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श्री बदरीनाथ मंदिर सिंह द्वार पर फोटो खिंचवाने को लेकर विवाद का बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने लिया संज्ञान, होगी सख्त कार्रवाई

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देहरादून :  श्री बदरीनाथ मंदिर के सिंह द्वार पर फोटो खिंचवाने को लेकर हुए विवाद की गूंज सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलने के बाद, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा से खिलवाड़ करने वाले शरारती तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अध्यक्ष द्विवेदी ने कहा कि श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धामों में मंदिर परिसर के 50 मीटर दायरे में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और रील निर्माण पर पूर्णतः प्रतिबंध है। इस बाबत बीकेटीसी द्वारा स्पष्ट सूचनापट लगाए गए हैं और लाउडस्पीकरों के माध्यम से तीर्थयात्रियों को लगातार जागरूक किया जाता है।

सिंह द्वार की मर्यादा रखें

बीकेटीसी अध्यक्ष ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे श्री बदरीनाथ मंदिर के सिंह द्वार की सीढ़ियों पर खड़े होकर फोटो न खिंचवाएं। इसके बजाय मंदिर परिसर के सामने निर्धारित खुले स्थान में फोटो लेने की अनुमति है। उन्होंने कहा, “धाम की मर्यादा अक्षुण्ण रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे कृत्यों से आम जनमानस में गलत संदेश जाता है।

अध्यक्ष द्विवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं केवल मंदिर की गरिमा को आहत नहीं करतीं, बल्कि आस्था से जुड़े लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मंदिर परिसर में नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

आस्था का अपमान बर्दाश्त नहीं

बीकेटीसी की इस सख्ती को लेकर तीर्थ क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों और पुरोहित समाज ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर बढ़ते दिखावे और सोशल मीडिया के लिए किए जा रहे “स्टंट्स” पर रोक आवश्यक है।

टिहरी पुनर्वास परियोजना में बड़ा भूमि घोटाला उजागर, डीएम सविन बंसल की सख्त कार्रवाई

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देहरादून :  टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना के तहत एक चौंकाने वाला भूमि घोटाला सामने आया है। एक ही भूमि को दो बार बेचने और फर्जी तरीके से भूमिधरी दर्ज कराने के मामले में जिलाधिकारी सविन बंसल ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह प्रकरण शास्त्रीनगर तपोवन निवासी पीड़िता पुलमा देवी की शिकायत से सामने आया, जिन्होंने जून माह के द्वितीय जनता दर्शन में डीएम के समक्ष यह गंभीर मामला उठाया था। पुलमा देवी ने वर्ष 2007 में ग्राम फुलसनी में एक भूखंड क्रय किया था, जिसकी रजिस्ट्री और कब्जा प्रमाण पत्र दोनों उनके पास हैं। यह भूमि टिहरी बांध विस्थापितों के लिए निर्धारित आवासीय भूखंडों में से थी, जिसे मार्च 2007 में चन्दरू पुत्र अमरू को आवंटित किया गया था।

डीएम जांच में यह खुलासा हुआ कि चन्दरू ने 2007 में यह भूमि विभाग को बेच दी थी। लेकिन वर्ष 2019 में उसने दोबारा विभाग को गुमराह करते हुए उसी भूखंड को अपने नाम पुनः चढ़वा लिया। उप राजस्व अधिकारी (पुनर्वास), अवस्थापना खंड ऋषिकेश ने बिना तथ्यात्मक जांच किए यह भूमि दोबारा चन्दरू के नाम पर दर्ज करा दी। इसके बाद चन्दरू ने उसी भूमि को फिर से एक अन्य व्यक्ति को बेच दिया।

डीएम बंसल ने इसे गंभीर धोखाधड़ी करार देते हुए अधीक्षण अभियंता (टिहरी पुनर्वास) का वाहन जब्त करने और सभी विवरणों सहित तत्काल प्रस्तुत होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यदि सहयोग नहीं मिला, तो एसआईटी जांच की संस्तुति की जाएगी।

जिला प्रशासन ने इस मामले की अग्रेतर आपराधिक जांच की जिम्मेदारी एसडीएम मुख्यालय अपूर्वा को सौंपी है। डीएम ने कहा कि, “पुनर्वास के नाम पर विस्थापितों की पीड़ा और मजबूरी का जो दोहन किया गया है, उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक पुलमा देवी को न्याय नहीं मिलेगा, प्रशासन चैन से नहीं बैठेगा। गौरतलब है कि यह मामला मा. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) विकासनगर, देहरादून की अदालत में पुलमा देवी बनाम जतिन गोयल शीर्षक से विचाराधीन भी है।

क्या है मामला 

2007: चन्दरू को ग्राम फुलसनी में 200 वर्ग मीटर भूमि पुनर्वास के तहत आवंटित हुई।

2007: चन्दरू ने उक्त भूमि विभाग को विक्रय कर दी।

2019: चन्दरू ने पुनः उसी भूमि को अपने नाम चढ़वाया और फिर बेच दी।

2025: पुलमा देवी ने जनता दर्शन में शिकायत कर मामला डीएम तक पहुँचाया।

2025: डीएम की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश।

यह प्रकरण टिहरी पुनर्वास परियोजना में कार्यरत अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डीएम द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे पुनर्वास तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की एक ठोस शुरुआत मानी जा रही है।

बागेश्वर धाम में हादसा: टेंट गिरने से एक श्रद्धालु की मौत, 10 घायल

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छतरपुर (मध्य प्रदेश)। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम में गुरुवार सुबह आरती के दौरान बड़ा हादसा हो गया। तेज़ हवा और संभवतः निर्माण खामी के चलते एक भारी टेंट गिर पड़ा, जिससे मौके पर एक श्रद्धालु की मौत हो गई और करीब 10 लोग घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल होने धाम परिसर में एकत्र हुए थे। उसी दौरान एक विशाल टेंट अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

श्याम लाल कौशल (उम्र 50 वर्ष), जो कि उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के मूल निवासी थे और वर्तमान में अयोध्या में रह रहे थे, इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। लोहे की रोड से सिर में चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन, पुलिस और धाम प्रबंधन समिति ने राहत व बचाव कार्य शुरू किया। एम्बुलेंस और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित किया गया। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

यह हादसा उस समय हुआ जब बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के जन्मोत्सव (4 जुलाई) और गुरु पूर्णिमा (21 जुलाई) को लेकर विशेष धार्मिक आयोजनों की तैयारियां ज़ोरों पर थीं। धाम परिसर को सजाया जा रहा था और देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं।

1 से 3 जुलाई तक बालाजी का दिव्य दरबार और 4 जुलाई को जन्मोत्सव का आयोजन प्रस्तावित है। 7 और 8 जुलाई को गुरुदीक्षा महोत्सव में हजारों शिष्यों को गुरुमंत्र देकर दीक्षित किया जाएगा। धाम जनसेवा समिति के अनुसार, 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पहले से सतर्क था, लेकिन इस हादसे ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छतरपुर प्रशासन ने आयोजन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की पुनः समीक्षा के निर्देश दिए हैं। धाम परिसर में टेंट, साउंड और भीड़ नियंत्रण के इंतजामों को लेकर नई रूपरेखा बनाई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने आयोजकों से संरचनात्मक सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की अपील की है ताकि आगे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उत्तराखंड में बारिश का यलो अलर्ट जारी, पांच दिन तक बना रहेगा मौसम का मिजाज

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देहरादून। प्रदेश के चार जिलों  देहरादून, टिहरी, नैनीताल और चंपावत में मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में बिजली चमकने और तेज बौछारों के साथ बारिश के कई दौर देखने को मिल सकते हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इन जिलों के अधिकांश क्षेत्रों में अगले पांच दिनों तक रुक-रुक कर वर्षा होने की संभावना है। मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल ने बताया कि विशेषकर पर्वतीय इलाकों में कहीं-कहीं तेज बारिश के हालात बन सकते हैं।

देहरादून शहर में भी अगले कुछ दिनों तक मूसलधार बारिश की चेतावनी दी गई है। बृहस्पतिवार को गर्जन के साथ एक से अधिक दौर की वर्षा हो सकती है। उन्होंने कहा कि मानसून की सक्रियता के चलते लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर नदी-नालों के किनारे रहने वाले और पहाड़ी मार्गों पर यात्रा कर रहे लोगों को।

प्रशासन ने भी जनता से अपील की है कि आवश्यक सतर्कता बरतें और मौसम की ताज़ा जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन या मौसम विभाग की वेबसाइट से संपर्क बनाए रखें।

  • पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका से सावधानी बरतें।

  • निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।

  • बिजली चमकने के दौरान खुले में न रहें।

सोनप्रयाग में सुरक्षित निकाले गए 40 तीर्थयात्री, यमुनोत्री हाईवे खोलने का काम जारी

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रुद्रप्रयाग/उत्तरकाशी। राज्य में लगातार हो रही बारिश ने चारधाम यात्रा को एक बार फिर बाधित कर दिया है। रुद्रप्रयाग जिले में श्री केदारनाथ धाम से लौट रहे श्रद्धालु देर रात सोनप्रयाग के पास अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आ गए। रात करीब 10 बजे भूस्खलन के कारण रास्ता बंद हो गया और लगभग 40 तीर्थयात्री मलबे में फंस गए। सूचना मिलते ही SDRF की टीम मौके पर पहुंची और रातभर रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया। तीर्थयात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा देने के साथ सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।

इधर, यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के पास बादल फटने की घटना के बाद राहत कार्य लगातार चौथे दिन भी जारी है। इस मार्ग पर अभी भी वाहनों की आवाजाही ठप है, हालांकि पैदल आवाजाही धीरे-धीरे शुरू कर दी गई है। बुधवार को स्यानाचट्टी और जानकीचट्टी के बीच फंसे करीब 254 यात्रियों को प्रशासन ने रेस्क्यू कर बड़कोट पहुंचाया। लापता सात लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ की टीम स्निफर डॉग्स की मदद से खोज अभियान चला रही है।

सिलाई बैंड के पास भूस्खलन और ओजरी क्षेत्र में उफनते नालों ने करीब 20 से 25 मीटर सड़क को बहा दिया है, जिससे यमुनोत्री हाईवे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। एनएच विभाग सड़क की मरम्मत में जुटा है, लेकिन ओजरी के पास हार्ड रॉक के कारण मशीनों को कठिनाई हो रही है।

डीएम प्रशांत आर्य ने जानकारी दी कि प्रशासन की पूरी टीम मार्ग बहाली और यात्रियों की सहायता में लगी है। जल्द ही वाहनों की आवाजाही बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही कुपड़ा मोटर मार्ग पर भी छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू करने की योजना है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने विभिन्न स्थानों पर यात्रियों के लिए भोजन और राहत शिविरों की व्यवस्था की है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और आईटीबीपी मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर चला रहे हैं।

उत्तराखंड : कर्णप्रयाग में फिर भूस्खलन, मकान में घुसा मलबा, हाईवे बंद

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चमोली/कर्णप्रयाग। उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक बार फिर पहाड़ी दरक गई। कर्णप्रयाग-उमटा के पास हुए इस ताजा भूस्खलन में मलबा एक मकान में जा घुसा। गनीमत रही कि समय रहते घर में मौजूद लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया।

भारी मलबा और बोल्डर गिरने से बदरीनाथ हाईवे का यह हिस्सा पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। मलबा हटाने का काम जारी है, लेकिन भारी बारिश और लगातार गिरते पत्थरों के कारण राहत और पुनः मार्ग खोलने के प्रयासों में बाधा आ रही है।

स्थानीय प्रशासन ने जानकारी दी कि मकान में फंसे लोगों को बमुश्किल बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। राहत टीमें मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इसी स्थान पर रविवार को भी एक बड़ा भूस्खलन हुआ था, जब भारी मात्रा में मलबा और एक विशाल बोल्डर हाईवे पर आ गिरा था। उस दौरान वहां से गुजर रहे कई लोग बाल-बाल बच गए थे।

इसके अतिरिक्त, कर्णप्रयाग-नेनीसैंण मोटर मार्ग पर आईटीआई से करीब 500 मीटर आगे पहाड़ी से चट्टान टूटकर गिर गई थी, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया। इस कारण कपीरीपट्टी क्षेत्र के ग्रामीणों को डिम्मर और सिमली होते हुए लंबा रास्ता तय कर कर्णप्रयाग पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सतर्क रहें।

कांग्रेस का हमला : कांवड़ यात्रा पर सरकार का फरमान सुप्रीम कोर्ट की अवमानना – सूर्यकांत धस्माना

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देहरादून: प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कांवड़ यात्रा को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया है। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर दुकानदारों के लिए नाम पटिका, लाइसेंस और पहचान पत्र अनिवार्य करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि धार्मिक ध्रुवीकरण की एक और कोशिश है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए धस्माना ने कहा कि इसी तरह का आदेश पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लागू किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया था। ऐसे में उत्तराखंड सरकार का यह फैसला न्यायालय के आदेशों की सीधी अवहेलना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई और बिगड़ी कानून व्यवस्था से जनता का ध्यान भटकाने के लिए धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है। धस्माना ने कहा, “जिस तरह होली और ईद एक साथ आने पर भाजपा ने धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश की थी, लेकिन देश की जनता ने समझदारी दिखाते हुए इन त्योहारों को शांति और भाईचारे के साथ मनाया, ठीक उसी तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा पारंपरिक रूप से शांतिपूर्वक संपन्न होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि कांवड़ रूट पर मुस्लिम बहुल इलाकों में हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं का स्वागत और सेवा होगी। साथ ही, उन्होंने जनता से अपील की कि भाजपा के “ध्रुवीकरण के मंसूबों” को नाकाम किया जाए।

अमेरिका का बड़ा कदम: रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव, भारत पर पड़ सकता है असर

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वॉशिंगटन/नई दिल्ली : रूस-यूक्रेन युद्ध के तीसरे साल में प्रवेश के साथ अमेरिका ने रूस से व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है, जो रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500 फीसदी तक का टैरिफ (शुल्क) लगाने की सिफारिश करता है। इस कदम से भारत जैसे देशों के लिए चिंता की लकीरें खिंच गई हैं, जो रूस से बड़े पैमाने पर सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं।

सीनेटर ग्राहम ने पेश किया विधेयक

यह विधेयक अमेरिका के प्रभावशाली सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा प्रस्तुत किया गया है। ग्राहम ने बताया कि इस प्रस्ताव को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने विधेयक को जुलाई की छुट्टियों के बाद वोटिंग के लिए लाने की हरी झंडी दे दी है।

ग्राहम ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा, “हम ट्रंप को एक ऐसा हथियार देना चाहते हैं, जो उनके पास फिलहाल नहीं है।” बिल का उद्देश्य रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन मसले पर बातचीत की मेज तक लाना है।

बिल में क्या है?

इस प्रस्तावित विधेयक के तहत रूस से तेल व अन्य वस्तुएं खरीदने वाले देशों पर उच्च आयात शुल्क लगाने की बात कही गई है। विशेष रूप से भारत और चीन को निशाने पर रखा गया है, जो ग्राहक के रूस के लगभग 70% तेल आयात के लिए जिम्मेदार हैं। बिल में यह भी उल्लेख है कि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप (यदि वे पुनः निर्वाचित होते हैं) के पास रहेगा वे चाहें तो इस कानून को लागू करें या वीटो कर दें।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के आरंभिक चरण से ही रूस से सस्ती दरों पर तेल खरीदना शुरू कर दिया था। भारत और रूस के बीच डॉलर की बजाय रूपया-रूबल प्रणाली में लेन-देन होने लगा। इसके चलते, भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1% से बढ़कर 40-44% तक पहुंच गई।

हाल ही में भारत ने 2–2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल रूस से आयात करने की योजना बनाई है, जो अब तक का सबसे अधिक है। ऐसे में अगर अमेरिकी सीनेट का यह विधेयक पारित होता है और 500% टैरिफ लागू किया जाता है, तो भारत के लिए अमेरिका में निर्यात करना महंगा और कठिन हो जाएगा। इससे भारत के आर्थिक व व्यापारिक हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच एक संभावित व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जो टैरिफ को कम करने में सहायक हो सकता है, लेकिन वर्तमान स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

रूस की तीखी प्रतिक्रिया

रूस ने इस प्रस्ताव को लेकर तीखी आपत्ति जताई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि “सीनेटर ग्राहम रूस-विरोधी मानसिकता के झंडाबरदार हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर उनकी मर्जी चलती, तो अब तक ऐसे तमाम प्रतिबंध पहले ही लागू हो चुके होते। पेसकोव ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार के आर्थिक प्रतिबंध वाकई में यूक्रेन संकट के समाधान में मददगार साबित होंगे, या फिर ये केवल भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ाएंगे।

उत्तराखंड कैबिनेट की बड़ी घोषणा: कोकून की एमएसपी में बढ़ोतरी, किसानों को मिलेगा लाभ

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक में रेशम विभाग द्वारा कोकून (रेशम कीट) की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर प्रस्तुत प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इस फैसले से राज्य के रेशम उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा।

हर ग्रेड की कीमत में हुई वृद्धि

नए फैसले के तहत उच्च गुणवत्ता वाले ‘ए ग्रेड’ कोकून की कीमत 400 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 440 रुपये प्रति किलो कर दी गई है। इसके अलावा अन्य ग्रेड की नई दरें इस प्रकार तय की गई हैं:

बी ग्रेड: ₹370 से बढ़ाकर ₹395 प्रति किलो

सी ग्रेड: ₹280 से बढ़ाकर ₹290 प्रति किलो

डी ग्रेड: ₹230 से बढ़ाकर ₹240 प्रति किलो

राज्य में बढ़ेगा रेशम उत्पादन

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने जानकारी दी कि इस वर्ष कैबिनेट में केवल एक प्रस्ताव पारित हुआ, जो रेशम विभाग की ओर से लाया गया था। उन्होंने कहा, “हर वर्ष कोकून की MSP तय की जाती है। इस साल भी उसमें इजाफा किया गया है, जिससे प्रदेश में सिल्क उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।”

वर्तमान में देहरादून और बागेश्वर जिले प्रमुख रूप से कोकून उत्पादन में सक्रिय हैं। सरकार का लक्ष्य इस प्रोत्साहन नीति के ज़रिए अन्य जिलों में भी रेशम उत्पादन को बढ़ावा देना है।

उत्तराखंड की सिल्क को देशभर में पहचान

मंत्री जोशी ने यह भी बताया कि उत्तराखंड में उत्पादित कोकून से बनी सिल्क की साड़ियों की मांग न सिर्फ राज्य के भीतर, बल्कि देशभर में बढ़ी है। विभिन्न राज्यों में आयोजित एक्सपो और प्रदर्शनियों में उत्तराखंड की सिल्क साड़ियों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, जिससे राज्य का रेशम उद्योग आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है।

कोकून बीज की आपूर्ति समय पर

राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों को कोकून का बीज समय पर और पर्याप्त मात्रा में मिले। मंत्री ने कहा कि अब तक ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है कि किसानों को बीज समय पर नहीं मिला हो।

टिहरी में कांवड़ यात्रियों से भरा ट्रक पलटा, तीन की मौत, 16 घायल

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टिहरी: टिहरी जिले में ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। जाजल और फकोट के बीच एक ट्रक, जिसमें 19 कांवड़ यात्री सवार थे, अनियंत्रित होकर खाई में पलट गया। इस हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हुए हैं। मृतकों में एक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य ट्रक के नीचे दबे मिले।

उत्तराखंड में सावन महीने के दौरान चल रही कांवड़ यात्रा में यह हादसा सुबह उस वक्त हुआ जब कांवड़ यात्री ऋषिकेश से गंगोत्री की ओर बढ़ रहे थे। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया कि गंभीर रूप से घायल चार यात्रियों को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है। वहीं, आठ घायलों का इलाज नरेंद्रनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है और एक घायल को फकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। 108 एम्बुलेंस सेवा की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। जिलाधिकारी टिहरी ने बताया कि ट्रक खाड़ी से करीब दो किलोमीटर आगे अनियंत्रित होकर पलटा।

मुख्यमंत्री का निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा शोक जताया है और जिला प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि घायलों को हर हाल में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।