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उत्तराखंड में रेड अलर्ट: नौ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा के करीब

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उत्तराखंड में मानसून ने विकराल रूप ले लिया है। मौसम विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भारी से भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में लगातार बारिश से जलभराव, भूस्खलन और नदी-नालों के उफान की आशंका जताई गई है।

देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शेष पर्वतीय जिलों में भी तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने लोगों से खासतौर पर रात के समय सतर्क रहने और नदी-नालों के समीप आवागमन से परहेज करने की अपील की है।

हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा के जलस्तर में खतरनाक वृद्धि देखी गई है। हरिद्वार में गंगा का जलस्तर रविवार सुबह 292.90 मीटर तक पहुंच गया, जो चेतावनी रेखा 293 मीटर से मात्र 10 सेंटीमीटर कम है।

ऋषिकेश में भी गंगा का जलस्तर 338.97 मीटर मापा गया, जबकि चेतावनी रेखा 339.50 मीटर है। प्रशासन ने सभी घाटों को खाली करा दिया है और गंगा किनारे बस्तियों को अलर्ट कर दिया गया है।

भारी बारिश के चलते यमुनोत्री हाईवे पर करीब 30 मीटर सड़क बह गई, जिससे 850 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकना पड़ा। एनएच, बीआरओ और जिला प्रशासन की टीम मार्ग बहाली में जुटी है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने का आग्रह किया है। बाढ़ राहत चौकियां सक्रिय हैं और पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

सिलाई बैंड हादसा: भूस्खलन में दबे दो मजदूरों के शव बरामद, सात अब भी लापता

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उत्तरकाशी/बड़कोट : रविवार सुबह उत्तरकाशी जिले की बड़कोट तहसील के अंतर्गत सिलाई बैंड क्षेत्र में भीषण भूस्खलन और अतिवृष्टि का तांडव देखने को मिला। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि सात मजदूरों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। राहत की बात यह रही कि 20 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

भूस्खलन की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी प्रशांत आर्य स्वयं आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचे और वहां से राहत व बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग शुरू की। साथ ही राजस्व, एसडीआरएफ, पुलिस और चिकित्सकों की टीमों को तत्काल मौके पर रवाना किया गया। भूस्खलन के समय कुल 29 मजदूर घटनास्थल पर मौजूद थे। दो शव अब तक निकाले जा चुके हैं, जबकि लापता मजदूरों की खोजबीन युद्धस्तर पर जारी है।

मृतकों की पहचान:

1. दूजेलाल, उम्र 55 वर्ष, निवासी पीलीभीत (उत्तर प्रदेश).

2. केवल विष्ट, उम्र 43 वर्ष, पुत्र श्री बम बहादूर, निवासी कर्ममोहनी, थाना राजापुर, जिला नेपाल.

लापता मजदूरों की सूची:

1. रोशन चौधरी, उम्र 37, निवासी भीमपुर, जिला वर्दिया, नेपाल.

2. अनवीर धामी, उम्र 40, निवासी बाजुरा, नेपाल.

3. कल्लूराम चौधरी, उम्र 60, निवासी बाजुरा, नेपाल.

4. जयचंद उर्फ बॉबी, उम्र 38, निवासी कालिदास रोड, देहरादून.

5. छोटू, उम्र 22, निवासी कालिदास रोड, देहरादून.

6. प्रियांश, उम्र 20, निवासी कालिदास रोड, देहरादून.

7. सर कटेल धामी, उम्र 32, पुत्र श्री अनवीर धामी, निवासी बाजुरा, नेपाल.

जिलाधिकारी स्मार्ट कंट्रोल रूम में रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र और उपजिलाधिकारी बड़कोट बृजेश तिवारी मौके पर मौजूद रहकर राहत कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं।

वहीं, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम आए तीर्थ यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और उनके लिए जल, भोजन और जरूरी सामग्री की व्यवस्था जिला पूर्ति विभाग द्वारा सुनिश्चित की गई है।

भारी बारिश के चलते यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पालीगाड़, कुथनौर और झज्जरगाड़ में बाधित हुआ है। मार्ग को बहाल करने के लिए एनएच विभाग की पांच जेसीबी मशीनें, एक पोकलेन और ट्रॉला मशीनें युद्धस्तर पर कार्यरत हैं। गंगोत्री हाईवे पर लालढांग, नलुणा और डबराणी मार्गों को खोल दिया गया है।

देहरादून में रातभर की बारिश से तबाही, कारगी क्षेत्र में दो मंजिला मकान ढहा

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देहरादून :  राजधानी देहरादून में देर रात से शुरू हुई मूसलधार बारिश ने तबाही मचा दी। लगातार होती बारिश के चलते कारगी क्षेत्र स्थित मदीना मस्जिद कॉलोनी में शहीद अंसारी का दो मंजिला मकान भरभराकर ढह गया।

हालांकि गनीमत यह रही कि मकान के गिरने की आशंका को भांपते हुए परिजनों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था। अन्यथा इस हादसे में जानमाल की बड़ी क्षति हो सकती थी।

बारिश का असर पूरे शहर में देखने को मिला। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है, वहीं कई जगहों पर पुश्ते टूटने से खतरा और बढ़ गया है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अजय सिंह स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। दून पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से त्वरित निपटा जा सके।

सात जिलों में रेड अलर्ट, तीन दिन बेहद संवेदनशील

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देहरादून  :उत्तराखंड में मानसून ने पूरी तरह से दस्तक दे दी है और इसके साथ ही प्रदेश में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले तीन दिनों 29 जून से 1 जुलाई तक प्रदेश के सात जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चम्पावत, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों के कुछ इलाकों में भीषण वर्षा की संभावना है। इसके साथ ही रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के लिए भी भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

विशेषज्ञों ने इन तीन दिनों को अत्यंत संवेदनशील अवधि करार दिया है। इस दौरान भूस्खलन, जलभराव, और नदियों व नालों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि की आशंका जताई गई है। ऐसे में आमजन से नदी-नालों के पास न जाने, अनावश्यक यात्रा से बचने और रात्रि में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

यात्रियों और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने से पहले मौसम की जानकारी लें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। आपदा की स्थिति में नजदीकी प्रशासनिक इकाई को तुरंत सूचित करें।

लगातार बारिश के चलते चारधाम यात्रा एक दिन के लिए स्थगित, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए निर्णय

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देहरादून : उत्तराखंड में जारी मूसलधार बारिश और संभावित भूस्खलनों के मद्देनज़र चारधाम यात्रा को एहतियातन एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए लिया गया है।

आयुक्त पांडेय ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय श्रद्धालुओं को किसी भी प्राकृतिक आपदा से बचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा, “मार्गों पर फंसे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।”

प्रभावित जिलों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है और राहत व बचाव दलों को तैनात कर दिया गया है।यात्रा को दोबारा शुरू करने का निर्णय मौसम और मार्गों की स्थिति की समीक्षा के बाद कल लिया जाएगा।

श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और जब तक मौसम सामान्य न हो जाए, तब तक यात्रा स्थलों की ओर न बढ़ें।

यमुनोत्री हाईवे पर बादल फटने से भारी तबाही: सिलाई बैंड के पास से 9 मजदूर लापता, राहत व बचाव अभियान जारी

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बड़कोट: उत्तरकाशी जनपद में शुक्रवार देर रात से जारी मूसलधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। वर्षा के कारण जिले के दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।

प्रशासन द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर पालिगाड़, कुथनौर व झाझरगाड़ के पास मलबा और बोल्डर गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो गया है।

वहीं, गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नेताला, बिशनपुर, लालढांग और नालूणा जैसे संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन के चलते यातायात पूरी तरह बंद हो गया है।

सबसे गंभीर सूचना सिलाई बैंड क्षेत्र से आई है, जहाँ बीती रात अतिवृष्टि के कारण 9 मजदूरों के लापता होने की सूचना है। राहत और खोजबीन के लिए SDRF, NDRF, राजस्व विभाग, NH बड़कोटा, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें मौके पर जुटी हैं। भारी बारिश और दुर्गम भू-भाग के बावजूद टीमें युद्धस्तर पर खोजबीन और राहत कार्यों में लगी हैं।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी स्वयं आपातकालीन परिचालन केंद्र में उपस्थित रहकर पूरे राहत एवं बचाव कार्य की सतत निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और पहाड़ी क्षेत्रों में न जाएं।

जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक भारी वर्षा की संभावना जताई है, जिसे देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

वहीं, जिले के बड़कोट तहसील क्षेत्र में शुक्रवार को बादल फटने की एक गंभीर घटना सामने आई। प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, तहसील बड़कोट के कुथनौर गांव में बादल फटने की घटना घटी है। सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन की टीम हरकत में आई और त्वरित रूप से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए गए।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बादल फटने से कुथनौर गांव के पास कृषि भूमि में भारी मलबा जमा हो गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि अथवा पशुहानि की पुष्टि नहीं हुई है।

 

भाजपा ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर को किया निष्कासित, दो पत्नी प्रकरण और UCC पर बयान बना कारण

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देहरादून : भाजपा ने ज्वालापुर से पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता सुरेश राठौर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। निर्णय का कारण बना राठौर का व्यक्तिगत और सार्वजनिक आचरण, जिसने पार्टी की छवि को गहरा आघात पहुंचाया।

पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने हाल ही में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर विवादित बयान देकर पार्टी की नीति का मजाक उड़ाया था। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी पहली पत्नी और परिवार की मौजूदगी में दूसरी महिला से विवाह कर उसे सार्वजनिक रूप से पत्नी का दर्जा दे दिया। यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में सामने आया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

राठौर का नाम लंबे समय से अभिनेत्री उर्मिला सनावर के साथ विवादों में रहा है। दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई बार मुकदमे दर्ज कराए। अब हाल ही में राठौर ने उसी अभिनेत्री से विवाह कर लिया, जिससे मामला और गर्मा गया। जब इस विवाह का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, तो पार्टी नेतृत्व ने इस पर सख्त रुख अपनाया।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के निर्देश पर भाजपा प्रदेश महामंत्री राजेंद्र बिष्ट ने सुरेश राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में राठौर के अमर्यादित और अनुशासनहीन आचरण का हवाला देते हुए सात दिन में जवाब मांगा गया था।

नोटिस में कहा गया कि सुरेश राठौर की गतिविधियां लगातार मीडिया और सोशल मीडिया में पार्टी के मूल्यों और अनुशासन के विपरीत दिखाई दे रही थीं, जिससे भाजपा की सार्वजनिक छवि को ठेस पहुंची है। समय पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर पार्टी ने उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया।

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी, दो चरणों में होगा मतदान

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देहरादून: उत्तराखंड में लंबे इंतजार के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जाएंगे।

जारी अधिसूचना के अनुसार, 30 जून को जिला निर्वाचन अधिकारी अपने-अपने जनपदों में चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी करेंगे।

  • पहले चरण का मतदान 24 जुलाई को आयोजित होगा।
  • दूसरे चरण का मतदान 28 जुलाई को संपन्न कराया जाएगा।
  • जबकि मतगणना 31 जुलाई को की जाएगी।
  • इस बार पंचायत चुनाव 89 विकासखंडों और 7,499 ग्राम पंचायतों में कराए जाएंगे।राज्य के 12 जिलों में कुल 66,418 पदों के लिए चुनाव होंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस पंचायत चुनाव में 47 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग ने सभी जिला प्रशासन को चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

उत्तराखंड मौसम अपडेट: इन जिलों के लिए अलर्ट जारी, रहें सतर्क

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देहरादून : प्रदेश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और अब मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह ने जानकारी दी कि शुक्रवार, 28 जून को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, देहरादून, नैनीताल और चंपावत जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक वर्षा के कारण भूस्खलन, सड़क अवरोध और नदी-नालों में उफान जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को भी सतर्क कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। खासकर चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर की जनहित याचिका पर सुनवाई, दून घाटी अधिसूचना 1989 निष्क्रिय करने के मामले में हाईकोर्ट सख्त

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नैनीताल : दून घाटी की अधिसूचना 1989 को निष्क्रिय किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर आज उत्तराखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कांग्रेस प्रवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश नरेंद्र और न्यायाधीश आलोक माहरा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है। अदालत ने निर्देश दिया कि दून घाटी से संबंधित सभी कार्य सुप्रीम कोर्ट के 30 अगस्त 1988 के निर्देशों के अनुरूप ही हों।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी ने अदालत को अवगत कराया कि केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 13 मई 2025 को एक शासनादेश जारी कर 1989 की अधिसूचना को निष्क्रिय कर दिया, जिससे दून घाटी क्षेत्र में भारी औद्योगिक गतिविधियों को हरी झंडी मिल गई है। इसमें स्लॉटर हाउस, क्रशर माइनिंग, और रेड कैटेगरी की अन्य औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने की अनुमति शामिल है।

याचिका में कहा गया है कि यह निर्णय भारत सरकार के National Clean Air Programme (NCAP) के भी विपरीत है, जिसके तहत देहरादून और ऋषिकेश जैसे शहरों को वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चिन्हित किया गया था। देहरादून, देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है जहां PM10 की मात्रा अनुमेय सीमा से तीन गुना पाई गई है।

उल्लेखनीय है कि 01 फरवरी 1989 को जारी दून घाटी अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लागू की गई थी ताकि मसूरी, डोईवाला, सहसपुर, ऋषिकेश और विकासनगर जैसे क्षेत्रों को अवैध खनन और प्रदूषण से बचाया जा सके। परंतु अब इस अधिसूचना को हटाकर इन क्षेत्रों को रेड जोन कैटेगरी के औद्योगिक विकास के लिए खोला जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संकट गहरा सकता है।

याचिकाकर्ता अभिनव थापर ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी दो बार – 8 फरवरी 2024 और 4 मार्च 2025 – इस विषय पर ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद पीएमओ के हस्तक्षेप से पर्यावरण मंत्रालय ने उत्तराखंड वन विभाग से रिपोर्ट मांगी, लेकिन बावजूद इसके 13 मई 2025 को शासनादेश जारी कर अधिसूचना को निष्क्रिय कर दिया गया।

थापर ने कहा कि यह सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि 15 लाख लोगों के जीवन और उत्तराखंड की पारिस्थितिकी से जुड़ा मसला है। जब जोशीमठ, रैणी, उत्तरकाशी जैसी त्रासदियों के बाद भी सरकार नहीं चेती, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इस निर्णय के खिलाफ अंत तक संघर्ष करेंगे।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया है कि वह पर्यावरण मंत्रालय को विस्तृत जानकारी देकर इस अधिसूचना के निष्क्रिय किए जाने से हुए नुकसान के प्रमाण प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की गई है।