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उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक जारी, आरक्षण रोस्टर पर कल फिर होगी सुनवाई

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर निर्धारण को लेकर दायर याचिकाओं पर बुधवार को गहन सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में यह सुनवाई दोपहर बाद करीब दो घंटे तक चली।

समय की कमी के चलते अदालत ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार 26 जून को तय की है। तब तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक बनी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह चुनाव कराने के विरोध में नहीं है, लेकिन चुनाव संवैधानिक प्रावधानों और नियमों के तहत ही होने चाहिए।

सरकार की ओर से महाधिवक्ता और मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पहले से लागू आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित करना एकमात्र विकल्प था। यह नई नियमावली 9 जून को जारी हुई और 14 जून को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई थी।

वहीं, याचिकाकर्ताओं ने उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 243T का हवाला देते हुए तर्क रखा कि आरक्षण में रोस्टर व्यवस्था अनिवार्य और संवैधानिक बाध्यता है। उनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई संविधान और कानून के विपरीत है।

क्या रोस्टर की पुनरावृत्ति संविधान का उल्लंघन है?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि कितनी सीटों पर आरक्षण रोस्टर की पुनरावृत्ति हुई है और क्या यह पंचायत राज अधिनियम व अनुच्छेद 243T का उल्लंघन नहीं है?

सरकार का पक्ष था कि कुछ याचिकाओं के आधार पर सम्पूर्ण चुनाव प्रक्रिया को रोका नहीं जाना चाहिए, लेकिन अदालत ने फिलहाल रोक को बरकरार रखते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनने का निर्णय लिया है।

आरक्षण नियमावली को दी गई है चुनौती

बागेश्वर निवासी गणेश कांडपाल समेत कई लोगों ने 9 और 11 जून को राज्य सरकार द्वारा जारी नए आरक्षण नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, राज्य सरकार ने अब तक के आरक्षण रोस्टर को समाप्त कर, एक नया रोस्टर बनाकर उसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया, जो संविधान और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। अब सबकी निगाहें 26 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें हाईकोर्ट कोई अहम निर्णय ले सकता है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ की तबीयत बिगड़ी, मंच पर पुराने साथी से मिलकर हुए भावुक

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नैनीताल : कुमाऊं विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेने उत्तराखंड आए देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तबीयत कार्यक्रम के बाद अचानक बिगड़ गई। भावनाओं के उफान के बीच मंच से नीचे उतरते हुए वह बेहोश होकर गिर पड़े। तत्काल मौके पर मौजूद चिकित्सकों की टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया, जिसके बाद वे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह के साथ राजभवन रवाना हुए।

उपराष्ट्रपति धनखड़ बुधवार को तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत हल्द्वानी आर्मी हैलीपैड पहुंचे थे, जहां राज्यपाल ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, सांसद अजय भट्ट, हल्द्वानी मेयर गजराज बिष्ट, वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष दीपक महरा, कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, डीएम वंदना, एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा सहित कई अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति का अभिवादन किया।

इसके बाद वह नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने 45 मिनट के प्रेरक भाषण में उन्होंने 1989 में संसद में अपने सहयोगी रहे डॉ. महेंद्र सिंह पाल को कई बार याद किया। कार्यक्रम के बाद जब वह मंच से नीचे उतरे, तो सीधे डॉ. पाल के पास पहुंचे और उन्हें गले लगा लिया। दोनों के बीच पुरानी यादों का भावुक संवाद चला और डॉ. पाल की आंखों से आंसू बहने लगे। यह दृश्य देखकर खुद उपराष्ट्रपति भी भावुक होकर रोने लगे।

इसी भावनात्मक क्षण के दौरान उपराष्ट्रपति की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह डॉ. पाल को गले लगाए ही नीचे गिर पड़े। समारोह स्थल पर मौजूद डॉक्टरों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत उपचार शुरू किया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और उन्हें नैनीताल स्थित राजभवन में चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।

उत्तराखंड कैबिनेट मीटिंग संपन्न, इन 4 फैसलों पर लगी मुहर

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज देहरादून में आयोजित कैबिनेट की बैठक संपन्न हुई। करीब पौने दो घंटे तक चली इस बैठक में चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। कैबिनेट ने विधानसभा के मानसून सत्र, विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और एकल सदस्य समर्पित आयोग की तृतीय रिपोर्ट जैसे अहम मुद्दों पर निर्णय लिए।

कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड की पंचम विधानसभा के वर्ष 2025 के मानसून सत्र को आयोजित करने की मंजूरी दी गई। सत्र की तिथि और स्थान का अंतिम निर्णय लेने के लिए मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया है। जल्द ही सीएम धामी इस संबंध में अंतिम घोषणा करेंगे।

शिक्षा विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दिखाई। नैनीताल हाईकोर्ट के 7 मार्च 2025 के आदेश के बाद, शासन ने 20 मार्च 2025 को विशेष शिक्षा शिक्षकों के 135 पदों का सृजन किया था। इन पदों पर भर्ती के लिए उत्तराखंड विशेष शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली, 2025 में संशोधन को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने इस नियमावली को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया, जिससे विशेष शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को गति मिलेगी।

कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तृतीय चरण को लागू करने के लिए पंचायती राज विभाग को अधिकृत किया। इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और सैनिटेशन से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूती मिलेगी।

बैठक में एकल सदस्य समर्पित आयोग की तृतीय रिपोर्ट का अध्ययन कर सुझाव प्रस्तुत करने वाली मंत्रिमंडलीय उप-समिति की संस्तुतियों को मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस पर विस्तृत चर्चा हुई, और संबंधित सुझावों को मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक के बाद कहा, “हमारी सरकार शिक्षा, स्वच्छता और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दे रही है। विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती से दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी, और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देगा।”

अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुए शुभांशु शुक्ला, Axiom-4 मिशन की सफल लॉन्चिंग

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फ्लोरिडा : भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने आज इतिहास रच दिया, जब नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से ऐक्सिओम-4 (Ax-4) मिशन की सफल लॉन्चिंग हुई। यह मिशन भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट और ड्रैगन अंतरिक्ष यान के साथ लॉन्च हुआ। यह भारत के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि 41 वर्ष बाद राकेश शर्मा के 1984 के अंतरिक्ष मिशन के बाद शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बने।

ये है मिशन

ऐक्सिओम-4 मिशन नासा, ऐक्सिओम स्पेस और स्पेसएक्स के सहयोग से संचालित एक निजी अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनका नेतृत्व पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री और ऐक्सिओम स्पेस की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक पेगी व्हिटसन कर रही हैं। शुभांशु शुक्ला मिशन के पायलट हैं, जबकि पोलैंड के स्लावोस्ज़ उज़नांस्की-विस्निव्स्की और हंगरी के तिबोर कपु मिशन विशेषज्ञ के रूप में शामिल हैं। यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए 40 वर्षों बाद पहली बार ISS पर सरकारी प्रायोजित उड़ान का प्रतीक है। लॉन्चिंग के बाद शुभांशु शुक्ला ने हिंदी में अपने पहले संदेश में कहा, “नमस्ते, मेरे प्यारों भारतवासियों, क्या शानदार सवारी थी!” उन्होंने इसे “कमाल की राइड” करार दिया और “जय हिंद, जय भारत” का उद्घोष किया।

अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा और उद्देश्य

यह अंतरिक्ष यान गुरुवार, 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे ISS के साथ डॉक करने वाला है, जो लगभग 28 घंटे की यात्रा होगी। चमकरी दल 14 दिनों तक ISS पर रहेगा, जहां वे 31 देशों के लिए 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग और शैक्षिक गतिविधियाँ करेंगे। इसरो और नासा के संयुक्त प्रयोग भी इस मिशन का हिस्सा हैं, जो भारत के 2027 में प्रस्तावित गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करेंगे।

भारत के लिए गर्व का क्षण

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के अनुभवी टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास सुखोई-30 और मिग-29 जैसे विमानों पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला ने कहा, “यह मेरे बेटे की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव है।” उनकी माँ आशा शुक्ला ने भी बेटे की सफलता पर खुशी जताई।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभांशु को बधाई देते हुए कहा, “प्रभु श्रीराम की धरती से अंतरिक्ष की ओर! यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।”

लॉन्चिंग की चुनौतियां

ऐक्सीओम-4 मिशन को कई बार स्थगित करना पड़ा, जिसमें मई और जून में खराब मौसम और ISS के रूसी मॉड्यूल में तकनीकी समस्याएँ प्रमुख कारण थीं। अंततः, स्पेसएक्स ने 90% अनुकूल मौसम की पुष्टि के बाद 25 जून को लॉन्चिंग की।

लाइव प्रसारण

लॉन्चिंग का सीधा प्रसारण स्पेसएक्स और ऐक्सीम स्पेस के यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। देशभर में लोगों ने सोशल मीडिया पर शुभांशु को बधाई दी और इस ऐतिहासिक क्षण को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय बताया।

भविष्य की योजनाएं

इसरो का गगनयान मिशन, जिसके लिए शुभांशु का यह अनुभव महत्वपूर्ण होगा, 2027 में भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान होगी। इसरो ने इस मिशन पर 550 करोड़ रुपये का निवेश किया है। ऐक्सी-4 भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक मंच पर मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। यह मिशन न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से अंतरिक्ष सभी के लिए सुलभ हो सकता है। शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारत के सपनों को अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक ले जा रहा है।

आफ़त की बारिश: उफनते नालों में बह गई ज़िंदगियां, चार की मौत

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हल्द्वानी।  मूसलधार बारिश ने हल्द्वानी शहर का जनजीवन पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। नाले उफान पर हैं, सड़कों पर सैलाब है और अफ़रातफ़री का माहौल बना हुआ है। सबसे दिल दहलाने वाली घटना फायर ब्रिगेड ऑफिस के पीछे स्थित नहर में घटी, जहां एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई।

कार में सवार सात लोगों में से एक बच्चे समेत चार की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि तीन लोग घायल हैं और उनका उपचार चल रहा है। मामले की पुष्टि करते हुए एसपी सिटी प्रकाश चंद्र ने बताया कि तेज बहाव के चलते कार नहर में समा गई।

शहर के अन्य हिस्सों देवखड़ी, रक्सिया और कलसिया नालों में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इन इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की गई है। नगर आयुक्त ऋचा सिंह खुद फील्ड में डटी हुई हैं। उन्होंने बताया, “स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। निगम ने पहले ही नालों की सफाई करवा दी थी, जिससे अधिकांश क्षेत्रों में जलभराव नहीं हुआ। जहां शिकायतें आ रही हैं, वहां टीमें तुरंत पहुंच रही हैं।

नगर निगम की टीमें पूरे शहर में तैनात हैं और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फायर सर्विस, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें भी हाई अलर्ट पर हैं।

शहरवासियों से प्रशासन की अपील

अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। बरसाती नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। कोई भी आपात स्थिति हो तो तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

फैक्ट्री में भीषण आग, चार मजदूरों की मौत, तीन घायल

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नई दिल्ली: दिल्ली के रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक तीन मंजिला पॉलिथीन बनाने वाली फैक्ट्री में मंगलवार शाम भीषण आग लग गई, जिसमें चार श्रमिकों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज पास के अस्पताल में जारी है, जबकि शवों को पोस्टमार्टम के लिए रोहिणी स्थित बाबा भीमराव अंबेडकर अस्पताल भेजा गया है।

दमकल विभाग को शाम 7:30 बजे फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद मौके पर एक के बाद एक 16 दमकल गाड़ियां भेजी गईं। आग की भयावहता को देखते हुए बाद में आठ और गाड़ियां घटनास्थल पर भेजी गईं। फैक्ट्री में आग के वक्त करीब 12 से 13 मजदूर मौजूद थे। अधिकांश लोग समय रहते बाहर निकल गए, लेकिन चार श्रमिक भीतर ही फंस गए।

दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अर्थमूवर की मदद से फैक्ट्री की दीवार तोड़नी पड़ी, तब जाकर बचाव दल भीतर दाखिल हो सका। सर्च ऑपरेशन के दौरान मंगलवार देर रात करीब 1 बजे तीन शव निकाले गए, जबकि चौथा शव बुधवार सुबह 9 बजे बरामद किया गया।

फिलहाल फैक्ट्री में कूलिंग और सर्च ऑपरेशन का कार्य जारी है। दमकल विभाग के अनुसार, आग पूरी तरह बुझाने में करीब 12 घंटे का समय लगा। घायलों को पहले नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर उन्हें बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। रोहिणी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच जारी है। साथ ही फैक्ट्री मालिक की तलाश की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि फैक्ट्री वैध रूप से संचालित हो रही थी या अवैध रूप से।

उत्तराखंड मौसम विभाग ने जारी किया येलो और ऑरेंज अलर्ट, रहें सतर्क

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देहरादून : राज्य में मानसून की सक्रियता तेज हो गई है। 25 से 30 जून तक उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं का दौर चलने का पूर्वानुमान जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इस दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

26 जून

मौसम विभाग ने बागेश्वर, नैनीताल और रुद्रप्रयाग जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी है। साथ ही देहरादून, टिहरी, चमोली, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। साथ ही राज्य के सभी जिलों में बिजली चमकने, गरज के साथ वर्षा और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।

27 जून

इस दिन बागेश्वर और नैनीताल में फिर से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। जबकि रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, चंपावत और पिथौरागढ़ में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा गरज-चमक और तेज हवाओं का सिलसिला बना रहेगा।

28 जून

बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और नैनीताल में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। राज्य के सभी जिलों में आकाशीय बिजली, तेज बारिश और हवाओं का क्रम जारी रहने की संभावना है।

29-30 जून

वहीँ, इन दोनों दिनों में राज्य के सभी जनपदों में अधिकतर स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। गरज-चमक और आकाशीय बिजली की घटनाएं भी देखी जा सकती हैं।

यात्रा सोच-समझकर करें

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और मौसम विभाग ने चारधाम यात्रा कर रहे तीर्थयात्रियों, पर्वतीय मार्गों पर यात्रा कर रहे पर्यटकों तथा स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करें। विशेष रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी किनारे बसे इलाकों और ऊँचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

लगातार बारिश से केदारनाथ पैदल मार्ग बना चुनौतीपूर्ण, मुनकटिया के पास मार्ग अवरुद्ध

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रुद्रप्रयाग : मानसून की दस्तक के साथ लगातार हो रही बारिश के कारण केदारनाथ धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों को इन दिनों अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। सोनप्रयाग से मुनकटिया स्लाइडिंग जोन होते हुए श्रद्धालुगण गौरीकुंड तक पैदल यात्रा कर रहे हैं, जिससे उनकी कुल पैदल दूरी लगभग 24 किलोमीटर हो गई है।

पुलिस-प्रशासन के अनुसार, गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक का पारंपरिक पैदल मार्ग भी लगातार हो रही बारिश के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। विशेषकर मुनकटिया क्षेत्र में रात्रि में हुई वर्षा के बाद से भारी मलबा और पत्थर आने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिसे खोल दिया गया है, लेकिन  यहां ख़तरा अब भी बना हुआ है।

इस कठिन परिस्थिति के बीच भी श्रद्धालु लगभग 24 किलोमीटर लंबा पैदल ट्रैक तय कर बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग में फिसलन, कीचड़ और अचानक भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए यात्रा की योजना बनाएं।

मौके पर तैनात पुलिस व प्रशासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। तीर्थयात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा के दौरान उपयुक्त वर्षा सुरक्षा सामग्री, ट्रैकिंग जूते और आवश्यक दवाइयों के साथ ही निकलें। खराब मौसम में ऊपरी मार्गों पर चढ़ाई से यथासंभव बचें।

यमुनोत्री पैदल मार्ग पर रेस्क्यू अभियान तीसरे दिन भी जारी, यात्रा पर अस्थायी रोक

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उत्तरकाशी : यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर नौकैंची के समीप हुए भूस्खलन के चलते लापता हुए लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान आज तीसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार सुबह एसडीआरएफ की टीम ने स्निफर डॉग की मदद से सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू किया। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यमुनोत्री यात्रा पर फिलहाल एक दिन के लिए रोक लगा दी है। यात्रा के दौरान विभिन्न पड़ावों पर तीर्थयात्रियों को रोका गया है और दोनों पैदल मार्गों पर व्यवस्थाएं सुधारने का कार्य जारी है।

नौकैंची के पास हुए भारी भूस्खलन के कारण मार्ग पर भारी मलबा और बोल्डर जमा हो गए हैं, जिससे रास्ते पर लगी रेलिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके साथ ही, भंडेलीगाड से यमुनोत्री को जोड़ने वाले वैकल्पिक मार्ग पर भी बारिश के कारण कीचड़ और फिसलन की स्थिति बनी हुई है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्वयं मौके पर पहुंचकर दोनों मार्गों का निरीक्षण किया और सुरक्षा के दृष्टिकोण से मंगलवार को सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोके रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने लोक निर्माण विभाग और जिला पंचायत के अधिकारियों को मार्गों से मलबा एवं बोल्डर हटाने, सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने तथा बिजली-पानी की आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश भी जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यवस्थाएं सामान्य होने के बाद ही बुधवार से जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम के लिए यात्रा बहाल की जाएगी।

चुनाव से बचना चाहती थी सरकार, नौकरशाही हावी : धस्माना

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देहरादून : प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर मचे घमासान पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा सरकार कभी पंचायत चुनाव करवाना ही नहीं चाहती थी। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में चुनाव प्रक्रिया स्थगित करने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक पूर्वनियोजित साजिश का हिस्सा है।

“कांग्रेस के सीनियर लीडर सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सरकार तो शुरू से ही चुनाव से भाग रही थी। हाईकोर्ट की लताड़ के बाद आनन-फानन में प्रक्रिया शुरू की और फिर जानबूझ कर आरक्षण का रोस्टर शून्य कर दिया।

धस्माना ने सीधे तौर पर प्रदेश सरकार की नीयत और नौकरशाही के बढ़ते वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए कह कि प्रदेश में अब मंत्रियों का कोई वजूद ही नहीं रहा। सारा तंत्र नौकरशाह चला रहे हैं। पंचायती राज मंत्री कौन है, यह भी किसी को नहीं पता। अधिनियम की नियमावली का तो और भी बुरा हाल है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालत ने सरकार से पंचायती राज नियमावली मांगी तो सरकार का जवाब हास्यास्पद था कि नियमावली नोटिफाई हो गई थी, लेकिन प्रेस वालों ने छापी नहीं। न्यायालय ने इस गैरजिम्मेदाराना जवाब से असंतुष्ट होकर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

प्रशासक भी जैसे-जैसे मन आया बदले गए”

धस्माना ने सरकार की कार्यशैली को अजूबा तंत्र बताते हुए कहा कि पहले तो जिला पंचायत अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया, फिर उनके कार्यकाल समाप्त होने पर पंचायतों को लावारिस छोड़ दिया गया, और बाद में अधिकारियों को प्रशासक बना दिया गया।

अब जब कोर्ट की डांट पड़ी तो आनन-फानन में चुनावों का एलान किया गया वो भी बिना आरक्षण रोस्टर के। उन्होंने कहा कि सरकार की मानसिक स्थिति ऐसी हो गई है कि अब जब नामांकन में केवल 14 घंटे बचे थे, तब जाकर लोगों को पता चला कि चुनाव रद्द कर दिए गए हैं।