में शामिल होकर जमालपुर से लौट रहे थे। इसी दौरान दोबारा शराब के ठेके की ओर जा रहे थे कि लेबर चौक के पास यह हादसा हो गया।
पुलिस ने घटना की सूचना मृतकों के परिजनों को दे दी है। हादसे के बाद तीनों परिवारों में कोहराम मच गया है। पुलिस ने अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
केदारनाथ हैलीकॉप्टर दुर्घटना में सात की मृत्यु रैस्क्यू जारी
केदारनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार, सात की मौत रेस्क्यू जारी
रूद्रप्रयाग 15 जून।केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिला पर्यटन विकास अधिकारी एवं हेली सेवा नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि हेलीकॉप्टर आर्यन एविएशन का था, जिसमें पायलट के अलावा पांच यात्री और एक शिशु सवार थे।
बताया गया कि घाटी में अचानक मौसम बिगड़ने के कारण पायलट ने हेलीकॉप्टर को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान हादसा हो गया।सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर रेस्क्यू में जुटे हुए हैं। खोजबीन और राहत कार्य जारी है हैलीकॉप्टर दुर्घटना में एक बीकेटीसी कर्मचारी तथा पायलट सहित सहित सात लोग हताहत हुए है उत्तराखंड सरकार ने दुर्घटना के जांच के आदेश दिये है।
वहीं केदारनाथ मार्ग पर जंगल चट्टी के निकट पत्थर की चपेट में आने से एक यात्री की मृत्यु हो गयी।

















