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मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक शुरू, इन प्रस्तावों पर हो रही चर्चा

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को उत्तराखंड सचिवालय में मंत्रिमंडल की अहम बैठक शुरू हो गई है। सुबह 11 बजे से जारी इस बैठक में राज्य के कई महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होनी तय मानी जा रही है। विशेष बात यह है कि यह बैठक 28 जून को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पंचायत चुनाव की संशोधित अधिसूचना के बाद होने वाली पहली कैबिनेट बैठक है।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में विधानसभा के मानसून सत्र की तिथियों और स्थान को लेकर भी चर्चा हो सकती है। पिछले सप्ताह हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री को इस संबंध में निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया था।उत्तराखंड सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की जाएगी। इसी क्रम में आज की बैठक भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुलाई गई है।

बैठक में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार की गई राज्य महिला नीति के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। यह नीति राज्य में महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा के लिहाज़ से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी चर्चा की जाएगी, जिसके तहत परिवार रजिस्टर की नकल के आधार पर आयुष्मान कार्ड बनाए जा सकेंगे। यह प्रक्रिया आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी और कार्ड निर्माण प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाएगी।

बैठक में शिक्षा विभाग की शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किए जाने से संबंधित प्रस्ताव पर भी विचार संभव है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेगी।

बैठक में रोगी कल्याण समिति (Patient Welfare Committee) के गठन को लेकर भी प्रस्ताव लाया गया है। योजना के तहत ब्लॉक स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकेंगी।

कांवड़ यात्रा मार्ग की सभी खाद्य दुकानों पर लगाना होगा लाइसेंस, नाम और पहचान पत्र

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देहरादून। श्रद्धा और आस्था के महापर्व कांवड़ यात्रा 2025 के लिए उत्तराखंड सरकार ने पूरी तरह कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष की यात्रा के लिए विशेष निगरानी कार्ययोजना तैयार की है, जिसका उद्देश्य है—लाखों श्रद्धालुओं को शुद्ध, सुरक्षित और मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराना।

हर खाद्य कारोबारी को दिखाना होगा लाइसेंस

स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य संरक्षा व औषधि प्रशासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि यात्रा मार्गों पर स्थित होटल, ढाबों, ठेलियों और खाद्य विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
हर खाद्य कारोबारी को:

  • अपना लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रतिष्ठान में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।

  • ठेली व फड़ संचालकों को भी फोटो पहचान पत्र और पंजीकरण प्रमाणपत्र साथ रखना और प्रदर्शित करना जरूरी है।

उल्लंघन पर 2 लाख तक जुर्माना

जो व्यापारी इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 की धारा 55 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें ₹2 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मिलावटखोरों पर रहेगी कड़ी नजर

कांवड़ यात्रा के दौरान पंडालों, भंडारों और भोजन वितरण केंद्रों पर परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की कड़ी निगरानी की जाएगी। यदि किसी भोजन में मिलावट या मानक से खिलवाड़ पाया गया, तो तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बिना लाइसेंस वालों पर होगी आपराधिक कार्रवाई

अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा श्री ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि बिना लाइसेंस खाद्य व्यवसाय चलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।
नियम उल्लंघन करने पर व्यापारियों को आर्थिक दंड के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा।

जनता को किया जाएगा जागरूक

स्वास्थ्य विभाग की टीमें आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) माध्यमों के ज़रिए जनता और खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा नियमों, उपभोक्ता अधिकारों और शुद्ध भोजन की पहचान के प्रति जागरूक करेंगी।

शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर

सरकार ने टोल फ्री नंबर – 18001804246 भी जारी किया है, जिस पर कोई भी व्यक्ति भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलते ही प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचकर तुरंत कार्रवाई करेंगी।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव : 12 जिलों में नामांकन प्रक्रिया आज से शुरू, 31 जुलाई को आएंगे नतीजे

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देहरादून : उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ने लगी है। हरिद्वार को छोड़ प्रदेश के 12 जिलों में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया बुधवार, 2 जुलाई से शुरू हो रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के 66,418 पदों पर चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे।

नामांकन 2 से 5 जुलाई तक, सुबह 8 से शाम 4 बजे तक

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, दोनों चरणों के लिए नामांकन पत्र 2 जुलाई से 5 जुलाई तक सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक दाखिल किए जा सकेंगे। उसके बाद 7 से 9 जुलाई तक नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया चलेगी। उम्मीदवार 10 और 11 जुलाई को सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक अपना नाम वापस ले सकेंगे।

पहले चरण का चुनाव 24 को, दूसरे चरण का 28 जुलाई को

चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण के लिए प्रतीक चिह्न 14 जुलाई को तथा दूसरे चरण के लिए 18 जुलाई को आवंटित किए जाएंगे।

  • पहले चरण का मतदान 24 जुलाई को

  • दूसरे चरण का मतदान 28 जुलाई को होगा।
    31 जुलाई को दोनों चरणों के चुनावी परिणाम घोषित किए जाएंगे।

89 विकासखंडों में होंगे चुनाव

इस बार के पंचायत चुनाव में प्रदेश के 89 विकासखंडों में

  • 55,587 ग्राम पंचायत सदस्य,

  • 7,499 ग्राम प्रधान,

  • 2,974 क्षेत्र पंचायत सदस्य,

  • और 358 जिला पंचायत सदस्य
    के पदों के लिए चुनाव कराया जाएगा।

नामांकन फॉर्म की जोरदार बिक्री

नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत से पहले ही चुनावी माहौल गर्म है। 30 जून तक कुल 6,853 नामांकन पत्रों की बिक्री हो चुकी थी, जो ग्रामीण इलाकों में चुनावी उत्साह को दर्शाता है।

भयंकर बारिश में पंचायत चुनाव करवाना जनता की जान से खिलवाड़ : धस्माना

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देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में आई आपदाओं के बीच पंचायत चुनाव कराए जाने को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सरकार की अदूरदर्शिता और सत्ता की ललक ने प्रदेश को खतरे में डाल दिया है।

कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में धस्माना ने कहा, “आज पूरा उत्तराखंड आपदा की चपेट में है। उत्तरकाशी से लेकर चंपावत तक भूस्खलन, बादल फटना, पुल टूटना और मार्ग अवरुद्ध होना आम बात हो चुकी है। बावजूद इसके सरकार पंचायत चुनाव कराने में जुटी है, जो सीधे-सीधे जनता की जान से खिलवाड़ है।”

उन्होंने बताया कि प्रदेश के अधिकांश पर्वतीय जिलों में लगातार हो रही बारिश से सड़कें बंद हैं। बड़कोट (उत्तरकाशी) में बादल फटने, गुमखाल (पौड़ी) में भारी भूस्खलन, कोटद्वार-नजीबाबाद मार्ग पर पुलिया टूटने जैसे हादसे इस बात के संकेत हैं कि हालात बेहद संवेदनशील हैं। इसके बावजूद चुनाव कराना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

धस्माना ने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने समय पर चुनाव नहीं कराए और असंवैधानिक रूप से पूर्व प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर सत्ता चलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब हाईकोर्ट की फटकार पड़ी, तब आनन-फानन में चुनाव की घोषणा कर दी गई। इतना ही नहीं, सरकार ने आरक्षण रोस्टर को ही शून्य कर दिया, जिससे विवाद खड़ा हुआ और लोग न्यायालय की शरण में गए।

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट कहा कि “अगर इन हालातों में चुनाव के कारण किसी भी व्यक्ति की जान जाती है, तो उसके लिए पूरी तरह से राज्य सरकार और भाजपा जिम्मेदार होगी।”

धस्माना ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को साफ शब्दों में चेताया है कि “आपदा के बीच चुनाव कराने की जिद से अगर जन हानि हुई तो इसकी जवाबदेही भाजपा सरकार की होगी।”

 

मुख्य बिंदु:

कांग्रेस ने पंचायत चुनाव को बताया अदूरदर्शी निर्णय.

बारिश और आपदा के बीच चुनाव को बताया लोकतंत्र के विरुद्ध.

आरक्षण रोस्टर में छेड़छाड़ कर जानबूझकर विवाद खड़ा करने का आरोप

हाईकोर्ट की फटकार के बाद आनन-फानन में चुनाव की घोषणा.

सरकार व निर्वाचन आयोग को जन हानि के लिए ठहराया जिम्मेदार.

कैबिनेट मीटिंग में मोदी सरकार के बड़े फैसले, रोजगार योजना, खेल नीति, R&D फंड समेत कई फैसलों पर मुहर

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में देश के विकास को रफ्तार देने वाले कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार ने रोजगार, खेल, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े निर्णय लिए हैं। रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (ELI) के तहत अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियों के सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के लिए सरकार ने 99,446 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। योजना का मकसद संगठित क्षेत्र में रोजगार को प्रोत्साहित करना, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना और देश की कार्यबल क्षमता को बढ़ाना है।

कैबिनेट ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खेल नीति 2025 (NSP) को भी मंजूरी दी है, जो अब तक लागू 2001 की खेल नीति की जगह लेगी। इसका उद्देश्य भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करना है, विशेषकर 2036 ओलंपिक खेलों के संदर्भ में। इस नीति के माध्यम से खेलों को जनसामान्य से जोड़ने, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता हासिल करने का रोडमैप तय किया गया है।

देश में अनुसंधान और नवाचार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने RDI (रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन) योजना को भी हरी झंडी दी है। इस योजना के तहत सरकार एक लाख करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध कराएगी, जिससे निजी क्षेत्र को कम या शून्य ब्याज दर पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इसका मकसद भारत के आरएंडडी पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन देना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत करना है।

इसके अलावा, तमिलनाडु को इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा तोहफा मिला है। कैबिनेट ने परमकुडी-रामनाथपुरम खंड को चार लेन में बदलने की योजना को मंजूरी दी है। यह खंड 46.7 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर 1,853 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना से दक्षिणी तमिलनाडु के प्रमुख शहरों—मदुरै, रामेश्वरम, मंडपम और धनुषकोडी—के बीच लॉजिस्टिक्स, व्यापार और यातायात को नया बल मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

“सेवा, समर्पण और संस्कार का सम्मान: अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी को भावभीनी विदाई”

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देहरादून : श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) में तीन दशक की सेवा तथा अधिवर्षता अवधि के पश्चात अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी सोमवार 30 जून को सेवानिवृत्त हो गये । बीते कल देर शाम केनाल रोड देहरादून स्थित कार्यालय में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण और बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, वित्त नियंत्रक मनीष उप्रेती एवं उनके सहकर्मी सहायक अभियंता/ प्रभारी अधिकारी बदरीनाथ विपिन तिवारी की उपस्थिति में अधिकारियों कर्मचारियों ने उन्हें सेवानिवृत्ति अवसर पर फूल माला पहना, स्मृति चिह्न/ अभिनंदन पत्र भेंटकर विदाई दी तथा मंदिर समिति में उनके सेवाकाल की प्रशंसा भी की इस अवसर पर अधिशासी अभियंता के पारिवारिक जनों का भी बीकेटीसी की ओर से स्वागत किया गया।

विदाई समारोह को संबोधित करते हुए बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी ने केदारनाथ यात्रा के मुख्य यात्राकाल मई – जून के दौरान बतौर मुख्य प्रभारी अधिकारी बेहतर कार्य किया। बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण ने कहा कि वह अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी को बहुत समय से जानते है अपने सेवाकाल में उन्होंने अच्छा कार्य किया।

बीके मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि जब शासन वह बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बने तो अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी के कार्य अनुभव से प्रभावित हुए।

विदाई समारोह में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल उनके छोटे अनुज अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी के सेवानिवृत्ति के अवसर पर विदाई समारोह में शामिल हुई तथा बीकेटीसी को धन्यवाद दिया।

दूसरी और प्राप्त संदेश में बदरीनाथ धाम रावल अमरनाथ नंबूदरी, केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, बीकेटीसी सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, प्रह्लाद पुष्पवान,धीरज मोनू पंचभैया, देवीप्रसाद देवली, डा. विनीत पोस्ती सहित सभी बीकेटीसी सदस्यगणों, बीकेटीसी वित्त नियंत्रक मनीष उप्रेती, विशेष कार्याधिकारी रमेश सिंह रावत, पूर्व धर्माधिकारी भुवन उनियाल,विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल सहायक अभियंता गिरीश देवली मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान,कर्मचारी संघ अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट , सचिव भूपेन्द्र रावत, उपाध्यक्ष रविंद्र भट्ट, अवर अभियंता गिरीश रावत, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस पुष्पवान एवं यदुवीर पुष्पवान,प्रशासनिक अधिकारी विवेक थपलियाल, श्री नृसिंह मंदिर प्रभारी संदीप कपरवाण बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा हरीश गौड़ सहित सभी अधिकारियों- कर्मचारियों, मंदिर समिति विश्राम गह प्रबंधकों ने अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी के सेवानिवृत्ति अवसर पर उन्हें बधाई दी तथा भगवान बदरीविशाल तथा बाबा केदारनाथ से उनके दीर्घायु की कामना की है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति में बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी को निर्माण के साथ साथ प्रशासनिक कार्यो का भी लंबा अनुभव रहा वह वर्ष 2023 से 2024 यात्रा काल में बदरीनाथ धाम प्रभारी अधिकारी रहे।इस वर्ष केदारनाथ धाम मुख्य प्रभारी अधिकारी बने। निर्माण के क्षेत्र में उनका मंदिर समिति को खासा योगदान रहा विश्राम गृहों के उच्चीकरण आधुनिकीकरण तथा श्री नृसिंह मंदिर के जीर्णोद्धार पुनर्निर्माण सहित श्री विंसर मंदिर पौड़ी के जीर्णोद्धार में उनकी अहम भूमिका रही।

विदाई समारोह के अवसर पर अधिशासी अभियंता की धर्मपत्नी डा. नीलम ध्यानी, छोटे भाई डा. अतुल ध्यानी सहित अधिकारी कर्मचारी क्रमश पीआरओ अजय, श्रेयांस द्विवेदी,निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी,प्रबंधक किशन त्रिवेदी,विशाल पंवार ,अतुल डिमरी, संजय भट्ट, दीपेंद्र रावत, अस्थायी कर्मचारी संघ सचिव राकेश झिंक्वाण, कुलदीप नेगी,विनोद नौटियाल, अनिता बर्त्वाल, चालक संघ चमोली संरक्षक बल्लभ सेमवाल, कन्हैया लाल, सचिन सेमवाल आदि मौजूद रहे।

बदल गए कई नियम, रेलवे टिकट से लेकर ATM निकासी और क्रेडिट कार्ड शुल्क तक, आपकी जेब पर सीधा असर

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हर महीने की पहली तारीख कुछ नए नियम और बदलाव लेकर आती है, और इस बार 1 जुलाई 2025 से जो नए बदलाव लागू हुए हैं, उनका सीधा असर आपकी जेब और जिंदगी पर पड़ सकता है। रेलवे टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी से लेकर एटीएम निकासी और बैंकिंग शुल्क तक, कई नियमों में बदलाव किए गए हैं। जानिए किन बदलावों पर रखनी होगी नजर—


रेल यात्रा महंगी हुई

अब 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी की यात्रा पर रेलवे टिकट महंगे हो गए हैं।

  • नॉन-एसी टिकट में प्रति किमी 1 पैसा,

  • एसी टिकट में प्रति किमी 2 पैसे की बढ़ोतरी हुई है।
    500 किमी से कम दूरी की यात्रा पर कोई बदलाव नहीं, लेकिन 500 से ज्यादा किमी पर द्वितीय श्रेणी में 0.5 पैसे/किमी का अतिरिक्त शुल्क लागू होगा।


तत्काल टिकट बुकिंग के नए नियम

अब तत्काल टिकट केवल उन्हीं यात्रियों को मिलेगा जिनका IRCTC अकाउंट आधार से लिंक है।

  • ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य।

  • रेलवे एजेंट पहले 30 मिनट तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे।


पैन कार्ड के लिए आधार जरूरी

  • अब पैन कार्ड के लिए आधार नंबर अनिवार्य कर दिया गया है।

  • जिनके पास पैन है, उन्हें 31 दिसंबर 2025 तक आधार से लिंक करना होगा, अन्यथा 1 जनवरी 2026 से पैन निष्क्रिय माना जाएगा।


क्रेडिट कार्ड और एटीएम चार्ज में बदलाव

  • कोटक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने एटीएम निकासी और क्रेडिट कार्ड फीस में बदलाव किया है।

  • निर्धारित सीमा से ज्यादा निकासी पर अधिक शुल्क लिया जाएगा।

  • क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान अब अनिवार्य रूप से भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) के तहत ही होगा।


बैंकिंग नियमों में बदलाव

  • HDFC बैंक ने ऑनलाइन गेमिंग पर ₹10,000 से ज्यादा खर्च पर 1% अतिरिक्त शुल्क तय किया है।

  • Paytm जैसे थर्ड-पार्टी वॉलेट में ₹10,000 से अधिक ट्रांसफर करने पर भी 1% शुल्क देना होगा।


पुराने वाहनों पर फ्यूल बैन

  • दिल्ली में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा।

  • सार्वजनिक स्थानों पर मिलने पर वाहन जब्त कर सीधे स्क्रैप यार्ड भेजे जाएंगे,

    • चार पहिया वाहनों पर ₹10,000

    • दो पहिया वाहनों पर ₹5,000 जुर्माना तय।


GST रिटर्न की प्रक्रिया सख्त

  • GSTR-3B अब स्वतः भरेगा और इसमें करदाता संशोधन नहीं कर सकेंगे।

  • गलतियों पर सीधी कार्रवाई होगी। यह पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


ITR भरने की अंतिम तिथि बढ़ी

  • वेतनभोगी करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी गई है।

  • अब 46 दिन अतिरिक्त का समय मिलेगा।


लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में संभावित कटौती

  • RBI द्वारा रेपो दर में 1% की कटौती के बाद, लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कमी की संभावना है।

  • नई दरें 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेंगी।


कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर सस्ता हुआ

  • 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 58.50 सस्ता हो गया है।

  • दिल्ली में नई कीमत 1665 प्रति सिलेंडर तय की गई है।

  • घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं।

हाईकोर्ट की सख्ती: देहरादून नगर निगम में होर्डिंग-यूनिपोल घोटाले की होगी जांच, कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर की याचिका पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

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नैनीताल/देहरादून : देहरादून नगर निगम में बीते 10 वर्षों से होर्डिंग और यूनिपोल टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और 300 करोड़ रुपये के संभावित कार्टेल “खेल” के मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, नगर निगम और जिलाधिकारी देहरादून से 3 सप्ताह में जवाब तलब किया है। यह कार्यवाही कांग्रेस प्रवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर की गई।

माननीय मुख्य न्यायाधीश नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की संयुक्त पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर निगम देहरादून में 2013 से 2023 तक होर्डिंग-यूनिपोल टेंडरों में हुई अनियमितताओं की जांच आवश्यक है। कोर्ट ने इस मुद्दे को “गंभीर भ्रष्टाचार का विषय” मानते हुए 21 जुलाई 2025 को अगली सुनवाई तय की है।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता अभिनव थापर ने कोर्ट को बताया कि 2019 में नगर निगम ने खुद की एक सर्वे कमेटी के माध्यम से 325 अवैध होर्डिंग की पहचान की थी, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वो अवैध होर्डिंग किसने बेचे? क्या वही तीन कंपनियां थीं जिन्हें वर्षों तक टेंडर दिए जाते रहे या उनकी सहयोगी फर्में थीं?

थापर का आरोप है कि भाजपा के शासनकाल में नगर निगम की मिलीभगत से एक संभावित कार्टेल ने होर्डिंग-यूनिपोल व्यवसाय पर कब्जा कर लिया और इससे राज्य को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हुई। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त 2023 को दी गई शिकायत के बावजूद अब तक किसी भी तरह की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई।

“हमने सरकार को नगर निगम की रिपोर्ट पर 4 सप्ताह में कार्यवाही के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट दाखिल किए बिना ही जांच को बंद करवा दिया,”  याचिकाकर्ता अभिनव थापर।

थापर ने हाईकोर्ट की इस कार्यवाही को “जनहित की बड़ी जीत” करार देते हुए कहा कि अब राज्य सरकार और नगर निगम को 300 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले पर अदालत को जवाब देना ही होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इस कार्रवाई के बाद नगर निगम को हुए राजस्व नुकसान की वसूली सुनिश्चित की जाएगी।

अधिवक्ता अभिजय नेगी ने जानकारी दी कि अदालत ने इस जनहित याचिका को गंभीरता से लिया है और अब सरकार, नगर निगम व जिलाधिकारी देहरादून को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना अनिवार्य होगा।

लोक निर्माण विभाग ने मानसून में लगाई कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, अधिकारियों को क्षेत्र में रहना अनिवार्य

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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता और लगातार सामने आ रही आपदाओं को देखते हुए शासन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद ही अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।

PWD को मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां जेसीबी, मशीनरी और जनशक्ति की तैनाती पहले से सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। संकरी और क्षतिग्रस्त सड़कों तथा कमजोर पुलों की निगरानी करते हुए पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करने को कहा गया है।

शासन ने यह भी निर्देशित किया है कि सभी कार्यदायी संस्थाएं स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करें, ताकि आपदा की स्थिति में समय रहते राहत कार्य शुरू किए जा सकें। इसके अलावा यह भी संज्ञान में आया है कि विभागीय अभियंता एवं कर्मचारी अधिकांशतः अपने कार्यालयों में ही रहते हैं, जबकि मानसून काल में उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में रहना अनिवार्य किया गया है।

नोडल अधिकारी तैनात

PWD की आपदा प्रबंधन रणनीति को मजबूत बनाने के लिए प्रमुख अभियंता कार्यालय से अधीक्षण अभियंता विजय कुमार को विभागीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही डीएस हयांकी, प्रभारी मुख्य अभियंता को भी नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर भी ऐसे ही नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

जरूरत पड़ी तो ट्रालियों की व्यवस्था भी

शासनादेश में कहा गया है कि यदि किसी स्थान पर भारी मलबा या दुर्गम मार्गों के कारण सामान्य परिवहन बाधित होता है, तो वहां मोटराइज्ड ट्राली जैसी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

इस बीच उत्तरकाशी से आई खबर के अनुसार बादल फटने की घटना के बाद लापता सात श्रमिकों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। खराब मौसम राहत और बचाव कार्यों में बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

संथाल हूल की 170वीं वर्षगांठ पर नमन: आजादी की पहली जनक्रांति के शूरवीरों को श्रद्धांजलि

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रांची/साहेबगंज : आजादी की पहली जनक्रांति संथाल हूल की 170वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में वीर शहीद सिदो-कान्हू, चांद, भैरव और हज़ारों संथाल योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। 30 जून 1855 को झारखंड के संथाल परगना की पावन धरती पर अंग्रेजी हुकूमत और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ उठी इस क्रांति की ज्वाला ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

इस ऐतिहासिक जन विद्रोह का नेतृत्व किया था भगनाडीह गांव के भूमिहीन ग्राम प्रधान चुन्नी मांडी के चार बेटों  सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव ने। इन चारों भाइयों ने हजारों आदिवासियों को संगठित कर ब्रिटिश शासन और उसके दलाल जमींदारों-साहूकारों के खिलाफ ‘करो या मरो’ का उद्घोष किया। सिद्धू मुर्मू के आह्वान पर उठे आदिवासी वीरों ने तीर-कमान और लाठियों से लैस होकर उन्नत हथियारों से लैस अंग्रेजों की सेनाओं से लोहा लिया।

संथाल विद्रोह केवल एक हथियारबंद संघर्ष नहीं था, यह अपनी ज़मीन, संस्कृति, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा का संग्राम था। विद्रोहियों ने कई ज़मींदारों और महाजनों के अत्याचारों का अंत किया। अंग्रेज हुकूमत के दफ्तरों में तोड़फोड़ कर अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी।

यह लड़ाई कुछ ही महीनों तक चली लेकिन इसका असर इतना गहरा था कि इसे भारत का पहला संगठित स्वतंत्रता संग्राम माना गया। इस विद्रोह में लगभग 20 हज़ार संथाल आदिवासी शहीद हुए। इसने ही 1857 की क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार की।

संथाल समुदाय पर किए गए शोषण की दास्तान आज भी दिल दहला देती है, जमींदारों और महाजनों से जबरन वसूली, कर्ज़ के बदले ज़मीन की छीना-झपटी, बंधुआगिरी और उत्पीड़न। अंग्रेजों, ज़मींदारों और महाजनों के इस त्रिकोणीय गठजोड़ ने वनवासियों को हर मोर्चे पर कुचला।

आज जब हम संथाल हूल की 170वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, यह केवल एक इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि संथालों की उस चेतना को सलाम करना है जो अन्याय के खिलाफ खड़ी हुई। यह विद्रोह आज भी भारत के आदिवासी समुदायों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है।

स्वतंत्रता आंदोलन यादगार समिति के प्रतिनिधि प्रशांत सी बाजपेयी ने कहा, “हम वीर सिदो-कान्हू और उनके साथियों को नमन करते हैं। उनका संघर्ष हमें यह संकल्प देता है कि हम आज भी अपने हक और सम्मान की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेंगे। झारखंड की यह धरती आज भी हमें वह चेतना देती है जो हर शोषण और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सिखाती है। आज इस अवसर पर झारखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं, पद यात्राएं और स्मृति आयोजनों का आयोजन किया गया।