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उत्तराखंड: नाबालिग की संदिग्ध मौत से मचा बवाल, पुलिस पर पथराव

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देहरादून: सुसवा नदी किनारे संचालित एक स्क्रीनिंग प्लांट में नाबालिग लड़की की संदिग्ध हालत में मौत के बाद ऋषिकेश के डोईवाला क्षेत्र में रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। कोतवाली घेराव और डोईवाला चौक पर जाम के बाद जब स्थिति बिगड़ गई। इस दौरान लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसमें पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। इसके बाद पुलिस को बल-प्रयोग करना पड़ा।

क्या है मामला?

शनिवार सुबह कुड़कावाला क्षेत्र स्थित सुसवा नदी किनारे कूड़ा बीनने गई 4-5 किशोरियों में से एक लड़की स्क्रीनिंग प्लांट में मृत अवस्था में मिली। बताया गया कि कर्मचारियों ने किशोरियों को वहां देखकर डराया, जिससे कुछ तो भाग निकलीं, लेकिन एक किशोरी को कमरे में बंद कर दिया गया। कुछ देर बाद, वही किशोरी मृत मिली।

जांच पर सवाल

घटना की खबर फैलते ही केशवपुरी बस्ती में आक्रोश भड़क उठा। स्थानीय लोग और संगठनों के कार्यकर्ता कोतवाली पहुंचे, निष्पक्ष जांच की मांग की और स्क्रीनिंग प्लांट को तत्काल सील करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाज़ी की। कोतवाली के बाहर माहौल गर्म हो गया।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने चूड़ियां फेंक कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी बढ़ गई। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।

मौके पर पहुंचे विधायक

घटना के बाद क्षेत्रीय विधायक बृजभूषण गैरोला कोतवाली पहुंचे और अधिकारियों से पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। वहीं, एसडीएम अपर्णा डोंडियाल, सीओ संदीप नेगी सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर तैनात रही।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025: प्रदेशभर में 63,812 उम्मीदवारों ने कराया नामांकन

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देहरादून : उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन–2025 की नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से 5 जुलाई को सम्पन्न हो गई। नामांकन प्रक्रिया 2 जुलाई से प्रारंभ होकर कुल चार दिन चली। इस दौरान प्रदेश के समस्त जनपदों (हरिद्वार को छोड़कर) में कुल 63,812 नामांकन पत्र प्राप्त हुए, जो ग्रामीण लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और उत्साह का प्रतीक है।

नामांकन के अंतिम दिन 5 जुलाई को 31,622 उम्मीदवारों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए। अंतिम दिन विकासखंडों में नामांकन स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ी। निर्वाचन आयोग ने सभी चरणों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारी की थी।

प्राप्त नामांकन पत्रों का पदवार विवरण

1. सदस्य, जिला पंचायत: 358 पदों के लिए कुल 1,907 नामांकन पत्र प्राप्त हुए।

2. सदस्य, क्षेत्र पंचायत: 2,974 पदों के लिए 11,629 नामांकन पत्र दाखिल किए गए।

3. प्रधान, ग्राम पंचायत: 7,499 पदों के लिए 22,028 नामांकन पत्र दाखिल हुए।

4. सदस्य, ग्राम पंचायत: 55,587 पदों के लिए 28,248 नामांकन पत्र प्राप्त हुए।

अब निर्वाचन प्रक्रिया के अगले चरण में नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। यह कार्य 9 जुलाई 2025 तक पूर्ण किया जाएगा। उसके बाद 11 जुलाई 2025 को नाम वापसी की प्रक्रिया होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग ने पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। आयोग ने सभी मतदाताओं से स्वतंत्र रूप से मतदान में भाग लेने की अपील की है।

UGC NET परीक्षा की प्रोविजनल उत्तर कुंजी जारी, 8 जुलाई तक दर्ज करा सकेंगे आपत्ति

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नई दिल्ली : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी नेट जून 2025 परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। यह परीक्षा देशभर में 25 से 29 जून 2025 तक आयोजित की गई थी। अब परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in पर जाकर उत्तर कुंजी देख सकते हैं और डाउनलोड कर सकते हैं। उम्मीदवार अपनी लॉगिन डिटेल एप्लिकेशन नंबर, जन्म तिथि और सिक्योरिटी पिन के माध्यम से पोर्टल पर लॉग इन करके आंसर की तक पहुंच सकते हैं। एनटीए ने आंसर की के साथ आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

8 जुलाई शाम 5 बजे तक दर्ज कर सकेंगे आपत्ति

अगर कोई अभ्यर्थी किसी प्रश्न के उत्तर से असहमत है, तो वह 8 जुलाई 2025 शाम 5 बजे तक उस पर आपत्ति दर्ज करा सकता है। हर प्रश्न पर आपत्ति के लिए 200 शुल्क निर्धारित किया गया है। बिना शुल्क जमा किए गए ऑब्जेक्शन पर विचार नहीं किया जाएगा। एनटीए द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति आपत्तियों की समीक्षा करेगी और उनके आधार पर अंतिम उत्तर कुंजी (Final Answer Key) तैयार की जाएगी।

फाइनल आंसर की के आधार पर घोषित होगा परिणाम

यूजीसी नेट जून 2025 का परिणाम फाइनल आंसर की के आधार पर तैयार किया जाएगा। एनटीए ने संकेत दिए हैं कि परिणाम इसी माह घोषित कर दिए जाएंगे।

उत्तर कुंजी डाउनलोड करने की प्रक्रिया

  1. एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in पर जाएं।

  2. होम पेज पर “UGC NET June 2025: Click Here to Answer Key Challenge” लिंक पर क्लिक करें।

  3. एप्लीकेशन नंबर, जन्म तिथि और सिक्योरिटी पिन दर्ज कर लॉग इन करें।

  4. स्क्रीन पर ओपन हुई उत्तर कुंजी को डाउनलोड कर अपने उत्तरों का मिलान करें।

उत्तराखंड में फिर तेज़ होगा मानसून: 67 सड़कें बंद, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट

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देहरादून: उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आज यानी 6 जुलाई को रुद्रप्रयाग, टिहरी, बागेश्वर और देहरादून जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा अन्य जिलों में तेज बारिश का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।

बारिश के चलते प्रदेश भर में भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यमुनोत्री हाईवे सहित कुल 67 सड़कें बंद हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ये सड़कें हैं बंद

रुद्रप्रयाग: 4 ग्रामीण सड़कें बंद

उत्तरकाशी: 1 राष्ट्रीय राजमार्ग व 11 ग्रामीण सड़कें बाधित

चमोली: 1 राज्य मार्ग समेत 21 ग्रामीण सड़कें बंद

बागेश्वर: 11 ग्रामीण सड़कों पर मलबा जमा

पिथौरागढ़: 6 ग्रामीण सड़कें बाधित

अल्मोड़ा: 1 राजमार्ग और 1 ग्रामीण सड़क बंद

नैनीताल: 2 ग्रामीण सड़कें बंद

पौड़ी गढ़वाल: 3 ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही ठप

देहरादून: 2 ग्रामीण मार्ग बंद

टिहरी गढ़वाल: 3 ग्रामीण सड़कों पर यातायात अवरुद्ध

राज्य मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटे संवेदनशील हैं। रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, टिहरी और देहरादून जैसे जिलों में भारी बारिश के साथ मलबा गिरने और नदी-नालों के उफान पर आने की पूरी संभावना है। लोगों को यात्रा करने से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

स्थानीय प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही यात्रियों और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने और अपडेटेड मौसम बुलेटिन पर ध्यान देने की अपील की गई है।

सोशल मीडिया की ताकत, पंचायत चुनाव प्रचार में नया हथियार

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उत्तराखंड की पहाड़ियों से लेकर मैदानी इलाकों तक, पंचायत चुनाव की गहमागहमी चरम पर है। नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और अब मुकाबला सीधे-सीधे जनता के बीच में है। एक ओर कुछ ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्विरोध चुने जा चुके हैं, तो दूसरी ओर अधिकांश सीटों पर घमासान चुनावी जंग जारी है। इस बार एक बात जो खास तौर पर सामने आई है, वह है – सोशल मीडिया की निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका।

चौपाल से वर्चुअल चौपाल तक का सफर

एक दौर था जब गांव की चौपाल चुनावी रणनीति का केंद्र होती थी, लेकिन अब मोबाइल की स्क्रीन ही नई चौपाल बन चुकी है। गांव के युवा हों या प्रवासी मतदाता, हर कोई फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर चुनावी गतिविधियों से जुड़ा है। प्रत्याशी भी इस बदलाव को पहचान चुके हैं और अब वो ‘डिजिटल चौपाल’ में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

पोल और प्रचार रणनीति 

पंचायत चुनावों में इस बार सोशल मीडिया पोल ने ज़बरदस्त दस्तक दी है। प्रत्याशी अपने समर्थन में सोशल मीडिया पर पोल करा रहे हैं, और फिर उसके स्क्रीनशॉट या लिंक को गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप्स में ये पोल खूब वायरल हो रहे हैं। कई बार तो ये पोल वास्तविक जनभावनाओं को दर्शाने के बजाय एक प्रचार उपकरण के रूप में ही सामने आते हैं – जैसे मानो एक भावनात्मक दबाव बनाने की कोशिश। लेकिन, सवाल यह है कि क्या ये पोल जनमत को प्रभावित करते हैं या बस चर्चा का मुद्दा बनते हैं?

रील और वीडियो

आज के दौर में ग्राम प्रधान उम्मीदवार भी खुद को किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं समझते। रील्स, वीडियो मैसेज, डायलॉग और स्लोगन – हर चीज़ को एक ब्रांडिंग टूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। खासतौर पर युवा प्रत्याशी इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रचनात्मकता के साथ अपनी पहचान गढ़ रहे हैं। कई उम्मीदवारों ने “हम भी बदलेंगे गांव की तकदीर”, “नया चेहरा, नई सोच” जैसे नारों को सोशल मीडिया पर ट्रेंड बना दिया है।

सोशल मीडिया से सीधा संवाद

गांवों से बाहर रहने वाले हजारों प्रवासी मतदाता जो मतदान के दिन गांव नहीं आ सकते, उनके लिए सोशल मीडिया एक सीधा संवाद माध्यम बनकर उभरा है। प्रत्याशी उन्हें वीडियो कॉल, मैसेज या पोस्ट के ज़रिए जोड़ रहे हैं। यह तरीका न केवल जुड़ाव बढ़ा रहा है, बल्कि समर्थन जुटाने में भी मददगार हो रहा है।

सार्थक या सतही?

जहां एक ओर सोशल मीडिया ने प्रचार को आसान और व्यापक बना दिया है, वहीं यह भी सत्य है कि यह सतही और भावनात्मक प्रचार का माध्यम भी बन सकता है। गांव के बुजुर्ग और तकनीक से दूर मतदाता आज भी सीधे संपर्क को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में केवल सोशल मीडिया पर निर्भर रहना कई बार भ्रम पैदा कर सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर झूठी सूचनाओं, अफवाहों और फर्जी प्रोमोशन्स का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका भी ज़रूरी हो जाती है कि वे इस डिजिटल प्रचार पर निगरानी बनाए रखें।

मुख्य प्रचार हथियार

पंचायत चुनावों में सोशल मीडिया की भूमिका अब केवल एक पूरक साधन नहीं रही, बल्कि यह मुख्य प्रचार हथियार बन चुकी है। हर घर में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच ने इसे संभव बनाया है। लेकिन, यह देखना बाकी है कि क्या ये डिजिटल प्रयास वास्तविक वोटों में बदल पाएंगे या नहीं। चुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि रील्स असली बदलाव की वजह बन पाई या नहीं।

जालेन्दरी गाड़ में बहे दो बकरी पालक, खोजबीन के लिए संयुक्त टीम रवाना 

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उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। दिनांक 5 जुलाई को डेल्टा संचार प्रणाली के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि भटवाड़ी तहसील क्षेत्रान्तर्गत क्यारकोटी के पास जालेन्दरी गाड़ में दो बकरी पालक बह गए हैं। ये हादसा हर्षिल से लगभग 14-15 किलोमीटर दूर स्थित दुर्गम पैदल मार्ग पर हुआ, जहां हिमाचल, टिहरी, झाला और बगोरी क्षेत्र के सयुक्त बकरी पालक अपने जानवरों को चराने ले गए थे।

जैसे ही यह सूचना मिली, जिला आपदा प्रबंधन (DEOC) द्वारा संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर तत्काल खोज-बचाव के लिए संयुक्त राहत दल रवाना किया गया। यह टीम आज 6 जुलाई की सुबह 6:30 बजे हर्षिल थाना से क्यारकोटी की ओर कूच कर चुकी है। राहत कार्य को सुगम बनाने के लिए 2 खच्चर और 2 पोर्टर भी टीम के साथ भेजे गए हैं।

हादसे के कारणों और बहने वाले बकरी पालकों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन द्वारा लगातार राहत कार्यों पर नजर रखी जा रही है। क्षेत्र की दुर्गमता और मौसम की चुनौतियों के बावजूद राहत दल मौके तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

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टनकपुर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को टनकपुर स्थित पर्यटन आवास गृह से कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यात्रियों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े स्मृति चिह्न भेंट किए।

मुख्यमंत्री ने 11 राज्यों से आए सभी श्रद्धालुओं से संवाद कर उनका देवभूमि उत्तराखंड में हार्दिक स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक जागरण का मार्ग है। उन्होंने कहा श्रद्धालु इस अद्वितीय यात्रा के सहभागी बनकर केवल यात्रा नहीं, बल्कि समर्पण की अनुभूति लेकर जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पवित्र धरती के कण-कण में भगवान शिव का वास है। यह यात्रा अब केवल भौगोलिक मार्ग नहीं रही, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से यह सीमाओं को लांघते हुए शिव से साक्षात्कार का सशक्त माध्यम बन गई है। पहले जिस यात्रा में सात दिन या उससे अधिक का समय लगता था, अब वह कुछ ही घंटों में संभव हो सकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार इस यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। प्रत्येक पड़ाव पर स्वास्थ्य, आवास, भोजन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुदृढ़ की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ से सभी यात्रियों की सफल, मंगलमय और सुरक्षित यात्रा की कामना की।

इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने चम्पावत वासियों के आत्मीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया और यात्रा को स्मरणीय व सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की। इस दौरान आयुक्त कुमाऊं मंडल दीपक रावत, आईजी आईटीबीपी और जन सम्पर्क अधिकारी कैलाश मानसरोवर यात्रा संजय गुंजियाल, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं मंडल रिद्धिम अग्रवाल,प्रबंध निदेशक कुमाऊं मंडल विकास निगम विनीत तोमर, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ विनोद गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक चम्पावत अजय गणपति मौजूद थे।

20 साल बाद ठाकरे बंधुओं की ‘मराठी अस्मिता’ पर एकजुटता, हिंदी थोपने के फैसले के खिलाफ साझा मंच से हुंकार

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार, 5 जुलाई का दिन ऐतिहासिक बन गया। करीब दो दशकों के लंबे राजनीतिक वैचारिक फासले के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहली बार एक मंच पर साथ नजर आए। मौका था हिंदी को जबरन थोपे जाने की सरकारी नीति के खिलाफ वर्ली स्थित डोम इलाके में आयोजित “मराठी विजय रैली” का, जिसमें दोनों ठाकरे बंधुओं ने मिलकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी।

यह रैली शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई। मंच से दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्हें हिंदी से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी भी भाषा को जबरदस्ती थोपना मराठी अस्मिता और संविधान के खिलाफ है।

“जो बाला साहब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखाया” – राज ठाकरे

रैली को संबोधित करते हुए एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने तीखा व्यंग्य करते हुए कहा की “20 साल बाद हम दोनों एक साथ आए हैं। जो बाला साहब ठाकरे नहीं कर पाए, वह देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया। उन्होंने हमें एक कर दिया। राज ठाकरे ने सरकार की त्रिभाषा नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि महाराष्ट्र पर कोई भाषा नहीं थोपी जा सकती। हमें हिंदी से कोई शिकायत नहीं, लेकिन जब मराठा साम्राज्य ने देश के कई हिस्सों पर शासन किया, तब भी मराठी किसी पर नहीं थोपी गई। राज ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अब विरोध नहीं हुआ, तो भविष्य में “मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश” को अंजाम देने की कोशिश की जाएगी।

राज्यव्यापी प्रतिक्रिया और आदेश वापसी

रैली के दबाव और सार्वजनिक प्रतिक्रिया को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विवादास्पद आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें कुछ संस्थानों में हिंदी को अनिवार्य करने की बात कही गई थी।

उद्धव ठाकरे: “यह मराठी आत्मसम्मान की लड़ाई है”

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंच से कहा कि मराठी भाषा, संस्कृति और पहचान पर जब भी संकट आया है, महाराष्ट्र एकजुट होकर उसका सामना करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भाषा की बात नहीं, बल्कि हमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

रैली को लेकर बीजेपी नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद नारायण राणे ने आरोप लगाया कि ठाकरे भाइयों की नजर आगामी नगर निगम चुनावों पर है और यह रैली एक चुनावी स्टंट है।

हालांकि, मनसे नेता शालिनी ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यह रैली पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका एकमात्र उद्देश्य महाराष्ट्र और मराठी भाषा की रक्षा है। इस रैली के पीछे कोई चुनावी एजेंडा नहीं है। हमारा एजेंडा सिर्फ महाराष्ट्र और उसकी अस्मिता है।”

‘मराठी महोत्सव’ बना मंच

वर्ली की यह ऐतिहासिक सभा एक तरह से मराठी अस्मिता का महोत्सव बन गई। राज्यभर में बड़ी-बड़ी स्क्रीन के जरिए इसका सीधा प्रसारण किया गया। सभा में कई मराठी लेखक, कलाकार, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

शिवसेना-यूबीटी की प्रतिक्रिया: ऐतिहासिक क्षण

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस मौके को “त्योहार” की संज्ञा दी और कहा कि ठाकरे भाइयों का एक मंच पर आना हर मराठी मानुष के लिए गर्व की बात है। वहीं सांसद अरविंद सावंत ने इसे “देश की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुटता की मिसाल” बताया।

बिजली बिल में प्रति यूनिट 81 पैसे की छूट, UPCL लौटाएगा 112 करोड़ रुपये

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देहरादून। प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को अगले महीने बिजली के बिल में बड़ी राहत मिलने जा रही है। उत्तराखंड पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) के तहत प्रति यूनिट 81 पैसे तक की छूट देने का ऐलान किया है। इस राहत के तहत उपभोक्ताओं को कुल 112 करोड़ रुपये लौटाए जाएंगे।

यूपीसीएल हर माह बिजली की खरीद की लागत के अनुसार उपभोक्ताओं से वसूली करता है। नियामक आयोग द्वारा तय दरों से अगर ज्यादा कीमत पर बिजली खरीदी जाती है, तो उपभोक्ताओं से उतनी राशि वसूली जाती है। वहीं जब बिजली की खरीद लागत कम होती है, तो FPPCA के प्रावधान के तहत उपभोक्ताओं को उसी अनुपात में राहत दी जाती है।

इस बार बिजली की खरीद दर में गिरावट के चलते उपभोक्ताओं को यह फायदा दिया जा रहा है। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने बताया कि जुलाई माह में उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट अधिकतम 81 पैसे की छूट दी जाएगी, जिससे कुल 112 करोड़ रुपये की राहत सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में परिलक्षित होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले मई माह में भी उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 89 पैसे तक की छूट दी गई थी। यह लगातार दूसरा मौका है जब यूपीसीएल ने बिजली की कम खरीद लागत का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को दिया है।

बिजली उपभोक्ताओं को इस निर्णय से निश्चित ही आर्थिक राहत मिलेगी, खासतौर पर ऐसे समय में जब महंगाई से आम जनजीवन प्रभावित है। यूपीसीएल का यह कदम उपभोक्ता हितों की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अमरनाथ यात्रियों की बसों की टक्कर, 36 श्रद्धालु घायल

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रामबन : जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में शनिवार को अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़ा हादसा टल गया। जम्मू से पहलगाम बेस कैंप की ओर जा रहे तीर्थयात्रियों के काफिले में शामिल पाँच बसों की चंद्रकोट के पास टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में कम से कम 36 श्रद्धालु घायल हो गए हैं, हालांकि सभी को मामूली चोटें आई हैं।

प्रशासन के अनुसार हादसा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंद्रकोट लंगर स्थल के पास हुआ, जहां एक बस के ब्रेक फेल हो जाने से वह आगे चल रही चार अन्य बसों से टकरा गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और मेडिकल टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

रामबन के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद अलयास खान ने जानकारी देते हुए बताया, “हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ है। सभी 36 घायल तीर्थयात्रियों को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है।

प्रशासन ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक वाहनों की व्यवस्था कर दी है ताकि यात्रा बाधित न हो। हादसे के बाद थोड़ी देर के लिए हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

गौरतलब है कि इस समय अमरनाथ यात्रा पूरे जोर पर है और प्रशासन द्वारा सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बावजूद इसके, इस प्रकार की घटनाएं यात्रा की चुनौतियों को रेखांकित करती हैं।